Day - 02 ll श्री शिव महापुराण कथा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll नासिक, महाराष्ट्र
Day - 02 ll श्री शिव महापुराण कथा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll नासिक, महाराष्ट्र
आज हम एक कथा सुना रहे हैं । सुखदेव जी महाराज की कथा । एक बार राजा जनक ने तीन बातें श्री सुखदेव जी महाराज से कही। उसमें एक बात राजा जनक जी ने सुखदेव जी से कही कि सबसे बड़ा आश्रम गृहस्थ आश्रम कैसे होता है। दुनिया का सबसे बड़ा आश्रम ग्रहस्श्र आश्रम है क्योंकि साधु बनना सरल है सन्यासी बनना सरल है तपस्वी बनना सरल है साधक बनना सरल है उपासक बनना सरल है पर अपने घर में अपने परिवार में अपनी पत्नी अपने पति अपने बच्चे अपने भाई अपने बंधु अपने सखा अपने मित्र अपने दोस्त और अपने अपनों के साथ में घर में रहना बड़ा कठिन है।
साधु बन गए घर छोड़ दिया अकेले तो कहीं रह लो। अकेले तो तुम होटल में पड़े रहे। तो तुम्हारा मन लग जाएगा। पर घर में तो रहे हो घर में इधर से माताजी कुछ कहे उधर से पिताजी कुछ कहे उधर से पत्नी कुछ कहे उधर से पति कुछ कहे उधर से भाई कुछ कहे उधर से बहू कुछ कहे उधर से रिश्तेदार कुछ कहे तब घर में रहना बड़ा कठिन हो जाता है। साधु बनना सरल है तपस्वी बनना सरल है साधक बनना सरल है उपासक बनना सरल है सन्यासी बनना सरल है पर ग्रहस्ती बनना सबसे कठिन दुनिया का सबसे कठिन काम है, गृहस्थ आश्रम में रहना।
शास्त्रों को पढ़ने से यह पता चला है कि जितने सन्यासी थे जितने तपस्वी थे जितने साधक थे उन्हें भगवान बहुत बाद में मिले परन्तु जो गृहस्ती थे उनको भगवान जल्दी मिल गए। मीराबाई गृहस्थी थी पति परिवार के साथ रहती थी गिरधर गोपाल मिल गए। कर्माबाई को भगवान मिल गए। नामदेव जी भगवान मिल गए। संत तुकाराम जी भगवान मिल गए। मुक्ताबाई को भगवान मिल गए बड़ी सरलता से रामकृष्ण परमहंस को भगवान मिल गए ग्रहस्थ आश्रम एक ऐसा आश्रम है, जिसमें रहकर आप अगर भगवान को एक क्षण भी पुकार रहे हो, अगर आपने परमात्मा को एक क्षण भी पुकारा तो परमात्मा आपको मिल जाएंगे।
राजा जनक जी ने सुखदेव जी महाराज से कहा कि ग्रहस्थ आश्रम में पढ़िए और शादी करिए। सुखदेव जी महाराज ने कहा मैं और शादी विवाह कैसे करूं ।
तो मैं किससे शादी करूं सुखदेव जी महाराज ने पूछा राजा जनक जी से । आप मेरे गुरु हो, आप आज्ञा करिए कि मैं विवाह किससे करूं ?
जन्म, मरण और परण ये तीन शिव के हाथ में है। आपके सोचे से कुछ नहीं होगा। सुखदेव जी महाराज जाइए आपकी भक्ति, आपके विश्वास और आपकी श्रद्धा का बल बढ़ेगा। जब आप भगवान की विरल भक्ति में डूबने लगोगे । तब भगवान ने तुम्हारे ललाट में जो स्त्री लिखी होगी वह तुम्हें मिल जाएगी।
सुखदेव जी महाराज वन में पहुंच गए।
शिव महापुराण में पित्रों की बेटियों की कथा आती है। विदेश्वर सहित एक पितर की तीन बेटियां मेना, धन्या और कला। मेना जी की गोद में पार्वती जी, धन्या सुनैना बनी जिनकी गोद में माता सीता जी खेली और कला कीर्ति बनी जिनकी गोद में राधा जी खेली। अतः पार्वती जी के ,राधा जी के नाना जी का सीता जी के नाना जी का नाम पितृदेव है।
पितृ देव का वर्णन पार्वती जी के नाना जी का नाम आएगा तो पित्रों की तीन बेटिया मैना, धन्य और कला
तीनों बेटियां आनंद के साथ रहती थीं । एक बार तीनों बेटियां कहीं पितृलोक में घूम रही थी। पितृलोक में भ्रमण करते-करते भूल वश उनके वस्त्र सनकादिक ऋषियों की ऊपर पर पड़ गया तो उनके कोमल शरीर पर उससे उनको घाव लग गया। घाव लगा तो उन्होंने उन तीनों को श्राप दे दिया कि तुम तीनों को मृत्यु लोक में जाना पड़ेगा। तुम तीनों को पृथ्वी लोक पर जाना पड़ेगा।
तीनों हाथ जोड़कर उनसे विनय करने लगी। हम पृथ्वी लोक पर चले तो जाएंगे पर हमारा कल्याण कैसे होगा? तो तीनों से सनकादि ऋषियों ने कह दिया। तुम तीनों की गोद में तीन देवियां खेलेंगी। मैना तुम्हारी गोद में पार्वती जी, धन्या तू सुनैना बनेगी तेरी गोद में सीता जी और कला तू कीर्ति बनेगी तेरी गोद में राधा जी खेलेंगी। ये तीन देवियां संसार का कल्याण करने वाली होंगी। तो तुम्हारा भी कल्याण अपने आप हो जाएगा।
तुम्हारा अब यह कथा तो अपन सुनते हुए आए कि पितरों की तीन बेटियों का अब कथा आती है ।
पित्रों का बराज नामक एक सुंदर पितृ लोक है। पितृ लोक बड़ा सुंदर है। जहां पर पित्रों के स्वामी आर्यमा अपने एक मित्र अपने एक भाई के साथ में विराजमान हैं । पित्रों के लिए चावल की खीर बनाई जाती है। मास की दाल मतलब उड़द की दाल का प्रयोग किया जाता है, तुरई या गिलकी का प्रयोग किया जाता है। हमारे यहां लोग कहते हैं कि साहब आपने मास की दाल अर्थात उड़द की दाल का या तो आपको दई बड़ा बनाना था या मंगोड़ा बनाना था या इमरती बनानी थी और खीर पित्रों के लिए जरूर बनाना थी।
पितरों के बराज नामक लोक में बहीपक्ष नामक एक पितृ देव रहते हैं। ये बहिर पक्ष पहले पितृ नहीं थे। ये भगवान शंकर की भक्ति में इतने तल्लीन रहते थे इतने तल्लीन रहते थे कि भगवान शंकर इन पर प्रसन्न हो गए। इन्होंने अपने जीवन काल में हर महीने जो शिवरात्रि आती है ऐसी कोई शिवरात्रि नहीं छोड़ी जिस शिवरात्रि पर शंकर का अनुष्ठान ना किया अर्थात शिव का अभिषेक ना किया हो।
पितृ पक्ष में इसी पितृ पक्ष के अंतर्गत 30 नवंबर 2024 को मासिक शिवरात्रि अर्थात पितृ पक्ष की शिवरात्रि पड़ेगी। बरीपक्ष शिव की भक्ति में लगे रहते थे। पंचाक्षर मंत्र राक्षे ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय में लगे रहते हैं।
भगवान वही पक्ष भगवान शिव की भक्ति में लगे हुए थे इतनी भक्ति करी इतनी भक्ति करी कि देवती महादेव प्रसन्न हो गए बर मांग तुझे क्या चाहिए।
प्रभु जो दुनिया का सबसे सुंदर लोक हो। वह मेरे को दे दीजिए। जो दुनिया का सबसे सुंदर लोक हो ।
★ कई लोग कहते हैं गुरुजी हमारा दुख नहीं कट रहा। हम बड़ी तकलीफ में है। हमारा दुख नहीं कट रहा। हमारा दुख बड़ा परेशान करे जा रहा है। हमारा दुख नहीं कटता। हमारा दुख समाप्त नहीं होता।
हमारा निवेदन है जब रावण, कंस, हिरण्यकश्यपु, हिरण्याक्ष, बकासुर, अघासुर, पूतना, ताड़का आदिक आदिक असुर जब समाप्त हो सकते हैं। तो आप अपना कर्म करते जाओ। एक लोटा जल देवादि देव महादेव को चढ़ाते जाओ। जब रावण समाप्त हो सकता है कंस समाप्त हो सकता है तो तुम्हारा दुख भी समाप्त जरूर होगा निश्चित ब कि थोड़ा समय लगेगा।
भगवान भोलेनाथ ने बहिर पक्ष को पितृलोक दे दिया। बहिर पक्ष अपने पितृ लोक में रहने लगे। इतना सुंदर लोक, इतना सुंदर लोक जिस लोक में सब आनंदमय हैं। सबकी भलाई का कार्य होता है । दुनिया के लोग कहते हैं पितृलोक ऐसा है। पितृलोक वैसा है । पितृलोक ना ऐसा है, ना वैसा है। श्राद्ध पक्ष अर्थात पितृ पक्ष में मेरा देवदिदेव महादेव और पितृ देव ये दोनों की कृपा बरसती है और हमारा कल्याण होता है। पितृ पक्ष कभी बेकार नहीं होता पितृ लोक कभी बेकार नहीं है श्राद्ध पक्ष कभी बेकार नहीं होता श्रद्धा कभी बेकार नहीं होती।
★ बचपन में होमवर्क, जवानी में होम लोन और बुढ़ापे में अनुलोम विलोम और जिंदगी समाप्त।
बराज नामक लोक में बहि पक्ष रहते हैं उन्होंने नियम बना लिया हमारे पितृलोक में प्रत्येक महीने में मासिक शिवरात्रि पर उत्सव मनाया जाएगा। शंकर का पूजन अभिषेक किया जाएगा। एक दिन बहिर पक्ष पित्रों की आराधना कर रहे थे।
बहिर पक्ष पितृ पक्ष में शिव की आराधना में लीन शंकर के । कोई तुमसे पूछे हम पित्रों की पूजन करते हैं। तो पितर किसकी पूजन करते हैं। तो उस समय पर आपका जवाब होना चाहिए कि पितृ लोक में रहने वाले बहिर पक्ष शंकर भगवान की आराधना में लीन रहते हैं।
एक दिन बहिर पक्ष शिव की आराधना में लीन थे तो और भूले से उस दिन मासिक शिवरात्रि का दिन था। उनके मन में आया कि मेरे घर में कोई ऐसी बेटी का जन्म हो, ऐसी कन्या का जन्म हो, जो संसार सागर में अपने आनंद के साथ जिए और जीवों का कल्याण करे। कुछ समय उपरांत बहिर पक्ष के घर में एक सुंदर बिटीया ने जन्म लिया। जिसका नाम पीवरी हुआ। पीवरी बड़ी हुई तो एक दिन शिवरात्रि के समय पर उसको नहीं मालूम था कि पितृ पक्ष में 16 दिन जो पित्रों के होते हैं, और उस पितृ पक्ष के अंदर 16 दिन के अंदर जो शिवरात्रि आती है। अश्विन महीने के कृष्ण पक्ष के अंतर्गत पितृ पक्ष में जो शिवरात्रि आती है। बच्ची होने के कारण उसके स्मरण में नहीं आया आज पितृ पक्ष की शिवरात्रि है। आश्विन मास के अंतर्गत श्राद्ध पक्ष में पड़ने वाली शिवरात्रि के दिन बैठी और शंकर भगवान के पार्थिव लिंग का निर्माण कर उसका पूजन कर रही थी और पूजन करते करते उसके मन में आया कि मैं उससे विवाह करूं जो संसार सागर के कल्याण की बात करें । संपूर्ण विश्व के कल्याण की बात करें । इस प्रकार लोक कल्याण का विचार पीवरी के मन में आ गया।
पितृ पक्ष की शिवरात्रि साधारण नहीं है
उपाय
जिस बेटा या बेटी की उम्र 30 साल या 40 साल के हो गए और विवाह या शादी नहीं हो रही हो
जिस बेटा बेटी का विवाह अगर 15 साल, 20 साल, 25 साल, 30 साल, 35 साल और 40 साल हो गए, नहीं हो रही हो। जिस बेटा बेटी का संबंध नहीं हो रहा हो। उससे निवेदन है जिस लड़का लड़की का विवाह नहीं हो हो वो पितृ पक्ष में जो शिवरात्रि आ रही है, उस पितृ पक्ष की शिवरात्रि के दिन गाय के दूध से बना हुआ, एक बूंद घी (घृत) एक उंगली में जरा सा लगाकर। शंकर जी के मंदिर में लेकर जाए और शंकर के शिवलिंग पर उसका लेपन करें और उसी उंगली को अशोक सुंदरी वाली जगह पर सुखदेव जी महाराज की धर्म पत्नी पीवरी के नाम से लगाकर, एक लोटा जल भगवान शंकर को समर्पित कर दें । तो उसका विवाह एक वर्ष के भीतर होता ही है। अगला पितृ पक्ष आएगा उससे पहले उसका विवाह होगा ही होगा।
जिनके घर में संतान का सुख नहीं है अगर बन सके अगर यह शिवरात्रि जो आ रही है।
श्राद्ध पक्ष की श्राद्ध पक्ष की शिवरात्रि मतलब पितृ और महादेव दोनों का वर हमको प्राप्त होता है
किसी भी प्रकार के दोष निवारण हेतु
मान लो घर में पितृ दोष हो गया, आहुत दोष हो गया, वासुक दोष हो गया, कालसर्प दोष हो गया, सारे दोष तुम्हारे पास में हो गए। कोई ने कह दिया मंगल हो गया, शनि चढ़ गया, बुद्ध चढ़ गया, कोई ने कह दिया गुरु चढ़ गया, कुछ भी चढ़ गया।
संतान सुख के लिए
संतान प्राप्ति का यह उपाय केवल पितृ पक्ष के अंदर जो शिवरात्रि पड़ती है उसी में किया जाएगा बाकी के समय नहीं किया जाएगा ।
अगर आप को संतान का सुख नहीं है तो तुम महादेव के पास जाइए । संतान सुख के लिए, दोनों पति-पत्नी गाय के दूध से बना हुआ, थोड़ा सा घी (घृत) लेकर शंकर के मंदिर जाएं और बाबा देवदिदेव महादेव को घृत का लेपन करो और बाबा को एक लोटा जल चढ़ाओ। थोड़ा सा घृत घर पर आकर पति-पत्नी दोनों उसका पान करें । अगर लेपन नहीं कर सकते तो थोड़ा सा घी (घृत) चढ़ाकर भी लेकर आओगे और उस घी (घृत) का पान अगर करा है। तो संतान का सुख होता ही है
जो बेटा कंपटीशन एग्जाम में बैठ रहा है
जो बेटा या बेटी कंपटीशन एग्जाम में बैठ रहे हैं या कहीं ना कहीं इंटरव्यू देने जा रहे हैं। पढ़ने वाले बेटे से निवेदन है कि अपनी मेहनत को चार गुना बढ़ा खूब पढ़ो, खूब अध्ययन करो और जब इस पितृ पक्ष की शिवरात्रि आ रही है, तो पितृ पक्ष की शिवरात्रि पर बेलपत्र की मध्य पत्ती पर थोड़ा सा गौ माता अर्थात गाय का घी उस बीच वाली पत्ती पर लगाकर बाबा देवद महादेव को उत्तर की ओर डंडी का मुख रखते हुए अर्थात जिस ओर जल बहकर जाता है, की ओर रखा है अर्थात समर्पित किया है तो यह निश्चित है कि अगली पितृ पक्ष की शिवरात्रि जब आएगी तो आपका पत्र उससे पहले इस व्यासपीठ पर जरूर मिलेगा।
यहां ध्यान रहे की सामान्य रूप से हमेशा आप लोगों को कहा कि आप कभी भी परीक्षा देने जाना तो बेलपत्र की मध्य पत्ती पर शहद लगाना लेकिन पितृ पक्ष की शिवरात्रि है तो बेलपत्र की मध्य पत्ती पर थोड़ा सा गौ माता अर्थात गाय का घी उस बीच वाली पत्ती पर लगाकर बाबा देवद महादेव को समर्पित किया जाता है ।
बेटा बेटी को सफलता के लिए उपाय
Day 4
जो बेटा या बेटी सफलता चाहते हैं वे अपनी मेहनत को चार गुना बढ़ा दो, खूब पढ़ो, खूब अध्ययन करो और जब इस पितृ पक्ष की शिवरात्रि आ रही है, तो पितृ पक्ष की शिवरात्रि पर एक दूब घास और एक बेलपत्र ले। दूब घास को बेलपत्र के ऊपर रखें और देसी गाय के घी से एक बिंदी मध्य पत्ती पर लगाकर बाबा देवादि देव महादेव को उत्तर की ओर डंडी का मुख रखते हुए अर्थात जिस ओर जल बहकर जाता है, की ओर रखा है अर्थात समर्पित किया है तो यह निश्चित है कि अगली पितृ पक्ष की शिवरात्रि जब आएगी तो आपका पत्र उससे पहले इस व्यासपीठ पर जरूर मिलेगा।
Day 4
यदि मन में विपरीत विचार तो भोले बाबा पर बेल-पत्र
M
निश्चित पितृ पक्ष की शिवरात्रि साधारण नहीं पितृ पक्ष की शिवरात्रि में एक भगवान
पितृ पक्ष में पढने वाली शिवरात्री पीव ने भगवान शिव से वर मांगा । बाबा देवाधि देव महादेव की कृपा ऐसी हुई कि भगवान का ही एक अंश स्वरूप श्री सुखदेव जी महाराज पति रूप में प्राप्त हुए।
सुखदेव जी भगवान शिव का एक अंश स्वरूप कैसे?
श्री सुखदेव जी महाराज एक बार यह कथा कह रहे थे तो किसी ने पूछा कि सुखदेव जी भगवान शंकर का अंश कैसे हो गए तो कहा जिस समय पर भगवान शंकर माता पार्वती जी को अमर कथा सुना रहे थे। अमर कथा सुनाते समय त्रिशूल लेकर माता पार्वती चारों तरफ घूमी सबको भगाया गया परन्तु तोते का अंडा कोटर में गिर गया उस अंडे के अंदर तोते का बच्चा था जिसने शंकर भगवान के मुख से अमर कथा को सुन लिया । जब भगवान शिव से करने के लिए दौड़े तो वह तोते का बच्चा जब भागा तो व्यास जी महाराज की धर्म पत्नी के गर्भ में जाकर बैठ गया। शुक तोते के बच्चे को कहते हैं। शुक व्यास जी की पत्नी के गर्भ से जन्मा इसलिए कहलाया देव। दोनों को मिला दो तो हो गया शुकदेव । भगवान शंकर की वाणी के द्वारा इसको ज्ञान प्राप्त हुआ अर्थात भगवान शिव तत्व के द्वारा इसको अमर तत्व प्राप्त है इसलिए इसको भगवान शंकर का ही अंश कह जाता है।
भगवान शिव का ही अंश बोल भगवान सुखदेव पीव भगवान शंकर की आराधना में डूबी हुई पीव शिव तत्व को प्राप्त करने वाली पीव
भगवान शंकर की अविरल भक्ति में डूबने वाली पीवरी भगवान शिव से वर मांगती है कि मेरे को पति मिले वो आपके अमर तत्व को धारण करने वाला हो तो भगवान शंकर ने पीवरी को विवाह का वर दे दिया। बाद में पीवरी के साथ भगवान श्री सुखदेव जी महाराज मंगल विवाह हुआ।
पितृ पक्ष की शिवरात्रि के अंतर्गत हम जो बाबा से कहते हैं हम जो बाबा से विनय करते हैं बाबा से निवेदन करते हैं बाबा सुनता है और केवल शिवरात्रि ही नहीं केवल शिवरात्रि ही नहीं पितृ पक्ष हो कोई भी पक्ष हो उस पक्ष में अगर हम भगवान शंकर की आराधना कर रहे हैं भगवान शंकर से विनय कर रहे हैं भगवान शंकर से निवेदन कर रहे हैं शिव हमारी मान सुनता है।
शिव महापुराण की कथा कहती है कि तुम्हारे विश्वास के बल पर तुम बाबा देव महादेव के चरणों में झुकते र झुकते झुकने से कभी कुछ बिगड़ा नहीं है झुकने से हमेशा प्राप्त ही हुआ है कुछ बिगड़ा नहीं एक बार एक नदी ने समुद्र से कह दिया समुद्र मैं संसार की सबसे बड़ी नदी हूं समुद्र मैं संसार की सबसे प्रतिष्ठित नदी हूं मैं दुनिया की सबसे प्रबल नदी हूं समुद्र मांग तुझे क्या चाहिए समुद्र मैं दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित नदी हूं सबसे प्रबल नदी हूं मांग तुझे क्या चाहिए मांग ले तुझे क्या चाहि बोल तुझे क्या दिया समुद्र ने मना कर दिया समुद्र कहता
(2:22:29) है मुझे कुछ नहीं चाहिए अरे मांग समुद्र तुझे क्या चाहिए नदी को अहम था नदी को अहंकार था नदी को अभिम थी नदी को अभिमान था मांग ले तुझे क्या दिया क्या दूं मैं तुझको क्या प्रदान करूं मैं तुझको समुद्र ने फिर मना कर दिया नदी मेरे में रतन है माणिक है मोती है सोना है चांदी है हीरा है पन्ना है समुद्र कहता है मेरे पास रतन भरा पड़ा है माणिक भरी पड़ी औषधि भरी पड़ी सब कुछ मुझ में है मुझे नदी तुझसे कुछ नहीं चाहिए तुझसे कुछ नहीं चाहि नदी ने फिर कहा समुद्र तू मुझे जानता नहीं है मांग तुझे क्या चाहिए समुद्र मांग ले तुझे क्या चाहिए नदी बार-बार बार बार
(2:23:24) कह रही है समुद्र बार-बार मना कर रहा है तब नदी का अहंकार देखा नदी का अहम देखा तब समुद्र ने कह दिया नदी अगर तू देना चाहती है तो एक काम कर हरि हरि दूबा हरि हरि दुर्व हरि हरि घास हरि दुर्वा हरि घास लाकर मुझे दे दे समुद्र ने जैसे ही कहा तो नदी मुस्कुरा नदी को हसिया क्या रे समुद्र मांग भी रहा है तो क्या मांग रहा है हरि धुबा हरी घास धूप दुर्वा नदी नदी बोल रही है समुद्र कुछ और मांग ले तुझे चाहिए समुद्र कहता नहीं नहीं मुझे तो हरी दुर्वा चाहिए हरी घास चाहिए केवल दूब
(2:24:27) लाक दे दे मुझे और कुछ नहीं चाहिए नदी ने कहा मैं अभी लेकर आती हूं नदी ने अपनी लहर फेंकी दुर्वा को उखाड़ने के लिए छोटी छोटी दुर्वा लगी हुई थी नदी अपना पानी का वेग फेंक है अपना अहम फेंक है पर वो दुर्वा टूट नहीं [संगीत] पाती नदी ने फिर पानी का वेग फेंका दुबा टूटी नहीं घास टूटी नहीं आखिरी में नदी हार गई और नदी हार करर समुद्र के पास पहुंची और समुद्र से कहा समुद्र मैं दुर्वा नहीं ला सकी मैं हरी हरी घास नहीं ला सकी मुझे क्षमा कर दे समुद्र ने कहा नदी मैं जानता था कि तू दुर्वा नहीं ला सकती क्यों नहीं ला सकती क्योंकि कि उसका
(2:25:21) एक कारण है नदी मैं तुझसे कहता कि पत्थर के टुकड़े लिया तू लेकर आ जाती मैं तुझसे कहता पाषाण लिया तो पाषाण लेकर आ जाती मैं तुझसे कहता लकड़ी ला लकड़ी लेकर आ जाती मैं तुझसे कहता कुछ ला तू लाकर दे देती पर दुर्वा तू इसलिए नहीं ला सकी नदी क्योंकि दुर्वा पर पानी का वेग पड़ता था तो खड़ी हुई दुर्वा नीचे झुक जाती थी जो दुनिया में झुकना जानता है किसी की सामर्थ नहीं कि कोई उखाड़ कर [प्रशंसा] फेंक कौन फ जो झुकना जान दुनिया में जिसने झुकना सीख लिया झुकना अपने माता-पिता के आगे अपने बड़ों के आगे अपने बुजुर्गों के आगे अपने सम्मानिया के आगे आपने आदर करना प्रारंभ
र ब्रह्मा जी भगवान विष्णु के साथ में पर्वत की घर्षण करते हैं शिवलिंग उत्पन्न हो जाता है चरण देखने के लिए भगवान नारायण जाते हैं शीष देखने के लिए ब्रह्मा जी जाते हैं नारायण का नाम सत्यनारायण पड़ जाता और ब्रह्मा जी का सिर कट जाता है कारण क्या था क्योंकि नारायण शिव को पहचान गए थे ब्रह्मा शिव को पहचान नहीं पाए ब्रह्मा शिव को नहीं पहचानते नारायण ना जानते थे प्रणाम करना
(2:42:21) जानते थे आदर करना जानते थे सम्मान करना जानते थे सत्कार करना जानते थे इसलिए नारायण सत्य नारायण बन गए अभी कथा में कहा समुद्र से नदी ने कहा कुछ मांग समुद्र ने दुर्वा मांगी दुर्वा टूटी नहीं न दुर्वा उखाड़ नहीं सकी नदी उखाड़ नहीं पाई क्योंकि दुर्वा झुक जाती थी दुर्वा नीचे नब जाती थी झुकना सीख लो प्रणाम करना [संगीत] न महाराज ब्रह्मा जी का सिर कटा शीष कट गया ब्रह्मा जी केतकी के पुष्प ने झूठ बोल दिया गौ माता ने झूठ बोल दिया ब्रह्मा जी के मुख ने झूठ बोल दिया तो तीनों को श्राप केतकी का फूल शंकर भगवान को कभी
(2:43:28) नहीं चढ़ता गाय ने झूठ बोला तो मुख अशुद्ध मान गौ माता तो झूठ बोल रही है ब्रह्मा जी आप झूठ बोल रहे हो सत्यम जिंदगी थोड़ा सत्य आज का जमाना पूरा झूठ में जिंदगी का हो गया पूरा हमने कथा में कहा था आपके स्मरण में होगा कथा में कहा था मोबाइल आया पंचांग खत्म हो गया बोलो सही है कि गलत है पहले के समय में पंडित जी पंचांग देखते थे पंचांग खोलते थे आज के जमाने में मोबाइल पर देख बता यह तिथि यह बार यह नक्षत्र यह घड़ी यह पल मोबाइल में देखा बता दिया मोबाइल आया पंचांग खत्म मोबाइल आया टॉर्च खत्म पहले के जमाने में लोग जेब में टॉर्च डाल के चलते थे अंधेरा हुआ टर्च
(2:44:25) आज के जमाने में मोबाइल लेकर चलते मोबाइल की लाइट जलाई टर्च उत्पन्न हो गई मोबाइल आया पंचांग खत्म मोबाइल आया टर्च खत्म मोबाइल आया रेडियो खत्म पहले लोग रेडियो लेकर चलते थे छोटा सा कान में लगाया सुनते रहे सिग्नल भी मिलाते थे सिग्नल कभी-कभी यहां नहीं मिलता था तो वहां बैठ जाते थे सिग्नल मिलाने खेत में बैठ गए ऊपर चढ़ गए यह सिग्नल है कभी कभी मिलता है कभी-कभी नहीं मिलता इसलिए शिव महापुराण की कथा कहती है पंडाल में बैठकर कथा सुनो य सिग्नल अच्छा मिलता है भगवान से सिग्नल नहीं मिल मोबाइल आया रेडियो खत्म मोबाइल आया एपी3 खत्म लोग
(2:45:08) मा इतनी बड़ी बड़ी टीवी में लगाते हैं कैसेट लगाते फिर फिल्म देखते सब खत्म मोबाइल आया mp3 खत्म मोबाइल आया रेडियो खत्म मोबाइल आया पंचांग खत्म मोबाइल आया टर्च खत्म और मोबाइल तुम्हारी पत्नी के हाथ में आया तुम खत्म मोबाइल है इसलिए सावधान इंडिया थोड़ा सावधानी मोबाइल इसलिए पति देख लेता है सोई की नहीं सोई जब यह सो जाती तब मोबाइल को तकिए के नीचे र के फिर सो फिर [संगीत] सो और ना जाने कौन कन सा लॉक व मोबाइल के अंदर भगवान जाने कौन-कौन सा लॉक लोग कहीं स्माइल का लक कहीं कोई सा लक कई कोई
(2:46:15) सा लाग कई कोई सा लाग एक पति ने अपने मोबाइल में लॉक लगाया था अपने पांव के मोजे का पांव के मोजे का सावधान शिव को पाना सत्यता का जीवन बहुत लंबा नहीं जी सकते थोड़ा सा जीयो हफ्ते में एक दिन महीने में एक दिन ऐसा बनाओ जिस दिन मैं दो घंटा सत्य बोलूंगा पर वो किसी को मत बताना खास तौर से पत्नी को मत बताना कि सत्य बोलूंगा और एका दिन पत्नी तुम सत्य का व्रत लेकर बैठ गए और वो आके बैठ गई तुम्हारे पास में और उसने सब कुछ पूछ लिया तो सत्य तो जाने दो सत्यनारायण जी की कथा हो जाएगी सत्य बोलो एक क्षण का एक घड़ी का एक पल का एक क्षण का भगवान नारायण ने सत्य
(2:47:13) बोला सत्यनारायण नाम पड़ गया ब्रह्मा जी ने असत्य बोला शीश कटा बड़ का पेड़ बन गया ब्रह्मा जी के शीश कटे हुए जल से उनके रक्त से एक नदी प्रकट हो गई जिसका नाम कर्मनाशा हो गया कर्मनाशा नदी आज भी उत्तर प्रदेश में बहती है जिस नदी के घाट पर उत्तर प्रदेश की गवर्नमेंट ने लिखकर रखा है इस नदी पर हाथ ना धोई है इस नदी पर स्नान ना करिए क्योंकि यह कर्मनाशा है भारत की भूमि की मात्र एक नदी कर्मनाशा ऐसी है जिसमें कुत्ता भी पानी नहीं पीता क्योंकि उस नदी में अगर कोई पानी पी ले स्नान कर ले हाथ हाथ धोले मुंह धो ले तो वो नदी में स्नान करने वाले की जिंदगी के
(2:47:53) सारे पुण्य समाप्त हो जाते हैं पूरा कर्म नाश हो जाता है इसलिए उसका नाम है कर्मनाशा जो ब्रह्मा जी के रक्त से बनी कर्मनाशा ब्रह्मा जी के रक्त से प्र भगवान नारायण ने हाथ जोड़कर विनय करा प्रभु कृपा करिए थोड़ी सी क्षमा कर दीजिए भगवान शंकर ने क्षमा करा ब्रह्मदेव का जो कटा हुआ सिर है ये बड़ का पड़ बन जाएगा इसी का नाम वटवृक्ष हो जाएगा वटवृक्ष हां कौन पूछेगा शंकर भगवान ने कहा तुम चिंता मत करो मैं स्वयं बढ के पेड़ के नीचे जाकर बैठूंगा और मेरा एक नाम दुनिया में प्रसिद्ध होगा जिसका नाम टकेश्वर महादेव होगा [संगीत] टकेश्वर एक नाम प्रसिद्ध होगा जिसका नाम
(2:48:49) टकेश्वर महादेव भगवान देवदिदेव महादेव टकेश्वर महादेव के रूप में विराजमान हो गए सृष्टि की रचना के लिए भगवान सृष्टि की रचना के लिए भगवान देवदिदेव महादेव की पवित्र आनंदमय कथा भगवान सृष्टि की रचना के लिए अर्धनारेश्वर भगवान का दर्शन कराते हैं जोरदार ताली बजाकर भगवान अर्धनारेश्वर का दर्शन करिंग कल सुंदर पितृ पक्ष की एकादशी की एक कथा है जितने भक्त शिव महापुराण की कथा सुन रहे हैं पितृ पक्ष की एकादशी में क्या वर्णन आता है किस राजा ने इस पितृ पक्ष की एकादशी का फल पाया था उसका वर्णन कल की कथा में सुनेंगे यह कथा दो तारीख तक चलेगी
(2:49:53) सात दिवसी कथा है 5 तारीख से 9 तारीख तक 5 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक हापुर उत्तर प्रदेश में कथा का समय पहले दिन तो एक से चार रहेगा बाकी के दिन कथा का समय दो से पाच रहेगा पांच दिवसीय वह कथा है हापुड़ उत्तर प्रदेश की जिसका एड्रेस है जेएमएस ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट नेशनल ना बायपास रोड हापुर यह वहां का एड्रेस रहेगा पांच दिवसीय उत्तर प्रदेश वालों को यह कथा मिली है बड़े भाव से आनंद से उत्तर प्रदेश वालों करो तैयारी आ रहे कुबेर भंडारी भाव से कथा का तत्व ग्रहण करेंगे मैं यजमान परिवार को आमंत्रित करता हूं माननीय आमदार श्री सुहास अन्ना जी कांदे
(2:50:45) सो अंजुम ताई सुहास जी कांदे यहां पधारे और अर्धनारेश्वर भगवान का पूजन करें उसके बाद आरती का क्रम होगा आरती में मनोज लहाने जी कैलाश बावड़ जी राजेंद्र पवार जी साधी नाथ गिरगे जी सुनील जाधव जी सागर हीरे जी प्रकाश शिंदे जी जनेश्वर कांदे जी नरेश गुजराती जी समधान पाटील जी उषा गुणवत मंडल निखिल कलंत्री जी अमोल नाव जी सतनाम राजपुर जी विष्णु निकम सर जी अनिल तथा रिंदे जी रिंदे जी गोकुल सेठ पिंकू शिरसाट जी रशद बरसे जी संजू आहिर जी राज भाऊ देशमुख जी आकाश ंगे जी और विद्या ताई गंगे जी आरती में सम्मिलित होंगे कल एकादशी का क्रम रहेगा जितने
(2:51:45) श्रोता भाई बहन कथा को श्रवण कर रहे हैं बड़े भाव से जो सिहोर कुबेर भंडारी की भंडार गृह में रसोई घर में अन्य क्षेत्र में जो सहयोग देना चाहते हैं वह दे सकते हैं साथ में पंडाल के बाहर भी अन्य क्षेत्र चल रहा है समिति का उसमें भी आप सहयोग दे सकते हैं और हमारे यजमान परिवार के द्वारा निशुल्क आए हुए लाखों शिव भक्तों के लिए भोजन व्यवस्था निशुल्क रखी गई है एक बार मैं आमदार सुहास नाथ जी के लिए जोरदार ताली बजाए जिन्होंने सुंदर व्यवस्था के तहत इस सुंदर आयोजन का आयोजित किया हार हार जय शिव [संगीत] ओमकारा भोले भा शिव [संगीत] ओमकारा ब्रह्मा विष्णु सदा शिव भोले भोले
(2:52:44) ना महा श [संगीत] ओ हरे हरे हरे [संगीत] महादेव कानन चतुरानन पंचानन राधे बोले पंचानन राधे ह सासन गरुड़ासन हसन गरुड़ासन ह ह महादेव
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