Posts

Showing posts from February, 2024

क्या महिलाएं मासिक धर्म के दौरान रुद्राक्ष पहन सकती हैं?

बहुत  महिलाओं के प्रश्नों का जबाब मेरी आज की पोस्ट पर। क्या महिलाएं मासिक धर्म के दौरान रुद्राक्ष पहन सकती हैं? आज आप सभी महिलाओं के लिए पोस्ट  हां, विवाहित महिला रुद्राक्ष की माला धारण कर सकती है। या  अपनी राशि के अनुसार रूद्राक्ष धारण कर सकती है।  रुद्राक्ष की माला कौन पहन सकता है, इस पर कोई प्रतिबंध या सीमाएँ नहीं हैं।  रुद्राक्ष हर  किसी व्यक्ति  के लिए भी फायदेमंद माना जाता है, जो उन्हें पहनता है, चाहे उनकी व्यक्तिगत रूप से  परिस्थितियां कुछ भी हों। रुद्राक्ष धारण करने  के संबंध में  बहुत लोगों के  विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कई लोग उन्हें समग्र स्वास्थ्य और कल्याण के लिए फायदेमंद मानते हैं।   आयुर्वेद के अनुसार, रुद्राक्ष की माला ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को संतुलित करके और शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देकर मन और शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।  माना जाता है कि वे रक्त परिसंचरण में सुधार, रक्तचाप कम करते हैं और प्रतिरक्षा को बढ़ावा देते हैं।  इसके अतिरिक्त, आयुर्वेदिक चिकित्सक अक्सर उन लोग...

शिव पार्वती के संग पडन लागी हरे हरे पड़न लगी भंवरिया।

शिव पार्वती के संग  पडन लागी हरे हरे  पड़न लागी भांवरिया। पहली भावर कैसे होवे,  पंडित पंडित नाय।  शंकर जी तब सोचन लागे,  रावण को लियो बुला य। पडन लागी हरे हरे  पडन लागी हरे हरे  पड़न लागी भांवरिया। शिव पार्वती के संग  पडन लागी हरे हरे  पड़न लागी भांवरिया। दुजी भांवर कैसे होए,  एक पुरुष दो नार।  शंकर जी तब कहने लगे,  गंगा  देयो उतार , पडन लागी हरे हरे  पडन लागी हरे हरे  पड़न लागी भांवरिया। शिव पार्वती के संग  पडन लागी हरे हरे  पडन लागी हरे हरे  पड़न लागी भांवरिया। तीजी भंवर कैसे होए,  मात-पिता नाय।  शंकर जी तब सोचन लागे,  ब्रह्मा को लेओ बुलाय। पडन लागी हरे हरे  पडन लागी हरे हरे  पड़न लागी भांवरिया। शिव पार्वती के संग  पडन लागी हरे हरे  पडन लागी हरे हरे  पड़न लागी भांवरिया। चौथी भावर कैसे होए ,  दो पुरुष एक नार।  भोले जी तब सोचने लागे, चंदा को लियो है उता र , पडन लागी हरे हरे  पडन लागी हरे हरे  पड़न लागी भांवरिया। शिव पार्वती के संग  पड...

नर्मदेश्वर शिवलिंग

नर्मदेश्वर शिवलिंग वह कंकर या पत्थर या शिवलिंग जो नर्मदा जी के प्रवाही जल से प्राप्त किया जाता है या नर्मदा से प्राप्त पत्थरों से बनाया जाता है नर्मदेश्वर शिवलिंग कहलाता है। यह शिवलिंग मनोकामना पूर्ण करने के लिए सबसे अच्छा उपाय है। इन्हें घर में ऐसे ही स्थापित कर लिया जाए तो भी यह पूजनीय है और पूर्ण फल प्रदान करने वाला होता है। यदि घर में शिवलिंग हो तो नर्मदेश्वर शिवलिंग होना चाहिए, इन पर किसी ने जल चढ़ाया तो ठीक नहीं चढ़ाया तो ठीक, किसी ने भोग लगाया तो ठीक नहीं लगाया तो ठीक, किसी ने बेलपत्र चढ़ाया तो ठीक नहीं चढ़ाया तो ठीक, उनकी किसी ने प्रतिष्ठा की तो ठीक नहीं की तो ठीक, नर्मदेश्वर शिवलिंग के प्राण प्रतिष्ठा की जाए तो ठीक नहीं की जाए तो ठीक  नर्मदेश्वर नामक, जो शिवलिंग होता है अर्थात नर्मदा के जल से जो शिवलिंग प्रकट होता है। यह ऐसा शिवलिंग होता है कि आप इसकी देखभाल करें ना करें इसको जल चढ़ाएं या ना चढ़ाएं अगर ये आपके घर में स्थापित है तो घर में स्थापित नर्मदेश्वर शिवलिंग घर में आने वाली अकाल मृत्यु को भगा देता है।

गर्भस्थ बच्चों की परेशानी दूर करने के लिए

गर्भस्थ बच्चों की परेशानी दूर करने के लिए तीसरा दिन पातालेश्वर शिव पुराण जमशेदपुर झारखंड गर्भस्थ शिशु को होने वाली परेशानी जैसे दिल में छेद है या पूर्णतः स्वस्थ नहीं है। अतः शिशु किसी ने किसी रूप में रोगीला है। तो उस गर्भस्थ नारी से निवेदन है कि वह अपने घर से थोड़े से चावल लें, उनमें से 1008 साबुत चावल के दाने भगवान भोलेनाथ के पंचाक्षर मंत्र 'नमः शिवाय' को बोलकर एकत्रित करके उसमें एक बेलपत्र रखकर, उसे श्वेत वस्त्र में बांध ले इसके उपरांत भगवान शिव के मंदिर में दिल से, भाव से, प्रार्थना करके रख कर आए। 3 या 4 दिन में बच्चों की परेशानी दूर हो जाएगी । वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाएगा। 3 या 4 दिन बाद पुन जांच कर आएंगे तो उसे बच्चों को स्वस्थ ही पाएंगे।  अगर बाबा एक बार में न सुने तो, एक बार पुनः इस उपाय को करें। सात काले तिल और एक काली मिर्च का उपाय मनोकामना पूर्ति के लिए सात काले तिल और एक काली मिर्च अपनी हथेली में लेकर किसी भी शिवरात्रि को अपने मन की इच्छा कहते हुए भगवान भोलेनाथ को अर्पित कर दें। आने वाली अगली शिवरात्रि तक भगवान भोलेनाथ आपकी इच्छा अवश्य पूरी कर देंगे। प्रदोष के दिन...