Day - 01 ll श्री शिव चर्चा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll सीहोर, मध्य प्रदेश

Day - 01 ll श्री शिव चर्चा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll सीहोर, मध्य प्रदेश

दीपावली महा उत्सव की विधिवत पूजन

कार्तिक मास में जो दीपावली के पांच दिवस की पूजन होता है। धन तेरस नरक,  रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजन और भाई दूज । इन पाच दिन तक पांच पर्वीय दीपावली महापर्व को मनाया जाता है । 

यह कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष के अंतर्गत आता है और देवताओं की जो दीपावली है अर्थात देव दिवाली शुक्ल पक्ष के अंतर्गत आती है। 

भगवान स्वयं वेदव्यास जी महाराज ने स्कंद पुराण, विष्णु पुराण, कुर्म पुराण, ब्रह्म विवत पुराण और अनेक पुराणों में कार्तिक के महत्व का वर्णन किया है।

कार्तिक मास, दामोदर मास के अंतर्गत भगवान शंकर की आराधना, लक्ष्मी जी की आराधना, श्री हरि नारायण की आराधना करी जानी चाहिए।

कार्तिक महात्म्य के अंतर्गत कथा आती है सत्यभामा जी ने भगवान श्री कृष्ण से पूछ लिया कि मेरा पूर्व जन्म कैसा था और मेरा कौन सा पुण्य ऐसा रहा है जिस पुण्य के कारण यह कल्प वृक्ष मुझे प्राप्त हुआ। जो वृक्ष देवलोक में देवताओं के पास विराजमान है। 

ऐसा कौन सा पुण्य हमने कर दिया जिस पुण्य के बल पर यह सुंदर कल्प वृक्ष हमें प्राप्त हो गया, आप हमें प्राप्त हो गए। भगवान कृष्ण मुस्कुराए और मुस्कुराकर दामोदर मास कार्तिक के महत्तम का वर्णन कर दिया। 

 सुनो सत्यभामा जी तुम्हारे पिता मायापुरी के एक सुंदर आनंद वन में रहने वाले एक ब्राह्मण परिवार से थे जिनका नाम देव शर्मा था । जिनका गोत्र अत्रि था। उन्होंने शिव पंचायतन की पूजन करी हमने पहले भी कहा कि शिव पंचायत की पूजन का फल बहुत होता है शिव पंचायत के पूजन का बड़ा आनंद आप लोगों के स्मरण में होगा एक एकादशी होती है वैष्णव एकादशी एक होती है स्मार्त एकादशी अर्थात सब वैष्णव एकादशी का मतलब यह होता है कि

(15:13) आप नारायण को मानने वाले हो आप केवल एक को मानने वाले हैं तो यह वैष्णव धर्म के अंतर्गत आ गया स्मार्थ की जो एकादशी होती है उसमें आप नारायण को भी भज रहे हो उसमें आप सूर्य भगवान को भी भज रहे हो उसमें आप दुर्गा महारानी को भी भज रहे हो उसमें आप गणेश जी महाराज को भी भज रहे हो उसम आप शंकर भगवान को भी भज रहे हो त एकादशी सबके लिए सबके आनंद हमारे पुष्टि मार्ग कहता है कि किसी भी रूप में एकादशी का व्रत करो पर करो हम तो पहले भी कहे बकरी जैसे चरो पर एकादशी करो कैसे भी हो पर होना चाहिए चाहे आप वैष्णव के भाव से करो चाहे स्मार्थ के भाव

(15:55) से करो पर एकादशी का फल अपने को मिलना चाहिए अब सत मामा जी ने पूछा कि मेरा पुण्य कौन सा ऐसा प्रबल हो गया जिस पुण्य के बल पर मुझे आप मिल गए सुंदर कल्प वृक्ष मुझे प्राप्त हो गया कहा आपके पिता एक ब्राह्मण कुल में मायापुरी में रहते थे देव शर्मा उनका नाम था और आंतरी उनका गोत्र था उनके अवस्था पूजन करते करते उनकी धर्म पत्नी और उनकी अवस्था निकलती चली गई अधी अवस्था बचपन जवानी और अधेड़ी और बुढ़ा अधेड़ी मतलब एक अवस्था निकलती चली गई 60 की अवस्था के आनंद में जब आप आपके पिता पहुंच रहे थे तब उनके मन में आया कि मेरी कोई औलाद नहीं मेरी कोई संतान

(16:45) नहीं और कुछ कृपा ये पंच देव शिव पंचायत में पांच देव विराजमान होते हैं पहले सूर्य है दूसरे नंबर पर मेरे देवती देव महादेव है तीसरे नंबर पर मां दुर्गा है चौथे नंबर पर बड़े आनंद से श्री गणेश जी महाराज हैं पांचवे नंबर पर भगवान श्री हरि भगवान श्री नारायण पांच देव विराजमान हैं पंचदेव विराजमान है और वो बैठे जिनकी आराधना स्वयं देव शर्मा कर रहे है सत भामा जी आपके पिता के मन में भाव आया कि मेरे घर में औलाद नहीं कोई औलाद आ जाए भगवान से प्रार्थना करते प्रतिदिन शंकर को एक लोटा जल समर्पित करते और जिस पंच में स्वयं शिव बैठे हैं तो शास्त्र

(17:32) कहता है उस पंचायत का निर्णय कोई नहीं करता उस पंचायत का निर्णय देवद देव महादेव ही करते शिव ही करते बोल बम का नारा है सारी समस्या का [संगीत] हल अब उसका निर्णय स्वयं भगवान शंकर करते हैं इसलिए आप लोगों से कहते हैं कि आपकी पूजन की जगह में शंकर का शिवलिंग होना जरूरी है भले आप ठाकुर जी की सेवा करो राधा रानी की सेवा करो लक्ष्मी जी की सेवा करो नारायण की सेवा करो ब्रह्मा जी की सेवा करो देवी की सेवा करो चाहे देवता की सेवा करो किसी की भी सेवा कर रहे हो किसी की पूजन कर रहे हो उसमें शंकर का होना जरूरी है जिस जगह शिव नहीं होता जैसे दक्ष

(18:15) प्रजापति के यज्ञ में शंकर नहीं थे तो वहां पर विघ्न ही आया जहां शिव नहीं है वहां विघ्न है शिव है तो विघ्न को टाल क्योंकि जिसका पुत्र ही विघ्न अर्था है जिनके बेटे ही स्वयं गणेश जी है विनता है तो फिर तो वि लेगा शंकर भगवान वहां पर विराजमान तो सारे दुख को हरने वाले सारे कष्टों को हरने वाले सारी बीमारियों को हरने वाले सारे तकलीफों को हरने वाले केवल वहां शंकर विराजमान है तो पंचायत में कोई निर्णय कोई नहीं करेगा पंचायत का निर्णय स्वयं शिव कर रहे हैं शंकर भगवान पर एक लोटा जल चढ़कर सूर्य को वर्ग देकर मां भवानी के चरणों में जल देकर स्वयं नारायण

(18:57) का स्मरण करकर स्वयं गणेश जी का पूजन कर कर देव शर्मा ने विनती करी और देव शर्मा ने विनय करा तो भगवान शंकर ने उसी समय पर उनके एक पुत्री के जन्म का बर प्रदान कर अब बेटी का जन्म हुआ जिसका नाम था गुणवती क्योंकि गुणवान थी वो जैसे पिता भगवान का भजन करते थे वो भी भजन करती थी जैसे पिता स्मरण करते थे वो भी स्मरण करती थी जैसे पिता मंत्र जाप करते थे वो भी मंत्र जाप करती थी जैसे पिता नाम जाप कर करते थे वो भी नाम जाप करते गुणवती भी भगवान की भक्ति में इतना लीन हो गई इतना लीन हो गई धीरे-धीरे समय निकला पिता के मन में भाव उत्पन्न हो गया

(19:38) पिताजी ने विचार करा कि मेरे घर में बेटी का जन्म हो गया इसकी शादी किससे करूं इसका विवाह किससे करूं अच्छा बेटी होती है ना तो बड़ा टेंशन उत्पन्न हो जाता है सभी लोगों का पर शिव महापुराण की कथा कहती है शंकर भगवान की अशोक सुंदरी का चरित्र कता है कि बेटी अगर घर में जन्म ले ले तो चिंता मुक्त होना चाहिए कि अब मेरे घर में बेटी ने जन्म ले लिया वो अपना भाग्य लेकर आईए तो हमारा भी भाग्य चमका दे बेटी हमारे घर में आई है तो वो भाग्य लेकर आई है तो भाग्य चमकाए लक्ष्मी सबको अच्छी लगती है आप में से कोई ऐसा है जिसको लक्ष्मी अच्छी नहीं

(20:13) लगती अरे बोलो तो सम किसी को धन अच्छा नहीं लगता हो लक्ष्मी अच्छी नहीं लगती हो ऐसा कोई है संसार में जितने आस्था चैनल पर कथा सुन रहे हैं जितने फ पर कथा सुन रहे हैं और जितने इस कुबेरेश्वर बाबा की पवित्र शिव चर्चा को श्रवण कर रहे है ऐसा कोई हो जिसको लक्ष्मी प्रिय ना सबको लक्ष्मी प्रिय एक छोटे से बच्चे को गोदी में लो ना और उस पहली बार कोई मिलता है तो उसको दन पकड़ा देता तो उससे द का नोट भी छड़ा तो छता नहीं छोटा सा लक्ष्मी किसको प्रिय मरने वाला मर कर भी जाता है ना तो भी उसकी छाती पर पैसा बटका जाता है लक्ष्मी उसको भी प्रिय जार तो भी

(20:51) लक्ष्मी कितनी प्रिय अब हम कहते हैं कि लक्ष्मी सबको प्रिय है पर से तो पूछे कि उसको क्या प्रिय है एक भिखारी से लेकर सेठ को भी लक्ष्मी प्रिय है एक कंगाल से लेकर करोड़पति को भी लक्ष्मी प्रिय है पर कोई लक्ष्मी से तो पूछे कि दुनिया तुझे इतना प्रिय लगती है दुनिया तुझे चाहती है दुनिया तुझे लेना चाहती है पर तू क्या चाहती है लक्ष्मी की प्रियता [संगीत] का कोई लक्ष्मी से पूछे शिव महापुराण की क में चरित्र आता है जब भगवान नारायण के चरणों में लक्ष्मी जी बैठी थी और नारायण से पूछा गया कि प्रभु आपने मुझे किससे प्राप्त करा तब भगवान नारायण ने कहा मैंने

(21:40) शिव से प्राप्त कर क्योंकि तुम्हारी माता ख्याति देवी तुम्हारा विवाह शिव से करना चाहती पर मैंने भगवान शंकर से कहा कि मैं लक्ष्मी से प्रेम करता हूं इस लक्ष्मी मुझे प्यार है तो तुम्हारी माता हे लक्ष्मी तुम्हारी मां ख्याति देवी ने तब तुम्हारा विवाह मेरे साथ करा तो लक्ष्मी से भगवान नारायण पूछ रहे नारायण लक्ष्मी से चर्चा कर रहे हैं बात कर रहे हैं कि तुम सबसे ज्यादा आदर सम्मान सत्कार किसका करती हो किसके कहने पर तुम किसी के घर पर जाती हो किसके कहने पर तुम उसके निहाल कर देती हो किसके कहने पर तुम उसका भंडार भर देती हो लक्ष्मी को कौन है

(22:17) जिसके कहने पर तुम उसके कहने पर चले जाती हो लक्ष्मी जी ने कहा अपने स्वामी भगवान नारायण से केवल एक वो है देवाधि देव महा देव जो कहते हैं मुझसे देवद महादेव ने मुझसे कहा है कि जो एक लोटा जल मेरे मंदिर में लेकर आए क्योंकि लक्ष्मी ने कहा था मैं नारायण के चरणों की दासी हूं तो मैं आपकी भी दासी हूं आप बताओ मैं कहां रहू भगवान शंकर ने कहा कहीं नहीं लक्ष्मी अगर कोई एक लोटा जल लेकर शंकर के मंदिर में आए जल चढ़ाकर जब वो घर जाए तो उसके लोटे के साथ उसके पीछे पीछे तू भी उसके घर में प्रवेश कर जाना उसका दुख हल उसका संकट संसार के लोग दुख नहीं हर सकते पर

(23:04) परमात्मा शंकर को चढ़ाया गया एक लोटा जल हमारे दुख को हर लेता है और देख लिया संसार हमने देख लिया सब मतलब के आर हमने देख लिया झूठे नाते झूठे इ झूठे नाते झूठे रिश्ते अरे झूठा है संसार हमने देख लिया सब मतलब के आर हमने देख लिया देख लिया संसार हमने देख लक्ष्मी जी कहती है मैं महादेव के कहने पर चली जाती महादेव कहते हैं मैं वहा जाती शिव के अनुकूल लक्ष्मी जाती शिव के कहने पर ल सुनो सत मामा जी आपके

(24:10) पिता देव शर्मा आपको प्राप्त करकर बड़े खुश थे सोचा किस बेटी का विवाह करू तब उन्हे स्मरण में आया मेरा एक मित्र है परव प्राण त्याग कर चले गया है उसका एक बेटा है जिसका नाम चंद्र है उसका एक बेटा है जिसका नाम चंद्र है मैं उससे विवाह कर देता हूं तुम्हारे पिता देव शर्मा ने तुम्हारा विवाह चंद्र से कर दिया समय बीता वो भी ब्राह्मण कुल का बालक इतना अच्छा बालक था जो भगवान की भक्ति में डूबा रहता था सत भामा जी समय निकल गया कुछ समय निकलने के बाद तुम्हारे पिता देव शर्मा और चंद्र दोनों किसी तीर्थ के लिए जाने लगे किसी तीर्थ की ओर अगरण होने लगे और

(24:59) तीर्थ की ओर जब जाने लगे तीर्थ में जाते जाते जाते जाते एक असुर की दृष्टि इन दोनों पर पड़ जाती है और एक राक्षस की दृष्टि पड़ने पर राक्षस ने विचार करा कि मैं कुछ भी करूं इनका संघार कर दूं इनको मार दूं क्योंकि दोनों भगवत भजन करने वाले हैं घर के अंदर परिवार के अंदर जो भगवान की भक्ति करने वाला होता है शिव मंदिर जाने वाला होता है भगवत भजन करने वाला होता है व्रत करने वाला होता है पूजन करने वाला होता है भगवान की भक्ति में डूबने वाला होता है दुनिया के लोग जले ना जले पर घर के लोगों के मन में भी आ जाता है ये आ गए बाबा जी

(25:34) अनया ये आ गई सिर वाला महाराज की चेली ये आ गए शंकर जी के भगत अ ये बहुत ज्ञान देंगे बहुत समझाएंगे अब बहुत बहुत सारी बातें लोग कहते हैं सीधी बात है तुम किसी मॉल में जाइए ना कोई तुम्हें नहीं ठोकेगा तुम फटी हुई जींस पहनो ना कोई तुम्हें नहीं ठोकेगा तुम कैसे भी रहो ना कोई तुम्हें नहीं ठोकेगा तुम भी आड़े े बनाओगे तो कोई ना टोकने वाला तुम कैसे भी कपड़े पहनो कोई नहीं टोके और जिस दिन तुमने धोती पहन ली जिस दिन तुमने मस्तक पर तिलक लगा लिया चंदन त्रिकुंड लगा लिया गले में रुद्राक्ष की माला पहन ली हाथ में रुद्राक्ष बांध लिया और जिस दिन गले में

(26:13) रुद्राक्ष पहना और त्रिकुंड लगाकर और बड़े प्रेम के साथ तुम मार्केट में से निकल कर बताओ सारी दुकान वाले मोहल्ले वाले कॉलोनी वाले सब तुम को देखेंगे ये कहां की आ ये है कौन इसकी दृष्टि क्या है इसका स्वरूप क्या है और अगर पहचान वाले मिलेंगे तो ये जरूर कहेंगे भैया किसके चक्कर में आ गए बाबा बनोगे क्या संत बनोगे क्या साधु बनोगे क्या तपस्वी बनोगे क्या लोग कह देते हैं कितनी जल्दी पहचान में आते और देखो संसार के वस्त्र पहने तो पहचान में नहीं आओगे पर परमात्मा के वस्त्र धारण करोगे तो पहचान में जरूर आओगे ये हमारे संस्कार हो

(26:59) ये हमारे संस्कार है ये हमारे जीवन का एक सुख है हमारे जीवन का एक आनंद है सत मामा जी तुम्हारे पिता और तुम्हारे पति दोनों जा रहे थे इतने में ही एक असुर की दृष्टि पड़ गई और उन्होंने उनको समाप्त कर दिया दोनों तीर्थ करने जा रहे थे भगवत भजन करने जा रहे थे इसलिए कहीं ना कहीं शिव तत्व को उन्होंने प्राप्त करा था इसलिए भगवान भोलेनाथ की कृपा हुई और नंदी लेकर शंकर भगवान पधारे और तुम्हारे पिता और तुम्हारे पति दोनों को नंदी पर बिठाकर शिव के लाश लेकर चले तुम अकेले हो सत भामा जी तुम्हारे आंखों में रुदन था नेत्रों से जल बह रहा था एक तरफ पिता चले

(27:42) गए दूसरी तरफ पति चले गए ध का जीवन कैसे जियोगी रोती बिलखती आंखों से आंसू बहाती करू तो करू क्या कहां जाऊ किससे कह जब व्यक्ति अकेला पड़ जाता है सब जगह से छूटकर अकेला जब हो जाता है तब उस महात्मा को याद कर उस भगवान को याद कितना विचित्र जमाना है पहले के समय में मंत्र चलते थे बीच के समय ऐसा आया था जब तंत्र चलते थे वो समय भी गया फिर एक समय आया जिसमें यंत्र चलते थे और आज कलिकाल का वो समय है जिसमें षड्यंत्र चलते हैं षड्यंत्र पहले मंत्र चलते थे फिर तंत्र चलते थे फिर यंत्र चलते थे और आज कलिकाल के अनुसार आज कल युग में लोग षड्यंत्र

(28:48) चलते हैं बस अंदर ही अंदर सोचते हैं ये ऊपर चढ़ रहा है इसको नीचे कैसे गिराया जाए ये आगे बढ़ रहा है इसको पीछे कैसे लाया जाए इसने इतना क्यों कमा लिया इसने ऐसा भजन क्यों कर लिया इसने स्मरण क्यों कर लिया इसकी एक दुकान कैसे बन गई इसकी शोरूम कैसे डल गया इसका कपड़े का काम कैसे चल गया इसके घर के पर्दे अच्छे क्यों है इसका छत अच्छा क्यों है इसका बेटा कहने में क्यों है इसकी बेटी कहने में क्यों है इसकी पत्नी अच्छी मिली इसका पति अच्छा मिला इसका परिवार अच्छा मिला ये फर सत्र चना प्रारंभ और याद रखना मंत्र तंत्र यंत्र और षड्यंत्र इस पर भी भारी है श्री

(29:24) शिवाय नमस्तुभयम का मंत्र इस पर भी भारी श्री शिवाय नमतु का मंत्र और शिव तत्व कहता है भगवान शंकर की पावन कथा कह रही है भगवान का ये पवित्र तीन दिवसीय शिव चर्चा में प्रथम दिवस की चर्चा कर रही है कि सत भामा जी तुम्हारी आंखों में जल भर गया किली क्या करती विचार कर कर समय बीतता गया कार्तिक का महीना आ गया दामोदर मास आ गया तुम कहां जाओ तुम्हारे स्मरण में आया कि मेरे पिता शंकर की आराधना करते थे इसलिए सतमा जी तुम शिव के मंदिर जाना प्रारंभ कर दी शंकर की आराधना करना प्रारंभ कर दी शिव की ऐसी आराधना करी कि शंकर को जल चढ़ाकर जब तुम

(30:08) आती थी तो एक आंवले के वृक्ष के नीचे जल चढ़ा देती थी आंवले के वृक्ष के नीचे से आती थी और घर में प्रवेश कर जाती थी प्रतिदिन तुम्हारा एक नियम बन गया शाम के समय कार्तिक का महीना और तुम्हें स्मरण नहीं आया कि कार्तिक का महीना है क्योंकि तुम वैधव्य जीवन जी रही थी आंखों में जल भरा हुआ था रो रही थी तुम्हें शुद्ध नहीं थी कब कार्तिक आया तुम्हें मालूम नहीं पड़ा कब दामोदर मास आया तुम्हें मालूम नहीं पड़ा और कार्तिक के महीने में तुमने दीप दान करना प्रारंभ करा प्रत्येक दिवस तुम शाम के समय पर शिव मंदिर में जाकर बेलपत्र के वृक्ष के नीचे जाकर तुम

(30:47) प्रत्येक दिवस आंवले के वृक्ष के नीचे जाकर तुम प्रत्येक दिवस पीपल के वृक्ष के नीचे जाकर एक दीप दान करने लगी और वो दीप दान का पुण्य फल इतना प्रबल हुआ कि एक दिन चलते चलते तुमको किसी असुर ने फिर देखा और तुम्हारे प्राणों को हर लिया प्राण तो तुम्हारे चले गए पर कार्तिक के महीने में जो तुमने तुलसी की अर्चना करी कार्तिक के महीने में जो तुमने आंवले के वृक्ष की अर्चना करी कार्तिक के महीने में जो तुमने शंकर भगवान को एक लोटा जल चढ़ाया शिव की ऐसी कृपा हुई शंकर प्रकट हुए तुम्हें नंदी पर बिठाए चलते चलते देवदिदेव महादेव ने पूछ लिया तुम्ह क्या चाहिए उसने

(31:30) कहा मेरा जीवन दुख में निकला मेरे पिता पति चले गए क्या चाहती हो मैंने सुना है महादेव जो आपसे मांगता है आप वो दे देते हो हां बोलो क्या चाहिए क्या मुझे अगले जन्म में नारायण मिल सकते हैं शंकर भगवान मुस्कुरा कर बोले क्यों नहीं मिल सकते तुमने कार्तिक महीने में मेरे मंदिर में जीव दन किया है एक लोटा समर्पित किया है तुमने तुलसा महारानी का पूजन किया है और कार्तिक के आनंद का जीवन जिया है इसलिए पर देता हूं अगला जन्म जब तुम्हारा होगा तुम्हारे लिए ही भगवान स्वयं नारायण द्वापर में कृष्णा उतार लेकर आएंगे और तुम उनकी अर्धांगिनी सत भामा

(32:17) बनोगे उनकी अर्धांग समा यह पुण्य हमारे जीवन का एक आनंदमय पुण्य है सतमा जी ने कई बार भगवान कृष्ण से पूछा ये पुण्य की प्राप्ति ये सुंदर कल्प वृक्ष की प्राप्ति मुझे कैसे हो गई तो भगवान ने कहा तुमने पांच दिवसीय जो कार्तिक महीने का कृष्ण पक्ष का जो आनंद और शुक्ल पक्ष का जो आनंद लिया है उसका ही फल य और उसी कार्तिक के महीने की दीपावली पर्व लोग कहते हैं दीपावली एक दिन की है शिव महापुराण की कथा में स्कंद पुराण के अंतर्गत शास्त्रों में वर्णन आता है कि देव दीपावली में भी पीछे पंचवी गन स्नान का फल मिलता है और कार्तिक महीने की इस

(33:00) अमावस्या के अंतर्गत भी पांच दिवसी दीपावली महापर्व का आनंद मिलता है धन तेरस रूप चौदस दीपावली पड़वा और दू ये पाच दिन तक दीपावली महापर्व चलता दीपावली महापर्व में हम क्या कर सकते हम क्या भगवान को दे सकते अभी आपको कहा कि सारी दुनिया लक्ष्मी को चाहती है पर लक्ष्मी से कोई पूछे कि तू क्या चाहते लक्ष्मी से कोई पूछे क्या चाहती तो लक्ष्मी जी भी कह देगी बस मैं इतना चाहती हूं कि महादेव के प्रति भगवान के चरणों के प्रति आपका विश्वास जहां पर बड़ा आपका विश्वास जहां प्रबल हुआ लक्ष्मी जी कहती है मैं व पर में हमेशा खड़ी हूं और तुम्हारे घर

(33:47) में [संगीत] हर पूजन का विधान बताते हुए स्वयं शास्त्र वर्णन करता है हमारे यहां धनतेरस के दिन की जो है उस धन तेरस के दिन की पूजन में आप अपने घर में जितनी भी अ लक्ष्मी की पूजन जब आप करें दीपावली की पूजन करें उसमें मुहूर्त देखिए मना नहीं मुहूर्त पूछिए मना नहीं कोई मुहूर्त लिखा हुआ है उसका स्मरण धनतेरस की पूजन करने में रूप चौस की पूजन करने में पड़वा की पूजन करने में दूध की पूजन करने में आपको मुहूर्त की जरूरत नहीं आप तो प्रदोष काल शाम का जो प्रदोष काल का समय होता है उस समय पर बड़े प्रेम के साथ में आनंद के साथ में एक सुंदर आनंद से अगर घर में मार्बल

(34:38) या कोटा फर्श वगैरह लगा हो तो कपड़े से ही पछ लो और अगर कच्चा मकान हो तो गोबर से थोड़ा सा लीप कर सुंदर आनंद के साथ में भगवान का जहां मंदिर देवालय शिवालय है बड़े आनंद से आपके घर में जो पूजन का जगह है उस पूजन के जगह पर थोड़ा सा लीप कर या कपड़ा फेर कर वहा आनंद के साथ सुंदर चोक पूर लीजिए और चोक पूर कर उसम थोड़ा सा चावल दाना या गेहूं का दाना रखकर उस पर एक चौरंग चौकी पाटा जो भी आप रख सकते हो उसको रखकर एक सुंदर वस्त्र बिछा वस्त्र बिछाकर एक सुंदर सी थाली में स्वस्तिक कंकू के रोली का एक स्वस्तिक बनाइए बनाकर उसको थाली के ऊपर उसको पाटे

(35:22) के ऊपर जो कपड़ा बछा है उसके ऊपर रख दीजिए रखकर घर में कोई चांदी का स हो चांदी का सिक्का ना हो चांदी का कॉइन ना हो तो अपना जो कइन आता है एक का सिक्का दो का सिक्का जो भी कइन आता है वो रख द और रखकर उसको जो मोली आती है लच्छा बांधने वाला हाथ में बांधने का जो नाड़ा आता है मोली होती है लच्छा उससे उसको हल्दी लगाकर लपेट और बाबा को थाली में रखकर सुंदर आनंद के साथ में माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए साथ दिए घी के लंबी बाती एक दिया तेल का तेल का दिया लक्ष्मी जी के लेफ्ट हैंड की जैसे लक्ष्मी जी को जब पूजन करने बैठोगे तो लक्ष्मी जी का मुख

(36:08) आपकी ओर होगा होगा कि नहीं होगा आप ऐसे बैठे हो तो लक्ष्मी का मुख आपकी ओर है तो दिया आएगा इस मतलब आप जब पूजन करने बैठोगे तो आपका जो सीधा हाथ होगा लक्ष्मी जी का वो उल्टा उस उल्टे हाथ की ओर एक तेल का दीप लगाकर लंबी बाती का और सात दिए लंबी बाती के घी के आटे के दिए वो एक प्लेट में थाली में रख लीजिए पूजन का सामान कंकू चावल रोली मोली हल्दी हल्दी की गांठ अमरवेल कमल गट्टा खड़ा धना गुड़ ये सब सामग्री रखकर कुछ भोग लगाने की सामग्री कुछ धूप बत्ती आदिक इत्र आदिक सामग्रियां रखकर पुष्प आधिक रखकर व जो कॉइन तुमने रखा है सिक्का तुमने रखा है

(36:57) सातो सीधे हाथ पर ल सातो दिए जो तुमने आटे के बनाए उसम लंबी बत्ती करक सीधे हाथ पर जला उल्टे हाथ पर तेल का दिया जलाकर पूजन की थाली में जो सामग्री रखी है जल का छटा देकर बड़े प्रेम के साथ वस्त्र समर्पित करकर और रोली चंदन मोली हल्दी जो भी है मेहंदी आदिक सब सामग्री समर्पित करकर पाच कमर बल के टुकड़े सात कमल गट्टा पांच अमर बल के टुकड़े सात कमल गट्टा पांच हल्दी की गठान यह सब अपने हाथों में लेकर मां लक्ष्मी से प्रार्थना करकर कोबरे शवर महादेव से विनती करकर शिव की आराधना करकर नारायण की आराधना करकर दामोदर भगवान की आराधना करकर मां लक्ष्मी की आराधना कर करर

(37:47) दोनों हाथों से समर्पित कंकू रोली उस सिक्के के ऊपर धीरे धीरे कर कर डाली हल्दी धीरे धीरे कर कर उस लिए और जो सात दिए आप भोग लगाने के बाद प्रसाद रखने के बाद में फिर जब सात दिए जो तुमने थाली में लिए है प्लेट में लिए है उससे माता लक्ष्मी की आरती कुरेश्वर महादेव का स्मरण करक आरती करिए आरती रख दो पर आरती को लेना नहीं है आरती भगवान की भगवान को सम आरती झोली पसार कर माता लक्ष्मी से प्रार्थना करिए मा मैंने कुबेरेश्वर बाबा से विनय करी है मैंने कुबेर भंडारी से विनय करी है मां आप नारायण के साथ कुबेर के साथ रिद्धि सिद्धि के साथ

(38:40) गणेश जी महाराज के साथ आप मेरे घर में पधार आप आइए आपका निवास बनाइए आप रुकिए मां हमें बहुत सारे अव हे लक्ष्मी माता हे नारायण हे शंकर हे ड़ दनी हे गणेश जी महाराज हे रिधि सिद्धि हे कु हमें बहुत अवगुण है कर हे मां हमने सुना है आपने शिव जी से जब वर मांगा था तो कहा था कि बाबा शंकर भगवान से लक्ष्मी जी ने कहा था मैं जाने को तो चली जाऊ प्रत्येक मनुष्य के घर में पर उसके घर में तो इतना अवगुण भरा हुआ है इतने दोष भरे हुए हैं इतना अपशब्द भरा हुआ है इतने ताने भरे हुए इतनी गालिया भरी हुई है इतना मन में घोट भरा हुआ है मैं इनको कैसे लक्ष प्रदान कर

(39:28) मैं इनको कैसे भंडार तब मां आपने तुरंत भगवान शंकर से कहा तो शिव जी ने कहा लक्ष्मी जब आप शिव की साक्षी में किसी के घर में प्रवेश करो तो अवगुण मत देखना उसके गुण देखकर प्रवेश कर [संगीत] जाना वो कहते हैं ना मेरे गिनियो ना अपरा ला श्री हमारे अवकल ना [संगीत] गिने अभी कथा में कथा में आपको वर्णन किया था कोई बहुत अच्छा है ना बहुत अच्छा है ना उसको ज्यादा घर के नहीं देना कितना अच्छा व्यक्ति है ना उसको ज्यादा घर के मत देखो घूर के मत देखो क्यों ज्यादा उसको घूर कर देखोगी तो उसमें अवगुण निकल जाए तुम कुछ ना कुछ अवगुण निकाल लो कुछ ना कुछ

(40:30) दोष निकालो और कोई व्यक्ति बहुत बुरा है ना बहुत बुरा है तु मैं बहुत बुरा लगता है ना थोड़ा उसको घूर कर देखना अच्छे से देखना अच्छे व्यक्ति को घूर कर मत देखो बुरे व्यक्ति को घूर कर देखो अच्छे से देखो तो यह पक्का है उस बुरे व्यक्ति में भी कोई गुण निकल ही जाएगा य प अच्छा है उसको ना देखिए जदा करना देखिए अच्छा है हम ज्यादा देखेंगे ना बहुत अच्छा होता है प्रथम प्रथम में तो जब एक दूसरे से प्रेम होता है स्नेह होता है तो कितने अच्छे लगते हैं रात रात दिन बात करें 24 घंटा बात करें आ घंटा बात करें रात को 9 बजे से जो चालू हो तो 2 बजे तक बात करें

(41:13) और फिर उनकी शादी हो जाए फिर फिर बात करें फिर तो खूब लड़ी मर्दानी वो फ फिर जो युद्ध चालू हुआ वो शिव कथा कह रही है भगवान शंकर की कथा कह रही है जो जिसम बहुत गुण है बहुत अच्छा है जो उसम तुम ज्यादा घड़ कर मत देखो उसमें अवग निकल जाएगा बहू पहले कितनी अच्छी लगती है बहुत बढ़िया सास कितनी अच्छी लगती है सब अच्छे लगते हैं फिर धीरे धीरे उसम अवगुण निकालता जाता है हमारी सास तो ऐसी है हमारी बहु तो ऐसी है अवगुण निकलता जाता है पहले घर कर ना देखिए अच्छा है ना उसको ज्यादा गुर कर नहीं दे और बुरा है ना उसको घर कर देखो उसमें कुछ ना कुछ गुण जरूर

(41:54) निले बुरे व्यक्ति में अच्छाई जरूर होगी नहीं सता कोई अच्छा परमात्मा निका शिव कथा कर रही है सुंदर पवित्र चरित्र कर रहा है भगवान के पावन चरित्र वर्णन कर रहा है स्कंद पुराण में कार्तिक महतम वर्णन कर रहा है और बड़े प्रेम से भगवान कह रहे हैं इस कार्तिक के महतम में इस कार्तिक के महत्वता में आज आप सबने धनतेरस पूजन की महत्वता को जा और यह पूजन पाच दिन तक आप जिस जगह पर पहले दिन पूजन कर रहे हो धनतेरस की जैसे आपने धनतेरस कुरेश्वर धाम की जो धनतेरस है वो 29 तारीख की रहेगी रूप 14 30 तारीख की रहेगी दीपावली जम के बोलो 31 तारीख की रहेगी 31 अक्टूबर

(42:50) गोवर्धन पूजन एक तारीख एक नवंबर ऐसे द दो तारीख ऐसा क्रम सुंदर यहां कुबेरेश्वर धाम की धरा पर रहे तो आप लोग जो पूजन करेंगे 29 तारीख को धनतेरस की प्रदोष काल कोई समय प्रदोष काल का देखकर बड़े प्रेम से लीप कर चौकी रखकर बड़े आनंद के साथ में कपड़ा बिछाकर उस पर थाली रखकर सुंदर भाव के साथ धन तेरस की पूजन करो और मेरे कुबरे शवर महादेव का स्मरण करो कुछ देर बैठकर क्योंकि लक्ष्मी को भी और कुबेर को भी देने वाला अगर कोई है तो वो देव अधिदेव महा वो देने वाले प्रयास करो भगवान शंकर की आराधना में जो सुख है शिव की भक्ति में जो आनंद है

(43:38) शंकर की आराधना करकर शंकर की साक्षी रखकर श्री शिवाय नमस्तुभयम हमने पहले भी कथा में कहा दीपावली के समय पर बाजार में भी जाओ तो दिवाली के समय पर वहां पर मार्केट में भी कहो कि भैया हमको एक स्टीगर चाहिए काहे का स्टीगर कहना श्री शिवाय नमतु का चाहिए क्या करोगे दरवाजे पर लगाना है क्यों क्योंकि हमने सुना है शिव महापुराण की विश्वर संहिता में लिखा है कि श्री शिवाय नमस्तुभयम बोलने वाले के मुख का मात्र दर्शन कर लो तो हमारे सारे पाप छीन हो जाते हैं हजारों यज्ञ का फल प्राप्त हो जाता है और हमारे कार्य सफल हो जाते हैं तो सामने वाला व्यक्ति जब दरवाजा बंद होगा

(44:19) उस पर श्री शिवाय नमतु लिखा होगा सामने वाला कोई भी आएगा पड़ेगा दरवाजा बजाएगा जितनी खड़ा रहेगा उतनी देर पड़ेगा श्री शिवाय नमतु तुम दरवाजा खोलोगे उसके मुख का दर्शन करोगे तो भी तुम्हारा कल्याण हो जाएगा दो फायदे हमारा लाभ उसम है शिव तत्व की प्राप्ति हो जब महालक्ष्मी आनंद के साथ में धनतेरस का पूजन करो क कल कथा में अपन रूप चौदस की पूजन की महत्वता जानेंगे फिर उसके आगे तीसरे दिन की कथा है दो बजे से पा बजे तक उसम अपन दीपावली पूजन को जानेंगे फिर उसमें अपन एकम की पूजन का जानेंगे गोवर्धन पूजन के दिन का महत्व की पूजन कैसे करना फिर उसका वर्णन अप दूध की

(45:06) पूजन का जानेंगे ऐसे अपन पूरे पांच दिवसीय पूजन की महत्वता का स्मरण करें पाच दिवस और मैंने तेरे ही भरोसे बाबा तेरे ही भरोसे हवा बच उड़ती जांगी बाबा डोर हतो छती ना मैं कटी जागी भोले मैं तेरी पतन शंभू मैं तेरी पता हवा विच उड़ती जावांगी बाबा डोर हैतू छटी ना शिव तत्व की प्राप्ति भगवान शंकर की प्राप्ति कितने आनंद के साथ और कभी भी ध्यान रखना लक्ष्मी पूजन जब भी भी करो तो

(46:10) शिव को याद जरूर कर भगवान नारायण को भी अगर लक्ष्मी जी है तो भगवान शंकर नहीं तो माता ख्याति देवी लक्ष्मी जी की मां तो लक्ष्मी जी का विवा भगवान शंकर से करना चाहती थ नारायण भगवान शिव की आराधना में लगे रहे पूछ लिया देवा देव महादेव ने नारायण क्या बात है अभी मेरी आराधना ज्यादा कर क्या हो क्या गया नारायण कते प्रभु वो ख्याति देवी लक्ष्मी जी की मां उनका विवाह आपके साथ करना चाहती आप चिंता क्यों कर आप क्या चाहते हो बोलो नारायण ने कहा लक्षमी मुझे नारायण लक्ष्मी में आप आप लक्ष्मी से विवाह करोगे लक्ष्मी आपसे विवाह करेगी लक्ष्मी जी से पूछा स्वयं

(47:03) भगवान शंकर जब लक्ष्मी मैया बेलपत्र के वृक्ष के नीचे झाड़ू बुवारी कर रही है बेलपत्र के वृक्ष के नीचे सेवा कर रही है शंकर भगवान प्रकट होकर स्वयं पूछते हैं गौरी शंकर शंकर पार्वती के साथ प्रकट होकर पूछते हैं क्या बात है क्या चाहिए क्या हो गया अब स्वयं भगवान शंकर ने लक्ष्मी जी से पूछा तुम्हे क्या चाहिए लक्ष्मी जी कहती है मुझे नारायण के चरण चाहि [संगीत] च भगवान शंकर ने पूछा लक्ष्मी तुम नारायण के चरणों में रहने को तैयार हो लक्ष्मी जी का शब्द था कि नारायण के चरणों में रहने को तैयार हो इतने में लक्ष्मी जी कहती है केवल नारायण के चरणों में ही नहीं जिसके

(47:47) हृदय में नारायण बैठा है उसके घर में रहने को भी तैयार हो जिसके हृदय में नारायण बैठा है जिसके हृदय में श्री हरि बैठे हैं जिसके हृदय में भगवान बैठे हैं उनके घर में रहने को मैं तैयार उनके घर में ये कार्तिक का महीना बड़े प्रेम से भगवान की विरल भक्ति धारण करते हुए दीप प्रज्वलन करिए और बड़े आनंद के साथ में पांच दिवसीय कार्तिक के महीने में सुंदर दीपावली महापर्व को मनाई हमारे कुबेरेश्वर बाबा की धरा पर भी दीपावली की रात्रि को लोग आते हैं इस कुर भंडारी के दरवाजे पर घी के 11 दिए लगाते हैं लोग अपने अपने घर की पूजन दिन शाम को कर कर रात्रि को निकल

(48:28) निकल कर आते हैं और पूरे प्राग में कहीं जहां उनका मन करता है वहां बैठकर 11 दीप लगा कर बाबा कुर भंडारी के चरणों में झोली पसार कर प्रणाम करते हैं बाबा भंडार और दूसरे दिन बाबा का खजाना लेकर यहां से चले 31 तारीख की रात्रि को लोग आसपास के गांव के शहर के सभी भक्त लोग यहां पहुंचते बाबा के य द लगाने के लिए और सुबह बाबा काजा [संगीत] भक्ति भजन कर जितनी आराधना भगवान शंकर की करोगे शिवनारायण की भगवान की भक्ति करोगे दामोदर मास में कार्तिक मास में दीपदान जितना कर सकते हो जितना दीपदान कर सकते हो उतनी श भक्ति को धारण और धनतेरस रूप चौदस दीपावली पड़वा दूध ये

(49:22) पांच दिन इधर के और पांच दिन देव दीपावली के हम उसका भी वर्णन करेंगे तीसरे दिन की कथा में एक बेल पत्री एक पीला चावल हल्दी में रंगा हुआ पीला च और एक बेलप एक कमल गंड भगवान शंकर की शिवलिंग पर समर्पित करने का प्रयास कर परंतु यह बेल पत्री पीला चावल और एक कमल गड्डा ये पांच दिन तो तुम ये दीपावली के पर्व के और पांच दिन जो पच भीगन आएगा पूर्णिमा का समय जब आएगा उस समय पर अगर आपने ये दोनों समय पर एक बेल पत्री एक पीला चावल एक कमल गट्टा भगवान शंकर के शिवलिंग पर समर्पित करना प्रारंभ करा य पांच दिन इधर के पाच दिन उधर ग आपको कभी कहना नहीं

(50:16) पड़ेगा किसी के आगे कि भैया मुझे 500 की जरूरत है तेरी जेब और तेरा घर भरा ही खाली नहीं रह सकता और बाबा से प्राथना हम यही करते हैं हमेशा करते हैं किसी स्त्री की गोद खाली ना रहे और किसी पुरुष की जेब खाली ना रहे बाबा भरता जरूर है एक बल पत्री एक पीला हल्दी का चावल एक दाना चावल और एक जम के बोलो कमल का एक कमल भगवान शंकर के शिवलिंग को समर्पित करिए भगवान शंकर के शिवलिंग को समर्पित बड़े भाव के साथ में आनंद के साथ में और दिल से बाबा से को पांच दिन ये दीपावली के समय प धनतेरस रूप चौ दीपावली पड़वा और दूध और उधर भी जब पूर्णिमा आएगी उसके पहले उसका

(51:01) वर्णन हम कर देंगे फरीदाबाद की कथा में उसका पूरा वर्णन करेंगे फरीदाबाद की कथा में क्या उसना है ये पांच दिन इधर के पाच दिन उधर बड़े प्रेम से बाबा की ये पवित्र आज धन तेरस के पूजन का अपने विधान जाना कल सुबह 9 बजे से 10 बजे तक फिर बाबा की पवित्र कथा का आनंद लेते हुए अपन आनंद के साथ रूप च के पूजन का विधान जानेंगे और अभी आरती का क्रम प्रार हो रहा है आप और हम सब मिलकर आरती का क्रम करेंगे तीसरे दिन की जो कथा रहेगी वो 2 बजे से रहेगी कल की कथा सुबह 9 बजे से 10 बजे तक रहेगी बड़े भाव के साथ आनंद के साथ दोनों हाथ उठाकर हार

(51:44) महादेव सुंदर आरती नीचे से सुंदर आरती प्रारंभ हो रही है बड़े भाव के साथ आरती का क्रम जय शिव ओमकारा भोले भज शिव रा ब्रह्मा विष्णु सदा शिव बोले भलेनाथ महाशिव हरदा के दरा ओम हर हर हरे महादेव कानन [संगीत] चतुरा पंचानंद राज प चानन राजे ह सासन गरुड़ासन सासन करणा सद वाहन साध ओ हर हर हरे महादेव दो भुज चार चतुर

(52:52) भुज द बति अति सो है ले दस बुज अति सोहे तीनों रूपने रखता भोले जी का रूप नि रखता त्रिभुवन जन मोहे ओम हर हर हर महादेव अक्ष माला बन माला मुनि माला रानी बोले कुण माला दारी त्रिपुरारी कसारी त्रिपुरारी कंसारी करमाला दारी ओम हर हर हर महादेव सता बन पितावर बागबर अे

(53:57) बोले बागा पर अ सन काख गिक सनकादिक ब्रिक भिक संग हर हर हर महाद करके मद का मल चरत सुल धनता बोले च कृत सुल जरता जग करता जग हरता जग करता जग अरता जग पालन करता ओम हरे हरे हरे महादेव ब्रह महा विष्णु सदा शिव जानती अवेका बोले जा अवेका

(55:01) प्रणर के माले अक्षर के [संगीत] वा मन हर हर [संगीत] महादेव काश में विश्वनाथ विराज न ब्रम पड़ता है खेलता है झूलता उछलता है दौड़ता कभी कभी दौड़ कर आता है आगे आगे बढ़ता है इंडिया अमूल दूध पीता है इंडिया सिलेक्शन कमेटी को एक


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