11001. शिव शंकर (पुस्तक)
1. शिव के बारे में शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ । अंत काल को भवसागर में, उसका बेडा पार हुआ ॥ भजन किसने नहीं सुना होगा। शिव या महादेव भारतीय संस्कृति जो आगे चल कर सनातन शिव धर्म नाम से जानी गई है के सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में है। इन्हें अन्य देवों से बढ़कर माना जाने के कारण देवों के देव महादेव कहा जाता है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। भगवान शिव ही केवल ऐसे देव हैं जो सर्वपूज्य हैं। चाहे वो देवता हो, चाहे दानव, राक्षस, दैत्य, नाग, किन्नर, गन्धर्व, मनुष्य या कोई भी अन्य जाति, महादेव की कृपादृष्टि समान रूप से सभी पर रहती है। यही कारण है कि वे समस्त जगत में समान रूप से पूज्य हैं। शिव जी को संहार का देवता कहा जाता है। शिव जी अपने सौम्यता आकृति एवं रौद्रता दोनों के लिए विख्यात हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं। शिव अनादि हैं और सृष्टि प्रक्रिया के आदि स्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए है...