बेलपत्र के प्रयोग
बेलपत्र की कहानी :- स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती मंदराचल पर्वत पर भ्रमण कर रहीं थीं । तभी उनके शरीर से उनके पसीने की एक बूंद मंदराचल पर्वत पर गिर गई और पसीने की उसी एक बूंद से बेलपत्र के वृक्ष का जन्म हुआ। इस प्रकार पुराग्रंथों में ऐसा वर्णन मिलता है कि माता पार्वती के पसीने से बेल के वृक्ष का उद्भव हुआ। अत: इसमें माता पार्वती के सभी रूप समाए हुए हैं। एक अन्य कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव पार्वती के साथ हिमालय पर्वत पर विराजमान थे तभी वहां घूमते-फिरते नारद जी पहुंच गए और उन्होंने भगवान भोलेनाथ से एक प्रश्न कर दिया। नारद जी ने एक बार भोलेनाथ की स्तुति कर पूछा – " प्रभु ! आपको प्रसन्न करने के लिए सबसे उत्तम और सुलभ साधन क्या है ? हे त्रिलोकीनाथ ! आप तो निर्विकार और निष्काम हैं। आप सहज ही प्रसन्न हो जाते हैं। फिर भी मेरी जानने की इच्छा है कि आपको क्या प्रिय है ?" शिवजी बोले, " हे नारदजी ! वैसे तो मुझे भक्त के भाव सबसे प्रिय हैं, फिर भी जब आपने पूछा है तो बताता हूं कि मुझे जल के साथ-साथ बिल्वपत्र अर्थात बेलपत्र बहुत प्रिय है। जो अखंड बेलपत्र मुझे ...