Posts

Showing posts with the label शिवलिङ्ग गणना एवं उनके नाम :

शिवलिङ्ग गणना एवं उनके नाम :

Image
शिवलिङ्ग गणना एवं उनके नाम : 'समराङगणसूत्रधार' में कहा है कि दो-दो अंश की वृद्धि करते हुए तीन हाथ की लंबाई तक पहुँचते-पहुँचते नौ लिंग निर्मित हो सकते हैं - 'द्वयंशवृद्धा नवैवं स्युराहत्तत्रितयावधेः ।'  सूर्यप्रोक्त 'अंशुमद्भेदागम' तथा अग्निपुराण अध्याय 45 के 28 वें श्लोक में एवं विश्वकर्मा के 'शिल्पप्रकाश' ग्रंथ में लिंग-भेदों की परिगणना की गयी है और सब मिलाकर चौदह हजार चौदह सौ भेद कहे गये हैं। विश्वकर्मा के ही एक-दूसरे शास्त्र 'अपराजित-पृच्छा' के अवलोकन से इन भेदों पर विशेष प्रकाश पड़ता है। उसके अनुसार समस्त लिंगभेद 14420 होते हैं।  इस प्रकार बताया जाता है ~ प्रस्तरमय लिंग कम-से-कम एक हाथ का होता है, उसमे कम नहीं। उनका अन्तिम आयाम नौ हाथ का बताया गया है। इस प्रकार एक हाथ से लेकर नौ हाथ तक के बनाये जायँ तो उनकी संख्या नौ होती है।  इनका प्रस्तार यों समझना चाहिये - एक हाथ से तीन हाथ तक के शिवलिङ्ग 'कनिष्ठ' कहे गये हैं। चार से छः हाथ तक के 'मध्यम' माने गये हैं और सात से नौ हाथ तक के 'उत्तम' या ज्येष्ठ' कहे गये हैं। इन तीनो...