Day - 02 ll श्री शिव चर्चा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll सीहोर, मध्य प्रदेश

 Day - 02 ll श्री शिव चर्चा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll सीहोर, मध्य प्रदेश 

(00:01) [संगीत] की विश्वनाथ भगवान की राम महारानी की सरस्वती सरकार की श्वर महादेव

(01:05) की मलेश्वर की ओकारेश्वर भगवान की संत सदगुरु देव माता की प्र नम

(02:13) श नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नमः शिवाय ओम नमः शिवाय [संगीत] ओ

(03:19) नमः शिवाय नम ओम नम शिवाय ओ नमः शिवाय नम शिवाय ओ नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः [संगीत] शिवाय शिवाय बो बोला नमः शिवाय बोरा नमः शिवाय बोलो नमः शिवाय बोलो नमः शिवाय गरा नमः शिवाय गोरा नमः शिवाय

(04:27) [संगीत] नम शम शिवाय ओम नमः शिवाय ः शवा श ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नम शिवाय ओ नमः शिवाय ओम नम शिवाय विश्वनाथ भगवान की महाकालेश्वर भगवान की जय ओमकालेश्वर भगवान की जय कुरेश्वर महादेव की जय हर हर महादेव हर हर महा मदेव हर हर महादेव

(05:36) हर श्री शिव महापुराण कथा के माध्यम से शिव चर्चा की ओर आगे बढ़ते हुए भगवान देवदिदेव महादेव की पवित्र तीन दिवसीय शिव चर्चा दीपावली महापर्व का यह पवित्र अवसर जिसमें आप और हम सभी भगवान शिव की इस पवित्र धरा पवित्र भूमि कुबरे स्वर धाम से भगवान देवद देव महादेव की कंकर शंकर की धरा से तीन

(06:43) दिवसीय शिव चर्चा श्रवण कर रहे हैं और यह पवित्र कथा भगवान देवद देव महादेव की कृपा से दामोदर मास कार्तिक मास के पवित्र अवसर [संगीत] पर धन तेरस रूप चौदस दीपावली पड़वा और दूज कैसे यह दीपावली महापर्व मनाया जाए कैसे यह दीपावली महापर्व का आनंद हमारे जीवन में सुख प्रदान करें पांच दिन जो कृष्ण पक्ष के कार्तिक महीने के रहते हैं ऐसे ही पांच दिन शुक्ल पक्ष के भी रहते हैं भगवान की कथा का

(07:51) लाभ भगवान की कथा का लाभ लेने के लिए आप और हम किस तरह से भगवान की अविरल भक्ति को प्राप्त कर सकते हो किस तरह से हम भगवान की इस अविरल भक्ति को धारण कर सकते हो ऐसी पवित्र तीन दिवसीय शिव चर्चा का लाभ आप और हम ले रहे हैं और बड़े भाग शाली है आप सभी जो इस कुबेरेश्वर बाबा की पवित्र धरा पर तीन दिवसीय कार्तिक के महीने में दामोदर मास में शिव चर्चा श्रवण कर रहे और तेरी कृपा बिना न हिले एक भी अनु लेते हैं स्वास तेरी कृपा से तन

(09:00) तन बखान क्या करू मैं राखो के ढेर का चपटी भभूत में खजाना कुबेर का हे गंगधार मुक्ति द्वार ओमकार तू भोले ओमकार तू आयो शरण तिहारी शंभू तार तारत बाबा की कृपा उनकी करुणा वो कहते हैं ना मकान मिले ना मिले पर पता मिल जाना [संगीत] चाहिए मकान मिले ना मिले पर पता जम के बोलो जरा मिल जाना चाहिए और भगवान मिले ना मिले पर शिव कथा मिल जाना

(10:10) चाहिए क्योंकि उसको पाने का एक बिंदु है शिव महापुराण की कथा शिव महापुराण की कथा के माध्यम से हम किस तरह से दीपावली मना सके किस तरह से हम पर्व मना सके किस तरह से हम भगवान को रिझा सके किस तरह से हम लक्ष्मी को अपने दरवाजे तक अपने द्वार तक अपने घर तक बुला स हमारा परिश्रम हम पूजन तो करते हैं भारत की भूमि पर रहने वाला ही नहीं विदेश में रहने वाला भी सनातनी लक्ष्मी पूजन करता है भारत की भूमि पर ही नहीं संपूर्ण विश्व में रहने वाला सनातन धर्म को मानने वाला शंकर की आराधना करता पर उसके जीवन में लक्ष्मी कैसे प्राप्त करता तो वह जिंदगी भर आ रहा है लगातार कई

(11:03) वर्षों से पूजन कर रहा है पर वही हर दीपावली पर पूजन करता है उसके बाद भी उसको कहीं ना कहीं लोन उठाना पड़ता है हाथ जोड़ना पड़ते हैं किसी के आगे जाकर बोलना पड़ता है तब कहीं थोड़ा सा रुपया उसके पास में एक ग्रित होता है उसका खुद का क्यों नहीं है स्वयं का क्यों नहीं एक महापुराण के अंतर्गत एक बड़ा सुंदर स्कंद पुराण के अंतर्गत आता है कार्तिक महत्तम एक ब्राह्मण पति पत्नी दोनों बड़े बुजुर्ग थे बहुत बुजुर्ग छह लड़कियां थी [संगीत] उनकी चार लड़कियों की शादी हो गई दो कुंवारी रही अब दो लड़कियां कुमारी है चार का विवाह हो गया अपने अपने घर पहुंच

(12:05) गई पर जिनके घर में उनका विवाह हुआ वहां पर भी वह दुखी थी और माइके में भी वो दुखी थी होता है किसी किसी के ललाट पर जो लिखा होता है उसको कौन टाल सकता माता-पिता अपनी बेटी का विवाह क्यों करते हैं क्योंकि अगर उसको यहां दुख है तो वहां जाकर सुख भोग अगर यहां तकलीफ की जिंदगी उसने जी है तो वहां जाकर उसको अच्छी जिंदगी मिल जाए माता-पिता तो य विचार करते भारत की भूमि पर ही नहीं पूरे देश में रहने वाले विदेश में रहने वाले जितने भी अपनी बेटी का विवाह करते हैं तो यही विचार से करते हैं कि हमारी बेटी सुखी रहे और अपन लोग भी कहते हैं खुशी खुशी कर

(12:47) दो विदा तुम्हारी बेटी राज करे हर एक व्यक्ति यह विचार करता है कि बेटी जहां बहाए वहां सुख पाए पर कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि लड़की मायके में भी माता-पिता को देखकर दुखी रहती है कि पापा मम्मी का क्या होगा इनके पास में कुछ भी नहीं उनके पास में क्या होगा कौन संभालेगा इनको कौन देखेगा इनको कुछ भी नहीं है भाई हो तो वह देख ले बहन सब अपने घर चली जाएगी कौन देखेगा और माता-पिता भी अपना पूरा जीवन जो उन्होंने लगाया अपने बच्चों के लिए निकाल देते हैं पर समय ऐसा आ जाता है कि बेटी का विवाह यह सोच कर करा जाता है कि वह सुख भोगे गी पर कई बेटियों की जिंदगी में

(13:34) मायके में भी दुख होता है तो ससुराल में भी दुख होता अब किससे कहे किसके पास जाकर रोए मायके में अगर बहुत धन हो ना तो पापा से कह सकती है पापा मेरे घर में यह तकलीफ है मायके में बहुत बैभव हो ना तो अपनी मम्मी से कह सकती मम्मी मेरे घर में यह तकलीफ है पर मायका भी देखा हुआ है उसका और ससुराल भी देखा हुआ है मायके में भी तकलीफ है और ससुराल में भी अब किससे कहने जाएगी किसको कहेगी किससे प्रार्थना करेगी व तो शिव महापुराण की कथा कहती है स्कंद पुराण कहता है कि ब्राह्मण ब्राह्मणी बुजुर्ग हैं उनकी छह लड़कियां है चार लड़कियों का विवाह हो गया

(14:19) पर व चारों भी सुखी नहीं है अब किसके पास जाए माता पिता तो शंकर के मंदिर के बाहर बैठकर थोड़ी सी भिक्षा मांग लेते हैं भिक्षा में आटा चावल मिल जाता है थोड़ी सेवा कर लेते हैं भगवान की और उस आटा चावल को जो मिलता है तो ब्राह्मण भी इतने विचित्र है वो पति पत्नी कि जो भिक्षा में मिलता है शंकर जी के मंदिर में शाम को पहुंचते हैं प्रदोष काल में और प्रदोष काल में शिव जीी के मंदिर में पहुंचकर उस भिक्षा के हिस्से कर देते हैं और हिस्से भी करते हैं तो पांच हिस्से अब प्रदोष काल में मंदिर में गए और मंदिर में जाकर जो भिक्षा मिली आटा मिला

(14:57) चावल मिला शकर मिली गुड़ मिला जो भी सामग्री मिली जो भी पदार्थ मिला उसके पांच हिस्से कर दिए पांच हिस्से क्यों एक शंकर भगवान को दे देते हैं दूसरा वो पीपल के वृक्ष के नीचे जाते थे तो एक हिस्सा पीपल का निकाल देते हैं दूसरा वो आंवले के वृक्ष के नीचे जाते हैं तो एक हिस्सा आंवले का निकाल देते हैं और तीसरा चौथा हिस्सा तीसरा चौथा हिस्सा वो ले जाकर बेल पत्री के वृक्ष का निकाल देते हैं और पांचवा हिस्सा स्वयं का रख लेते हैं तीन वृक्ष का हिस्सा हो गया एक शंकर जी का हिस्सा हो गया और पांचवा हिस्सा स्वय स्वयं का अब थोड़ा सा तो भिक्षा मिला थोड़ी सी

(15:36) भिक्षा मिलने पर भी अब इतनी सी भिक्षा प्राप्त होने के बाद इतनी सी भिक्षा मिलने के बाद अगर वह थोड़ा सा एग्री करकर ले भी गया और घर में छह बेटियां पति पत्नी आठ लोगों का परिवार उसमें से चार का विवाह भी हो गया तो दो बेटी और दो माता-पिता कैसे गुजारा हो कैसे गुजारा विचार किया आपका काम है शंकर के मंदिर तक जाना आपका काम है शिवालय तक जाना आपका कान में अपना जो है उसमें से कुछ अंश शिव को दे देना यह आपका कार्य अब शिव का क्या कार्य है वो शंकर जा तेरे मंदिर में आना मेरा काम है और मेरी बिगड़ी बनाना तेरा तेरी चौखट तक मैं आ ही गया

(16:29) मुझे दर्श दिखाना तेरा का अब उसके ऊपर निर्भर है क्यों हमने अभी कथा के शुरू में कहा कि मकान मिले ना मिले पर पता मिल जाना चाहिए भगवान मिले ना मिले पर शिव कथा मिल जाना चाहिए उसका कारण केवल इतना सा है कि भगवान मिलता कब है जब हम कथा को श्रवण करते भगवान राम ने शबरी को कहा माता शबरी अंबा के दरवाजे पर कहा कि तुम सत्संग [संगीत] करो कथा श्रवण करो संगत करो जब तुम कथा सुनोग तो मैंने अपने गुरु मातंग बाबा के मुख से सुन लिया कि राम आएंगे तुमने मेरा इंतजार करा क्यों गुरु के मुख से सत्संग में सुना था कि परमात्मा मिलेगा जरूर आएगा

(17:20) जरूर तो मेरा आगमन हो गया उसी तरह कथा सुनते हैं हम और कथा में यह चीज सुन लेते हैं कि मैं अगर यह करूंगी तो मेरा शंकर मेरी सुनेगा शिव जी को एक लोटा जल चढ़ाऊ मेरा शिव मुझे सुनेगा श्री शिवाय नमस्तुभयम बोलूंगी मेरा शिव मेरा सुनेगा मैं भगवान शंकर को इस तरह से बेलपत्र चढ़ाऊ मेरा शंकर मुझे सुनेगा इसीलिए शिव महापुराण की कथा कती भगवान मिले ना मिले पर शिव कथा मिल जाना चाहिए कथा मिली कि परमात्मा को ध्यान रखना ही पड़ेगा बकरी चलाने वाला अपने मोहल्ले की बकरी लेकर निकल गया और बकरी वाला जब लेकर निकला और घर के लोगों ने देख लिया कि वो

(18:01) बकरी लेकर जा रहा है पहचान का आदमी और बकरी लेकर जाएगा मतलब बकरी वाले से उसने एक ही बार कहा कि हमारे घर की बकरियां ले जा हमारे यहां की गाय ले जा चरा कर लियाना हमारे यहां का ऊंट ले जा चरा के लि आना हमारे यहां की भेड़ ले जा चरा के लि आना बकरी वाले को तो केवल एक बार कहा गया बकरी वाला रोज ले जाता है रोज चरा कर लाता है अब जवाबदारी किसकी है बकरी चराने वाले की आएगा बकरी नहीं आई तो किससे कहेगा क्यों हमारी बकरी का है क्यों हमारी गाय का है क्यों हमारा ऊंट का है क हमारी भेड़ का है उससे कहेगा उसी तरह शिव कथा वांचने वाला हो भागवत कथा वांचने वाला हो चाहे कोई संत

(18:37) साधु गुरुजन हो भगवान उनको भेज देते हैं कि यह संसार सागर के लोग हैं इनको ले जाकर परमात्मा की चौखट तक भेज देना बस तू अगर इनको यहां तक लेकर आ गया फिर आगे की जवाबदारी वो शंकर की है फिर वघड़ दनी की है उसके ऊपर [संगीत] नहीं फिर उसके ऊपर आश्रित हो जाते अब उसके ऊपर आश्रित हो जाए हम क्या विचार करें शिव महापुराण की कथा कहती है दुनिया के लोग तोड़ेंगे आपको जुड़ना है कितना तोड़ने का विचार आज के जमाने में राजनीति कोई साधारण हो गई क्या आज के जमाने की राजनीति देखिए ब्राह्मणों को तोड़ दिया क्षत्रियों को तोड़ दिया वैश्य को तोड़ दिया शूद्र को तोड़ दिया चार

(19:23) वर्णों में चारों को तोड़कर रख दिया और वहां अगर आज भी हम लोग एक जुट नहीं हुए तो आने वाला समय हमको रुला देगा आपकी जेब में 100 का नोट है अरे बोलो तो जमके चलो ठीक है 00 के चार हिस्से करो कितने कितने हो गए जम के बोलो 25 ठीक है अब 100 के नोट के चार हिस्से कितने हुए 25 2 अब निकालो नोट और उसको चार हिस्से में फाड़ दो और एक हिस्सा 25 में चलाकर बताओ चलेगा दूसरा हिस्सा 25 में चलेगा नहीं तीसरा चलेगा चौथा चलेगा नहीं पर वही 100 का नोट वापस सेलो टेप लगाकर जोड़ दो तो वो 100 की 100 में ही चलेगा

(20:27) [संगीत] मेंही चलेगा चार टुकड़े हमारे सनातनी हों के हमारे हिंदू भाई बहनों के ये चार टुकड़े कर दिए ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र अब सोचा कि इनको तोड़ दो और तोड़ के चला लो तो तुमने तोड़ तो दिया पर ये चल नहीं पाएंगे जब ये एक हो जाएंगे तो सो के भाव में ऐसे निपटाए कि आगे बढ़ते च एक ई टुकड़े की मूलता नहीं है यहां अगर टुकड़े टुकड़े हो गए तो कोई नहीं पूछने वाला अगर हम एक झूठ हो गए एक झूठ होकर अगर हमने अपनी जिंदगी जीए तो उसका एक आनंद हो जाए एक जूटता में आनंद [संगीत] ता और वो एकजुटता की आनंद हमारे जीवन की एक आनंद को सुख प्रदान करती है कि हम कैसे

(21:19) अपने जीवन को जी सकते हैं शंकर भगवान के मंदिर में गए दोनों बुजुर्ग बूढ़े ब्राह्मण ब्राह्मणी और भगवान शंकर के मंदिर में पांच हिस्से कर दिए पाच हि से कर कर एक हिस्सा शिव का छोड़ा पीपल के वृक्ष के नीचे गए दूसरा हिस्सा पीपल के वृक्ष के नीचे दिया तीसरा आंवले के वृक्ष का नीचे दिया चौथा बेल पत्री के वृक्ष के नीचे दिया है और पांचवा जो हिस्सा थोड़ा सा आटा चावल जो भी मिला होगा उसको अपनी दो बेटियां और स्वयं बड़े प्रेम से पा लेते कभी-कभी नहीं भी मिलता तो भूखे सो जाते किससे कहे वो चार बेटियों का विवाह करा वो भी दुखी किससे जाकर

(21:56) कहे किससे विनय करे शिव महापुराण की कथा कहती है जब एक लड़की का विवाह हो जाता है और वह अपने ससुराल पहुंच जाती है और ससुराल में पहुंचने के बाद जब वह देवदिदेव महादेव को एक लोटा जल चढ़ाती है तो वह लड़की का चढ़ाया गया बहू का चढ़ाया गया बेटी का चढ़ाया गया जल एक लोटा जल वो साधारण नहीं होता पुरुष जब शिव पर जल चढ़ाता है तो उसका खुद का कुल तरता है पर घर की बहू घर की स्त्री घर की मां घर की बेटी जब शंकर भगवान को जल चढ़ाती है तो उसमें से आधे जल का हिस्सा उसके मायके वालों को मिल जाता है और आधे हिस्सा उसके ससुराल वालों को 71 पीढ़ी को मायके की भी तार रही है और

(22:45) 71 पीढ़ी व अपने ससुराल की भी तार रही है 71 पीढ़ी व यहां भी पार लगा रही और 71 पीढ़ी वहा भी पार लगा रही आधा हिस्सा इधर का होगे आधा हिस्सा उर एक नारी जब विवाह हो जाता है घर पहुंच जाती है उसका दो गोत्र हो जाता है अपने नाना नानी का अर्थात उसके मायके का गोत्र और उसके ससुराल जब उसके दो गोत्र स्त्री के दो गोत्र हो जाते हैं पर पुरुष के दो गोत्र नहीं होते उसका एक ही रहता है तो बिहा कर लाएगा पर उसका गोत्र नहीं वो मान्य होगा इसलिए हमारे सनातन धर्म में जब पिंड दान करने के लिए जाया जाता है जब गया जी पहुंचते हैं हरिद्वार पहुंचते हैं प्रयागराज पहुंचते हैं काशी

(23:26) आदिक पहुंचते हैं पिंड दान करते हैं तो वहां पर ब्राह्मण देवता पूछते हैं कि तुम्हारे नाना नानी का भी पक्ष बताओ और तुम्हारे दादा दादी का भी पक्ष बताओ दो कुल देखे जाते इधर से भी उधर से माता-पिता दुखी बेटियां दो घर में कुवारी समय बीता गया जो चार बेटियां ब्याई थी बड़ी दुखी थी दुखी होने के कारणवश एक बार व अपने पिता से मिलने के लिए आई विचार करा कि हमारे दुख हमारे माता-पिता को श्रवण कराएंगे पर माता-पिता तो पहले से ही दुखी है किससे कहे यह चीज हमें सीखना चाहिए अब अपनी पड़ोसन तो पहले से दुखी और ऊपर से तुम जाकर बोलो मेरी बह बड़ी परेशान करती अब उससे पूछो

(24:08) पड़ोसन से तू तो मेरी तो और जगदंबा [संगीत] है कोई तन दुखी कोई मन दुखी कोई धन बिन रहत उदास तुलसी या संसार में सुखी राम का दस संसार में केवल एक सुखी है वो भगवान का जो दास है परमात्मा की जो शरणागति ग्रहण करने वाला है भगवान का जो वजन करने वाला है बस वो सुखी है दामोदर मास की कथा कार्तिक मास की कथा कहती है बेटियां दुखी होकर उनको नहीं मालूम था कार्तिक का महीना था दामोदर मास था बेटियां आज अपने पिता के घर आ गई पिता के घर आती और पिता के घर में बेटियों ने चार बेटियां आकर निवास करने लगी पिता की आंख में जल मैं क्या दूं इनको

(25:00) अभी तो मेरे पास में इनको देने के लिए भी कुछ नहीं है मैं इनको क्या प्रदान कर कार्तिक का महीना दामोदर मास दोनों बुजुर्ग माता-पिता ने स्नान करना प्रारंभ किया कार्तिक का स्नान करते शिव के मंदिर में जाकर सेवा करते चाकरी करके दोनों पति-पत्नी कुछ भिक्षा के लिए बैठ जाते बैठते भिक्षा के लिए जो मिलता लेकर पांच हिस्से करक घर पहुंच जाते अब पांचवा हिस्सा होता भी इतना सा कि एक गा सा एक गा सा मतलब एक कोरा रोटी का टुकड़ा या इतना सा चावल मु मुख में पहुंच जाए अब आठ लोगों का परिवार और फिर कुछ प्राप्त हो जाए बड़ा मुश्किल आज बूढ़ी मां ने बुजुर्ग

(25:43) ब्राह्मणी ने अपने पति से कहा सुनो चार बेटियां घर में आई है और दो बेटियां घर में है मैं बेटियों का चेहरा देखकर लगता है कि बेटियों को तकलीफ बड़ी बहुत है बहुत दुख कहते हैं दुनिया [संगीत] में बुखार नापने का भी एक यंत्र मिल सकता है बीपी नापने का एक यंत्र मिल सकता है दुनिया में शुगर नापने का भी यंत्र मिल सकता है सारी बीमारियां नापने का यंत्र मिल सकता है पर दुनिया में किसी का दिल नापने का यंत्र नहीं सता को उसका यंत्र नहीं है और उसका यंत्र है केवल एक मां घर का पिता और घर की मां एक ऐसी होती है जो घर में रहने वाली बेटियों का

(26:41) घर में रहने वाले बेटों का घर में रहने वाली बहुओं का घर में रहने वाले पोता पोती का मुख देखकर जान जाती है कि इसको क्या तकलीफ है वो यंत्र केवल माता-पिता के पास होता केवल एक मां और पिता के पास के सिवा कोई यंत्र किसी के पास नहीं हो सकता स और शास्त्र कता शिव महापुराण की कथा कहती है तीसरे नंबर पर आता है गुरु वो यंत्र गुरु के पास भी होता है पर माता-पिता अपने बच्चे से कह देते हैं कि तुझे यह तकलीफ है पर गुरु कभी नहीं कह सकता कि तुमको यह तकलीफ है गुरु हमेशा यंत्र है उसके पास में भी वो यंत्र होता है कि वह देख लेता है कि कितना दुखी है पर

(27:24) गुरु नहीं कहता कि यह दुखी है गुरु हमेशा कहता है मुस्कुरा खुश रहिए सुखी रहिए और मुस्कुराता हुआ गुरु अपने सामने से निकल कर चले जाए देखता हुआ मुस्कुराता हुआ चले जाए समझ लेना कि गुरु ने वह यंत्र से नाप लिया है और गुरु ने तुझे देकर कुछ भेज दिया है वो गुरु है नहीं देगा गुरु कुछ भी कुछ नहीं देगा तुम विचार करो किसी गुरु के पास में करोड़ों का धन हो ना तो गुरु जी के पास जाकर कहना गुरु जी करोड़ों का धन हमको दे दो ना दे गुरु गुरु कभी नहीं देगा आप गुरु जी के पास जाकर कहना गुरु जी तुम्हारे पास में इतना है हमको थोड़ा बहुत दे दो नहीं देगा

(28:07) गुरु बिल्कुल नहीं देगा क्यों क्योंकि गुरु जानता है आज अगर मैंने इसको थोड़ा दे भी दिया ना तो यह मेरे पास नहीं आएगा तो दूसरे के पास जाएगा और इसकी मांगने की आदत पड़ जाएगी पर गुरु देता नहीं है पर गुरु उसको निगाह से देखकर मुस्कुरा कर ऐसा वर देकर चले जाता है कि तुझे मांगना नहीं पड़ेगा तू उससे प्राप्त खुद कर सकता हम किसके दरवाजे पर जाए बुजुर्ग माता-पिता ने विचार करा बूढ़ा बूढ़ी ने विचार करा हम करें तो करें क्या विचार करते करते आंखों में जल भर गया बेटियों का भरण पोषण कैसे करा जाएगा बेटियों के लिए क्या करा जाएगा दोनों पति-पत्नी चले

(28:47) रोते-रोते नेत्रों में जल भरते हुए पति ने कहा चिंता मत कर आज पांचवा हिस्सा लेकर जा रहे थे और सारे वृक्षों के नीचे हिस्सा देते हुए चले जा रहे थे दामोदर मास था कार्तिक का महीना था आज पत्नी के मुख से निकल गया थोड़ा सा घी आया हुआ है एक काम करते हैं पांचों जगह इस घी का हिस्सा करना है तो भगवान के मंदिर में दीप लगा देते हैं पति ने कहा घी तो आया है पर कपास नहीं है पत्नी ने अपने तन की साड़ी को फाड़ लिया ब्राह्मणी ने तन की साड़ी को फाड़ फाड़कर बाती बनाकर एक शंकर जी के मंदिर में लगा दिया दूसरी बाती उसने भगवान पीपल देव के नीचे लगा दिया और तीसरी बात उसने

(29:29) आंवले के वृक्ष के नीचे लगा दिया और चौथी बाती उसने बेलपत्र के वृक्ष के नीचे लगा दिया चार बाती शिव महापुराण का स्कंद पुराण कहती है ब्रह्म बवत पुराण कहती है हमारा शास्त्र कहता है कुर्म पुराण कहती है विष्णु पुराण कहती है कि पीपल का वृक्ष बेल पत्री का वृक्ष और आंवले का वृक्ष शास्त्र कहता है कार्तिक के महीने में इन तीन वृक्ष की जड़ में स्वर्ग स्वयं आकर निवास करता है स् स्वयं आकर निवास करता है इन तीन वृक्ष की जड़ में स्वर्ग स्वयं आकर विराजमान करता है और चौथे नंबर पर कहा गया कि जहां तुलसी का पौधा होता है कार्तिक के

(30:10) महीने में तुलसी के पौधे की जड़ में गोलोक धाम आकर निवास करता है स्वयं भगवान कृष्ण का धाम आकर निवास करता है पति पत्नी विचार करते हुए साड़ी को फाड़ते बत्ती बनाते घी में डुबो दीप लगाते चलते जाए जैसे ही शंकर के मंदिर में दीप लगाया चिंता भगवान शंकर को शिवजी ने इशारा करा पीपल देव को जिसमें 52000 ब्राह्मणों का वास होता है पीपल देव को इशारा करकर जैसे ही पहुंचे पीपल के वृक्ष में से एक लड़की निकलकर बाहर आई काका मुझे तेरे साथ चलना है इतने में पत्नी पति से कहती है अपने घर में छह लड़कियां पहले से कैसे लेकर जाए इसको पति कहता है देख व उसका कोई नहीं है

(30:56) पीपल के पेड़ के नीचे बैठ के रही ले च पत्नी ने हाथ पकड़ा आगे बढ़े आंवले के वृक्ष के नीचे पहुंचे जैसे आंवले के वृक्ष के नीचे पहुंच कर जैसे उने दिया लगाया और दीप जैसे लगाया इसलिए लक्ष्मी का दीप कभी भी गोल बत्ती का नहीं होता लक्ष्मी का दीप हमेशा लंबी बत्ती का हमेशा लंबी बत्ती [संगीत] का शिव महापुराण की कथा कहती है बाती जो लगाई जाती है दीपावली पर लगाओ चाहे आप धन तेरस पर लगाओ चाहे आप रूप चौदस पर लगाओ चाहे पड़वा पर लगाओ चाहे दूज पर लगाओ बाती हमेशा लंबी होना चाहिए लंबी बात चाहे तेल की लगा रहे हो चाहे घी की लगा रहे हो भाव से बैकुंठ ये सुंदर रूप चौदस की जो

(31:46) पूजन का विधान है आपको धनतेरस की पूजन का जो विधान बताया था धनतेरस की पूजन का जैसा विधान था पहुंच कर पाटे को बिछा कर चौक पूर कर जिस थाली में आपने स्वस्तिक बनाकर जो सिक्का रखा है उसी में एक सिक्का और रखकर उसकी पूजन अर्चना करना है वैसी की वैसे ही जैसा पहले कल कहा गया रोली चावल हल्दी मोली मेहंदी सिंदूर आदिक सब चढ़ाते हुए और साथ में दो दीप लगेंगे रूप चौदस के दिन दो दीप एक दीप है घी का लंबी बत्ती का लक्ष्मी जी के सीधे हाथ पर आएगा दूसरा दीप है घी का दीप भी आटे का आएगा और तेल का दीप भी आटे का आएगा जो तेल का दीप लगेगा

(32:39) वह थोड़ा सा दिया बड़ा लेना उसमें चार लंबी लंबी बत्तियां रखना सरसों का तेल या मीठा तेल या तिल्ली का तेल जो भी मिल जाए उसके अंदर डाल लेना चार बत्ती यह लक्ष्मी जी के लेफ्ट हैंड की ओर आई उसी आटे का तेल का जो दिया रहेगा उसके अंदर या तो पीली सरसों या काली सरसों जो राई होती है सरसों होती है उसके थोड़े से दाने उसमें डाल दिए जाते लक्ष्मी जी का पूरा पूजन बड़े भाव से करिए जल का छटा दीजिए रोली चावल मोली हल्दी जो भी है आपके पास समर्पित करने के लिए पूजन की थाली में व समर्पित करिए मीठे का भोग लगाइए और भोग लगाने के बाद में बड़े प्रेम से पांच कमल गट्टे पांच हल्दी

(33:21) की गठान पांच अमर बेल के टुकड़े अमर बेल होती है एक लंबी सी बेल पेड़ों पर चलती है पीले कलर की जो कि पूरे पेड़ पर छाई रहती है उसको कहीं पर भी डाल दिया जाए वो बढ़ती चली जाती है वो हमारे वंश की वृद्धि के लक्ष्मी की वृद्धि के लिए श्रेष्ठतम मानी जाती पांच टुकड़े अमर बेल के पांच हल्दी की गठान पांच कमलगट्टे दोनों हाथ में लेकर मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हुए उन सिक्कों पर समर्पित कर दीजिए सिक्कों पर समर्पित करकर जो घी का दिया लगाया है तुमने लक्ष्मी जी के सीधे हाथ पर उसको उठाकर माता की आरती कर लीजिए जो तेल का दिया है घी का दिया वापस रखकर

(33:59) आरती के बाद में जो तेल का दिया है चार बत्ती वाला जो तुम जलाकर रखी हो उसको पूरे घर में घुमाकर रूप चतुर्दशी के दिन रूप चौदस के दिन नरक चौदस के दिन पूरे घर में घुमाकर सारे घर के दरवाजे खोलकर बड़े प्रेम से घुमाकर मुख्य द्वार के बीच में जो घर से बाहर निकलने वाला द्वार है उसके ठीक बीचोबीच वो दिया चार बत्ती का रख देना चाहिए कुछ देर के लिए दरवाजे खुले रखना चाहिए पूरे घर में माता लक्ष्मी का स्मरण कर करते हुए श्री शिवाय नमस्तुभयम बोलते हुए दिया रखकर जब वापस आए माता लक्ष्मी को झोली पसार कर प्रणाम कर कर कहे मां हमारे घर में निवास

(34:39) करो आपका भंडार सदा भरा रहे खाली ना हो हे मां जैसे हम दामोदर मास की कथा का रसपान कर रहे हैं कार्तिक मास की कथा को श्रवण कर रहे हैं जैसे हमने कार्तिक के महत्व को जाना है और उस महत्व को जाना कि लक्ष्मी भगवान शिव की आज्ञा से जाती है नारायण की आज्ञा से जाती है उसी तरह आप हमारे घर में शिव और नारायण की आज्ञा से विराजमान होईए मां को प्रणाम करिए बड़े भाव के साथ ऐसे ही यह रूप चतुर्दशी की पूजन का विधान है ये रूप चतुर्दशी की पूजन का विन जो थाली अपने धनतेरस के दिन रखी है उस थाली को आप रात्रि को हटा सकते हो दूसरे दिन फिर वही थाली रखा जाती है तीसरे दिन

(35:20) दीपावली का जो पर्व होगा कल की कथा में आपको 2 बजे से 5:00 बजे तक जो कथा होगी कल की आज की कथा तो 9:00 बजे से 10:00 बजे तक है पर कल की कथा 2 बजे से 5:00 बजे तक होगी दो से पांच इसलिए रखी है क्योंकि उसमें तीन दिन की पूजन का विधान बताना है एक दीपावली का फिर पड़वा का फिर दूज का तो बड़े प्रेम से उस कथा को कल की कथा को अपन 2 बजे से 5:00 बजे तक श्रवण करें भगवान को अपने हृदय की बात अपने चित्त की बात अपने मन की बात बाबा को प्रार्थना करते और हम तो निवेदन करेंगे प्रयास करिए अगर हो सके रूप चतुर्दशी का अगर दिन है नरक चौदस का

(36:01) दिन है जैसे कुबरे शवर धाम पर दीपावली कब की है 31 अक्टूबर की तो 29 तारीख को धनतेरस है 30 तारीख को रूप चतुर्दशी है नरक च से तो हम तो प्रार्थना करें निवेदन करें आपसे अगर हो सके शरीर में अगर बहुत रोग है और बहुत तकलीफ की जिंदगी चल रही है मतलब हर दो महीने में तीन महीने में कोई ना कोई दुख तुम्हारे सामने आकर खड़ा हो जाता है कोई तकलीफ आकर खड़ी हो जाती है चाहे बच्चों को हो रही हो चाहे बेटियों को हो रही हो चाहे परिवार में हो रही तो हम तो निवेदन करेंगे रूप चतुर्दशी के दिन एक लोटा जल उसमें बड़े प्रेम से कोई थोड़ा सा इत्र का अगर भाग मिल जाए और इत्र ना मिले

(36:44) तो पीला चंदन या लाल चंदन डालकर अगर कहीं आंवले का वृक्ष हो पीपल का वृक्ष हो और बेलपत्र का वृक्ष हो तीन जगह पर थोड़ा सा वो लोटा जो घर से लेकर जाओगे पात्र लेकर जाओगे रूप चतुर्दशी के दिन तीनों वृक्ष के नीचे एक ही कलश से थोड़ा-थोड़ा जल तीन स्थान पर चढ़ाई और बाबा से अपने मन की बात कह कर आई है आप खुद देखोगे कि तीन महीने में मेरा कुबीर भंडारी आपके दुखों को हारेगा परंतु यह उपाय केवल एक रूप चतुर्दशी के दिन ही होगा केवल रूप चतुर्दशी के दिन कई लोग इसको दीपावली के दिन भी करते हैं कई लोग इसको धनतेरस के दिन भी करते हैं पर यह उपाय रूप चतुर्दशी

(37:29) के दिन करेंगे तो उसका फल चौना मिलेगा चौना और मान लो इस चतुर्दशी पर अगर आप नहीं कर पा रहे हो तो अगली इसी कार्तिक के महीने की जो देव दीपावली आती है पूर्णिमा के लगभग में उस समय पर जो चतुर्दशी आए तो उस समय पर भी यह प्रयोग कर सकते पर होगा कार्तिक महीने के अंदर अब तीनों आंवले के वृक्ष के नीचे गए वहां पर भी गए दिया लगाया दिया लगाते कन्या वहां पर प्रकट हो काका हमें आपके साथ चलना है अब इतने में तो बुजुर्ग बूढ़ी मां ब्राह्मण की पत्नी बोली अब कहां लेकर जाओगे कौन है रो रही है बिलक रही है हमें तो आपके साथ चलना है हमें लेकर

(38:13) चलिए ब्राह्मण ने कहा अ ये रो रही है कोई भी इसका नजर नहीं आ रहा इसको भी ले लो लेकर चल दिया ब्राह्मणी चिड़कर बोली घर में पहले से छह बेटियां बैठी है दो और हो गई कितनी हो गई आठ और पति पत्नी [संगीत] 10 पति ने हाथ पकड़ाया पत्नी को फिर आगे बढ़ गए बढ़ते बढ़ते सीधे बेलपत्र के वृक्ष के नीचे पहुंच गए अब तो बेलपत्र के वृक्ष के नीचे दिया लगाने वाले थे इतनी देर में ब्राह्मण ने अपनी ब्राह्मणी से कहा बिल्कुल मत लगा बक हो सकता है तू दिया लगाए और दीप लगाए और लड़की आ जाए तो तू दीप मत लगा दीप लगाए मत बस ब्राह्मण और ब्राह्मणी दोनों बैठकर

(39:01) वहां पर दिए को ऐसे ही छोड़कर आगे बढ़ने लगे इतने में ब्राह्मण की छही लड़कियां घूमती घूमती अपने पिता और माता को ढूंढती ढूंढती आ गई बेलपत्र के वृक्ष के नीचे पहुंची देखा दीप रखा हुआ है पर कोई जलाकर नहीं गया है क्यों ना अपन इसको जला देते हैं अपन इसको जला देते छह बेटियों ने मिलकर उस दीप को प्रचलित कर दिया जैसे ही दीप प्रज्वलित करा एक लड़की वहां प्रकट हो गई और प्रकट होते सेही कहा जी जी ओ जी जी मेरे को तुम्हारे साथ चलना है मेरा कोई नहीं है मुझे लेकर चल चलो अब तो छह ही लड़कियों ने विचार करा पिताजी इतना सा तो भात लेकर आते

(39:41) उसमें एक एक गांसा सबको मिल जाता पिताजी थोड़ा सा भाग लेकर आते हैं सबको इतना इतना सा मिल जाता है और मालूम पड़े ये एक और बढ़ जाएगी तो छह और एक हम साथ साथ हो जाएंगे इन लड़कियों ने एक कहा कि देख भाई हमारे पास में तो वैसे ही खाने का कुछ भी नहीं इतने में वो कन्या जो बेलपत्र के वृक्ष के नीचे से प्रकट हुई उसने कहा जी जी मुझे कुछ खाने को मत देना मैं तुम्हारे सारे कपड़े भी धो दूंगी बर्तन भी मान दूंगी तुम्हारा भोजन भी बना दूंगी तुम जैसा बोलोगे मैं वैसा कर दूंगी उसमें एक बहन बड़ी चतुर थी एक बहन बड़ी चतुर थी उसने विचार करा

(40:19) चलो अच्छा है घर का काम करेगी अभी अपन सब मायके से भी आए हैं फैला रा ज्यादा है काम बहुत सारा है करेगा कौन मां दुखी है पिता दुखी है तो यही करेगी हाथ पकड़ा ले गए अब तो चलती चलती वो लड़की बोली मेरे तो पांव दुख रहे मुझसे चलता नहीं बने तो उसमें से एक चिल्ला के बोली कि तुर से चलता नहीं बने तो तू आई क्यों जा वापस जा नहीं मेरे को तुम कंधे पर बिठा लो मैं आराम से चली जाऊंगी अब इनको क्या मालूम था बताओ हम तो अच्छे के लिए लेकर गए तो ऊपर से कंधे पर चढ़ गए अब उसको कंधे पर बिठा लिया उसने लहंगा इधर पीछे कर कर दोनों पांव लटका कर

(40:52) कंधे पर बैठ गई और चोटी पकड़ ली जीजी की और चोटी पकड़ पकड़ते बड़े प्रेम से जो पहुंची आवाज लगाया पिताजी पिताजी पिताजी जो पिताजी बाहर आकर बोले क्या हो गया बेटा किसकी बेटी को ले आई सिर पर बिठाकर कंधे पर बिठाकर अरे पिताजी एक दिया रखा था बेल पत्री के वृक्ष के नीचे हमने सोचा कौन रखकर चले गया जलाकर आ जला अब तो पिता को लगा उन्होंने ब्राह्मणी को बुलाया देख मैंने मना करा था दिया मत जला दिया जलाए और वो आई अब ये देख अंदर जाकर बेटियों ने देखा तो दो तो पहले से बैठी थी एक साथ में आ गई कितने हो गए सब मिलाकर 11 अब 11 की 11 एक ग्रित हो गए अब बेटियां

(41:37) बड़ी भूख से व्याकुल अन्न का भाग नहीं थोड़ा सा करें तो करें क्या कर इतने में पीपल के वृक्ष के नीचे से जो बेटी निकली आवले के वृक्ष के नीचे से जो बेटी निकली बेलपत्र के वृक्ष के नीचे से जो बेटी निकली ब ब्राह्मण पिता ने और ब्राह्मणी ने दोनों का दोनों ने मिलकर उन तीनों का नाम पावनी लक्ष्मी रख दिया कौन सी लक्ष्मी पावनी पावनी का मतलब जानते हो पावनी का मतलब होता है मेहमान कौन सी लक्ष्मी है पावनी लक्ष्मी मतलब हमारे घर में मेहमान बनकर कोई लक्ष्मी अब ब्राह्मण ने पूछा इनका नाम क्या रखे तो क्या रख दो पावनी लक्ष्मी अब इन्होने नाम रख दिया पावनी लक्ष्मी अब

(42:24) तीनों को नाम पावनी लक्ष्मी अब एक ने कहा जो पीपल के ृ के नीचे से निकली मैं जाती हूं अभी भोजन बनाती हूं तो इतने में ब्राह्मणी आंख में आंसू भरकर बोली बेटी तू इतनी सी तो रखी है भोजन क्या बनाएगी कुछ भी तो खाने का नहीं है अपन एक काम करेंगे कल भिक्षा मांग कर लाएंगे तब बनाएंगे इतने में लक्ष्मी ने उसी समय पाहुनी लक्ष्मी बोली मा मां तू तो बर्तन बता दे बर्तन कहां रखा है बस बर्तन बता मैं बना दूंगी तो बनाएगी क्या अन्न हो घर में तो बनाएगी ना अरे मं तू बता तो सरी तू मुझे बता कहां रखा है तो इतने में ब्राह्मणी ने पूछा घर में अन्न नहीं है तो

(43:01) तू देगी क्या इतने में पावनी लक्ष्मी ने कहा मां एक बूढ़ा बूढ़ी पीपल के वृक्ष के नीचे आते थे अपने अन्न का एक हिस्सा रखकर जाते थे शंकर भगवान बोले हैं उनके अन्न का पूरा हिस्सा चुका कर आना है इसलिए मैं तुम्हारे दरवाजे पर आई हूं मां भागवता बर्तन दिए भोजन बनना तैयार हुआ जैसे ही भोजन बनकर तैयार हुआ सबने पाया ऐसा स्वादिष्ट भोजन आज पेड़ भरकर जिंदगी में पहली बार भोजन करा भोजन कर कर बर्तन मंच कर रखे ही थे कोई रिश्तेदार कभी नहीं आता था क्योंकि धन नहीं था सुख के साथी हजारों हैं जब दुख पड़ा तब कोई धन के साथ ही हजारों है जब धन नहीं तो

(43:47) कोई नहीं अब धन नहीं कोई रिश्तेदार नहीं आता था आज सब भोजन कर कर आराम से बस चक होकर खूब आनंद में रह रहे थे खूब प्रेम से बात कर रहे थे इतने में जो मामा कभी नहीं आता था वो मामा आ गया और मामा आकर दरवाजे लगाया दरवाजा बजाया और आवाज बजाकर जैसे दरवाजा बजाया जीजी आई बाहर बहन ने कहा भैया तू इतने सालों के बाद आज आया है कैसे आना हुआ बहन यहां से निकल रहा था बहुत भूख लग रही थी सोचा तेरे घर का भोजन करते हुए चले जाऊं अब ब्राह्मण ने मन में सोचा जो भोजन था वो तो सब हम खा गए 11 की 11 पूरा निपटा गया कुछ बचा तो है अब तुझे दे तो दे क्या

(44:27) क्या प्रदान करें इतने में दूसरी लक्ष्मी पावनी दूसरी लक्ष्मी आंवले के वृक्ष के नीचे की बोली अरे मां क्यों चिंता करती है तुम्हारा मामा तुम्हारा भाई हमारा मामा बिठा अभी हमें भोजन बना के लाती दूसरी ने जैसे ही कहा भोजन तो इतने में ब्राह्मणी ने कहा कि भोजन पहली वाली तो दे दी पीपल का भाग अब तू कहां से लाएगी दूसरी बोली एक ब्राह्मण ब्राह्मणी आते थे आवले के पेड़ के नीचे भिक्षा रखकर जाते थे हिस्सा मेरे को भगवान शंकर जी बोले हैं उनका हिस्सा पूरा चुका कर आना इसलिए मामा को भी खिला कर भेजते जो भोजन बनाया मामा तो चक खाया वही पड़ गया वही सो

(45:02) गया मामा जैसे ही सोया खूब आनंद में रहे अब सब की सब आनंद में सो रहे थे सब आनंद चक से सो रहे थे तीनों कन्याओं ने दोने उठकर आखिरी पावनी लक्ष्मी से पार्वती जी की उस बेलपत्र के वृक्ष के नीचे से निकली हु कन्या से कहा जीजी अब तेरी बारी है तू अब कुछ कर पावनी लमी ने कहा चिंता मत करो ब्राह्मणी को जगाया और ब्राह्मणी से कहा एक काम कर पूरे घर का कोठा साफ कर दे झाड़ू को घर के पीछे रख दे चलनी पर कपड़ा ढाक दे स पड़े को छुपा कर रख दे और मैं इस कोठे में सोंगी तू बाहर सो जा बेटा ब्राह्मणी बोली कोठे में तो तुझे डर लगेगा ना मा तू बाहर सो मैं कोठे में

(46:01) सोंगी बेलपत्र के वृक्ष से निकली हुई व कन्या कोठे में सोई कन्या ने जो दृष्टि करी चारों तरफ पूरा धन से कोठे को भर दिया भरकर बाहर निकल जैसे ही बाहर निकली निकाल ते सेही उसी समय पर मामा ने देख लिया आधी रात को जीजी की छोरी बाहर जा रही है अब उसको क्या मालूम था मा कभी जिंदगी में आया हो तो मालूम हो कि जीजी की छोरी छह थी ये तो दिखने में कितनी हो गई पूरी की पूरी ना उसको क्या मालूम जीजी की छोरी बाहर जा रही है इतने में मामा उठ गए मामा ने उठकर हाथ पकड़ लिया हाथ पकड़ कर कहा बेटी कहां जा रही है तो इतने में कहा बस मेरा काम था

(46:45) पूरा कर दिया मैं जा रही हूं मामा जी बोले कभी मामा के घर नहीं आएगी तो इतने में बोली अब भी चल चल अभी चलू हाथ पकड़कर मामा बेटी को घर लेकर गए मामा की दशा भी ठीक नहीं थी कहा मामा चलनी को ढाक दे झाड़ू पीछे रख दे कोठे को लेपन कर दे मैं यहां सोंगी मामा कहे बेटा अकेली कहां सो पाएगी कहा मामा तू जा मामा को बाहर भेजा कोठे को धन से भर दिया तीनों बेटियां एक जगह से इकट्ठी होकर चली तो ब्राह्मण ब्राह्मणी ने हाथ जोड़कर कहा तुम कौन हो कौन हो कहा बाबा दामोदर मास में कार्तिक के महीने में तुमने शिव की अर्चना करी शंकर के मंदिर का वारी करकर

(47:28) दीप का दान किया पीपल के वृक्ष का दीप दान करा आंवले के वृक्ष का दीप दान करा बेल पत्री के वृक्ष का दीप दान करा तो शंकर भगवान की करुणा से हम तीनों ने आपका भंडार भरा भगवान ब्राह्मण ब्राह्मण बड़े आनंद में चने लगे य शिव त य शंकर की अरल कथा कार्तिक महीने में दीपदान का बड़ा महत्व है इसलिए दीपावली की रात्रि को यहां कुबेर भंडार के दरवाजे पर लोग आते हैं 11 दीप घी के जलाकर जाते हैं दूसरे दिन बाबा का कजाना लेकर जाते हैं तो यह तो दिल से लोग बाबा के दरवाजे पर आते और आपको तो बड़े प्रसन्नता 31 तारीख को दीपावली महापर्व मनाकर लोग एक नवंबर को बाबा के

(48:10) दरवाजे पर आकर खजाना लेकर बाबा का भजन कर कर जाते कभी मौका लगे तो दीपावली की रात्रि को आकर एक बार दर्शन करना बाबा के धाम का ऐसा लगता है पूरा बैकुंठ और कैलाश मेरे बाबा का इस कुबेरेश्वर धाम में आकर बस जाता पूरा बैकुंठ सारे तीर्थ होकर आइए और एक बार कुबेरेश्वर धाम होकर जाइए कुबेरेश्वर बाबा की धरा पर कहीं पर भी सुबह से लेकर शाम तक बैठो ऐसा शांति का मह आनंद उत्पन्न होगा ऐसा लगेगा कि हम कहां आ गए सारे तीर्थ घुमो पर आखरी में एक बार कुबीर भंडारी के दरवाजे पर चरू और देख लिया संसार हमने देखया सब मतलब के आर हमने देख लिया शिव तत्व की प्राप्ति भगवान

(49:01) शंकर की अविरल कथा शिव चर्चा तीन दिन की है एक एक घंटा का समय जो हमको मिला है आज अपन ने रूप चौदस के पूजन के महत्व को जाना है कल कथा में 2 बजे से 5:00 बजे तक में सुंदर दीपावली पूजन पड़वा का पूजन और दूज के पूजन का स्मरण करेंगे बड़े भाव से कथा सुनेंगे और 4 नवंबर से 8 नवंबर तक दीपावली के बाद में स्थान आईएमटी सेक्टर नंबर 6 फरीदाबाद हरियाणा में शिव महापुराण की कथा दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक श्रवण करेंगे और बाबा की अरल भक्ति को प्राप्त करेंगे 11 नवंबर से 17 नवंबर तक विसलपुर रोड रूपपुर कृपा पीली भीत उत्तर प्रदेश में अपन कथा श्रवण करेंगे 20

(49:45) से 26 नवंबर तक श्री सतुआ बाबा गौशाला डोमरी पड़ाव वाराणसी काशी में बाबा के धाम में बैठकर कथा को श्रवण करेंगे ऐसे सुंदर कथाओं का रसपान आप हम कर रहे हैं बड़े भाव से आनंद से कथा का तत्व ग्रहण कर रहे हैं आज द्वितीय दिवस की कथा विराम ले रही है कल फिर दोपहर दो बजे से 5 बजे तक कथा का आनंद लेंगे हर हर आरती का क्रम प्रारंभ होगा बड़े प्रेम से आप और हम सब मिलकर आरती का बड़े भाव से सभी लोग आरती का लाभ ले और अपने जीवन को जय शिव ओमकारा भोले भज शिव ओमकारा ब्रह्मा विष्णु सदा शिव भोले भोलेनाथ महा शिव हरधा धारा ओम हरे हरे हरे

(50:52) महादेव ए कानन चतुरानन पंचानंद राज बोले पंचानंद राज हर सासन गरुड़ासन हसन गरुणा सन रस वाहन साज ओम हरे हरे हरे [संगीत] महाद दो भुज चार चतुर भुज द बु अति सो है हो बोले दस बु अति सोहे तीनों रूप नि रखता भोले जी का रूप नि रखता त्रिभुवन जन मोहे हरे हर हरे महादेव अक्ष माला वन माला मुंड माला धारी है हो बोले मुंड माला

(52:03) धारी है त्रिपुरारी कसारी त्रिपुरारी कसारी करमा नाधारी ओम हरे हरे हरे महा सता पितांबर पग बोले भागा बर अगे सनकादिक गरुणा सनकादिक ब्रह्मा भूता संग हरे हरे हरे महादेव कर के मत का मंडल सृति सुल धरता [संगीत] बोले चक्र त्रिशूल रता जग करता जग हरता जग करता जग हरता जग पालन

(53:12) करता हरे हरे हरे महादेव ब्रह्मा विष्णु सदा शिव जानती अभि बका बोले जान विवेका प्रण अक्षर के माते अक्षर के ये तीनों का ओ हरे हरे हरे महादेव काशी में विश्वनाथ बरा नदी ब्रचा सुख समृद्धि और सौभाग्य का महा त्यौहार दीपावली के हर्ष अवसर पर श लेश सेवा समिति सिहोर के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय कथा प्रवक्ता भागवत भूषण परम पूज्य पंडित प्रदीप जी मिश्रा सिहोर वाले के पावन सानिध्य व श्रीमुख से दीपावली पूजन के महत्व व वर्णन पर आधारित श्री शिव चर्चा का निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर चिता

(54:16) बलिया हेमा सिहोर मध्य प्रदेश से सीधा प्रसारण देखिए 24 से 25 अक्टूबर प्रातः 9 से 10 बजे 26 अक्टूबर दोपहर दो


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