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भगवान गणेश, श्री गजानन ने, भगवान ब्रह्मा जी के मुख से उत्पन्न असुरराज, सिंदूर, का वध

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भगवान गणेश, श्री गजानन ने, भगवान ब्रह्मा जी के मुख से उत्पन्न असुरराज, सिंदूर, का वध किस प्रकार किया एवं महर्षि पराशर को उन्होंने किस प्रकार पुत्र सुख प्रदान किया एक बार द्वापर युग की बात है । एक दिन पार्वती वल्लभ भगवान् शिव, ब्रह्म-सदन पहुँचे । उस समय ब्रह्मा जी शयन कर रहे थे । नया कल्प प्रारम्भ होने को था | कमलासन ब्रह्मा जी ने निद्रा से उठते ही जँभाई ली । उसी समय उनके मुख से एक महाघोर पुरूष प्रकट हुआ । जन्म लेते ही उसने त्रैलोक्य में भय उत्पन्न करने वाली घनघोर गर्जना की । उसके उस गर्जन से सम्पूर्ण वसुधा काँप गयी, दिक्पाल भी चकित हो गये । उस महाघोर पुरूष की अंग-कान्ति जमा-पुष्प के सदृश लाल थी और उसके शरीर से तीव्र सुगन्ध निकल रही थी । उसके रूप-सौन्दर्य को देखकर पद्म्योनी ब्रह्मा भी चकित हो गये । उन्होंने उससे पूछा-‘तुम कौन हो? तुम्हारा जन्म कहाँ हुआ है और तुम्हें क्य अभीष्ट है?’ उस पुरूष ने उत्तर दिया-‘देवाधिदेव ! आप तो अनेक ब्रह्माण्डों का निर्माण करते हैं, सर्वज्ञ हैं, फिर अनजान की तरह कैसे पूछ रहे हैं? जँभाई लेते समय मैं आपके मुख से ही प्रकट हुआ हूँ, अतः आपका पुत्र हूँ | अतएव आप म...