Day - 04 ll श्री शिव महापुराण कथा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll धमतरी, छत्तीसगढ़

Day - 04 ll श्री शिव महापुराण कथा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll धमतरी, छत्तीसगढ़ 

(00:00) सीधा प्रसारण जय हो गणेश री जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश बोलिए गणेश भगवान की जय जय जय श्री राधे सभी भक्तों को हर हर महादेव साधा जय श कृष्णा श्री शिवाय नम तोम पांच दिवसीय सुंदर श्री स महापुराण की आलौकिक दव कथा हम सभी पूज गुरुदेव के सानिध्य में सवण कर रहे हैं निश्चित ही यह हम सभी का सौभाग्य है बाबा भोलेनाथ की कृपा से हम सभी को आस्था चैनल के माध्यम से [प्रशंसा] youtube3 सगड़ की इस पावन धारा से सुंदर आलौकिक दिव्य कथा श्रवण करने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ और निश्चित ही जब तक बाबा भोलेनाथ पर भोलेनाथ की कृपा जीभ पर ना हो

(01:00) तब तक इस पृथ्वी पर कोई भी कार्य संभव नहीं हो सकता हम सभी देवाधि देव महादेव के चरणों के दास हैं उनकी कृपा दृष्टि के साय में ही अपना जीवन यापन करना चाहते हैं हम सभी महादेव के मंदिर जाएं दिवाल जाएं भगवान का जल अभिषेक करें और अपने मन की बात अपने हृदय की बात हम देवाधिदेव महादेव से कह सके बड़ा ही सुंदर और सरल तरीका हम सभी को पूज्य गुरुदेव ने बताया है एक लोटा जल सारी समस्याओं का हल एक लोटा जल लेकर हम पास के मंदिर जाए देवालय जाए भगवान का जल अभिषेक करें अपने मन की बात अपने हृदय की बात हम देवाधि देव महादेव से कह सके देखिए

(01:44) गुरुजन का काम होता है हमें मार्ग दिखाना और उस मार्ग पर चलना हमें स्वयं ही पड़ेगा और जिन जिन भक्तों ने यह मार्ग चुना है जो पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को बताया है निश्चित ही उन सभी भक्तों की कामना पूर्ण हुई है उन सभी का भंडार मेरे कुबेर भंडारी ने मेरे राजाधिराज महाकाल राजा ने पूर्ण करा है पूरा भरा है तो हम सभी को गुरुजन के बताए हुए मार्ग पर चलना अवश्य चाहिए क्योंकि गुरुजन हमें मार्ग दिखा सकते हैं लेकिन उस पर चलना हमें स्वयं ही पड़ेगा बड़ा ही सुंदर और सरल तरीका बड़ा ही सुंदर और एक सहज रास्ता हम सभी को पूज्य गुरुदेव

(02:28) ने बताया है प्रतिदिन मंदिर जाएं प्रतिदिन एक लोटा जल चढ़ाएं एक बेलपत्र अर्पित करें और अपने मन की बात अपने हृदय की बात देवाधिदेव महादेव से हम कह सके हम सभी को प्रतिदिन मंदिर अवश्य जाना चाहिए और भगवान से प्रार्थना अवश्य करना चाहिए क्योंकि भगवान भी कहते हैं तू मेरे मार्ग पर पैर रख करर तो देख तेरे सब मार्ग ना खोल दूं तो कहना तू मेरे लिए खर्च कर कर तो देख तुझे कुबेर का भंडार ना खोल दूं तो कहना मेरे लिए कड़वे वचन सुनकर तो देख कृपा ना बरसे तो कहना मेरी तरफ आकर तो देख तेरा ध्यान ना रखूं तो कहना मेरी बातें लोगों से करके तो देख तुझे मूल्यवान ना बना दूं

(03:19) तो कहना मेरा चरित्र का मनन करके तो देख तुझे चरित्रवान ना बना दूं तो कहना मुझे अपना मददगार बनाकर तो देख तुझे सबकी गुलामी से ना छुड़ा दूं तो कहना मेरे लिए आंसू बहा कर तो देख तेरे जीवन में आनंद के सागर ना भर दूं तो कहना मेरे लिए कुछ बन कर तो देख तुझे कीमती ना बना दूं तो कहना मेरे मार्ग पर निकल कर तो देख तुझे शांति दूध ना बना दूं तो कहना स्वयं को निछावर करके तो देख तुझे इस दुनिया में मशहूर ना कर दूं तो कहना मेरा कीर्तन करके तो देख जगत का विस्मरण ना करा दूं तो कहना तू मेरा बनकर तो देख हर एक को तेरा ना बना दूं तो कहना मेरे लिए खर्च करके तो देख

(04:12) तुझे धनवान ना बना दूं तो कहना ये भगवान की प्रतिज्ञा है अगर इस प्रतिज्ञा को हम प्रतिदिन पाठ भी करें या प्रतिदिन इस प्रतिज्ञा का मनन चिंतन करें तो निश्चित ही हमारा जीवन सभ लेगा हमारा जीवन सुधरेगा क्योंकि इस पृथ्वी के राजा है मेरे देवद देव महादेव मृत्यु लोक के राजा है हम सभी का भरण पोषण कर रहे हैं हम सभी का लालन पोषण मेरे महादेव कर रहे हैं तो हम सभी को एक अटूट विश्वास महादेव पर रखना चाहिए देखिए वैसे भी पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को विगत कई वर्षों से कथा श्रवण कराई है वह श्रद्धा और विश्वास की कथा श्रवण कराई है माता वती श्रद्धा है और मेरे भोलेनाथ

(05:03) देवाधि देव महादेव विश्वास है अगर श्रद्धा और विश्वास हमारी दण है तो निश्चित ही हमारे को जीवन में कोई भी हरा नहीं सकता कोई भी ढिगा नहीं सकता और यही श्रद्धा और विश्वास के बल पर आज हम सभी देख रहे हैं किस प्रकार से गांव के अंदर गांव गांव के अंदर गांव वहां पर यह वनवासी क्षेत्र में था हो रही है और लाखों की संख्या में यह जन समुद्र हम सभी को देखने को मिल रहा है देखिए इस जगह पर आने के लिए इतने साधन इतने संसाधन नहीं है फिर भी मेरे भक्तों का अपार प्रेम देखिए भोलेनाथ के प्रति आपकी अपार भक्ति देखिए जो लाखों की संख्या में यह जन समुद्र हम सभी को देखने को

(05:51) मिलता है देखिए बाबा भोलेनाथ की कथा हम सभी को पूज्य गुरुदेव ने जब से श्रवण कराई है हम सभी ने देखा है किस प्रकार से हमारा जीवन बदला है हमारा चरित्र बदला है हम सभी के सोचने का तरीका बदला है हम सभी के मन में सेवा का भाव जागृत हुआ है और आज हम सभी देखते हैं किस प्रकार से भक्तों का जो ताता लगा रहता है इस छोटे से गांव में गागर में सागर समा गया है यह समझिए शिव महापुराण की इतनी भव्य विशाल कथा लग छ से सा लाख पब्लिक इस ग्राउंड में होना चाहिए जो भगवान की कथा श्रवण कर रही है तो कहीं ना कहीं हम सभी ने देखा है किस प्रकार से शिव महापुराण की कथा के माध्यम

(06:44) से एक स्वरूप बदला है कहीं ना कहीं हम सभी को देखने को मिल रहा है हम सभी का चरित्र बदला है हम सभी के जीवन जीने का तरीका बदला है पहले हम सभी देखते थे घर पर कथाएं तो टीवी में आती थी पर माताएं बहने अपने घरों पर टीवी टीवी में नाटक सीरियल देखना पसंद करते थे कोई भी कथा में इतना मन लगाकर इतना चित लगाकर कथा श्रवण नहीं करते थे कहीं ना कहीं उनका जो मन होता था वह नाटक सीरियल देखने में ज्यादा होता था पर जब से शिव महापुराण की कथा प्रारंभ हुई है आस्था चैनल के माध्यम याय फसु के माध्यम से भक्त देख रहे हैं तो हम सभी को एक सोचने वाली

(07:37) विचार विचारणीय बात है हम सभी के लिए एक सोचने वाली बात है कि माताओं का रुख एकदम से शिव महापुराण की ओर बढ़ गया है और आज घर का वातावरण भी शुद्ध हो गया है घर में जो भक्त जिस प्रकार की गलतियां करते थे उन गलतियों को करना बंद कर दिया है आज स्वयं ने अपने अंदर कथा श्रवण करके बदलाव लाना शुरू कर दिया है अपने आप को चेंज करना शुरू कर दिया है तो यह शिव महापुराण की कथा का प्रभाव हम सभी को देखने को मिलता है हम सभी देखते हैं किस प्रकार से बच्चे हो बूढ़े हो जवान हो माताएं हो बहने हो बुजुर्ग हो सभी वर्ग के लोग मंदिर जाते हैं दिवाले जाते हैं भगवान का जल अभिषेक

(08:25) करते हैं और अपने मन की बात अपने हृदय की बात देवाधिदेव महादेव से कहते हैं ऐसा नियम भक्तों ने अपने जीवन में बना लिया है कि एक दिन भी अगर मंदिर नहीं जाएंगे तो अपने जीवन में उनको बड़ा सुना बड़ा सा अधूरा सा महसूस होता है और हम सभी देखते हैं लंबी लाइन लंबी कतारें चाहे शिव महापुराण की कथा हो या फिर मेरे देवाधिदेव महादेव का मंदिर हो सब जगह भक्तों का ताता लगा रहता है बड़ी ही सरलता के साथ में बड़ी ही सहजता के साथ में पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को मंदिर में जोड़ दिया है मंदिर जाना प्रारंभ करवा दिया है हम सभी को आज जीते जई हम सभी को शिव युग के दर्शन

(09:17) करा दिए हैं कोई पूछता है तो भक्तों का यह ताता देखकर सभी भक्तों को लगता है कि क्या यह कलयुग चल रहा है यह कलयुग नहीं चल रहा है यह शिव युग चल है और हम सभी देखते हैं किस प्रकार से भक्त अपने मन की बरात लेकर पहुंचते हैं अगर भक्त ना तो गर्मी देखते हैं ना धूप देखते हैं ना ही बारिश देखते हैं ना ही आंधी देखते हैं ना ही तूफान देखते हैं बस भक्तों का एक मन होता है एक देह होती है कि कैसे भी शिव महापुराण की कथा वे कथा पंडाल में जाकर श्रवण कर ले और अपने जीवन को कृतार्थ में करें आनंद में कर ले हम सभी ने देखा है किस प्रकार से भक्त इस

(10:07) पावन धारा पर आते हैं और इस पावन धरा की मिट्टी को भी ले जाकर अपने मस्तक से लगाते हैं तो यह हम सभी को और कहीं देखने को नहीं मिलता यह केवल और केवल शिव महापुराण की कथा में ही हमें देखने को मिलता है कि भक्त आते हैं और इस कथा पंडाल की मिट्टी भी अपने मस्तक पर लगाकर अपने जीवन को कृतार्थ में करते हैं आनंद में करते हैं हम सभी ने देखते हैं कि पूज गुरुदेव द्वारा सेवा के सारे कार्य हमेशा निरंतर सुचारू रूप से चालू रहते हैं आप सभी को हम सभी को ज्ञात है यह कथा जो चल रही है यह वनवासी क्षेत्र में चल रही है देखिए वनवा वनवासी क्षेत्र में कभी कथा श्रवण करने को

(10:58) नहीं मिल पाती है इतने बड़े स्तर पर तो पूज्य गुरुदेव ने एक संकल्प लिया एक मन में विचार आया कि शहरों में तो कथाएं बहुत होती रहती है लेकिन हमा से हमारे जो वनवासी क्षेत्र के भाई बहन हैं जो वनवासी क्षेत्र के नागरिक हैं यह कब कथा श्रवण करेंगे देखिए कई लोग इनमें से ऐसे हैं जो समय अपना निकालकर शहरों में जाकर कथा नहीं श्रवण कर पाते हैं पर पूज्य गुरुदेव ने बड़ा ही सुंदर एक संकल्प लिया कि क्यों ना इनके बीच में रहकर कथा सेवण कराई जाए और क्यों ना 16 सरात के पावन यह पांच दिन इन क्षेत्रों में व्यतीत किया जाए ताकि के यह वनवासी लोग भी अपने पूर्वजों को तार सके

(11:50) कथा अमृत का लाभ लेकर कथा श्रवण कराकर अपने पूर्वजों को तार सके इसलिए बड़ी ही सुंदर और बड़े ही अच्छे ढंग से पूज्य गुरुदेव ने इस क्षेत्र में कथा श्रवण कराई मेरा निवेदन रहेगा जो भी आस्था चैनल के माध्यम से य फेसबुक के माध्यम से कथा श्रवण कर रहे हैं देखिए बिना सहयोग से कोई भी कार्य संभव नहीं होता हम सभी को सहयोग करना चाहिए इस पावन पुनित कार्य में क्योंकि सहयोग से ही सारे कार्य संभव होते हैं सहयोग एक दूसरे का मिलता है तभी बड़े से बड़े कार्य संभव होते हैं एक छोटी सी कथा हम सभी को याद आती है एक छोटी सी चिड़िया थी जिसके अंडे

(12:41) एक कोटर में पेड़ पर रखे हुए थे अचानक एक तेज हवा आती है तेज बहाव आता है और समुद्र की लहरें उस कोटर में से उस चिड़िया के चिड़िया के अंडे को ले जाती है अपने साथ में बहाकर चिड़िया प्रार्थना करती है आराधना करती है कि हे समुद्र देवता यह छोटे से मेरे जो बच्चे हैं जो चिड़िया के अंडे हैं इनको आप मुझे वापस लौटा दो क्योंकि मैं इनके बिगर रह नहीं सकती समुद्र से बार-बार प्रार्थना करने पर भी यह समुद्र मानता नहीं है तब जाकर उस चिड़िया को गुस्सा आता है और चिड़िया चोत से वह समुद्र खाली करने का सोचती है देखिए बड़ी ही सुंदर लघु य कथा

(13:27) है वे चिड़िया प्रयास करती है अपनी चोच से पानी भरती है और दूसरी ओर फेंकने का प्रयास करती है अचानक वहां से एक कौवा गुजरता है कौआ बोलता है चिड़िया कर क्या रही है चिड़िया बोलती है कि मेरे अंडे को मेरे बच्चों को यह समुद्र उठाकर ले गया है यह जब तक मैं समुद्र को सुखा नहीं देती तब तक मैं इस समुद्र को नहीं छोडूंगी तो कौआ बोलता है इतना बड़ा समुद्र क्या तेर से सूखे का तो चिड़िया उसको जवाब देती है तू मेरी समाज का होकर मेरी जाति का होकर मेरी बिरादरी का होकर मेरा साथ देने की अपेक्षा तू मेरे पर हंसी उड़ा रहा है अगर तेरे को देना है तो सहयोग दे नहीं

(14:17) तो तू भी यहां से चले जा तब कौए को गुस्सा आता है और वह अपने और साथियों को बुलाकर उस समुद्र को खाली करने लग जाता है तभी वहां पर हंस पहुंचता है हंस भी इस तरह की बाड़ तलाव उस चिड़िया से होती है तब सभी पक्षी मिलकर उससे बोलते हैं कि करना हो तो सहयोग प्रदान करो नहीं तो बकवास मत करो और यहां से चले जाओ तब जितने भी पक्षी इस पृथ्वी लोक पर होते हैं वे सारे पक्षी समुद्र को खाली करने लग जाते हैं जितने भी तोता कौआ कबूतर जितने भी पक्षी जाति के लोग होते हैं वे सभी समुद्र को खाली करने लग जाते हैं तभी वहां से भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ देव

(15:06) निकलते हैं और गरुड़ देव देखते हैं कि यह पक्षी क्या कर रहे हैं तब वे बोलते हैं कि यह चिड़िया के बच्चे को यह समुद्र बहा कर ले गया है अपने पानी में जब तक यह समुद्र खाली नहीं कर देंगे तब तक हम इस समुद्र को नहीं छोड़ेंगे तब गरुड़ राज बोलते हैं तुम मिलकर भी इस विशाल समुद्र को खाली नहीं कर सकते तब सभी पक्षियों को क्रोध आता है और चिड़िया उनमें से बोलती है कि तुम हमारी जाति के होने के बाद हमारी रात्री के होने के बाद हमारी सहयोग प्रदान करने की अपेक्षा हमें तुम ताने मार रहे हो तुम तो जाओ और विष्णु भगवान के वाहन बनकर बैठ जाओ

(15:51) क्योंकि तुम सहयोग नहीं कर सकते तुम हमारा साथ नहीं दे सकते तब गरुड़ राज को गुस्सा आती है और व भी पक्षियों का साथ देते हैं और समुद्र को सुखाने लग जाते हैं जब तीन चार दिन तक भगवान विष्णु जी के पास में गरुड़ राज नहीं पहुंचते हैं तब विष्णु जी को चिंता होती है और विष्णु भगवान गरुड़ जी की खबर लेते हैं तब विष्णु भगवान को पता चलता है कि समुद्र चिड़िया के बच्चों को उठाकर ले गया है और यह सभी मिलकर इस समुद्र को खाली करने लगते हैं तब विष्णु भगवान उस समुद्र से बोलते हैं कि इस चिड़िया के बच्चे को तुम दे दो नहीं तो यह समुद्र खाली हो जाएगा देखिए एक चिड़िया का

(16:38) बच्चा था एक चिड़िया थी उसने सभी लोगों का सहयोग लेकर इतना विशाल समुद्र खाली करने का सोच लिया और कहीं ना कहीं अपने बच्चों को वापस वो लेकर आ गई तो हम तो मनुष्य जाति में जन्म लिए हुए हैं तो क्यों हम भी एक दूसरे को सहयोग करके इतने पावन पुनीत कार्य नहीं कर सकते यह वनवासी क्षेत्र में जो कथा हो रही है यह माध्यम है हम सभी को हमारी संस्कृति से जोड़ने का यह माध्यम है हमें हमारे धर्म से जोड़ने का यह माध्यम है हमारे वनवासी लोगों को अपने में शामिल करने का यह माध्यम है हम सभी को उनकी बात श्रवण करने का और उनकी बात अपनी बात उन तक

(17:25) पहुंचाने का तो हम सभी मनुष्य जाति में जन्मे हुए हैं पूज्य गुरुदेव ने पहले भी हम सभी को बताया है कि सबसे पहले हम इस मनुष्य जाति में जन्म लिया है तो हम सबसे पहले सनातनी है और सनातनी लोगों को सहयोग करना यह हमारा दायित्व बनता है यह हमारा कर्तव्य बनता है तो हम सभी को प्रतिदिन निरंतर एक दूसरे को सहयोग प्रदान करते रहना चाहिए देखिए पूज्य गुरुदेव ने जो बीड़ा उठाया है सभी वनवासी क्षेत्र के भाई बहनों को यह सुंदर कथा श्रवण कराने का तो आपसे निवेदन रहेगा इस पावन पुनित कार्य में आप अपना सहयोग अवश्य प्रदान करें जिससे आने वाले दिनों में इस

(18:12) तरह के और सुंदर कार्य हम सभी कर सके और सुंदर हम सभी यह कार्यों में सहयोग प्रदान कर सके और इस प्रकार के अनूठे आयोजन हम सभी कर सके आप सभी को ज्ञात है कि 16 सरात के पावन दिनों में वनवासी क्षेत्रों में यह सुंदर सुंदर कथा हो रही है इसमें अन्य क्षेत्र की व्यवस्था श्री विठ्ठले सेवा समिति द्वारा निशुल्क रूप से रखी गई है कोई भी भक्त भूखा नहीं जाए इस बात का मन में विचार करते हुए पूज्य गुरुदेव ने संकल्प लिया है आप सभी के सहयोग से यह पावन पुनीत कार्य चल रहे हैं आप सभी के सहयोग से श्री विठल सेवा समिति द्वारा अन्य क्षेत्र चल रहा है आप भी इस पर सहयोग

(19:03) प्रदान करें श्री बिठले सेवा समिति के दो अकाउंट नंबर एक्सेस बैंक अकाउंट सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का चल रहा है दोनों में से किसी भी अकाउंट में अपनी सग राशि आप जमा करकर अपना नाम हर हर महादेव श्री शिवाय नमोस्तु गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा गुरुर साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः [संगीत] मेरे गुरुवर की क्या बात है रहता हर दम मेरे साथ

(20:09) है मेरे गुरुवर की क्या बात है रहता हरदम मेरे साथ है मेरे गुरुवर की क्या बात है रहता हरदम मेरे साथ है मेरे गुरुवर की क्या बात है रहता हरदम मेरे साथ है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा]

(21:11) [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] झूठी बातें तो दुनिया करे वक्त पढ़ते ही बदले सारे झूठी बातें तो दुनिया करे वक्त पढ़ते ही बदले सारे गुरुवर बदले कभी ना नजर करता कृपा के बरसाते है मेरे गुरुवर की क्या बात है हर गम मेरे साथ है बोलिए परम पू गुरुदेव की जय जय श्री राधे सभी भक्तों को हर हर महादेव सादा जय श्री कृष्णा श्री शिवाय नमस्तुभयम पूज्य गुरुदेव का आगमन हो चुका है गुरुदेव

(22:15) व्यासपीठ पर मछ आसीन हो चुके हैं आप सब की तरफ से व्यासपीठ को नमन करते हुए हम सबके प्रिय हम सबके लाड़ले ठाकुर कोलूज महाराज के चरणों में नमन करते हुए परम सत्य परम आदरणीय विश्व विख्यात पूज्य गुरुदेव के पावन चरणों को नमन करते हुए और आप सभी शिव भक्तों के चरणों में नमन करते हुए सुंदर आज कथा के चतुर्थ दिवस पर हम सभी प्रवेश करेंगे उससे पहले आज हमारे बीच में छत्तीसगढ़ शासन के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव जी साय जी की धर्म पत्नी श्रीमती कौशल्या देवी जी साहे हमारे बीच में उपस्थित है और व्यासपीठ के पूजन करते हुए एक बार जोरदार ताली बजाकर स्वागत

(22:55) करें आदरणीय दीदी हमेशा कहीं पर भी छत्तीसगढ़ में कथा होती है आपकी गरिमामई उपस्थिति हमेशा अनिवार्य रूप से होती है और बड़ी ही सहजता के साथ में बड़ी ही सरलता के साथ में आप भक्तों जैसे आते हैं और कथा श्रवण करकर अपने जीवन को कृतार्थ में करते हैं आनंद में करते हैं निश्चित ही एक बड़ा ही सहजता आपके हृदय में विराजमान है बड़ी ही सरलता आपके हृदय में विराजमान है आप निश्चित ही भोलेनाथ के भक्त हो और इसी प्रकार से बाबा भोलेनाथ की भक्ति आपको प्राप्त होती रहे साथ में मैं निवेदन करना चाहूंगा मोना जी सेन प्रथम केश कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा

(23:45) प्राप्त ब्रांड एंबेसडर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की उनसे भी निवेदन करूंगा बड़े ही आधार और सम्मान से मंच पर पधारे पवन जी खंडेलवाल हमारे बीच में उपस्थित है उनसे भी निवेदन करूंगा बड़े ही आदर और सम्मान से मंच पर पधारे व्यासपीठ का पूजन करें और पूज्य गुरुदेव से आशीर्वाद प्राप्त करें सुंदर देखिए गुरु का बड़ा ही महत्व होता है हमारे जीवन में गुरु हमें सिखाते हैं क्या हमें करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए आज हम सभी ने इस कलयुग में शिव युग के दर्शन करे हैं आज मंदिरों में लंबी कतारें हम सभी को देखने को मिली है आज सनातन धर्म

(24:25) की पताका को लहराने का कार्य पूज्य गुरुदेव ने करा है और सभी सनातन धर्म के लोगों को एक जाजम पर बिठाने का कार्य पूज्य गुरुदेव ने करा है देखिए बड़ी ही सहजता और बड़ी ही सरलता के साथ में हम सभी को पूज्य गुरुदेव ने शिव महापुराण की कथा श्रवण कराई है चार लाइन पूज्य गुरुदेव के लिए जिन्होंने इस वनवासी क्षेत्र में आने का विचार करा और इस वनवासी क्षेत्र में वनवासी लोगों को कथा श्रवण कराने का विचार करा तो निश्चित ही कहीं ना कहीं यह प्रारब्ध होता है संस्कारों का यह प्रारब्ध होता है अपने अच्छे विचारों का और कहीं ना कहीं सभी सनातन धर्म के लोग

(25:07) एकजुट हो यह विचारणीय बात होती है पूज्य गुरुदेव के लिए चाय लाइन आप सभी के लिए हर पर्वत माणिक मणि नहीं होते हर पर्वत मणि माणिक नहीं होते हर हाथी के माथे पर मुक्ता मणि नहीं होती हर हाथी के माथे पर मुक्ता मणि नहीं होती हर जंगल में चंदन के पेड़ नहीं होते और हर देश में पंडित प्रदीप जी मिश्रा जैसे गुरुदेव नहीं होते जो इतना विचार करें कि सभी वनवासी लोगों को कथा श्रवण कराए इनके बीच में रहकर इनके साथ में रहकर कथा अमृत का लाभ करवाए और सभी को कृता में करें देखिए और भी व्यवस्थाएं हो सकती थी यहां से कुछ किलोमीटर दूर पर अच्छे शहर में पूज्य गुरुदेव रुक सकते

(25:57) थे लेकिन गुरु जी ने विचार करा नहीं इसी गांव में रुककर मैं वनवासी लोगों के बीच में रहकर कथा श्रवण कराऊंगा और सभी को कृतार्थ में करूंगा आनंद में करूं एक बार जोरदार ताली बजाकर स्वागत करें पूज्य गुरुदेव के लिए बड़े ही सुंदर विचारों के साथ में और देखिए यह पावन पुनीत कार्य संभव होते हैं मात्र आप सभी के सहयोग से इसी प्रकार श्री विठ्ठले सेवा समिति को अपना महत्त्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते रहे और इसी प्रकार से इन सारे कार्यों को आप सफल बनाते रहे और सुंदर इसी क्रम में जिन दान दाताओं ने जिन भामा साओं ने मंदिर गौशाला वृद्ध आश्रम अन्य क्षेत्र बाबा

(26:37) कुबरे शवर धाम हेतु अपनी सग रासी प्रदान करी उन सभी पवन सारी पुण्य सारी दान दाताओं के नाम श्री संतोष जी पटिया की तरफ से 00 की स आपने सत की बंदना जी महाराष्ट्र से सुनीता जी शर्मा की तरफ से रोत हरियाणा शुभम जी चौरसिया अकलेरा राजस्थान से सुधा 001 राजेश जी ढैया की तरफ से सिरसा हरियाणा सुंदर श्रीनाथ जी प्राइस की तरफ से सूरत गुजरात से सुधा 00 नरेंद्र जी पंडिया की तरफ से बिहार से सुधा 00 की स सत की मान सिंह जी की तरफ से कान उत्तर प्रदेश से 00 प्रियंका जी शर्मा महाराज गं से सु 00 की की गुण में ऋतु धनंजय जी साहू की तरफ से धमतरी छत्तीसगढ़

(27:13) से 00 रामराज जी ंगी की तरफ से इंदौर मध्य प्रदेश से 00 गुप्ता सुधा 00 जितेश कुमार जी की तरफ से गौर छत्तीसगढ़ से सुधा 5100 की ससी अपने जो इस वनवासी क्षेत्र में अन्य क्षेत्र चल रहा है उस अन्य क्षेत्र में आपने सुधा 5100 की स सम की बहुत बहुत बधाई स बचाके आप समत की रामनाथ जी विश्वकर्मा की तरफ से गौतम जी राडोर की तरफ से दिल्ली से अजय सिंह जी पट बिहार से परमा सिंह जी राजपूत की तरफ से चंदवा मध्य प्रदेश से संजय जी दिल्ली से सु 500 पूनम सिंह जी की तरफ से पल राजस्थान से सुंदर 4 की सत की देवकी जी शुक्ला की तरफ से सु की की बीर सिंह जी चंद्र की तरफ से रायपुर

(27:52) छत्तीसगढ़ से सुदर 00 की की मनोज जी झा की तरफ से 00 दीप सिखा जी की तरफ बहुत बई चंद्रिका प्रसाद जी की तरफ से जी की तरफ सेर सुरे जी शर्मा की तर से संजय सिं जी की तरफ से राहुल जीट की तरफ सेद बाबा बहुत बहुत बई ग जी गरे की तर जी महाजन की से जलगाव मरा आपने अन क्त्र में की बहुत की चंद प्रताप सिंह जी की तरफ से दिल्ली से अनिल जी राव की तरफ से किसनगढ़ राजस्थान से नी राठ की से महेंद्र कुमार जी शुक्ला उत्तर प्रदेश विवेक कुमार जी की तर सेजी की यमना प्रसाद जी की तरफ से सता मध्य प्रदेश अ कुमार जी शुक्ला की तरफ से प्रेम कुमा जी विश्मा की तरफ से सिं जी की तरफ

(28:51) से मनी जीं की तारा जीी शर्मा अलरा अलवर राजस्थान सु उमेश जी स्वाती की तरफ से गुरुक्षेत्र हरियाणा सु 5600 की सरसी आपने जो वनवासी क्षेत्र में भोजन भंडारा चल रहा है अन्य क्षेत्र चल रहा है उसम सर्वित की बहुत-बहुत बधाई राघव लक्ष्मण कुमार जी की तरफ से सुनाक्षी जी की तरफ से सु की से आप समत की रिंगू सिंह जी की तरफ से जन उत्तर प्रदेश से सु 500 हरि ओम जी की तरफ से पट्टा बिहार से सु 500 उर्मिला देवी जी की तरफ से उड़ीसा से सु 500 काना जी पटेल की तरफ से 1100 मुकेश जी मीणा कोटा जीता सुधा 00 दर्शिका ममता जी प्यारे लाल जी चंद्रगढ़ की तरफ से

(29:29) की कल्पेश्वर आरोग्य धाम जी की तरफ से नासिक मराठा से सुदर 500 की की राजम जी रंजन की तरफ से सु अनुपम प्रकाश जी की तर से िक जी शुभम जी की तरफ से गोपाल जी जयपुर संतोष जी चौधरी की तरफ से नीर देवी जी की तरफ से कानपुर उत्तर प्रदेश आशिष जी कोलेकर की तरफ से सु मुनिया दे मुनिया जी दुबई की तरफ से मनोज देवी जी की तरफ से मेर उत्तर प्रदेश रा देवी जी की तरफ से कविता देवी जी की द सुदर की सगसी आपने गौ माता के छने हेतु समत की बहुत बहुत बधाई स आपने सत की जित जी कचाप राची झारखंड से सुन दिल्ली से सु की विनीत कुमार जी कि से सु की की राम

(30:14) नारायण जी कुपा की तरफ से 00 राजेंद्र जी गुप्ता सत्ता मध्य प्रदेश से 00 आशा जी गुप्ता की तरफ से मध्य प्रदेश से 5 दिनेश जी कुश की तरफ से फतेहपुर से सु 5 सारिका देवी जी की तरफ से सु स्वर्गीय नंद कुमार जी किस पति में सुमेश चंद जी वर्मा की तरफ से बरा उत्तर प्रदेश से सु आ की तरफ से मध्य प्रदेश से महेंद्र कुमार जी शर्मा की तरफ सेराज म लाल जी की तरफ से सुप्ता विजय जी गुप्तान उत्तर प्रदेश से 5 कैलाश जी पार तिक मराठ से 5 श्याम दसरा जी पाटिल की तरफ से सु रामदास जी धुर्वे की तरफ से रामती देवी जी की तरफ से फिरोजाबाद फिरोजाबाद से फिरोजाबाद उत्तर

(30:54) प्रदेश से सुधार आपने 5 की स की बहुत-बहुत बधाई आपके की गोविंद जी की तरफ से सु विपिन जी स सोतिया फिरोजाबाद से सुधा राजबीर जी की तरफ से बिजनौर उत्तर प्रदेश से सु कैला नारायण जी च गुना मध्य प्रदेश सावित्री देवी जी मगन जी साह की तरफ से ज उत्तर प्रदेश से 000 की स आपने जो वनवासी क्षेत्र में अन्य क्षेत्र चल रहा है उसमें समर्पित की बहुत-बहुत बधाई सुधा बचार आपके सग समित की सत्य प्रकाश जी गुप्ता मेर उत्तर प्रदेश 000 मनोज कुमार जी की तरफ से दिल्ली से स 500 कर की समर्पित की सभी दानदाताओं को मैं हृदय की अनंत के राय से नमन करता हूं त करता हूं प्रणाम करता हूं

(31:29) सुंदर सगसी आपने समित की जो भक्त अपनी सगसी मंदिर गौशाला बृ आश्रम अन्य क्षेत्र बाबा कुरेश्वर धाम तो समर्पित करना चाहते हैं व टीवी स्क्रीन पर श्री विठल सेवा समिति के दो अकाउंट नंबर एक्सेस बैंक का और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का चल रहा है दोनों में से किसी भी अकाउंट में अपनी शग रासी जमा करकर अपना नाम आप राधे हर हर महादेव श्री शिवाय नमतु [संगीत] [संगीत] [हंसी] [संगीत]

(32:37) [संगीत] [हंसी] [संगीत] [संगीत] ह रण की वल्लभ देश की

(33:45) की श्याम सु आश विश्वनाथ भगवान की महानी की श्री गणेश महा कीय की जयति सरदार की जवर महादेव की जय [संगीत] महाकालेश्वर ओमकारेश्वर भगवान की जय रुद्रेश्वर महादेव की ददा की संत सतगुरु देव ग माता की [संगीत] ता

(34:57) चतु जायते [संगीत] पंच भगवान [संगीत] की [संगीत] नमः नमो शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओम

(35:59) नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओ नमः शिवाय गु नम नम शिवाय ओ नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओम

(37:02) नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय भोला नमः शिवाय भोला नमः शिवाय गोरा नमः शिवाय गोरा नमः शिवाय बोला नमः शिवाय बोला नमः शिवाय बो नमः शिवाय गरा नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओ नमः

(38:10) शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय विश्वनाथ भगवान की जय महाकालेश्वर भगवान की जय ओमकारेश्वर भगवान की जय रुद्रेश्वर महादेव की जय कुरेश्वर महादेव की जय हर हर महा हर हर

(39:14) महादेव हर हर महादेव हर काशी विश्वनाथ भगवान देव महादेव त्र काल दर्शी कैलाशी अविनाशी भगवान श्री जिनकी पुनित पावन शिव महापुराण की कथा [संगीत] संपूर्ण विश्व के कल्याण हेतु बाबा देव दिव महादेव की कृपा से करुणा से उनकी उदारता से श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है बड़े भाग्यशाली हैं सभी कांठ कुरली

(40:18) के रह निवासी भगवान श्री राम जी की ये पवित्र पावन [संगीत] भूमि जहां से होते हुए मेरे [संगीत] राम लंका की ओर आगे [संगीत] बढ़े धमतरी जिले का ये एक छोटा सा [संगीत] कस्बा जहां पर आप और हम सब बैठकर भगवान शिव की पवित्र पावन शिव महापुराण की कथा को श्रवण कर रहे [संगीत] हैं पितृ पक्ष

(41:22) [संगीत] पितृ पक्ष श्राद्ध का यह अवसर जिसमें इस वनवासी क्षेत्र के अंतर्गत भगवान देवद महादेव की पवित्र पावन कथा संपूर्ण विश्व के कल्याण हेतु यह पवित्र कथा का लाभ आप और हम ले रहे हैं कथा मंडप में विराजमान छत्तीसगढ़ शासन के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साहे जी की धर्म पत्नी श्रीमती कौशल्या देवी जी साहेब [प्रशंसा]

(42:31) जिनका श्रद्धा विश्वास एक बार हमने श्रीमती कौशल्या देवी सहाय जी से पूछा कि आप प्रत्येक कथा में आती हैं बाबा से क्या प्रार्थना करती तो श्रीमती कौशल्या देवी साहे जी बोली गुरुजी हम प्रत्येक कथा में बाबा से बस इतना सा कहते हैं कि बाबा हमारे छत्तीसगढ़ की धारा को हमेशा कृतार्थ करते रहना और विकास करते [प्रशंसा] रना हमारा छत्तीसगढ़ हमेशा आगे बढ़ता रहे उन्नति की और चलता रहे हम बहुत-बहुत साधुवाद देते हैं श्रीमती कौशल्या देवी साहा जी को बहुत बहुत यह शिव [संगीत] तत्व य भगवान शंकर की अविरल भक्ति डीले

(43:38) थोड़ा सा कम कर दो यह भगवान शिव की अविरल भक्ति आपका और हमारा विश्वास भरोसा और उस में भगवान शंकर की भक्ति शिव कथा कहती है कि बिना विश्वास के परमात्मा की प्राप्ति [संगीत] नहीं आपका विश्वास दृढ़ है तो परमात्मा जरूर मिलता है [संगीत] कथा के मुख्य यजमान में श्री दिनेश चंद्र प्रभा देवांगन श्री दीपक लाखोटिया जी श्री कोमल तुलसी पटेल जी श्री रोहित मरकाम जी श्री सुरेश सिन्हा जी एक बार

(44:48) इनके लिए भी जोरदार ताली बजाकर स्वागत वंदन अभिनंदन एवं सबसे ज्यादा क्या कह रहे उधर की पब्लिक क्या बोल र आवाज की [संगीत] एलडी आवाज आवाज [संगीत] दे भगवान शिव की कृपा करुणा बिना विश्वास के हो नहीं स जब विश्वास ड़ी होता है भरोसा जब प्रबल होता है तो शिव को मिलने में देरी नहीं लगती भगवान शंकर को

(45:58) प्राप्त करने के लिए सबसे मूल है हमारा भरोसा भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए सबसे मूल है हमारा विश्वास हमारे विचार हमारी दृष्टि हमारी सोच हमें परमात्मा के करीब में लेकर जाती और तेरी कृपा बिना ना हिले एक भी अणु लेते हैं स्वास तेरी कृपा से तनु तन बखान क्या करू मैं राखो के ढेर का चपटी भ त में है खजाना कुबेर का ज

(47:05) गंगधार मुक्ति द्वार ओमकार तू भोले ओमकार त आयो शरण तिहारी शंभु तारता हमारा भरोसा जब दृढ़ हो जाए [संगीत] देखिए एक कथा हमने पहले भी कही आज फिर आपके सामने वह [संगीत] कथा गुरु नानक देव जी और नामदेव [संगीत] जी यह दोनों जब महाराष्ट्र की पवित्र भूमि पर पहुंचे [संगीत] एक शंकर जी के मंदिर में गुरु नानक देव जी और नामदेव जी दोनों गए नामदेव जी अपनी मस्ती में भगवान की भजन में डूबे हुए थे

(48:08) भगवान की भक्ति में डूबे हुए थे मंदिर के लोगों को बड़ा बुरा लगा उन्होंने नामदेव जी को उठाकर मंदिर के पीछे  नामदेव जी की आंख में आंसू भर गए गुरु नानक देव जी ने नामदेव जी से पूछा कि तुम आंख में आंसू क्यों आ रहा किस नामदेव जी ने कहा यह मंदिर के पीछे मुझे लाकर डाल दिया गुरु नानक देव जी ने कहा नामदेव अगर तुम्हारा विश्वास पक्का है भरोसा पक्का है तो मंदिर के पीछे बैठकर भजन करो ये मंदिर की दिशा भी भोलेनाथ बदल देंगे अगर विश्वास [संगीत] और वो हुआ पूरे भारत की भूमि पर केवल एक मंदिर ऐसा है जहां पर नामदेव जी महाराज गुरु नानक देव जी के सानिध्य में भगवान शंकर की

(49:14) भक्ति करे और मंदिर का दरवाजा आगे से पीछे हो गया विश्वास के बल पर उसका नाम है ओंडा नागनाथ देव महादेव मंदिर महाराष्ट्र का एक ऐसा मंदिर हो नागनाथ जहां पर भगवान ने अपना दरवाजा बदल दिया गुरु नानक देव जी का विश्वास पक्का था नामदेव जी महाराज का विश्वास पक्का था और जब आपका और हमारा भरोसा विश्वास दृढ़ हो जाता है जब आपका और हमारा विश्वास पक्का हो जाता है तो भगवान विधि के विधान को भी पलट कर हमारी रेखा को भी सीधा कर देता [संगीत] है विधान बनाना विधाता का काम है भाग्य लिखना विधाता का काम है विधान बनाना विधाता का काम है पर

(50:21) विधाता के लिखे लेख को पलटने की सामर्थ्य अगर कोई रखता है तो मेरा देवद महादेव शंकर रखते हैं मेरे शिव रखते आपके भीतर कितना विश्वास है आपके भीतर कितना भरोसा है आपके भीतर कितनी दृढ़ता है आपके भीतर कितनी श्रद्धा है यह आपकी सेवा बता देती हम आपसे एक बात पूछे उत्तर देगे क्या जिनके पांव नहीं होते उनको भगवान मिलता है कि नहीं मिलता बोलो जम के बोलो जरा जिनके हाथ नहीं होते उनको भगवान मिलता है कि नहीं मिलता जम के बोलो जरा आवाज आना चाहिए हमारे तक मिलता है कि नहीं मिलता मिलता जिनके कान नहीं होते उनको भगवान मिलता है कि नहीं

(51:26) मिलता जिनके नेत्र नहीं होते उनको भगवान मिलता है कि नहीं मिलता मिलता ना जिसके हाथ है ना जिसके पांव है ना जिसके नेत्र है दुनिया के लोग कहते हैं इतनी माला जपना दुनिया के लोग कहते हैं इतना तीर्थ करना पांव से चलकर वहां जाना हाथ से इतनी माला जपना नेत्र से यह करना कानों से यह करना शिव महापुराण की कथा कहती है भगवान को पाने के लिए ये किसी ची की जरूरत नहीं परमात्मा को पाने के लिए जहां बैठकर तुम दिल से पुकारोगे मेरा भोलेनाथ वहा [प्रशंसा] प्र मेरे भगवान को पाने के लिए तुम्हारा निर्मल मन सो मोही [संगीत] पावा मंगलवार किसका होता

(52:23) है जम के बोलो हनुमान जी बुधवार गणेश गुरुवार ब्रहस्पति शुक्रवार देवी जी का संतोषी माता का लक्ष्मी माता शनिवार शनि रविवार सूर्य और किसी ने कहा कि गुरुजी सोमवार तो किसी ने कहा कि शंकर जी का सोमवार किसका शकर कौन ने कह दिया कि सोमवार शंकर का शिव को दिन से नहीं पूजा जाता शिव को दिल से पूजा जाता [संगीत] है सारे देवताओं के लिए दिन देखना और शंकर के लिए दिन देखने की जरूरत नहीं है सारे देवताओं के लिए दिन देखिए कहता है शंकर जी

(53:28) के लिए सोमवार है पर अगर हमारा शास्त्र हमारा वेद हमारा पुराण उठाकर देखोगे यशु महापुराण को उठाकर देखोगे तो रविवार को भी शंकर की आराधना है शनिवार को भी शंकर की आराधना है मंगलवार को भी शंकर की आराधना है बुधवार को भी शंकर की आराधना है शुक्रवार को भी शंकर की आराधना है बृहस्पतिवार को भी शंकर की आराधना है ऐसा कोई दिन नहीं जिस दिन शिव की आराधना नहीं दिन के भरोसे मत र दिल के भरोसे [संगीत] परमात्मा को पाने के लिए दिन नहीं देखा जाता परमात्मा को पाने के लिए दिन आपका हृदय क्या कह रहा है आपका मन क्या कह रहा है आपका चित्त क्या कह रहा है

(54:18) आपके विचार क्या कह र आपकी दृष्टी क्या क अब तुम इंतजार कर र सोमवार का सोमवार आएगा तब मैं शिव जी को रिझाऊ सोमवार आएगा तब मैं शंकर को सोमवार आएगा तब मैं शंकर की आराधना करू और मालूम पड़े सोमवार आने से पहले निपट गई तो मान लो जीवन का क्या ठिकाना इस जीवन का ठिकाना क्या है सोमवार आया ही नहीं और उससे पहले चले गए तो कि स्वास रुक जाएगी चलते चलते डील कम करो डी स्वास रुक जाएगी चलते चलते समा बुझ

(55:23) जाएगी जलते जलते दम निकल जाएगा रोशनी का क्या भरोसा है इस जिंदगी [संगीत] का जीवन का क्या ठिकाना है आज है कल नहीं आज शरीर चल रहा है कल चले ना चले क्या भरोसा जीवन का इंतजार हमें यह नहीं करना है कि हम सोमवार को भजन करेंगे इंतजार हमको यह नहीं करना कि हम रविवार को भजन करेंगे इंतजार हमको यह नहीं करना कि हम शुक्रवार को भजन करेंगे इंतजार को यह नहीं करना कि हम

(56:28) शनिवार को भजन करेंगे शिव महापुराण की कथा कहती है आपकी कोई क्षण आपकी कोई घड़ी आपका कोई पल आपका कोई समय आपको जो मिल जाए जिस समय तुम्हारा दिल कर जाए जिस समय तुम्हारा मन कर जाए उस समय तुम बैठो और श्री शिवाय नमस्तुभ्यं दिल से कह लो जब तुम्हारा मन कर जाए पंचाक्षर मंत्र का जाप कर लो नमः शिवाय शक्ष मंत्र का जाप कर लो ओम नमः शिवाय जब तुम्हारा मन पड़ जाए तब दो अक्षर का जाप कर लो राम जब तुम्हारा मन पड़ जाए ढाई अक्षर के मंत्र का जाप कर लो कृष्ण जब तुम्हारा मन पड़ जाए तब भगवान के दो दश अक्षर मंत्र का जाप कर लो ओम नमो भगवते वासुदेवाय जब तुम्हारा चित्त पड़

(57:15) जाए तब तुम परमात्मा के नाम का स्मरण [संगीत] कर दिन से भगवान कभी नहीं मिला दिल से परमात्मा मिल गया जिनके हाथ नहीं वो भी भगवान को पा लेते हैं जिनके पांव नहीं वो भी भगवान को पा लेते हैं जिनके नेत्र नहीं वो भी भगवान को पा लेते हैं जिसकी जिव्या भी नहीं है निपट गूंगा है वो भी भगवान को पा लेता है एक कितना सुंदर प्रसंग आता है एक कथा में एक दादाजी जाकर बैठते थे बह रहे थे सुनाई नहीं देता था उनको कथा में बैठते थे सबसे

(58:21) आगे महाराज कथा कहते थे और दादाजी मुंडी हिलाते थे [संगीत] [संगीत] दादाजी मुंडी अ जो कथा बचने वाला था ना उसको लगता था पूरी कथा में बस इन्हीं को समझ में आ रही है बाकी के किसी को सम मुंड [संगीत] तीन दिन बाद पंडित जी को मालूम पड़ा कि यह तो बेहरा है इसको तो सुनाई नहीं देता पंडित जी आख बबूला हो गए भयंकर गुस्से में ला पंडित जी ने कहा कि दादा हमें मालूम पड़ा कि तुम बरहे हो इतने में दादा बोले

(59:30) हमें मालूम पड़ा तुम बहरे हो [संगीत] हां तुम कथा में आते क्यों जब बहरे हो तो जब तुम्हे सुनाई नहीं देता तो कथा में आने की जरूरत क्या है क्यों आते हो दादा जी ने जवाब दिया महाराज मैं दो कारण से कथा में आता हूं कथा में सबसे आगे बैठकर मुंडी इसलिए हिलाता हूं जितने बैठे रहे वो मुझे देखकर समझ जाएं कि कथा को ध्यान लगाकर सुनना है तब कथा दिल में प्रवेश करती [संगीत] दूसरा कारण है महाराज मैं घर से कथा में इसलिए आता हूं कि मेरे पोता पोती को मेरे

(1:00:36) घर के बेटा बहू को मेरे घर के भाई बंधु को प्रेरणा देता हूं कि मैं कथा में जा रहा हूं तो तुम भी कथा में जरूर जाकर बैठो ये प्रेरणा [संगीत] है जिसको सुनाई नहीं देता वो भी कथा में आता जिसको दिखाई नहीं देता वोह भी भगवान के मंदिर जाता एक अंधा व्यक्ति नेत्र से विहीन व्यक्ति नेत्रों से विहीन व्यक्ति रोज मंदिर जाए रोज मंदिर जाए एक दिन पंडित जी को चिड़ा गई पंडित जी ने कहा नेत्र विहीन व्यक्ति से कहा कभी पानी तू इधर चढ़ देता है कभी पानी त उधर चढ़ा देता है कभी कुछ कर देता है कभी कुछ कर देता है से तेरे को दिखता है नहीं कभी कुछ कर रहा

(1:01:28) है कभी कुछ कर रहा है हाथ में लोटा भर के जल लेकर जाता है कभी यहां ढोल देता है कभी वहा ढोल देता है तेरी आंखें नहीं है तू मंदिर आता क्यों है नेत्र विहीन व्यक्ति ने कहा मैं भोलेनाथ जी का दर्शन करने के लिए आता आखें नहीं है मैं भोलेनाथ जी का दर्शन करने के लिए आता हूं पंडित जी हस कर बोले भोलेनाथ का दर्शन करने के लिए आता है तो तेरी तो आंखें नहीं है क्यों आता है उस अंधे व्यक्ति ने कहा मेरी आंखें नहीं है भोलेनाथ की तो तीन तीन है वो मुझे देख [प्रशंसा] लेता मेरी आंखें नहीं है भोलेनाथ जी की तीन आंखें है व मुझे देख लेता है मुझे देख लेता

(1:02:34) है वो मुझे पहचान लेता है वह तो मुझे जान रहा है ना वह तो मुझे पहचान रहा है ना कि मेरे नेत्र से मुझे दिखाई नहीं दे रहा मेरे नेत्र मुझे देखे नहीं जा रहे वो मुझे जान गया बहुत हाथ नहीं तो भी परमात्मा मिल रहा है पांव नहीं तो भी परमात्मा मिल रहा है श्रवण नहीं तो भी परमात्मा मिल रहा है बस उसको पाने का तरीका चाहिए पाने का और मैंने तेरे ही भ से बाबा तेरे ही भरोसे हवा विच उड़ती जावांगी बाबा डोर ह तो छटी ना में कटी

(1:03:47) जावगी भोले मैं तेरी पत शंभु मैं तेरी पतंग हवा विच उड़ती जावा बाबा डोर हथ छटी ना मैं कट जवाई हमारा विश्वास हमें दी कर परमात्मा सुनेगा नहीं सुनेगा कल एक बहन जी कह रही थी गुरु जी हम रोज भगवान के मंदिर जाते हैं हम रोज शंकर जी के मंदिर जाते हैं हम रोज शिवालय जाते हैं हम रोज बाबा से प्रणाम करने जाते हैं हम रोज बाबा को नमन करने के लिए जाते हैं हम रोज बाबा से विनय करने के लिए जाते हैं गुरु जी पर बाबा हमारी सुन नहीं रहा बाबा हमारी सुन

(1:04:56) हम रोज जा रहे हैं तो भी बाबा हमारी नहीं सुन रहा सुन हमने दो दिन हमारे जो मिलने के होते हैं उसमें हम कल मिले तो हमने उनसे यही कहा आपका काम है शिवालय तक जाना आपका काम है शंकर के मंदिर में जाकर जल चढ़ाना देगा नहीं देगा यह उसके ऊपर निर कर एक पत्र [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है मेरा नाम प्रदीप शोरी है मेरा नाम प्रदीप शोरी है पत्र को आप लोग एलईडी पर पढ़ सकते हो मेरा नाम प्रदीप शोरी है पिता सहान

(1:06:04) शोरी है मैं ग्राम दुधावा छत्तीसगढ़ जिला कांकेर निवासी हूं कहीं बैठे हो तो हाथ हिला सकते हैं अगर कहीं बैठे हो तो हाथ हिला सकते और बैठे हो तो एक बेलपत्र लेने के लिए यहां आ सकते हैं कहीं बैठे हो तो बेलपत्र लेने के लिए यहां आ सकते पहले तो हाथ हिला दो अगर कहीं बैठे हो तो फिर यहां आ सकते मेरा नाम प्रदीप शोरी है पिता सोहन शोरी है मैं ग्राम दुधावा जिला कांकेर का निवासी मेरा मोबाइल नंबर यह है मैं दोनों आंखों से देख नहीं सकता था मेरी दोनों आंखों से मुझे दिखाई नहीं देता था मेरी दो आंखों से मैं देख नहीं पाता था मेरी गांव की महिलाओं ने मुझे

(1:07:09) रोज मंदिर जाने का कहा और एक लोटा जल चढ़ाने के लिए बोला मैं रोज मंदिर अपने भाई और दोस्तों के सहारे हाथ पकड़कर शिवालय जाने लगा गुरुदेव आंखों से दिखता नहीं था तो कहीं जाता भी नहीं था मैं बाबा को रोज अपने दोस्त और अपने भाई का हाथ पकड़कर शंकर के शिवालय मेरे को दिखाई नहीं देता था तो मैं रोज अपने भाई और दोस्तों के सहारे से भोलेनाथ पर जल चढ़ाने जाता था आपने भगवान शंकर को जल चढ़ाता और जल को अपनी आंखों पर लगा लेता का प्रतिदिन दुनिया के लोग मुझसे पूछे कि एक लोटे जल का क्या फल है तो मैं बता सकता हूं कि मैंने जब शिवजी को जल चढ़ाया जल चढ़ाकर

(1:08:07) अपनी आंखों पर लगाया आज बाबा की कृपा से मेरी दोनों आंखों की रोशनी वापस आई है बाबा की कृपा से मेरी दोनों आंखों की रोशनी वापस आई है और बाबा ने मेरे ऊपर बड़ी कृपा करी गुरुदेव आज मैं अपने हाथों से जल भरकर बाबा को अकेला जाकर चढ़ाता हूं और पंडाल में कथा सुनने के लिए भी अकेला ही आया हूं यह भोलेनाथ की कृपा कहीं बैठे हैं आ रहे हैं अच्छा नहीं [संगीत] एक लाइन अच्छी लिखी है एलईडी पर आप लोग उस लाइन को हमारे साथ में गुनगुनाए दुनिया से में हारा तो आया तेरे

(1:09:16) द्वार यहां से अगर हारा तो कहां जाऊं सरकार मेरे भले [संगीत] मेरे भोलेनाथ भगवान शिव के मंदिर में जाकर एक लोटे जल को समर्पित करना भगवान शिव के मंदिर में जाकर एक लोटा जल समर्पित करना और उस जल को अपने नेत्रों से लगा उस जल को अपने नेत्रों से लगा उस जल की महत्वता क्या कोई दुनिया के लोग पूछे कि शंकर पर चढ़े हुए जल का महत्व क्या है कोई दुनिया के लोग पूछे कि शिव का चढ़ा हुआ जल करता क्या है कोई दुनिया के लोग पूछे कि शिव का चढ़ा हुआ जल की महत्वता क्या है तब लोगों को समझ में आएगा कि यह साधारण सा जल नहीं है जब हम भोलेनाथ को एक लोटा जल चढ़ाते

(1:10:13) हैं तो आज नहीं तो कल हमारा बदलता जरूर है और भोलेनाथ हाथ पकड़ते बस उस पर आपका विश्वास डोलना नहीं चाहिए आपका भरोसा छूटना नहीं [संगीत] चाहिए आपका भरोसा ड़ी रखिए आपका विश्वास ड़ी रखिए जब आपका भरोसा विश्वास दृढ़ होगा तो शिव को मिलने में देरी नहीं नेत्रों से शिव श्रवण से शिव वाणी से शिव हाथ से शिव पांव से शिव शिव को प्राप्त करने के लिए तुम्हारी इंद्रियों में से केवल एक इंद्रिय है तुम्हारा मन जिसने भगवान को भज लिया परमात्मा उस इंद्री के बल पर प्रकट हो केवल एक मन को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास

(1:11:22) कर जिस दिन आपका ये मन परमात्मा से लग गया तो परमात्मा को तुमसे कुछ नहीं चाहिए कुछ भी [संगीत] नहीं एक कथा आती है सौराष्ट्र की भूमि पर एक राजा रहते थे अनु आदित्य स्वराष्ट्र की भूमि पर एक राजा रहते थे जिनका नाम था अनु आदित्य बड़े प्रसिद्ध राजा अनुवाद बहुत शंकर के प्रम भक्त थे शिव की भक्ति के बिना एक मिनट नहीं रह पाते

(1:12:30) शिवालय जाना आ जा बेटा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] आम एक बार जोरदार ताली बजा इस बच्चे के लिए बहुत [प्रशंसा] बहुत उसने पत्र में लिखा मेरे गांव की माताओं ने ने मुझसे कहा कि रोज मंदिर जाया करो मैं अपने भाई का और दोस्तों का हाथ पकड़कर उनका सहारा लेकर जाता था बाबा से केवल एक ही विनती करता था

(1:13:35) सारी दुनिया में ठोकर खा आया अब तेरे भरोसे है मेरी आंखों से दिखता नहीं है मेरे बाबा ने ऐसी कृपा कर दी आज मैं अकेला शिव मंदिर जाता हूं और अकेला ही पंडाल में प्रणाम करने बाबा को आ गया मैं बाबा को नमन करने प्रदीप शोरी पिता सोहन शोरी ग्राम दुधावा छत्तीसगढ़ जिला कांकेर खान निवासी हो मेरा मोबाइल नंबर शिव पर करा भरोसा टूटता [संगीत] नहीं शंकर पर किया गया विश्वास कभी छूटता नहीं आप उसके आश्रित क्यों नहीं होते [संगीत] किसी ने कह दिया यह धर्म अच्छा है उस धर्म में प्रवेश कर जाओ कोई कह दिया वो धर्म में आ जाओ वो कह दे मंदिर छोड़ दो वो क दे

(1:14:34) शिवालय छोड़ दो वो कह दे यह छोड़ दो वो क दे वो छोड़ दो और तुम अपना सनातन धर्म छोड़कर भगवान के अपने सनातन धर्म को छोड़कर सनातन धर्म को त्याग कर तुम दूसरे धर्म में प्रवेश कर जाते क्यों किस नहीं और फिर निवेदन है संपूर्ण क्षेत्रवासियों से छत्तीसगढ़ की पवित्र धारा से जितने लोग आस्था चैनल पर कथा सुन रहे हैं जितने फेसबुक य पर कथा सुन रहे हैं और जितने इस वनवासी क्षेत्र में इस पावन प्रांड में बैठकर लाखों की संख्या में आप लोग कथा सुन रहे हैं आपसे निवेदन है रूखी सुखी मिले फिर भी घर खाना दूसरे की झूठ टन खाने के लिए दूसरे धर्म में कभी मत

(1:15:33) [प्रशंसा] जाना रूखी सुखी मिले अपने धर्म की खाओ अपने घर की खाओ झूठ न खाने किसी दूसरे धर्म की ओर ना जाइए शिव भक्ति में इतने तल्लीन हो जाओ सुनेगा तो मेरा बाबा सुनेगा सुनेगा तो मेरा शिव सुनेगा विश्वास दता और उसको पाने के लिए तुम्हारा धन नहीं उसको पाने के लिए तुम्हारी दौलत नहीं उसको पाने के लिए तुम्हारी संपदा नहीं उसको पाने के लिए केवल तुम्हारा दिल और तुम्हारा मन चाहिए संपदा से परमात्मा मिला ही नहीं कभी किसी [संगीत] को पैसे से सुंदरता मिल सकती है पैसे से जायजा से तुम्हारी जमीन मिल सकती है बंगला मिल सकता है गाड़ी मिल सकती है सब कुछ मिल सकता है

(1:16:36) पर पैसे से मृत्यु कभी तलती हुई नहीं देखी यमराज बंदी बनाने के लिए आए और तुम्हारे पास में बहुत सारा पैसा बहुत पैसा बहुत सारा धन है तुम्हारे पास में बहुत सारा पैसा और यमराज बंदी बनाने आ जा और खूब पैसा तुम्हारे पास में और तुम उसको निकाल करर एक दो पेटी दे दो एक दो लाख रुपए दो चार एक दो करोड़ रुपए दो पा लाख रुपए निकाल कर उसको दे दिया दे दो निकाल के और कह दे मैं नहीं मरना चाहता एक काम कर त मेरी पड़ोसन को उठा के ले जा मैं नहीं म मुझे जा किसकी रिश्तेदारी किसका संबंध

(1:17:43) है किसकी रिश्तेदारी और किसका संबंध सबको जाना मृत्यु सत्य है और वो सत्य ही रहे वो कभी टल नहीं [संगीत] स कल हमने कथा में कहा था बचपन होमवर्क में गया है जवानी होम लोन में गई है और बुढ़ापा अलोम और विलोम में निकल बुढ़ापा लोम और विलोम में निकलेगा अवस्था लती चली जाएगी अवस्था चलती चली जाएगी और धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे मृत्यु ग्रास करने के लिए आएगी और मौत जब ग्रास करने के लिए आएगी तब तुम्हारे सामने पैसा दौलत धन कोई काम का नहीं रहेगा उस समय पर तो केवल तुम्हारा कर्म जो तुमने अच्छा करा है वो कर्म तुम्हारा साथ देगा और तुम्हें पार लगा

(1:18:48) देगा भगवान शिव से मिला दे किमत बुरे कर्म कर बंदे वरना पछताएगा भगवान की आंखों से तू बच नहीं पाएगा तू बच नहीं पाएगा अरे ओ अज्ञानी मत करना कानी अरे हो अज्ञानी मत करना नी तेरे कर्म का फल भी तू ही पाएगा जैसा किया तूने तेरे आगे आएगा मत बुरे कर्म कर बंदे वरना पछताएगा भगवान की आंखों से तू बच नहीं

(1:19:59) पाएगा तू बच नहीं पाएगा जैसा कर्म करे हो वैसा फल तुम्ह भोगना है भगवान को प्रियता तुम्हारा बैभव नहीं भगवान को प्रियता तुम्हारा धन नहीं भगवान को प्रियता तुम्हारी दौलत नहीं भगवान को प्रियता तुम्हारी संपदा नहीं भगवान को प्रियता तुम्हारा मन तुम्हारा हृदय रा चित तुम्हारी वृति है सौराष्ट्र की पवित्र धरा पर रहने वाला अनु आदित्य नाम का राजा जो अपनी भूमि पर रहता था शिवालय जाता शंकर की आराधना करता शिव की पूजन करता शंकर के पूजन में इतना लीन रहता इतना लीन रहता सावन की सावन प्रत्येक सावन आता और नया नियम लेता इस सावन में उस अनु आदित्य नाम के राजा ने एक

(1:20:48) नियम ले लिया कि मैं भोलेनाथ को एक हजार लोटा दूध शिव को समर्पित [संगीत] करूंगा 100 आ लोटा जल दूध मैं शंकर को समर्पित करू पूरे गांव में सूचना कर दी थोड़े से गांव के निवासी थे सबके पास सूचना कर दी कि राजा को एक हजार आठ लोटा दूध शंकर जी को चढ़ाना है सब जाओ चढ़ाओ शंकर जी को लौटा राजा पहला सावन का सोमवार आया पांच सोमवार पड़े थे प्रत्येक सोमवार को 1008 लीटर लोटा दूध चढ़ाना था सारे गांव में सूचना हो गई गांव के लोगों ने अपने अपनी गाय का दूध निकाला निकालकर पूरा के पूरा दूध लेकर बड़े प्रेम के साथ लौटा भर भर कर सब शंकर जी के मंदिर में पहुंच गए सब लाइन

(1:21:51) लगाकर खड़े थे और लोटा लोटा जल दूध उस दूध को उस बर्तन में डालते जा रहे थे भगने में डालते जा रहे थे पात्र में डालते जा रहे थे पात्र दूध से भरा नहीं रहा दो घंटे के बाद एक बुजुर्ग महिला आई बूढ़ी एक बूढ़ी मां आई साथ में उसके थोड़ा सा कटोरी में दूध था कटोरी में थोड़ा सा दू [संगीत] लाइन में लगी दूध डाला दूध का पात्र पूरा भरा र एक कटोरी दूध डालने से दूध का पात्र अनु आदित्य राजा को मालूम पड़ा कि एक बुढ़िया के थोड़े से दूध डालने से दूध का पात्र भरा गया समझ में नहीं आया कैसे हो गया अगला सुमर फिर आया सारे नगर के के लोगों ने एक एक लोटा दूध इकट्ठा करा

(1:22:57) चढ़ाना चालू करा लाला के बर्तन में डालते गए भगने में डालते गए पात्र में डालते गए पात्र खाली की खाली रहा वो मां फिर आई साथ में कटोरी में दूध लाई और लाकर डाला और पात्र भरा पा अनु आदित्य राजा बूढ़ी माता के पास में जाकर मां से बोले मां आपसे प्रश्न करना आप उत्तर दोगी क्या बोलो महाराज क्या बात है मां पूरे गांव के लोगों ने एक एक लोटा दूध लाकर इस बर्तन में डाला पर यह बर्तन भरता नहीं है और आपकी एक कटोरी छोटी सी कटोरी में कभी थोड़ा सा दूध कभी दो चम्मच दूध कभी तीन चम्मच दूध आप लाकर डालती हो और यह पात्र भरा जाता है यह समझ में नहीं आता

(1:23:50) आखिर यह पात्र आपकी कटोरी के दूध से क्यों भरा है है उस मा ने कहा महाराज मुझे तो नहीं मालूम पर बस एक बात कहना चाहती हूं महाराज इन सब जो दूध लेकर आते होंगे उनके यहां पर ज्यादा दूध होगा पर मेरे घर में एक गाय है जो दूध देती है वो गाय का दूध मेरे घर के छोटे बच्चे हैं ना उनको भी देना पड़ता है मेरे घर में मेरा पति बीमार पड़ा है मेरा बेटा बीमार पड़ा है उसको भी देना पड़ता है इसलिए मेरे पास ज्यादा दू नहीं केवल दो चम्मच दूध बचता है वही मैं शंकर जी को लेकर आ जाती हूं और तुम्हारे बर्तन में डाल देती हूं इतने में स्वयं शिव महा प्रकट होकर कहते हैं सुन राजन

(1:24:38) ढेरों दूध से मैं प्रसन्न नहीं होता अगर घर में से सबको देने के बाद दो चम्मच भी बचकर कोई मुझे दे देता है तो मेरी प्रसन्नता बन जाती है नियम ले रहे हैं लोग 1000 लीटर दूध से शंकर जी का स्नान कराएंगे 50 लीटर दूध से शंकर जी का स्नान कराएंगे 50 लीटर दूध तो चढ़ाओ मना नहीं है 1000 लीटर दूध तो चढ़ाओ मना नहीं है एक लाख बिल पत्र चढ़ाऊ शंकर को प्रसन्न कर लूंगा एक लाख कमल के पुष्प चढ़ाऊ भगवान को प्रसन्न कर लूंगा सवा लाख दुर्वा चढ़ाऊ गणेश जी को प्रसन्न कर लूंगी एक लाख ये चढ़ाऊ भगवान को प्रसन्न कर लूंगी शिव महापुराण की कथा कहती है

(1:25:21) तुम्हारे लाखों की गिनती से शंकर कभी प्रसन्न नहीं होते शंकर को प्रसन्न करने के लिए अगर दिल से एक बेलपत्र भी चढ़ दी जाए तो मेरा शिव प्रसन्न हो जाता है शंकर को प्रसन्न करने के लिए पहले घर में जो बच्चे हैं उनको दूध पिला दो पहले घर में जो रह रहे हैं उनकी सेवा में लग जाओ फिर थोड़ा सा जो बचे दो चम्मच एक चम्मच आधी चम्मच जो बच जाए मेरे शंकर को वो दे दो क्योंकि जो घर में रह रहे हैं उसम भी शंकर है और जो मंदिर में है उसम भी शंकर है उसम भी शिव है भगवान को तुम्हारा वैभव नहीं चाहिए भगवान को तुम्हारी संपदा नहीं चाहिए भगवान को

(1:26:04) तुम्हारा धन नहीं चाहिए नांदेड़ की कथा किस किस ने सुनी हाथ उठाओ जरा महाराष्ट्र नांदेड़ की कथा हमने कही थी टीवी पर सुनी थी आप लोगों ने तो नांदेड़ की कथा में हमने कहा था एक होती है मंदिर में जाने के लिए धर्म की लाइन फिरी की लाइन एक होती है मंदिर में जाने के लिए पैसे की लाइन अब ईमानदारी से बोलना जो धर्म की लाइन में लगा है धक्के खाते खाते खाते खाते भगवान के पास पहुंचा और एक पैसे की लाइन लेकर भगवान के मंदिर में तुरंत पहुंच गया मुझे देर हो रही है जल्दी जाना है मुझे जल्दी दर्शन करना है मुझे जल्दी दर्शन करना है पैसे की लाइन में

(1:26:43) मंदिर में पहुंच गया ईमानदारी से बोलना सबसे पहले संकर पैसे वाले की लाइन से पूछेगा कि धर्म की लाइन से पूछेगा जम के बोलो जरा धर्म की लाइन से मेरा शिव पूछेगा आज भगवान शंकर को लोग धन में तोलने का प्रयास कर रहे हैं आज शिव को लोग बेचने का प्रयास कर रहे हैं आज शंकर को लोगों ने पैसे में तोलने का प्रयास कर दिया पर जितने धूप में बैठे हो ना और जितने बाहर बैठे हो ना मैं आपको धन्यवाद देता हूं आप धर्म के धक्के खाकर भी शिव के शरणागति में हो आप धर्म के धक्के खाकर भी शिव की शर में शंकर की प्राप्ति का केंद्र बिंदु है तुम्हारा दिल तुम्हारा मन तुम्हारा चित्त

(1:27:30) तुम्हारा वैभव शंकर के प्रियता नहीं शंकर की प्रियता नहीं है य शंकर की प्रियता तुमरा और मैंने तेरे ही भरोसे बाबा तेरे ही भरोसे हवा विच उड़ती जावांगी बाबा डोर ह को छना मैं कटी जाऊंगी भोले मैं तेरी पत शंभू में तेरी एक विश्वास भगवान के चरणों में एक भरोसा भगवान के चरणों [संगीत]

(1:28:40) में यहां पर कथा में श्री पवन खंडेलवाल जी बैठे हैं क ब इन्होंने लेवर कथा कर र हम गाड़ी से निकल कर जा रहे थे और इनके बेटे साइड में से निकलकर अंदर की ओर जा रहे थे भीड़ बहुत थी अमलेश्वर में बहुत भारी भीड़ थी गर्मी भी बहुत एक बुजुर्ग मा वो बहुत भीड़ के कारण कहीं ना गई तो पीछे आकर खड़ी हो गई इनके पुत्र ने देखा वो हमको लेकर गया था गाड़ी ड्राइव करकर वो गाड़ी से उतरा इतने में उसने कांच बजाया मान काच बजाया तो कांच बजाया शायद खंडेलवाल जी आपको भी इसका स्मरण नहीं होगा उसने बेटे ने बताया कि नहीं बताया पर मां ने कांच बजाया

(1:29:45) और बेटा जब हमारे को हम इधर से उतरे बेटा ड्राइव कर रहा था तो इधर से उतरा और उसने कांच बजाया कांच बजाकर वो मां बोली बाबू ए बेटा बहुत गर्मी है और मेरा शरीर ठीक नहीं मुझे बैठना है हमने देखा कि जिस स्थान पर जिस सोफे पर इनका बेटा बहू बैठ रहे थे ज हम कथा में जाकर बैठे तो हमने देखा कि उस पवन जी खंडेलवाल जी आपके बेठे ने उस बूढ़ी मां को अपने स्थान पर बिठाकर कथा को श्रवण कराया था उस मुझे मैं उस बेटे को भी धन्यवाद देता हूं और आपको भी धन्यवाद देता हूं साधु था बराज इसके लिए साधु काया अपने विश्वास को प्रकट कर अपने विश्वास को प्रबल

(1:30:37) कर क्या नहीं देगा संक जितने बैठे हो ना बाहर धूप में तप रहे हो छाता लगाए हो दो पानी की बटल अपने पास लेकर बैठे हो थोड़ा गर्मी लग रही होगी थोड़ा कष्ट मिल रहा होगा पर चिंता मत करना धर्म के धक्के खा रहे हो ना तो दुनिया के धक्के नहीं खाने को मिलेंगे मेरा शंकर हाथ पकड़ कर पार कर देगा क्यों नहीं करेगा एक पत्र है पत्र भी थोड़ा भारी [संगीत] है पकड़ो रे जरा पकड़ो व नीचे से बना ले पत्र अब अब दो जन उधर से पकड़ोगे तो पंगा तुम किधर से लोर मेरा नाम राजेश्वरी निषद है मेरे पति

(1:31:46) का नाम भानु प्रताप निषद है यह रिपोर्ट भी उन्होने लगाई है ठीक है मेडिकल की सारी रिपोर्ट उसने पूरी रिपोर्ट गठान की बच्चे दानी में जो गाठ थी उसकी सारी रिपोर्ट ल मेरा नाम राजेश्वरी निषद मेरे पति भानु प्रताप निषद मुंड पारा मुंड पार जिला धमतरी के निवासी मेरा मोबाइल नंबर यह है कहीं बैठ है क्या कहीं बैठी हो और बच्चा साथ में आया हो तो उसको लेकर आ सकते धनतरी की निवासी मेरी शादी हुई चार दिन के बाद मेरे पेट में अचानक दर्द हुआ दर्द हुआ तभी मुझे डॉक्टर के पास ले जाया गया और डॉक्टर ने सोनोग्राफी करवाने के बाद में कहा हमें सोनोग्राफी करवाई और पता चला कि मेरे

(1:32:41) बच्चे दानी में तीन गांठे हैं मेरे बच्चे दानी में तीन गांठे हैं गुरुदेव डॉक्टर ने दवाई दे दी डॉक्टर ने कहा दवाई देखकर देखते हैं पर दवाई से मेरी गाठ ठीक नहीं हुई ऑपरेशन करवाने पड़ेगा डॉक्टर ने कह दिया ऑपरेशन करवाना पड़ेगा जिससे तुम मां कभी नहीं बन सकती हो इसलिए ऑपरेशन की जरूरत है परेशान हो गए डॉक्टर की सलाह से मैंने दवाइयां लेना चालू किया दो साल निकल गए फिर वापस जांच करे पर जांच के अंतर्गत वो गठन रही अब करे तो करे क्या तब सासू मां किसी से सुनकर मंदिर जाने का बोल दी और मैं एक लोटा जल मंदिर में जाकर चढ़ाने लगी एक लोटा जल चढ़ाती बाबा का भजन

(1:33:30) करती चलते चलते गुरुदेव बाबा की कृपा से मेरा गर्भ ठहर गया और गर्भ ठहरा गर्भ ठहरने के बाद मेरी संतान थोड़ा ऊंचा करो साढ़े सा माहा की मेरी संतान हो गई डॉक्टर ने कहा कि इसकी जांच करवाई जाए जांच कराने पर साढ़े महीने में ही डिलीवरी करवाने का डॉक्टर ने बोल दिया हमने गुड़ वा प्रयोग करा और बाबा की कृपा से मेरी संतान जन्म ली और जब जांचे हुई तो उसके अंतर्गत गाठ भी नहीं थी य शिव की कृपा ी जिसकी रिपोर्ट लगाई एक शिव त शिव तत्व हमारे भीतर भरोसा किसको कहते हैं विश्वास किसको कहते दता किसको कहते [संगीत] और रिश्ता तेरा मेरा

(1:34:36) सबसे प्यारा रिश्ता तेरा मेरा सबसे प्यारा तू मेरा बाबा मैं हूं तेरा ला मैं हूं तेरा ला तू मेरा बाबा मैं हूं तेरा लाला मैं हूं तेरा लाला आप उसके आश्रित हो जा आश्रित उसके र हमारा विश्वास हमारा भरोसा हम ड़ी क्यों नहीं कर क्या चाहिए शंकर भगवान को वो बूढ़ी मां दो चम्मच दूध उस बर्तन में डाल कर जाती थी और बर्तन भरा जाता था अर्थात दुनिया के लोग भले लोटा भर कर लाए हो पर बूढ़ी मां

(1:35:43) पहले परिवार का स्मरण कराकर दो चम्मच जो लाई है वो मन से लाई है और दिल से दिया गया भगवान दिल से स्वीकार करता है और झोली खुशियों से अपने आप भर देता है दिल से उसको पाने के लिए दिमाग की जरूरत नहीं है दिमाग लगाओ तुम कमाने में दिमाग लगाओ तुम कमाने में दिमाग लगाओ तुम व्यापार में दिमाग लगाओ तुम व्यवसाय में पर भगवान को पाने के दिमाग नहीं दिल की जरूरत है दिमाग नहीं चाहिए दिल [संगीत] चा उसके आश्रित उसके भरोसे आप रही हो और जब उसके आश्रित रहोगे शिव को पाने के लिए वैभव धन दौलत संपदा

(1:36:52) सत्ता कुछ कुछ [संगीत] [प्रशंसा] नहीं उसको पाने के लिए केवल निर्मल मन सो मोही पावा मोही छल छिद्र कपट ना भावा तुम्हारे को उसको पाना है व भाव का भूखा है भाव का कोई भी ब आई की चीज शंकर भगवान को अच्छी लगती ही [संगीत] नहीं जिते अब मैं बोलूंगा तो आप तो कहोगे महाराज फिर बोलती मेरा इशारा ही काफी है तुम लोगों को कहोगे कि महाराज बोलता

(1:38:01) [संगीत] ब केतकी का पुष्प सुगंधित बहुत सुगंधित बहुत सुगंधित कितना वीआईपी था सारे पुष्पों में प्रथम नंबर का पुष्प था केतकी का पुप शंकर को प्रि नहीं गा त्या जिस पुष्प को कोई ना चढ़ाए जिस पुष्प की कोई कीमत नहीं जिस पुष्प का कोई महत्व नहीं कौन सा पुष्प जिसको लोग रोड के बीच में लगा देते हैं जिससे ना गाय खाए ना पशु खाए ना पक्षी खाए ना जानवर खाए ना किसी के काम कनेर व कनेर का फूल शंकर भगवान दोनों कानों में लगाकर बेठ जाते हैं और जीव का कल्याण करते [संगीत] इसीलिए पास वालो थोड़ा ध्यान रखना वीआईपी प्रिय नहीं है मेरे

(1:39:06) शंकर मेरे शिव को कनेर का फूल प्रिय है जो यह चारों तरफ बैठे [संगीत] हुए प्रियता शिव की और मैं छत्तीसगढ़ से चाहूंगा छत्तीसगढ़ के से चाहूंगा इस कथा में सौगंध खाकर जाना कि पास खरीद के नहीं फ्री की कथा सुनकर जाऊंगा इस कथा में सुगंध खाकर जाना बैठना धक्के खाना धूप में तपना छाता लगाना दो बोतल पानी की रखकर बैठना और उसके आश्रित होकर बैठना इन पत्रों में पत्र जो आए है ना इन पत्रों में एक पत्र तुम्हारा भी होगा अगर धक्के खाकर कथा का रस पान करोगे [संगीत] तो वीआईपी बनकर नहीं शरणागति बनकर कथा श्रवण कनेर का पुष्प प्रिय है उसको जो

(1:40:15) दुनिया के लोग नहीं पीते दुनिया ने अमृत पिया विषय है उसको व ब गया उसकी प्रियता थोड़े में थोड़े थोड़े और फिर निवेदन फिर निवेदन कल कल एक मां यहां से हम गाड़ी से जा रहे थे यहां से गाड़ी से जा रहे थे तो एक बूढ़ी मां बहुत उसका स्वरूप हम क्या कहे जैसे छत्तीसगढ़िया भाषा में केवल एक साधारण सी साड़ी पहनी थी बिल्कुल सिंपल सी साड़ी हमारा मन था कि हमारे पास मोबाइल नहीं था नहीं तो हम उसका फोटो जरूर खींच लेते साधारण सी साड़ी मां कपड़े की दुकानों लगी थी उसमें कपड़े बिक रहे थे जमीन पर और बूढ़ी मां अपने एक झोले में से झोले में से और पता नहीं क्या बना के लाई थी और ऐसे

(1:41:15) छोटे-छोटे पत्ते में रखकर सबको रोड पर से जाने वालों को हम जहां से जा रहे थे वहां रोड पर चलने वालों को में से निकालकर ना जाने क्या देती जा रही थी ना जाने क्या लोग बड़े प्रेम से उसके पास खड़े होकर खा रहे खड़े हो हमने तुरंत हमारे पीएसओ से कहा इसको कहते हैं दान इसको कहते हैं धर्म अपनी सामर्थ के अनुसार कर र अपनी सामर्थ के अनुसार कल कथा में कहा था जरूरी नहीं कि बहुत बड़ा भंडारा आप करें जरूरी नहीं रो संपदा एक बिस्कुट का पड़ा एक टॉफी एक पानी का पाउच या अपनी पानी की बोतल में से भी किसी को पानी पिला दोगे तो समझ लेना कि पित्रों के मुक्ति के

(1:42:03) लिए तुमने बहुत कुछ कर लिया शभ [संगीत] अपने पानी की बोतल में से भी अगर किसी को एक ट पानी भी पिला रहे हो तो वह भी समर्पण एक बिस्कुट के पड़े में से भी एक बिस्कुट भी अगर किसी को दे रहे हो तो व समर्पण है अपने समर्पण की श्रेष्ठता रखी अपने समर्पण की प्रबलता [संगीत] रखी और जिस दिन हम तो बाबा के

(1:43:13) भरोसे चलते हैं हम तो बा के भरोसे चलते ये दुनिया वाले जलते हैं ये दुनिया वाले जलते हैं हम तो बाबा के भरोसे चल चलते हैं हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं मर में जाओ तुम्हारी पूजन की थाली में और पड़ोसी की पूजन की थाली में क्या है उससे मतलब मत पशुपति व्रत किस किस ने करे जरा हाथ उठाओ सब लोग उठाओ जिन जिनने पशुपति व्रत करे करे सब लोगों ने हाथ नीचे रखो तुम्हारे पशुपति व्रत करने पर तुम्हारे पशुपति व्रत करने

(1:44:17) पर हमारे बीच में अतिथ गण पधारे हुए हैं एक बार जोरदार ताली बजाकर स्वागत वंदन अभिनंदन प ख कर [संगीत] दो शंभु शर मांगू रे दूख काटो दया कर दर्शन हमारे बीच में छत्तीसगढ़ शासन के कृषि मंत्री जी पधारे हैं एक बार जोरदार ताली बजाकर उनका स्वागत

(1:45:22) [संगीत] सं शरण प मांग भरी लेरी दुख का को दया करी मैं दर्शन आ शंभु शरण पड़ मांगू ग रे घरी दुख का दो दया कर हमारे बीच में पंडित श्री राश शर्मा जी भी धर्म समाज से भी विराजमान है उनको भी बहुत बहुत साधुवाद है जहां भी बैठे हैं उनका बहुत बहुत सा और साथ में भानु चंद्राकर कुरु

(1:46:27) से बोलबम समिति के हैं उनको भी बहुत बहुत साधुवाद व भी एक शिव तत्व हमारे बीच [संगीत] शिव पशुपति किसने करे हाथ उठाओ जरा जल्दी से सबने करे रखो अब शिव महापुराण की कथा पर जरा ध्यान दीजिएगा स्मरण में जरा ध्यान दीजिए आपने पशुपति व्रत के लिए छे दिए रखे पूजन का सामान रखा सामग्री रखी प्रसाद बना कर रखा ठीक है बोलो तो जमके बनाकर भगवान का प्रसाद और मान लो आप पूजन करने के लिए पहुंचे मंदिर में भगवान शंकर के

(1:47:32) शिवा और भगवान शंकर के शिवालय में आप जब पूजन करने के लिए पहुंचे समझो आपकी पूजन की थाली में आप कंकू भूला कंकू मतलब रोली या आपकी पूजन की थाली में आप चंदन भलि हल्दी भूलिया या आपकी पूजन की थाली में आप कपूर भूलिया मान लो आपकी पूजन की थाली में आप जने भूलिया आपके पूजन की थाली में आप लच्छा मौली नाड़ा मान लो भूल गए मान लो अब तुम्हारा पूजन की थाली में सब कुछ है जनेऊ नहीं है रोली नहीं है हल्दी नहीं है या कोई सामान नहीं है और पड़ोसी की थाली में सब कुछ है शिव महापुराण की कथा कहती है पड़ोसी की थाली में भले पूजन का सारा सामान हो अपनी थाली में भले कम हो पर

(1:48:39) पड़ोसी से मांगकर अपनी थाली में रखकर परमात्मा को मत देना भगवान को लगेगा कि जब तू पड़ोसी से मांग कर ही तेरा गुजारा कर सकती है तो फिर मेरे सामने आई क्यों मेरे से मांगना तू मुझसे ले मैं [संगीत] द थाली लेकर गए पूजन की सामग्री लेकर गए पूजन का सामान लेकर गए और पूजन की थाली में सामान है पूजन की थाली में सामग्री है पूजन की थाली में जितना है भगवान स्वीकार करेगा हल्दी भूल गए ना कोई बात नहीं रोली भूल गए ना कोई बात नहीं जने भूल गए ना कोई बात नहीं बस बस दो चीज तुम्हारी भूलना नहीं है क्या क्या एक दीप जो छ दिए हैं वो मत भूलना और दूसरा प्रसाद

(1:49:40) का जम के बोलो तीन हिसा व भूल गए ना कोई बात नहीं चले [संगीत] यहां तक शिवकरण कहती है शंकर भगवान की कथा यहां तक कती है अगर आप शंकर के मंदिर में गए हो शिवालय में गए हो शंकर का दर्शन करने के लिए गए हो तुम्हारी जेब में रुपया नहीं है पड़ोसन से मांग कर रप तुम शंकर के मंदिर में बिल्कुल ना चढ़ाई है दूसरे से मांग कर र आरती की थाली में बिल्कुल ना चढ़ाए क्यों भगवान को लगता है भोलेनाथ को कि आई है तो कुबेर भंडारी के पास में और मांग भी दूसरे से ले रही है ये श्रेष्ठता नहीं है ये श्रेष्ठता नहीं [संगीत] है उसमें श्रेष्ठता ये नहीं है मांगो

(1:50:39) परमात्मा से तेरा ही दिया मैंने खाया किया है तेरा शुक्रिया है तेरा शुक्रिया मुझे भोले बाबा ने बहुत दे दिया है तेरा शुक्रिया है तेरा शुक्रिया ये जायदाद दी है औलाद दी है मुसीबत में हर वत इमदान द है तेरा ही दिया मैंने खाया पिया है तेरा शुक्रिया तेरा शुक्रिया है अपनी थाली में कम है चलेगा

(1:51:46) अभी कथा में कहा घर की रूखी रोटी खा लेना अपने धर्म की कोरी रोटी खा लेना पर झूठ न खाने दूसरे के धर्म में मत चले [संगीत] [प्रशंसा] जाना भारत माता की सनातन धर्म की अपने धर्म की रूखी रोटी खाना अपने घर की रूखी रोटी खाना पर दूसरे के धर्म में जा दूसरे की थाली में मत देखो क्या रख अपनी थाली में जो है मैं शंकर को दू मैं शिव को द मेरे पास है मैं वो भगवान को दूं शिव जी बहुत सारी बेलपत्र से शंकर जी बहुत सारी सामग्री से कभी नहीं रीते शंकर तो अपनी भक्ति से आपके पास में जो है वो भगवान को दे एक लाइन आप लोग आरती में गाते हो कौन सी लाइन गाते हो तन

(1:52:49) मन गाओ गाओ गाओ चालू करो जरा तन मन धन सब है तेरा स्वामी सब कुछ है तेरा तेरा तुझको प्रभु का प्रभु को समर्पण क्या लागे मिला ओम जय ज जगद और तुमने जैसे ही गाया वैसे ही जगन्नाथ जी तुम्हारे सामने प्रकट हो जाए और प्रकट होते सेही बोले अरे ये कमला तन मन तूरक गले की चेन मुझे दे दे कमला को अटेक जाएगा प्रभु गले की चेन अपना समान प्रभु अगली बार कमला आरती गाएगी तन मन बस

(1:53:59) [संगीत] [संगीत] तेरा रा भगवान केवल भाव का भूका है केवल भाव का भगवान केवल श्रद्धा का भूका है केवल धा का तुम कितना भी क लो परमात्मा को कि मैंने धन दिया तन दिया मन दिया परमात्मा कहते हैं तू कितना भी कले पर मैं वही स्वीकार करता हूं जो तेरे भाव से त मुझे दे देता है भाव सेन [संगीत] [संगीत] [संगीत] और उसने स्वीकार किया वो श आपको एक प्रसंग सुनाना चाहूंगा इसी छत्तीसगढ़ का इसी

(1:55:10) छत्तीसगढ़ मैं कहना चाहूंगा कि छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया यह मेरा जो धान का कटोरा है ना छत्तीसगढ़ की धरा इसको समझना कठिन है छत्तीसगढ़ का चरित्र सुनाऊंगा [संगीत] वेणु गोपाल साहू कोकड़ी में कथा कर और वहां की जितनी माताएं उन्होंने पशुपतिनाथ का व्रत करना प्रारंभ कर पशुपतिनाथ का व्रत करना प्रारंभ जरा देखिएगा मेरा छत्तीसगढ़ क्या करता है जरा समझने वाला विषय अब कोकड़ी [संगीत] में जब कथा हुई सबने पशुपति व्रत करना प्रारंभ किया और पशुपति व्रत करने पर प्रसाद के कितने हिस्से मंदिर में रखते हैं जम जम के बोलो प्रसाद के मंदिर में रखा ते तीन हिस्से एक हिस्सा अपनी थाली

(1:56:14) में वापस चले जाता है मंदिर में कितने रह गए दो अब वहां पर दो बेटिया दो लड़कियां अच्छी पढ़ने वाली एक शायद एथ क्लास में पढ़ रही थी और एक 10थ में पढ़ रही थी दोनों बेटियां सोमवार की सोमवार मंदिर में एक बाल्टी लेकर जाती स्टील की और जो भी प्रसाद इकट्ठा होता वो स्टील की बाल्टी में डाल अब देखो स्टील की बाल्टी में प्रसाद लिया और वो बेटियां जो बहुत साधारण से सिंपल से जो लोग थे जिन्होंने शंकर को छोड़ दिया था जिन्होंने सनातन धर्म छोड़ दिया था जिन्होंने हिंदू धर्म छोड़ दिया था वह दोनों बेटी उस प्रसाद की बाल्टी को लेकर उनके घर जाती थी जो पहले

(1:57:11) तो हिंदू थे और बदलकर दूसरे धर्म में चले गए इतना इतना प्रसाद उनको देकर आती और कहती चाची खा लेना काकी पा लेना सारे घर के बच्चों को प्रसाद देकर आ जाते जितने कोकड़ी के आसपास के जो क्षेत्र के घर थे उसमें से 15 घर के लोगों ने वापस शंकर की आराधना करना प्रारंभ कर दी और सनातन धर्म में [संगीत] बापस इसीलिए कहते हैं छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया य छ की धरा को साधारण धरा है यहां की एक एक बेटी यहां का एक एक बच्चा सनातन धर्म के लिए जीता है जागृत होता है और सनातन धर्म के लिए आगे बढ़ता है कदम से कदम मिलाकर सनातन धर्म को जागरूकता देता है यहां का बेटा और

(1:58:09) [संगीत] बेटी शिव [संगीत] कोना इसीलिए आप लोगों से बारंबार स्मरण किया जाता है कि शंकर के मंदिर में एक लोटा जल चढ़ाने जरूर दिखाव सजावट और बनावट इन तीन चीजों से शकर कभी नहीं मिला दिखाव से संकर कभी नहीं मिला कितना भी दिखावा कर लो शिव नहीं मिलेगा सजावट कितना भी घर सजा लो भगवान नहीं मिलेगा अपने आप को कितना सजा लो भगवान नहीं मिलेगा बनावट कितनी भी बनावटी जि जीलो भगवान नहीं मिलेगा मेरा शकर तो भोला है भोले को ही मिलता है भोले के भाव से मिता भोला है भोले के भाव एक पत्र देख मेरा

(1:59:19) नाम छाया साहू है पति का नाम रोशन लाल साहू है मैं धमतरी श्री राम नगर छत्तीसगढ़ से हूं कहीं बैठी हो लती आ जाओ बेटा बेलपत्र ले जा आ जाइए भोलेनाथ की महिमा का मैं क्या वर्णन करू गुरुदेव एक लोटा जल मंदिर में चढ़ाने का शिव महापुराण सुनने का फल क्या होता है मैं बताना चाहती हूं पत्र को आप लोग एलईडी पर पढ़ सकते हैं मेरे पति रोशन लाल साहू प्राइवेट कंपनी में काम करते थे उसी से हमारे घर का काम चलता था अचानक एक दिन उनकी नौकरी चली गई तो हम लोग बहुत परेशान हो गए तब मेरी बहन निशा साहू ने शिव महापुराण के बारे में बताया हम आपको नहीं जानते थे गुरुजी मेरी

(2:00:14) बहन के कहने पर हमने कथा सुनना प्रारंभ करी एक लोटा जल मंदिर में रोज चढ़ाना प्रारंभ करा पशुपतिनाथ का त किया पाच दिन की बालोत छत्तीसगढ़ की जो कथा थी हमने पंडाल में बैठकर सुनी मेरे गुरुदेव मेरे पति को मेरे महादेव ने ऐसी कृपा कर दी मैंने बालोत के छत्तीसगढ़ बालोद में जो कथा हुई थी पंडाल में बैठकर धूप में तपते हुए छाते की छाव में बैठकर बाबा से प्रार्थना करी थी मेरे बाबा कृपा करना पति की नौकरी चली गई है आप कृपा करोगे सियोर वाला महाराज कहता है कि मेहनत करो चार गुनी परिश्रम करो चार गुना मेहनत करोगे तो फल जरूर मिलेगा मैं भी अब मेहनत

(2:01:04) करूंगी मेरा पति भी मेहनत करेगा बाबा बस हाथ तुम पकड़ लेना आज मेरे बाबा ने ऐसी कृपा कर दी कि मुझे महादेव ट्रेडर्स का मालिक बनाकर बिठा दिया और कुबीर भंडारी की कावड़ यात्रा हम सिहोर की कर कर आए आज बाबा ने ऐसी कृपा कर दी कि हमें यजमान पदवी दी हम बाबा को यहां धन्यवाद देने के लिए आए हैं एक बार जोरदार ताली बजाकर स्वागत आ जाओ बेटा लाइन अच्छी लिखी है आप परम गुनगुनाते कि मुझे भोले बाबा ने बहुत दे दिया है मुझे भोले बाने बहुत दे लिया हैरा शुक्रिया है तेरा शुक्रिया है तेरा शुक्रिया है तेरा शुक्रिया

(2:02:07) है ये जायदाद दी है और आद दी है ये जायदाद दी है लाग है मुसीबत में हर वक्त इमदा दी है तेरा ही दिया मैंने खाया पिया है तेरा शुक्रिया है तेरा शुक्रिया है अपने विश्वास को दी बना इस बहन ने लिखा बालोत की [संगीत] कथा बालोत छत्तीसगढ़ की कथा सुनी थी गुरुदेव पंडाल में बैठकर और गुरुजी आप कहते हो कि पंडाल में बैठकर जो मांगा जाता है वो मिलता जरूर है हमको

(2:03:12) भरोसा नहीं था पर मेरे बाबा ने क्यों भरोसा नहीं था क्योंकि इनकी नौकरी भी चली गई थी कई महीने निकल गए थे तो नौकरी भी चली जाए तो दुख नहीं होगा अब क्या मिलेगा पर बाबा ने हमारी खुद की कंपनी डालकर बाबा ने कृपा करी यह शिव तत्व है योग घड़ी क्या देता है कैसे देता है क्या प्राप्त होता [संगीत] है बनी बनी छत्तीसगढ़ बनी महाराष्ट्र नागपुर के पास वनी में राजा जी कथा उन्होंने हमसे पूछा गुरु [संगीत] जी हम जिस भाव के लिए कथा कराए हैं उसके लिए हमें क्या करना पड़ेगा हमने कहा राजा भैया तुमने सब व्यवस्था अच्छी करी सब कुछ बढ़िया करा सारी व्यवस्था

(2:04:14) अच्छी है अब हमारा एक निवेदन है कि सात दिन की कथा में से एक दिन आप कथा के पंडाल में जाकर सो जाओ कथा के पंडाल में जाओ रात को जो कीर्तन होता है रात को जो भजन होता है रात को जो भक्ति होती है रात को जो दृढ़ता होती है जो स्मरण होता है जाइए कर गुरुजी दो बच्चे हैं एक छोटी उनकी लड़की है काशी शायद दो ढाई साल की और एक लड़का है चार पा पाछ साल का हमने कहा बच्चे तो बोले क्या करें हमने कहा इनको भी ले बाबा के चरणों में सो गा दी हमने कहा जैसे सब सो रहे हैं वैसे ही [संगीत] सो ले जाओ य से दरी लपेट के बांध के जाओ सो स्मरण कर कहा गुरु जी बस एक ही तमन्ना

(2:05:16) है कि एक जगह पर बहुत सारा कुछ रुक गया है बाबा हमने कहा कुछ मत कर तू मत रुके तू जा भजन कर बैठ कथा के पंडाल में जहां मर्जी पड़ जाए जहां जगह मिल जाए वहा सो जाना कथा सुन संकीर्तन कर रात का जो कीर्तन है यह पूरा पंडाल आप लोग आए रात को देखने के लिए दर्शन करने के लिए आए हो ये मेरे जितने पंडाल में मेरी जीजिया और जीजा बैठते हैं ना रात को खूब कीर्तन करते हैं श्री शिवाय नमस्ते खूब कीर्तन करते नाचते कूदते ूब कीर्तन में मस्त रहते रे मस्त 15 दिन बाद जैसवाल जी फोन कर कर बोलते हैं गुरुजी हम जो बाबा के कीर्तन का आनंद लिया ना उससे हमें सब कुछ मिल गया

(2:06:05) कोई बचा ही नहीं कुछ दिल से सुनो दिल से क्या देगा कैसे देगा य उसके ऊपर निर्भर करता क्या देगा और कैसे देगा ये उसके पर निर्भर करता हैय उसके [संगीत] आश्र उसके आश्रित [संगीत] हो और मैंने तेरे ही भरोसे बाबा तेरे ही भरोसे हवा विच उड़ती जगी बाबा डोर हना में कट जवागी हम जिनके चौधरी जी के रुके हैं

(2:07:11) चौधरी जी के यहां पर शर्मा जी और उनका परिवार भी वहा सेवा में लगा रहता है कुछ बेटियां और कुछ बेटे चौधरी परिवार के मां सेवा में कल उनकी आंखों में आंसू रो रही थी बेटियां भी रो रही थी बेटा भी रो रहा था और बेटा भी रो रहा था तो हमने उससे कहा क्यों रो रहा है बाबू रोना क्या कहे गुरु जी पता नहीं आंख में आंसू आ ग हमने बेटियों से पूछा बेटा क्यों रोना कोई बात हो तो हमको बताओ तुम रो क्यों रही हो क्या हो गया बेटा कहे गुरुजी बस आंखों में आंसू आ गए हमने पूछा क्यों किसलिए कहा गुरु जी हमने सोचा नहीं था इतने छोटे से गांव में भी शिव महापुराण की

(2:07:54) कथा हो जाएगी इतना छोटा सा गांव शिव महापुराण की हमने कहा बाबू तुम लोग जो मेहनत करे हो तुम्हारा जो परिश्रम है वो रंग लाया है शिव तत्व को अपने भीतर उतार केवल शिव महापुराण की कथा का एक ही लक्ष्य है शंकर तुम्हारे दिल में बैठे शंकर तुम्हारे मन में बैठे शंकर ये नहीं कि सोमवार के दिन रिझा जाएंगे मंगल को जाे बुधवार को जाएंगे शिव तुम्हारी चित्तवृत्ति में 24 घंटे विराजमान हो जाए शंकर श्री शिवाय नमतु जब तुम्हारी दुख की घड़ी हो तुम्ह शिव तत्व याद आए तकलीफ की घड़ी हो शिव तत्व तुम्हारी स्मरण [संगीत] में उसको पहचान अरे लुटा दिया भंडार

(2:08:52) काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने लुटा दिया भंडार काशी वाले ने कर दिया माला मान काशी वाले ले लुटा दिया हां लुटा दिया लुटा दिया हा लुटा दिया लुटा दिया ु दिया लुटा दिया लुटा दिया अरे लुटा दिया भंडार काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने ल दिया भंडार काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले बड़े भाव से दोनों हाथों से [संगीत] य

(2:10:14) [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] शंभू

(2:11:25) [संगीत] [संगीत] [संगीत] जो जैसे भावना लाया वैसा ही वो फल पाया जो जैसे भावना लाया वैसा ही वो फल पाया नहीं खाली उसे लौटाया वो मन ही मन हर शया नहीं खाली उसे लौटा वो मन ही मन हर शया कर दिया उसे निहाल काशी वाले ने कर दिया मालामाल काशी वाले ने कर दिया उसे

(2:12:37) निहाल काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने कर दिया मा माल काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने कर दिया माला मान काशी वाले ने लुटा दिया भंडार काशी वाले ने कर दिया मालामाल काशी वाले ने लुटा दिया भंडार काशी वाले ने कर दिया मालामाल काशी वाले [संगीत] ने जय हो [संगीत] [संगीत]

(2:13:44) [संगीत] राधे [प्रशंसा] [प्रशंसा] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]

(2:14:59) [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ज [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]

(2:16:07) जो लगन लगाया सच्ची है उसकी नाव नटकी जो लगन लगाया सच्ची है उसकी नाम नटकी बेड़ों को पार लगाया नहीं देर करी पल भर की बेड़ों को पार लगाया नहीं देर करी पल भर की मिटा दिया जंजाल काशी वाले ने कर दिया मालामाल काशी वाले ने मिटा दिया जंजाल काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी ने कर दिया माला माल काशी बाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने अरे लुटा दिया भंडार काशी वाले ने कर दिया मालामाल काशी वाले ने टा दिया भंडार काशी

(2:17:16) वाले ने कर दिया माला माल काशी रे [संगीत] बोले शंभु [संगीत] यस

(2:18:41) [संगीत] कर [संगीत] [प्रशंसा] [प्रशंसा]

(2:19:44) [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] चरणों की किया जो सेवा हो पाया मिसरी मेवा होक किया जो सेवा वो पाया मिसरी मेवा जिसने है मांगा बेटा वो चांद से टुकड़ा पाया जिसने है मांगा बेटा वो चांद से टुकड़ा पाया कर दिया फिर खुशहाल काज वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने कर दिया फिर खुशहाल काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने ओ कर दिया माला माल काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने अरे लुटा दिया भंडार का

(2:20:51) काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने हो लटा दिया भंडार काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने लुटा दिया भंडार काशी वाले ने कर दिया माला माल काशी वाले ने लुटा दिया भंडार काशी भाले ने कर दिया माला माल काशी भाले महादेव अपने स्थान पर बैठकर भगवान शंकर जीने मन की बात बड़े भाव के साथ दिल से बाबा को प्रार्थना करिए दिल से विनय करिए आज कथा का चतुर्थ दिवस कल कथा सुबह 8 बजे से प्रारंभ हो जाएगी 11 बजे विराम हो जाए टीवी पर दोपहर में एक बजे से 4 बजे तक ही

(2:21:59) आए कहते हैं शिव महापुराण का नियम है कि जिस दिन कथा विराम होती है उसके एक दिन पहले का जो दिन रात रहती है उसको हम लोग आज की शिवरात्रि मानते बाबा से विनय करकर आप और हम भगवान से अपने दिल की बात कहे और प्रार्थना करें बाबा से कि बाबा हमारे मन के मनोरथ को पूर्ण कर यह कथा कल विराम हो जाएगी 24 तारीख को 26 तारीख से 26 सितंबर से दो अक्टूबर तक नंदगांव जिला महाराष्ट्र [संगीत] में वहां के विधायक महोदय द्वारा पितृ पक्ष की दूसरी कथा सात दिवस वहां प्रारंभ

(2:23:09) हो दो तारीख तक व कथा चलेगी दो अक्टूबर तक पा अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक पांच दिवस की कथा हापुड़ उत्तर प्रदेश में प्रारंभ हो जाए 9 तारीख को वह कथा विराम विराम होगी फिर 14 तारीख से 14 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक शिव महापुराण की कथा फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश में प्रारंभ हो ऐसे ही कथा का क्रम चालू रहेगा आप और हम श्रवण करते रहेंगे दिल से बाबा को प्रार्थना करो जिससे आने वाली कथाओं में आपका भी पत्र यहां पर पहुंचे और व्यासपीठ पर व पत्र आए बाबा से दिल से कहिए प्रार्थना करिएगा भाव से विनय कर साथ में बोलिएगा सभी लोग

(2:24:22) [संगीत] श्री शिवाय नमतु श्री शिवाय [संगीत] नमस्तय [संगीत] नमस्तय नमतु भोला सब दुख का तोहा ओ भोला सब दुख

(2:25:27) काटू मा शिव शंकर जप तेरी [संगीत] माला भोले बाबा जप तेरी माला भोला सब दुख का [संगीत] रा ओ भोला सब दुख काटो मारा वेश मंगल मंगलकारी वेश मंगल मंगलकारी शमशान वासी हमारा शमशान वासी हमारा ओ

(2:26:31) भोला सब दुख काटो मरा ओ भोला सब दुख काटो [संगीत] मारा भगवान देव महादेव का चरित्र करर है श महापुराण की कथा [संगीत] क शिव तत्व कह [संगीत] रहा शिव को रि जाने के लिए कोई बहुत वस्तु बहुत वैभव ले कम सेटिंग नहीं हुई माइक कल अच्छा था शिव तत्व को पाने के लिए बहुत वैभव धन संपदा सत्ता की जरूरत शिव भगवान को पाने के लिए भगवान शंकर को पाने के लिए एक विश्वास की जरूरत

(2:27:43) है मां पार्वती जी कैलाश धाम पर जब आई भगवान शंकर के तेज पुंज से श्री सदानंद कार्तिके जी का जन्म हुआ कार्तिके बाबा गंगा जी की धार से छह स्वरूप में उनका जन्म हो कृतिका ने ऋषियों की पत्नी ने अपने तप बल से उनको एक कर दिया और उनका नाम कार्तिके हो गया बोल कार्तिकेय महाराज की जय कार्तिके भगवान की जय एक कर उनके जन्म का क्या कारण था तारकासुर का संघार क्योंकि तारकासुर ने मांगा क्या था

(2:28:50) [संगीत] तार का सुर था असुर हे राक्षस उसकी प्रवृति राक्षस की है असुर है असुर प्रवृति है उसकी पर मांगा कितना अच्छा रकस ने मांगा कि अगर मेरी मृत्यु हो तो शंकर जी के पुत्र के द्वारा शिव के बेटे के द्वारा मृत्यु कभी-कभी याय जितनी मेरी जीजिया बैठी हैं जितने मेरे जीजा बैठ हैं जितनी मेरी बेटियां बैठी हैं जितने मेरे बेटा बैठे हैं उनसे निवेदन है कभी कभी शंकर के मंदिर में अगर आप जा रहे हो शिव को एक लोटा जल चढ़ाने के लिए जा रहे हो तो मेरा बेटी और बेटे से निवेदन है मेरी माताओं से मेरी जीजी से मेरे जीजा से निवेदन है कभी आप शंकर के मंदिर में अगर

(2:29:54) जल चढ़ाने के लिए जा रहे हो तो कभी कभी एकांत में बैठकर भगवान शंकर से दो बातें कर कर ज शिव से थोड़ी सी चर्चा कर कर शिव क्या करेगा ये उसके ऊपर नि एक एकने पत्र लिखा है [संगीत] [प्रशंसा] मैं राजन भेंड की निवासी हूं राजिम भेंड की निवासी हूं कहीं बैठी है क्या अगर बच्ची आई हो साथ तो उसको लेकर आ सकती है मैं राजी भंडरी की निवासी हूं मेरा नाम अंजू बाई

(2:30:59) सिंहा मेरी बेटी की आवाज बचपन से नहीं है गुरुजी जिसका नाम भुवनेश्वरी सिन्ना वो बचपन से बोलती नहीं थी निपट गूंगी है वो बोल नहीं पाते मैं बाबा के चरणों में आज बताना चाहती हूं कि मेरी बेटी भुवनेश्वरी बचपन से गूंगी है बोल नहीं सकती मैं उसको शंकर के मंदिर लेकर जाती हूं शिवजी पर चढ़ा हुआ जल उसको रोज पिलाती हूं कभी नहीं सोचा था कि मेरी बेटी दो शब्द बोल पाएगी आज मेरी बेटी ने थोड़ा-थोड़ा बोलना प्रारंभ करा है मैं बाबा को धन्यवाद देने कहीं बैठी हो और अगर बेटी आई हो तो उसको ले व्यासपीठ पर बेलपत्र लेने आ स अंजू भाई सिन्ना राजम भेंड के निवासी हूं मेरी बेटी

(2:31:59) भुवनेश्वरी सिन्ना जो बचपन से गूंगी है बोल नहीं सकती थी उसको मैंने शिव का चढ़ा हुआ जल दिया तो उस जल ने कृपा करी और मेरी बेटी ने बोलना थोड़ा थोड़ा प्रारंभ कर अब अगर थोड़ी वाणी मेरे शंकर ने दी है तो यह विश्वास मानकर चलना की पूरी वाणी शंकर जरूर देगा देगा क्या नहीं देता शिव को रिझाने वाला एक पत्र है मेरा नाम डोमार डोमार सिन्ना है मैं ग्राम चटोत जिला बालोत का निवासी हू कहीं बैठे हैं आप ही है आ जाओ एक बेलपत्र ले जाना जाइए मेरा नाम दो मर सिन्हा है मैं ग्राम चटोत जिला बालोत का निवासी हूं गुरुजी मैं भोले बाबा के आप लोग पत्र एलईडी पर पढ़िए मैं भोले बाबा की

(2:32:57) महिमा का क्या खान करू गुरुदेव मेरा पर्स दो साल पहले ग्राम अचो में पूर्व मुख्यमंत्री के आगमन के कार्यक्रम को देखने के लिए गई थी तभी वहां पर मेरा पर्स गुम गया था उस पर्स में मेरा ड्राइविंग लाइसेंस था पैसा था पैन कार्ड थे और कुछ कागज थे आप लोग एलईडी पर फिर मैंने जैसे ही अभी 19924 को आज कौन सी तारीख है जम के बोलो 23 19 तारीख को जब मैं य कथा में आ रहा था आ रही थी तब मैं कथा में चलते चलते बाबा से विनती कर कर चली बाबा तू हम पर कृपा करना हम कथा में 19924 को आ रहे थे तभी ग्राम खरगा से फोन आया कि तुम्हारा पर्स मिला है और वह पर्स

(2:33:54) गुरुजी कथा में आने से पहले मैंने बाबा को एक लोटा जल चढ़ाया था उस जल का प्रताप यह हुआ कि मेरा भोया हुआ पस मुझे य आने से पहले मेरे बाबा ने दे दिया मैं बाबा को धन्यवाद देती हूं अब मैं क्या कहूं जो कहते हैं कि एक लोटा जल से कुछ नहीं होगा उन्हीं की सभा में मा था और बाबा की कथा में मिल भी गया पस मूल नहीं है मूल है भगवान शिव के प्रति आपका विश्वास मूल है शंकर के प्रति आपका भरोसा एक पत्र खगेश कुमार यादव ग्राम बोईर गांव कला पो दरी पारा जिला गरिया बाद छत्तीसगढ़ का है कहीं बैठे हो तो आ सकते हैं मेरा मोबाइल

(2:35:00) नंबर यह है गुरुदेव मैं बहुमूल्य आदिवासी क्षेत्र में रहता हूं गुरुदेव वहां पर बहुत कुछ चलता रहता है पर आपकी शि महापुराण की कथा टेलीविजन पर सुनी है मैंने टेलीविजन पर सुनकर मैं बट वृक्ष पेड़ के नीचे आपके कहने पर बट केश्वर महादेव के नाम से शिवजी की पूजन करने लगा गुरुदेव मैंने छोटा सा एक शिवलिंग वहां पर रखकर उसकी पूजन कर रहा हूं गुरुदेव पूजा का क्या फल होता है मैं नहीं जानता था बस आपकी कथा से जुड़ गया और कथा से जुड़ा बाबा से मैं केवल एक ही विनती करता था बाबा मेरी कहीं ना कहीं जॉब लगा दीजिए और बाबा ने ऐसी कृपा करी

(2:35:46) गुरुदेव मुझे रोजगार सहायक की नौकरी मिल गई और मैं बाबा को यहां धन्यवाद देने के लिए आया हूं गुरुदेव मुझे देखते देखते गांव के क्योंकि मैं आदिवासी क्षेत्र में वनवासी क्षेत्र में रहता हूं मुझे देखकर गांव के दो तीन लोग और जाने लगे एक आता था उसको कैंसर था शंकर जी को जल चढ़ाते चढ़ाते उसका कैंसर ठीक हुआ है गुरुदेव एक पैरालिसिस लकवा लगा हुआ व्यक्ति था जिसको लकवा लगा था मेरे भोलेनाथ ने उसको भी ठीक कर दिया गुरुदेव आज पूरे गांव के लोग सोचते हैं कि ये बट वृक्ष में कुछ है मैं सत्य कहता हूं ट वृक्ष में कुछ नहीं शिव महापुराण में सब कुछ है जो कुछ है व

(2:36:27) शिव जो कुछ है वो शंकर का [संगीत] एक विश्वास अपने भीतर प्रकट करिए तारकासुर ने क्या मांगा तारकासुर ने केवल अगर मरू तो शंकर के पुत्र के कभी एकांत में बैठो शिव के पास कभी एकांत में बैठो शंकर के पास मेरे ओ घड़ दनी के पास और वहां बैठकर उससे मन की बात करिए हृदय की बात करिए अपने चिंत की बात [संगीत] करें थोड़ा उससे मिलन की बात करें और मेरे भोले तेरा

(2:37:33) सहारा है मेरे भोले तेरा सहारा है मेरी नैया कात बिना रा है मेरी नैया का तू किनारा है मेरे बाबा तुझे पुकारा है मेरे बाबा तुझे पुकारा है मेरी नैया का तू पना है मेरी नैया का तू किनारा तार का सुर का भगवान सदानंद कार्तिक के संघार करने के लिए चले तार का सु पर मां ने कह दिया इस तार का सुर को तू

(2:38:42) मारने के लिए जा रहा है पर तार का सुर के हृदय में बांड ना लगे तार कासर के हृदय में बांड ना लगे त जिसे मारने जा रहा है ना उसके हृदय में बांड लग क्यों क्योंकि उसके दिल में शिव बसा है एक बात अपने अंदर उतार कर रख लो शिव भक्ति करने वाले का कभी जिंदगी में दिल मत दुखाओ कभी शंकर की भक्ति करने वाले का कभी दिल हमारा निवेदन है जितनी कथा सुनने के लिए यहां से लेकर पीछे तक एक दो तीन डूम में पंडाल में और बाहर पेड़ों की छाव में दुकानों की छाव में जो लोग बैठे हुए आप सब शंकर के भक्त आपके भीतर शुभ है आपसे भी निवेदन है यहां से जाया करो तो

(2:39:53) श्री शिवाय नमस्तुभयम आओ तो श्री शिवाय नमस्तुभयम कथा सुनने बैठो तब श्री शिवाय नमस्तुभयम बोलकर बाबा से विनय करकर दिल से जाया करो आज [संगीत] अ [प्रशंसा] [संगीत] बा बोल श्री शिवाय

(2:41:10) [प्रशंसा] [संगीत] एक शिव तत्व अपने [संगीत] भी छत्तीसगढ़ी भाषा में उन्होंने बहुत अच्छी एक बात बोली बाबा येय जल से बोलत रवा ऐसा कुछ बोला अब हमें तो थोड़ा कम संपट पड़ा पर शिव कृपा से हम तो यही कहेंगे कि जो जिस भाव से कथा श्रवण करने के लिए आया है भोलेनाथ उसके मन के मनोरथ पूर्ण करना सबकी झोली खुश सबकी झोली आश्रित शिव के आश तार कसर को मारना पर उसके हृदय में बाण ना लगे उसके दिल में शिव बसा और जिसके हृदय में शंकर बसा हो उसका

(2:42:18) हृदय ना तो खाया [संगीत] जाए तार का सुर के बाण तो छोड़े गए पर भगवान सदानंद कार्तिक ने उसके हृदय को बांड नहीं दिया हृदय में बा प्राण छोड़ तीन पुत्र है कारका विदुम माली कमला तीनों ने ब्रह्मा जी से र प्राप्त करा मरे तो एक साथ तीन पुरिया बना दीजिए तीन महल तीन नगर बसा [संगीत] दीजिए तीन अलग अलग नगर में तीनों रह रहे थे तीन परियों में तीनों रह रहे थे मरे तो एक साथ मरे यह विचार भगवान से र मांग लिया समय आया तीनों ने उपद्रव मचाया शंकर जी के पास सूचना गई बाबा कुछ

(2:43:23) करुणा कुछ कृपा कर तारका विदुम माली कमला शिव जी ने कहा कि यह मरेंगे तो एक साथ मरेंगे और यह तीनों इकट्ठे ही नहीं होते एक जगह पर आते ही नहीं है एक जगह पर एक ग्रत ही नहीं होते कितनी सुंदर बात लिखी है शिव पुराण में कि यह तीनों इकट्ठे होंगे तो ही तो [संगीत] जागे बादाम देखिए आप लोगों ने बोलो तो खाइए बादाम को पानी में डालकर रख दो उसका छिलका अपने आप गल जाता है और निकल जाता है हाथ लगाओगे छिलका

(2:44:27) निकल बादाम को पानी में गला करर रखोगे तो छिलका निकल जाता है और इस मन को शिव महापुराण की वाणी में गला कर रखोगे तो अहंकार का छिलका निकल [संगीत] जाता अभिमान का छिलका निकालने के लिए इस मन को चि को शंकर की शिव महापुराण रूपी वाणी में थोड़ा गला पड़ेगा शिव महापुराण की थोड़ी वाणी में गला और शंकर भगवान किस वाणी में जब य गलेगा शिव महापुराण की वाणी में जब गलेगा तो यह भीतर का हम भीतर की अभिम भीतर का अहंकार निकल [संगीत] तारका विदुम माली कमला की तीनों ने उपद्रव मचाया देवताओं ने कह

(2:45:31) दिया सारे देवता पशु बन जाओ भगवान शंकर ने कहा मैं तुम्हारा पति बन जाता हूं सारे देवता पशु बन गए शिवजी उनके पति बन गए शंकर का नाम हो गया पशुपति नाथ पशु दौड़ दौड़ कर तीनों को इकट्ठा कर दिए शंकर भगवान ने त्रिशूल लेकर तीनों को मारने की आत रखी जो तारका विदुम माली को मारा कम लक्ष के नीचे से निकल गया नीचे से निकला फरसा उठाया शंकर भगवान ने बड़े नंदी के रूप में थे उनका गला काट दिया गला कटा शीश कट करर गिरा है नेपाल में धड़ गिरा केदार में जो शीष नेपाल में गिरा तो पशुपति नाथ केलाया केदार में जैसे ही धड़ गिरा केदारेश्वर महादेव कहलाए शंकर

(2:46:13) भगवान समझ गई अगर आज नहीं मरा तो फिर नहीं मरेगा शिवजी ने उसी समय असली स् ार करा ल उठाया और तीनों का सार कर दिया देवताओं ने पुष्पों की वृष्टि कर दी गंधर्व गान कर दिए अब सरान कर चारों तरफ समाहित चार तीन चीज है तीन पहले नंबर पर है पाशुपत अस्त्र दूसरे नंबर पर है पाशुपत योग और नंबर पर है पशुपति व्रत आप में और हम में इतना बल नहीं है कि हम शंकर जी का पशुपति अस्त्र लेकर आ ये हम में बल पशुपति अस्त्र राम जी को मिला था पशुपति अस्त्र भगवान कृष्ण को मिला था हमारी सामर्थ नहीं कि हमारे पास में पशुपति अस्त्र जाए पाशुपत योग भी हम कर

(2:47:18) पाए ये हमारी समर्थ नहीं हो सकती पर एक चीज है शिव महापुराण की पशुपति व्रत जिस व्रत को अगर हम करते हैं तो पशुपति का व्रत करने के बाद मेरा बाबा आपकी झोली खुशियों से भरता ही है भरता कितने व्रत होते हैं जम के बोलो जरा पांच व्रत बीच में छूट भी जाए तो गिनती में पाच ही लेना कहीं जाना पड़ जाए वापस आओ एक मंदिर के अंदर जिस मंदिर में पहला व्रत होगा उसी मंदिर में पांचों व्रत होंगे छह दिए लेकर जाओ सुबरे बाबा की पूजन कर कर आओ पूजन कर कर थाली को वापस रख दो उसी थाली को शाम को लेकर जाओ उसी थाली में छे दिए मीठा का प्रसाद हिस्से करने के लिए कोई

(2:48:10) दोना या कोई प्लेट जो भी आप ले जा सकते हो वो बाबा के मंदिर में पहुंचकर छही दिए जमीन पर रखकर बाबा की पूजन करो दिए प्रज्वलित कर करो पांच दिए प्रज्वलित करिए जलाइज के बाद प्रसाद के तीन हिस्से कर दीजिए दो हिस्से मंदिर में छोड़ दो एक हिस्सा थाली में रख लो एक दिया जो जला नहीं है उसको भी थाली में रख लो और बड़े प्रेम से बाबा का प्रसाद दिया लेकर घर की ओर चलिए घर में प्रवेश करते समय राइट में सीधे हाथ की ओर बैठ जाओ घर की ओर मुख कर लो जो छठे नंबर का दिया है वो वहीं पर जला दो प्रज्वलित कर दो बाबा को विनती करो बाबा मैंने तेरा पशुपति नाथ का व्रत किया

(2:48:55) है तो इसको स्वीकार कर लेना हे शिव तुम इसे स्वीकार करना मेरे मन के मनोरथ को पूर्ण करना बाबा से विनती करो विनय कर कर घर के अंदर जाओ शाम को जब भोजन करो सबसे पहले जो प्रसाद है वो खाओ फिर भोजन ऐसे पांच व्रत पूर्ण करिए पांच व्रत के दिन 108 चावल का दाना या पत्ती बेलपत्र या पुष्प जो बाबा को दे सकते हो श्री फल भेट के साथ बाबा को समर्पित करो जैसा व्रत करा है वैसा की वैसे ही करो बाबा से विनय करो निवेदन करो बाबा उस व्रत को स्वीकार करेंगे और झोली खुशियों से जरूर भरेंगे हर हर महादव पशुपति [संगीत] आगे समय आया भगवान श्री गणेश जी महाराज का

(2:49:53) मंगल विवाह रिद्धि सिद्धि के साथ पक्का हुआ भगवान श्री गणेश जी महाराज ि सिद्धि को लेकर पधार रहे हैं कल कथा का समय सुबह ठ बजे से रहेगा कथा स्थल पर टीवी पर कथा का समय दोपहर में एक बजे से 4 बजे तक ही रहेगा और आगामी कथाएं 26 तारीख से 2 अक्टूबर तक कथा 26 सितंबर से दो अक्टूबर त नंदगांव नासिक जिला दोपहर में उस कथा का समय एक बजे से 4 बजे तक रहेगा भाव से आपको हम कथा का लाभ लेंगे हर हर जय जय शी राधे रिद्धि सिद्धि भगवान श्री गणेश जी महाराज के गले में जय माला पिना रही है जोरदार ताली बजाकर स्वागत करिए अब भगवान श्री गणेश रिद्धि सिद्धि के

(2:50:45) गले में जय माला पिना रहे हैं रिद्धि सिद्धि ने वही जय माला निकाल करर वापस श्री गणेश जी महाराज के गले में [संगीत] पहनाए गणेश जी महाराज ने अपने दोनों हस्त कमल ि सिद्धि के कंधे पर रखा है जोरदार ताली बजाकर स्वागत कर हर ह जय जय श्री राधे सभी भक्तों को हर हर महादेव सादा जय श्री कृष्णा श्री शिवाय नमोस्तु व्यासपीठ को नमन करते हुए हम सबके प्रिय हम सबके लाड़ले ठाकुर जी महाराज के चरणों में नमन करते हुए परम सदे परम आद विश्व विख्यात पूज्य गुरुदेव के पावन चरणों को नमन करते हुए और आप सभी शिव भक्तों के चरणों में नमन करते हुए सुंदर

(2:51:25) आज हम सभी ने चतुर्थ दिवस की कथा श्रवण करी कल पंचम दिवस की कथा आप सभी को ज्ञात है कथा सुबह 8 बजे से 11 बजे तक यह काटा कुड़ी डी कुकरेल धमतरी छत्तीसगढ़ की पावन धारा पर होगी और इसी कथा का प्रसारण दोपहर 1 बजे से 4:00 बजे तक हम सभी आस्था चैनल के माध्यम से श्रवण करेंगे सुंदर आरती का समय हो चुका है आरती में जिन भक्तों के नाम मंच से लिए जाएंगे वे अति शीघ्र मंच पर पधारे पंडित राजेश जी शर्मा धमतरी छत्तीसगढ़ से बड़े ही आदर और सम्मान से मंच में पधारे भानु जी चंद्राकर गुरु छत्तीसगढ़ से बड़े ही आदर और सम्मान से मंच प पधारे कूब लाल जी ध्रुव विकास जी

(2:52:07) शर्मा बड़े ही आदर और सम्मान से मंच प पधारे श्रीमती जनेश्वर जी मरकाम श्री सुबोध जी राठी श्री मेघराज जी ठाकुर श्री अमित जी अग्रवाल श्री हर्षा जी साहू यशवंत जी साहू रोशन लाल जी छाया जी साहू मनीष गिरी जी गोस्वामी सरिता जी गोस्वामी धनेश कुमार देव सिंह जी जी नागवंशी संजय कविता जी वनवासी लाल बहादुर कांतिलाल जी साहू मनक राम जी साहू हरवंश जी साहू और साथ में निवेदन रहेगा आदरणीय छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव जी साहे जी की धर्म पत्नी श्रीमती कौशल्या देवी जी साहिब बड़े ही आदर और सम्मान से बज पधारे साथ में आदरणीय

(2:52:56) किसी मंत्री श्री नेताम जी बड़े ही आदर और सम्मान से भज पर पधारे व्यासपीठ का सुंदर आर्थिक आनंद हम सभी मिलकर लेंगे जय जय श्री राधे हर हर महादेव श्री शिवाय नमस्तुभयम प्रेस क्लब के सभी प्रेस क्लब के सभी रिपोर्टर से मेरा निवेदन रहेगा आप भी मंच पर पधारें और सुंदर आरती का आनंद लेंगे जय जय श्री राधे हर हर महादेव श्री शिवाय नमतु अनुमान गलत हो सकता है परंतु


Comments

Popular posts from this blog

विभीषण की पुत्री त्रिजटा

प्रदीप मिश्रा के शिव पुराण के उपाय और टोटके | 2 |

जानिये क्यों शास्त्रों में वर्जित है शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण करना?