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Showing posts from January, 2024

केले के फल की कथा

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केले के फल की कथा आपको मालूम है कि यह केले का पेड़ कौन है? माघ के मास में लोग इसका पूजन करते हैं। इसके पत्तों के बंदनवार लगाते हैं। शुभ कार्य में और सत्यनारायण भगवान की पूजा में केले के पत्ते लगाए जाते हैं और बृहस्पतिवार को केले का पूजन होता है?   क्यों? शायद आप नहीं जानते हैं चलिए हम ही बता देते हैं कि केले के वृक्ष की कथा दुर्वासा ऋषि से जुड़ी हुई है।  कौन है यह दुर्वासा ऋषि ?  आप सभी जानते होंगे कि ये वे ऋषि हैं जिनके श्राप से देव, यक्ष, नाग, किन्नर, दानव, मानव आदि सभी डरते थे। कैसे हुआ ऋषि दुर्वासा का जन्म भगवान शिव के अवतार होने के कारण ऋषि दुर्वासा के स्वभाव में भी जन्म से ही क्रोध का ज्वालामुखी समाहित था। दुर्वासा ऋषि को छोटी-छोटी बातों पर क्रोध आ जाता था और वे श्राप दे देते थे।  पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय माता पार्वती, भगवान शिव के साथ एकाकी समय व्यतीत कर रहीं थीं । तभी अचानक से देवताओं ने उनके एकांतवास में खलल डाल दिया। उनके इस दुषकार्य के श बाद भगवान शिव का क्रोध अपने चरम पर पहुंच गया। भगवान शिव का क्रोध देख सभी देवता छुप गए। इतने में माता अनुसूया भ...

कुंदकेश्वर महादेव

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कुंदकेश्वर महादेव की कथा  उज्जैन के चंदनवन स्थित महर्षि सांदीपनि के आश्रम में अति प्राचीन श्री कुंदकेश्वर महादेव का मंदिर विद्यमान है। यह मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध 84 महादेवों में से 40 वें नंबर पर आता है ।  मां पार्वती विश्व में सबसे सुंदर है। एक बार राक्षस विदल-उत्पल ने मां पार्वती को देखा तो उन्हें पाने की लालशा करने लगा, एक बार राक्षस विदल-उत्पल माता पार्वती को परेशान करने लगा। जब वह माता पार्वती को स्पर्श करने जा ही रहा था तो उन्होंने कुंदुक को उठाकर उस पर वार कर दिया । जिससे उसके प्राण पखेरू उड़ गए, परंतु वह कुंदुक जाकर भगवान भोलेनाथ के पैरों में लग गया। उनके पैरों से रक्त स्राव होने लगा। पार्वती जी को बहुत दुख हुआ बाबा भोलेनाथ के चरणों में घर पर क्षमा मांगने लगी। तब भगवान भोलेनाथ बोले पार्वती तुम इस बात का दुख मत करो लेकिन एक बात का ध्यान रखो कि तुम्हारे कुंदुक ने मेरे पैर को चोट पहुंचाई है और कुंदुक मेरे पैरों के पास आकर गिरा है। इसलिए आज से मेरा नाम कुंदकेश्वर होगा। आज के बाद यदि मृत्यु लोक में रहने वाले व्यक्ति के शरीर में कोई रोग या दुख व्यापेगा। और मेरे अर्थात ...