विभीषण की पुत्री त्रिजटा रामायण की एक पात्रा त्रिजटा लंका की मुख्य साध्वी, राक्षसी प्रमुख थी। जिसका जन्म तो राक्षस कुल में हुआ था लेकिन उसका हृदय देवियों के समान पवित्र था। श्री रामचरित मानस में त्रिजटा एक लधु स्त्रीपात्र है । यह पात्र आकार में जितना ही छोटा है, उसकी महिमा उतना ही गौराव मण्डित है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि श्री रामचरित मानस के हर छोटे-से-छोटे पात्र भी विशेषता संपन्न है। त्रिजटा की बात करें तो मन्दोदरी ने त्रिजटा को सीताजी की देख-रेख के लिए उसे विशेष रूप से सुपुर्द किया था। वह राक्षसी होते हुए भी सीता की हितचिंतक थी। सम्पूर्ण ‘श्री रामचरित मानस’ में केवल दो काण्ड सुन्दरकाण्ड और लंका काण्ड में सीता-त्रिजटा का वर्णन मिलता है उनके वार्तालाप के रूपमें त्रिजटा का वर्णन है। परंतु इन लघु वार्तालापों में ही त्रिजटा के चरित्र की भारी विशेषताएँ दिखाई दी हैं। पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदासजी ने मानस के सुन्दरकाण्ड की एक चौपाईं में त्रिजटा का स्वरूप इस प्रकार बतलाया गया है : त्रिजटा जाम राच्छसी एका ।* राम चरन रति निपुन बिबेका ।।* (रा.च.मा ५। ११ । १) जहां तुलसीदास है ...
प्रदीप मिश्रा के शिव पुराण के टोटके | Pradeep Mishra Ke Totke, Upay “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं ” आप में से अधिकांश लोगो ने ऊपर दिए श्लोक को जरूर सुना होगा और इसे सुनकर आपके दिमाग में सिर्फ एक ही शख्सियत की छवि उभर कर आई होगी और वो होगी कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा (Pradeep Mishra) की। जी हां दोस्तो मध्य प्रदेश राज्य के मशहूर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा (Pandit Pradeep Mishra) आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है । उनकी कथा और टोटकों (Totke) के चर्चे हर जगह आपको सुनने मिल जाएंगे। यही वजह है कि वह आए दिन सुर्खियों का हिस्सा बने रहते है। तो आज के इस आर्टिकल में हम आपको कथावाचक प्रदीप मिश्रा (Pradeep Mishra Ke Totke) के टोटके, प्रदीप मिश्रा के शिव पुराण के टोटके PDF के बारे में बताएंगे तो जानने के लिए आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े पंडित प्रदीप मिश्रा का जन्म सन 1980 में मध्यप्रदेश के सीहोर में हुआ था। मिश्रा जी (Mishra Ji) हमेशा श्री राम कथा, श्री मद भागवत कथा और शिव पुराण (Shiv Puran) कथा का कथावाचन करने के साथ साथ लोगो की कई गंभीर समस्याओं को हल करने के...
जानिये क्यों शास्त्रों में वर्जित है शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण करना? एक तरफ भगवान् को अर्पित किया गया प्रसाद पवित्र माना जाता है वहीँ दूसरी तरफ भगवान् शिव (Lord Shiva) को शिवलिंग (Shivling) के माध्यम से चढ़ाये गए प्रसाद को खाने की शास्त्रों में मनाही है। हजारों और लाखों की संख्या में शिवलिंग (Shivling) पर प्रसाद चढ़ाया भी जाता है और उसी को फिर खाया भी जाता है बिना यह जाने हुए कि ऐसा करना शास्त्रों में वर्जित है। आज हम शिव पुराण (Shiv Purana) में वर्णित इस तथ्य को उजागर करेंगे कि आखिर क्यों शिवलिंग पर अर्पित किये गए भोग को खाने से सख्त मना किया गया है साथ ही यह भी बताएंगे कि ऐसे कौन से शिवलिंग है जिनपर अर्पित किये गए भोग को शिव भक्त खा सकते हैं। शिव पुराण के 22वें अध्याय में वर्णित इस श्लोक में यह स्पष्ट उल्लेख मिलता है : “चण्डाधिकारो यत्रास्ति तद्भोक्तव्यं न मानवै:। चण्डाधिकारो नो यत्र भोक्तव्यं तच्च भक्तित:।।” भावार्थ : जिस भी स्थान पर चण्ड का अधिकार दिखाई पड़ता है उस स्थान पर शिवलिंग पर अर्पित किये गए प्रसाद को ग्रहण नहीं करना चाहिए। ज...
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