Day - 05 ll श्री शिव महापुराण कथा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll धमतरी, छत्तीसगढ़

Day - 05 ll श्री शिव महापुराण कथा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll धमतरी, छत्तीसगढ़ - YouTube

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(00:00) सना को समर्पित श्री शिव महापुराण कथा का ग्राम कांटा कुडी कुकरेल धमतरी छत्तीसगढ़ से लाइव बोलिए गणेश भगवान की जय जय जय श्री राधे सभी भक्तों को हर हर महादेव सादा जय श्री कृष्णा श्री शिवाय नमस्तुभयम पाच दिवसीय सुंदर श्री स महापुराण की अलौकिक दिव्य कथा हम सभी पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में सवण कर रहे हैं निश्चित ही यह हम सभी का सौभाग्य है बाबा भोलेनाथ की कृपा से हम सभी को आस्था चैनल के माध्यम से य फसबुक के माध्यम से और काटा कुरी कुरी डी कुकरेल धमतरी छत्तीसगढ़ की इस पावन धारा से सुंदर अलौकिक दिव्य कथा श्रवण करने का श अवसर प्राप्त हुआ और

(00:54) देखिए एक छोटी सी सुंदर लघु कथा जो हमें सिखाती है किस प्रकार से हमें लोगों की सहायता भी करना चाहिए लोगों का विश्वास भी जीतना चाहिए और निरंतर हमें किस प्रकार से भगवान की भक्ति में लीन रहना चाहिए एक छोटी सी कहानी तीन दोस्तों की ज्ञान धन और विश्वास यह तीनों बहुत ही अच्छे दोस्त थे तीनों में बहुत ज्यादा प्रेम था एक बार किसी कारण से तीनों को अलग होना पड़ रहा तो तीनों ने एक दूसरे से सवाल किया कि आज के बाद हम कहां मिलेंगे तो इस पर ज्ञान ने बोला कि मैं मंदिरों और किताबों में मिलूंगा धन ने कहा मैं अमीरों के पास मिलूंगा विश्वास चुप था विश्वास ने उसके

(01:44) चुप रहने का कारण किसी को नहीं बताया लेकिन ज्ञान और ज्ञान और धन ने उससे चुप रहने का कारण पूछा तो तब उसको उसको विश्वास ने बताया कि मेरा चुप रहने का कारण केवल इतना है कि अगर एक बार मैं यहां से चला गया तो मैं फिर किसी को दोबारा नहीं मिलूंगा अर्थात विश्वास एक ऐसी चीज है जो हम ही बनाते हैं और हमें बिगाड़ हैं बस हमें ऐसा ध्यान रखना चाहिए कि किसी का विश्वास नहीं टूटे निरंतर हमें ऐसे कार्य करते रहना चाहिए ऐसा भाव अपने हृदय में हम हमशा हम सभी को संजोना चाहिए और यह बाबा भोलेनाथ की भक्ति हमें केवल और केवल विश्वास करना सिखाती है पूज्य

(02:39) गुरुदेव ने हम सभी को विश्वास की कथा श्रवण कराई है विश्वास से ही इस जगत के सारे कार्य होते हैं विश्वास से ही सारी कार्य संभव होते हैं और आप सभी को ज्ञात है कि किस प्रकार से यह वनवासी क्षेत्र में पूज्य गुरुदेव ने सभी को यह कथा श्रवण कराकर कर निश्चित ही यह पुण का कार्य करा है और निरंतर हम सभी को इस तरह के प्रयास अपने देश हित में अपने समाज हित में अपने सनातन धर्म के हित में हमेशा करते रहना चाहिए और हम सभी को एकजुट होकर यह प्रयास करना चाहिए देखिए आप सभी को ज्ञात है सिद्धपुर नगरी सिहोर की पावन धारा पर जो विशाल कुबरे शवर धाम की स्थापना होने

(03:29) जा रही है ये एक ऐसा धाम बनने जा रहा है जो 12 ज्योतिर्लिंग के मध्य में केंद्र में स्थापित होगा कंकर शंकर की यह पावन धरा कंकर शंकर की यह पावन भूमि जप स्थली है तप स्थली है साधना स्थली है आराधना स्थली है भगवान की कृपा दृष्टि इस धरा पर हमेशा विद्यमान होती है भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो भक्त कोई नंगे पैर पैदल चलकर आता है कोई घुटनों के बल पैदल चलकर जाता है कोई दंडवत प्रणाम करते हुए पैदल पहुंचता है तो यह लोगों की श्रद्धा जुड़ी है जब उनकी आस्था प्रबल हो जाती है जब उनके भाव प्रबल हो जाते हैं तो भक्त इस प्रकार के मनोरथ पूर्ण करते हैं

(04:19) और निरंतर ही भगवान को याद करते हैं देखिए कंकर शंकर की वह पावन धारा इतनी पावन है इतनी पवित्र है इतनी सिद्ध है कि भक्त वहां पर पहुंचते हैं और उस धरा पर पहुंचने के बाद लोगों की भक्तों की मनोवृत्ति बदल जाती है अगर मन कितना ही अशांत क्यों ना हो कुबेर भंडारी के चरणों में पहुंचने के बाद एक सुकून हमें प्राप्त होता है एक शांति हमें प्राप्त होती है एक अजीब सा अनुभव हम सभी को महसूस होता है क्योंकि इस धरा पर क्यों नहीं होगी क्योंकि भगवान की कृपा दृष्टि इस धरा पर हमेशा विद्यमान होती है कई कथाओं की आवाज वह धुनि वातावरण में हम सभी को घुल मिलकर

(05:13) ऐसा महसूस कराती है कि मेरे भोलेनाथ हम सभी के साथ में है हम सभी का हाथ पकड़ के रख रखा है यह वातावरण हम सभी को बताती है और प्रतिदिन भक्तों का जो ताता लगा रहता है उस धरा पर पहुंचने के बाद भक्त निरंतर अखंड जाप करते हैं श्री शिवाय नमस्तुभयम का जाप निरंतर अखंड रूप से करते हैं और यही धुनि पूरे वातावरण को पूरे वायुमंडल को शुद्ध कर देती है देखिए प्रभाव पड़ता है ऐसा शिव महापुराण में भी लिखा हुआ है एक प्रभाव पड़ता है अगर श्री शिवाय नमस्तुभयम जाप करने वाला व्यक्ति आपके सामने से भी निकल जाता है आप उसके मुख रविंद का दर्शन कर लेते हैं तो निश्चित ही

(06:02) आपने जीवन में जितने पाप करे हैं वे सारे पापों का समन हो जाता है ऐसा शिव महापुराण की कथा में लिखा है जो हम सभी को पूज्य गुरुदेव ने बताया है इतना पावन पवित्र यह जाप है तो भक्त निरंतर उस जाप का मंत्र जाप निरंतर उस धरा पर करते हैं और आप सभी को ज्ञात है सेवा का भाव श्री विठल सेवा समिति के मन में निरंतर सुचारू रूप से चलता आता है पहले भी हम सभी ने देखा है श्री विठ्ठले सेवा समिति के सानिध्य में सेवा के कार्य हमेशा चलते हैं चाहे कोरोना काल महामारी जैसी भयंकर बीमारी क्यों ना हो या फिर किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत परेशानी क्यों ना हो श्री विट्ठले सेवा

(06:52) समिति हमेशा बढ़ चढ़कर भाग लेती है हमेशा बढ़ चढ़कर कार्य करती है आप सभी को ज्ञात है कि कोरोना काल महामारी के चलते हुए भी श्री विठ्ठले सेवा समिति ने भोजन भंडारा पेक कर कर भक्तों को पहुंचाने का कार्य करा था साथ में आप सभी को ज्ञात है कोरोना काल महामारी में के चलते हुए 10 ऑक्सीजन जनरेटर भी पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में हॉस्पिटल जिला चिकित्सालय सिहोर में पहुंचाए गए थे ताकि के भक्तों को किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत परेशानी नहीं हो और भी इस तरह के सेवा के कार्य श्री विठल सेवा समिति करती है भोजन भंडारा जो कि निशुल्क रूप से चलाया जाता है जिसका

(07:42) किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है केवल भक्त जो आजीवन भोजन भंडारे के सदस्य बनते हैं 000 की सहयोग रासी देकर उसके उससे ही यह भोजन भंडारा सतत रूप से 365 दिन चल है जिस पर भक्त लाखों की संख्या में हजारों की संख्या में प्रतिदिन भोजन भंडारे का आनंद लेते हैं और अपने जीवन को कृता में करते हैं आनंद में करते हैं सुंदर आप सभी को ज्ञात है एक प्राथमिक उपचार केंद्र श्री विठल सेवा समिति के सानिध्य में निशुल्क रूप से चलाया जाता है जिसका जिसम दवाई गोली भी निशुल्क रूप से वितरण की जाती है साथ में आप सभी को ज्ञात है दो एंबुलेंस भक्तों की सुविधा के लिए 24

(08:35) घंटे उपलब्ध रहती है साथ में एक और प्राथमिक उपचार केंद्र श्री विठल सेवा समिति के सानिध्य में बनाया जा रहा है पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में बनाया जा रहा है सर्व सुविधा युक्त यह हॉस्पिटल बनाया जाएगा जिसमें भक्तों को किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत परेशानी नहीं हो इस प्रकार का ध्यान रखा जा रहा है साथ में आप सभी को ज्ञात है गौ माता की सेवा जो कि प्रतिदिन सुचारू रूप से चालू रहती है जिस पर एक और भव्य गौशाला का निर्माण कर और चालू कर दिया गया है साथ में आप सभी को ज्ञात है कि जो 251 कमरों की भव्य विशालतम धर्मशाला बनने जा रही थी उसका निर्माण

(09:22) कार्य बढ़ाते हुए पूज्य गुरुदेव ने 351 कमरों की यह भव्य विशाल धर्मशाला बनाई जा रही है जिसका निर्माण कार्य सुचारू रूप से चल रहा है ताकि के भक्त बड़े ही आराम से वहां पर रुक सके और भगवान का भजन कीर्तन स्मरण करकर अपने जीवन को कृतार्थ में कर सके आनंद में कर सके ऐसे सारे पावन पुनित कार्य श्री विठ्ठले सेवा समिति के सानिध्य में सुचारू रूप से चालू रहते हैं आप भी इन पावन पुनीत कार्यों से जुड़कर अपने जीवन को कृतार्थ में कर सकते आनंद में कर सकते हैं साथ में देखिए पूज्य गुरुदेव ने एक संकल्प लिया था कि सभी वनवासी क्षेत्र के लोगों के बीच में मैं

(10:10) जाकर कथा श्रवण कराऊं क्यों नहीं क्योंकि हम और आप तो बड़े-बड़े शहर में जाकर या फिर टीवी चैनल के माध्यम से कथा श्रवण कर सकते हैं पर यह वनवासी क्षेत्र के लोग बाग ये कहीं पर भी अपना दैनिक कार्य छोड़कर नहीं जा सकते देखिए प्रतिदिन यह मेहनत करते हैं प्रतिदिन अपना कार्य करते हैं और उससे ही यह धन अर्जित करकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं इसलिए पूज्य गुरुदेव ने एक बड़ा ही सुंदर संकल्प लिया कि क्यों ना इन वनवासी लोगों के बीच पर जाकर कथा श्रवण कराई जाए और सभी भक्त इस कथा का आनंद ले सके अपने पूर्वजों को उतार सके 16 सरात के इन महत्त्वपूर्ण पांच

(11:04) दिनों में आज विराम दिवस की हम विराम दिवस की ओर हम हम सभी चलेंगे लेकिन मेरा निवेदन रहेगा आप श्री विठल सेवा समिति को इस प्रकार का सहयोग अवश्य प्रदान करते रहे जिससे आने वाले समय में भी इस प्रकार के अनूठे आयोजन श्री विलेश सेवा समिति और पूज्य गुरुदेव करवा सके आप अपना सहयोग अवश्य प्रदान करें इसी बीच में पूज्य गुरुदेव का आगमन हो चुका है सुंदर गुरु वदरा सुंदर गुरु वजन हम सभी श्रवण करेंगे जय जय श्री राधे हर हर महादेव श्री शिवाय नमोस्तु गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा गुरुर साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः

(12:02) कमाल कर दिया रे मालामाल कर दिया कमाल कर दिया रे मालामाल कर दिया सिहोर वाले गुरु जी ने कमाल कर दिया सिहोर वाले गुरु जी ने कमाल कर दिया कमाल कर दिया रे माला माल कर दिया कमाल कर दिया रे मला माल कर दिया सिहोर वाले गुरुजी ने कमाल कर दिया सीहोर वाले गुरु जीी ने कमाल कर दिया [संगीत] ई तोई हम मंदिर जावा नाही ई हम मंदिर जावा

(13:13) एक लोटा जल बेल पतरी चढ़ावा एक लोटा जल बेल पत्री चढ़ावा बेल पतरी ने हो बेल पत्री ने हो बेल पत्री चढाई ने का माल कर दिया सिहर वाले गुरु जी ने कमाल कर दिया सिहर वाले गुरु जी ने कमाल कर दिया कमाल कर दिया रे मला माल कर दिया कमाल कर दिया रे मला माल कर दिया सिहोर वाले गुरु जी ने कमाल कर दिया सिहर वाले गुरु जी ने कमाल कर दिया [संगीत] [संगीत] [संगीत]

(14:21) [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] बोलिए परम पूज्य गुरुदेव की जय जय जय श्री राधे सभी भक्तों को हर हर महादेव सादा जय श्री कृष्णा श्री शिवाय नमस्तुभयम पूज्य गुरुदेव का आगमन हो चुका है गुरुदेव व्यासपीठ पर मसीन हो चुके हैं आप सब की तरफ से व्यासपीठ को नमन करते हुए हम सबके प्रिय हम सबके लाड़ले ठाकुर कलू जी महाराज के चरणों में नमन करते हुए परम सदे परम आदरणीय विश्व विख्यात पूज्य गुरुदेव के पावन चरणों को नमन करते हुए और आप सभी शिव भक्तों के चरणों में नमन करते हुए सुंदर आज कथा के विराम दिवस पर हम सभी प्रवेश करेंगे उससे पहले

(15:11) मैं निवेदन करना चाहूंगा पूर्व सांसद श्री मोहन जी मांडवी बड़े ही आधार सम्मान से मंच पर पधारे व्यासपीठ का पूजन करें और पूज्य गुरुदेव से आशीर्वाद प्राप्त करें सुंदर आज कथा के हम सभी विराम दिवस पर पंचम दिवस की ओ बढ़ेंगे मेरा निवेदन रहेगा जो भी आस्था चैनल के माध्यम से य फेस के माध्यम से कथा श्रवण कर रहे हैं देखिए य एक अनूठा आयोजन है जिस पर पूज्य गुरुदेव द्वारा अपने मन के विचारों को रखते हुए अपने मन के भाव को रखते हुए सुंदर यह वनवासी क्षेत्र में कथा श्रवण कराने का अपना भाव को निखते हुए आज विराम दिवस की ओर हम सभी बढ़ रहे हैं

(15:59) लेकिन मेरा निवेदन रहेगा इस प्रकार के और अनूठे आयोजन हो सके इसमें आप सहयोग अवश्य प्रदान करें हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर श्री विलो सेवा समिति को सहयोग प्रदान करें जिससे इस प्रकार के अनूठे आयोजन हो सके और हमारे वनवासी क्षेत्र के लोग भी निरंतर भगवान की भक्ति में लीन होकर अपने जीवन को कृतार्थ में कर सके 16 सरात के पाच दिन इसलिए महत्त्वपूर्ण थे यह भी अपने पूर्वजों के निमि कथा श्रवण करें और यह भी अपने पूर्वजों को तार सके इसलिए यह पाच दिन बड़े ही महत्त्वपूर्ण 16 सरात के चल रहे थे और इसमें आप सभी को ज्ञात है अन्य क्षेत्र श्री विठ्ठले सेवा समिति द्वारा

(16:52) वनवासी क्षेत्र में निशुल्क रूप से लगाया गया जिसमें सभी भक्त भोजन ब का आनंद लेकर अपने जीवन को कृता में कर सके आनंद में कर सके मेरा निवेदन रहेगा जो भी भक्त अपनी सगसी मंदिर गौशाला वृद्ध आश्रम अन्य क्षेत्र बाबा कुबरे शवर धाम हेतु समर्पित करना चाहते हैं या फिर इस प्रकार के अनूठे आयोजनों में सम्मिलित करना चाहते हैं वे टीवी स्क्रीन पर श्री विठल सेवा समिति के दो अकाउंट नंबर एक्सस बैंक का और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का चल रहा है दोनों में से किसी भी अकाउंट में अपनी सग राशि जमा करकर अपना नाम पर भेज सकते हैं इसी क्रम में

(17:34) जिन दानदाताओं ने अपनी सग राशि प्रदान करी उन सभी पवन सारी पु्य सारी धन दाताओं के नाम सरस्वती यादव बिलासपुर छत्तीसगढ़ से सु 500 करण जीपा की तरफ से सुधा परमानंद जी की तरफ से मोहन लाल जी की तरफ से सिरसा हरियाणा सेल जी की तरफ से गोंदिया मराठ राम प्रताप जी राम प्रताप जी कुपा की तरफ से कान उत्तर प्रदेश से की अशोक कुमार जी की तरफ से बसी उत्तर प्रदेश से सुधर ₹ की आपने सत की सोपना बन जी की तरफ से सुंदर की सग आपने सत की देवकी जी की तरफ से दिल्ली से सुर 551 उन सु भागीरथ अभी मन जी पाटिल की तरफ से 00 की सरासी इस अनूठे आयोजन में आपने अन्य क्षेत्र में समर्पित

(18:16) की बहुत बहुत बधाई सुंदर विचार आपके सुद सगसी आपने समर्पित की भागीरथ अभी मन जी पटेल सुंदर ससी आपने समर्पित की दीपक सिंह जी की तरफ से 00 खेम चंद जी चौरे की तरफ से रंजीत जी कुश की तरफ से शिवपुरी मध्य प्रदेश से सु 00 कीत की भूपाल सिंह जी की तरफ से दिल्ली से सु 00 राकेश जी की तरफ से फतेहाबाद से सुधार सविता जी की तरफ से जगमोहन जी शर्मा की तरफ से सुधा गिरीश चंद जी चौधरी की तरफ से सु सोनी कुमारी जी की तरफ से मुजफ्फरपुर बहार की ससी आपने बाबा कुमरे समत की बहुत बहुत बधाई विचार आपके आपने समत की रोहित सीता जी शकला की तरफ से लखन उत्तर प्रदेश

(18:56) स्वर्गीय पन्ना लाल जी पवार की स्पति में उज्जैन मध्य प्रदेश दपा जी गुप्ता की तरफ से सिंधू जी लाने की तरफ से मनोरमा सिंह जी की तरफ से चंद बहन सिंह जी की तरफ से दिल्ली सीताराम जी मुगल की तरफ से हरियाणा प्रमोद कुमार जी बिहार क कुमार जी दीक्षित की तरफ से प्रद ना जी की तरफ से नद ता जी मिश्रा की तरफ से मंजू देवी जी की तरफ से सनर उत्तर प्रदेश से सिकंदर सिंह जी की तरफ से मध्य प्रदेश मोहन कुमार जी की तरफ से लीला देवी जी की तरफ से हरि उतराखंड रामचंद्र जी जोशी की तरफ से ऋ उत्तराखंड से प्रेम प्रेम कुमार जी टंडन की तरफ से प्रेम कुमारी जी टंडन की तरफ से हरियाणा

(19:42) सु कीत की रें जी तिवारी दिल्ली से सुधा 500 राजेश जी जा की तरफ से श वेस्ट बंगाल से सु 500 रतन जी राडी की तरफ से जोधपुर तान से 500 अशोक जी पुरोहित की तरफ से बढ़े मराठी से रानी अमरेंद्र कुवर जी की तरफ से दिल्ली से कार्तिक जी निषद की तरफ से रेखा इंदर जी की तरफ से 00 रोहित रत जी मिश्रा की तरफ से सु आपने सवित की दिग्विजय प्रतिभा सिंह जी की तरफ से गोरखपुर उतर प्रदेश अनिल जी की तरफ से दिल्ली रि कुमारी जी की तरफ से राची झारखड़ से सु जी पंया की तरफ से दौलत दौलतपुर से सु 500 रिता देवी जी की तरफ से दिल्ली से सुधा नीलम देवी जी की तरफ से सु जितेंद्र राजमल

(20:26) जी राठोर की तरफ से रग मध्य प्रदेश नर जी की तरफ से जाबरा मध्य प्रदेश से 00 साकेत कुमार सिंह जी की तरफ से औरंगाबाद महाराष् से सुधा 00 ज्योतिका लोकेश जी जोशी की तरफ से अमरावती मराठी से 00 रजत कुमार जी की तरफ से दिल्ली से प्रेमचंद प्रसाद जी की तरफ से दुर्गापुर वेस्ट बंगाल से 00 अनीता कापिया जी सोनी की तरफ से सु की सुरसी आपने समत की काव सिंह जी पट्टा बिहार से सु रुक्मण महेश जी सेन की तरफ से बनी मध्य प्रदेश से 00 चंद्रकांत जी की तरफ से पाल मराठी से सु 5 कीसी आपने बाबा कुरे दा की बहुत-बहुत बधाई सु आपने सत की ओम प्रकाश जी पाल की तरफ से दिल्ली से

(21:04) सु सीता एम जीी स्वर्णा की तरफ से सुधा की सरसी आपने समर्पित की बहुत बहुत बधाई कंचन जी सक्सेना रुद्रपुर उत्तराखंड से सुधा 500 गुला देवी जी की तरफ से दिल्ली से 500 मंजू जी गुप्ता छपरा बिहार से राकेश जी खंडेलवाल की तरफ से की तरफ से 00 की की राजीव कुमार जी होशियारपुर स 500 सिता देवी जी की से 555 की जी दीक्षित राना मध्य प्रदेश 700 71 की सगसी आपने बाबा कुमरे त की बहुत-बहुत बधाई सु विचार आपके आपने सत की विजय जी कटियार की तरफ से शाजापुर से सुधा 01 की स की सु जी सुरेश जी जोशी की तरफ से अलवानी उत्तरा गढ़ से सुदा 5100 की सग से आपने सुंदर गौ माता के

(21:47) चारे हेतु समत की बहुत-बहुत बधाई स विचारा आपके स आपने की लक्ष्मी जी दिल्ली से सु लक्ष्मी देवी उत्तराखंड से सुध 1071 की स आपने बाबा को की बहुत बहुत बधाई यशोदा जी पेरिया की तरफ से भोपाल मध्य प्रदेश स्वर्गीय कुंती देवी जी के पति में सुंदर 00 मुन्नी जी शर्मा की तरफ से अजमेर राजस्थान से 5 अनुज शर्मा की तर से रला मध्य प्रदेश संतोष गुप्ता दिल्ली से सुके चंद जी गुप्ता दिल्ली से सु कीने बाबा को की बहुत बहुत बधाई विचार आपके की उतय प्रताप सिंह जी की तरफ से बस्ती बिहार की उवसी जी की तरफ से प्रियाग उत्तर प्रदेश कुमार पंजाल की तरफ से दिल्ली से

(22:29) सु 551 मंजू जी गुप्ता हिमाचल प्रदेश से गुप्ता सु अंकित जी यादव की तरफ से टा उत्तर प्रदेश से सुंदर 500 की आपने बाबा को की बहुत बहुत बधाई सु विचार आपके सुसी आपने समत की गुप्त आजाद जी यादव की तरफ से करनाल करनाल हरियाणा से स 500 नितिन जी यादव करनाल हरियाणा स 505 की आपने सत की उमा जी भारती की तरफ से ग्वालियर मध्य प्रदेश सु की कीद पजी की तरफ से की की रामेश्वरी जी र की तरफ से 500 जय विजय जी पुरोहित की तरफ से अमरावती मराठी से राधा देवी जी गुप्ता की तरफ से 55 की सरसी आपने समरत की रोहित महेश कुमार जी की तरफ से हिसार हरियाणा सुंदर 111 की ससी आपने समत

(23:14) की सत्यपाल सिंह जी की तरफ से सुधा 00 अजय जी जसपाल की तरफ से बिहार से सुधा तारा जी महेश्वरी महू मध्य प्रदेश से सु 500 अमित जी निशा की तरफ से 551 राजेश जी परमार अहमदाबाद गुजरात से सुधा मेरठ उत्तर प्रदेश से सीता राम जीी मालवी की तरफ से अता मध्य प्रदेश सुधा 00 कीत की अनुज सिंह जी की तरफ से लखनऊ उत्तर प्रदेश 00 एस के पांडे की तरफ से कानपुर उत्तर प्रदेश 500 जुगल किशोर जी रत्ता बद की तरफ से मनसोर मध्य प्रदेश से 500 सौरभ जी बादाम की तरफ से मुरेना मध्य प्रदेश से मनीशा जी पार की तरफ से छतीसगढ़ से सु तेजूस तेजस गौतम की तरफ से यूएसए से

(23:51) सुदर आपने 1001 की सुरसी यह वनवासी क्षेत्र में जो सुंदर अन्य क्षेत्र चल रहा है इस आपने की की बहुत बहुत [संगीत] बई की गरिमा जी सना मला उदो रजनी विजय जी काले की तरफ से बना महारा सुंदर आपने 500 की सभी दान दता को हदय की अनतरा से नमन करता हूं नवत करता हूं प्रणाम करता हूं की जो भक्त अपनी सगसी मंदिर गौशाला बर आश्रम अन्य क्षेत्र बाबा कुरेश्वर धाम समर्पित करना चाहते हैं वे टीवी स्क्रीन पर श्री विठठल सेवा समिति के दो अकाउंट नंबर एक्सिस बैंक का और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का चल रहा है दोनों में से किसी भी अकाउंट में अपनी सरासी जमा करकर अपना नाम ट पर

(24:46) भेज सकते हैं आइए सीधे व्यासपीठ की शरण में चलते हैं पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में सुंदर हम सभी आज विराम दिवस की कथा श्रवण करेंगे जय जय श्री राधे हर हर महादेव श्री शिवाय नम [संगीत] [संगीत] [संगीत] श्री

(26:40) वल्लभा श्री गोसाई परम दयाल [संगीत] की श्याम सुंदर श्री महारानी की काशी विश्वनाथ भगवान की गौरा [संगीत] श्री गणेश जी महाराज की जय सरस्वती मात की जय गड़पति सरकार की जय कुरेश्वर महाद की महाकालेश्वर भगवान की जय ओमकारेश्वर भगवान की जय श्वर महादेव की जय माता की जय संत सदगुरु देव माता चिंता संतान चतु विश्व

(28:05) चतु विश्वनाथ भगवान की [प्रशंसा] जय ओ नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नमः शिवाय ओ नमः शिवाय नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः

(29:09) शिवाय नमः शिवाय नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओ ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नमः नम शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय नमः शिवाय ओ नमः

(30:17) शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय भला नम शिवाय गोरा नमः शिवाय गर नम शिवाय गुरा नमः शिवाय बोरा नमः शिवाय गोरा नमः शिवाय बो नमः शिवाय बोन नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओ नमः शिवाय नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओ नमः शि

(31:28) शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय विश्वनाथ भगवान की जय महाकालेश्वर भगवान की ओमकारेश्वर भगवान की जय कुरेश्वर महादेव की सुदेश्वर महादेव की जय मात की जय हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर काशी विश्वनाथ ओ गड़नी तल काल दर्श कैलाशी अविनाशी भगवान

(32:30) शिव जिनकी पुनीत पावन पवित्र शिव महापुराण की कथा आप और हमको श्रवण करने का सौभाग्य भगवान शिव की कृपा से उनकी दया से पितृ पक्ष में श्राद्ध पक्ष के इस पवित्र अवसर पर कांटा कोर्डी ही राम पथ वन गमन के इस पवित्र गांव में धमतरी जिले के अंतर्गत भगवान देवद महादेव की य पवित्र

(33:41) कथा श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है स्वयं रुद्रेश्वर महादेव इस कथा के कृपा पात्र यजमान बने कथा मंडप में विराजमान पूर्व सांसद महोदय एवं बेटी मोना सेन [संगीत] भजन एवं संपूर्ण छत्तीसगढ़ शासन के सांस्कृतिक आयोजन को संभालने वाली यहां का संपूर्ण प्रशासन यहां के कलेक्टर महोदय एसपी एसएसपी टीआई कमिश्नर आई जी

(34:50) एसडीएम तहसीलदार मेडिकल विभाग एवं सभी मेरे पत्रकार बंधु सोशल मीडिया सभी पुलिस कर्मचारी पीडब्ल्यूडी विभाग वन विभाग जिन्होंने इस कथा को बहुत अच्छे से संभाला रोड एक ही था और उस रोड पर ट्रैफिक को कंट्रोल करना थोड़ा कठिन था पर यहां के कलेक्टर महोदय को एसपी एसएसपी टीआई और यहां के सभी पुलिस कर्मचारियों को बहुत बहुत साधुवाद देता हूं जिन्होंने बहुत अच्छी तरह से इस कार्य को संभाला

(36:01) पांच दिवस की यह कथा आपको और हमको मिली है कथा के मुख्य यजमान के रूप में श्री दिनेश चंद्र प्रभा देवांगन श्री दीपक लाखोटिया जी श्री कोमल तुलसी पटेल जी श्री रोहित मरकाम जी श्री सुरेश सिन्हा जी एक बार इनके लिए भी जोरदार ताली बजाकर स्वागत वंदन अभिनंदन कथा मंडप [संगीत] में आप सब रात भर से भगवान देवद महादेव का भजन कर रहे हैं [संगीत] पूरी रात्रि कई लोग जागरण करते हैं इसलिए आखिरी दिन की जो कथा होती है विराम

(37:07) दिन की जो कथा होती है उसको सुबह कर दिया जाता है क्योंकि पूरी रात का आपका जागरण और जागरण के साथ में सुबह का कथा श्रवण करना फिर अपने अपने घर को अपने अपने गंतव्य को जाना एक भक्ति और एक [संगीत] मुक्ति दो साधनों के साथ में शिव पुराण चलती है इस शिव महापुराण की कथा को पाने के लिए बहुत सारा दिखावा या आडंबर सजावट बनावट या दिखाव की जरूरत नहीं होती शिव महापुराण को अपने भीतर उतार शिव क्या

(38:14) है उसको हमें पहचानना जैसे एक पथर के पाषाण के शिवलिंग पर हम जल चढ़ाते हैं पाषाण पर पत्थर के शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं तो हमारा यह मन कहता है कि इसमें शंकर बसता इसमें शिव बसा है यह हमारा मन यह हमारा चि क और जल चढ़ाते चढ़ाते चढ़ते चढ़ाते जब बहुत समय निकल जाता है तो हमारा काम सफल भी हो जाता मतलब जिस शिवलिंग पर हम जल चढ़ा रहे हैं जिस शिवलिंग पर हम पूजन कर रहे हैं अर्चना कर रहे हैं उसमें हमारा शंकर बसा हुआ

(39:19) उसमें मेरा देवव महादेव बसा हुआ अब जैसे एक पाषाण में शिव बसा हुआ है उसी तरह शिव महापुराण की कथा कहती है कि संसार में जन्म लेने वाले प्रत्येक जीव में शिव ऐसा कोई जीव नहीं जिसमें [संगीत] शिव हर जीव में शिव बसा हुआ है शंकर बसा जीव ही शिव है शिव ही [संगीत] जी किसी बड़ी बड़ी कथाएं होती हैं किसी कथा में जब कथा की बुकिंग होती है तब किसी भी कथा में यह नहीं कहा जाता कि इतने भक्त

(40:25) आएंगे तो उनके लिए भंडारे की व्यवस्था और जब सिहोर में कथा की बुकिंग करी जाती है तो यह कहा जाता है कि जो भी शिव भक्त रात्रि को रुकेंगे उनके लिए मुख झूठा कराने के लिए भंडार व्यवस्था करना कारण यह इतने सारे जो जीव है यह जीव नहीं इनमें शिव है और हम भगवान को भोग लगाए ना लगाए पर इन जीवों शिव समझकर अगर भोग लगाते हैं तो हमारा शिव कृपा करता हमारा शिव करुणा करता कितनी सुंदर बात लिखी है कि मंदिर में शंकर है और मंदिर के बाहर भी शंकर पूजन करने वाला भी शंकर है जल चढ़ाने वाला भी शंकर है और जल जिस पर चढ़ रहा है वो भी बोलो बोलो मंदिर में भी शंकर बैठा है और घर में भी

(41:33) शंकर [संगीत] बैठा आप लोगों ने कभी शंकर जी का एक फोटो देखा होगा जिसमें शंकर जी या कभी हरिद्वार गए होंगे या कभी नर्मदा जी के तट पर गए होंगे कभी महानदी के तट पर राजी में गए हो ग तो कभी आपने शंकर जी का एक चित्र य म देखी होगी जिसम शंकर जी दोनों हाथों में लोटा लेकर जल अपने ऊपर डाल ऐसी मूर्ति है दो हाथ और दो हाथ चार हाथ है दो हाथ से अपने ऊपर जल डालना देखिए मूर्ति फोटो क भी दर्शन करा होगा आपने दोनों हाथों से जल चढ़ रहा है दोनों हा मतलब यह भगवान शंकर की अविरल मूर्ति का दर्शन फोटो का दर्शन य हम बता है कि तुम जो शंकर जी पर जल चढ़ा रहे हो उसमें भी

(42:33) शिव है और जिस शिवलिंग पर जल चढ़ा रहे हो उसमें भी शिव कोई दूसरा [संगीत] नहीं आज के जमाने में लोग कह देते हैं कि तुम भगवान शंकर को मत भजो राम को मत भजो कृष्ण को मत भजो तुम इसको मत भजो तुम उसको मत भजो तुम हमारे धर्म में आ [संगीत] जाओ केवल एक सनातन धर्म हमें बता देता है कि सब जीवों में परमात्मा बसा हुआ किसी भी धर्म में किसी दूसरे धर्म में जीव का आदर करना नहीं सिखाया कि अरे यह मर जाएगा इसको दुख होगा ये कट जाएगा इसको तकलीफ होगा केवल एक सनातन धर्म ऐसा है जिसमें एक छोटी सी चीटी को भी अगर कष्ट होता है तो हम कहते हैं कि पाप लग जाएगा भगवान दुखी

(43:40) हो जाएगा क्योंकि जीव में शिव [प्रशंसा] बसा हमारा सनातन धर्म किसी की हत्या करना नहीं सिखाता हमारा सनातन धर्म किसी को बर्बाद करना नहीं सिखाता हमारा सनातन धर्म तो यह सिखाता है कि चाहे वह नदी हो पर्वत हो पहाड़ हो पत्थर हो वृक्ष हो तालाब हो सरोवर हो स्त्री हो पुरुष हो नारी हो बच्चा हो सबका आदर करिए सबका सम्मान करिए और सब में शिव को देखने का प्रयास करिए हर एक में शिव बसा [संगीत] हम क्यों ब तुझ में रब दिखता है यारा मैं क्या करू हर एक में वही बस्ता है तो मैं क्या कर सकता हूं सब में वही नजर आ रहा है सब में वही दिख रहा है सबके भीतर वही समाया हुआ

(44:44) है सबके भीतर उसी की ही ऊर्जा है सभी के भीतर उसी की ही ज्योति है तो फिर हम कैसे कह दे कि शंकर मंदिर में ही है मेरी जीजिया मेरे जीजा मेरी माताओं मेरी बेटियों मेरे जीजा मेरे भाई मेरे बेटी बेटा से निवेदन है आप एक लोटा जल लेकर जब शंकर जी के मंदिर में जाते हो ना शिव के मंदिर में जब एक लोटा जल लेकर पहुंचते हो ना तो यह मान करर चलना कि तुम्हारे मन में अगर आ गया कि मुझे एक लोटा जल के मंदिर में चढ़ाना है तो समझ लेना कि अब शंकर जी ने सोच लिया कि तेरा दुख मिटाना है इसलिए अपने मंदिर तक तुझे बुला [प्रशंसा] रहा तेरा दुख समाप्त करना है इसलिए तुझे

(45:45) मंदिर तक बुला रहा आपके क्षेत्र में अगर कहीं श महापुराण की कथा हो रही है कुबेर भंडारी कहीं कथा करने के लिए आपके क्षेत्र में पहुंचे हैं और कहीं कुबेरेश्वर बाबा की कृपा आप पर हुई है और नजदीक में 100 किलोमीटर 50 किलोमीटर 70 किलोमीटर 150 किलोमीटर की दूरी पर 200 300 किलोमीटर की दूरी पर अगर शिव महापुराण की कथा हो रही हो और तुम्हें कानों में सूचना मिल जाए कि कथा हो रही है तो मुझे जाना है और कथा के मंडप तक अगर पहुंच जाओ तो समझ लेना कि शंकर को तेरा दुख काटना था इसलिए बुलाया तेरी तकलीफ को काटना है तेरे कष्ट को मिटाना है इसलिए शिव ने तुझे खींच कर कथा

(46:36) के मंडप तक बलाया तुझे खींच कर कथा तक बलाया और कृपा की ना होती जो आदर री तो सुनी र अदालत तुम्हारी गरीबों के दिल में जगात ना पाते तो किस दिल में होती आदत तुम्हारी तो किस दिल में होती इ बादर तुम्हा अगर भगवान कृपा नहीं करता करुणा

(47:43) नहीं करता तो यह लाखों की संख्या में तीन दिन डूम पंडाल पेड़ों के नीचे रोड़ों पर लोग जहां तहां सब दूर बैठे हुए हैं ईमानदारी से बोलो चीटी नमक के डब्बे में होती है क्या बोलो जम के बोलो जरा नहीं चीटी मिर्ची के डब्बे में होती है क्या चीटी हल्दी के डब्बे में होती है क्या नहीं चीटी सर्फ के डब्बे में होती है साबुन के डब्बे में नहीं चीटी जाती है तो डब्बा कितना भी बंद करके रख लो चीटी हमेशा शक्कर और गुड़ के डब्बे में मिठाई के कुछ तो शिव महा पुराण में होगा इसलिए तो इतनी सारी चीटियां कुछ तो शिव महापुराण में होगा तब तो भक्त भगवान के पास जा रहा

(48:47) [संगीत] है शिव महापुराण में कुछ तो होगा तब तो शिव भक्त यहां पहुच रहे और जितने लाखों की संख्या में आप लोग आते हो अगली कथा में उतने लाखों की संख्या में फिर आप टीवी पर देख ले बोलो देखते हो कि नहीं देखते फिर लाखों की संख्या फिर अगली कथा कहीं होती है फिर लाखों की संख्या आप [संगीत] और वो आते हैं कथा में कौन पहुंचता है जो शंकर को एक लोटा जल चढ़ा रहा होता है एक दिन भोलेनाथ उसको कथा के पंडाल में बुला ही ले कौन आता कौन बुलाता किसकी सामर्थ है कि कोई बुला ले कोई राजनेता अगर एक कार्यक्रम करे तो

(49:54) बस लगाना पड़ती है गाड़िया लगाना पड़ती तब भर कर बुलाना पड़ता है तब उनको घर तक वापस भेजना पड़ता है यहां तो लोग अपना खर्चा कर कर आते हैं स्वयं के खर्चे [संगीत] से ना जाने कहां से 00 रुप ढ स 200 रुप इकट्ठे करते हैं तब अपने गांव से चलते चलते धमतरी उतरते हैं धमतरी से फिर जरा विचार करना जहां बस छोड़ती है वहां से यहां तक आने में थोड़ा सा तो पैसा लगता ही [संगीत] है परिश्रम करते करते बाबा से विनय करते करते करते करते एक आस छोटे-छोटे बच्चे गोदी में है बुजुर्ग लोग चले जा रहे हैं कोई कोई के शरीर में कष्ट है कोई बीमारी है तो उसको भी धीरे

(50:58) धीरे पकड़ कर ला और क्या आज क्या एक पत्र [संगीत] में मेरा नाम साहू है मेरे पति का नाम हेमंत साहू है मैं एमजी बाड कांकेर छत्तीसगढ़ की निवासी कहीं बैठी हो और बच्चा अगर साथ में आया हो तो उसको लेकर व्यासपीठ के पास आ सकती गुरुजी शादी के पा साल तक तो हमने इंतजार करा कि बच्चा हो जाएगा डॉक्टरों को दिखाया डॉक्टरों के अनुसार उन्होंने कहा कि बच्चे दानी में दो गांठ है बच्चे दानी में दो गाठ है जिसका इलाज हमने धमतरी में भी कराया रायपुर में भी कर पर

(52:06) गांठ समाप्त नहीं डॉक्टर ने कहा कि ऑपरेशन करना पड़ेगा तब हो सकता है कि तुम्हारा गर्भ ठर रायपुर के डॉक्टरों ने बच्चे दानी को कहा कि संतान का चांस मत लेना क्योंकि गर्भाशय में दो गा बच्चा ठेर नहीं रहा हम ऑपरेशन के लिए फिर भी तैयार हो फिर हमने किसी के कहने पर ऑपरेशन की तारीख तो ले ली पर हम ऑपरेशन कराने के लिए नहीं टीवी में 2023 में शिव महापुराण की कथा सुनी और बाबा से सफेद आंकड़े की जड़ का प्रयोग करा और बाबा से विनती करी बाबा आपका चढ़ हुआ जल सारी बीमारियों को ठीक कर देता है तो मेरी भी गर्भाशय की दोनों गांठों को ठीक कर दो जल पीना प्रारंभ करा

(53:05) सफेद आंकड़े की जड़ भी बांध ली और बाबा की कृपा से गर्भ ठहर गया और गर्भ ठहरा तो 18 एक 18 जनवरी 2024 को मेरे गर्भा से एक बच्चे ने जन्म लिया और दोनों गठान भी नहीं निकली और बाबा की ऐसी कृपा हुई कि मैं ठीक हूं अगर बच्चे को लेकर आई तो आ सक अगला पत्र मेरा नाम अंजू साहू है पति हेमंत साहू यह तो यही प अगला पत्र है मैं धमतरी की रहने वाली हूं ज्योति निर्मलकर मेरे पति का नाम है लोके लोकेश निर्मलकर कहीं बैठी हो और बच्चे को लाई हो तो लेकर आ सकती शादी को 12 साल हो गए थे गर्भ नहीं ठहर रहा था तब सारे बहुत सारे हॉस्पिटल में दिखाया पर कोई अंतर नहीं

(54:05) आई गुरुदेव तब हमने सफेद आकड़े की जड़ का प्रयोग पशुपति नाथ का प्रयोग किया और बाबा की कृपा से 31 मार्च 2024 को बच्चे ने जन्म लिया मैं बाबा को धन्यवाद देने आई हूं जो 12 साल के बाद 10 साल 12 साल अगला पत्र मैं चंपा राठौर पति श्री शंकर लाल राठौर ग्राम सातपुर जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश की निवासी हूं गुरुदेव कहीं बैठी हो तो अपने बच्चे को ला सकती मेरे शादी को 10 साल हो गए थे डॉक्टर के हिसाब से मैं कभी मां नहीं बन सकती थी क्योंकि मेरी बच्चे दानी में गर्भाशय में सूजन रहती थ गुरुदेव [संगीत] समय निकलता गया समय निकलता गया पर मेरे

(55:03) गर्भ से संतान की प्राप्ति नहीं हुई तब मैंने पशुपतिनाथ का व्रत किया और सफेद आंकड़े की जड़ का प्रयोग करा बाबा की कृपा से 10 साल के बाद मुझे संतान की प्राप्ति हुई अगला पत्र मैं माधुरी मणिराम साहू ग्राम कवर जिला बालोत की निवासी हूं मेरी शादी को 13 साल हो गए थे मैं आर्मी के बड़े बड़े हॉस्पिटल में इलाज करवा चुकी हूं गुरुदेव फिर भी मेरे घर में संतान का सुख नहीं आया बड़े बड़े हॉस्पिटल में इलाज कराने के बाद जब मैंने सफेद आंकड़े की जड़ का प्रयोग और पशुपतिनाथ का प्रयोग करा तो 14 साल बाद 27 जून 2023 को मेरे घर में बच्चे ने जन्म लिया मैं बाबा को प्रणाम

(55:50) करने के जरा विचार करिएगा चीटी नमक के डब्बे में नहीं जाएगी चीटी सर्प के डब्बे में नहीं जाएगी चीटी मिठाई के डब्बे में ही जाएगी उसी तरह भक्त यहां वहां नहीं जाता शिव का भक्त तो शंकर की कथा में ही पहुंच करर अपने दिल की बात कर ये इन्होने ने पत्र में लिखा माधुरी मणिराम साहू कवर जिला बालोत की निवासी हम नौकरी के चक्कर में आपको कभी मिले नहीं आपसे कभी हमारी बात नहीं हुई आपसे कभी मिलना नहीं हुआ साक्षात आपका देखना नहीं हुआ हम केवल टीवी के माध्यम से कथा को सुनते थे और विश्वास नहीं है कि टीवी के सामने बैठकर मांगने से भी क्या

(56:54) भोलेनाथ दे देता है पर हमने देखा ये शिव तत्व है यह संभव [संगीत] है आपके भीतर का विश्वास ड़ी करोगे ना तो परमात्मा को मिलने में देरी नहीं ल बस एक निवेदन आप और हम सबके लिए सफलता पाने वाले ढेर सारे मिलेंगे जिनको सफलता मिली [प्रशंसा] े आप सबसे निवेदन है भगवान आपको सफलता की सीढ़ी पर चढ़ा भी देता है मेरा भोले बाबा आपको सफल बना भी देता है सफलता पाने वाले र मिलेंगे पर

(57:59) संतुष्ट होने वाले बहुत कम मिलेंगे बहुत एक निवेदन संपूर्ण श्रोता भाई बहनों से जो टीवी चैनल के माध्यम से सुन रहे हो जो यहां पंडाल में कथा सुन रहे हो जो इस पितृ पक्ष में अपना एक अंश मात्र दान देकर भी कथा कर पान कर रहे हो हम सभी से निवेदन है कि सफलता तो बहुत है लोगों के पास मिल भी जाएगी पर सफलता के साथ थोड़ी संतुष्टि [संगीत] रख सफलता के साथ में थोड़ा संतोष [संगीत] ख संतोष संतुष्टि मतलब मेरे घर में अगर गाड़ी नहीं है कोई बात नहीं मेरे पति की इतनी कमाई नहीं है कोई

(59:06) बात नहीं हम कम में गुजारा कर कम में कितना सुंदर चरित्र आता है एक बार अर्जुन ने वन में जंगल में कुछ चीजें देख [संगीत] अर्जुन ने जंगल में देखा दो कुए हैं अर्जुन जंगल में देख रहा है कि दो कुए हैं दोनों पासपास में दोनों की दीवाल लगी है एक कुआ यहां दूसरा कुआ अर्जुन ने देखा कि एक कुए में पानी भरा है और दूसरा कुआ पूरा खाली की [संगीत] दो कुए हैं एक भरा दूसरा जम के बोलो अर्जुन देखकर आश्चर्य कर रहा है कि दोनों पास में तो कम से कम दोनों में पानी

(1:00:09) होना चाहिए जो कुए पास पास में होते हैं तो उसमें पानी आही जाता है पर इसमें तो है अर्जुन ने देखा आगे जाकर एक गाय अपनी बछिया को गाय अपनी को जन्म दे गाय ने बछिया को जन्म दिया अर्जुन ने देखा कि अभी तक हमने देखा है कि जन्म के बाद बछिया गाय का दूध पीती है आज अर्जुन ने देखा कि गाय ने बछिया को जन्म दिया और गाय बछिया का दूध पी रही थी अर्जुन चक्कर खाने लगा विस्मय हुआ आश्चर्य हुआ हमने देखा है कि गाय बछड़े को जन्म देती है बछिया को जन्म देती है गाय बछड़ी

(1:01:14) को जन्म देती है और बछड़ी गाय का दूध पीती है पर आज अर्जुन ने देखा कि जिस बछिया को गाय ने जन्म दिया गाय उस बछिया का दूध पी रही है विष आश्चर्य फिर आगे अर्जुन चले अर्जुन ने चलते चलते फिर देखा एक हाथी उसके दो मुह दो सुंड दो मुख हाथी के दो मुंह और हाथी दोनों मुख से भोजन कर रहा है तो भी हाथी का पेट नहीं भरा [संगीत] रहा हाथी दोनों मुख से खा रहा है भोजन कर रहा है तो भी हाथी का पेट नहीं भरा अर्जुन विस्मय में पड़ गया ये क्या है फिर देखा अर्जुन ने एक बड़ा सारा पत्थर पहाड़ पर से लुड़क लुड़क आ रहा है उस

(1:02:24) पत्थर ने बड़े-बड़े वृक्ष को गिरा दिया एक घास का तिनका उस पत्थर को रोक दिया घास का [संगीत] तिनका एक बड़ा सारा पत्थर पर्वत पर से लुकता लुकता आया सारे वृक्षों को गिरा दिया बड़े बड़े वृक्ष गिर गए पर एक घास के तिनके ने उस पत्थर को रोक दिया घास के तिनके ने उस पत्थर को ठहरा दिया रो अर्जुन से आगे बढा सामने से द्वारकाधीश सामने से भगवान द्वारिकानाथ भगवान कृष्ण रथ पर सवार होकर आ रहे थे अर्जुन ने हाथ देकर रथ को रोका रथ रोक कर प्रणाम किया जय द्वारकानाथ जय द्वारकाधीश द्वारकानाथ ने नीचे उतरे पूछा अर्जुन क्या बात है आज तुम कुछ आश्चर्य

(1:03:23) में पड़े से लग रहे कुछ संशय में पड़े से लग रहा है तुम्हारे भीतर कोई संशय है क्या अर्जुन अर्जुन तुम्हारे अंदर कोई संशय है क्या आज तुम संशय में पड़े लग रहे हो आज तुम संशय में दिख रहे हो क्या बात है क्या हो गया अर्जुन चुप मौन स्तुत बोल नहीं खड़े द्वारकाधीश को देख र द्वारकानाथ को [संगीत] देख एकदम मोन होकर स्तुत होकर खड़े खड़े देख रहे खड़े द्वारकाधीश बार-बार पूछ रहे हैं अर्जुन

(1:04:33) बोलो अर्जुन बोलो पर बो [संगीत] मैं क्षमा चाहूंगा [संगीत] यह चंपा राठौर पति शंकर लाल राठौर ग्राम समदपुर जिला अनूपपुर हमें पत्र पढ़ने में थोड़ी गलती हो गई यह बच्चा साल बाद नहीं 40 साल बाद हुआ है मैं क्षमा चाहूंगा बहुत मेरे पत्र पढ़ने में थोड़ी गलती हो गई मैं उसको 10 वर्ष पढ़ दिया पर ये बच्चा

(1:05:40) 40 साल के बाद [संगीत] हुआ शभ शंभु [संगीत] प्रणाम अब रोई नहीं अब तो खुश होई है बाबा दे दिया शभ [संगीत] [प्रशंसा] शंभव खुश हो कर जाओ खुश हो खुश हो एकदम खुश हो जाओस आनंद [संगीत] मैं चंपा राठौर श्री शंकर लाल राठौर ग्राम सातपुर जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश का निवासी हूं मेरा मोबाइल नंबर यह है हमें पढ़ने में

(1:06:44) थोड़ा लगा हम 10 वर्ष बोले यह 40 वर्ष के बाद ये बच्चे ने जन्म दिया [संगीत] है 40 एक शिव तव अर्जुन आश्चर्य में पड़ा हु आच अर्जुन विस्मय में पड़ा हु मोन होकर अर्जुन द्वारिकानाथ को देख रहा द्वारिकाधीश अर्जुन को देख रहे हैं अर्जुन द्वारिकानाथ को देख रहा है द्वारिकाधीश पूछ रहे हैं अर्जुन क्या हो गया बोलो तब अर्जुन ने कहा आज मैंने बहुत आश्चर्य की चीजें देखी है प्रभ बहुत आश्चर्य की चीज [संगीत] देखी क्या देखा आश्चर्य में आश्चर्य में देखा क्या क्या देखा अर्जुन ने कहा मैंने देखा

(1:07:51) दो कुए पासपास में है एक में पानी भरा एक खा है भगवान द्वारकानाथ ने कहा अर्जुन यह चिंता का विषय नहीं है अब कलयुग आ गया है यह कलयुग का दर्शन कराता है दो कुआ मतलब दो कुए पासपास में है एक में पानी एक खाली मतलब कलयुग में एक भाई के पास तो बहुत संपदा होगी और दूसरा भाई कंगाल होगा साधारण अर्जुन ने कहा ने और विस्मय देखा एक गाय ने बछिया को जन्म दिया गाय ने अपने बच्चे को जन्म दिया और आज तक मैंने देखा था कि बछिया गाय का दूध पीती है पर आज देखा कि गाय बछिया का दूध पी रही थी ये क्या है प्रभु भगवान ने कहा अर्जुन ये कलयुग का दर्शन है माता-पिता बेटी को जन्म

(1:08:47) देंगे और उस बेटी से नौकरी और सर्विस कराकर खुद खाएंगे मतलब गाय बछिया का दूध पिए अर्जुन ने कहा मैंने एक विस्मय और देखा हाथी के दो मुख थे दोनों मुख से भोजन कर रहा था पर हाथी का पेट नहीं भरा रहा था अर्जुन चिंता मत कर कलयुग में एक एक व्यक्ति के दो दो काम होंगे एक एक व्यक्ति की दो दो दुकाने होंगी एक एक व्यक्ति की दो दो व्यापार होंगे तो भी घर का गुजारा नहीं हो पाएगा घर खाली की खाली ही रहेगा अर्जुन ने कहा मैंने एक विस्मय और देखी एक बड़ा पर पत्थर पहाड़ पर से लुड़क लुकता आ रहा है बड़े-बड़े वृक्षों को उसने गिरा दिया एक घास के तिनके ने उस पत्थर को

(1:09:34) रोक दिया वो क्या है तब भगवान कृष्ण ने कहा अर्जुन ये कलयुग रूपी पत्थर जब लुड़क कर आएगा ना सारे धर्म और शास्त्र को गिरा देगा केवल शिव महापुराण का एक नका इस कलयुग को आगे बढ़ने नहीं देगा अर्जुन शिव महापुराण का एक का इस कलयुग को आगे बढ़ने नहीं देगा इसलिए दुनिया के लोग कहते हैं कि कलयुग में शिव युग आया है कौन सा युग है शिव युग कलयुग में शिव युग है बड़े बड़े ये कलयुग जब आएगा बड़े-बड़े धर्म शास्त्र ना जाने कितनों कितनों को गिराते गिराते जाएगा तब एक शिव महापुराण रूपी छोटा सा तिनका शंकर की कथा शिव पुराण इस कलयुग को रोकने का

(1:10:23) काम करती है इसलिए गांव गांव नगर नगर शहर शहर में आज शिव महापुराण की कथा चल रही है पहले हरिद्वार उज्जैन प्रयागराज नासी यहां पर कुंभ लगता था आज के समय में इस शिव महापुराण की कथा का ऐसी कृपा है बाबा भोलेनाथ की कि जहां कथा हो वहां कुंभ जैसा नजारा सा दिन में लगता प्रव तत्व को पहचान मेरे औघड़ दनी को पहचानो मेरे शंभू को पहचानो मेरे शंकर को पहचानो अंजू सा प्रणाम प्रणाम कर [संगीत]

(1:11:44) बई बधाई शिव को पहचान [संगीत] और जिस दिन तुम भगवान शंकर को पहचान गए क्यों क्यों कहते हैं क्यों कि एक लोटा जल सारी समस्या का हल क्यों कहते हैं जपो एक एक व्यक्ति के मुख पर भजन के रूप में शंकर की शिव पुराण का मूल तत्व आ जाना चाहिए श्री शिवाय [संगीत] [हंसी] [संगीत] नमस्तय नमतु श्री शिवाय

(1:12:49) [संगीत] नमस्तय नमतु श्री शिवाय नमतु श्री शिवाय नमतु क्यों कहते हैं पूरी दुनिया के लोग कहे इसको मत बोलो पूरी दुनिया के लोग कहे शंकर को जल ना चढ़ाओ पूरी दुनिया क्योंकि लोग कहीं ना कहीं सनातन ही सनातन धर्म को कहीं ना कहीं काटने का प्रयास कर पर प्रयास करो कि मुख से और हम फिर निवेदन करेंगे जिसके दरवाजे पर जिसके द्वार पर जिसके घर के दरवाजे पर घर की चौखट पर बाहर दुकान पर व्यापार में व्यवसाय में गाड़ी पे बंगले पर श्री शिवाय

(1:13:56) नमतु लिखा होता है वहां कलयुग भी प्रवेश नहीं करता शिव युग ही प्रवेश [संगीत] करता वहा शिव है और केवल अकेला शंकर नहीं श्री शिवाय नमस्तुभयम में मेरे शंकर पार्वती गणेश कार्तिके रिद्धि सिद्धि जया विष हरा शामली बारी दौ तली देव अशोक सुंदरी शिव के नंदी और सब तुम्हारे रक्षा करने के लिए श्री शिवाय नमस्तुभयम में [संगीत] विराज हमारी बात पर भरोसा नहीं हो तो गीता प्रेस गोरखपुर की शिव महापुराण लेकर आओ उसकी विदेश्वर संहिता को पढ़ो उसमें निकालो कि श्री शिवाय नमस्तुभयम का मतलब क्या है उसमें लिखा है श्री शिवाय नमस्तुभयम बोलने वाले के केवल मुख का

(1:14:56) दर्शन कर लो तो भी हजारों अश्म यज्ञ का फल प्राप्त हो जाता है हमारे दोष मिट जाते हैं हमारे कष्ट मिट जाते हैं हमारा दुख मिट जाता है उसको पढ़ो अध्ययन करो कि सिओर वाला महाराज बोल रहा है तो किसम से बोल रहा है हमें पढ़ना है श्री शिवाय नमतु का मतलब निकालना है हम उसका अध्यन करें हम उसे पढ़े और उसमें पढ़ने पर तुम्हें मालूम पड़ेगा कि केवल बोलने से नहीं अगर कोई श्री शिवाय नमस्तुभयम बोलता है उसके मुख का भी दर्शन कर लेते हैं तो सारे पाट छिन्न हो जाते [संगीत] हैं कभी लिख कर देखिए अपने दरवाजे पर उठाओ चंदन कंकू और लिख दो श्री शिवाय नमस्तुभयम

(1:15:48) कभी लिख के देखिए अपनी गाड़ी पर कभी लिख करर देखिए अपने व्यापार में उस उस तत्व का आनंद क्या है उस को बोलने का सुख क्या है क्योंकि यहां एक बड़ा सारा पत्थर लुड़कते लुड़कते आ रहा है बड़े-बड़े वृक्ष को गिरा दिया और एक घास के तिनके ने उस पत्थर को रोक दिया वो घास का तिनका कलयुग को रोकने के लिए भगवान कृष्ण कहते हैं रे हे अर्जुन ये बड़े सारे कलयुग को आने से रोकने के लिए केवल एक शिव महापुराण ऐसी है जो कलयुग को भी आगे नहीं बढ़ने देती है वहीं की वहीं रा देती है शिव युग आया वो शिवय एक [संगीत] पत्र मेरा नाम पुष्पा सोनी पति मोती सोनी

(1:16:56) उम्र 45 वर्ष रिसाई पारा धमतरी की निवासी कहीं बैठी हो तो हाथ हिला सकती और बैठी हो तो बेलपत्र लेने के लिए आ [संगीत] सकती मेरा नाम पुष्पा सोनी पति मोतीलाल सोनी उम्र 45 वर्ष रिसाई पारा धनतरी की निवासी हूं गुरुदेव मैं बाबा का क्या वर्णन करूं गुरुदेव अक्टूबर 2023 को मुझे चेस्ट में कैंसर हो मुझे स्तन कैंसर हुआ चेस्ट का कैंसर हो गया गुरुदेव पता चला डॉक्टर के हिसाब से तो मुझे थोड़े से दिन दिए गए क्योंकि वह फोर्थ स्टेज पर पहुंच चुका था थोड़े से दिन पर मैंने हिम्मत नहीं आ रही मैं आपको नहीं सुनती थी पहली बार मेरे घर के लोगों

(1:17:52) के कहने पर मैंने टीवी चालू करी और आपकी कथा सुनना प्रारंभ करी पशुपतिनाथ का व्रत मैंने करना प्रारंभ करा बाबा से विनय करना प्रारंभ करी प्रतिदिन शंकर को चढ़ाया हुआ जल पी लेती थी डॉक्टर ने तो मुझे थोड़े से दिन जिंदा रहने के दिए थे पर मेरे बाबा ने ऐसी कृपा करी आज साल भर से ज्यादा हो गया और बाबा की कृपा से मैं केवल जल और बाबा की बेलपत्र के बल पर आज मैं पूर्ण तरह से ठीक दिख रही हूं ये शिव की कृपा इलाज कराओ डॉक्टर को भी दिखाओ डॉक्टर की दवाई भी खाओ पर साथ में शंकर के ऊपर भरोसा डॉक्टर शिव का एक रूप होता है इसलिए डॉक्टर की दवाई खाना भी जरूरी है औषधि

(1:18:42) खाना जरूरी है जांचे कराना जरूरी है और साथ में शंकर को एक लोटा जल चढ़ना भी जरूरी है अपने विश्वास की मूलता को रखना जरूरी एक लाइन अच्छी लिखी है आप और हम सब मिलकर गुनगुनाते हैं एलईडी पर वो लाइन चल रही है आप भी साथ में बोल सकते हैं भोलेनाथ दया करना मैं तेरे भरोसे हूं मेरे बाबा दया करना मैं तेरे भरोसे हू ना घर के भरोसे हूं ना परिवार के भरोसे

(1:19:46) हो ना घर के भरोसे हू ना परिवार के भरोसे हू भोले बाबा दया करना मैं तेरे भरोसे हो मेरे बाबा दया करना मैं देव [प्रशंसा] से हम उसके आश्र हो [संगीत] जाए कलयुग रूपी पत्थर आएगा कलयुग अपना पसारा फैलाए कलयुग अपना पांव आगे बढ़ाएगा और उस कलयुग को रोकने के लिए शंकर की कथा मूल है मूल

(1:20:56) कलयुग को रोकने के लिए शिव पर चढ़ाया गया एक लोटा जल जरूरी [संगीत] है इसलिए व स्मरण में आता ना कलयुग में शिव युग आया है महादेव ये तेरा रचाया है [संगीत] बाबा तेरा रच कलयुग में शिव युग आया महादेव ये तेरा च गुरुदेव ये तेरा रचाया

(1:22:00) गुरुदेव ये तेरा रचाया है महादेव ये तेरा रचाया है महादेव ये तेरा रचाया है कलयुग में शिव युग आया है महादेव ये तेरा रचा कलयुग में शिव युग आया है मेरे बाबा ये तेरा रचाया तेरा रचाया ये उसका रचाया शिव महापुराण

(1:23:06) को वाचन करने वाला कोई दूसरा नहीं तुम का जी जिसका नाम है तुम रु केश्वर महादेव [संगीत] आ शिव महापुराण को सुनने वाला कोई दूसरा नहीं जिसका नाम ईश्वर जी गोरा जी स्वयं शिव [संगीत] एक [संगीत] पुष्पा सोनी इनकी जेठानी है जिनको जो तकलीफ थी बाबा ने ठीक करी है एक बार

(1:24:11) जोरदार ताली बजाकर साथ ता है शिव त बड़े से बड़े कलयुग के चरण को भी शिव महापुराण रोकने का प्रयास कर रोकने का [संगीत] प्रयास और निवेदन है सारी दुनिया में जब हार जाओ जब तुम्हें लगे कि अब मेरा जीवन बेकार सा हो गया सब कुछ हार गए तब आखरी में एक बार सीहोर कुबरे शवर धाम जरूर आओ और उस बाबा से विनती [संगीत] बेटे बेटी अप्लाई कर रहे हैं नौकरी के लिए सर्विस के लिए कंपटीशन एग्जाम में बैठ रहे हैं संतान आदिक आदिक सारे व्यापार कर्जा बाबा के पास जाकर एक बार बन सके जीवन में उसकी कंकर को उठाकर

(1:25:27) कंकर को उठाकर उसके पूजन कर कर उससे विनय करो कंकर उठाकर उससे विनय कर निवेदन कर पूजन करिए और उससे कहिए बाबा से विनय कर स्वीकार [संगीत] कर लाखों के दुखड़े जो तू हर गया डमरू वाले तो मेरे दुखों को देखकर क्यों डर गया डम क्यों [संगीत] डर [संगीत] किसलिए शिव के प्रति भरोसा दृढ़ कर शंकर के प्रति विश्वास को ड़ी [संगीत] कर और जब के प्रति तुम्हारा विश्वास दृढ़ हो जाएगा इसीलिए कहा सफलता भोलेनाथ देगा सबको देता है पर साथ

(1:26:35) में थोड़ी जरूरत संतुष्ट थोड़ी जरूरत है संतुष्ट संतुष्ट नित्य जपो किसी भी शंकर के मंदिर में दर्शन करने जाओ शिवालय में जाओ भगवान शंकर के दरवाजे पर जाओ किसी भी पुराण को सुनने के लिए जाओ कहीं पर भी किसी की पुराण में जाओ कहीं पर भी कोई गुरु से भी मिलने जाओ तो प्रेम से हाथ जोड़कर जरूर कहो श्री शिवाय नम प्रेम वश कही प्रेम और कोई जल्दी बनता है कोई लेट बनता है शंकर को जल चढ़ाने वाला एक दिन सेठ जरूर बनता है य निश्चित

(1:27:39) बस अपने अंदर पाप मत आने देना अपने अंदर छल मत आने देना अपने अंदर कपट मत आने देना अपने अंदर छल कपट आ गया तो छल के बल पर कभी जल भी काम नहीं करता भला [संगीत] करिए भला करो पर अपने अंदर छल मत कलम कसम और कदम आप भी बोलो क्या क्या चीज कलम कलम जानते हो पेन लीड पेन कलम कलम दूसरा कसम और [संगीत]

(1:28:44) कदम जब भी भी उठाना दूसरे की भलाई करने के लिए उठाना दूसरे को बर्बाद करने के लिए मत उठना कलम उठाना आपको भगवान ने कुर्सी द है पद दिया प्रतिष्ठा द है सत्ता द है आपकी कलम से किसी का बुरा मत कर दे पद है प्रतिष्ठा है कुर्सी है सत्ता है भगवान ने अगर आपको अच्छे पद पर बिठाया है तो अपनी कलम से किसी काला जरूर करना बुरा हो रहा होना थोड़ी देर कलम उठाकर नीचे रख देना कल पटाल देना मैं कल देखूंगा परसों देखूंगा नरसो देखूंगा पर कलम से ऐसी चिड़िया मत बना देना तुम्हारे हाथ की कि किसी की जिंदगी पूरी बर्बाद हो जाए ऐसी चिड़िया कलम

(1:29:55) [संगीत] मेरे पत्रकार बंधु यहां पर बैठे हुए हैं मेरे पत्रकार की कलम में भी वो दम होती है कि वह कलम के बल पर अपनी कलम अगर सत्यता में चला दे तो उस कलम के बल पर अच्छे अच्छे बईमान को भी झुका कर मारता है पत्रकार की कलम में दम होती [संगीत] कलम चलाना पर जनहित के लिए चलाना राष्ट्र हित के लिए देश हित के लिए और किसी का भला हो सके उसके लिए कलम चला दूसरे नंबर पर है कसम कसम खाओ पर ऐसी वैसी कसम नहीं ऐसी कसम खाने वाले तो डेर होते हैं एक एक व्यक्ति ने एक गुरुजी से कहा गुरुजी हमें तुम्हारा फोटो चाहिए गुरुजी ने कहा मेरे फोटो का क्या

(1:30:55) करोगे मैं तो तुम्हारे दिल में बसा हूं फोटो का क्या करोगे गुरुजी दुकान में लगाना है दुकान में क्यों लगाना है गुरु जी ग्राहक आते हैं ना तो बार-बार कसम खाना पड़ती है कसम खाना पड़ती है इसका मतलब तोक गुरुजी ग्राहक आते हैं तो बारबार बोलना पड़ता गुरु जी की कसम मैंने ये नहीं किया तो तुम्हारी कसम खाने के लिए फूटो चाहिए तो गुरु जी बोले तेरे बाप का लगा कि वो तो निपट गए जो जिंदा है कसम तो उसी की खाना पड़ती है ना गुरुजी तुम जिंदा हो इसलिए तुम्हारा लगा दो कसम कलम उठाना दूसरे के हित के लिए राष्ट्र हित के लिए बुरा हो रहा है ना कलम

(1:31:39) से तो थोड़ी देर कलम को पटक दो बाद में लिखूंगा बाद में फाइल पे साइन बाद में करूंगा राष्ट्र हित की बात है किसी के हित की बात है दुनिया के हित की बात है तो कलम से साइन तुरंत करो पर अगर राष्ट्रीय हित की बात नहीं दुनिया के हित की बात नहीं केवल अपने हित की बात चल रही है तो कलम को थोड़ी देर रख दो बाद में देखूंगा बा [संगीत] कसम कसम भी खाओ मना नहीं है पर कहीं राष्ट्र हित की बात चले मैं कसम वहा खाइए कि मैं अपने धमतरी जिले में गौ हत्या नहीं होने दूंगा तो तो कसम [प्रशंसा] का कसम खाओ कि मैं अपने धमतरी जिले में छोटी छोटी बच्चियों के साथ गलत कृत नहीं

(1:32:42) होने दूंगा तो तो कसम काम की और नहीं तो लोग कसम खाते हैं लड़की लड़के के साथ में घूमती फिरती कसम खाती है मैं कसम खा कर केती हूं एक बार अपन दोनों की शादी हो जाए मैं पूरे घर को स्वर्ग बना दूंगी इसने कसम खाई कि घर को स्वर्ग बना देगी तो घर में रहने वालों को स्वर्गवासी बना [संगीत] देगी ऐसी कसम किस काम की कसम वो खाई जाए जो राष्ट्र हित के लिए हो कसम वो खाई जाए जो राष्ट्र के का कल्याण की बात करे कसम वो खाई जाए जो हमारे समाज हमारे देश और हमारे सनातन के कल्याण की बात करे लोग कसम खा लेते हैं आज के बाद कसम खाता हूं तेरे घर का पानी नहीं पिऊंगा मत

(1:33:32) पी कौन कह रहा है पानी पी क्योंकि तुझे दारू पीने से फुर्सत नहीं मिले तो पानी के र क को पए आज के बाद कसम खाता हूं मैं तेरा मुंडा नहीं देखूंगा मत देख मोबाइल से तो फुर्सत मिले पहले इनका तो मुंडा देख ले तो दूसरे का देखेगा ऐसी कसम किस काम की कसम खाता इतना जोश अगर तुम्हारे अंदर तुम्हारे भीतर अगर इतना जोश उठ रहा है तो कसम खा कि मेरे क्षेत्र की किसी बेटी को कोई गलत दृष्टि से नहीं देखेगा इतना जोश अपने अंदर उठ रहा है कि मैं कसम खाता हूं आज के बाद तेरे घर का पानी पलंगा तो कसम खा कि मेरे क्षेत्र के अंदर में गौ हत्या नहीं होने दूंगा तो तो

(1:34:27) कसम लोग माला पिलाएंगे तेरी कसम के चक्कर में ये कसम किसी काम की नहीं पानी नहीं पिऊंगा मत पी क्योंकि पहले ही तो टन है और ऐसे बेवड़ा उन पानी पिए हमारे घर का वैसे स्वर्ग नहीं मिले का प जाओ कसम खाओ तो ऐसी खाओ जो जग कल्याण किया कभी पत्नी से झगड़ा होता है तो कसम खा लेते हैं आज के बाद आज के बाद मैं तेरे से मुजरी करूगा तेरे से बकवास नहीं करूंगा तेरा मु नहीं देख बल्कि कसम खा आज से आज के बाद नहीं आज से कसम खाता हूं तुझे इतना प्रेम करूंगा कि तेरे मुख से शब्द नहीं निकलेगा प्रेम कर हम दुश्मनी करने की बात करते हैं कसम खाकर हम दुश्मनी करने की बात करते हैं कसम खाली

(1:35:29) पानी नहीं पिऊंगा कसम खाली तेरे मोबाइल को हाथ नहीं लगाऊंगा पत्नी पति में लड़ाई हो जाता है आज के तुम्हारा मोबाइल नहीं छी यह पड़ा य पड़ा ले पड़ा नहीं छी जा सास बह आपस में कसम खा लेती है मैं मेरी बहु क्या चा नहीं पिऊंगी भले मरी जाऊ कई सासों कह देती है मेरी बह मेरा मुह नहीं देखेगी मैं मरी जाऊ मरने के बाद नीचे आके बोलेगी की हाथ मत लगा मरने के बाद नीचे आके बोलेगी कि मैं तेरा मुनि देखूंगी तो ऐसी बात करो क्यों श्रेष्ठ बात करिए कलम क्या क्या चीज बोलो जम के कलम कसम और कदम कदम भी वहां लेकर जाना जहां अच्छा कार्य हो रहा हो कभी भी अपने

(1:36:24) कदम को किसी मदीना की दुकान पर विष वृत्ति में जुए की ओर गलत लत की ओर लेकर मत जाना इस कदम को शिव महापुराण तक लेकर जाना [संगीत] शिव भगवान से प्रार्थना करना मेरा व्यापार चार चौना बढ़ाना [संगीत] कार चार चना बढ़ाना मैं अपनी मेहनत का खाऊ धर्म की धंधा करकर ऐसी कमाई का ना खाऊ धर्म का धंधा बनाकर ऐसी कमाई का ना खाऊ मैं अपनी मेहनत का अपनी मेहनत धर्म का धंधा ना बनाया जाए अपनी मेहनत का यहां से इकट्ठा कर लो वहां से इकट्ठा कर लो हम यह कराएंगे हम वो कराएंगे मालूम

(1:37:30) पड़ा पूरा की पूरा भर के अपना बंगला बनाएंगे और सब धर्म का नाश कर भगवान से प्रार्थना करना कि अपनी मेहनत का खाऊ कभी धर्म का धंधा ना बनाऊ क्योंकि मेहनत का खाऊंगा तो मेरे बच्चे भी चार गुना बढ़ेंगे और अगर मैं कहीं थोड़ा बहुत इधर उधर से बटोर कर धर्म का धंधा बनाकर लेकर भी आ जाऊंगा ना तो मेरी सारी पीढ़ी भुगत भुगत के मर जाएगी एक बार का खाने के चक्कर में एक बार का खाने के चक्कर में बुगती रहेगी धर्म के अनुसार धर्म का धर्म धर्म का धर्म में लगे सत्कर्म का सत्कर्म में सत्कर्म का सत्कर्म [संगीत] भक्ति विश्वास दता भरोसा एक श्रेष्ठता का भाव प्रकट करती है

(1:38:35) इसलिए शिव महापुराण की कथा कहती है कलम वापस बोलो सब लोग साथ में बोलिए क्या क्या कलम कसम और कदम उठाना पर अच्छे के लिए राष्ट्र हित के लिए सनातन धर्म के हित के लिए जगत कल्याण के लिए उठाना जगत क बहुत खुश होना जिस दिन शंकर जी के मंदिर में जल चढ़ाने के लिए रोज जाओ तो रोज खुश हो शिवालय में जाकर जल चढ़ाते समय बाबा को धन्यवाद दो कि तूने बड़ी कृपा करी जो मुझे तेरे मंदिर तक बुला रहा शिव महापुराण की कथा सुनने के लिए अगर आप तो बाबा को धन्यवाद दिया करो कि तूने कृपा करी जो मुझे शिव पुराण तक बुलाया यह कथा तो आज 11 बजे विराम हो

(1:39:34) जाएगी एक बजे टीवी पर आ जाएगी कल का दिन छूटेगा परसों से कथा 26 तारीख से फिर वापस 26 सितंबर से दो अक्टूबर तक परसों से कथा एक बजे से 4 बजे तक साय गोल कंपनी मनमान रोड हीवल नांदगांव जिला नासिक में यह पवित्र कथा 26 तारीख से चालू हो जाएगी जिस दिन कथा में पहुंचो भगवान को धन्यवाद दो कि तूने मुझे यहां तकला जिस दिन शिवालय तक पहुंचो भगवान शंकर को धन्यवाद दो कि तूने मुझे शिवालय तक बुलाया तूने बोला और बाबा भोलेनाथ जी से कहते रहना कि बाबा ऐसी कृपा करना ऐसी करुणा करना ऐसी दया करना कि मैं चलकर तेरी कथा तक आता रहूं मैं चलकर तेरे शिवालय तक आता

(1:40:43) र मुझे घर में या हॉस्पिटल में पलंग पर मत पटक मुझे घर में या हॉस्पिटल में पलंग पर मत पटक देना अगर मैं घर में हॉस्पिटल में पड़ा रहूंगा ना तो तेरे मंदिर तक नहीं आ सकूंगा इसलिए कृपा करना बाबा कि मैं चलते चलते तेरी कथा में जाऊं और चलते चलते तेरे शिवालय मंदिर तक जाऊ ऐसी ऐसी करुणा और मैंने तेरे ही भरो बाबा तेरे ही भरोसे हवा विच उड़ती जावांगी बामा डोर हतो लीला में टटी

(1:41:47) जागी भोले मैं तेरी पतंग शंभू मैं तेरी पतन हवा विच उड़ती जांग बाबा डोर हद को छना में कट जाए दुनिया में कलम कसम और कदम चलो आप लोगों से पूछ उत्तर दोगे बोलो तो जमके सास के हाथ के पांव पड़ते हो कि सिर के पांव पड़ते हो कि पांव के पांव पढते हो जम के जम के पाव गुरु जी के सिर को पढ़ते हो हाथ को पढ़ते हो कि पांव को पढ़ते हो एक बार हाथ ने

(1:42:54) पांव से पूछा कि सारी दुनिया के लोग पांव पर अपना सिर क्यों रखते हैं एक बार हाथ ने पांव से पूछा कि हे पेर हे पांव हे पैर हे कदम सारी दुनिया के लोग अपना सिर पैर में पांव में ही क्यों रखते हैं पांव ने कहा हाथ पांव जमीन पर रहते हैं इसलिए उसको प्रणाम किया जाता है हाथ हाथ से पांव ने कहा पांव से हाथ कह रहा है कि सारी दुनिया के लोग अपना सिर पांव में क्यों रखते हैं कदम में क्यों रखते हैं चरणों में क्यों रखते हैं तो पांव ने कहा हाथ से कि हाथ दुनिया के लोग सिर पांव में इसलिए रखते हैं क्योंकि पांव जमीन पर रहते हैं जो जमीन से जुड़कर आगे बढ़ता है दुनिया

(1:43:59) में वही नाम करता है उसी को शीश झुकता है जो हवा में टंगे रहते हैं हाथ हवा में टंगा है इसको कोई प्रणाम नहीं करता कोई दुनिया का आदमी नहीं आएगा कि हाथ को प्रणाम करके जाएगा क्योंकि हवा में टं जो दुनिया में ज्यादा उड़ता है ना उसको कोई प्रणाम नहीं करता कदम जमीन पर रहे और चरण को हाथ से कहा चरण ने कि मैं एक बात और कहना चाहता हूं हाथ तुझको कि दुनिया के लोग कदम को चरण को शीश इसलिए झुकाते हैं क्योंकि एक कदम ही ऐसा है जो सही जगह पर बढ़ते जाता है तो अपनी मंजिल तक पहुंचा ही देता है कदम मंजिल तक ले [संगीत] बैठे रहो तुम अपनी जगह पर और तुम हाथ को

(1:44:57) ऐसे ऐसे हिलाते रहो चले जाओगे कदम लेकर जाएगा दो चीज बड़ी विचित्र है कदम और एक मन कदम से चलना पड़ता है और मन से चलना नहीं पड़ता मन खुद पहुच जाता है खुद शिव महापुराण में दो चीज बोली गई शंकर की भक्ति करने का दो जरिया है अपने कदम से चलकर शिवालय तक चले जाओ और अगर कदम से चलकर शिवालय तक ना जा रहे हो तो मन से चलकर शिवालय तक पहुंच जाओ कि आज मैंने सोमनाथ का दर्शन आज मैंने सोमनाथ का दर्शन किया आज मैंने बाबा का दर्शन किया [संगीत] बाबा सिहोर में कुबेरेश्वर धाम पर दीपावली

(1:46:05) के दिन रात्रि में बहुत सारे शिव भक्त दिवाली मनाने के लिए धाम पर आते [संगीत] ब कई लोग तो आते आते किसी को चार साल हो गए किसी को पाच साल हो गए किसी कि को छ साल किसी को सात साल किसी को 10 साल हो गए कुरेश्वर बाबा की धरा पर कई लोग दिवाली मनाने दीपावली मनाने के लिए लक्ष्मी पूजन करने आ फिर दूसरे दिन का खजाना लेते हैं बाबा का और लेकर चले दीपावली मनाने के लिए आते हैं साथ में अपने घर से मट्टी के दीप घी बाती लेकर आते हैं बाबा के मंदिर में जहां तहां उनको दिए लगाना रहता है बड़े प्रेम से दीप लगाते हैं रंगोली डालते हैं बाबा के पूजन करते

(1:46:58) हैं और बाबा से झोली पसार कर विनय करते हैं बाबा आज दीपावली के दिन में आपकी पूजन करने के लिए कुबेर भंडारी आपके दरवाजे पर आया आपका नाम कुबेरेश्वर महादेव [संगीत] है लक्ष्मी को भी धन देने वाले आप हो कुबेर को भी धन वाले आप हो बाबा आज मैं भी आपके दरवाजे पर दीपावली मनाने के लिए आया हूं ऐसी कृपा करना कि आज का जो दीप पूजन मेरे घर में भी इतना प्रकाशित हो जाए कि इतना बे इतना धन हो जाए परया हजारों लोग आते हैं दीप लगाने के लिए दीपावली के दिन रात्रि को हजार दीप दान करना दिया दीपावली महोत्सव म दूसरे दिन बाबा को प्र नाम करते खजाना लेते और चले विनती करी

(1:47:56) [संगीत] चल विश्वास भरोसा शिव के प्रति जा आप जाओ शंकर के शिवालय में दो तरह से जाया जाता है एक अपने कदम से चलकर जाते हैं दूसरे अपने मन से चलकर जाते हैं कदम से चलकर जिस दिन आप शंकर के शिवालय तक ना पहुंचे उस दिन मन से जाना कि मैं यहां बैठे बैठे आज भगवान शंकर की कथा में कांटा कुड़ी पहुच गई हूं मैं कथा को श कर आज मेरा मन सोमनाथ पच आज मैंने केदारेश्वर का दर्शन स्वपन में नहीं सपने में नहीं बैठे बैठे कभी विचार कर करो आज मैं काशी जाऊंगा मन से काशी जा जिस दिन जब तुम फिरी हो एकांत में बैठ गए मोबाइल को थोड़ा साइड में रखकर बड़े दिल से पहुंच जाओ काशी

(1:48:59) में मुझे जाना बाबा का दर्शन करना गंगा नाना विश्वनाथ का दर्शन करना ऊंगी ऊंगी जरूर एक सास एक बहू दोनों में अंतर सास बहू का आपस में इतना प्रेम था इतना प्रेम था कि एक दूसरे के बिना रहती नहीं थी एक दिन सास के भाई ने बहू के मामा ससुर ने सास से सास के भाई ने कह दिया जीजी काशी चलना तो जीजी सास ने बोला मैं अकेली नहीं जाऊंगी मेरी बहू को लेकर जाऊंगी नहीं नहीं अपन सब बुजुर्ग बुजुर्ग जा रहे हैं तो ये बह का क्या काम है बह नहीं जाएगी सास से मना कर दिया भाई ने बहू की आंख में जल भर गया सास भी रोने लगी तो बहू ने कहा मां चिंता मत करो मामा जी अगर आपको ले जा रहे

(1:49:40) हैं तो आप चले जाओ सास चली बहू को गले लगाया गले लगाकर सास मामा के साथ में अपने भाई के साथ काशी चल दी ट्रेन में बैठ गई ट्रेन में बैठी बैठते सेही बड़े प्रेम के साथ जब चली गंगा नहाने के लिए काशी में पहुंचने के बाद मामा और यह बहन दोनों गंगा नहा रहे थे नहाते नहाते आज बहू के मन में आया आज मेरी सास सुबरे गंगा नहा रही है मैं भी गंगा नहा लेती हूं इतना बड़ा भगोना लियाई बर्तन उसमें डाल लिया पानी उसमें एक ढक्कन गंगा जल और बैठ गई उसी के अंदर और लोटा भर भर के डालने लगी बहू सास नहा रही थी गंगा बहू नहा रही थी भगने के अंदर बैठकर बर्तन के अंदर बैठकर

(1:50:40) गंगा तभी सांस के हाथ की अंगूठी गंगा में गिर गई सांस ने आवाज लगाई मेरी अंगूठी गिर गई ढूंढा मिल नहीं रही है तब बहू गंगा नहाते नहाते बोली गंगा मैया हे विश्वनाथ मेरी सांस भी गंगा नहा रही है मैं भी गंगा नहा रही हूं मेरी सांस चलकर कदम से चलकर गंगा तक पहुंची है मैं मन से गंगा तक पहुंची हूं मेरे मन के स्नान को स्वीकार कर लेना गंगा मैया बहू घर में नहा रही सास वहा नहा रही अंगूठी चली गई सास वापस आई बहू को गले लगाया लगाते से देखा कि बहू के हाथ में अंगूठी है सास ने कहा य अंगूठी तो मेरी गंगा में गिर गई थी य अंगूठी तेरे पास कैसे आई बह ने

(1:51:31) कहा मां सुबह आप वहां गंगा नहा रहे थे मैंने य बर्तन में जल भरकर गंगा नहाया तो उस बर्तन के अंदर मुझे य अंगूठी मिली इसलिए मैंने पहन ली अर्थात कदम से चलकर गंगा नहाने वाली का भी मन से गंगा स्नान का भी पुण्य फल प्राप्त हो दिल से भगवान को अगर पुकारा जाए मन से भगवान को अगर पुकारा जाए तो भगवान आता जरूर है उसने मन से गंगा को नहाया तो गंगा मैया ने व सोने की अंगूठी उसको यहां [संगीत] दिला शिव महापुराण की कथा में भीड़ बढ़ाने के लिए कभी मत जाना और हमारा आपसे निवेदन है वैसी पंडालों में जगह नहीं रहती इसलिए भीड़ बढ़ने मत आ शिव महापुराण की कथा में अगर जाना है तो

(1:52:23) दिल से जाना कि मैं कथा में जा रही हूं मेरा बाबा के प्रति विश्वास है और मेरा मन कहता है कि मैं जिस कथा को सुनने के लिए जा रही हूं मेरा बाबा मेरा वो काम जरूर करेगा तो बाबा जरूर करेगा ये निश्चित भीड़ बढ़ाने के लिए मत जाओ कि हम देख के तो आए कथा क्या चल रही है हम देख के तो आए व्यवस्था क्या है हम देख के तो आए आखिर भीड़ क्यों हो रही है हम देख के देखने के लिए मत जाओ जाना है दो अंतर है देखने के लिए लोग ताजमहल जाते हैं और दर्शन के लिए वृंदावन जाते हैं देखने और दर्शन में अंतर होता है देखने से काम जागता है और दर्शन से काम भागता है दोनों

(1:53:05) में अंतर है देखा ताजमहल तो मन में आया मैं भी अपनी पत्नी के लिए कुछ ना कुछ बनाऊंगा काम जाग गया दर्शन करे वृंदावन के तो मन में आया कि भगवान ने अपनी बंसी के नाद से पूरे ब्रज को अपना बना लिया था तो मन में आया मैं वाणी ऐसी बोलूंगा कि मेरे गांव के लोगों को अपना बनाने का प्रयास करूंगा ताज महल देखने से काम जागेगा और बृंदावन का दर्शन करने से काम [संगीत] भागेगा भाग अपने भीतर भाव को उत्पन्न करो मन से भजो ना जिसका दिल लगे तो कथा में आओ दिल ल तो तुरंत उठ के चले जाओ नहीं लग रहा हमारा मन हम हमें तो कथा कई कई लोग ऐसे आते हैं

(1:53:58) जो कथा में जिनका मन नहीं लगता का को आ जाते फालतू का टाइम बर्बाद करने के लिए घर पर र चान खाओ जिंदगी और आजकल नया नया चीज खाने का हो गया कुत्ता कुत्ता बोलते कुत्ता हड डॉग हां जो भी है तुम हमें तुम्हारा मन पड़े वो पर इतना जरूर याद [संगीत] रखना अनन भीष्म पितामह ने दुर्योधन के घर का खा लिया था बुद्धि फिर गई थी द्रोपदी का चीर खींच रहा था और पितामह बैठे बैठे देखते रहे अन्न का सर जैसा खाया अन्न बोलो बोलो जम के बोलो

(1:55:07) वैसा हो गया मन जैसा पिया पानी वैसी हो गई वाणी और जैसा पिया दूध वैसा बन गया बुध बुद्धि दूध से बनती है इसलिए कहते हैं गौ माता का दूध पियोगे तो गाय जैसे निर्मल बनोगे थली का दूध पियोगे तो थली बनोगे डब्बे का दूध पियोगे तो डब्बे जैसे हो जाओ गौ माता के दूध का पान कर ग [संगीत] मा विचार मन शुद्ध बनाने का प्रयास करिए और जब मन शुद्ध हो जाएगा तो शिव तत्व अवश्य [संगीत] मिलेगा समझाना बड़ा मुश्किल है

(1:56:23) फर वो दर ले दिल में सच्चा दरबार लगावे ये भोले की मेहर है नैनों को डमरू वाले का नैनों को काशी वाले का नैनों को डमरू वाले का दीदार चाहिए काशी रहने वाला भोला नाथ चाहिए वो काशी रहने वाला भोला ना चाहिए वो काशी रहने वाला भोलानाथ चाहिए काशी देहने वाला बोला ना चाहिए अपनी किस्मत का

(1:57:34) ताला अपनी किस्मत का ताला अपनी किस्मत का ताला तुम खोलते चलो श्री शिवाय नमस्तुभयम तुम बोलते चलो श्री शिवा नमतु तुम बो चलो श्री शिवाय नमस्तुभयम तुम बोलते चलो श्री शिवाय नमतु तुम बोलते चलो जय हो [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत]

(1:59:13) [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]

(2:00:25) [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] कुछ कमी नरवान की तुझ कमीना अरमानों की तेरे दिल दीवानों की तेरे दिल दीवानों की कुछ कमीनार मानों की कुछ कमीनार मानों की तेरे दिल दीवानों की तेरे दिन दीवानों की मुझको मदश बनाए कटार तेरे नैनों की मुझको मदहोश बनाए कटार तेरे न नैनों की मुझको मद होश बनाए कटारी तेरे नैनों की मुझको मद होश बनाए कटार तेरे नैनों की नैनों को डमर

(2:01:36) वाले का हो नों को काशी वाले का नों को डमर वाले का दीदार चाहिए रहने वाला भोला नाथ चाहिए हो काशी रहने वाला भोला नाथ चाहिए [संगीत] जय हो

(2:02:53) [संगीत] चू आ [संगीत] [संगीत] j

(2:04:05) [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] शंभु भक्तों के तुम प्यारे हो भक्तों के तुम प्यारे हो तुम जिगरी दिल वाले हो तुम जिगरी दिल वाले हो भक्तों के तुम प्यारे हो भक्तों के तुम प्यारे हो तुम जिगरी दिल वाले हो तुम जिगरी दिल वाले हो कितनों पे डोरे डाले तेरे नैन बड़े मत वाले कितनों पे डोरे डाले तेरे नैन बड़े मत वाले

(2:05:13) कितनों पे डोरे डाले तेरे नैन बड़े मत वाले कितनों पे नरे डाले तेरे बड़े मतवा नैनों को भोले बाबा का हो नैनों को काशी वाले का न को भोले बाबा का दीदार चाहिए वो काशी रहने वाला भोलानाथ चाहिए वो काशी रहने वाला बोलना प चाहिए अपनी किस्मत का ताला अपनी किस्मत का ताला अपनी किस्मत का ताला तुम खोलते चलो श्री शिवाय नमस्तुभयम तुम बोलते चलो श्री शिवाय नमस्तुभयम तुम बोलते चलो [संगीत]

(2:06:19) [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] श [संगीत] [प्रशंसा] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा]

(2:07:47) [संगीत] [प्रशंसा] [प्रशंसा] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] शंभो ओ हो [संगीत]

(2:08:52) [प्रशंसा] [संगीत] समझाना बड़ा मुश्किल है समझाना बड़ा मुश्किल है आखिर वो दर्दे दिल है आखिर वो दर्द दिल है सच्चा दरबार लगा है ये भोले की महफिल है सच्चा दरबार लगा है ये भोले की महफिल है सच्चा दरबार लगा है ये भोले की महफिल है सच्चा दरबार लगा है ये भोले की महफिल है नैनों को काशी वाले का नैनों को डमरू वाले का नैनों को सीहोर वाले का नैनों को काशी वाले का दीदार चाहिए वो काशी रहने वाला लाना की चाहिए वो काशी रहने वाला बोलती चाहिए अपनी किस्मत का

(2:10:04) [प्रशंसा] ताला अपनी किस्मत का ताला अपनी किस्मत का ताला तुम खोलते चलो श्री शिवाय नमस्तुभ्यं तुम बोलते चलो श्री शिवाय नमतु तुम बोलते चलो चलो श्री शिवाय नमस्तुभ्यं तुम बोलते चलो श्री शिवाय नमस्तुभ्यं तुम बोलते चलो श्री शिवाय नमस्तुभ्यं तुम बोलते चलो श्री शिवाय नमस्तुभ्यं तुम बोलते चलो श्री शिवाय नमतु तुम बोलते [संगीत] [प्रशंसा]

(2:11:16) बोले शंभु [प्रशंसा] बोलो विश्वनाथ भगवान की जय हर महादेव हर अपने स्थान पर बैठकर भगवान शिव जी से अपने मन की बात आज कथा का विराम दिवस है कहते हैं विराम के दिन समापन के दिन आखरी दिन बाबा जाते जाते जो मांगो वोह देकर चले जा इसलिए दिल से भाव से प्रेम से बाबा को नमन करना और बाबा से विनय करना हृदय से बाबा को विनती करना दिल से बाबा को

(2:12:27) कहिए आपके कांटा कुडी में यह कथा आज विराम हो जाएगी परसों 26 तारीख से 26 सितंबर से दो अक्टूबर श्राद्ध पक्ष की दूसरी कथा साई गोल कंपनी मनमाड़ रोड हि स्वल नांदगांव जिला नासिक महाराष्ट्र में प्रारंभ हो जाएगी एक बजे से 4 बजे तक जितने भी भक्त वहां कथा सुनने आ रहे हैं अपने अपने पित्रों का अपने अपने पूर्वजों का फोटो लेकर आ सकते हैं आस्था चैनल के माध्यम से फेसबुक ट के माध्यम से जितने शिव भक्त अपने पित्रों के लिए सात दिन की पूरी शिव पुराण अमावस्या तक की सुनेंगे वो अपने घर में अपने पूर्वजों के फोटो के पास में एक चावल का दाना अवश्य रखकर सुने

(2:13:29) और वह चावल के दाने को अपने मटका हंडा परिंडा पानी का स्थान जो होता है वहां पर उसको चढ़ा दे जितना पितृ दोष से जुड़ी हुई तकलीफें हैं वह धीरे धीरे मिट जाए जितने लोग पंडाल में कथा सुनने के लिए महाराष्ट्र आ रहे हैं नांदगांव अपने साथ अपने पूर्वजों का पित्रों का फोटो अवश्य लाए नहीं ला सकते एक चावल का दाना अवश्य लेकर कथा में बैठे सात दिन की कथा आप हम श्रवण करेंगे और अपने पूर्वजों को पित्रों की शांति हेतु वो कथा का लाभ सबसे बड़ी विषय उसी कथा में पितृ पक्ष की शिवरात्री भी पड़ेगी जो नांदगांव की कथा है नासिक जिले की उसमें पितृ पक्ष की शिवरात्रि भी उसका

(2:14:26) महत्व समझ उसका स्मरण सब साथ में बाबा से विनय करेंगे भाव से विनती करेंगे सब भाव से जहां जगह मिल जाए वहां बैठकर दिल से कहना दिल से सुनेगा मेरा साथ में [संगीत] बोलिएगा श्री शिवाय [संगीत] नमस्तय [संगीत] नमस्तय [संगीत] नमस्तय नमतु भोला सब दुख काटो

(2:15:31) मरा ओ भोला सब दुख काट हमारा शिव शंकर जप तेरी माला भोले बाबा जप तेरी माला भोला सब दुख काट हारा हो भोला सब दुख काटो हमारा वेश है मंगर मंगलकारी [संगीत] मंगल मंगलकारी शमशान बासी हमारा शमशान

(2:16:35) वासी हमारा हो भोला सब दुख काटो हमारा ओ भोरा सब दुख का [संगीत] भगवान देवद देव महादेव से भाव से अपने हृदय की बात शिव जी से कही भगवान शंकर करुणा सागर करुणा करने वाले दुनिया का भंडार भरने वाले दातार कृपा करने वाले सब पर कृपा करते हैं उसकी करुणा सब पर [संगीत] कलम कसम और कदम ध्यान रखकर उठाइए दुनिया के हित के लिए उठाइए राष्ट्र हित के लिए

(2:17:44) उठाइए जगत कल्याण के लिए उठ शिव महापुराण की कथा कहती है देवता और राक्षसों ने मिलकर मंथन किया [संगीत] मंथन देवता राक्षस मिलकर समुद्र का मंथन [संगीत] करे और उस मंथन में विष भी निकला और अमृत भी निकला सब कुछ निकला रतन माणिक औषधि लक्ष्मी सब उस मंथन में मिले हैं सब उस मंथन में प्राप्त [संगीत] हुए देवता और राक्षस मिलकर समुद्र का मंथन करते हैं यह सब कुछ

(2:18:52) प्राप्त होता पर यदि कथा के पंडाल में बैठकर आप और हम जो भगवान शंकर की कथा का मंथन करते हैं उससे हमारे अंदर आत्मविश्वास प्रकट होता है आत्मविश्वास [संगीत] एक भरोसा एक विश्वास हमारे भीतर [संगीत] प्रकट केवल समुद्र का ही मंथन नहीं है मंथन अपने विचारों का भी होना चाहिए मंथन अपनी सोच का भी होना चाहिए हम तो यहां तक्ष महापुराण की कथा में कहते हैं कि शंकर पार्वती मेरे देव अधिदेव महादेव और माता जगत

(2:22:07) के लिए देकर चले आपको जिस घर में आप रह रहे हो जिस मकान में आप रह रहे हो जिस जमीन को आप कर रहे हो जिस व्यापार को आप कर रहे हो और यह सब चीज बात की बात है पहले विचार करो कि आपको भी जन्म देने वाले माता पिता घर के ही तो है आपको उस लायक कर दिया उन्होंने कि आप कुछ अच्छा कर सके आपको उस लायक बना दिया उन्होंने कि आप कुछ सृष्ट कर सके कुछ अच्छा बना सके सृष्ट कर सके पित्रों के लिए 16 दिन है और ये 16 दिन किसने मांगे राजा कर्ण ने स्वर्ण का न दिया है राजा कर्ण ने केवल सोना ही सोना दान किया प्राण छूट गए राजा कण और ऐसा नहीं कि

(2:23:11) भगवान ने मौका नहीं दिया ऐसा नहीं मौका नहीं महाभारत की कथा कहती है महाभारत का चरित्र कहता है अभिमन्यु जमीन पर पड़ा है कण सामने खड़ा है कर्ण ने खूब सोने का दान दिया गोल्ड ही गोल्ड दान दिया सोना तब भगवान कृष्ण के मन में आया भगवान ने विचार किया कि इसने सोना ही सोना दान किया है तो एक काम करूं कि मरेगा ऊपर जाएगा तो कम से कम इसको कुछ खाने पने को तो मिल जाए खाने पने मरने पर अभिमन्यु के प्राण छूट रहे हैं चक्र व में फसा हुआ अभिमन्यु प्राण छोड़ रहा है

(2:24:16) सामने कर्ण खड़ा है वहीं पर थोड़ा सा पानी का छा जल छा जल जानते हो एक कपड़े की होती थी जिसमें पानी भरा रहता था अभिमन्यु मरते मरते कह रहा है राजा कर्ण से मुझको वह पानी पड़ा है थोड़ा सा पिला दीजिए जल पड़ा है थोड़ा सा पानी मुझे पिला द थोड़ा सा जल पिला दो मुझे मेरे प्राण छूट रहे हैं वो पानी मुझे दे वो पानी मुझे दे दो कहता कहता अभिमन्यु मांगता रहा पर राजा कर्ण ने एक बूंद पानी अभिमन्यु को नहीं दिया प्राण भगवान कृष्ण ने विचार करा की मैंने तो इसको मौका दिया था कि कम से कम पानी का दान दे दे तो तेरे भी काम आएगा प्यासे को पानी पिला दे इससे बढ़कर

(2:25:17) और क्या दे दो आखिरी में अभिमन्यु मर गया और आप सब जानते हो महाभारत के चरित्र को कि कर्ण के प्राण कहां छूटे युद्ध के मैदान में जो छाल पड़ी थी उसका पानी जमीन पर गिर गया था कर्ण रथ को भगा रहा था पीछे हटाने के लिए पया फस गया उसी कीचड़ में जो पानी नहीं पिला पाया था और उसी में फसा और वहीं पर राजा कर्ण के प्राण छूट गए वही क्या हुआ मरा राजा कण गया ऊपर कुंती को मालूम था कि मेरा बेटा है इसलिए कुंती ने उसको रोक कर रखा उसकी बॉडी उसका शरीर सब उसकी रक्षा मेरा बेटा है इसका अंतिम संस्कार युधिष्ठिर से करवाऊं अर्जुन नकुल सहदेव से करवाऊंगी

(2:26:25) बड़ा गया कण आत्मा जीवात्मा गई जाते से ही पूछा क्या करा इसने खूब सोने का दान दिया है स्वर्ण दान दिया स्वर्ण दान दिया तो एक काम करो सोने की पूड़ी सोने का चावल सोने का भजिया सोने की सब्जी सोने के कचौड़ी सोने का समोसा खाने को दिया सोने का पानी पीने को दिया राजा तड़पने लगा कि मुझे पीने का पानी तो दे दो धर्मराज बोले तूने जमीन पर जाने पर भी एक बून पानी का तान नहीं दिया वो अभिमन्यु मरता रहा और आस रखता है कि कोई तुझे पानी पिला दे आस रखता है तोत पानी पिला दे क्षमा मांगने लगा राजा कर्ण मुझे क्षमा कर दो कुछ दिन दे दो मैं अन्न का दान

(2:27:17) करूंगा थोड़े से दिन दे दो मैं अन्न का दान करूंगा कह दिया ठीक है इतना बिलख रहा है तो पृथ्वी पर जा तेरे पृथ्वी पर जाकर तेरी जीवात्मा के द्वारा जाकर 16 दिन तुझे दिए हैं श्राद्ध के उन 16 दिन में जो जितना अन्न का दान कर सकता है उतना कर जितना राजा कर्ण पृथ्वी पर आए वापस 16 दिन तक अन्न का दान करते रहे वो 16 का अन्न राजा कर्ण को फिर खाने को मिला यह श्राद्ध के 16 दिन साधारण नहीं [संगीत] है श्रा के 16 दिन साधारण नहीं एक अन्न का दाना भी अगर हम किसी को खिला रहे तो उसका पुण पुण आप किसी को पानी हम करे व्यासपीठ से पानी

(2:28:24) का पाउच पिला दो दे दो पानी की बोतल एक चलू पानी भी अगर दिया है तो उसका भी पुण्य है एक अंश मात्र दान का भी पुण्य है पु कितने भाग्यशाली हो आप सब पूरा काटा कोड़ी गांव धनतरी जिला और पूरे आस्था चैनल पर कथा सुन रहे सभी श्रोता भाई बहन जिनका एक रुपया भी अगर सहयोग मिला है तो उसकी सहजता है आप लोगों का प्रेम और आप लोगों का आनंद देने वाले तो दे देते हैं पर फर्ज बनता है लेने वाले का कि उसने सही जगह लगाया कि नहीं लगाया सही जगह पर अगर लगाया होगा तो उसकी भी जिंदगी सार्थक हो जाए नहीं लगाया होगा तो अगली दो कथाओं में सामने पूरा पचा आ जाता है कि गुरुदेव

(2:29:29) तकलीफ हो गई दुख होया कष्ट हर कथा में व्यक्ति फिर मिलता है तो कहे कि आंख से आसू ढल रहे हैं तकलीफ [संगीत] तकलीफ श्राद्ध पक्ष का एक अन्न का दाना भी श्राद्ध पक्ष का यहां तक कहता है कि ब्राह्मण अगर श्राद्ध का भोजन भी करता है तो उसको गायत्री ज्यादा करना पड़ती है तब वो भोजन पचता है देने वालों ने तो दे दिया साब यह ले लो यह ले लो यह ले लो यह ले लो इकट्ठा कर लिया और अपने भोग में लगा दिया तो जिंदगी [संगीत] बवाद कभी मौका लगे जितने आस्था चैनल पर कथा सुन रहे जितने फ सुन जितने इस पंडाल में कथा सुन रहे कभी मौका लगे तो एक बार सिहोर कोबरे

(2:30:25) शवर धाम जरूर आओ आकर अपनी आंखों से देखो कि तुमने जो दान दिया है वहां पर रोज प्रतिदिन 25 से 5 हजार आदमी रोज खाना खाता है रोज भोजन करता है तोव सही जगह लग रहा है तुम्हारा दान श्रेष्ठ जगह लग रहा है कि नहीं लग रहा कभी विचार करिए कभी सोचिए [संगीत] शिव महापुराण की इतनी कथा करते करते करते करते यह समय हो गया 25 साल निकल गए कोई कह दे कि सियोर वाला महाराज के खाते में चवन्नी भी लेता कभी कह दे देते होगे तो था चैनल का देते होगे देते होगे तो इन संगीत वालो का देते होगे पर सर वाला महाराज तुमसे नहीं लेता क्योंकि मेरा कुबेर भंडारी देने वाला मेरी

(2:31:19) झोली भर देता है दो रोटी प्रेम कोई नहीं क सकता उसके आश्रित होकर जीते हैं जितनी कथा कहते हैं पहले खुद पर अमल करते हैं कि हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं कोई कह दे महाराज को 50 लाख दिए एक करोड़ दिए उसको पकड़ कर लेकर आना उसकी एफ आईआर हम चलकर थाने में खुद करवाएंगे [संगीत] स्वयं उसके आश्रित होकर जीते हैं उसके [संगीत] आश्रय उसके जिंदगी उस शंकर की है शिव की है शंकर भगवान को समर्पित है दान करो कन्या दान करो बेटी का भी दान करो तो 50 बार विचार करना कि बेटी सही घर में जा रही है कि नहीं जा रही है गौ माता का दान करना तो 50 वि बार विचार करना कि

(2:32:20) गाय किसी सही के हाथ में जा रही कि नहीं जा रही बेटी का कन्या दान कर दिया गलत जगह चली गई बेटी रोएगी तो दान करने वाले को रोना पड़ेगा गाय का दान करा गाय गलत जगह जाएगी बाद में कसाई के हाथ में कटेगी तो दान करने वाले को रोना पड़ेगा और लक्ष्मी का भी दान करो पैसा भी किसी को दो तो 50 बार विचार करना कि वह सही जगह लग रहा है कि नहीं लग रहा मालूम पड़े कि दूसरे के भंडार भरने में लग गया धन गलत जगह चले जाएगा तो रोता है बेटी गलत जगह चली जाती है तो रोती है गाय गलत जगह चली जाती है तो रोती है और रोना दान करने वाले को पड़ता है किसी दूसरे को नहीं कभी अपने मन से भाव

(2:33:00) से विचार करिएगा कि हम जो दिए हैं वो सही जगह लगे और सत कर्म में 16 सरात के 16 दिन मिले हैं कथा के पंडाल में रहो कहीं पर भी रहो कोई भूखा है कोई प्यासा है चाहे तुम्हारे गांव में नगर में मोहल्ले में कॉलोनी में सोसाइटी में कोई भूखा है उसको भोजन करा दो तो तुम्हें उतना ही पुण्य मिलेगा जितना तुमने भंडारा कराया कोई भूखा है प्यासा है उसको पानी पिला दो उतना ही पुण्य मिलेगा किसी को औषधि की जरूरत है दवाई की जरूरत है पैसा नहीं है उसके पास बीमारी के लिए अपने पास अगर बाबा ने दिया है तो एक बार डॉक्टर को तुम जाकर दिखा दो कोई बच्चा पढ़ना चाहता है एजुकेशन चाहता

(2:33:42) है अच्छा आगे बढ़ना चाहता है उसके पास पढ़ाई के लिए पैसा नहीं है एक स्कूल की फीस अपने हाथ से जमा कर दो उस बच्चे की उन्नति में तुम्हारा भी कदम होना चाहिए तुम्हारा भी कदम होना चाहिए एक सृष्ट जीवन जीने का प्रयास [संगीत] करो अपने आनंद के साथ यह जरूरी नहीं कि तुम किसी को दो अपने हाथों से करो भूखे को भोजन प्यासे को पानी जय बाबा [संगीत] बर्फानी कोई वृद्ध है बूढ़ा है बैसाखी की जरूरत है बैसाखी कोई बुजुर्ग है लगता है जरूरत [संगीत] है करो से बहुत बुजुर्ग बुजुर्ग लोग रहते हैं कथा में आने का मन होता है कथा का पंडाल दूर लगता

(2:34:48) है कथा का पंडाल दूर होता है और गालिया दूर खड़ी होती है श्राद्ध पक्ष की इस कथा से हम भी प्रयास करने का एक नियम बनाते हैं कि प्रयास करेंगे आप सबका सहयोग मिलेगा तो वह सफलता जरूर होगी कि बुजुर्ग लोग कथा के पंडाल में आते हैं गाड़ी से कथा के पंडाल तक उनसे चला नहीं जाता तो ऐसा प्रयास करेंगे कि उनको बल चेयर से बिठाकर आराम से कथा के पंडाल तक आए और जो बीमार हैं जिनका शरीर बहुत ज्यादा शिथिल है जैसे यह बेरी गड तुम लोगों ने बनाए हैं पास के चक्कर में आने वाली कथाओं में एक बेरी गड बनेगा उन बुजुर्गों के लिए जिनसे चला नहीं जाता और वो आराम से बैठकर कथा

(2:35:45) सु जिनकी बीमारी है जिनकी तकलीफ है जिनको कष्ट है जिनके शरीर में कष्ट है नहीं है धन नहीं बैठ सकती आकर तो उनको बिठाने की व्यवस्था सुचार रूप से हो आगामी आगे की जितनी कथाएं हैं छत्तीसगढ़ की हो चाहे महाराष्ट्र की हो चाहे पंजाब की हो चाहे हरियाणा चाहे उत्तर प्रदेश की हो हमारे माध्यम से कथा अगर सुन रहे हो या टीवी वाले उसको काट कर भेजे कि आने वाले समय में एक बेरी गड एक डी ऐसा बनाया जाए जिसमें बीमार और बुजुर्ग लोग आराम से बैठकर कथा स्न कर सके उनकी व्यवस्था उनकी व्यवस्था हो और वह सुचारु रूप से कथा का पान कर सके कथा सुन सके

(2:36:30) क्योंकि बहुत तमन्ना है लोगों की कोई कोई बहुत गरीब बड़ा है नहीं आगे पहुच सकता शरीर शिथिल है बच्चे लेकर तो आ जाते हैं डरा देते हैं कहां जाओगी कहां बैठो गी उनके लिए व्यवस्था अब आप और हमको करना व्यवस्था नहीं होगी उन लोगों के लिए तो हम व्यासपीठ छोड़कर एक दिन की कथा बाच कर वहां से चले जाएंगे दूसरे दिन की कथा नहीं होगी उनकी व्यवस्था नहीं तो कथा नहीं टीवी प से सुनाएंगे प्रेम से सुनना कुरेश्वर धाम भला कथा आप व्यवस्था करेंगे उनके लिए तो हम भी कथा करेंगे क्योंकि तुम लोगों से धन की मांग के साथ कथा नहीं हो आपने दिल से जाकर लिखा दिया हम आपको केवल आपका

(2:37:13) चेहरा देखते हैं हमको ये भी नहीं मालूम कि तुम करोड़पति हो कि अरीब पति हो कि गरीब हो हमने तो तुम्हारा दिल देखा और कथा देख हम ये नहीं देखे करोड़पति को देना होती तो कथाए ढेरो हो जाती यह बनवासी क्षेत्र में कथा चल रही है और वनवासियों ने अपना पत्र तक य भेजा और क्या पत्र भेजा है उनकी पूंजी देखी है उस पत्र की उस पत्र की पूंजी को देखेंगे तो उस पत्र में उन वनवासियों ने लिखा है यहां के लोगों ने हम ग्राम कांटा कुड़ी के निवासी हैं क्षेत्रवासी है हम इस वनवासी क्षेत्र में रहते हैं गुरुदेव हमारे पास में इतना तो नहीं कि हम कुछ कर सके आज पूरा धमतरी जिला

(2:37:57) इस गांव की ओर देख रहा है यह कांटा कुडी ऐसा गांव है जो लोगों की दृष्टि में क्या ना दंड में भी ना आए पर आज पूरे विश्व में इस कंटा कुडी गांव को लोगों ने देखा है गुरुदेव हमारे गांव के लोगों ने जितना बन सका अतिथि सेवा भोजन भंडारा सेवा मेन पंडाल सेवा हमारे पास में धन तो नहीं था पर हमसे जैसा बना वैसा करा गुरुदेव हमारे गांव की गाय हम चराते हैं और चराने के बाद में ही हमारे पास में उसका पैसा मिलता है उससे हमारा व्यापार होता पाच दिन पब्लिक को देखते हुए हमारे गांव की गाय हमारे घर की गाय चरने के लिए नहीं गई पांच दिन हमने अपने गांव की गाय को अपने

(2:38:47) घरों में सेवा कर पांच दिन तक अपनी गौ माता की हमने घर में सेवा करी पर सत्य कहते हैं गुरुदेव जो पांच दिन हमने गौ माता की सेवा अपने घर में करी है श्राद्ध पक्ष में बाबा ने ना जाने ऐसी क्या कृपा करी कि हमें जो हम चराने से प्राप्त करते थे बाबा ने उससे चार गुना हमको घर में गाय की सेवा करने से दे शिव तत्व की प्राप्ति आपका विचार शुद्ध है आपका भाव शुद्ध है भाव शुद्ध है तो यह कथा भी शुद्धता के भाव में भाव [संगीत] निर्मलता और आपका विश्वास इस पत्र को एक लाइन अच्छी लिखी संत मिलन को जाइए तज

(2:39:55) कोटिन अभिमान जो जो पग आगे बढे कोटि यज्ञ समान गुरुदेव समस्त ग्रामवासी क्षेत्रवासी कांटा कु के ग्राम प्रमुख जन काट को भी खेमराज साहू राधेश्याम ध्रुव अश्विनी ठाकुर राम नारायण चंद्राकर खाराम साहू सत्यवान ध्रुव सरपंच एवं संपत समस्त कांटा कुडी के एक एक निवासी इस कथा के माध्यम से आपको धन्यवाद देते हैं कि आप कुरेश्वर धाम से इस वनवासी क्षेत्र को कथा [संगीत] लेकर वनवासी क्षेत्र है पूरा भारत पूरे श्रोताओं ने इसमें सहयोग दिया बाबा कीय कथा विराम की ओर जावेगी पर दिल से सुनी दिल से श्रवण करी तो मेरा भोलेनाथ भी दिल से देने में कमी

(2:40:59) नहीं रखेगा 16 दिन श्राद्ध के कणों को मिले हैं उस 16 दिन का सदुपयोग करिए बाबा ने धन दिया है तो धन का सदुपयोग करिए शरीर दिया है शरीर का सदुपयोग कर मन दिया है तो मन का सदुपयोग कर दिल से आगामी कथाओं का तो वर्णन है बारा ज्योतिर्लिंग का स्मरण सोमनाथ जी का वर्णन किया चंद्र की काया का रोग ठीक किया मल्लिका अर्जुन बाबा के रूप में भगवान सड़न कार्तिक के मनाने पहुंचे दूषण नाम के राक्षस का संघार करकर महाकाल बन गए बिंद पर्वत के तप से ओमकार बन गए नर नारायण को वर देकर केदारनाथ बन गए भीम का संघार करकर भीमा शंकर बन गए मनु शतरूपा के तप के बल से भगवान विश्वनाथ बन

(2:41:58) गए गौतम बाबा के श्राप के मुक्त से त्रंबकेश्वर बन गए रावण को अपना स्वरूप देने से वैद्यनाथ बन गए दारुक नाम के राक्षस के संघार से नागेश्वर बन गए राम जी के द्वारा प्रतिष्ठित होने से रामेश्वर बन गए और सुधर्म नाम के ब्राह्मण की पत्नी घोष मा के बेटे को जीवित करने से घृष्णेश्वर बन 12 ज्योतिर्लिंग का स्मरण किया बिंदु प्रेत योनि से मुक्त हुआ चंचला देवी चंचला देवी बड़े भाव से अखंड सौभाग्य धारण कर कर च अखंड और यह कथा तुम रुका जी ईश्वर जी गोरा जी को श्रवण कराए भाव से जो शिव महापुराण की कथा को श्रवण करता है सुनता है धारण करता है

(2:42:58) मेरा देवदिदेव महादेव उसकी झोली खुशियों से भरता है दिल से इस कथा को आप लोगों ने स्वीकार करा धमतरी क्षेत्र छत्तीसगढ़ की ये पवित्र भूमि जिस छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहते हैं इस पवित्र भूमि पर बैठकर आप लोगों ने इस कथा को सुना छत्तीसगढ़िया सबले दिल से इस कथा को स्वीकार किया भाव से कथा को सुना सभी सेवादार सभी अधिकारी गण सबको साधुवाद देते हुए आप लोगों को बहुत-बहुत बधाइयां देते हुए आज कथा को विराम की ओर लेते हैं आस्था चैनल के जितने श्रोता भाई बहन है फ के जितने श्रोता भाई बहन और पंडाल के जितने श्रोता भाई बहन है प्रयास करो नियम

(2:43:52) बनाओ अपने हाथ का एक लोटा जल महादेव को अवश्य चढ़ाओ सारी समस्या का हल एक लो जल बोल बम का नारा है अपनी गाड़ी अपना मकान अपना दुकान अपनी जायज पर शंकर का एक नाम अवश्य लिखो श्री शिवाय नमस्तुभ्यं श्री शिवाय नमस्तुभ्यं लिखा कलयुग उसमें प्रवेश नहीं करेगा भगवान शंकर का वो घर बन जाएगा उसमें दुख तकलीफ कभी ना आएगी बाबा उसको स्वीकार करेगा कि ये मेरा घर है आपका नाम जिस मकान पर लिखा रहता है उसमें तुम आराम से प्रवेश कर जाते हो क्योंकि इस मकान पर मेरा नाम है जिसके घर दुकान गाड़ी पर श्री शिवाय नमस्तुभयम लिखा रहता है उसके अंदर मेरा

(2:44:45) शंकर प्रवेश कर जाता है कि ये मेरा घर है मुझे समान [संगीत] मुझे संभालना है ये मेरा अपना है उसको संभाल प्रेम से भजें अगली कथा परसों से 26 तारीख से एक बजे से 4 बजे तक अपन सब आस्था चैनल पर श्रवण करेंगे पित्रों की कथा का लाभ लेंगे और अपने जीवन को सार्थक बनाएंगे सभी श्रोता भाई बहनों को सभी सहयोगियों को अनन क्षेत्र में जिन्होंने सेवा दी है चाहे कुरेश्वर धाम बटले सेवा समिति का अन्न क्षेत्र हो चाहे यह सुंदर अनन क्षेत्र यहां की संस्था का हो और जितने लोग कहीं पूड़ी सब्जी कोई पानी कोई कुछ कोई कुछ बांट रहा है आज हम आ रहे थे तो

(2:45:30) रोड पर भी इस साइड टेंट लगाकर कुछ लोग सामग्री बांट रहे थे उनको भी बहुत-बहुत धन्यवाद है जितने लोग आस्था चैनल के माध्यम से ऑनलाइन टीवी के माध्यम से जो सहयोग दिए हैं तुम्हारा दो रुपया पाच रुपया जो मिला है अन्य क्षेत्र में लगकर इतने शिव भक्तों के मुख में जाए और उनका भी कल्याण हो यही भाव से आज कथा विराम की ओर जा रही है 26 तारीख को फिर मिलेंगे दोपहर में एक बजे से 4 बजे तक नासिक जिले के साय गोल कंपनी मनमाड़ रोड हि स्वल नंदगांव जिलाला नासिक महाराष्ट्र से एक बजे से 4 बजे तक कथा कलाम लेंगे यह कथा दो तारीख को विराम होगी पा तारीख को उत्तर

(2:46:20) प्रदेश में कथा प्रारंभ होगी उसके बाद 14 तारीख से फिरोजाबाद में कथा प्रारंभ होगी ऐसी कथाओं का क्रम रहेगा एक बजे से चार बजे तक आपको हम लाभ लेंगे हर हर बड़े भाव से कुछ सूचना आशीष जी दे रहे हैं उसके बाद में आरती का क्रम प्रारंभ होगा श्री शिवाय बोल बम का नारा है सारी समस्या का हल जय जय श्री राधे सभी भक्तो को हर हर महादेव सादा जय श क श्री शिवाय नमोस्तु व्यासपीठ को नमन करते हुए हम सबके प्रिय हम सबके लाले ठाकुर जी महाराज के चरणों में नमन करते हुए परम सदे परम आदरणीय विश्व विख्यात पूज्य गुरुदेव के पावन चरणों को नमन करते हुए और आप सभी शि

(2:47:05) भक्तों के चरणों में नमन करते हुए सुंदर आज हम सभी ने विराम दिवस की कथा श्रवण करी और जैसा कि आप सभी को ज्ञात है नंदगांव जिला नासिक महाराष्ट्र की पावन धारा से 20 सॉरी 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक हम कथा अमृत का लाभ लेंगे दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक अपने जीवन को कृतार्थ में करें आनंद में करें और सुंदर आरती का समय हो चुका है आरती में जिन भक्तों के नाम मंच से लिए जाएंगे व अति शीघ्र मंच पर पधारे धमतरी विधायक महोदय माननीय श्री ओमकार जी साहू बड़े ही आदर और सम्मान से मंच पर पधारे श्री विक्रांत जी शर्मा श्री पीयूष जी पांडे श्री

(2:47:50) मोहन जी मांडवी पूर्व सांसद श्री विशेष स्नेहल जी लाखोटिया दीपक जी ठाकुर संदीप जी अग्रवाल हेमराज जी सोनी प्रदीप सिंह जी टीआई महोदय बड़े ही आधार और सम्मान से बज पधारे पत्रकार बंधु श्री प्रेम नागेंद्र जी श्री राज सोनवानी श्री पुष्पेंद्र जी साहू वेणु जी साहू हिरा लाल जी साहू बड़े ही आदर सम्मान से भज पर पधारे सुंदर आरती का आनंद हम सभी मिलकर लेंगे साथ में मोना जी सेन से भी मेरा निवेदन रहेगा आप भी बड़े ही आदर और सम्मान से भज में पधारे और सुंदर आरती का आनंद हम सभी मिलकर लेंगे जय जय श्री राधे हर हर महादेव श्री शिवाय [संगीत]

(2:48:37) नमोस्तु जय शिव ओमकारा भोले भज शिव ओमकारा ब्रह्मा विष्णु सदाशिव भोले भोले नाथ महाशिव की धारा ओम हरे हरे हरे महादेव कानंद चतुरानन पंचानंद राजे बोले पंचानंद राजे हं सासन गरुड़ासन हंसन करुणा सद वाहन साधे ओम हरे हरे हर महादेव दोज चार चतुर्भुज दस मुति अति सोहे भज दस भुज अति सोहे तीनों रूप नि रखता बोले जी का रूप नि रखता त्रिभुवन जनमो है हर हर हरे महादेव अक्ष माला वनमाला मुंड माला ार भले मुंड माला धारी त्रिपुरारी कसारे त्रिपुरारी कसारी कर माला धारे ह हर हर

(2:49:45) महादेव सतां पितांबर बाघ बर अके बोले बाघ बर अके सनकादिक गरुड़ा दिख सनकादिक ब्रिक होता दिख संग ओम हर हरे हर महादेव कर क मंडल चकत शुल धरता भोले चकत शुल धरता जग करता जग हरता जग करता जग हरता जग पालन करता ओ हरे हर हर महादेव ब्रह विष्णु सदा शिव जानत अवेका बोले जानत अवेका अक्षर के माते ओम अक्षर के माते ये तीनों ओम हरे हरे हरे महादेव काशी में विश्वनाथ विराज नंदी ब्रह्मचारी बोले नंदी ब्रह्मचारी उट दर्शन पावत रुचि रुचि भोग लगावत महिमा दिवानी ओम हरे हरे हरे

(2:50:51) महादेव त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नरगावे बोले जो कोई नरगावे शिवानंद स्वामी जपत हरा हर स्वामी सुख संपति पावे ओ हरे हरे महादेव जय शिव ओमकारा शिव ओमकारा पार्वती का प्यारा ऊपर जलधारा होड़ मछरा बोले तीन नयन वाला बोले एक नयन वाला बोलेला बोले कोसा ब्रह्मा विष्णु सदास भोले भोलेनाथ महास हरेला के दरा ओम हरे हरे हरे महादेव गौरम करणा वतार संसार सारम सदा वसंतम ल भव भवानी सतम नमाम अक्षतम केशवम रामना कृष्ण दामोदरम वासुदेव हतम माधवम गोका वल्लभ जानकी नायकम श रामम हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे

(2:51:59) कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कणा क हरे हरे नाथ भगवान की जय कुरेश्वर महादेव की जय हरि ओम जिसके पास उम्मीद है वो कभी हार कर भी नहीं हारता [संगीत]


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