Day - 02 ll श्री शिव महापुराण कथा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll धमतरी, छत्तीसगढ़

 Day - 02 ll श्री शिव महापुराण कथा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll धमतरी, छत्तीसगढ़ 

मेवा फल मोदक और लड्डू जिनको भोग लगावे 

मेवा फल मोदक और लड्डू जिनको फूल लगावे 

सखी सहेली मिलके सब मंगल आरती गावे 

सखी सहेली मिलकर के सब मंगल आरती गावे 

देव मिले कर देव मिले करी देव मिले कर चबर डला 

विनायक मेरी अर्ज सुनो देव मिलकर चम दुला 

विनायक मेरी अर्ज सुनो गौरी सुत शंकर लाल 

विनायक मेरी अर्ज सुनो गौरी स शंकर लाल 

विनायक मेरी अर्ज ...........

सब वन में आप बड़े हैं तुमको प्रथम मनार

सबसे वन में आप बड़े हो तुमको प्रथम मना घर में गणपति सदा विराजे कारज शुभ करावे घर में गणपति सदा विराजे कारज शुभ करावे संग रिद्धि सिद्धि संग रिद्धि सिद्धि संग रिद्धि सिधि आओ आज विनायक मेरी अरज सुनो संग रिद्धि सिद्धि आओ आज विनायक मेरी अर्ज सुनो गौरी सुत शंकर लाल विनायक मेरी अर्ज सुनो गौरी सुत शंकर लाल विनायक मेरी अर्ज सुनो विनायक मेरी अर्ज सुनो विनायक देवी अरज सु नायक देवी अर सु बोलिए गणेश भगवान की [संगीत] जय जय जय श्री

( श विश्वनाथ भगवान की गौरा महारा की श्री गणेश जी महाराज की जय सरस्वती माते नरेश्वर महादेव की जय कालेश्वर भगवान की ओम कालेश्वर भगवान की ज रुद्रेश्वर महादेव की जय की संत सदगुरु देव ग माता की जय चता [संगीत]

(36:20) च च च बो विश्वनाथ भगवान [संगीत] की ओ नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नमः शिवाय [संगीत] नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नमः

काशी विश्वनाथ, ओगड़ दनी, त्रिकालदर्शी, कैलाशी, अविनाशी 

भक्ति और मुक्ति यह दो संगम है मुक्ति सहजता में मिल सकती पर भक्ति सहजता में नहीं मिलती है। मुक्ति के लिए आप किसी को भोजन करा दिए किसी को पानी पिला दिए किसी को आपने कुछ दे दिया तो मुक्त हो थोड़ा दान कर दिया थोड़ा पुण्य कर दिया मुक्त हो पर भक्ति करते करते करते करते भक्ति का स्मरण करते करते भक्ति करते करते अगर मुक्ति के पथ पर पहुंचेंगे भक्ति करते करते अगर मुक्ति के पथ पर आप और हम पहुंचेंगे तो यह निश्चित है कि फिर हमारा इस मृत्यु लोक में जन्म नहीं होना जगतगुरु शंकराचार्य जी महाराज ने अपनी भाषा में कहा है कि बार-बार जन्म बारबार मरण न बड़ा रिटन बारबार जन्म और बारबार मरण यह ठीक नहीं है फिर जन्म लेना फिर मर जाना पुनरपि जन्नम पुनरपि मरणम के प्रपंच से हमें छूट जाना और जन्म और मरण के प्रपंच से जब हम छूट जाएंगे तब शिव के करीब पहुच भगवान देवती महादेव के नजदीक पहुंच जाए। 


व्यासपीठ कभी ऐसा नहीं कहती कि कर्म मत करो भगवान शंकर ने अपने दोनों बेटों से कहा जो पृथ्वी की परिक्रमा कर कर उसको प्रथम गिनती में गिना जाएगा अगर शंकर जी चाहते तो अपने बेटे को राज सिंहासन दे देते कि मैं कार्तिके को पृथ्वी का अधिपति बनाता हूं मैं गणेश जी को पृथ्वी का अधिपति बनाता हूं पर पहले भगवान शंकर पार्वती ने कर्म करवाया कि जाओ परिक्रमा कर कर आओ पहले मेहनत करो कर्म [संगीत] करो और तुम मेहनत करोगे कर्म करोगे तो सफलता मिलेगी ही 

  भगवान शंकर ने गणेश जी से यह नहीं कहा कि तू बैठ जा सिंहासन पर भगवान शंकर ने सदानंद कार्तिके जी से यह नहीं कहा कि तू बैठ जा सिंहासन पर भगवान शंकर ने कहा जो पृथ्वी की परिक्रमा कर कर आएगा उसको प्रथम गिनती में गिना जाएगा उसी को स्थान मिलेगा जो मेहनत कर रहा है उसी को स्थान मिलेगा जो परिश्रम कर रहा है जो मेहनत ही ना करे परिश्रम ही ना करे तो क्या मतलब बिना मेहनत के कैसे आगे बढ़ [संगीत] 

राजा विक्रमादित्य की एक कथा

राजा विक्रमादित्य की एक कथा आती है कि एक बार राजा विक्रमादित्य बहुत सारे ब्राह्मणों और संतों को भोजन के लिए बुला लिया। 

संत ब्राह्मण के भोजन करने के उपरांत विक्रमादित्य ने उनसे पूछ लिया कि दुनिया का सबसे बड़ा दानी कौन है ? दुनिया का सबसे बड़ा दान दाता कौन है ? 

जितने ब्राह्मण और संत बैठे थे सबने कह दिया दुनिया का सबसे बड़ा दानी राजा विक्रमादित्य है। दुनिया का सबसे बड़ा दानदाता राजा विक्रमादित्य अवंती का नरेश है। 

परंतु एक संत चुप बैठा था।  वह मुंह उतार कर बैठ गया। उसने नहीं कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा दानी राजा विक्रमादित्य है। वह बोला ही नहीं । उसने नहीं बोला दुनिया का सबसे बड़ा दानदाता राजा विक्रमादित्य है। उसके मुख से न तो शब्द न हीं आवाज निकली। 

राजा विक्रमादित्य ने देखा कि एक संत बहुत देर से बैठा है चुप होकर बैठा है। सबने बोला पर य नहीं बोला । इनका मुख उतरा हुआ है। इसका चेहरा उतरा हुआ है। जरा मैं इससे पूछूंगा जरूर इसके मन में कुछ चल रहा है। 

राजा विक्रमादित्य ने उसको बुलाया और बुलाकर पूछा क्यों ब्राह्मण देवता सबने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा दानवीर राजा विक्रमादित्य है पर आपने नहीं बोला । क्या बात है ? आपके मन में कोई संशय है ? आपके मन में कोई प्रश्न है? आपके मन में कोई बात है ? बताओ जरा क्या बात है ? क्या संशय है ? क्या विचार है आपका ? 

राजा विक्रमादित्य की बात सुनी तो ब्राह्मण को लगा अगर मैं राजा के पक्ष की बात बोलूंगा तो मुझे इनाम मिलेगा पर राजा के विपक्ष की बात बोलूंगा तो मुझे मृत्यु दंड मिल सकता है ।

अगर मैं राजा के विपक्ष का बोल दू और राजा को बोल दू कि आप सबसे बड़े दानी नहीं हो तो हो सकता है मुझे मृत्यु दंड मिल जाए। हो सकता है कि मुझे मृत्युदंड मिले। 

नहीं नहीं महाराज ऐसी कोई बात नहीं है ? राजा विक्रमादित्य ने कहा । 

नहीं महाराज आप ब्राह्मण होकर झूठ नहीं बोल सकते ।

अगर ब्राह्मण होकर झूठ बोल रहे हो तो यह श्रेष्ठता नहीं है। आप झूठ ना बोलिए। आप सत्य बोलने का प्रयास करिए।  

आप ज्ञानवान हो आप जानते हो कि गया क्षेत्र में गौ माता ने भगवान राम जी के आगे झूठ बोला था कि सीता जी ने कोई पिंड दान नहीं किया है तो उसे मां जानकी जी का श्राप भी लगा है तभी तो आज भी गौ माता का मुख झूठा कहा जाता है इसलिए गौ दान गाय की पूंछ पकड़ कर किया जाता है। ब्राह्मण देव गया क्षत्र की फलगू नदी ने गाय के झूठ में गाय का साथ दिया तो फलगू को भी श्राप लगा। आप झूठ ना कहिए आप सत्य बोलिए। 

विक्रमादित्य के सामने, राजा के सामने ब्राह्मण खड़ा है और ब्राह्मण से राजा विक्रमादित्य पूछ रहे हैं तुम्हारे मन में कोई बात है ? जल्दी बोलो क्या बात है ? 

इतने में उसने कहा, मैं बोल तो दूंगा महाराज ! मैं बता तो दूंगा पर आप मुझ पर नाराज तो नहीं होगे। 

राजा विक्रमादित्य ने कहा मैं नाराज नहीं हूंगा। तुम बताओ बात क्या है ? 

राजा विक्रमादित्य के सामने ब्राह्मण ने कह दिया महाराज तुमने पूछा कि दुनिया का सबसे बड़े दानी कौन ? सबने कहा कि राजा विक्रमादित्य दुनिया का सबसे बड़ा दानी है पर मैं कहता हूं राजन समुद्र के उस पार एक चंद्रायन नाम का राजा रहता है। वह एक दिन में एक लाख सोने की मुद्रा का दान करता है। एक दिन में जब तक वह एक लाख सोने की मुद्रा का दान ना कर दे तब तक ना वह अन्न ग्रहण करता है ना वह पानी पीता है। 

राजा विक्रमादित्य ने सोचा कि यह ब्राह्मण सत्य बोल रहा है। राजा विक्रमादित्य ने फूल की माला ब्राह्मण को पहनाई और कहा ब्रह्मण देव तुमने हिम्मत तो करी है। आज से जब तक आप चाहे राज महल में निवास कर सकते हैं। राजमहल में उनके ठहरने की व्यवस्था की जाए कहकर विक्रमादित्य ने सभा छोड़ दी।

राजा को रात भर नींद नहीं आई कि ऐसा कौन सा राजा है जो एक लाख सोने की मुद्रा रोज देता है। उसके बाद भोजन करता है पानी पीता है। जरा मैं पता तो करूं ।

राजा ने एक सेवक के कपड़े पहने और आधी रात को समुद्र के पार चला गया। समुद्र के पार विक्रमादित्य उस राजा चंद्रायन राजमहल के पास पहुंचा और वहां के द्वार पालो से विनती करी कि मुझे राजा से मिलना है। 

विक्रमादित्य राजा से मिले परंतु इन्होंने बताया नहीं कि मैं राजा विक्रमादित्य अवंति का नरेश हूं। 

विक्रमादित्य ने राजा के पास जाकर कहा महाराज मुझे आपके आपके राज्यमें रहने के लिए काम की जरूरत है । आप मुझे काम पर रख लेंगे क्या ? मुझे यहां काम पर रख लेंगे? राजन ! आप मुझे कोई काम प्रदान कर देंगे ताकि मैंजीवन यापन कर  सकूं। 

चंद्रायन ने पूछा तुम क्या काम कर सकते हो बताओ ? क्या काम करोगे तुम वो बताओ ?

राजा विक्रमादित्य राजा चंद्रायन के सामने एक सेवक के वेश में खड़े होकर कहते हैं। महाराज ! जो कोई नहीं कर सकता वह काम मैं कर सकता हूं। ऐसा विक्रमादित्य ने क्यों कहा यहतो सभी जानते हैं क्योंकि राजा विक्रमादित्य के पास में बेताल था। वह बेताल को बोल देते तो सब काम हो जाता। 

ठीक है ! जरूरत पड़ने पर तुम ही काम दे दिया जाएगा। चंद्रायण को प्रसन्नता हो गई कि ऐसा सेवक मुझे मिल गया जो वह काम कर सकता है जिसे कोई नहीं कर सकता। उसे अपनेखास महल का द्वारपाल लगा दिया। 

उसको दरवाजे पर खड़ा कर दिया राजा विक्रमादित्य दरवाजे पर खड़े थे । सबेरे सबेरे ब्रह्म मुहूर्त में राजा चंद्रायन उठते और उठकर नहाने के लिए समुद्र पर जाते और सोनीसे भरी मुद्राओं की एक थैली लेकर आते। और उसे दान कर देते। धीरे-धीरे विक्रमादित्य राजा चंद्रयान के विश्वासपत्र बन गए।

एक दिन विक्रमादित्यने स्वर्ण मुद्राओं से भरी थली पाने का रहस्य जानने का निर्णय लिया। राजा विक्रमादित्य दरवाजे पर खड़े थे । सबेरे सबेरे ब्रह्म मुहूर्त में राजा चंद्रायन उठे और उठकर नहाने के लिए समुद्र पर चले तो विक्रमादित्य ने देखा। 

कि राजा चंद्रयान के समुद्र में नहाकर पास ही स्थित एक देवी के मंदिर में जाते हैं । विक्रमादित्यभी उनके पीछे-पीछे मंदिर में प्रवेश कर जाते हैं। विक्रमादित्य ने देखा कि मंदिर में जाकर राजा ने मां को प्रणाम किया । उन्होंनेदेखाकि पास ही एक बड़े से कड़ाही में तेल उबल रहा है। विक्रमादित्य पूरे मंदिर का जायजा लेने लगे। 

तभी उन्होंने देखा कि देवी को प्रणाम करने के बाद राजा चंद्रायन खोलते हुए तेल अर्थात उबलते हुए तेल के कड़ाही में  बैठ जाते हैं। विक्रमादित्य ने देखा कि राजा चंद्रायन तड़फ रहे हैं। विक्रमादित्यसे उनका वह कष्ट देखा नहीं गया। विक्रमादित्य है आंखें बंद कर ली।

धीरे-धीरे तेल में राजा चंद्रायण का पूरा शरीर जल कर तल जाता है । पूरा शरीर पक जाता तब मंदिर से कई योगिनियां आकर उसको नोच नोच कर खाती है। यह दृश्य बड़ा ही वीभत्स था। कुछ समय में उनकी हड्डियों का ढांचा मात्र वहां पर पड़ा था। विक्रमादित्य अपने स्थान पर स्तंभित खड़े यह सब देख रहे थे। 

उसी समय देवी मां बाहर निकलती हैं। वे अपने हाथ में जल लेकर राजा चंद्रायन पर छीट देती हैं और राजा चंद्रायन वापस जीवित हो जाता है। देवी उसको एक लाख सोने की मुद्राएं देकर चली जाती हैं। राजा वो सोने की मुद्राएं लेकर अपने राज्य लौट आता है।

विक्रमादित्य ने यह सब देख लिया। राजा विक्रमादित्य जान गए कि मुद्रा आती कहां से हैं। विक्रमादित्य ने विचार करा बस यही जानना था कि राजा चंद्रयान के पास दान देने के लिए मुद्रा आती कहां से हैं। 

राजा विक्रमादित्य सबेरे दूसरे दिन राजा चंद्रयान के जागने से पहले खुद पहुंच गया। राजा चंद्रयान उठते उससे पहले विक्रमादित्य मंदिर परिसर में पहुंच गया। विक्रमादित्य ने  बिना समय गंवाए स्नान करा । देवी को प्रणाम करा और खोलते तेल में खुद बैठ गया । उसका शरीर जला । जलने के बाद योगनया ने अपनी भूख मिटाई और देवी ने प्रकट होकर जल छींटा विक्रमादित्य जीवित हो गया। जैसे ही विक्रमादित्य जीवित हुआ देवी ने एक लाख सोने की मुद्रा राजा विक्रमादित्य को देना चाहीं। राजा विक्रमादित्य ने कहा मां मुझे ये सोने की मुद्राएं नहीं चाहिए। राजा फिर गया, नहाया, नहाकर के फिर खोलते तेल में कूद गया । देवी ने फिर जीवित कर दिया देवी ने फिर एक लाख सोने की मुद्रा दी राजा ने कहा मुझे सोने की मुद्रा नहीं चाहिए। वह फिर गया, फिर नहाया और खोलते हुए तेल में फिर कूद गया। राजा विक्रमादित्य खोलते हुए तेल में बार-बार कूद रहा था और देवी की मुद्राएं लेने से मना कर रहा था। देवी ने राजा को ध्यान सेदे खा तो वे समझ गई यह विक्रमादित्य है।

राजा विक्रमादित्य खोलते हुए तेल में जब आठवी बार कूदने जा रहा था। तब देवी ने उसका हाथ पकड़ लिया अरे विक्रमादित्य मैं तुझे पहचान गई। तुझे चाहिए क्या वो तो बोल राजा विक्रमादित्य ने कहा मां तू मुझ पर दया करती है ना। तो जिस थैली में से तू एक लाख मुद्राएं रोज देती है। वो थैली मुझे दे दे। मां वो थैली मुझे दे दो। जिससे थैली से तू एक लाख मुद्रा रोज देती है। 

यह है संभव नहीं है। देवीने कहा। तो फिर मुझे उस कढ़ाई में फिरसे कूदने दो। में उसमें तब तक कुदता रहूंगा जब तक मां का दिल ना पिघल जाए।

देवी बोली विक्रमादित्य मैं तेरे दृढ निश्चय को समझ गई। यह ले कहते हुए राजा विक्रमादित्य के हाथ में जगत जननी दुर्गा भवानी ने थैली रख दी। उसी समय मंदिर समुद्र में डूब गया। उसी समय मंदिर गायब हो गया। और राजा विक्रमादित्य राजमहल लौट आए।

इतने में चंद्रायन राजा आए चंद्रायन राजा ने देखा कि आज तो देवी का मंदिर ही नहीं है। वह समुद्र में चला गया। अब ना तो कोई खोलता हुआ तेल है ना कुछ है। राजा चंद्रयान बहुत उदास हुए। राजा चंद्रायन घर पहुंचे और उनकी आंख में जल पड़ा था। पलंग पर लेट गए मेरा नियम टूट जाएगा इस चिंता में बीमार पड़ गए। मैं एक लाख सोने की मुद्राएं रोज दान करता था। मेरा पूरा की पूरा नियम आज समाप्त हो जाएगा।

मैं क्या करूं ? अब क्या करा जाए ? कैसे करुं ? राजा के बीमार होने की सूचना पूरे राज्य में आग की तरह फ़ैल गई। सूचना हो गई पूरे नगर और पूरे नगर में जब सूचना हुई पूरे नगर में जब सूचना हुई सारे नगर में सूचना पहुंच गई और पूरे नगर में जब सूचना पहुंची सूचना होने पर मालूम पड़ा कि राजा बीमार पड़ गया। तो पूरी राज्यकी प्रजा राजा को देखने के लिए उमड़ पड़ी।

विक्रमादित्य राजा के पास में पहुंचे और राजा से पूछा महाराज आप बीमार क्यों पड़े हो ? आपकी बीमारी का कारण क्या है। 

सेवक रहने दो तुम मेरी कुछ सहायता नहीं कर सकते विक्रमादित्य बोला महाराज आपने मुझे जिस काम के लिए रखा है। वह भूल गए क्या ?

महाराज में वह काम कर सकता हूं जो कोई नहीं कर सकता। राजा चंद्रायण ने अपनी पूरी कहानी राजा विक्रमादित्य को बता दी। 

विक्रमादित्य ने कहा महाराज बीमार मत होइए । महाराज आपको एक लाख सोने की मुद्राएं रोज दान करनी है। वह कीजिए। महाराज यह थैली लीजिए । इस थैली से रोज एक लाख मुद्राएं निकाल लीजिए और खुशी खुशी दान कर दीजिए। 

राजा चंद्रायण ने विक्रमादित्य से पूछा तुम्हारे पास यह थैली कैसे आई ? महाराज ! जब आप कल सुबह मंदिर गए तो मैं भी आपके पीछे-पीछे मंदिर गया। आप मंदिर में प्रवेश कर गए और मैं दरवाजे के पीछे छिपे कर खड़ा हो गया था। मैंने देखा आप देवी को प्रसन्न करने के लिए कैसे खोलते हुए तेल में उतर गए उस वक्त आप पीड़ा और दर्द से चीख रहे थे। आपका दर्द मुझसे सहन नहीं हुआ इसलिए देवी मां की आराधना करकर वो थैली में आपके लिए लेकर आ गया। ये लो थैली आपके पास में रखी रहा हूं। महाराज ! अब मुझे अपने घर जाने की आज्ञा दीजिए।

राजा चंद्रयांग बोले एक मामूली सेवक यह सब नहीं कर सकता। आप कौन हैं? कृपया बताएं। बस इतना याद रखिएकि मैं आपका एक मामूली सा सेवक हूं जिसने आपका नमक खाया और उसका कर्ज उतारा। राजा चंद्रायन ने विक्रमादित्य को बहुत सा धन देने की कोशिश की परंतु विक्रमादित्य ने हाथ जोड़कर मना कर दिया। और राजा विक्रमादित्य अपने राज्य अवंतिका की ओर चल दिए।

ब्राह्मण को सूचना मिली कि राजा चंद्रायण को सोना देने वाली थैली विक्रमादित्य दान दे आए हैं। तब राजा के दरबार में आकर ब्राह्मण चिल्लाकर बोला कि आज मैं जान गया हूं कि राजा विक्रमादित्य जैसा दानी दुनिया में कोई नहीं हो सकता। 

विक्रमादित्य वो दानी हैं जिनसे दूसरे का दुख देखा नहीं जाता। आज से पहले राजा चंद्रयान महादानी हुआ करते थे। और हमारे महाराज ने उनकोभी एक लाख सोने की मुद्राएं रोज देनेवाली थैली दान कर दुनिया के सबसे बड़े महादानी बन गए हैं।



शिव कथा कह रही है ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु ने मिलकर मंथन किया एक पर्वत का उस पर्वत में से खंब प्रकट हुआ अग्नि का उस अग्नि के खंब में भगवान शंकर के शिवलिंग की आकृति प्रकट ब्रह्मा जी उस शिवलिंग का शीष देखने जा रहे भगवान नारायण उसका चरण देखने जा ब्रह्मा जी शीष देखने जा रहे हैं नारायण चरण देखने जा रहे हैं नारायण को चरण नहीं मिले वापस आ गए ब्रह्मा जी ऊपर जाते जाते गौ माता को लि आए केतकी के पुष्प को लि आए केतकी का पुष्प लेकर आ ग [संगीत] केतकी का [संगीत] पुष्प जिस केतकी के पुष्प को सबसे ज्यादा अहंकार था जितनी चीजों को अहंकार होता है शंकर उसको स्वीकार नहीं करते शंकर भगवान उसको स्वीकार नहीं करते काम को अहंकार था कामदेव को अहंकार था कि मैं सबकी समाधि को तोड़ सकता हूं कामदेव का अहंकार था कि मैं बड़ा सुंदर हूं रति के पति कामदेव अपने आप को कहते हैं कि मेरी सुंदरता बड़ी प्रबल है शंकर नेत्र खोलकर उस कामदेव को जलाकर भस्म कर देते हैं चंद्र को अहंकार था सुंदरता का काया का रोग हो जाता है और चंद्र उसको मस्तक पर स्वीकार कर लेते हैं गंगा को अहंकार था कि मुझ में वो वेग है कि पृथ्वी पर कोई मुझे झेल नहीं सकता शंकर भगवान से भागीरथ जी ने कहा कि गंगा पृथ्वी पर आए गंगा [संगीत] प किसके लिए आई गंगा गंगा य मृत्यु लोक में आई किसके लिए कि पुत्र सगर के पुत्र सगर के तारे राजा सगर [संगीत] राजा राजा सगर की दो धर्म पत्नी एक पत्नी से एक पुत्र और दूसरी पत्नी से 6 हज पुत्र राजा सगर ने अश्म यज्ञ रखा अश्म यज्ञ जब पूर्ण होता है तो पूरा ब्रह्मांड उसी का हो जाता है इंद्र को लगा यह राजा सगर इंद्र के सिंहासन पर भी आक्रमण कर लेगा तो इसका यज्ञ खंडित करना यज्ञ खंडित [संगीत] हो आपकी अगर कोई प्रतिज्ञा होती है ना उस प्रतिज्ञा को अगर कोई खंडित करता है तो समझ लो कि ुद देवता आगे रहकर खंडित करवा र कहीं ।

गिलास के जल में और लोटे के जल में क्या अंतर 

एक लोटे जल से हमारा निवेदन है अगर तुम चढ़ाते रहते तो तुम्हें मालूम पड़ता कि एक लोटा जल क्या कर सकता है एक लोटा जल क्या कर सकता है एक लोटे जल में कितना बल होता है एक लोटे जल में कितना तत्व होता है कभी आप सब लोग मोबाइल चलाते हो य पर सर्च करिएगा ग पर सर्च करिएगा फबुक पर सर्च करिएगा कि गिलास के जल में और लोटे के जल में क्या अंतर होता है गिलास का जल पीने से पेट में कितनी बीमारी आती है और लोटे का जल पीने से पेट की कितनी बीमारी जाती है जरा नेट पर सर्च करिएगा मत मानो आप शिव पुराण की मत मानो आप वेद और पुराण की आज के विज्ञान से जुड़ और आज के साइंस से जुड़ साइंस और विज्ञान की बात निकालिए कि लोटे के जल में ऐसा क्या हो जाता है कि लोटे का जल पीने वाले की सारे पेट की बीमारियां समाप्त हो जाती है लोटे का जल में ऐसा क्या हो जाता है कि लोटे का जल पीने वाले की सारी तकलीफें समाप्त हो जाती है आप मत मानो शिव पुराण की बात आप म मत मानो वेद और पुराण की बात आप तो विज्ञान की बात मानो आप साइंस की बात मानो और विज्ञान और साइंस को उठाओ और देखो कि गिलास के जल में और लोटे के जल में कितना पावर है गिलास के जल में शून्य बराबर का पावर होता है और लोटे के जल का जब हम शंकर को चढ़ाकर उसका आचमन करते हैं जब लोटे का जल पीते हैं तो शरीर के जितने रोग हैं वह धीरे-धीरे अपने आप समाप्त होना चालू हो जाते हैं अपने आप आजकल वैज्ञानिक का युग है साइंस का युग है तो निकालो ना अपना अपना मोबाइल खोलो और खोल कर देख लो 

 शिव महापुराण की कथा कहती है डॉक्टर शंकर का एक रूप है डॉक्टर शंकर का एक रूप है जब शरीर में कष्ट आए तो सबसे पहले डॉक्टर के पास जाना चाहिए क्योंकि शिव का रूप डॉक्टर है शरीर में कष्ट हो डॉक्टर के पास जाओ जांच का बोले जांच कराओ जो बोले वो करो पर साथ में इलाज के साथ शंकर को एक लोटा जल चढ़ाते रहो क्योंकि डॉक्टर भी आखिरी में कह देता है कि अब इनको दुआ की जरूरत है तो वह दुआ हमको चाहिए डॉक्टर भी आखरी में कह देता है कि अब मेरे हाथ में नहीं अब उसके हाथ में है मतलब डॉक्टर के साथ एक डॉक्टर और है जब वो ऑपरेशन करने जाता है तो साइन करवा लेता है सिग्नेचर करवा लेता है कि मेरी जवाबदारी नहीं है सिग्नेचर जिसने करा है उसकी जवाबदारी है आप रेशन में जाने से पहले कोई डॉक्टर ऐसा नहीं कि सीधे ऑपरेशन थिएटर में ले जाए सिग्नेचर करवाता है पहले कि अब जवाबदारी तुम्हारी है ये ठीक है नहीं है डॉक्टर शंकर का एक रूप है सबसे पहले डॉक्टर को चेकअप कराओ और चेक अप कराने के बाद डॉक्टर जैसा बोले वैसी दवाई खाओ पर उसके साथ में शंकर पर भरोसा करते हुए चलो तो तुम्हारा कार्य सफल जरूर होगा ऐसा नहीं कि केवल जल पर आश्रित हो गए नहीं शंकर का रूप है डॉक्टर इसलिए उस पर भी [संगीत] आश्रित शिव का रूप है डॉक्टर उस पर भी आश्रित होई और जब दवाई शरीर में ना लगे तब कौन से महादेव का नाम लेना है जम के बोलो जम के कुंद केश्वर कुंद केश्वर महादेव का नाम लेकर डॉक्टर की दवाई को खुद खाओ पर भगवान का नाम लेकर कु महादेव का नाम [संगीत] लेकर डॉक्टर दवाई लिखा है उस दवाई को हमें खाना है पर कुंद केश्वर के नाम से खा शरीर को लगेगी क्यों ना [संगीत] लगे और जब हम उस पर आश्रित हो जाते हैं [संगीत] इसीलिए शास्त्र कहता है शिव तत्व कहता है भगवान शंकर की कथा 

कि कोई किसी में मगन, कोई किसी में मगन ।

कोई किसी में मगन कोई किसी में मगन। 

मैं तो भोले की दीवानी, भोलेनाथ में मगन। 

मैं तो भोले की दीवानी भोलेनाथ में मगन। 

मैं तो शंभू की दीवानी शंभूनाथ में मगन 

में तो शंभू की दवानी शंभू बाबा में मगन 

कोई किसी में मगन कोई किसी में मगन 

कोई किसी में मगले कोई किसी में मगन 

मैं तो भोले की दीवानी भोलेनाथ में मगन 

मैं तो भोले की दीवानी भोलेनाथ में मगन 

मैं तो शंभू की दीवानी शंभुनाथ में मगन 

में तो शंभो के दवा शभ में मगन जय हो।


शंभो कोई कोठी में मगन कोई बंगले में मगन 

कोई कोठी में मगन कोई बंगली में मगन 

कोई कोठी में मगन कोई बंगले में मगन 

कोई ठी में मंगन कोई बंगले में मगन 

मेरी छोटी सी झुपड़िया में मैं तो मगन 

मेरी छोटी सी, झुपड़ी मेरी छोटी सी झुपड़ी 

आ में में तो मगन मेरी छोटी सी झुपड़ी मगन 


कोई किसी में मगन कोई किसी में मगन 

कोई किसी में मने कोई किसी में मग 

मैं तो भोले की दीवानी भोलेनाथ में मगन 

में तो भोले की दीवानी भोलेनाथ में मगन 

शंभो 

कोई लड्डू में मगन कोई पेड़ा में मगन 

कोई लड्डू में मगन कोई पेड़ा में मगनी 

कोई लड्डू में मगन कोई पेड़ा में मगन 

कोई लड्डू में मगन कोई पेड़ा में मगन 

मेरी रूखी सुखी रोटी में तो उसमें मगन 

मेरी रूखी सुखी रोटी मैं तो उसने मगन 

मेरी रूखी सुखी रोटी में तो उसमें मगन 

मेरी रूखी सुखी रोटी में तो कि में मगन 


कोई किसी में मगन कोई किसी में मगन 

कोई किसी में मगन कोई किसी में मगन 

मैं तो भोले की दीवानी भोले बाबा में मगन 

में तो भोले की दीवानी भले बाबा में मगन 

कोई सोने में मगन कोई चांदी में मगन 

कोई सोने में मगन कोई चांदी में मगन 

कोई सोने में मगन कोई चांदी में मगन 

कोई सोने में मगन चांदी में मगन 

मेरी रुद्राक्ष की माला में तो उसी में मगन 

मेरी रुद्राक्ष की माला में तो उसी में मगन 

मेरी रुद्राक्ष की माला में तो उसम मगन 

मेरी रुद्राक्ष की माला में तो उस में मगन 


कोई किसी में मगन कोई किसी में मगन 

कोई कोई किसी में मगन कोई किसी में मगन 

कोई किसी में मगन कोई किसी में मगन 

कोई कोई किसी में मगन कोई किसी में मगन 

मैं तो भोले की दीवानी भोले बाबा में मगन 

मैं तो भोले की दीवानी भोले बाबा में मगन 

मैं तो भोले की दीवानी भोले बाबा में मगन 

मैं तो भोले की दीवानी भोले बाबा में मगन 

मैं तो शंभू की दीवानी शंभू बाबा में मगन 

मैं तो शंभू की दीवानी शंभू बाबा में मगन 

मैं तो भोले की दीवानी भोले बाबा में मगन 

मैं तो भोले की दीवानी भोले बाबा में मगन


 श्री शिवाय नमतु श्री शिवाय नमतु भोला सब दुख काट हमारा  सब दुख काट मरा शिव शंकर जप तेरी माला बोले बाबा जप तेरी माला भोला सब दुख काटो ओ भोला सब दुख काटो हमारा। वेश मंगल मंगलकारी वैश है मंगल मंगलकारी शमशान वासी  हमारा शमशान वासी हमारा भोला सब दुख काटो ओ भोला सब दुख काटो 


भगवान देव महादेव का चरित्र क रहा शी महापुराण की कथा वर्णन करती है भगवान शंकर का पवित्र चरित्र कहता है शिव तत्व कहता है भगवान की पवित्र कथा वर्णन कर रही है एक विश्वास अपने भीतर रखकर शिव की शरणागति ग्रहण करो ब्रह्मा जी शिवलिंग का शीष देखने के लिए जाते हैं और भगवान नारायण शिवलिंग का चरण देखने के लिए जाते हैं नारायण भगवान को चरण नहीं मिलता है आकर कह देते हैं कि मुझे चरण नहीं मिला ब्रह्मा जी एक केतकी के पुष्प को लेकर आ गए और एक माता को साथ में लेकर आकर सामने लाकर खड़ा कर लिया उन्होने दोनों को सम्मुख मिलाकर खड़ा करा नारायण भगवान पूछे ब्रह्मदेव क्या आपको भगवान शंकर के शीष का दर्शन हुआ है रिटर्न बढ़ाओ रिटर्न भगवान शंकर के शीष का दर्शन हुआ है । नहीं ब्रह्मा जी पहले तो सत्य बोल रहे थे पर उन्होंने देखा कि मेरे पास में केत का फूल है और गौ माता है तो उन्होंने सत्य को नकारते हुए झूठ को पकड़ सत्य को नकारा झूठ को पकड़ा भगवान नारायण ने तो एक ही शब्द में सत्य कह दिया इसलिए शंकर जी ने उनका नाम सत्य नारायण रख दिया बोल सत्यनारायण भगवान की एक शब्द में सत्य बोला इसलिए नाम सत्य रायण घर घर में सत्यनारायण भगवान की कथा होती है इधर हमको यह धमतरी जिले का तो नहीं मालूम होती है धर भी हा ठीक है होना चाहिए घर घर में सत्यनारायण भगवान की कथा होती है उसका कारण केवल इतना सा है कि तुम्हारी जिंदगी तुम कितनी भी कैसी भी जी रहे हो पर अपनी जिंदगी में एक दिन ऐसा निकालो कि परमात्मा की चौखट पर जाकर सत्य बोलो।


 भगवान नारायण ने सत्य कहा सत्य नारायण हो गए ब्रह्मा जी सत्य स्वीकार नहीं करें उन्होंने कह दिया या सब झूठा है उन्होंने कह दिया मेरे को तो शीष मिला भगवान ने जैसे ही बोला शीष मिला केतकी के फूल से पूछो केतकी के फूल ने झूठ बोल दिया गौ माता ने झूठ बोल दिया तब ब्रह्मा जी झूठ बोले तो उनका सिर कट गया कर्मनाशा नदी प्रकट हो गई वो कर्मनाशा बहती रही उत्तर प्रदेश जैसे गंगा मां को अहंकार आ गया था कि मैं पृथ्वी पर आऊंगी और मेरे वेग को कोई नहीं झेल पाएगा इंद्र को अभी माना गया था कि मेरी सत्ता कहीं राजा सगर ना ले ले इसलिए उनके अश्म यज्ञ के अश्व को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया गया था और कपिल मुनि नेत्र बंद कर कर बैठे थे सूचना मिली और सूचना मिली कि पता करो कि अश्म यज्ञ का अश्व कहां पर है अश्म यज्ञ का अश्व कहां है पता करा जा जब अश्वम यज्ञ के अश्व का मालूम करने के लिए राजा सगर ने अपने 60,000 पुत्र को भेज दिया कपिल मुनि के आश्रम में पहुंच गए कपिल मुनि नेत्र बंद करके बैठे थे अश्व इंद्र ने राजा सगर के अश्वम यज्ञ का अश्व कपिल मुनि के आश्रम में बांध कर रखा था जो 60 हजार राजा के पुत्रों ने देखा कि कपिल मुनि तुम नेत्र बन करके बैठे हो एक एक तरफ तो तुम ऋषि हो एक तरफ तो तुम साधु हो एक तरफ तो तुम तपस्वी हो दूसरी तरफ तुमने अश्व को चुराया है उन्होंने अश्व खोला कपिल मुनि को अपशब्द कहा कपिल मुनि को अपशब्द कहा अपनी तक्षण तक्षण वाणिया दी इसीलिए शिव महापुराण की कथा में हमने पहले कहा है पानी घर में अगर का पीते हो तो वाणी भी फिल्टर कर कर दे वाणी भी तो फिल्टर कर कर दे।

 हो जो मन पड़ा हम लोग वो बोल देते हैं किसी ने कुछ बोला और तुमने अपशब्द कह दिया किसी ने कुछ बोला तुमने आड़ा तड़क कह दिया जब पानी फिल्टर का पीते हो तो वाणी भी तो फिल्टर करो किसको क्या बोलना है कैसे आदर करना है कैसे सम्मान करना है क्या शब्द कहना है क्या बोलना है अपनी वाणी की फिल्टर का होना चाहिए वाणी ऐसी बोलिए मालूम है तुम लोगों को बोलो जरा वाणी ऐसी बोलिए जो मन का आप खोए पर आज के जमाने में वाणी ऐसी बोलिए जो तुमसे झगड़ा पर उससे मत बोलिए जो तुमसे तगड़ा जो तुमसे दमदार हो ना उससे आड़ा तड़ा मत बोलना नहीं तो एकही दिया ना दम एक बार यह जीवन ने दांतों से कह दिया था मेरे 32 भाई मेरा ध्यान रखा करो मैं बड़ी छोटी सी कोमल सी जिवान हूं तुम्हारी बहन हूं मुझे काट मत देना 32 दांतों ने कहा बहन तेरी सोगन हम तुझे नहीं काटेंगे पर बहन तेरे से निवेदन है तू अपने 32 भाइयों का ध्यान रखना किसी को आड़ी ते मत बोल देना तो एक ही में 32 की 32 निकल जाएगा ये जिवान भारी है सबसे भरा भारी काम करती है जिव्या


पित पक्ष की श्राद्ध के समय की यह शिव महापुराण की कथा है जिस पितृ पक्ष में पितृ देव और महादेव दोनों एक साथ कृपा बरसाते हैं और जीव का कल्याण कर जाते हैं दोनों एक साथ आपका एक अन्न का दाना आपका दिया गया एक अंश दान कितने लोगों का पेट भर रहा है कितने लोगों को सुख प्रदान कर रहा है आपके पानी की एक बोतल कितने लोगों को सुख प्रदान कर रहे जरूरी नहीं कि बहुत बड़ा भंडारा करोगे तो दानी कहलाओगे शिव महापुराण की तो कथा कहती है अगर एक छोटा सा पानी का आचमन भी किसी को करा दोगे तो भी दानी कहलाओगे किसी भूखे को एक दाना भी खिला दोगे तो भी दानी कलाओ छोटा सा छोटा सा पुण्य छोटा सा सत्कर्म बड़ी खुशी है बड़ा प्रसन्नता है हमको यहां पर इस वनवासी क्षेत्र के अंदर कुबेरेश्वर बाबा का जो भंडारा हम लोग बाबा की कृपा से चल रहा है समिति अपना चला रही और कुबेर अपना चला रहा है विले सेवा समिति अपना बड़े भाव से चला रही है उसको देखकर बड़ी प्रसन्नता होती है लोग भाव से उस प्रसाद को प आपको भी खुशी होना चाहिए जितने लोग टीवी पर सुन रहे हैं जितने फेसबुक पर सुन जितने य सुन रहे हैं कम से कम देखकर तो प्रसन्नता होगी कि हमारा दान हमारा सत्कर्म हमारा एक रुपया भी अच्छी जगह पर लगा है इसकी प्रसन्नता होना [संगीत] चाहि अपने भजन की प्रसन्नता रखो कि हम कहां बैठकर भजन कर रहे हैं हम कहां बैठकर सत्कर्म कर रहे हैं उसकी प्रसन्नता अपने भीतर होना चाहिए ।

कपिल मुनि का श्राप लग गया नेत्र खुले कपिल मुनि के और सारे 6 हज सगर के पुत्र जलकर भस्म हो गए राग के ढेर बन गए राजा सगर ने अपने पुत्र को भेजा अंश मान को पर कोई फल नहीं तब साधना करी राजा दिलीप आए फिर भागीरथ बाबा आए जिन्होंने गंगा जी की तप साधना करी गंगा जी की तप साधना करते हैं भागीरथ जी तो गंगा उछल कर कहती है किसकी सामर्थ्य का है जो मुझे पृथ्वी पर झेल ले किसकी सामर्थ्य किसकी सामर्थ्य का शिव महापुराण की कथा कहती है। 


अपने मुख से कभी अभिम के शब्द मत बोलिए अपने मुख से कभी अभिमान के शब्द मत बोलिए अपने मुख से कभी अंता के शब्द मत बोलिए क्योंकि अहंकार में तीन गए धन वैभव और वंश ना मानो तो देख लो रावण कौरव और कंस यह तीनों अकार में चले गए तीनों अभिमत में चले इस मा ने एक लाइन लिखी 

गंगा मैया ने अहंकार का शब्द कह दिया गंगा मैया ने अभि मत्ता का शब्द कह दिया मुझे कोई झेल नहीं सकता भागीरथ बाबा ने हाथ जोड़कर कहा मैं मानता हूं आपको पृथ्वी पर कोई झेल नहीं सकता मैं मानता हूं आपको पृथ्वी पर कोई झेल नहीं पाएगा पर मां मेरा विश्वास करता है पृथ्वी के देव देव अधि देव महा देव मेरा विश्वास करता है कि पृथ्वी के देव देवद देव महादेव आपको झेल सकते हैं मा पृथ्वी के देव देवद देव महादेव आपको ल सकते गंगा जी बोली गंगा जी ने कहा कौन महादेव कौन महादेव जो विष को पिए हैं वह महादेव जो नंदी की सवारी करते हैं वोह महादेव [संगीत] जो राख लपेट कर रहते हैं वह महादेव गंगा कहती है मेरी सुंदरता और मेरा तेज महादेव नहीं झेल सकते इतना शब्द सुनना था भागीरथ जी की आंख में से जल बह गया मां मैंने उन्हीं की आराधना कर कर तुमको पाया है हे मां मैंने उन्हीं की आराधना कर कर तुमको पाया है उनकी आराधना के बिना तो आप भी मुझे नहीं मिली थी मां यह मेरा विश्वास कहता है मां आपको शिव अपने जटा में अपने हाथों में जरूर झेल ले आपको शिव लेंगे गंगा ने फिर अहंकार का शब्द कह दिया गंगा जी ने फिर अभि मत्ता का शब्द कह दिया कह दो भोलेनाथ से गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार [संगीत] है गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार है कह दो भोलेनाथ से अगर वोह झेल सके तो झेल ले भागीरथ जी शंकर भगवान के धाम कैलाश पर पहुंच गए हाथ जोड़कर बोले हे करुणा सागर हे त्रिकाल दर्शी हे कैलाशी अविनाशी हे शिव हे शंकर हे ओ घड़ी हे दयालु हे दातार हे शिव करुणा करने वाले हे शंकर हे मेरे देवद महादेव मेरे भोलेनाथ मेरे त्रिकालदर्शी मेरे कैलाशी मेरे अविनाशी मेरे शि मेरा आपसे निवेदन है बाबा गंगा मैया पृथ्वी पर आने को तैयार है आप उनको झेल लेंगे शंकर भगवान भागीरथ जी से बोले मैं गंगा को नहीं झलू बड़पन देखिएगा व्यक्ति कितना भी ऊंचे स्थान पर बैठ जाए अगर उसके भीतर अहंकार नहीं है तो उसका बड़पन देखिएगा उधर की एल ईडिया चालू करिए लेफ्ट साइड के पंडालों की एडिया चालू करिए बड़प्पन देखिए मेरे भोलेनाथ का मेरे शंकर भगवान ने कहा मेरे ओगड़ दानी ने कहा मेरे शंभू बोले मेरे शिव बोले गंगा को मैं नहीं झेल सकता गंगा को मैं नहीं झेल तो भागीरथ जी बोले फिर गंगा सही कह रही है कि मेरा वेग कोई नहीं झेल सकता आप नहीं झेले तो कौन झेले शंकर भगवान कहते हैं गंगा को जाकर कि उसको हाथ में झेलने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी उसको तो मेरे बाल ही काफी है झेलने के [संगीत] [प्रशंसा] लिए केवल मेरा केश केवल मेरे बाल गंगा को झेलने के लिए काफी [संगीत] है कह दो गंगा जी से जाकर तैयारी करें आने की आप उन आदर नहीं करेंगे सम्मान नहीं करेंगे शंकर जी कहते हैं गंगा का सम्मान मेरे केश में आएगी तो खुद हो जाएगा दुनिया के लोग कहते हैं कि शंकर का चढ़ हुआ जल नहीं पीना चाहिए उनको कहना चाहिए कि शंकर भगवान के सिर पर गंगा है तो मरते समय गंगा जल भी मत [संगीत] पीना शंकर के सिर गंगा है तुम कहते हो शंकर पर ज चढ़ हुआ जल मत पियो तुम कहते हो शंकर पर चढ़ी हुई बिल पत्र मत खा तुम कहते हो शंकर पर चढ़ा हुआ जल मत पियो तो फिर गंगा जल क्यों पीते हो मरते समय घर के लोग दौड़ के जाते जल्दी गंगा जल लाओ आखरी सास चल रही है निपटने वाला है जा रहा है 

यह श्राद्ध भी हमको ज्ञान देते हैं कि जिंदा हो जब तक अपने मोबाइल की बदलते रहो निपट जाओगे तो एक ही फोटो दीवाल पर टंग जाएगा बदल नहीं पाओगे।

 



(2:40:31) महाराज आए तो चार गाड़ी भर कर [प्रशंसा] [संगीत] जा जोड़ा जोड़ा जोड़ा आखरी में जोड़ा [संगीत] समझाओ बहु सास से कहे भजन करो सास बहु से कहे भजन करो 

अरे दिन भर फोन चलाए मेरी सासू जी 

शिव पुराण में ना जाए मेरी सास 

अद्रक कूट के चाय पी जाए मेरी सासू जी 

कभी कथा में ना जाए मेरी सास 

दिन भर मनक निकाले मेरी सास 

कहां चित्त भरे उसको समझाओ 

शिव के बिना कहीं दिल ना लगाना 

शिव के बिना कहीं दिल लगाना 

बरना पड़ेगा तुझे आंसू बहाना 

वरना पड़ेगा तुझे आंसू बहाना 

शिव के सिवा कहीं दिलना 

शिव के सिवा कहीं दिल ना लगाना 

जो शिव का गुण गाने किया है 

जो शिव का गुण गान किया है 

सच्चा जीवन वही जिया है 

सच्चा जीवन वही जिया है 

सुमिरन के बल से तुझे सुमिरन के बल से तुझे मुक्ति है पाना 


शिव के सिवा कहीं दिल ना लगाना  

शिव के सिवा कहीं दिल लगा ना 

वरना पड़ेगा तुझे आंसू बहाना 

वरना पड़ेगा तुझे आंसू बहाना 

शिव के सिवा क दिलना लगाना 

शंकर के सिवा कहीं चित्त ना लगे 


गंगा को तो मेरे केस संभाल लेे गंगा के पास खबर पहुंची भरथ जी ने कहा कि आप आइए पृथ्वी पर संभालेगा कौन भागीरथ जी ने कह दिया शंकर भगवान के केस गंगा हंसकर बोली मुझे और केस मुझे और केस हो ही नहीं सकता हो ही नहीं सकता तो चलो मां गंगा पृथ्वी पर आने के लिए जो भाई इतने वेग से आई इतने वेग से शंकर जी तो अलमस्त होकर हो गए और गंगा मैया यहां जाए वहां जाए शंकर की जटा ऐसी विशाल थी उन्होंने घुमाना चालू करा गंगा को अंदर ही भर लिया अब गंगा अंदर छटपटा आने लगी बाहर कैसे निकलूंगी ।‌

गंगा छटपटा रही जटा के अंदर गंगा निकल ना पा रही जटा में से भागीरथ जी को पुकारा गंगा जी ने भागीरथ भागीरथ भागी भागीरथ जी आ बोलो मां अरे मुझे बाहर तो निकालो गंगा जी तुम तो कह रही थी कि मुझे कोई समा नहीं सकता क्षमा मांगती हूं। गंगा जी क्षमा मांगी भगवान शंकर ने थोड़ा सा खोल दिया गंगा जी नीचे आई कपिल मुनि के आश्रम में पूछा गंगा जी ने भागीरथ जी से मुझे क्यों बुलवाया मेरे पित्रों के मुक्ति के लिए मेरे पित्रों की मोक्ष के लिए।


आज भी शिव महापुराण की कथा कहती है अगर दुनिया के लोग तुमसे कह दे कि पित्र दोष है तुम्हारी बेटी की शादी नहीं हो रही तुम्हारे बेटे की शादी नहीं हो रही तुम्हारे यहां ये तकलीफ आ रही वंश नहीं बढ़ रहा बच्चे नहीं हो रहे घर में तकलीफ हो रही है कोई कहे पितृ दोष पितृ दोष पितृ दोष सीधा एक काम करिए सीधा एक काम छट के दिन अभी अभी शायद आज चतुर्थी या तीज होना चाहिए चतुर्थी छठ के दिन छठ तिथि श्राद्ध के महीने में श्राद्ध में 16 दिन के अंदर जो छठ आए षष्ठी आए वो छठ के दिन छठ के दिन शायद सोमवार क्या आना चाहिए सोमवार ही छठ होना चाहिए छठ के दिन गंगा जल एक कटोरी में रख लो गंगा जल नहीं हो तो कटोरी के अंदर जल और उसमें एक बेलपत्र डाल के रख लो उस गंगाजल को अपना जो पानी का मटका होता है हंडा होता है घर में पानी पीने की जगह होती है उस कटोरी को वहां रख दो और छठ के दिन रखकर सप्तमी के दिन उस कटोरी को उठाकर उसका जल अपने घर में घुमाकर शंकर के शिवलिंग पर समर्पित कर दो दुनिया का कैसा भी पित दोष होगा व समाप्त हो जाएगा कामना कर कर छट के दिन जिस लड़का लड़की का विवाह ना हो सोमवार की छट पड़ेगी जिस बच्चे का विवाह ना हो अगर अशोक सुंदरी की जगह पर का का आवाज आ रहा है बारबार बार बार कोई तार फाल्ट हो रहा है देखिए बार बार आवाज आ रहा है छट के दिन छठ के दिन अगर कोई लड़का लड़की का विवाह नहीं हो रहा है शादी ना हो रहा है तो उसके लिए छठ के दिन अशोक सुंदर वाली जगह पर एक लाल फूल और शंकर जी के शिवलिंग पर एक सफेद पुष्प चढ़ाकर पांच बेलपत्र समर्पित करकर एक लोटा जल अपनी कामना करकर चढ़ाओ और जो बेलपत्र चढ़ाई है उसमें से एक बेल पत्री उठाकर ले आओ बाबा संबंध पक्का करा कर ही र अगला श्राद्ध जब आएगा आप अपनी धर्म पत्नी के साथ मिलकर शिव की आराधना कर रहे हो आप अपने पति के साथ मिलकर शिव आराधना करें।


हमने अभी एक कथा में कहा था कि भोजन नहीं पचता है भोजन नहीं पचता है तो बीमार कर देता है भोजन नहीं पचा तो बीमार कर देगा यदि भोजन नहीं पचा तो हमको बीमार कर देगा और किसी की बात नहीं पची तो चुगल खोर बना देती है अगर बात नहीं पची और किसी ने कहा तुमसे ऐसा ऐसा ऐसा और बात नहीं पची ना तो तुम 10 जगह जाकर कहोगे उसने तो मुझे ऐसा कहा था उसने तो मुझे ऐसा बोल दिया था उसने तो मुझे ऐसा कह दिया चुगलखोर तुमहे तुरंत बना देगा एक चुटकी के अंदर चुगलखोर बना देगा अगर बात नहीं पची तो [संगीत] धन नहीं पचा तो तुम्हें अहंकारी बना देगा अगर तुम्हारे पास में धन आना चालू करा पैसा आना चालू हुआ धन संपदा आना चालू हो गई तुम्हें पद प्रतिष्ठा मिल गई और तुम्हारे घर में अगर धन आने लगा तो धीरे-धीरे अगर पचा नहीं वो तो तुम्हें अहंकारी बना देगा अभिमान के शब्द निकलने लगेंगे अभिम के शब्द निकलने लगेंगे अता के शब्द निकलने लगेंगे अभि मत्ता के शब्द निकलने लगे भोजन नहीं पचा बीमार कर देगा बात नहीं पची चुगलखोर बना देगी और धन वैभव सत्ता नहीं पची तो तुम्हें अहंकारी बना दे अभिम अहम तुम्हें प्रदान कर दे [संगीत] अहंकार कई बार [संगीत] बड़े-बड़े अगर कोई ऑफिसर हो जाते हैं और उनके घर के बच्चे अगर धन देख लेते हैं कि हमारे पिता के पास में कितना धन है हमारे घर में कितना धन है हमारे दादाजी के पास कितना धन है हमारे दादा य पद पर रहे हमारे पिता यह पद पर रहे और उनके पास में इतना धन है तो कई बार बच्चे चलते चलते रोड़ों पर भी किसी ना किसी से अपशब्द कहते हुए चले जाते हैं त मुझे जानता नहीं है त मुझे


(1:13:23) पहचानता नहीं है मैं किस ऑफिसर का बेटा हूं तूने मुझे देखा नहीं है मैं कौन हूं तू मुझे जानता नहीं है मतलब धन पच नहीं रहा धन पच नहीं रहा इसलिए अहंकार हो गया है बात पच नहीं रही इसलिए चगर खोर बना दे रही है भोजन पच नहीं रहा इसलिए बीमार बना दे रहा बचना भी तो चाहिए भोजन बचेगा तो कभी बीमार नहीं होगे बचेगी तो कभी चुगलखोर नहीं होगे धन बचेगा तो कभी अहंकारी नहीं होगे बचाना सीखो बचाना सीखो 


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