Day - 03 ll श्री शिव महापुराण कथा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll धमतरी, छत्तीसगढ़

Day - 03 ll श्री शिव महापुराण कथा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll धमतरी, छत्तीसगढ़ - 

 महानदी जिसको छत्तीसगढ़ की काशी कहा जाता है ऐसी पवित्र भूमि पर छत्तीसगढ़ का भगवान श्री राम जी का यह पवित्र राम पथ गवन वन मार्ग संपूर्ण वनवासी क्षेत्रवासी जहां पर भगवान श्री राम जी महाराज मां जानकी भैया श्री लक्ष्मण जी महाराज जी के साथ में बड़े स्मरण शिव का करते करते यहां से लंका की ओर गए जिस पवित्र भूमि पर भगवान राम जी के चरण पड़े हो जिस पवित्र भूमि पर मां जानकी जी के चरण पड़े हो जिस पवित्र भूमि पर शेषनाग के अवतार श्री लखन लाल जी के चरण पड़े [संगीत] ऐसी पवित्र भूमि पवित्र धरा कांटा कुही की इस भूमि पर धमतरी जिले में आप और हम सभी मिलकर भगवान शिव की पवित्र कथा का लाभ ले रहे हैं कथा के मुख्य यजमान के रूप में तो समस्त क्षेत्रवासी है स्वयं रुद्रेश्वर महादेव है एवं कथा के मुख्य यजमान के रूप में श्री दिनेश चंद्र प्रभा देवांगन श्री दीपक लाखोटिया जी श्री कोमल तुलसी पटेल जी श्री रोहित मरकाम जी श्री सुरेश सिन्हा जी इस कथा के मुख्य मान पद ग्रहण करे हैं एक बार यजमान परिवार के लिए जोरदार ताली बजाकर स्वागत वंदन अभिनंदन 


श्राद्ध पक्ष पितृ पक्ष की यह पवित्र कथा जिसमें केवल एक देवा महादेव ही [संगीत] नहीं पितृ देव और महादेव इन दोनों का आशीर्वाद आप और हमको मिल रहा है और दोनों के आशीर्वाद मिलता है।

 से यह कथा आज यहां अपने पांच दिवसीय क्रम में से तृतीय दिवसी क्रम में पहुंच रहे बड़ा आस विश्वास भगवान शंकर के प्रति आप लोग लेकर जितना



शिवजी की बेटी अशोक सुंदरी इतनी सुंदर थी अशोक सुंदरी कि उनकी सुंदरता का वर्णन कई शास्त्रों में मिल जाता है अशोक सुंदरी बहुत सुंदर बहुत [संगीत] एक असुर राक्षस ने अशोक सुंदरी को देख बड़ी सुंदर थी देख और अशोक सुंदर जी से कहा कि मैं तुमसे विवाह करना चाहता असुर कह रहा है राक्षस कह रहा मैं तुमसे विवाह करना चाहता हूं अशोक सुंदरी ने हाथ जोड़कर असुर से कहा कि देखो मैं अपने माता पिता के बिना किसी अन्य वर को अन्य पुरुष को अन्य व्यक्ति को मैं देख नहीं सक उस असुर ने कहा कि तुम इस वन में घूम रही हो तुम अपना कार्य कर रही हो वन में घूम रही हो तुम इस कार्य में लगी हो तुम उस कार्य में लगी हो अशोक सुंदरी ने जो शब्द कहा भारत की भूमि की एक एक बेटी से मुझे वह शब्द चाहिए अशोक सुंदरी ने अपना शब्द कहा सुन असुर भारत में जन्म लेने वाली एक एक बेटी पड़ेगी भारत में जन्म लेने वाली एक एक 

बेटी आगे बढ़ेगी भारत में जन्म लेने वाली एक एक बेटी नौकरी भी करेगी पर भारत में जन्म लेने वाली बेटी आज संकल्प करती है कि शादी अपने मां बाप की इच्छा से करे किसी दूसरे धर्म में प्रवेश करकर या दूसरे धर्म के लोभ में या दूसरे धर्म के दिखावे में मैं नहीं जा सकते [संगीत] मैं दूसरे धर्म के दिखावे में नहीं जाऊंगी मैं दूसरे धर्म के लोभ में नहीं जाऊंगी मैं दूसरे धर्म के चक्कर में इधर उधर भ्रमण करने के लिए नहीं जाऊंगी मैं दूसरे धर्म में प्रवेश [संगीत] नहीं अशोक सुंदरी जैसी प्रबलता चाहिए शंकर भगवान के बेटी जैसी प्रबलता चाहिए [संगीत]

(59:30) भगवान शिव जैसा बल चाहिए मां पार्वती जैसा बल चाहिए और जब बल अपने भीतर बढ़ता है ना तो दुनिया के लोग कापते हैं नियत सही रखी नीति सही रखी और नजर से आप में से कई लोग ऐसे हैं कई माताएं ऐसी हैं कई मेरे जीजिया बैठी हैं कई मेरे जीजा बैठे हैं कई मेरी बेटियां बैठी हैं कई मेरे बेटा बैठे हैं मैं अपनी बेटियों को अपने बेटा को मेरी जीज हों को मेरे जीजा को मेरी माताओं को धन्यवाद देता हूं कि आप लाखों की संख्या में आए हो पंडालों में जगह नहीं है धूप में बैठे हुए हो छाता लगा लगा बैठे हो पेड़ के नीचे बैठे हो जहां तुमको जगह मिल जाए तुम वहां बैठे हो

(1:00:33) आपसे केवल इतना सा निवेदन है कि यहां जितनी मेरी जीजिया बैठी है जितने मेरे जीजा बैठे हैं जितनी मेरी बेटियां बैठी है जितने मेरे बेटा बैठे हैं जैसे तुमने आज तक अपना नियम अपनी नियत अपनी नीति और अपनी नजर जैसे आज तक रखी है शंकर के प्रति शिवालय में जाना शंकर को जल चढ़ाना बाकी के कोई फालतू प्रपंच में नहीं पड़ना शिवजी के मंदिर जाना झाड़ू लगाना कोई फालतू प्रपंच में नहीं पढ़ना स्कूल जाना अपनी विद्या अध्ययन करना कोई फालतू प्रपंच में नहीं पढ़ना नौकरी पर जाना अपना कार्य करना कोई फालतू प्रपंच में नहीं पड़ना ऐसा हमेशा के लिए बना कर हमें अपना लक्ष्य

(1:01:22) चुनना हमें अपना कार्य करना हमें अपने लक्ष्य से दूर नहीं होना हम अपने लक्ष्य से जिस दिन दूर हो जाएंगे उस दिन हमारे लक्ष्य तक नहीं पहुच पाए य जितने बेटे बैठे हैं ना और जितनी बेटियां बैठी हैं उनसे निवेदन करूंगा अपनी मेहनत को इतना बढ़ा लो अपने कर्म को इतना बढ़ा लो जिस विद्या अध्यन को कर रहे हो उसको चोग ना बढ़ा लो इतना पढ़ो इतना पढ़ो कि तुमने जो सोचा है और तुम्हारे मां बाप ने जो सोचा है उन स्वपन पूरा [संगीत] हो कैसे होगा तीन चीजें य कथा में चल रही है एक अपना नियत पक्की रखना व कहते हैं ना तीन चीजें [संगीत]

(1:02:28) बहुत खतरनाक होती है आज आप लोग सब तीन चीज के पीछे पड़े गुरुजी तीन चीजें बड़ी खतरनाक होती है पहले नंबर पर शनि दूसरे नंबर पर मनि और तीसरे नंबर पर दुश्मनी कुंडली में शनि गड़बड़ कर जाता है मन में मनी गड़बड़ कर जाती है और जीवन में दुश्मनी गड़बड़ कर जाती [संगीत] [प्रशंसा] है शनि कुंडली में अगर आके बैठ गया तो व गड़बड़ करेगा ही शनि कुंडली में आकर बैठ गया तो व तकलीफ देगा ही मनी बाहर रहे मन में मनी पैसा जिस दिन मन में आकर बैठ गया ना मनी जिस दिन तुम्हारे दिल में आकर ब मनी जिस दिन तुम्हारे हृदय में आकर बैठ गई तो तुम्ह बर्बाद कर कर ही

(1:03:31) छोड़े बर्बाद कर कर ही छोड़े और तीसरे नंबर पर है दुश्मनी दुश्मनी बाहर रखो थोड़ी प्रेम के वश रखो समाप्त करो शनि मनि और जम जम के बोलो जरा थ शनि कुंडली में आएगा तो तकलीफ देगा मनि अगर मन में आकर बैठ गई लक्ष्मी तुम्हारे मन में आकर बैठ गई इसलिए कहते हैं लक्ष्मी को धन को तिजोरी में रखो लक्ष्मी को धन को लाकर में रखो लक्ष्मी को धन को आपके घर की अलमारी में रखो लक्ष्मी और धन को मनी को दिल में मत आने दो पैसा जिस दिन तुम्हारे मन में आकर बैठ जाता है उस दिन व्यक्ति को पागल कर देता है पैसा जिस दिन तुम्हारे मन में आकर बैठ जाता है उस दिन से तुम्हें

(1:04:26) नींद आना बंद हो जाती है पैसा जिस दिन तुम्हारे मन में आकर बैठ जाता है उस दिन से तुम्हारी जिंदगी नरक सी हो जाती है क्योंकि तुमको सोच ही नहीं पाते केवल लक्ष्मी मनि मनि मनि धन धन धन को सोच र शनि मनि और जम के जम के बोलो जरा दुश्मनी बचने का प्रयास करिएगा दुश्मनी जीवन में ना हो समुख में ना हो तुम्हारी देवरानी से तुम्हारी जेठानी से तुम्हारे रिश्तेदार से तुम्हारे नातेदार से तुम्हारे कुटुंब से तुम्हारे परिवार से तुम्हारे नगर में तुम्हारे क्षेत्र में सब जगह पर तुम्हारा प्रेम जागृत होना [संगीत] चाहिए प्रेम जागृत होना चाहिए जब

(1:05:14) [संगीत] हम जब हम इस गांव में कथा करने के लिए आ रहे थे [संगीत] तो आते आते हमको वहां सिहोर में सूचना मिली कि कथा जो लिए हैं तो कहा कि गांव के लोग नगर के लोग सहयोग नहीं करे तो हमने समीर जी से कहा कि दुनिया में ऐसा कोई गांव नहीं और दुनिया में ऐसा कोई नगर नहीं कि वह धर्म के कार्य में कभी सहयोग ना करता [संगीत] धर्म के कार्य में सहयोग ना करता हो दुनिया में ऐसा कोई गांव नहीं है और ऐसा कोई नगर नहीं है बस हमारा इतना सा कहना है कि उस व्यक्ति से कहो कि अपने दिल में मनी को ना घुसे मनी अगर दिल में है तो तेरी जिंदगी बर्बाद कर देगी अगर मनी तुझे भगवान

(1:06:13) ने दी है तो उसको सत्कर्म में सत्कर्म की पूंजी को लगाने का प्रयास करे तो जिंदगी को आनंदमय कर और आज हो क्या रहा है कांटा को का धमतरी जिले का एक एक बच्चा एक एक व्यक्ति इस छोटे से गांव की कथा को सफल बनाने का अथक प्रयास कर रहा है अथक प्रयास कर रहा है एक एक बच्चा लगा है गांव का एक एक छोटे से छोटा बच्चा एक एक बहन एक एक जीजी इस कथा को सफल बनाने का प्रयास कर रही कि हमारे गांव की कथा है हमारे नगर की कथा एक एक क्षेत्र का व्यक्ति पू जिले का व्यक्ति इस कथा को सफल बनाने में लगा हुआ जो इस कथा से नहीं भी जुड़े थे वो भी अब खड़े होकर इस कथा को सफल बनाने का

(1:07:05) प्रयास कर रहे हैं कि कैसे भी यह कथा किसी भी रूप में सफल हो जाए सफल मनी पैसा मन में मत आने दो अगर यह मनी य पैसा तुम्हारे मन में आ गया तो ये तुम्हारी जिंदगी को बर्बाद कर देगा [संगीत] भीतर शिव भक्ति को शंकर की भक्ति और जिसके हृदय [संगीत] में देखो यह शरीर है इस शरीर का कोई ठिकाना नहीं होता आज चल रहा है कल चले ना चल आज मन लगा है कल लगे ना लगे कल लगे ना

(1:08:12) लगे पूरी जिंदगी ऐसे ही निकल जाती है बचपन होमवर्क में निकल जाता है बोलो बोलो जम के बोलो बचपन जम के बोलो जरा होमवर्क में निकल जाता जम के बोलो जरा बचपन होमवर्क में निकल जाता है जवानी होम लोन में निकल जाती है और बुढ़ापा अलोम और विलोम में निकल जाता [संगीत] है हो गया जिंदगी पूरी समाप्त हो गई जिंदगी पूरा बचपन निकल गया होमवर्क कर होमवर्क कर होमवर्क कर मां कूटे बाप कटे सब कटे होमवर्क कर होमवर्क होमवर्क बचपन निकल गया जवानी आ गई मकान बनाना है क्या करना है होम लोन ले लो होम

(1:09:17) लोन ले लिया कर्जा चुका कर्जा चुका करजा करजा करजा आखरी में मर जा चुका चुका के मर गए जिस फ्लेट को लोन से खरीदा था उसी में लेट गया उसी में लेट गया बचपन में होमवर्क जवानी में बोलो बोलो जमके होम लोन और बुढ़ापे में अलोम और विलोम और फिर जिंदगी समान छोटा सा जीवन दो चुटकी में [संगीत] चला और फिर आखरी में हुआ क्या परमात्मा के पास गए तो उससे बोला क्यों रे नीचे गया था क्या करा तो क्या करा ना नीचे मैंने होमवर्क करा होम लोन करा फिर अलोम और विलोम फिर क्या करा [संगीत]

(1:10:29) हम तेरी दुनिया में आके ग हम तेरी दुनिया में आके खो गए करना पाए शिव भजन और सो गए कर ना पाए शिव भजन और सो गए हम तेरी दुनिया में आके खो गए हम तेरी दुनिया में आके खो गए कर ना पाए हरि भजन और सो

(1:11:37) गए कर ना पाए शिव भजन और सो हमारा पूरा जीवन हमने ऐसे ही खो पूरा [संगीत] शिव कथा कह रही है भगवान शंकर का चरित्र इस शरीर को इस मन को इस चित्त को व्यर्थ मत जाने जो आज मिला समय वापस नहीं मिल हीरे का हार डबल से खरीद सकते हो सोने का हार डबल से खरीद सकते हो गाड़ी बार-बार खरीद सकते हो मकान बार-बार बना सकते हो जमीन दोबारा मंगा सकते हो कपड़े दोबारा

(1:12:43) मिल सकते हैं शरीर मिल सकता है दोबारा पर जो समय तुम्हारा चले गया वो समय दोबारा नहीं मिल पाएगा उस समय को साधने का प्रयास [संगीत] वो समय नहीं [संगीत] मिलेगा उस समय की पूंजी को पहचान उस समय को जानने का प्रयास करो शंकर भगवान करते क्या शंकर का नाम क्या है उसको क्या कहते हैं उज्जैन में अवंतिका में क्या कहते हैं उसको जम के बोलो जरा महा काल जो भूत भविष्य और वर्तमान तीनों को देख रहा तीन काल उसके आधीन है वो काल अधिपति महा काल भूत भी देखे भविष्य भी देखे और वर्तमान भी देखे हम शंकर जी को जल क्यों चढ़ाते हम शंकर भगवान का भजन क्यों करते

(1:13:49) हैं क्यों सिर वाला महाराज पीछा पकड़ के बैठा हुआ है कि शंकर को एक लोटा जल चढ़ाओ एक लोटा जल चढ़ जल चढ़ा एक लोटा जल चढ़ा क्यों पीछा पकड़ के बैठा है उसका कारण है कि भूत भविष्य और वर्तमान एक लोटे जल से शंकर सवार देता है शिव सुधार देता केवल एक लोटा जल सारी समस्या का हल भूत भविष्य और वर्तमान मेरे शंकर त्रिकाल दर्शी त्र काल दर्शी का मतलब होता है तीन काल के देखने वाले हैं मेरे शिव त्रिकाल दर्शी मतलब मेरे महाकाल राजा मेरे शंभव मेरे शंकर तीन काल देख लेते हैं भूत भविष्य और वर्तमान तीनों कालों पर उसकी दृष्टि रहती है इसलिए जल चढ़ाने वाले

(1:14:46) के ऊपर मेरे शकर अपनी तीनों निगाह रखते हैं क्योंकि उसके तीन नेत्र है वो भूतकाल वो भविष्य काल वो वर्तमान काल सब देख रहा है उसको मालूम है इसका पुराना समय कैसे बीता उसको मालूम है इसकी पुरानी जिंदगी कैसे बीती इसने कितना पाप करा कितना पुण्य करा कितना सत्कर्म करा क्या करा उसको मालूम है उसने भूतकाल देख लिया उसने भविष्य आगे का भी देख कर रखा उसने कि इसका जीवन क्या है इसको कितना दुख मिलेगा कितनी तकलीफ मिलेगी कितना गाड़ी मिलेगा कितना बंगला मिलेगा क्या सुख मिलेगा उसने ये भी देख कर रखा है वर्तमान में इसके साथ क्या हो रहा है वो भी उसने देख कर रखा है इसलिए

(1:15:21) शिव महापुराण की कथा कहती है भगवान शंकर की कथा कहती है है वेदव्यास जी कहते हैं शिव पुराण में एक लोटा जल जब हम चढ़ाते हैं शंकर के तीन नेत्र हमारा भूत भविष्य और वर्तमान सवार देते हैं हमारा जीवन समार देते हैं उसको काल अधिपति महाकाल कहते हैं जो कालों को भी साध कर चलता [संगीत] है उसको काल अधिपति महाकाल कहते हैं वो अवंति का नरेश है वो उज्जैन का नरेश है वो उज्जैन का राजा है वो अवंति का राजा है उसको तीन काल का अधिपति महाकाल कहते हैं क्योंकि भूत भविष्य और वर्तमान मेरे काल अधिपति महाकाल के हाथ में है जो जान गया काल अधिपति को वो जान

(1:16:09) गया कहीं जाओ मत जाओ पृथ्वी को खोद कर देखोगे ना कोई मूर्ति मिले ना मिले और पृथ्वी को खोदने पर पूरी पृथ्वी को खोदो तो शंकर का शिवलिंग जरूर मिलेगा क्योंकि यह भूमि उसी शिव की है और केवल भारत से मतलब नहीं कि भारत खोद कर देखिए तुम्हारी मर्जी पड़ा जिस देश को खोद कर देखोगे जमीन को जिस देश की मिट्टी को खोद कर देखोगे उसमें से शिवलिंग ही निकलेगा शंकर ही निकलेगा शिव ही प्राप्त हो और दुनिया के लोग कितना भी सनातन धर्म को नीचे दबाने का प्रयास कर ले दुनिया के लोग कितना भी हिंदू धर्म को नीचे दबाने का प्रयास कर ले यह सनातन धर्म मट्टी भी खोद

(1:17:04) दोगे तो सनातन ही निकलेगी और अगर जल भी निकालो तो सनातन ही निकलेगा और हर व्यक्ति के जीवन में सनातन धर्म ही प्रकट होता है कितना भी उसको बर्बाद करने की और सोचा अभी अभी आप लोग टीवी पर न्यूज देख रहे होंगे कि तिरुपति में तिरुमाला में तिरुपति के पवित्र मंदिर में अष्ट बैकुंठ में से एक बैकुंठ है तिरुपति बालाजी भू बैकुंठ में से पृथ्वी पर आठ बैकुंठ में से एक बैकुंठ माना जाता है तिरुपति बालाजी को अष्ट बैकुंठ में से एक बैकुंठ तिरुपति बाला जीी के उस मंदिर में केवल उसका अधिपति बनाकर उस ट्रस्ट का अधिपति बनाकर एक क्रश्न को बिठा दिया और

(1:17:51) उसने क्या करा कि लड्डू जो प्रसादम बनता है है उस प्रसादम में देखा जाए तो उसमें कहीं मछली का तेल कहीं बीर ना जाने क्या क्या उसमें डाल दिया गया और आज पूरे भारत में बबल मचा हुआ है क्या होगा ज्यादा से ज्यादा उसको कुर्सी से उतार दोगे क्या होगा ज्यादा से ज्यादा उसको नीचे पटक दोगे क्या होगा ज्यादा से ज्यादा उसको सजा दे दोगे क्या सजा जो आज पूरा सनातन धर्म का व्यक्ति भारत की भूमि का एक एक व्यक्ति तिरुपति दर्शन करने जाता है तो लड्डू लाता है घर के लोगों को देता है बच्चा बच्चा खाता है जिसके घर में कभी एक अंश मात्र भी गंदा

(1:18:31) सामान नहीं आया जो परम भगवती वैष्णव थे उनका भी वैष्णव धर्म नष्ट कर दिया उसने कुर्सी पर बैठ उनका भी सनातन धर्म भ्रष्ट कर दिया उसने कुर्सी पर बैठ [संगीत] कर इसीलिए सनातन धर्म बार-बार कहता है कि मंदिर बड़े बनाना तो उसके साथ में गौशाला चार चोगी बड़ी बनाना क्यों क्योंकि अगर मंदिर की गौशाला होती मंदिर की गौशाला एं होंगी बड़ी-बड़ी गौशाला एं होंगी तो मंदिर में जो गाय माता का दूध आएगा उस गाय के दूध से घी बनेगा घी बनेगा तो कितना भी लड्डू बना लो उसमें गाय का घी टलता रहेगा आपसे भी निवेदन है अपने मोहल्ले में अपने नगर में बड़ी-बड़ी गौशाला बनाने से

(1:19:18) अच्छा है तुम्हारी जो सोसाइटी है तुम्हारी जो कॉलोनी है उस कॉलोनी में कितने लोग रहते हैं तुम्हारी कॉलोनी में 25 लोग रहते हैं तुम्हारे घर में जगह नहीं है गाय रखने की तुम्हारे घर में जगह नहीं है गौ माता रखने की तुम्हारी कॉलोनी में 25 लोग रहते हैं तो एक जगह अलग से प्लाट किराए से लो उसमें टीन लगाओ और उसमें 25 घर हैं तो 25 घर की 25 गाय एक छोटी सी कॉलोनी में रखिए उन 25 गाय का पालन करो पोषण करो एक व्यक्ति लगा लो तनखा दो सब कुछ करो और 25 गाय का जो दूध आए वो 25 घर में जाए 25 गाय का दूध 25 घर में जाएगा घी असली मिलेगा तुम्हें गाय का दूध असली मिलेगा गाय का

(1:19:55) गोबर असली मिलेगा और गौमूत्र असली मिलेगा और गाय की सेवा असली मिलेगी तो हमारा भारत भी सब रेगा और हमारा राष्ट्र का उत्थान भी होगा ये भारत भी सब रहेगा और राष्ट्र का उत्थान होगा गौ माता को तो पीछे हटा दिया गौ माता को तो दूर कर दिया क्या होगा आज तिरुपति में जो लड्डू में मिलाया गया वैष्णव परिवारों का जो धर्म नष्ट कर दिया गया क्या [संगीत] हो बड़े बड़े मठ मंदिरों से इन अधर्म हों को नीचे उतार दो और किसी सनातन धर्म का विद्वान को उस पीठ पर बिठा तब राष्ट्र का उत्थान हो तब राष्ट्र का उत्थान होगा क्या देख रहा

(1:20:59) है क्या क्या होने वाला है उनका उतार दोगे कुर्सी से नीचे पटक दोगे नीचे सजा भी दे दोगे थोड़ी बहुत क्या देगे क्या सजा दोगे इतने सारे भारतीयों का दिल दुखाया उसकी क्या सजा हो सकती है इतने सारे सनातनी का दिल दुखाया उसकी क्या सजा हो सकती है केवल कुर्सी से उतार दोगे केवल नीचे उतार दोगे केवल थोड़ी बहुत सजा दे दोगे क्या सजा हो सक उसकी केवल एक मूल सबसे मूल एक ही चीज हो सकता है कि आने वाले समय में सनातन धर्म को रक्षा करने के लिए सनातन धर्म का रक्षा का एक बोर्ड बनाया जाए जिससे सनातन धर्म की रक्षा हो जाए और पूरा मठ मंदिर सब सनातन धर्म की रक्षा के

(1:22:01) अंतर्गत उसको समारो उसको [संगीत] सुधार कितना प्रसन्नता का भाव है आप लोग यहां आते हो शिव तत्व को ग्रहण करने के लिए शंकर की भक्ति को ग्रहण करने के लिए शिव तत्व अपने भीतर उतारने के लिए तव को अपने भीतर उतारने के लिए अपनी कुर्सी का सदुपयोग करो अपने पद का सदुपयोग करो अपनी वाणी का सदुपयोग [संगीत] करो इंदौर में परम पूज्य 8 श्री विष्णु प्रपन्नाचार्य जी महाराज छत्री बाग वाले उनके द्वारा बुधवार के [संगीत] दिन शाम को 4 बजे शायद इसी तिरुपति मंदिर का जो लड्डू प्रसादम है उसके साथ जो छेड़छाड़ करी गई है उसके साथ

(1:23:08) में एक उन्होंने सभा रखी है मेरा इंदौर वासियों से निवेदन है उनका सहयोग अवश्य मैं जगतगुरु मैं जगतगुरु शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज के चरणों को नमन करकर प्रणाम कर कर कहता हूं कि उन्होंने अपनी वाणी से जैसे ही उनको सूचना मिली और उन्होंने अपनी वाणी से कह दिया कि एक एक मठ मंदिर के प्रसाद को हम स्वयं चेक करवाएंगे और एक एक मठ और मंदिर को सनातन धर्म के अनुकूल बनाने का प्रयास करते मैं परम पूज्य जगतगुरु शंकराचार्य अभ मुक्तेश्वर नंद जी के पवित्र चरणों को नमन करता हूं जिन्होंने अपनी वाणी से शब्द को और जागो जागो तो एक बार

(1:24:07) हिंदू जागो तो तुम जागो एक बार जागने का प्रयास कर प्रयास करो जाओ शंकर के मंदिर जाओ शिवालय के मंदिर जाओ शंकर के दरवाजे पर तीन काल भगवान शंकर साधते हैं भूत भविष्य और वर्तमान मेरे शिव त्रिकाल दर्शी कहलाते हैं इसलिए उनको त्रिकाल दर्शी देवद देव महादेव त्रिलोकी का नाथ त्रिपुंड धारी त्रिनेत्र धारी त्रिशूलधारी इसलिए उसको कहते हैं कि वह तीन कालो को साध लेता है वो तीन कालो को साता [संगीत] उसको साथ जाओ रोज प्रतिदिन शंकर के मंदिर में जाइए शिवालय में जाइए एक लोटा जल

(1:25:11) चढ़ एक लोटा जल चढ़ाने से तुम्हारा भूत भविष्य और वर्तमान तीनों सुधर अभी कैसी स्थिति चल रही है क्या एक पत्र है देख [संगीत] मैं लक्षमन तीन बाई निशा बाग बाहरा बाग जिला महासमुंद छत्तीसगढ़ के निवासी पत्र को एलईडी पर पढ़ सकते हो आस्था चैनल पर पढ़ सकते मैं लक्ष्मी बंन बाई निषाद बाग बहारा जिला महासमुंद छत्तीसगढ़ की निवासी कहीं बैठी हो तो हाथ हिला सक

(1:26:19) अगर कहीं बैठी हो तो हाथ हिला स और बैठी हो तो एक बेलपत्र लेने के लिए यहां आ सकती हैं मेरी बेटी लीना निषद उम्र 28 वर्ष बचपन से मानसिक रूप से थोड़ी सी अस्वस्थ है उसे बीते 10 साल से मिर्गी का दौरा आना प्रारंभ हो गया 10 साल से उसको मिर्गी का दौरा आ रहा है मेरी बेटी परेशान हो गई हम डॉक्टरों को दिखाए डॉक्टर ने कहा इसका शरीर ऐसा है कि को मिर्गी का दोरा आएगा एक दिन में चार से पांच बार मिर्गी का दौरा एक दिन बड़ी बेटी ने कहा मां टीवी पर मेरी बड़ी बेटी ने कहा मां टीवी पर गुरु जी की कथा आती है आप कथा सुनो और शिव जी का चढ़ा जल पिलाओ गुरु जी मैंने कथा सुनना

(1:27:18) प्रारंभ किया कथा देखती थी सबके पत्र आप पढ़ते हो और सिहोर के के जल की बड़ी बड़ी बीमारी ठीक हो जाती है यह वर्णन करते गुरुजी मैंने टीवी पर ही कथा सुनते हुए खूब रोई और बाबा से मन्नत किया बाबा मेरी बेटी को ठीक कर दीजिए मैं बेटी को लेकर प्रणाम करने कुरेश्वर धाम सिहोर आऊंग मैं रुद्राक्ष लेने फरवरी 2023 में रुद्राक्ष महोत्सव में सीहोर गई लेकिन बहुत ज्यादा भीड़ होने की वजह से मुझे रुद्राक्ष नहीं मिला बहू से मिन्नत करके बाद में खाली हाथ ही लौट पड़ा उस दिन वहां से रोती हुई बाबा को बोल कर आई बाबा मुझे रुद्राक्ष तो नहीं मिला अब आगे मेरी बेटी

(1:28:06) को आप ही संभाले मैं रोज मंदिर जाती और शिवजी को जल चढ़ाकर बेलपत्र अपनी बेटी को देना प्रारंभ किया कुछ समय बाद मैं बाबा का क्या वर्णन करूं मेरी दूसरी बेटी सिहोर जाकर रुद्राक्ष लेकर आ गई और वो रुद्राक्ष मुझे दिया रुद्राक्ष को में रात को पानी में भिगो देती और सुबह शिव जी को चढ़ाकर वो जल मैंने अपनी बेटी को पिलाना प्रारंभ करा जो 10 साल से मिर्गी का दौरा उसको आ रहा था आज बाबा की कृपा से पूरा एक साल हो गया उसको मिर्गी का एक भी झटका नहीं आया जो दिन में एक दिन में तीन से चार बार मिर्गी का झटका आता था एक साल से मेरी बेटी को एक

(1:28:48) भी मिर्गी का झटका नहीं आया मैं बाबा को यहां प्रणाम करने के लिए आई हूं एक लाइन अच्छी लिखी है आप और हम सब मिलकर गुनगुनाते हैं उस लाइन को देख रहे हो आप लोग टीवी पर एलईडी पर क्या लाइन है पहले तुम चालू करो टीवी पर देखने वाले जितने एलईडी पर देख रहे आवाज यहां तक आना चाहिए क्या बोल रहे हो शुरू करो लुटा दिया कर दिया माला माल काशी वाले आपका विश्वास जिस समय पर दी हो जाए आपका भरोसा जिस समय पर दृढ़ हो जाए आपका बल जिस समय पर दी हो जाए आप शंकर को एक लोटा जल चढ़ा रहे हो व भूत भविष्य और वर्तमान तीनों को सवार [संगीत] दे शिव को चढ़ाओ जल वो बदल देगा

(1:29:50) तुम्हारा कल बदलेगा सारी सम का हल जरा जम के बोलो पीछे वालो सारी समस्या का हल बोल बम का नारा है एक उस पर आश्रित होकर च क्या देगा शिव एक पत्र और [संगीत] [प्रशंसा] हरि ओम साहू स्वर्गीय पवन कुमार साहू ग्राम बोडरा बोडरा स जिला धमतरी की निवासी कहीं बैठी हो तो हाथ हिला सकते अगर कहीं बैठे हो तो हाथ हिला सकते हैं मैं हरि ओम साहू स्वर्गीय पवन कुमार साहू ग्राम बरा जिला का निवासी कहीं बैठे

(1:30:56) हो तो हाथ ला सकते हैं एक बेलपत्र लेने के लिए व्यासपीठ के पास में आ सकते एक लोटे जल का मैं क्या महत्व वर्णन करू गुरुदेव एक लोटा जल नहीं शंकर की अविरल भक्ति है मैंने अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर ली 2016 में आप लोग पत्र को एलईडी पर टीवी पर पढ़ सकते हैं कि पत्र लिखने वाले ने क्या पत्र लिखा मैंने अपने कॉलेज की पढ़ाई 2016 में पूर्ण कर लि उसके बाद मैंने सास की नौकरी प्राप्त करने के लिए बहुत प्रयत्न किया बहुत प्रयत्न किया कई परीक्षा भी दिलाई परंतु कुछ ना कुछ कारण मुझे सास की नौकरी प्राप्त नहीं हो रही थी मेरी सास की नौकरी प्राप्त ना होने की

(1:31:39) उम्मीद से मैं टूट चुकी थी कल कथा में कहा था चाय पीने से जीवन जल जाती है तो क्या हम चाय पीना छोड़ देते हैं बोलो जम के बोलो चाय पीने से जिवान जल जाती है तो क्या हम चाय पीना छोड़ देते हैं नहीं चाय फिर पीते हैं जिवान फिर जलती है चाय फिर पीते हैं जिवान फिर जलती है पर चाय पीना नहीं छोड़ते एक दो बार अगर हार भी जाओ एक दो बार फेल भी हो गए तो चिंता मत करना फिर मेहनत करना जैसे चाय पीना नहीं छोड़ा आखरी में मंजिल तक जाना मत छोड़ो पहुच ही [संगीत] जा उम्मीद टूट चुकी थी फिर मेरी बड़ी दीदी जो कि पहले से आपके द्वारा कही गई कथाओं

(1:32:35) को श्रवण करती है एक लोटा जल का महत्व बताया मेरी बड़ी दीदी ने मुझे एक लोटा जल का महत्व बताया फिर भी उनकी बातों पर अनुसरण करते हुए वर्ष 2022 से मैंने भी भगवान शंकर के मंदिर में एक लोटा जल चढ़ाना प्रारंभ किया इससे पहले मैं शंकर के मंदिर नहीं जाती थ एक लोटा जल चढ़ाना प्रारंभ करा लगातार दो वर्षों तक 2024 तक मैंने भगवान शंकर को जल चढ़ाया जैसा आप कहते हो कि हिम्मत मत हारना एग्जाम देती रही और जल चढ़ाती रही आस्था मेरे अंदर इतनी बढ़ गई कि मैं जल चढ़ाना नहीं छोड़ी गुरुदेव कुरुद शहर जिला धमतरी में आपके द्वारा कही गई कथा को आप कहते हो कि पंडाल

(1:33:22) में बैठकर जो मागा जाता है शिव देता है मैं कुरुद गई जिला धमतरी की कथा को मैंने कुरुद शहर में बैठकर सुनी और बाबा से प्रार्थना करा अभी तक मेरी नौकरी नहीं लगी 2016 से 2024 आ गया बाबा मेरी नौकरी लगा देना बाबा ने ऐसी कृपा करी मैंने पूर्व में एक एग्जाम दिया था जिसका रिजल्ट आठ वर्ष के बाद अब आया और बाबा की कृपा से मैं शासकीय नौकरी में लग गई मैं बाबा को य धन्यवाद देने के लिए आ मैं शिव जी को धन्यवाद कहीं बैठी हो तो एक बिल पत्र लेने के लिए आ [संगीत] सक 26 जुलाई 2024 को [संगीत] मैंने पदभार ग्रहण कर लिया है मैं बाबा को यहां धन्यवाद देने के लिए आई हूं हरि ओम

(1:34:19) साहू बोडरा स जिला धम इसी को लोग कहते हैं शिव महापुराण की कथा क्यों सुनने जा इतना भीड़ होता है ट्रैफिक जाम हो जाता है गाड़िया निकलने में आधा घंटा लग जाता है हम कहते हैं आप व्यास पीठ पर गुरुजी आए उससे पहले कथा के पंडाल में पहुंचो गुरुजी जा गुरुजी जाए उसके बाद कथा का पंडाल छोड़कर जाओ आरती हो जमीन को भूमि को नमन करो रज को प्रणाम करो शिव महापुराण की कथा हमने पहले कथा में कहा था स्टेशन देखकर ट्रेन रुक जाती है बस स्टैंड देखकर बस रुक जाती है हेलीपैड देखकर हेलीकॉप्टर उतर जाता है शिव महापुराण की कथा होती देखकर मेरा

(1:35:25) महाकाल उतर जाता है चूने से बना हुआ हेलीपैड एच चूने से बना हेलीपैड देखकर हेलीकॉप्टर नीचे उतर जाता है जहां शंकर की कथा होती है उस भूमि पर मेरा काल अधिपति महाकाल राजा मेरा शिव पाच दिन के लिए भूमि पर उतर जाता है यह कथा परसों के दिन विराम हो जाएगी कल तो कथा का वही समय रहेगा एक बजे से 4 बजे तक परसों के दिन कथा का समय सुबरे 8 बजे से 11 बजे तक रहेगा 11 बजे कथा विराम हो जाएगी यहां से जाएंगे 26 तारीख को कथा नंदगांव नासिक जिला महाराष्ट्र में प्रारंभ हो जाएगी 26 सितंबर से दो अक्टूबर तक चलेगी उसके बाद कथा हापुड़ उत्तर प्रदेश में

(1:36:23) प्रारंभ हो जाएगी हापुर उत्तर प्रदेश की कथा विराम होगी उसके बाद कथा शायद 14 तारीख के लगभग में फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश में प्रारंभ हो जाएगी कथाओं का क्रम चालू है यह मान कर जाइए कथा के पंडाल में जब बैठो कथा के पंडाल में जब जाओ भले थोड़ा परिश्रम लगेगा धूप लगेगी परेशानी हो सकती है पैदल चलना जा सकता है गाड़ी से जा सकते हो गाड़ी भी ट्रैफिक में रहेगी पर ये विश्वास मानकर जाना कि मैं पंडाल में बैठकर कथा सुनू मेरा महाकाल मेरे घर में आकर विराजमान होगा और मेरा दुख जरूर काटेगा और खाली ना जाता कोई दर से तुम्हारे खाली ना जाता कोई दर से तुम्हारे

(1:37:24) भी खड़ी हूं नन्ही बाहे पसारे अपने हृदय से लगा लो लगा लो गिरा जा रहा हूं उठा लो उठालो भोले अपने दर से अब तो लो गिरी जा रही हूं उठा एक विश्वास अपने भीतर प्रकट कर एक भरोसा अपने भीतर प्रकट कर एक पत्र [संगीत] और मेरा नाम संगीता नागेश पति लोकेश नागेश

(1:38:30) गांव खुड़िया खुड़िया ही तहसील छुरा जिला गरिया बाद कि ने कहीं बैठी हो तो हाथ हिला सकती कहीं बैठी हो तो हाथ हिला सकती है अगर बैठी हो तो एक बिल पत्र लेने के लिए आ मेरा नाम संगीता नागेश पति लोकेश नागेश गांव खुड़िया तहसील छुरा जिला गरिया बाद की निवासी हूं पत्र को आप लोग एलईडी पर और टीवी पर पढ़ सकते हैं एक लोटे जल का में क्या गुणगान करूं गुरुजी मैं 2022 से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थी पर मुझे अपने आप पर विश्वास नहीं था कि मैं सरकारी नौकरी लगा पाऊ मई 2023 में मेरी एक सहेली ने बताया कि प्रदीप मिश्रा सिहोर वाले का टीवी पर मोबाइल पर उनका कथा आता है तुम

(1:39:30) कथा सुनना और एक लोटा जल शिवलिंग पर चढ़ाना मैंने उसी दिन से मोबाइल पर कथा सुनना प्रारंभ किया और एक लोटा जल शिवलिंग पर चढ़ाना प्रारंभ किया कथा सुनने के एक लोटा जल चढ़ाने के पश्चात में मन में एक अटूट विश्वास जागृत हो गया आप कहते हो भरोसा शिव पर रखो मैंने भरोसा पूरा कर लिया मेहनत चगनी करो मैंने मेहनत चगनी कर ली मात्र 15 दिन बाद जून में मेरा पेपर होने वाला था मैंने तथा के अनुसार बेलपत्र पर शहद लगाकर शिवलिंग पर चढ़ाया हमने समाज में हमारे समाज में आज तक किसी बेटी ने और ना किसी बहू ने कंपटीशन पेपर नहीं दिया था सरकारी नौकरी के लिए ना हमारी समाज की

(1:40:21) किसी बेटी ने और ना किसी बहू ने अप्लाई किया था हमारी एक समाज हम साधारण लोग गुरुजी पहली बार मैंने कंपटीशन एग्जाम दिया लोग हंस रहे थे इतने साल में नहीं हुआ तो अभी क्या होगा सितंबर 2023 में मेरा वर्ग बाबा की ऐसी कृपा हुई कि मैंने जो एग्जाम दिया और 2023 में बाबा की कृपा से मेरा वर्ग तीन में शिक्षक के पद पर मेरा सिलेक्शन हो गया मैं बाबा को य धन्यवाद देने के लिए आई हूं आज बा को प्रणाम करने के लिए पहुंची हूं गुरुदेव आपने हम जैसी बेटियों को शंकर से जोड़कर भगवान शिव के उस चरणों में ले जाकर छोड़ दिया और आज मेरी पूरी समाज गौरव महसूस करती है कि

(1:41:12) हमारी समाज की बेटी भी नौकरी कर रही है मैं प्रणाम कर शिव तत्व है इसको अगर बैठी हो संगीत का नागेश पति लोकेश नागेश गांव खुड़िया डी तहसील छुरा जिला गरिया बाद के निवासी अगर कहीं बैठी हो तो बेलपत्र लेने के लिए आ सकती [संगीत] आओ ये हरि ओम साहू की माता जी है जिनकी नौकरी लगी एक बार जोरदार ताली बजाए बहुत बहुत [प्रशंसा] [संगीत] साध शिव

(1:42:18) तत्व और मैंने तेरे ही भरोसे बाबा तेरे ही भरोसे हवा विच उड़ती जावांगी बाबा डोर ह तो छड़ना मैं कटी जाव भोले मैं तेरी पत शंभू में तेरी पतंग हवा विच उड़ती जावांगी बाबा डोर हतो छटी ना में कटी ज एक विश्वास अपने भीतर प्रकट [संगीत] कर शंकर के मंदिर रोज जा

(1:43:26) शिव की निंदा कभी मत सुनो शिव भक्त की निंदा कभी मत सुनो शिवालय रोज जाओ जल चढ़ाओ लोग हंसे हंसने दो आप शब्द कहे कहने दो जिस पर दुनिया हसती है जिस पर दुनिया ताना कसती है एक दिन वही भारत की भूमि पर राज कर कर बताता [संगीत] है जिस पर दुनिया हसती है ताना कसती है वही संसार में ऊंचा बढ़ता चले जा वही आगे बढ़ता ताना दे दे दो गाली दे देने दो अशद कने दो अश उस बेटी ने क्या [संगीत] लिखा संगीता नागेश ने लिखा है पति लोकेश नागेश ने कि लोग हसते

(1:44:31) थे हमारी समाज में आज तक किसी ने किसी बेटी ने और किसी बहू ने कोई कंपटीशन एगजाम तक नहीं [संगीत] दि पर मेरा बेटी संगीता नागेश पति श्री लोकेश जी नागेश आपको बहुत-बहुत बधाई है आपने वो कर द खाया जो आने वाली बेटियों के लिए प्रेरणा है आने वाली बेटियों के लिए प्रेरणा है तुमने वो कर दिया उसकी बधाई [संगीत] हो और अच्छा करो अगर भगवान तुमको नौकरी दे ना सबको सब अच्छे अच्छे ऊंचे ऊंचे पद पर अगर बैठ जाओ ना सब अगर अच्छे पदों पर विराजमान हो जाओ तो निवेदन है कि कुछ अच्छा करने का प्रयास करना अच्छा और मत बुरे कर्म कर बंदे वरना पछताएगा

(1:45:36) भगवान की आंखों से तू बच नहीं पाएगा तू बच नहीं पाएगा अरे ओ ज्ञानी करनानी अरे ओ अज्ञानी मत करना तेरे कर्म का फल भी तू ही पाएगा जैसा किया तूने तेरे आगे आएगा मत बरे कर्म कर बंदे वरना पछताएगा भगवान की आंखों से तू बच नहीं पाएगा तू बच नहीं

(1:46:42) पाएगा अरे ओ अज्ञानी मत करना नी अरे यो अज्ञानी मत [संगीत] करना तेरा कर्म तुझे भोगना पड़ेगा तेरा कर्म तुझे भोगना पहले भी कथा में कहा आज फिर कहते प्रॉपर्टी के हिस्सेदार बहुत सारे होंगे जमीन के हिस्सेदार बहुत सारे होंगे बहु प्रॉपर्टी के हिस्सेदार बहुत सारे होंगे जमीन के हिस्सेदार बहुत सारे होंगे तुम्हारे घर के जायजा के तुम्हारे वस्त्र आभूषण के हिस्सेदार बहुत सारे होंगे पर शिव महापुराण की कथा कहती है तुम्हारे

(1:47:50) कर्म का भोग भोगने का कोई रिश्तेदार नहीं होगा तुम्हें अकेले भोगना [संगीत] पड़ेगा अकेला भोगना पड़ेगा कोई दूसरा नहीं भोगने वाला इसलिए 16 श्राद्ध में पितृ पक्ष में सारी कथाओं में संत साधु ब्राह्मण गुरुजन संत जन तपस्वी जन साधक जन उपासक जन चिल्ला चिल्ला कर कहते हैं कि सत्कर्म करो ये 16 दिन मिले हैं दान पुण्य भजन कीर्तन करो खुश हो कि तुम्हारे हाथ का एक रुपया अगर कहीं सही जगह लग रहा है तो इतने लोग भोजन ग्रहण कर रहे [संगीत] हैं सत्कर्म में अग्रण रहो आ जाओ [संगीत] लक्षमन बाई

(1:48:59) निषद बेटी को 10 साल से मिरगी आती थी बाबा की कृपा से एक साल से मिरगी बंद हो गई यह शिव कृपा [संगीत] [प्रशंसा] शिव तत्व की प्राप्ति शंकर की प्राप्ति अगर भगवान पद दे प्रतिष्ठा दे तुम्हारे को कुर्सी दे सम्मान दे तो प्रयास करना कि शरीर से किसी का बुरा बुरा अच्छा करो खूब अच्छा

(1:50:06) करो श्रेष्ट करो बहुत श्रेष्ट कल बिठले सेवा समिति का जो अन्य क्षेत्र चल रहा है उसके पास में थोड़ा सा नजदीक में खड़े होकर कोई पूड़ी सब्जी और कोई दूसरी भी सामग्री मीठा वगैरा कोई बडवा रहा था समिति के लोगों ने आकर लिखकर सूचना दी की गुरुदेव वहां जहां अपना विले सेवा समिति का भोजन 16 सरात का चल रहा है उसी के पास में और भी लोग कोई पूड़ी सब्जी बांट रहा है कोई कुछ बांट रहा है हमने समिति के लोग से कहा उसको धन्यवाद हमारी तरफ से देना कि कम से कम उन्होने अपने धन का सदुपयोग [संगीत] कर यह 16 दिन श्राद्ध में उन्होंने अपने धन का सदुपयोग

(1:51:08) करा इस वनवासी क्षेत्र में आकर थोड़ा सा अनन भाग देकर उन्होंने यह आनंद विषय प्राप्त कर जो पानी के पाउ बाट रहे उनको धन्यवाद देना बोतल बाट उनको धन्यवाद देना जो बिस्कुट कुरकुरा बाट रहा है उसको धन्यवाद देना जो एक अंश मात्र टॉफी भी बाटे तो उसको धन्यवाद देना कि उसने अपनी पूंजी का सदुपयोग करा पूंजी का सदुपयोग [संगीत] करा और जितने आस्था चैनल पर कथा सुन रहे जितने फ पर कथा सुन रहे आपको भी धन्यवाद है आपका एक रुप अंश मात्र भी इस कथा में जो आ रहा है उसके लिए धन्यवाद आप सरात पक्ष में जो सुख आपने प्राप्त किया उसके बराबर कोई सुख किसी ना किसी रूप में आप तो जितने

(1:52:08) यहां पर कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में कोई पूड़ी सब्जी बाट रहा कोई कुछ बाट रहा कोई कुछ बाट उनको साधु था हमारी से बहुत बहुत साधु बहुत बहुत साब [संगीत] यह संगीता नागेश पति लोकेश नागेश खुड़िया ही तहसील छुरा जिला गरिया बाद जिसकी समाज में पहली बेटी है जो कि कंपटीशन एगजाम में बैठी और सरकारी नौकरी में [संगीत] रोना नहीं आंसू पूछो और खुश हो कि आपने प्रेरणा दी है बेटा भारत की एक एक समाज की बेटियों को अपने प्रेरणा द आंसू प बहुत बहुत एक बार बेटी के लिए जोरदार ताली बजाओ प्रेरणा है ये हमारे भारत की भूमि की कि

(1:53:15) हिम्मत मत हारना बेटी ने लिखा 2022 से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही हूं पर आपकी कथा ने मुझे बल दे दिया और मैं मान गई कि मेरी नौकरी लगेगी ही ये ये विश्वास आपके भीतर चाहिए बोल बम का नारा है बाबा ए बोल कुरेश्वर महादेव की जय बोल रुद्रेश्वर महादेव की जय ये हमारे भीतर का बल है जो हमें प्रकट करना अपने भीतर किसी पर आश्रित हो ना हो उस पर महात्मा पर आश्रित ई एक लोटा जल जब हम बाबा को समर्पित करते हैं तो हमारे जीवन का एक कल बदलता ही बल [संगीत]

(1:54:24) बस उससे दिल से करी गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती कभी [संगीत] दोनों हाथों [संगीत] से धीरे बजाओ भोला धीमा बजाओ धीमा बजाओ भोला धीमा बजाओ धीमा बजाओ भोला धीमा बजाओ धीमा बजाओ ना धीमा बज अरे भीमा बजाओ भोलानाथ डमरू भीमा

(1:55:30) बजाओ भीमा बजाओ भोलानाथ डमरू भीमा बजाओ धीमा बजाओ भोलानाथ डमरो धीमा बजाओ धीमा बजाओ भोलानाथ जमरू धीमा जिनके साथ अपने अपने पूर्वजों के फोटो हो पित्रों के फोटो हो वो भी दोनों हाथों से ऊपर कर कर बड़े भाव के [संगीत] [प्रशंसा] साथ हो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा]

(1:57:11) [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] बमरू की धुन सुन के ब्रह्मा जी आए डमरू की धुन सुन के ब्रह्मा जी आए डमरू की धुन सुनके ब्रह्मा जी आए जमरू की धुन सुनके ब्रह्मा जी आए ब्रह्मा जी आए संग ब्रह्मण

(1:58:18) को लाए ब्रह्मा जी आए संग ब्रह्माने कोला ी मा बजाओ भोलानाथ डमरू ीमा बजाओ धीमा बजाओ भोलानाथ डमरू धीमा बजाओ धीमा बजाओ भोलानाथ डमरू धीमा बजाओ धीमा बजाओ भोलानाथ डमरू धमा बजाओ [संगीत] [संगीत] बो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा]

(1:59:33) [संगीत] श [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]

(2:00:41) मम रूपी धुन सुन के विष्णु जी आए डमरू की धुन सुनके विष्ण जी आए ममरू की सुन के विष्णु जी आए जमरू की धुन सुनके विष्णु जी आए विष्णू जी आए संग लक्ष्मी जी को लाए विष्णू जी आए संग लक्ष्मी जी को लाए ीमा बजाओ भोलानाथ डमरू भीमा बजाओ भीमा बजाओ मोलाना डमरू भीमा बजा जाओ भीमा बजाओ भोलानाथ डमरू भीमा बजाओ भीमा बजाओ भोला धीमा बजाओ हो धीमा बजाओ भोला धीमा बजाओ धीमा बजाओ भोला धीमा बजाओ हो धीमा बजाओ भोलानाथ डमरू धीमा बजाओ धीमा बजाओ भोलाना

(2:01:53) कटम मा [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] बजाओ [संगीत] [संगीत] आ आ [संगीत]

(2:03:05) [संगीत] [हंसी] [संगीत] ज के धुन सुन को राम जी आए डमरू के धुन सुन के राम जी आए डमरू की धुन सुन के राम जी आए डमरू की संग सुन के राम जी आए राम जी आए संग सीता को लाए राम जी आए संग सीता को लाए राम जी आए संग सीता को लाए राम जी आए सख सीता को लाए अरे दीमा बजाओ

(2:04:16) भोलानाथ डमरो धीमा बजाओ धीमा बजाओ भोलानाथ डमरू भीमा बजाओ बाबा भीमा बजाओ भोलानाथ डमरू भीमा बजाओ भीमा बजाओ भोलानाथ डमरू भीमा बजाओ ओ डमरू की धुन सुन के काना जी आए डमरू की धुन सुन के काना जी आए अरे काना जी आए संग राधा को लाए काना जी आए संग राधा को लाए काना जी आए संग राधा जी को लाए ना जी आए स राधा जी को लाए अरे जाओ भोलानाथ डमरो भीमा बजाओ भीमा बजाओ भोलानाथ नम धमा बजाओ धमा बजाओ भला नाथ डमरो धीमा बजाओ धीमा बजाओ

(2:05:28) भोलानाथ डमरो धीमा बजाओ डमरु धीमा बजाओ धीमा बजाओ डमरु धीमा बजाओ डम धीमा बजाओ डमरु धीमा बजाओ डम धीमा बजाओ डमरु धीमा बजाओ डम धीमा बजाओ डम रध मा बजाओ मध मा बजाओ मध मा बजाओ हर हर [संगीत] महादेव अपने स्थान पर बैठकर भगवान शिव जी से अपने मन की बात बड़े भाव के साथ हृदय से दिल से बाबा से प्रार्थना करिए जहां जगह मिले वहां बैठकर बाबा से सब निवेदन कर श्राद्ध पक्ष है पितृ पक्ष है महादेव और पितृ

(2:06:34) देव दोनों की कृपा मिले उसके लिए दिल से बाबा से प्रार्थना करिए दिल से निवेदन करिए भाव से बाबा से विनय करि जहां जगह मिले वहां बैठकर बोलिए खड़े होकर नहीं जहां जगह मिल जाए वहां बैठकर दिल से बाबा को निवेदन करिएगा सब साथ में बोलना आनंद के साथ बाबा से प्रार्थना [संगीत] कर श्री [संगीत] शिवाय [संगीत] नमस्तय नम

(2:07:42) स्तु श्री शिवाय नमतु [संगीत] श्री शिवाय [संगीत] नमस्तय नमस सु भोला सब दुख काटो मरा हो सब दुख काटो मारा शिव शंकर जप तेरी [संगीत] माला भोले बाबा जप तेरी माला भोला सब दुख का को

(2:08:52) रा ओ भोरा सब दुख काटो तुम्हारा वेश मंगल मंगलकारी वेष है मंगल मंगल कारी शमशान वासी हमारा शमशान निवासी हमारा ओ भोला सब दुख काटो मरा ओला सब दुख काट रा भगवान देव महादेव का पवित्र चरित्र क रहा है भगवान शंकर की पावन कथा कह रही

(2:09:59) [संगीत] है ब्रह्मा [संगीत] जी जिस शिवलिंग को प्रकट किए हैं शिवलिंग की वाणी [संगीत] से ब्रह्मा जी का सिर कट जाता है स्वयं काल भैरव प्रकट होकर नक को तोड़कर ब्रह्मा जी के सिर को काट [संगीत] और सृष्टि का क्रम प्रारंभ होता सती मैया [संगीत] माता प्रसुति के गर्भ से प्रकट [संगीत]

(2:11:08) हु बाबा देवा दद महादेव के साथ में उनका मंगल विवाह हुआ पिता के घर में [संगीत] भगवान देव महादेव के रोकने पर भी ना रुकी और चली गई अपमान [संगीत] हो शिव महापुराण की कथा कती है कि ऊंचा महल बड़ा मंदिर ऊंचा महल देखा बड़ा घर देखा बहुत बड़ा बंगला देखकर किसी की छोटे से मकान में भी अगर दिल बड़ा है ना छोटे से मकान में भी अगर मन बड़ा है तो उसमें भी आनंद है [संगीत]

(2:12:13) उसम हम रिटर्न बढ़ई हम यह कांटा कुडी इस ग्राम में जहां रुके हैं चौधरी जी के घर पर पूरा परिवार उस मकान को खाली कर कर दूसरे मकान में [संगीत] चला और जैसी गांव के हिसाब से व्यवस्था कर सकते हैं उससे अच्छी व्यवस्था चौधरी परिवार ने करी उनको बहुत-बहुत साधु जो बन सकता जैसा कर सकता मिलना तो हमारा किसी से होता नहीं आप लोगों को मालूम है कि हम मिलते नहीं मिलने के मामले में बिल्कुल पीछे चौधरी परिवार से भी आप पूछ सकते हो

(2:13:17) उनके घर में रुकना हुआ पर चौधरी परिवार का कोई बच्चा हो कोई पुरुष हो कोई मां हो कोई जीजी हो कोई बेटी हो किसी से हमारी बात मिलना और तो और जो जजमान लोग कथा करा रहे हैं उसमें चाहे वह जो पांचों जजमान है इन लोगों को तो हम ये एक है लाखोटिया जी ये तो हमको दो बार मिल चुके पर दिनेश चंद्र प्रभा देवांगन जी हुए कोमल तुलसी पटेल जी हुए रोहित मरकाम जी हुए सुरेश सिन्हा जी हुए इनका तो हमने देखा भी नहीं कहां है कौन है क्या है पता हम तो बाबा के भर चलते

(2:14:24) हैं हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं उसके आश्रित [संगीत] हो यजमान बने हो कथा में बैठे हो और आप जितने पवित्र प्राण की पंडाल में बैठकर कथा सुन रहे हो हम तो भोलेनाथ जी से केवल इतनी प्रार्थना करते हैं कि यह जितने भी हैं अगर दिल से आपकी सेवा में लगे हैं ना बाबा तो दिल से इनकी झोली भी खुशियों से भर दिल से अगर लगे हैं दिल से हृदय से भाव से [संगीत] उसके आशर होकर

(2:15:28) चले उसके आश्र सती मैया को समझाया था भगवान शंकर ने मत जा सती नाम सती मानी नहीं चली गई अपने पिता के घर में और पिता के घर में गई तो मा तो सबका सम्मान था पर माता सती का कोई [संगीत] कोई सम बहन भी आई पर बहन सती माता से नहीं मिली भाई भी सती माता से नहीं मिले परिवार का कोई सदस्य सती माता से कोई केवल एक

(2:16:35) मां प्रसुति अपनी बेटी सती से केवल पिता भी अच्छे से नहीं मेरी जीजिया मेरी बेटियों मेरी माताओं मेरे भाई मेरे बंधु मेरे [संगीत] सखा श्राद्ध पक्ष के अंदर एक बात जरूर कहेंगे संसार की प्रत्येक मां भगवान से प्रार्थना करती है कि मेरी गोद में मेरा बच्चा खेल दुनिया की ऐसी कोई मां नहीं है जो भगवान से प्रार्थना नहीं करती कि मेरी गोद में मेरा बच्चा ना संसार की प्रत्येक मां भगवान से प्रार्थना करती है कि मेरी

(2:17:40) गोद में मेरा बच्चा खेले पित पक्ष में श्राद्ध में जितने बेटे हैं जिनको मां ने अपनी गोद में खिलाया है वो बेटे भगवान से प्रार्थना करना कि जब मां बूढ़ी हो तो हमारे घर में रह [संगीत] ले आज सबसे बड़ी विडंबना सबसे बड़ी अगर विडंबना है तो इस बात की विडंबना है कि जैसे जैसे वृद्ध अवस्था आती चली जाती है घर के लोग बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में छोड़ा वृद्धाश्रम [संगीत] हर मां यह चाहती है कि बच्चा मेरी गोद में खेले उसी तरह हर बेटे को चाहिए कि मेरी मां मेरे घर में रह ले मेरी मां मेरे घर में रहे अवस्था हो बचपन निकल गया तुम्हारा जवानी आ गई विवाह हो गया शादी हो गई घर

(2:18:45) में धर्म पत्नी आ गई कुटुंब बढ़ गया कबीला बढ़ गया पर प्रयास य हो कि हमारे घर में हमारे माता पिता रहे हमारे घर में हमारे बुजुर्ग रहे और जिस घर में मां बाप की इज्जत नहीं होती जिस घर में मां बाप की इज्जत नहीं होती उस घर में देखना कभी बरकत नहीं होती उस घर में देखना कभी बरकत नहीं होती जिस घर में मां बाप की इज्जत नहीं होती जिस घर में मां बाप की इज्जत नहीं होती उस घर में देखना कभी बरकत नहीं हो

(2:19:52) उस घर में देखना कभी बरकत नहीं होती जहां माता-पिता का आदर हो माता-पिता का सम्मान हो माता-पिता का सत्कार हो वहां बरकत है जहां माता पिता का आदर है वहां बरकत है जहां माता पिता का आदर नहीं व बरकत व लक्ष्मी सत्कार कर बेटी माता सती आई मां अकेली मिली है अ माता अकेली पिता भी नहीं मिले बड़ा दुख था बेटी के मन में बड़ा भाव प्रकट हो अंदर से दुखी थी माता सती बहुत दुख जब माता सती बहुत खी [संगीत] थी

(2:20:58) देखा कोई मिल भी नहीं रहा कोई कल कथा में एक बात कही थी सबने सुनी थी स्मरण किया था भोजन नहीं बचेगा तो बीमार कर देगा बोला था बोलो तो जमके ठीक है धन नहीं बचेगा तो क्या बना देगा अहंकारी बना देगा सुना था बात नहीं बचेगी तो चुगल चोटा बना देगी कहा था अरे बोलो तो छत्तीसगढ़ वाले एकदम चुप कैसे हो गए मेरे को समझ में नहीं आया सुना था हा तो आवाज तो आओ तुम्हारी आवाज निकालो क्या भोजन नहीं बचेगा तो बीमार कर देगा धन नहीं बचेगा तो अहंकारी कर देगा और बात नहीं बजेगी तो

(2:22:02) चुगल चोर बना देगी बस यही बात है दक्ष प्रजापति के भीतर इतना अभिमान आ गया था जब वैभव था सत्ता थी सब कुछ था तो अभिम बढ़ ग उसका अहंकार बढ़ उसका अहम बढ़ [संगीत] गया जब अभिमान बढ़ता है ना अपने भी नहीं सुहा अपने भी दूसरे की तो जाने दो अपने भी ठीक नहीं लगते कभी-कभी तो पत्नी भी कह देती है अपने पति से कभी कभी पत्नी पति से कह देती है क्या बात है इतनी अकड़ क्यों रहे हो नकी से से रहो बच्चों से स्नेह करो परिवार में प्रेम करो आपस में स्नेह बस रहो धन दौलत संपदा तो ज य सब अपनी ज आप प्रेम बस रही है स्नेह बस रही आनंद बस रही है य तो सब चलता ही

(2:23:08) रहता है यह सब चलेगा पर आप रहिए दक्ष प्रजापति का अभिमान दक्ष प्रजापति की अभिम समुख में प्रकट हो गई और दक्ष प्रजापति की जब अभिम प्रकट हुई तब उस अभिम के तहत दक्ष प्रजापति के भीतर जब अभिमान दक्ष प्रजापति के भीतर जब अहंकार प्रकट हुआ सती मैया को बोल दिया मैंने जब तुम्हारे यहां पत्र नहीं भेजा तो तू आई क्यों क्यों आई शिव महापुराण की कथा कहती है [संगीत] परमात्मा के दरवाजे पर पिता के दरवाजे पर गुरु के दरवाजे पर बिन बुलाए भी चले जाओ कथा सत्संग में बिन बुलाए भी चले जाओ शिव महापुराण की कथा कहती जाओ पर यदि गुरु के घर में कोई कार्यक्रम

(2:24:19) है पिता के घर में कोई कार्यक्रम है मंदिर देवालय शिवालय के अंतर्गत कोई विशेष फंक्शन है और मालूम पड़े भीड़ की अवस्था बहुत है तो प्रयास करो कि भाई कोई आमंत्रित करें तो मैं [संगीत] पहु घर में पिता के घर में जाने की मना नहीं है पिता के घर में खूब जा पर कोई फंक्शन है तुम्हारे ऊपर के स्पीकर नहीं चल रहे हैं क्या य ऊपर वाले तुम्हारे पिता के घर में जरूर पिता के पास जरूर पहुच जाओ पिता के पास पर पिता के घर में अगर कोई कार्यक्रम है पिता के घर में अगर कोई कार्य चल रहा है तो फिर सोच कर जाना कि मुझे पत्र आया कि नहीं

(2:25:25) विचार कर कर जाना कि पत्र पहुंचा कि नहीं [संगीत] प पत्र पहुंचे तब पत्र तुम्हारे पास पहुंचे तो पहु गुरु घर में कार्यक्रम है तुम्हारे पास ने जब कोई कार्यक्रम ना रहे तब जरूर जा और गुरु के घर में अगर कोई फंक्शन है कोई कार्यक्रम है तो बिना पत्र के फिर ना जाए फिर ना [संगीत] जा सती मैया पहुंची यज्ञ की अग्नि में सती माता जलकर बस यज्ञ किया क्रोध आया भगवा शंकर को और इतना क्रोध भगवान शिव जी को आया भगवान शंकर को इतना क्रोध इतना क्रोध भगवान शिव को आया कि शंकर भगवान क्रोध में

(2:26:34) आकर उपद्रव कर केश थोड़ा वीरभद्र को भेज दिया जाकर पूरी यज्ञशाला को विदंस पूरी यज्ञशाला विध्वंस कर दी जा यज्ञशाला विद्वंस हो गई दक्ष प्रजापति का सिर कटा अग्नि में जाकर गिर अग्नि में ग हाहाकार मच गया यजमान का सिर कट गया यजमान का सिर कट गया यज्ञ कौन कराए अहंकार जब बहुत बढ़ जाता है व्यक्ति को तीन चीजें बर्बाद कर देती है एक लोभ एक अहम और एक वासना यह तीन चीज व्यक्ति को बर्बादी की र लेकर चली

(2:27:38) [संगीत] जा जब व्यक्ति के अंदर लोभ जागृत हो जाता है जब उसके अंदर लोभ जागृत हो जाता है तो व बर्बाद हो जाता तब बरवा का सिरा पकड़ थोड़ा दूर र थोड़ा देवताओं ने आकर भगवान शंकर से विनती करी भोले बाबा इस यज्ञ को पूर्ण कराइए शंकर भगवान ने कहा दक्ष प्रजापति का तो सिर कट के अग्नि में गिर गया दक्ष प्रजापति का सिर जब अग्नि में चले गया तो यज्ञ कैसे पूर्ण होगा आप सब कुछ कर सकते जो कोई नहीं कर सकता व आप कर सकते आप कर सकते भगवान देव अधिदेव महादेव भगवान शंकर को पूर्ण परमेश्वर कहा गया पूर्ण

(2:28:46) परम पूर्ण परमेश्वर का मतलब है जो दुनिया में कोई ना कर पाए जो दुनिया में कोई ना कर सके वो मेरा देवदिदेव महादेव कर सकता है जो कोई ना कर एक पत्र है [संगीत] देख देवकी रजक पति संतोष रजक मैं ग्राम धमतरी जिला धनतरी की रहने वाली कहीं बैठी हो तो हाथ हिला सकती है और अगर बच्चों को लाई हो तो व्यासपीठ पर ला [प्रशंसा] सकती मैं ग्राम धनतरी जिला धनतरी के निवासी हूं हमारी विवाह के कई वर्ष निकल गए संतान का सुख नहीं [संगीत] आया तब सफेद आंकड़े की जड़ का प्रयोग किसी

(2:29:51) के कहने पर करा पर उसके बाद भी मुझे संतान का सुख नहीं आया फिर वापिस परिवार वाले बोले कि तूने सफेद आंकड़े की जड़ का प्रयोग करा और तेरे को संतान नहीं हुई अब तू क्या करे मैंने शंकर भगवान पर अपना पूर्ण भरोसा रखा शिवजी पर अपना विश्वास पूर्ण रखा और बाबा की कृपा से मैंने फिर दूसरी बार सफेद आकड़े की जड़ का प्रयोग करा और पशुपतिनाथ का व्रत किया गुरुदेव मैंने भगवान भोलेनाथ जी से कहा बाबा मैं दो बार सफेद आंकड़े की जड़ बांध चुकी हूं और दो बार पशुपतिनाथ का व्रत कर चुकी हूं अब तू जान तेरा काम जान और बाबा को बोलकर मैं आ गई और बाबा की कृपा से मेरा

(2:30:44) गर्भ ठहर गया और 46224 को मुझे क्या मालूम था कि दो बार आंकड़े की जड़ बांधी और दो बार पशुपति व्रत करा तो बाबा ने भी [संगीत] मुझे जड़मा दो बच्चे दे दिए एक लड़की और एक लड़का गुरुदेव दोनों के फोटो लगा रही ह फोटो आप लोग एलईडी पर और आस्था चैनल पर देख सकते बाबा ने मुझे दो बच्चे दिए एक लड़का एक लड़की बेटी का नाम मैंने शिव जी के नाम के अनुसार लोकता रखा है लोकता रजत और लड़के का नाम मैंने लोभे रखा है गुरुदेव बाबा की कृपा मुझे नहीं मालूम था कि बाबा सुनता है आप कहते हो देवता देते हैं पल्ला झाड़ के

(2:31:49) और महादेव देता छप ये शिव है शंकर ओ घड़ी विश्वास जागृत भरोसा जागृत और मैंने तेरे ही भरोसे बाबा तेरे ही भरोसे हवा विच उड़ती जावांगी बाबा डोर है तो छड़के ना में कटी जावगी [संगीत] भोले मैं तेरी पतन शंभू तेरी पतन सती मैया जलकर भस्म हो गई भोलेनाथ जी ने यज्ञ पूर्ण करवाया दक्ष प्रजापति का जो सिर कटा था उस पर बकरे का सिर जोड़ दिया बकरे का सिर लगाया दक्ष

(2:32:53) प्रजापति यज्ञ प्रारंभ किए अब जैसे ही बकरे का सिर लगा बाबा भोलेनाथ जी की स्तुति दक्ष प्रजापति करने अब बकरा अंग्रेजी बोलता है क्या बोलो तो जमके हिंदी छत्तीसगढ़िया बकरा ना हिंदी बोलेगा ना अंग्रेजी बोलेगा ना संस्कृत बोलेगा ना फारसी बोलेगा ना कोई भाषा बोलेगा बकरा बकरी की अपनी भाषा है अब दक्ष प्रजापति को जो बकरे का मुख लगा वो भगवान शंकर की स्तुति कैसे करें तो बकरा जो बोला शंकर भगवान समझ गए कि मेरे भगवान मेरे ससुर ने मेरी स्तुति कर ये मेरा ससुर स्तुति कर उस दिन से नियम बन गया शंकर भगवान ने

(2:33:58) कह दिया दक्ष प्रजापति तुमने बम बम बोलकर मेरी स्तुति करी है मैं बर देता हूं जो मेरे मंदिर में आकर बम बम बोलेगा मैं समझ जाऊंगा कि मेरा ससुर आया है मैं समझ जा अब एक जगह हम कथा कर रहे थे उस कथा में हमने क दिया पुरुष अगर जाकर बोले कि बम बम तो भगवान समझे ससुर आया तो एक माता जी ने कहा अगर स्त्री बम बम बोले तो हमने कहा सास उसम क्या दिक्कत शिव तो शिव है ड़ी तो ड़ी है चले बाबा भोलेनाथ सती मैया जलकर भसम हुई हिमालय राज के यहां गई हिमालय राज के यहां जो सती माता जन्मी वो पार्वती माता के नाम से विख्यात हुई बोल पार्वती माता की मां पार्वती के नाम से विख्यात हो गई

(2:34:54) अवस्था देव ऋषि नारद ने कहा और देव ऋषि नारद के कहने पर धीरे धीरे धीरे धीरे माता पार्वती शंकर भगवान की आराधना में लीन हो गई समय आया शंकर भगवान का विवाह माता पार्वती जी के साथ पक्का हो गया शिव दूला बने पार्वती बोलो बोलो जमके दुल [संगीत] हमारे मध्य प्रदेश में दूले को बना कहते हैं और दुल्हन को बनी कहते तीसगढ़ में यहां पर भी बोलते होंगे ना बन्ना बन्नी अरे बोलो तो जमके बोलते हैं शादी में रात को मेरी जीजिया ढोलक पीट पीट के गाती है बन्ना जी बन्ना जी बन्ना जी बन्नी जी बन्नी जी बन्ना जी दिल्ली जाना जी वहा से लहंगा लाना ऐसा

(2:35:50) दूहे को बना दुल्हन को बनी क्यों कहते बना जी बना जी बना जी लड़के क्या कहते बना जी और लड़की क्या कहते हैं बनी जी दोनों को चिल्ला चिल्ला कर कहते हैं बना जी बनी जी दोनों को कते दूले को इसलिए कहते हैं कि जैसी भी मिले बनाकर चलना जी इसलिए बना जी और दुल्हन को कहते बनी जी बनी जी लड़ाई हो वही बनी रहना झगड़ के माय के मत आना तो बनी दूला को कहते बना और दुल्हन को कहते बनी और दोनों में नहीं बनी तो काय का बना और काय की बनी बने तो समझो बना और ब [संगीत] [हंसी] [संगीत] [हंसी] [संगीत]

(2:36:58) [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] में बै ब बोला बन नंदी में बैठे बम भोला दुलहा बन के नंदी में बैठे बम भोला दुलहा बन के ी में बैठ बम भोला दुलहा बन के नंदी में बैठ बम भोला दुलहा बन के नंदी में बैठे बम भोला दुलहा बन के नंदी में बैठे बम बोला ला बन के नंदी प बैठे बम बोला ला बन के बैठ बम बोला [संगीत] जय हो पीछे वाले भी दोनों हाथों [संगीत] [प्रशंसा]

(2:38:02) [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] से रकर जटा होई गंगा बदार जी गंगा बदार गंगा बदार मात चत्र रामारा चुप रे तन सारे जी चुप रे तन सारे चुप रे तन सारे नरिया नाग करिया जी मारे पुकारे मारे पुकारे ये मारे पुकारे ताप जन रुद्राक्ष भैया है दारे ैया है दार ये भैया है दारे रल डमरू दरी बोला हायरे धरे बोला बो नंदी पे बैठ बम भोला दूला बन के नंदी पे बैठे बम भोला दूला बन के नंदी पे बैठे बम बोला दूहा बन के नंदी पे बैठे बम बोला

(2:39:10) दहा बन के नंदी पे बैठे बम बोला दूहा बन के नंदी में बैठे बम बोला दुल्हा बन के नंदी पे बैठे बम बोला दला बन के नंदी प बैठ बम बोला दलान केय [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हो शंभू [संगीत] [प्रशंसा] परे के बराती है संगमा बराती आ संगमा बराती आए संगमा का बोले उ जाने नाचे बंगवा जीी नाचे डंगवा नाचे डंगवा आए बा सब आए बाए रंगवा जी आएए रंगवा आए बाए रंग लोहे

(2:40:17) बरात लग जा जंग जी जा ज जा ज सबला ब ये सबला होन ंद में बैहा बन नंदी में बैठे बम बोला दहा बन नंदी प बैठे बम बोला दला बन के नंदी में बैठ बम भला दुलहा बन के बैठ बम बोला बन के नंदी प बैठ बम बोला दुलहा बन के नंदी पे बैठ बम बोला दुल्हा बन के नंदी पे बैठे बं बोला लावन के नंदी प बैठे बं बोला जलावन के नंदी पे बैठे बम भोला दुला बन के नंदी पे बैठे बम भोला दोला बन के नंदी प बैठे बम बोला दहा बन के नंदी पे बैठ बम बोला दला बन के ंद में बैठ बम भला दु बन के बैठ

(2:41:24) बम भला दुला बन के बैला बै गुरु महादेवा [संगीत] [प्रशंसा] च जटा होए बंगा बधार जी गंगा बधार जी गंगा बधार मा चंद्र रा कोरेन सार सार ना करिया मारे पीछे वाले भी दोनों हाथों से बड़े भाव से भैया है ारे भैया है ारे भैया है ारे शल डमरू धरे बोला होमरे बोला फलन नंदी में बैठे बम बोला दु बन के नंदी

(2:42:30) पे बैठे बम बोला दुला बन के नंदी पे बैठे बम बोला दुला बन के नंदी पे बैठे बम बोला दला बन के नंदी पे बैठे बम बोला दुलहा बन के नंदी पे बैठे बम बोला ला बन के बैठ नंदी प बैठ बम बोला न नंदी प बैठ बम बोला [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा]

(2:43:39) जप हरे हरे हर हर बोला गुरु महादेव जप ह ह ह गुरु महादेव जपा हर हर हर हर भोला गुरु महादेव जप हरे हरे हरे हरे भोला गुरु महा हर [प्रशंसा] हर नंदी पे बैठ बम बोला लावन नंदी प बैठ बम बोला लावण के नंदी प बैठ बम बोला लावण के नंदी प बैठ बमला द के नंदी प बैठ बम बोला लावन के नंदी पे बैठे [संगीत] ब नंदी पे बैठे बम बोला ला बन के नंदी प बैठ बम

(2:44:46) भोला नंदी प बैठे बम भला दला बन के न प बैठ बम भोला दुलहा बन के न प बैठ बम भला लावण के नंदी प बैठ बम बोला लावन के नंदी प बैठ [संगीत] बमला भगवान शंकर की बारात जाने लगी चारों तरफ आनंद समाहित होने लगा डमर धड़कने लगे सारे आनंद के साथ नाचने लगे भो चढल डाकनी पच स गए दे कोटि देवता चारों तरफ आनंद समाहित हो गया नंदी पे बेठ बम बोला बोलाव बोला दुव के नंदी प बैठे बम बोला लावन के नंदी प बैठे बम बोला बारात चलते चलते बड़े आनंद के साथ आगे पहुंच गई और हिमालय राज के दरवाजे पर पहुंची है मैनावती आरती उतारने के लिए आई है भगवान हिमालय राज दर्शन कर रहे हैं

(2:45:47) चारों तरफ सुख समाहित हो रहा है नंदी प बैठ बम बोला लावण के नंदी प बैठ बम बोला दुव के नंदी पे बैठे बम बोला दुला बन के नंदी प बैठे बम बोला दुलहा बन के नंदी पे बैठ बम भोला लावन के नंदी प बैठ बम भोला लावन के नंदी पे बैठ बम बोला लावन के बैठ बम बोला [संगीत] बैठ जाओ सभी लोग बैठे और बाबा से विनय करें बड़े भाऊ से विनती करें भोलेनाथ जी से निवेदन करें जहां जगह मिले वहां बैठकर अपने मन की बात बाबा से जरूर कहो जिससे बाबा आपकी झोली खुशियों से भरे बाबा को दिल से प्रार्थना कर सभी लोग साथ में बोलेंगे प्रेम से बोलेंगे आपकी

(2:46:53) आवाज हम तक पहुंचे और आपनी सबकी आवाज शिव तक प श्री शिवाय [संगीत] नमस्तुभयम स्तु श्री शिवाय नमतु [संगीत] श्री शिवाय [संगीत] नमस्तय नमस्तुभ्यं भोला सब दुख काटू मरा ओ भोला सब दुख काटो मरा शिव शंक कर जप तेरी माला बोले बाबा जप तेरी

(2:48:00) माला बोला सब दुख काटू मरा हो भोला सब दुख काटो मारा वेश है मंगल मंगल मलकारी वेश है मंगल [संगीत] मंगलकारी शमशान वास हमारा शमशान वास हमारा भोला सब दुख काटो भोला सब [संगीत] का भगवान शिव की कथा कहती है देवव महादेव की बारात जाती है सुंदर मंगल विवाह होता है पार्वती जी को लेकर भगवान शंकर कैलाश पर आते हैं समय बीतता है भगवान शंकर तो

(2:49:08) कैलाश पर आ गए मां पार्वती ने अपने तन पर उन धारण पार्वती जी ने तन पर उपन लगाया और उपन लगाकर माता पार्वती स्नान के लिए जा रही थी शरीर के उपन को निकालकर एक पुतला बना दिया [संगीत] एक और शरीर के उपन को निकाल कर जब एक शरीर के उपन को निकाल कर जब एक पुतला बनाया सखी ने कहा कि पार्वती क्या इस पुतले में प्राण आ [संगीत] सकते क्या इस पुतले में प्राण आ सकते पार्वती जी ने हाथ में जल लेकर उस पुतले में प्राण दे जैसे ही पुतले में प्राण

(2:50:13) आए पुतले को बिठा दिया दरवाजे पर मां स्नान करने चली गई किसी को अंदर आने मत देना बाबा देवद देव महादेव भोलेनाथ उसी समय पर उनका आगमन हो रोक दिया शिव शंकर भगवान ने त्रिशूल से बालक का सर काट सर कट कर गया मां की गोद में क्रोध आया अगर यह बालक जीवित नहीं हुआ तो पूरे ब्रह्मांड को तोड़ द पूरे ब्रह्मांड को शंकर भगवान ने रुद्र गणों को भेजा जाओ की चकित भए सुनके केलासी करू जीवित में अविना

(2:51:22) गणों से य बोले वाणी शीघ्र ही लाओ कोई प्राणी जिसे भी पैदा तुम पाओ मनुष्य या पशु हो ले आओ तुरंत बन जाए शीष गज पाए दिया जुड़वाएं सुत धन की गजानंद असुर नि कन एक हथनी अपने बच्चे से पीट कर कर सो रही थी उसका शीश बालक के धड़ पर जोड़ दि सारा बर आशीर्वाद देवताओं ने दे

(2:52:27) दिया और तभी भगवान शंकर ने उन्हें गणों का अध्यक्ष बना दिया जिनका नाम भगवान श्री गणेश बोलो गणेश जी महाराज की जय भगवान श्री गणेश जी महाराज आ रहे हैं जोरदार ताली बजाकर स्वागत करिए भगवान मा गोरा पार्वती के साथ श्री गणेश जी महाराज भगवान श्री गणेश जी महाराज पधारे बड़े प्रेम से पांच दिवसीय शिव महापुराण की कथा कांटा कुडी ही छत्तीसगढ़ के इस वनवासी क्षेत्र में चल रही है लाखों की संख्या में आप पहुंचे हो पंडालों में जगह नहीं है आपका स्नेह इस वनवासी क्षेत्र के लिए जो हुआ है उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आस्था चैनल के माध्यम से फ के

(2:53:23) माध्यम से जो लोग भी इस वनवासी क्षेत्र के लिए जो सहयोग आनंद दे रहे हैं भोजन भंडारे में आपकी सहयोग राशि जो ऑनलाइन पहुंच रही है टीवी चैनल के माध्यम से उनको बहुत-बहुत धन्यवाद है श्राद्ध पक्ष में पितृ पक्ष में आप लोगों का यह सहयोग साधु का बड़े आनंद के साथ यह कथा परसों के दिन 24 तारीख को विराम हो जाएगी 26 तारीख से 2 अक्टूबर तक नांदगांव नासिक में शिव महापुराण की कथा प्रारंभ होगी वह कथा पूर्ण होगी दो तारीख को उसके बाद में फिर हापुड़ की कथा रहेगी उत्तर प्रदेश की फिर फिरोजाबाद की कथा रहेगी उत्तर प्रदेश की अक्टूबर महीने में और आप

(2:54:10) और हम इसी तरह कथा का लाभ लेते रहेंगे और अपने जीवन को सार्थक बनाते रहेंगे हर हर महादेव थोड़ी सूचना आशी जी दे रहे हैं बड़े प्रेम से जय जय श्री राधे सभी भक्तों को हर हर महादेव सादा जय श्री कृष्णा श्री शिवाय नमोस्तु व्यासपीठ को नमन करते हुए हम सबके प्रिय हम सबके लाड़ले ठाकुर कलू जी महाराज के चरणों में नमन करते हुए परम सदे परम आदरणीय विश्व विख्यात पूज्य गुरुदेव के पावन चरणों को नमन करते हुए और आप सभी शिव भक्तों के चरणों में नमन करते हुए सुंदर आज हम सभी ने तीसरे दिवस की कथा श्रवण करी और सुंदर आरती का समय भी हो चुका है आरती में जिन भक्तों के नाम मंच

(2:54:48) से लिए जाएंगे वे अति शीघ्र मंच पर पधारे मेरा निवेदन रहेगा तीनों क्षेत्रीय विधायक महोदय से बड़े ही आधार और सम्मान से मंच पर पधारे और आरती में सम्मिलित हो तीनों विधायक महोदय बड़े ही आधार और सम्मान से मंच पर पधारे साथ में श्री देवेंद्र श्रद्धा जी शर्मा धमतरी छत्तीसगढ़ से महावीर जी अग्रवाल परिवार धमतरी छत्तीसगढ़ से बड़े ही आधार और सम्मान से मंच पर पता ारे आरती में सम्मिलित होकर आरती का आनंद लेंगे हम सभी मिलकर आरती का आनंद लेंगे जय जय श्री राधे हर हर महादेव श्री शिवाय नमतु जय शिव ओमकारा भोले भज शिव ओमकारा ब्रह्मा विष्णु

(2:55:39) सदाशिव बोले भले महाश ह [संगीत] हरे हर [संगीत] महादेवन चतुरानन [संगीत] पंचानन राधे बोले पंचानन राधे हंसन गरुणा सन हं सासन गरुणा सन बस वाहन स हरे हरे महादेव दो भुज चार गुर भुज द बु अति सोहे बोले दस बुझ अति सोहे तीनों रूप नि रखता बोले जी का रूप नि रखता भवन जन

(2:56:45) मोहे ओ हर हर [संगीत]


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