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बाँसुरी

बाँसुरी एक बार गोपियों ने बाँसुरी से पुछा "री बांसुरी, तू श्री कृष्ण के होठों से कैसे चिपक गयी"? बाँसुरी ने कहा "क्या बताऊँ बहना, मैं तो बाँसों के झुण्ड चुपचाप 'कृष्ण-कृष्ण' रटा करती थी, एक दिन उनकी दृष्टि मुझे पर पड़ गयी बस फिर क्या था, पहले तो उस 'छलिये ने मुझे मेरे कुटुंब से अलग कर दिया, फिर मुझे काटा और छाटा, पीड़ा तो बहुत हो रही थी, परन्तु मैं 'कृष्ण-कृष्ण' करती रही फिर भी उनका मन न भरा तो, मेरे अन्दर जो भी था वह सब निकाल बाहर फेंका और तब भी मैं प्रेम दीवानी 'कृष्ण-कृष्ण' करती रही। तब उस 'चितचोर' ने मेरे अंग में छह छेद (सुराख) कर दिए और मैं पागल तब भी 'कृष्ण-कृष्ण' करती रही। अंत में कृष्ण ने कहा "तू जीती मैं हारा, अब तू सदा मेरे होठों पर विराजमान रहेगी"।

भगवान श्री कृष्ण ने पूरी काशी को अपने सुदर्शन चक्र से किया भस्म ।

भगवान श्री कृष्ण ने पूरी काशी को* *अपने सुदर्शन चक्र से किया भस्म ।* *तथा कैसे हुआ काशी का* *वाराणसी के रूप में पुनर्जन्म ?* *काशी को हिन्दू धर्म में पूण्य तीर्थ स्थल माना जाता है, तथा यह आध्यात्मिक नगरी कहलाती है।इसका उल्लेख अनेक धार्मिक ग्रंथो और पुराणों में मिलता है ।परन्तु क्या आप को पता है की काशी जैसी पूण्य भूमि को एक बार भगवान श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से भस्म कर दिया था। आइये जानते है आखिर क्यों -* *भगवान श्री कृष्ण को काशी* *नगरी को भस्म करना पड़ा ?* *यह कथा द्वापर युग की है तथा इस कथा का संबंध जरासंध से भी है । मगध का राजा जरासंध अत्यन्त क्रूर था तथा उसके पास असंख्य सैनिक तथा विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र थे। उसकी सेना इतनी शक्तिशाली थी की वह पल भर में ही अनेको बड़े-बड़े सम्राज्यो को धरासायी कर सकती थी।इसलिए अधिकतर राजा जरासंध से डरे रहते थे तथा उसे अपना मित्र बनाये रखना चाहते थे ।* *जरासंध की दो पुत्रिया थी जिनका नाम अस्ति और प्रस्ती था ।जरासंध ने अपनी दोनों पुत्रियों का विवाह मथुरा राज्य के राजा कंस से कर दिया। कंस एक अत्याचारी राजा था जिसके अत्याचार से उसकी प्रजा बहुत...