Day - 01 ll श्री शिव महापुराण कथा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll नासिक, महाराष्ट्र
Day - 01 ll श्री शिव महापुराण कथा ll पूज्य पण्डित प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले) ll नासिक, महाराष्ट्र - YouTube
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(00:00) डीपी कॉलेज के पास मालेगांव रोड नांदगांव जिला नासिक महाराष्ट्र से सीधा प्रसारण जय जय श्री राधे सभी भक्तों को हर हर महादेव साद जय श्री कृष्णा श्री सेवाय नमोस्तु सात दिवसी से सुंदर श्री सिव महापुराण की आलौकिक दव कथा हम सभी पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में श्रवण कर रहे हैं निश्चित ही यह हम सभी का सौभाग्य है बाबा भोलेनाथ की कृपा से हम सभी को आस्था चैनल के माध्यम से और नंदगांव नासिक महाराष्ट्र की पावन धरा से सुंदर आलौकिक दिव्य कथा श्रवण करने का श अवसर प्राप्त हुआ और निश्चित ही बधाई के पात्र है कथा के मुख्य जजमान आदरणीय विधायक
(00:43) महोदय श्री सुहास अना जी कांदे श्रीमती अंजुम ताई सुहाज जी कांदे नंदगांव नासिक महाराष्ट्र की पावन धारा से हम सभी को ये सुंदर कथा श्रवण कराने का सु अवसर प्राप्त करा 16 सरात के इन पावन दिनों में हम सभी को यह कथा श्रवण करने को मिल रही है देखिए बड़ा ही महत्व बताया गया है हमारे शास्त्रों में हमारे पुराणों में 16 सरात के बारे में जिससे भक्त कथा श्रवण करकर अपने जीवन को कृतार्थ में करते हैं आनंद में करते हैं और इन्हीं 16 दिनों में पूर्वजों को तारने के लिए जो भक्त अपने पूर्वजों को तारने के लिए प्रतिदिन दर्पण करते हैं तर्पण आदि क्रिया करते हैं और
(01:27) उन्हीं इन पावन दिनों में 16 रा के इन पावन दिनों में शिव महापुराण की कथा श्रवण करने का कितना महत्व है यह हम सभी को पूज्य गुरुदेव ने बताया है निरंतर नित्य नई नूतन कथाओं के माध्यम से पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को ना केवल हमारी संस्कृति से जोड़ा है अपितु पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को बताया है किस प्रकार से भक्ति की जाती है किस प्रकार से प्रभु की आराधना की जाती है देखिए दुनिया में ऐसा कोई कार्य नहीं है जो नहीं हो सकता है मेरे महादेव की कृपा होगी तो इस जगत के सारे कार्य होते हैं और वैसे भी उनकी कृपा के बगैर इस संसार में एक पत्ता भी नहीं ल सकता कोई भी
(02:12) कार्य संभव नहीं हो सकता क्योंकि हे मेरे महाकाल चरणों में आकर तेरे बस दूर कहीं ना जाऊं जिंदगी भर तेरे नैनों में बस यूं ही केद हो जाऊं ढूंढ सके ना कोई मुझे ना किसी को मैं मिल पाऊं कुछ ऐसा हो महाकाल कि तेरे कुछ ऐसा हो महाकाल कि तेरे डमरू में मैं छुप जाऊं एहसास हो तेरा हल पल मुझ में मुझे तुझसे इतनी मोहब्बत कर पाऊं कोई ख्वाहिश इस दिल में ना रहे तेरे इश्क के रंग में महाकाल मैं रंग जाऊं मैं रंग जाऊं बस हमारी इतनी ही तमन्ना रहती है हमारी इतनी ही आरजू रहती है कि हम महादेव के चरणों में जाकर बस जाए उनका दीदार कर सके और उनमें ही समाहित हो जाए
(03:00) हम सभी यही कामना रखते हैं और निरंतर यही प्रयास हम सभी का रहता है पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को नित्य नई नूतन कथाओं के माध्यम से ना केवल हमारी संस्कृति से जड़ा है और हम सभी को बताया है किस प्रकार से संसार सागर में हम सभी को रहना चाहिए किस प्रकार से हम सभी को कार्य करना चाहिए किस प्रकार से हम एक दूसरे को सहयोग प्रदान कर सकते हैं यह पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को बताया है इससे पहले हम सभी ने काटा कुंडली ही छत्तीसगढ़ की पावन धारा से वनवासी क्षेत्र से कथा श्रवण करी देखिए कथाएं कोई बड़े शहरों में बड़े राज्यों में निरंतर
(03:41) होती रहती है पर पूज्य गुरुदेव का एक मन था पूज्य गुरुदेव का एक संकल्प था कि यह हमारे वनवासी लोग कब जाकर कहां जाकर कथा श्रवण करेंगे इसीलिए पूज्य गुरुदेव ने उन सभी के बीच में कथा श्रवण कराई देखिए यह आसान नहीं होता है कि सी के लिए भी हम सभी जानते हैं वनवासी क्षेत्रों के बीच में रहना और उनके बीच में कथा सवण कराना जो पूज्य गुरुदेव ने नियम लिया एक संकल्प लिया उस उससे हम सभी को सीखना चाहिए देखिए एक आधार होता है सभी को जोड़ने का सभी सनातन धर्म को मानने वाले लोग हैं सभी हमारी संस्कृति से जुड़े हुए हैं तो एक आधार होता है यही कार्य करते हुए
(04:30) पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को कथा श्रवण कराई थी वनवासी क्षेत्र से और सभी वनवासी लोगों को यह कथा का भरपूर आनंद सभी वनवासी लोगों ने लिया उन भक्तों के दिल में क्या भाव थे यह हम सभी को देखने को मिला कई पत्रों के माध्यम से हम सभी को श्रमण करने को मिला किस प्रकार से उन्होंने अपने दिल की बात लिखकर पूज्य गुरुदेव से सांझा करी और वही पत्रों के माध्यम से हम सभी को पूज्य गुरुदेव ने शेयर कर हम सभी ने व पत्र पढ़े सुने और उससे हम सभी को पता चला कितना भाव था सभी के हृदय में महादेव की भक्ति के लिए ऐसा वे कभी सोच नहीं सकते थे कि पूज्य गुरुदेव उनके बीच में उनके छोटे
(05:15) से गांव में आएंगे और कथा श्रवण कराएंगे देखिए कथाएं अनंत है अपार है अपरम पार है और महादेव की तो जितनी भी कथा हम श्रवण कर सकते हैं वे कम है निरंतर हम सभी को पूज्य गुरुदेव ने जो कथाएं श्रवण कराई है उन कथाओं के माध्यम से हम सभी को सीखना चाहिए कि महादेव की भक्ति में जो रस है वह हम सभी को प्राप्त होता है एक लोटा जल का महत्व पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को बताया है किस प्रकार से आज पूरी संस्कृति को जोड़ दिया है पूज्य गुरुदेव ने पूरे सनातन धर्म को मानने वाले लोग सभी मंदिर जाते हैं बच्चे हो बूढ़े हो जवान हो माताएं हो बहने हो बुजुर्ग हो सभी
(06:03) वर्ग के लोग मंदिर जाते हैं जाजम पर बैठते हैं और महादेव से प्रार्थना करते हैं आराधना करते हैं आज हम सभी को पता चलता है किस प्रकार से मंदिरों में लंबी कतार लगी रहती है लंबी भीड़ लगी देती है महादेव की कथा से जो बदलाव हम सभी के जीवन में हुआ है हम सभी ने देखा है किस प्रकार से भक्तों का ताता मंदिरों में भी लगा रहता है और कहीं पर भी कथा होती है लाखों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं कथामृत का लाभ लेते हैं और अपने जीवन को कृतार्थ में करते हैं आनंद में करते हैं एक जाजम पर बैठकर पूज्य गुरुदेव ने सभी को एक जाजम पर बिठाकर पूज्य गुरुदेव
(06:44) ने जो कथाएं श्रवण कराई है निश्चित ही काफी सराय निय है और वैसे भी देखिए हम पृथ्वी पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जिसको समस्या ना हो पृथ्वी पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जिसको समस्या ना हो और पृथ्वी पर ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका हल मेरे भोलेनाथ के पास में ना हो निरंतर हम सभी ने देखा एक लोटा जल चढ़ाने से भक्तों के कई कार्य हुए हैं भक्तों के बहुत से बिगड़े कार्य बन चुके हैं जो कभी वो सोच भी नहीं सकते व सारे कार्य भक्तों के एक लोटा जल चढ़ाने से हुए लोटा जल चढ़ाने का नियम पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को बताया है और यह एक लोटा जल चढ़ाने का जो महत्व है उससे
(07:33) जो पुण्य फल तो प्राप्त होता है वह तो बात अलग ही है साथ में जब हम महादेव से जुड़ जाते हैं प्रतिदिन मंदिर जाना चालू कर देते हैं तो महादेव से हमारी सीधी पहचान सीधा कांटेक्ट हो जाता है हम सभी को ज्ञात है अगर किसी नेता मंत्री के पास प्रतिदिन हम जाते रहते हैं तो वह भी हमें पहचानने लगता है और हमारे कार्य बिना किसी को बीच में लाए हुए हमारे कार्य वैसे ही वोह संभव कर देते हैं ठीक इसी प्रकार से जब महादेव से हमारा सीधा कांटेक्ट हो जाएगा सीधी पहचान हो जाएगी सीधी पहचान हो जाएगी तो हमें कभी ना ही सोचना पड़ेगा और ना ही देखना पड़ेगा
(08:20) बस महादेव को हमको एक अर्जी लगानी है और उनके चरणों में जाकर अपने मन की बात रखनी है तो निश्चित ही हम सभी के कार्य संभव होंगे यही कार्य हम सभी को पूज्य गुरुदेव ने बताया है वैसे भी कितना महत्व है मेरे महाकाल राजा का कितना महत्व है नाम उच्चारण का बात मन की बात जैसा हम सभी को पूज्य गुरुदेव ने बताया है और मन के भाव क्या होते हैं मन की बात क्या होती है यह एक प्रश्न आया कि अपने मन के भाव लिखो किसी ने प्रेम लिखा किसी ने प्रीत लिखी किसी ने इश्क लिखा किसी ने मोहब्बत लिखी किसी ने प्यार लिखा किसी ने चाहत लिखी फिर लगा चार अक्षर ही काफी है मन की बात लिखने
(09:07) के लिए तब मैंने सब कुछ मिटा के केवल महाकाल लिख दिया और इन चार शब्दों में पूरी ही दुनिया समाई थे दुनिया इन चार शब्दों में समाई थे अगर हम दिल के भाव से जिस दुनिया को देखेंगे संसार को देखेंगे तो मेरे महाकाल राजा के सिवा इस पृथ्वी पर और कुछ भी नहीं है जो हम कार्य कर सके देखिए पूज्य गुरुदेव ने जिस प्रकार से हम सभी को कथाओं के माध्यम से अलग जगा कर रखी है एक हम सभी के हृदय में जो प्रीत जगाकर रखी है आज कभी एक दिन भी कथा नहीं आती है तो अधूरा सा लगता है मन में सूनापन लगता है हम सभी को ज्ञात है कि कथा सभी के हृदय में बैठ चुकी है सभी
(09:58) के हृदय में लग की है आज एक दिन भी कथा नहीं होती है तो सभी को बड़ा ही सुना बड़ा ही अधूरा पन लगता है हम सभी ने देखा है कि किस प्रकार से प्रतिदिन जो कथाएं आती हैं इसमें इतने फोन नहीं आते हैं लेकिन जिस दिन कथा नहीं आ पाती है उस दिन भक्तों के चार गुना ज्यादा फोन आते हैं तो इससे पता चलता है कितने मन में लालसा है भक्तों को कथा श्रवण करने की पहले माताएं बहने कथा श्रवण नहीं कर पाती थी नहीं करती थी पहले टीवी सीरियल चैनल के माध्यम से टीवी सीरियल वह देखती थी नाटक वह देखती थी लेकिन अब सभी का मन शिव महापुराण की कथा में लग चुका है
(10:44) सभी का भाव शिव महापुराण की कथा में समाहित हो चुका है और यही हम सभी को करना है सभी सनातन धर्म के मानने वाले लोग ऐसे कार्य करें जिससे यह सनातन धर्म चारों दिशाओं में फैलता रहे चारों दिशाओं में इसकी पताका लहराती रहे हम सभी ने देखा है पूज्य गुरुदेव ने ना केवल हम सभी को सनातन धर्म की कथाएं श्रवण कराई हैं अपितु हम सभी को ज्ञात है पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को सेवा का भाव भी सिखाया है आज कहीं पर भी कथा होती है तो भक्त सेवा करने के लिए भी जाते हैं और कोई 10 लोगों का भोजन बनाकर ले जाता है कोई 20 लोगों का भोजन बनाकर ले जाता है कोई
(11:30) 50 लोगों का भोजन बनाकर ले जाता है कोई पोहा बनाकर ले जाता है कोई नमकीन ले जाता है कोई पानी की बटल ले जाता है वे भक्तों में बांटते हैं ताकि के कोई भी भक्त भूखा ना रहे भक्तों को सेवा का भाव वह जागृत करते हैं और देखिए यही सेवा हमारे सनातन धर्म में हमको सिखाता है पूज्य गुरुदेव ने इसका बड़ा ही महत्व बताया है आज हम सभी देखते हैं किस प्रकार से भक्तों की सेवा के लिए सभी भक्त ललाद होते हैं और निरंतर सेवा का कार्य वह करते रहते हैं आज हम सभी कुबेर भंडारी की पावन धरा का महत्व भी जानेंगे कुबेर भंडारी की जो धरा है लाखों भक्तों का प्रतिदिन आगमन
(12:16) होता है इस धरा पर कंकट शंकर की यह पावन धरा है कंकट शंकर की यह पावन भूमि है यह जप स्थली है तप स्थली है साधना स्थली है आराधना स्थली है भगवान की कृपा दृष्टि धरा पर हमेशा विद्यमान होती है हम सभी को ज्ञात है किस प्रकार से भक्तों का ताता इस धरा पर प्रतिदिन लगा रहता है और निरंतर भक्त आते हैं अपने मन की बात वह महादेव के चरणों में रखते हैं और किसी भी स्थान पर बैठकर 108 बार श्री शिवाय नमस्तुभयम का जाप करते हैं और अपने जीवन को कृता में करते हैं आनंद में करते हैं हम सभी को ज्ञात है कि 12 तिलिंग के मध्य में केंद्र में यह धरा स्थापित हो और
(13:04) इसका निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन इस धरा पर अभी भी भक्तों का लाखों की संख्या में आगमन होता रहता है निरंतर भक्तों के सारे कार्य होते हैं वे भक्तों के जब कार्य संभव हो जाते हैं तो वह कोई पैदल चलकर नंगे पैर पैदल चलकर कई किलोमीटर दूर से आता है कोई घुटनों के बल पैदल चलकर आता है और कोई दंडवत प्रणाम करते हुए कुबेर भंडारी की पावन धारा पर पहुंचता है ऐसा महत्व है इस धारा का क्योंकि कई सैकड़ों कथाएं हमने कोरोना काल महामारी के अंतर्गत इस धरा से श्रवण कराई थी पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को जब हम सभी अपने घरों में केत थे पूज्य गुरुदेव ने सभी भक्तों के लिए यह
(13:49) कथा श्रवण कराकर सभी को एक आत्म बल प्रदान करा था सभी को एक हिम्मत दिलवाई थी देखिए इस दुनिया में आत्मबल का बड़ा ही महत्व होता है उस समय में हम सभी को भगवान की कृपा दृष्टि की अति आवश्यकता थी हम सभी को भगवान के आशीर्वाद की अति आवश्यकता थी और पूज्य गुरुदेव ने कुबेर भंडारी की पावन दरा से वही भगवान का आशीर्वाद हम सभी को दिलवाया हम सभी को प्राप्त हुआ जिससे ना केवल हम सभी इस दुनिया में सही सलामत है अपितु हम सभी को इस भयंकर बीमारी से लड़ने का एक हिम्मत भी पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को दिलाई थी क्योंकि कई सैकड़ों कथाएं इस धरा से होती
(14:37) थी एक बार किसी भी स्थान पर शिव महापुराण की कथा हो जाती है तो वह जगह अपने आप में सिद्ध हो जाती है ठीक इसी प्रकार से इस धरा पर कई सैकड़ों कथाएं हुई है और कथाओं के माध्यम से हम सभी ने जाना है किस प्रकार से पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को सिखाया है हम सभी को बताया है और हम सभी ने देखा है किस प्रकार से सेवा का कार्य भी इस धारा से प्रतिदिन सुचारू रूप से होता है भोजन भंडारे की सेवा प्रतिदिन सुचारू रूप से चलती है जिसमें हम सभी को ज्ञात है कि लाखों की संख्या में सैकड़ों की संख्या में सभी भक्त भोजन भंडारे का आनंद लेते हैं और अपने जीवन को कृतार्थ में करते हैं
(15:24) आनंद में करते हैं साथ में आप सभी को ज्ञात है कि इस भोजन भंडारे में आप भी सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं इसका मात्र शुल्क 000 रखा गया है यह आपको एक बार ही जमा करना है और आप आजीवन भोजन भंडारे की सदस्यता ग्रहण कर लेंगे इससे साल में एक दिन आपके नाम से भी भोजन भंडारा कराया जाएगा और यही क्रम प्रतिदिन 365 दिन चलता रहता है और जिसमें लाखों सैकड़ों हजारों भक्त प्रतिदिन भोजन भंडारे का आनंद लेकर अपने जीवन को साथ प करते हैं आनंद में करते हैं आप सभी को ज्ञात है गौ माता की सेवा जो कि प्रतिदिन सुचारू रूप से चालू रहती है जिसमें गौ माता की सेवा के
(16:11) लिए एक और भव्य गौशाला का निर्माण कार और चालू हो चुका है जिसमें आप सभी को ज्ञात है कि गोवंश बढ़ता है तो इनको रखने के लिए और बड़ी व्यवस्था और सुंदर व्यवस्था की जा सके इसलिए यह सुंदर एक और भव्य गौशाला का निर्माण कार्य सुचारू रूप से चालू हो चुका है आप सभी को ज्ञात है कि प्राथमिक उपचार केंद्र स्वास्थ्य शिविर के लिए भी निरंतर पूज्य गुरुदेव हमेशा कार्य करते हैं स्वास्थ्य संबंधित सारे कार्यों में हमेशा श्री विलेश सेवा समिति आगे रहती है निरंतर प्राथमिक उपचार केंद्र यहां पर चालू रहता है जिसमें भक्तों की सुविधा के लिए दवाई
(16:58) गोली भी रूप से वितरण की जाती है और समय समय अनुसार स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं जिससे भक्त अपने स्वास्थ्य संबंधित जानकारी प्राप्त कर सके और अपने स्वास्थ्य के बारे में वे जान सके किस प्रकार से इस प्रकार से यह सारे कार्य चलते रहते हैं जिसमें दो एंबुलेंस की व्यवस्था भी यहां पर 24 घंटे उपलब्ध रहती है और आप सभी को ज्ञात है एक और भव्य हॉस्पिटल का निर्माण कार गुरुदेव ने सर्व सुविधा युक्त हॉस्पिटल का निर्माण कार्य चालू कर दिया है जिससे भक्तों को किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत परेशानी ना हो और भक्त बड़े ही आराम से बड़े ही आराम से सुंदर यह सेवा प्राप्त
(17:46) कर सके और भक्तों को किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत ना हो साथ में आप सभी को ज्ञात है किस प्रकार से 251 कमरों की जो भव्य विशालतम धर्मशाला बनने जा रही थी उसका निर्माण का बढ़ाते हुए पूज्य गुरुदेव ने 351 कमरों की यह भव्य विशाल धर्मशाला बनेगी 100 कमरों का इजाफा पूज्य गुरुदेव ने इसमें और करा है ताकि के भक्त बड़े ही आराम से रुक सके और भगवान का भजन कीर्तन स्मरण करकर अपने जीवन को कृतार्थ में कर सके आनंद में कर सके आप सभी को ज्ञात है कि सेवा के यह सारे कार्य श्री विठ्ठले सेवा समिति के सानिध्य में चलते हैं यह सारे कार्य संभव तभी हो सकते हैं जब
(18:33) हम इसमें सहयोग प्रदान करें और देखिए श्री विले सेवा समिति हमेशा आपके सहयोग से ही यह सारे बड़े-बड़े कार्य करती है आप सभी को ज्ञात है कि अभी वनवासी क्षेत्र में भी जो कथा हुई थी यह आप सभी का सहयोग प्राप्त होता है तभी इस तरह के कार्य संभव होते हैं और इस तरह के कार्य संभव हो सकते हैं इसलिए निरंतर श्री विठ्ठले सेवा समिति को सहयोग प्रदान करें देखिए छाता हमें बारिश से नहीं बचा सकता है देखिए हम छाते के नीचे खड़े हो सकते हैं लेकिन बारिश में हम फिर भी भीग जाते हैं छाता हमें बारिश से नहीं बचा सकता है लेकिन एक हौसला एक हिम्मत हमें छाता अवश्य
(19:14) प्रदान कर देता है बारिश में खड़े होने के लिए ठीक इसी प्रकार से अगर हमारे सही समय पर हमने दान पूण्य धर्म करा है अगर भगवान ना करे हमें किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत परेशानी आए उस समय जो हौसला हमें प्रदान करेगा वह हमारा दान पुण्य धर्म ही है जब हमने जो सही समय पर करा है सही वक्त पर करा है तो यह हौसला हमें प्रदान करेगा और महादेव की कृपा हमें निरंतर प्राप्त होती रहेगी आप सभी को ज्ञात है कि इसी क्रम में जिन दानदाताओं को अपनी सहयोग राशि प्रदान करना है अपनी सहयोग राशि देना है श्री विठ्ठले सेवा समिति को वे टीवी स्क्रीन पर
(19:57) श्री विठ्ठले सेवा समिति को अकाउंट नंबर एक्सस बैंक अकाउट सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का चल रहा है दोनों में से किसी भी अकाउंट में अपनी सग रासी जमा करकर अपना नाम वो whatsapp2 रूप से अनाउंस किया जा सके सुंदर इसी क्रम में जिन दानदाताओं ने अपनी सहयोग राशि प्रदान करी उन सभी पावन सारी पुण्य सारी दानदाताओं के नाम श्री राम किशन जी महेंद्रगढ़ से सुंदर आपने 001 की सग राश प्रदान करी मुकेश जी पारिक की तरफ से चुरू राजस्थान से की सग आप की ओम प्रकाश जी की तरफ से को छतीसगढ़ से सुंद 00 ओम प्रकाश जी साहू छत्तीसगढ़ से सुंदर कीग आप की विनोद जी पंडिया की
(20:37) तरफ से देवास मध्य प्रदेश से विष्णु विश्वास जी की तरफ से राजस्थान से 00 संतोष कुमार जी त्रिपाटी लखनऊ उत्तर प्रदेश से 00 मनोरमा सिंह जी की तरफ से राय बरेली उत्तर प्रदेश से 001 की आपने स की अनिल सिंह जी छपरा बिहार से सुंद 00 पूजा दीपक जी गोड़ की तरफ से कानपुर उत्तर प्रदेश से 001 नंदन जी की तरफ से सुधा गुप्त राजस्थान से 001 अनुज जी तिवारी फतेहपुर से सुधा 00 गुप्त दन में अहमदाबाद गुजरात से 551 अनीता कुमारी जी की तरफ से बेगू सरा बिहार से सुधा 500 संतोष जी खंडा की तरफ से दिल्ली से सु ऋषि कुमार जी राजपूत फरीदाबाद हरियाणा सुंदर 000 की सग
(21:13) रासी देकर अजीबन मज मड एक्स्था ग्रहण करी सुनेरे अक्षरों में अपना नाम अंकित कराया बहुत-बहुत बधाई सुंदर विचार आपके सुग से आपने सत की ऋषि कुमार जी राजपूत की तरफ से सुंदर सगरा समर्पित की सावित्री जी चौरसिया की तरफ से कोलकाता वेस्ट बंगाल से सतिंद्र कुमार जी की तरफ से पंजाब से 001 धीरेंद्र जी अग्रवाल की तरफ से मोहबा से सुंदर की अनिल जी की तरफ से दिल्ली से सुंदर 00 रिति कुमारी जी की तरफ से राची झारखड़ से सु 500 सला जी पंडिया की तरफ से दौलतपुर से सु 500 की ससी आपके स की रीता देवी जी की तरफ से दिल्ली से नीलम देवी जी की तरफ
(21:47) से जितेंद्र राजमल जी राठौर की तरफ से खरकन मध्य प्रदेश नरेंद्र कुमार जी की तरफ से जाबरा मध्य प्रदेश की की साकेत कुमार सिंह जी की तरफ से औरंगाबाद महारा जति लोकेश जी जोशी की तरफ से अमरावती मराठी से 5 राजत कुमार जी की तरफ से दिल्ली से सु प्रेमचंद प्रसाद जी की तरफ से दुर्ग दुर्गा दुर्गापुर वेस्ट बंगाल से सुधा अनीता काव्या जी सोनी की तरफ से सु की स आप की काव्या सिंह जी की तरफ से सु रुमानी महेश जी सन की तरफ से बड़वानी मध्य प्रदेश से चंद्रकांत जी की तरफ से पालघर महाराष् से 5 कीग आपने बाबा कुरेश्वर दाम की बहुत बहुत विचार आपके सुग से आपने सत की ओम
(22:24) प्रकाश जी पाल की तरफ से दिल्ली से सु 51 सीता एम सुवर्णा जी की तरफ से सु की कंज सना रुद्रपुर उत्तराखंड से सु देवी दिली मंजू जीी गुप्ता की तरफ सेपरा बहार की की राकेश जी खंडेलवाल की तरफ से संजीव कुमार जी की तरफ सेया चिंता देवी जी की तरफ अरविंद जी दक्ष की तरफ से तराना मध्य प्रदेश की आपके जो अन्य क्षेत्र 16 सरात केन पा दिनों में चल रहा है उस क्षेत्र में समर्पित की बहुत बहुत बधाई सु विचार आप आप समित की विजय जी कटियार की तरफ से साजा सुरेश जोशी जी की तरफ से हवानी उत्तराखंड सु 00 कीग से आपने बाबा कुरेश्वर धाम की बहुत बहुत बई सुंद विचार
(23:13) आपके से आप सम की लक्ष्मी जी की तरफ से दिल्ली से सु आपने समित की लक्ष्मी देवी उत्तराखंड से सु कीत की यशोदा जी पेरिया की तरफ से भोपाल मध्य प्रदेश स्वर्गीय कुंती देवी जी कीति मुनीज शर्मा अजमेर राजस्थान से सुधा 001 की से की संतोष जी गुप्ता दिल्ली से सुधा 00 मुकेश चंद जी गुप्ता की तरफ से दिल्ली से सुधा 51 की सग से अपने बाबा कुरेश्वर दाम की बहुत-बहुत बधाई सुंदर विचार आपके सुग से आपने समत की उदय प्रताप सिंह जी की तरफ से बस्ती उत्तर प्रदेश से 11 की की उवसी जी की तरफ से प्रियाग उत्तर प्रदेश से 001 महेंद्र कुमार जी पंचाल की
(23:49) तरफ से दिल्लीप से सुधा 551 मंजू जी गुप्ता हिमाचल प्रदेश से ₹1 गुप्ता में सुधार ₹ अंकित जी आदाब की तरफ से टा उतर प्रदेश से 00 की स से अपने बाबा को सत की बहुत-बहुत बधाई सुधा विचार आपके सुग से आपने समत की गुप्त में सुधा 500 कीग से आपने समर्पित की आजाद जी यादाव की तरफ से कलनार हरियाणा से सुंदर 001 की सत की नितिन जी यादव की तरफ से कन्नार हरियाणा सुंदर 505 उमा भारती जी की तरफ से गलिर मध्य प्रदेश ₹ की की वेदवती जी की तरफ से सु रामेश्वरी जी जबर की तरफ से सुधा 00 जय विजय जी पुरोहित की तरफ से अमरावती मराठ से राधा देवी जी गुप्ता की
(24:24) तरफ से 51 रोहित महेश कुमार जी की तरफ सेस हरियाणा सत्यपाल सिंह जी की तरफ से सु 001 आकाश जी जसपाल की तरफ से बिहार सु तारा जी महेश्वरी महू उत्तर प्रदेश तो सु 00 अमित जी निषद की तरफ से स1 राजेश जी परमार की तरफ से अहमदाबाद गुजरात से स गुप्त दन में मेरठ उत्तर प्रदेश से 00 सीताराम जी मालवी की तरफ से हरदा मध्य प्रदेश से अनुज सिंह जी की तरफ से लखनऊ उत्तर प्रदेश से की एस के पांडे की तरफ से कानपुर उत्तर प्रदेश से 00 रघुनाथ जी अशोक जी की तरफ से पुणे महाराष्ट्र से 00 श्री प्रसाद विश्वनाथ जी इंदुलकर की तरफ से नांदर महाराष्ट्र
(24:59) की सरसी आपने समत की नंद कुमार जी चंद्रकर की तरफ से रापुर छतीसगढ़ 500 कौशल कुमार जी की तरफ से बिहार से सु 00 की समर्पित की निर्माण जी भारद्वाज की तरफ से भला छतीसगढ़ सु युवराज जी जगदाले की तरफ से सिलवासा से सुंदर आपने 500 की आप की मंड राव जी मराठा की तरफ से चित्तौड़ राजस्थान चंद सिंह जी गौतम की तरफ से बालागढ़ मध्य प्रदेश पुष्पा भाई जी की तरफ से नागपुर मराठी से की आप सम की दिनेश जी सिरे की तरफ से ू जी की तरफ से सुंदर ओ सिखा जी साह की तरफ से बनगर मध्य प्रदेश से सुंदर कुमार तर कमला की तर सुनीता जी सा की तर लखन जी यादव सागर
(25:46) सु सुशील कुमार जी चौरस मुंबई बाबा बहुत बहुत बई ऋषिराज सि अगर मालवा मध्य प्रदेश जी गुप्ता की तरफ से कोलकाता प बंगाल सुंदर की की सरस्वति की तरफ से जारखंड सुंदर आपने की की गुप्तान जयपुर राजथान राकेश कुमार जी गुप्ता की तरफ से दिल्ली अशोक मर्जी की तरफ से 40 गा मरा हत विशाल जी की तरफ से साधा महाराष् जयपुर राजन दक्ष ओम प्रकाश जी की तरफ से ला मध्य प्रदेश र देवी जी चंडीगढ़ पंजाब से सुंदर आपने की बाबा कु सम की सतबीर जी भारद्वाज की तरफ से फरीदाबाद हरियाणा से सुंदर आपने 00 की सरसी समर्पित की रंजी देवी जी की तरफ से सुधा 00 अलिया
(26:38) देवी जी की तरफ से छपरा बिहार से सुधा 00 महल जी चौर की तरफ से सुंदर गुप्त कानपुर उत्तर प्रदेश से 551 सरिता गौतम जी की तरफ से पानी पत हरियाणा सुंदर 00 विद्या देवी जी की तरफ से सुंदर आपने दिल्ली से 00 की की शुभम जी साहू की तरफ से सुधा 00 युवराज जी पवार की तरफ से सुधा 00 हरि नामदेव जी मराठे की तरफ से सुधा 00 श्याम सुंदर सुर सोनी की तरफ से अल्फ राजस्थान से सुधा 001 राज रानी जी की तरफ से सुधार 501 की की सुमित्रा देवी जी दिल्ली से सुंदर 501 देवेश देवेश जी की तरफ से दुर्ग छत्तीसगढ से सुंदर लखन लखन जी की तरफ से दिल्ली से
(27:13) सुंदर 0001 की की भारती बहन अशोक कुमार जी की तरफ से सूरत गुजरात से सुंदर आपने 1 की स बाबा कुरेश्वर धाम की देवी सिंह जी यादव की तरफ से सूरत झांसी उत्तर प्रदेश से सुंदर 000 की सरसी देकर आजीवन भोजन मेडर एकथा ग्रहण करी सुनीर अक्ष अपना नाम अंकित कराया बहुत-बहुत बधाई सुद्ध विचार आपके स सुग आपने सत की रमेश लाल जी की तरफ से सुधा 5100 की सग आपने बाबा कुमरे समत की बहुत-बहुत बधाई सुंदर विचार आपके सुदर सग से आपने समत की मीरा देवी जी की तरफ से 00 संजू जी शर्मा की तरफ से सु 5 अशोक जी गुप्ता नेपाल सुंदर आपने 00 की स की दिनेश
(27:47) जी कलाल की तरफ से अलीराजपुर मध्य प्रदेश से सुधा 00 सुरेश जी आव की तरफ से सुधा 00 बलू जी की तरफ से सुंदर योगेश जी की तरफ से 00 की की ममता जी गुप्ता दिल्ली से 00 सुनील जी गुप्ता की तरफ से सु 500 की आपने स की अनीता अशोक कुमार जी चौहान की तरफ से सुधा 00 अनिल विशाल जी की तरफ से सुधा 500 की सगसी आपके सत की संजय जी की तरफ से कानपुर उत्तर प्रदेश से 00 की स आप स की नितिन जी की तरफ से सिडी मराठ से सुंदर 00 की सग आपने बाबा कुरेश्वर धाम स की बहुत-बहुत बधाई सुद्ध विचार आपके सु सगसी आपने सत की सावित्री जी की तरफ से सुद की
(28:23) आप की कांति देवी जी की तरफ से सु श नारायण जी धनगर की तरफ से सुंदर आप रोहित जी की तरफ से सुंदर ₹1 की आप अजय जी जसवाल मुंबई से सुंदर ₹1 जगदीश जी की तरफ से सुंदर 001 प्रीति जी की तरफ से झारखंड से सुधा 00 मीना जी दिलीप जी की तरफ से सु 00 कुसुम जी शर्मा की तरफ से सु 00 अनू जी साहू की तरफ से सुंदर 111 की स की गुप्त दन में सुंदर 01 धनमंडी की तरफ से सुंदर 001 माला देवी जी की तरफ से सूरत गुजरात से सुंदर आपने 500 की से सत की सभी दानदाताओं को मैं हृदय की आनंद गराई से नमन करता हूं डत प्रणाम करता हूं सुंदर स्वग आपने समर्पित की जो भक्त अपनी स्वग
(29:01) रासी मंदिर गौशाला बृ आश्रम अन्य क्षेत्र बाबा कुरेश्वर धाम समर्पित करना चाहते हैं वे टीवी स्क्रीन पर श्री बिठले सेवा समिति के दो अकाउंट नंबर एक्सिस बैंक का और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का चल रहा है दोनों में से किसी भी अकाउंट में अपनी स्वग राश जमा करकर अपना नाम े सकते हैं और अपने नाम का अनाउंसमेंट करवा सकते हैं आइए सीधे हम सभी प्रथम दिवस की कथा सवण करेंगे जय जय श्री राधे हर हर महादेव श्री शिवाय नम श्रवण करने को मिल रही है देखिए बाबा कुबरे शवर धाम की स्थापना होने वाली है इसलिए बाबा कुबेरेश्वर धाम 12 ज्योतिर्लिंग के बिल्कुल मध्य में स्थापित
(29:41) हो रहे हैं कुबेरेश्वर धाम का निर्माण कार्य चल रहा है और एक पूज्य गुरुदेव के संकल्प अनुसार एक भव्य और विशाल गौशाला का निर्माण कार्य भी चल रहा है कुबरे शवर धाम पर एक एंबुलेंस की व्यवस्था भी भी की गई है जो भी भक्त वहां पर आते हैं उनके लिए प्राथमिक उपचार केंद्र की व्यवस्था भी की गई है जो भक्त बाबा कुरेश्वर धाम की पावन धरा पर आते हैं अपनी मन की जो मुरा लेकर बाबा कुबेरेश्वर धाम की धरा पर पहुंचते हैं जो भी मन में संकल्प लेकर पहुंचते हैं बाबा कुबेर भंडारी बाबा बाबा राजाधिराज महाकाल राजा उनकी मुरा उनकी मनोकामना जल्द ही पूर्ण करते हैं जो भक्त एक बार बाबा
(30:27) कुबरे धाम की पावन धारा पर पहुंच जाते हैं उनकी मनोकामना बाबा कुबेर भंडारी तीन महीने में ही पूर्ण कर देते हैं ऐसे बाबा कुबेर भंडारी की असीम कृपा हम सभी भक्तों पर और आप सभी भक्तों पर विद्यमान है ऐसे ही और बाबा के मंदिर निर्माण कार्य में जो भक्त अपनी सहयोग राशि श्राद्ध पक्ष के उपलक्ष में जो भक्त अपनी सहयोग राशि देना चाहते हैं अपने पित्रों के निमित्त जो भक्त अप सहयोग राशि बाबा के मंदिर निर्माण कार्य में देना चाहते हैं या भंडारे में अपनी सहयोग राशि देना चाहते हैं वह भी अपनी सहयोग राशि दे सकते हैं टीवी के माध्यम से आस्था चैनल के माध्यम
(31:11) से और इसी के साथ में आज मनमाड़ नासिक की पावन धारा पर पूज्य गुरुदेव का आगमन हो चुका है कथा का प्रथम दिवस से पोथी का आगमन भी हो चुका है जय जय श्री राधे श्री शिवाय नमस्तुभयम [संगीत] गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा गुरुर साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः गुरु जी की कुटिया
(32:19) को मैंने फूलों से सजाया है गुरुजी की कुटि को मैंने फूलों से सजाया है मेरे घर आओ गुरुजी हो मेरे घर आओ गुरुजी मैंने आपको बुलाया है मेरे घर आओ गुरु जीी मैंने आपको बुलाया है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत]
(33:31) [संगीत] [संगीत] गुरु मेरे ब्रह्मा है गुरु मेरे विष्णु है हो गुरु मेरे ब्रह्मा है गुरु मेरे विष्णु है ओ गुरु मेरे शिव बोले ओ गुरु मेरे शिव बोले जिसने जगत रचाया है गुरु मेरे शिव बोले जिसने जगत रचाया है गुरु जीी की कुटिया को मैंने फूलों से सजाया
(34:42) है बोलिए पर गुरुदेव की जय जय जय श्री राधे श्री शिवाय नमस्तुभयम पूज्य गुरुदेव का आगमन हो चुका है व्यासपीठ पर पूज्य गुरुदेव विराजमान हो चुके हैं और मैं हमारे लाडले ठाकुर जी महाराज के चरणों में नमन करता हूं और पूज्य गुरुदेव के पावन चरणों में नमन करते हुए और आप सभी शिव भक्तों के पावन चरणों में नमन करता हूं कि आप सभी भक्त यहां कथा में उपस्थित हुए हैं मैं श्री माननीय आमदार विधायक महोदय श्री सुहास जी अरना कांदे से निवेदन करता हूं कि वह आए और दो मिनट का उद्बोधन हम सभी भक्तों को कृता में करें जजमान से मैं निवेदन करता हूं कि वह
(35:29) दो मिनट के लिए हम सभी को उद्बोधन देंगे पूज्य गुरुदेव व्यासपीठ पर मंच आसीन हो चुके हैं हम सभी भक्त पूज्य गुरुदेव के मुखारविंद से आज प्रथम दिवस की कथा में प्रवेश करेंगे आज प्रथम दिवस की कथा हम सभी और आप सभी मिलकर कथा का अमृतम आनंदमय प्राप्त करेंगे आप सभी भक्त कथा पांडाल में उपस्थित हुए आप लाखों की संख्या में आज यहां पर उ उपस्थित हुए हैं आप सभी भक्तों को बहुत-बहुत साधुवाद बहुत-बहुत धन्यवाद आप सभी भक्त यहां पर उपस्थित हुए हैं देखिए कोई भक्त धूप में खड़े हैं तो कोई भक्त पेड़ की छाव में खड़े हैं इसलिए मैं सभी भक्तों से निवेदन करता हूं कि वह
(36:17) व्यवस्थित रूप से आनंद में रहे और कथा अमृत का लाभ ले देखिए शिव महापुराण की कथा हम सभी भक्त पूज्य गुरुदेव के पावन सानिध्य में श्रवण कर रहे हैं [प्रशंसा] [संगीत] कमरे लावली लंगोटी गतना गो बडो लग कमर ले लावली लंगोटी गड़ना गो बड लती
(37:24) हो कमरे ले लावले लंगोटी गणित नाग बडल की हो कमर ले लावली लंगोटी गत ना गो बड लती आवड तुला बेलाची आवड तुला बेलाची बेलाचा पाडाची हे मुड़ शंकरा हे भोड़ा शंकरा आवड़ कोलावे लाख आवड़ तला बेला जी ला च पाना जी हे भोड़ा शंकरा शंकरा हे भोड़ा शंकरा शंकरा हे भ शंकरा शंकरा [संगीत]
(38:30) शकरा आवड़ तला वेला जी आवड़ तला वेलाज आवड़ तुला बलाज आवड़ तुला वेलाज लाचा पानाची हे भोड़ा शंकरा शंकरा हे भोड़ा शंकरा शंकरा हे बोरा शंकरा हे भुला शंकरा हे भुला शंकरा हर [संगीत] हर अपने स्थान पर बैठकर भगवान शिव जी से अपने मन की बात बड़े भाव के साथ दिल से हृदय से प्रार्थना करेंगे सब भाव से बाबा से विनय करेंगे पितृ पक्ष है बड़े आनंद के साथ आप और हम सब मिलकर बाबा से अपने दिल की बात कहे आपकी आवाज हमारे तक पहुंचे दिल से आप और हमको श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का स्मरण
(39:38) कर जिसको जहां जगह मिल जाए वहां बैठे और भाव से बाबा से प्रार्थना करें बार-बार यह योग नहीं लगता मौका मिला है कथा में बाबा को प्रार्थना करने का दिल से सभी पंडाल के जितने भक्त बैठे हैं भाव से बाबा से निवेदन [संगीत] करें श्री शिवाय नमस्तुभयम [संगीत] नमतु श्री शिवाय नमतु
(40:43) श्री शिवाय नमतु श्री शिवाय नमतु [संगीत] भोला सब दुख काटो तुम्हारा ओ भ सब दुख काटो शिव शंकर जप तेरी माला भोले बा जब तेरी माता भोला सब दुख का तोहारा ओ भो सब दुख काटो
(41:48) म वेश है मंगल मंगल का वेश है मंगल मंगल का मशान वासी [संगीत] हमारा शमशान वासी हमारा ओ भ हम सब दुख का को सब ख का [संगीत] रा भगवान देवद देव महादेव भगवान शिव ओ गड़ दनी तर काल दर्शी कैलाशी [संगीत] अविनाशी जीव का कल्याण करने
(42:54) वाले मेरे शिव जो एक साधारण से साधारण जीव पर भी कृपा कर देते साधारण से साधारण जीव पर भी करुणा कर देते साधारण से साधारण जीव पर भी दया कर शिव तत्व कह रहा है भगवान देवद महादेव ने भगवान ब्रह्मा जी को भगवान स्वयं देवऋषि नारद को शिवलिंग के पूजन का महत्व समझा कितने लोग हैं जो एक लोटा जल शिव जी को चढ़ाते हो हाथ उठाओ जरा सब चढ़ाते हो बहुत बहुत साधु बात रखी है साधु ता [संगीत] प्रतिदिन हमने पहले भी कथा में कहा थोड़ी मेहनत हाथ की बाकी कृपा
(44:01) भोले नाथ आप अपनी मेहनत में तल्लीन रहो और बाबा देवा दद महादेव पर छोड़ भगवान देवऋषि नारद को मालूम पड़ गया कि शिवलिंग के पूजन का महत्व क्या है भगवान ब्रह्मा जी को मालूम पड़ गया शिवलिंग के पूजन का महत्व क्या है तो ब्रह्मा और नारद दोनों वहां से चल दिए और शिवलिंग के पूजन का एक आनंद पाकर [संगीत] चले जो मिला है जीवन में उसको अच्छा करने का प्रयास कर माली और पुजारी इन दोनों का एक जैसा काम है माली और पुजारी का एक जैसा काम है माली पौधा लगाता है माली पौधे में जल डालता है माली पौधे को संभालता है माली पौधे को समय समय पर जल देता है समय समय पर खाद देता है
(45:07) समय समय पर उसको कुछ ना कुछ प्रदान करता रहता है तो माली पौधे को संभाल लेता है तो जिस बगीचे का माली है उस बगीचे का सेट माली को तनखा देता [संगीत] बगीचे का जो माली है वह माली को तनखा देता है माली और पुजारी एक जैसे हैं माली पौधा को संभाल रहा है पुजारी भगवान शिव को भगवान राम को भगवान कृष्ण के मंदिर में सेवा में लगा हुआ है पुजारी समय समय पर आरती करना भोग धराना समय समय पर भगवान का सेवा संभाल करना समय समय पर सेवा करना दोनों में अंतर है माली सेवा कर रहा है बगीचे को तो बगीचे का सेठ उसको तनखा देता है और पुजारी अगर दिल से भगवान देवद
(46:03) महादेव की सेवा करता है तो जगत का सेठ उसको तनखा देना प्रारंभ [संगीत] कर हमारा आपसे इतना सा निवेदन है आप अगर कथा के पंडाल में आए हो ना तो एक विचार करना अपने भीतर सात दिन सेवा के मूल को बढ़ाइए बन सके तो जितनी सेवा कर सकते हो उतनी सेवा करो बन सके जितने भाव से कथा का रस तत्व ग्रहण कर सकते हो उतने रस तत्व से कथा को सुनो और जितने भाव से बन सके जो बन सकता है वैसी वैसी सेवा अपन लग जाए शिव तत्व की क्या मिलेगा कैसे मिलेगा कब बाबा देगा ये उसके ऊपर निर्भर [संगीत] कर भगवान ब्रह्मदेव ने सुन लिया सुनते से ब्रह्मा जी के मन में भाव उत्पन्न हो गया
(46:56) कि अब मैं भगवान शंकर के शिवलिंग की आराधना के भाव को जागृत करू समय आया देवराज नाम के ब्राह्मण का चरित्र आता है एक देवराज नाम का ब्राह्मण ब्राह्मण के घर में जन्म लेने के बाद ब्राह्मण तत्व में जन्म लेने के बाद भी ब्राह्मण कर्म से वंचित रह ग ब्राह्मण कर्मस वंचित आप ब्राह्मण के घर में जन्म लिए हो थोड़ा सा ब्राह्मण तत्व आपके भीतर जागृत करिए थोड़ा सा ब्राह्मण तत्व आपके भीतर जागृत [संगीत] कर और देवराज ब्राह्मण कर्म से वंचित था पत्नी थी बच्चे थे देवराज के पूरा परिवार देवराज का बड़ा सुखी था पूरा परिवार सुखी
(48:00) था बस देवराज ने एक गलती करी कि एक वैश्या का संग पकड़ लिया देवराज ने एक गलती करी एक स्त्री का संग पकड़ लिया और वो वैश्या का संग पकड़ा एक स्त्री का संग पकड़ा एक गलत स्त्री का संग पकड़ा वो गलत स्त्री का जो संग पकड़ा देवराज को विनाश की ओर लेकर चले गए उस स्त्री ने कह दिया देवराज से रानी के गले में जो हार पड़ा हुआ है व हार मुझे कर दो और देवराज चोरी करने के लिए गया चोरी करने के लिए गया तो वह चोरी करकर रानी हार लेकर आ गया और रानी हार लेकर जैसे ही आया तो पीछे पीछे पीछे पीछे उसको राजा के दूत जाने लगे उसको ढूंढने लगे वो मिलता नहीं
(48:43) शंकर के शिवालय में जाकर शिव मंदिर में जाकर चुपचाप बैठ गया क्योंकि शरीर में ताप पड़ रहा था शरीर में बुखार आ रहा था बैठ गया आप कहां बैठ रहे हो आप कहां स्मरण कर रहे हो आप कहां बैठकर कथा का रस्व ग्रहण कर रहे हो आप किस भाव से कथा को सुन रहे हो यह सब मुख्य मायने रखता है एक पत्र है उसने मा ने जो लिखा है आप लोग एलईडी पर पढ़िए हैगा आस्था चैनल पर पढ़िए गुरुदेव पत्र को आप लोग आस्था चैनल पर पढ़ सकते हैं और एडिया लगी है इन पर आप पत्र पढ़ सकते हैं एलईडी पर नहीं चल रहा आस्था चैनल पर पत्र को पढ़ सकते हो मैं शीतल नितिन अंबिकार मैं नांदगांव से
(49:43) हूं मैं शीतल नितिन अंबिकार मैं नांदगांव जिस गांव में कथा हो रही है इसी गांव का निवासी मैंने पहली कथा मालेगांव में सुनी थी मेरा लड़का तेजस नितिन अंबिकार इंजीनियरिंग 2021 में पास कर चुका था गुरुदेव पहले तो आपको धन्यवाद और माननीय विधायक महोदय आमदार जी को धन्यवाद कि हमारे नांदगांव में यह कथा करवा रहे हैं उसके लिए साधु होता है मैं नांदगांव का निवासी मेरा बेटा तेजस अंबिकार 2021 में उसने इंजीनियरिंग कंप्लीट कर लिया और 2021 में कंप्लीट करकर सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था पर उसकी सरकारी नौकरी नहीं लगी गुरुदेव मैंने मेरे बेटे से कहा कि तू
(50:47) पशुपतिनाथ का व्रत कर मेरे बेटे ने पशुपतिनाथ का व्रत नहीं किया मैंने मेरे बेटे से कहा एक लोटा जल संक को चढ़ा मेरा बेटा मुझसे कहता है मां अगर एक लोटा जल चढ़ाने से नौकरी मिलती होती तो दुनिया में ढेर सारे पड़े हैं सबको मिल गई होती मैंने अपने बेटे से कहा ऐसा मत बोल एक बार तू सिहर वाले महाराज की कथा सुनकर अपनी पूरी मेहनत कर और शंकर के मंदिर जाना चालू कर मां नहीं लगी तो मैंने मेरे बेटे से कहा तू जा सरी मैंने अपने बेटे से कहकर उसको मेहनत करने को कहा जैसा आप कहते हो गुरुदेव कि जब नौकरी के लिए अप्लाई करो कंपटीशन एग्जाम में बैठो या किसी चीज की
(51:37) परीक्षा देना है तो अपनी मेहनत को चार गुना कर लो मैंने अपने बेटे से कहा तेरी मेहनत चार गुना बड़ा मेरे बेटे ने चार गुना मेहनत करी मेरा बेटा पशुपति व्रत नहीं कर पाया तो मैंने पशुपति व्रत करे व्रत करने के बाद भी उसकी नौकरी नहीं लगी व्रत करने के बाद मेरे बेटे की नौकरी नहीं लगी जब मेरे बेटे की सरकारी नौकरी नहीं लगी तो मेरा बेटा फिर बोला मां देख तू कहती थी व्रत करने से नौकरी लग जाएगी जल चढ़ाने से नौकरी लग जाएगी पर लगी नहीं मैंने अपने बेटे से कहा व सियोर वाला महाराज कहता है दिल से मांगोगे तो दिल से देता जरूर है अब एक काम कर तू भी पशुपति
(52:18) व्रत कर मैं भी करती हूं और एक लोटा जल मेरे साथ रोज मंदिर चल जल चढ़ाएंगे हम मंदिर जाकर जल चढ़ाने लगे गुरुदेव उसी बीच में मालेगांव कथा हुई मैं अपने बेटे को लेकर पंडाल में बैठ गई आप कहते हो पंडाल में बैठकर जो मांगा जाता है श्री शिवाय नमस्तुभयम कहने के बाद जो मांगते हो बाबा देता है और यह मेरा प्रमाण है गुरुदेव मैंने कथा में बैठकर मांगा मेरे बेटे ने जल चढ़ाया पशुपति व्रत करा आज मेरा बेटा भारत सरकार गृह मंत्रालय में अधिकारी पद पर पोस्टिंग हो गई है मैं बाबा को धन्यवाद देता हूं कहीं बैठे हैं आप ही है आ जाइए आ [संगीत]
(53:08) जाओ आज मेरे बेटे की भारत सरकार गृह मंत्रालय में अधिकारी पद पर पोस्टिंग हो गई है मैं बाबा को धन्यवाद देने के लिए आई हूं मेरा बेटे ने कहा है मां मैं नहीं पहुंच पाया तो मेरा फोटो लगाकर लेकर जाना पर बेटे का फोटो भी लगाया है साधु था बहुत शिव तत्व है आइए [संगीत] पधारिए एक लाइन अच्छी लिखी है बाबा जी ओ बाबा जी हमारे नांदगांव में कथा आई है ना हमारे ना नांदगांव के विधायक जी सुहास रणा जी कांदे जी को और भाभी जी को मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं हमारे नांदगांव की कथा के लिए बहुत बहुत [संगीत] नहीं अब तो खुश होई बाबा ने तो नौकरी लगा
(54:14) [संगीत] बधाई बई बई साधु एक बात इन्होंने लिखी है [संगीत] इसमें गुरुदेव मैंने मेरे बेटे के लिए पांच पंडाल में बैठकर नियम लिया था अगर बेटे का जॉब लग जाएगा पांच पंडाल कथा सुनूंगी मैं नासिक जलगांव 4 गांव मालेगांव कथा सुनी और पांचवें नंबर की कथा हमारे आमदार ने करवा ली उनको साधुवाद यह कथा नांदगांव में पाच क
(55:20) पंडाल श्रवण कर रहे हो बैठकर जिस भाव से सुनोगे जिस दिल से सुनोगे उस भाव से उस दिल से झोली में भर कर ले जाओ हृदय से सुन दिल से श्रवण करोगे व दिल से लेकर च एक विश्वास अपने भीतर जागृत करकर जब हम शंकर को रिते हैं एक विश्वास जागृत करकर जब हम शिव को रि जाते हैं तो शिव क्यों ना मिलता देवराज चोरी का धन लेकर शंकर के मंदिर में पहुंच गया दो क्षण की शिव महापुराण की कथा उसके कानों में चढ़ी गई केवल दो क्षण की कथा उसके कानों में गई और देवराज को क्रोध आ गया कि मेरे को सर में दर्द हो रहा है शरीर में ताप पड़ रहा है और यह महाराज बार-बार हर हर महा देव क रहा हर हर महादेव
(56:19) क रहा है बार बार [संगीत] शिव तत्व [संगीत] है एक बार दिल से अगर शंकर के मंदिर जा रहे हो व हमको तो मराठी इतना आता नहीं पर फिर भी तुमचा शिव देवालय शिव पिंडी चा एक लोटा जल घेऊ गड़बड़ बोला हो तो तुम्हें समर्पित [संगीत] हो ये आवाज आई जोरदार
(57:27) [प्रशंसा] [संगीत] एक लोटा जल श पं अब साधारण तो होता नहीं शंकर को चढ़ जल शिव को चढ़ जल कहां साधारण हो श्री शिवाय नमस्तुभ्यं बोला हुआ कहां साधारण होगा देवराज शंकर के मंदिर में गया चोरी का हार उसके हाथ में था दो क्षण का शिव तत्व उसके भीतर चले गए मात्र दो क्षण दो क्षण में भी क्या मिलता है एक पत्र है [संगीत] देखो दो क्षण में क्या मिलता है आप देखिए शिव महापुराण का दो क्षण की कथा भी क्या दे जाती है मेरा नाम प्रतिभा राजेंद्र पाटिल है मेरे बेटे का नाम ज्ञानेश्वर मैं नासिक की रहने वाली हूं कहीं बैठी हो तो हाती ला सकती आप ही है आ जाओ एक बिल
(58:25) पत्र ले जाना जा जाओ मेरा बेटा पिछले 4 साल से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है 4 साल से नौकरी की तैयारी करकर आखिरी में वह हार गया और उसने कह दिया मां अब मैं अप्लाई नहीं करूंगा मैंने मेरे बेटे से कहा तू चिंता मत कर एक बार शंकर के मंदिर जाना चालू कर बेटा कहता है मां शंकर मंदिर जाऊं क्या करूं सिहोर वाला गुरुजी कहता है कि मेहनत को चोग नहीं करो और शिव का मंदिर जाना चालू करो मेरे बेटे ने बीएसएफ का एग्जाम दिया बीएसएफ का एग्जाम दिया पर उसमें भी उसका मेडिकल रिपोर्ट में नहीं हुआ और खरच किया अब मेरा बेटा हताश हो गया तब मैंने अपने बेटे से कहा एक मिनट की कथा
(59:09) अगर बैठकर सुन ले तो बाबा जरूर सुनेगा वो मुझे पंडाल में मात्र दो क्षण के लिए छोड़ने के लिए आया और बाबा की कृपा का मैं क्या वर्णन करूं गुरुदेव आज मेरे बेटे की पशुपतिनाथ का व्रत करने से और एक लोटा जल चढ़ाने से और आप क हो बच्चों से कि खूब मेहनत करो मेरे बेटे ने खूब मेहनत करी और पांचवा व्रत पूर्ण हुआ था और मेरे बेटे का बीएसएफ में सिलेक्शन हो गया मैं बाबा को यहां धन्यवाद देने के लिए आई हूं मैं बाबा को य धन्यवाद देने के लिए लाइन अच्छी है आप और हम गुनगुनाते हैं बखान क्या करू मैं राख के र का चपटी भभूत में खजाना कुबेर का हे
(1:00:09) गंगधार मुक्ति द्वार ओमकार तू भोले ओमकार तू आयो शरण तिहारी शंभु ता [संगीत] हम उसके आश्रित क्यों ना हो जाए [संगीत] आ दो क्षण की मात्र शि महापुराण की कथा सुने [संगीत] हैं दो क्षण की शिव महापुराण की कथा श्रवण कर दो दो क्षण य नांदगांव की है इनका भाई है जिसने वह नासिक से यह तो रहने वाली नांदगांव की है तो बोल रही हैं कि हम तो यहां के हैं
(1:01:14) पर हमारे भाई ने जो एग्जाम दिया उसके लिए गुरु दो क्षण मात्र [संगीत] और जब दो क्षण का आप और हम भगवान शंकर की विरल भक्ति को धारण करते हैं मात्र दो क्षण भगवान की भक्ति में जब डूबते हैं तो शिव तत्व हमें प्राप्त जरूर होता दो क्यों ना मि देवराज सिर पकड़कर चोरी का धन लेकर मंदिर से बाहर निकल गया मंदिर से [संगीत] बाहर और जैसे ही मंदिर से बाहर निकला मंदिर से बाहर निकल कर बेलपत्र के वृक्ष के नीचे जाकर बैठा शरीर में ताप बहुत था शरीर में कष्ट बहुत था प्राण छूट गए प्राण छूटे नंदी लेकर मेरा देवद महादेव आया अब दुनिया के लोग कहते हैं गुरु जी एक
(1:02:20) तो यह चोरी कर लिया दूसरा गलत काम कर लिया तीसरा वैश्या संग कर लिया उसके बाद भी शंकर भगवान उसको नंदी पर लेकर जा रहे तो भी शिव उसको नंदी पर लेकर जा रहे उसका कारण देव अधिदेव महादेव भगवान शंकर नंदी परसली लेकर जा रहे हैं तो दो क्षण की उसने शिव महापुराण की कथा सुन ली दूसरा उसकी माता शिव की आराधना करती थी उस माता के फल से उसको लेकर जा कभी-कभी हमारा पुण्य भी हमें अच्छी जगह ले जाता है आप लोगों के स्मरण में हो कि भगवान शंकर शी माता पार्वती जी ने विवाह के बाद विनय करें निवेदन भगवान शंकर से माता पार्वती जी ने निवेदन किया कि भोले
(1:03:16) बाबा इतने जन्म में ले चुकी हूं बार-बार जन्म लेती हूं बार-बार मर जाती हूं फिर जन्म लेती हूं फिर मरती हूं फिर जन्म लेती हूं फिर मरती हूं बार-बार जन्म लेने के बाद मेरे प्राण छूट जाते कोई ऐसी कृपा कर दीजिए कि फिर मेरा वापस जन्म ना हो और मैं अमर हो जा एक बार कोई ऐसी कृपा कर दो कि अब मैं अमर तत्व धारण कर लू अब मेरे प्राण ना छूटे अब मेरे प्राण और भोलेनाथ सोना दो ऐसी कथा जिसे सुन कर में भी अमर हो जिस कथा को सुना था मीरा ने जिस कथा को सुना था कमा ने भोलेनाथ सुना दो ऐसी
(1:04:23) कथा जिसे सुनकर में भी अमर हो आप कृपा कर दो आप दया करो आप करुणा करिए भगवान देवद महादेव भगवान शंकर माता पार्वती को नंदी पर बिठाकर ले गए अमरनाथ की गुफा में और अमरनाथ की गुफा में जब कथा श्रवण कराने के लिए लेकर गए माता पार्वती के हाथ में त्रिशूल दे दिया ले पार्वती ये त्रिशूल ले सब को भगा कर रजा मैं तुझे कथा सुना देता हूं ये त्रिशूल है सबको भगा किया जीव जंतु को अब जरा विचार करिए कि शंकर अगर अमर कथा पार्वती जी को सुना रहे हैं तो भगाने की जरूरत क्या है लोग तो कथा करते हैं तो सबको बुलाते हैं आओ साहब आओ साहब आओ साहब कथा हो रही है साहब नंद गांव कथा हो रही
(1:05:18) है साहब नांद गांव कथा हो रही है साहब नासिक जिले में कथा हो रही है साहब आओ साहब आओ साहब सबको बुलाया जाता है कथा में आओ पर भगवान शकर ने हाथ में त्रिशूल देकर पार्वती से कहा सबको भगा [संगीत] दे लेय त्रिशूल और सबको भगा करा किसको भगाने की बात कर रहे हैं शंकर भगवान शिव महापुराण की कथा कहती है पार्वती जी के माध्यम से शंकर भगवान कथा सुनने वालों को नहीं भगा रहे हैं त्रिशूल के माध्यम से जो कथा सुनने के लिए पार्वती तू बैठ रही है ना तेरे अंदर कहीं अहम आ जाए तेरे भीतर कहीं अहंकार आ जाए तेरे भीतर कहीं अभिम आ जाए तेरे भीतर कहीं लोभ आ जाए तेरे भीतर अग कहीं तृष्णा
(1:06:05) आ जाए कहीं आसक्ति आ जाए कहीं वासना आ जाए कहीं लोभ प्रकट हो जाए तो तेरे भीतर के इन जीवों को भगा तेरे भीतर के जीवों को [संगीत] भगा कथा सुनने जितने लोग पंडाल में आ रहे उसे निवेदन है आप कहां बैठे हो वह अंदाजा ना करिएगा आगे बैठे पीछे बैठे दाए बैठे बाए बैठे इससे अंदाजा नहीं होना चाहिए आपकी चित्तवृत्ति में यह होना चाहिए कि नाद गांव में हमारे इस पवित्र गांव के अंदर कथा हो रही है मेरा भोले बाबा चलकर यहां पहुंचा है मैं कहीं पर भी बैठकर कथा सुनू मुझे उस कथा का लाभ मिलना मैं कहीं पर भी बैठू मेरे बाबा की कृपा मुझ पर हो अभी अभी हमने छत्तीसगढ़ की कथा में एक बात
(1:06:59) कही थी आपके स्मरण में होगा जिनने सुना होगा उनको याद होगा हमने कहा था जिसके हाथ नहीं होते क्या भगवान उसको मिलता कि नहीं मिलता हाथ नहीं है किसी के तो उसको भगवान मिलेगा कि नहीं मिलेगा जम के बोलो जरा मिलेगा किसी का पांव नहीं है तो भगवान मिलेगा कि नहीं मिलेगा बोलते जाओ जल्दी मिलेगा किसी की आंखें नहीं है भगवान मिलेगा कि नहीं मिलेगा मिलेगा किसी की श्रवण शक्ति नहीं है नहीं सुनता भगवान मिलेगा कि नहीं मिलेगा किसी की वाणी नहीं है निपट गूंगा है भगवान मिलेगा कि नहीं मिलेगा मिलेगा क्योंकि भगवान इंद्रियों से नहीं मिलता शिव
(1:07:35) महापुराण की कथा में हमने छत्तीसगढ़ में कहा था भगवान इंद्रियों के बल पर नहीं मिलता भगवान को केवल एक इंद्री के बल पर मिलता है वह तुम्हारा दिल है तुम्हारा मन है तुम्हारा हृदय है जिसके बल पर परमात्मा प्रात निर्मल मन सो मोही बाबा मछल छिद्र कपट ना भगवान हृदय से [संगीत] मिलता शिव पुराण निमंत्रण नहीं है कोई कह दे शिव महापुराण का निमंत्रण चाहिए ना शिव पुराण निमंत्रण नहीं है शिव महापुराण हमारे तर की भूख है भोजन की भूख लगती है तो भोजन चाहिए शिव महापुराण भी ऐसी होना चाहिए कि अपने नजदीक में हो तुरंत घर वालों से कह
(1:08:40) दो अपने घर के पास हो रही है बाजू में हो रही है मेरा मन करता है कथा में जाना है ये अंदर की तड़प उठे अंदर की भूख उठे अंदर से जैसे भोजन की भूख उठती है तो भोजन चाहिए उसी तरह कथा सुनने की भूख उठे और कई लोग ऐसे कथा सुनने वाले दो दो दिन पहले से आकर पंडाल के अंदर बैठ गए दो दो दिन प भूख है भीतर मुझे कथा श्रवण करना मुझे कथा सुनना है मुझे कथा श्रवण करना है मेरे बाबा को मेरे हृदय में विराजमान करना है कथा सुन कथा [संगीत] सुन मैं सुन [संगीत] और मेरे भोले तेरा सहारा है मेरे भोले तेरा सहारा
(1:09:45) है मेरी नैया का तू किनारा है मेरी नई का तू किनारा है मेरे बाबा तुझे पुकारा है मेरे बाबा तुझे पुकारा है मेरी नैया का तू किनारा मेरी [संगीत] नयाना हम विश्वास के बल पर हम भरोसे के बल पर हम दृढ़ता के बल पर उस शिव तत्व को भजते हैं एक महिला ने लिखा मेरे घर में एक साल दो साल तीन साल चार साल पाच साल 6 साल सात साल आ साल न साल 10 साल सालों निकलते
(1:10:51) चले गए मेरे घर औलाद नहीं हुई मैंने बहुत सा कोई दरवाजा नहीं जहां जाकर विनती नहीं करी मैंने नासिक मैंने मालगांव मैंने इंदौर मैंने जगह जगह जाकर इलाज करवाया और साथ में उसने [संगीत] लिखा मैंने आईवीएफ भी करवाया पर संतान का सुख नहीं था मेरा नाम पति दीपक तुलसीराम लोखंडे पत्नी ज्ञानेश्वरी दीपक लोखंडे मोबाइल नंबर यह है कहीं बैठे [संगीत] हैं बच्चा आया है क्या साथ में हां ले आओ ले आओ ले आओ इसको पति दीपक तुलसीराम लोखंडे पत्नी
(1:12:03) ज्ञानेश्वरी दीपक लोखंडे पति का नंबर यह है मैं गुरुदेव मेरा परिवार सब यही नाद गांव के अंदर ही है और हम लोग मनवाड़ से शादी को 10 साल हो गए पर संतान का सुख नहीं ऐसा कोई डॉक्टर नहीं जहा इलाज ना कर आईवीएफ करवाया पर वह भी सक्सेस नहीं हुआ गुरुदेव हिम्मत टूट गई आखरी में हमारे मोहल्ले की मौसी और काका जी ने बताया कि एक लोटा जल सारी समस्या का हल है त जा शंकर के मंदिर और शिव जी को एक लोटा जल चढ़ाना प्रारंभ कर गुरुदेव मैंने शंकर भगवान को एक लोटा जल चढ़ाना चालू आप कहते हो प्रदोष के दिन बाबा से दीप लगाकर जो बोला जाए बाबा सुनता है मैंने
(1:13:03) सफेद आंकड़े की जड़ का प्रयोग भी उसी दिन करा मुझे नहीं मालूम था कि शंकर मंदिर जाने से क्या मिलता है गुरुदेव फिर लोग कहते हैं पंडाल में बैठकर मांगो बाबा जरूर देता है मैं मालेगांव की कथा के सात दिन पंडाल में बैठकर बाबा से विनती करती रही वहां की मिट्टी को अपने उदर पर लगाती रही और बाबा से से प्रार्थना करती रही बाबा मुझे संतान दे दो 10 साल हो गए बाबा से प्रार्थना करी मैं बाबा को यहां धन्यवाद देने के लिए आई हूं गुरुदेव 310 2023 को मेरे बाबा की कृपा से मेरे घर में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिसका नाम मैंने शिवराज रखा है मैं बाबा को यहां
(1:13:45) धन्यवाद देने के लिए आई हूं और बेटे का फोटो भी लगा रही हूं 10 साल के बाद मेरे बाबा ने मेरे घर में औलाद की 10 वर्ष के बाद शिव भक्ति को अपने भीतर प्रकट कर शिव भक्त एक बार दोनों हाथ उठाकर सब लोग आनंद के साथ बोलेंगे हर हर मा शिव भक्ति अपने भीतर प्रकट कर अपने [संगीत] और जब शिव भक्ति अपने भीतर प्रकट होगी तो शिव मि मिलेगा शिव महापुराण की कथा कहती है भगवान शंकर का पवित्र चरित्र कह रहा है देवद महादेव का पावन चरित्र वर्णन कर
(1:14:50) रहा पावन च [संगीत] पार्वती जी के हाथ में त्रिशूल दिया त्रिशूल लेकर माता पार्वती गई सब दूर से जीवों को बगा जीव को [संगीत] ब आ आ [संगीत] श [संगीत] और
(1:16:08) शंभू मांगू घड़ी रे दुख ना कोया कर ग शंभु शरण पर मांगो घड़ी दे दुख [संगीत] काटो दया करी नि दर्शन आप शिव तत्व क रहा पार्वती जी ने जीवों को भगा दिया सुनने के लिए [संगीत] बैठी बाबा कथा क रहे हैं पार्वती जी सुन रही हैं नेत्रों में निंद्रा आ गई थोड़ी देर नेत्रों में
(1:17:18) निंद्रा और नेत्रों में जैसे निंद्रा आई सोई शिवजी कथा कहते रहे तोते का अंडा गिर पड़ा था उस तोते के अंडे में से तोते का बच्चा बाहर निकल गया था उस तोते के बच्चे ने हुंकारा भर भर कर कथा का रस तत्व ग्रहण कर लिया आखिरी में पार्वती जी की निंद्रा खुली जब भोलेनाथ जी बोले बोल शिव महापुराण की पार्वती जी के ने पार्वती तू कथा सुनी है पार्वती ने कहा मेरा ध्यान शिव में चले [संगीत] गया मेरा ध्यान भगवान शंकर में चले गया देव महादेव में मेरा ध्यान चले गया ना
(1:18:28) चित्त हट गया मन हटा ना पार्वती तूने हुंकारा नहीं भरा तो भरा किसने तो तोते का बच्चे पर ध्यान गया तोते के बच्चे कोग भागा तोते का बच्चा व्यास जी महाराज के आश्रम में गया जहां पर उनकी धर्म पत्नी के मुख में बकाश आई जैसे ही उन्होंने मुख फड़ा जमाई आई वैसे ही वह तोते का बच्चा मुख में प्रवेश कर व्यास जी की पत्नी के गर्भ में जाकर बैठ गया समय जब आया तो व्यास जी की धर्म पत्नी के गर्भ से वो तोते का बच्चा जो प्रकट हुआ उसी का नाम सुखदेव हु तोते के बच्चे को कहते हैं [संगीत] सुख व्यास जी की पत्नी के गर्भ से जन्मा इसलिए कहलाया देव दोनों को मिला दो तो हो
(1:19:17) गया जम के बोलो जरा सुकदेव सुकदेव [संगीत] कारण सुखदेव जी महाराज के मन में क्योंकि ज्ञान इतना था भगवान शंकर के मुख से कथा श्रवण कर रखी थी इसलिए भीतर का ज्ञान इतना प्रबल था गर्भ का ज्ञान इतना प्रबल था कि सुखदेव जी महाराज किसी को गुरु नहीं बनाना चाहते थे त वेद व्यास जी ने समझाकर राजा जनक जी के य भेजा जनक जी को उन्होंने गुरु [संगीत] बनाया जनक जी ने तीन बातें सुखदेव जी महाराज को अब जरा आप समझिए तीन बातों को जनक जी महाराज ने सुखदेव जी महाराज को तीन बातें समझाई थी पहला अपने पूर्वज अपने पितर अपने आहत अपने वासुक अपने कुल देवता अपने पितर
(1:20:09) देवता अपने पूर्वजों का स्मरण रहना चाहिए अपने पूर्वजों का स्मरण रहना चाहिए देखिए दो चीज होती है एक स्वाभिमान एक अभिमान दो बातें हैं एक स्वाभिमान एक अभिमान स्वाभिमान और अभिमान में क्या अंतर है स्वाभिमान और अभिमान में सबसे बड़ा अंतर है दोनों चीजें स्वाभिमान और अभिमान यह दोनों चीजें हमें समझाती है स्वाभिमान का मतलब है कि जो भी है हम उसको अपने अंदर धारण कर ले अपने अंदर उतार ले वह स्वाभिमान है और जो बाहर झलक जाए वो अभिमान है झलके ना अपने भीतर उतार लिया जाए वो [संगीत] स्वाभिमान अपशब्द कह दिया कोई बात नहीं समय आएगा जवाब मिलेगा गाली दे दी कोई बात
(1:21:10) नहीं समय आएगा जवाब मिलेगा आड़ा तड़ा कह दिया कोई बात नहीं समय आएगा देखा जाएगा भीतर उतारना स्वाभिमान झलक गया अभिमान अभिमान झलकता है अभिमान लकना नहीं स्वाभिमान भीतर उतारते जाओ उतारते [संगीत] जा राजा जनक जी ने कहा सुखदेव जी महाराज को तीन बातें समझाई पहला अपने पूर्वजों का अपने पित्रों का स्मरण होना चाहिए अपने पूर्वजों का अपने पित्रों का क्यों क्योंकि अब जो दुर्ग है जो चले गए जो अपना घर अपनी जमीन अपनी जायजा छोड़कर चले गए सब तुम्हें छोड़कर गए तुम्हारा फर्ज बनता है कुछ नहीं तो कम से कम एक लोटा जल देवद देव महादेव को आप जब चढ़ाएंगे तो उसका एक अंश
(1:22:10) मात्र पित्रों को भी प्राप्त हो जाता है एक [संगीत] अंश अभी आज कितनी तारीख है सुन के बोलो जरा 26 कथा कब तक चलेगी दो तारीख सात दिन की कथा में बीच [संगीत] में 30 तारीख को शिवरात्रि भी पड़ेगी मासिक शिवरात्र और पितृ पक्ष की [संगीत] शिवरात्र दो चीजें है उस दिन पितृ पक्ष की शिवरात्रि 30 तारीख को पड़ेगी उसमें बहुत सारे विधान है आज तो कथा का पहला दिन है इसलिए हम उसको थोड़ा सा कम लिए कल से कथा में आपको वर्णन करेंगे कि पितृ पक्ष की शिवरात्रि पर शंकर को मात्र अगर कोई 35 साल 40 साल का बेटा बेटी भी हो ग और उनकी शादी नहीं हो रही हो
(1:23:15) तो पितृ पक्ष की शिवरात्रि के दिन मात्र ग्रत और जल शिव को चढ़ा देने उसका चढ़ाने का भी तरीका बस उस तरह से चढ़ा दे 40 साल का भी 35 साल का भी हो गया ना तो विवाह जरूर होगा यह निश्चित है [संगीत] निश्चित 35 4 साल भी हो गए और औलाद नहीं हुई ना आप आप अभी छत्तीसगढ़ की एक कथा थी उसमें कथा में आपने न देखा होगा हमने तो उसका 10 साल बोला था उसम 40 साल बाद उसको ला 40 वर्ष हृदय से अगर आप कहेंगे स्वीकार एक बहन ने लिखा है [संगीत] [संगीत] सो कल्पना सदाशिव जाधव
(1:24:27) सो कल्पना सदाशिव जाधव छत्रपति संभाजी नगर मेरा मोबाइल नंबर यह है कहीं बैठी हो तो हाथ हिला सकती अगर कहीं बैठी हो हाथ हिला सकती है देखि आइए एक बेलपत्र ले जाइएगा आ जाइए गुरुदेव हमारी इतना हमारे पास में वैभव नहीं धन नहीं 28 वर्ष तक किराए के मकान में रही 28 साल गुरुदेव किराए के मकान में रहते रहते जब 28 वर्ष हो गए तब हमारे पड़ोसी के कहने पर हमने पहली बार पशुपतिनाथ का व्रत किया शंकर भगवान के मंदिर में जाना चालू करा हम शिव मंदिर में नहीं जाते थे पंडाल में बैठकर कथा सुनना प्रारंभ करी आज मैं बाबा को धन्यवाद देने आई हूं और
(1:25:25) अपने मकान का फोटो भी लगाई हूं 28 साल किराए के मकान में रही ज्यादा इनकम नहीं कमाई नहीं तो भी मेरे भोलेनाथ से बस प्रार्थना करती थी कि अपने मकान में पहुंच और बाबा ने मुझे आज खुद के मकान में दो मंजिल मकान में मेरे बाबा ने मुझे विराजमान कर दिया मैं बाबा को धन्यवाद देने के लिए गुरुदेव पितृ पक्ष की कथा और पितृ पक्ष की शिव वर की शिवरात्रि मानती मांगा शिव दिया जो मांगते हैं वह बाबा देता जरूर है जो मांग लाइन अच्छी है आप और हम गुनगुनाते हैं के लुटा दिया भंडार काशीवा [संगीत] जो
(1:26:29) मांगा विश्वास के साथ जब हम पशुपति व्रत करें विश्वास के साथ शिव मंदिर जाए विश्वास के साथ शंकर की आराधना करें विश्वास के साथ शिव महापुराण की कथा को श्रवण करें विश्वास के साथ शंकर की शरणागति ग्रहण करे क्या नहीं मिलेगा क्या नहीं देगा क्या नहीं देता सर्वस्व सब लुटा देता है रावण को सोने की लंका दे देता है भस्मासुर को कंगन दे देता है [संगीत] [संगीत] दोनों हाथों से प्रेम से
(1:27:52) [संगीत] विपदा हमारी हर लोत्र पुरारी बोले बाबा मदा हमारी हरलो पुरारी बोले बाबा मत वाले रखवाले त वाले रक्त वाले बमा बम भोले शंकर गले में नाग भयंकर बमा बम भोले शंकर गले में ना भयंकर बमा बम भोले शंकर गले में नाग भयंकर भोले शंकर गले में नाग भकर रावण को बाबा तूने लंका दिया है रावण को बाबा तूने न कर दिया है भस्मासुर
(1:29:01) को तूने कंकन दिया है को ने कंकन दिया है रावण को बाबा तूने लंका दिया है रावण को बाबा तूने लंका दिया है भस्मासुर को तूने कंकन दिया मा सुने कन उसी ने तेरा पीछा किया भोले बाबा उसी ने तेरा पीछा किया भोले बाबा उसी ने तेरा पीछा किया भोले बाबा उसने तेरा पशा किया बोले मत वाले रखवाले मत वाले रख वाले बमा बम भोले शंकर गले में
(1:30:07) नाच भयंकर बमा बम भोले शंकर गले में नाग भयंकर हो बमा बम भोले शंकर गले में नाग भयंकर बमा बम भले शंकर गले में नाग भयंकर [संगीत] [संगीत] [संगीत] बड़े भाव [संगीत] लो
(1:31:13) [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मस्तक पे भोले तूने चंदा सजाया मस्तक के भोले तूने चचंदा सजाया कानों में भोले तूने कुंडल सजाया कानों में भोले तूने कुंडल सजाया हो
(1:32:20) मस्तक पे भोले तूने चंदा सजा मस्तक पे भोले तूने चंदा सजाया कानों में भोले तूने कुंडल सजाया कानों में भोले तूने कुंडल सजाया शीष गंगा की दार दिए भोले बाबा शीष गंगा की दार दिए बोले बाबा मध्य वाले रक्त वाले मत वाले रक्त वाले बमा बम बोले शकर गले में नाग भयंकर ममा बम भोले शंकर गले में नाग भयंकर ममा बम बोले शंकर गले में नाग भयंकर विपदा हमारी हरलो त्रिपुरारी बोले बाबा वि [संगीत]
(1:33:23) हमारी रारी भोले बाबा विपदा हमारी हरलो त्रिपुरारी भोले बाबा विता हमारी हरलो पुरारी बोले बाबा मतवाले रखवाले मतवाले रखवाले बमा बम भोले शंकर गले में नाग भयंकर बम भोले शंकर गले में नाग भयंकर बमा बम भोले शंकर गले में नाग भयंकर बमा बम भोले शंकर गले में नागर बमा बम भोले शंकर गले में नाग भयंकर बमा बम भोले शंकर चले ना भकर बमा बम भोले शंकर गले में नाग भरवा मंगले शकर गले में नाग [संगीत]
(1:34:28) हर अपने स्थान पर बैठकर भगवान शिव जी से अपने मन की बात बड़े भाव के साथ हृदय से बार-बार मौका नहीं मिलता इसलिए दिल से बाबा को प्रार्थना करना जहां जगह मिले वहां बैठकर बड़े भाव से बाबा से अपने भाव को कहिए जब श्री शिवाय नमस्तुभ्यं पूर्ण हो जाता है तब अपने नेत्र का भाव बंद करकर बड़े आनंद के साथ नेत्र बंद करकर भगवान से प्रार्थना दिल से बाबा को पुकार सब साथ में बोलेंगे आपकी आवाज यहां तक पहुंचे उच्च स्वर में [संगीत] बोले श्री शिवाय नमस्तय [संगीत] श्री शिवाय नमतु
(1:35:34) श्री शिवाय [संगीत] नमस्तय नमतु भोला सब दुख काट हो भोला सब ख काटो मा शिव शंकर जप तेरी माला भोले बाबा जप तेरी माला भोला सब दुख का तोहा हो भोरा सब दुख काटो वेश मंगल
(1:36:39) मंगलकारी वेश है मंगल मंगल कारी शमशान वासी हमारा [संगीत] वासी हमारा भोला सब दुख काटो मारा भोला सब दुख [संगीत] काट भगवान देव महादेव का चरित्र कर रहा है शिव तत्व कह रहा है भगवान शंकर स्वयं बधाई शिव तत्व की प्राप्ति पहुंचा समय सुखदेव जी महाराज का
(1:37:46) पावन चरित्र वर्णित किया जनक जी ने तीन क्रम बताए तीन बातों को अपने पूर्वजों का अपने पित्रों का स्मरण दूसरा मनुष्य की देह मिली है तो गुरु का मंत्र गुरु स्मरण जरूर कर और तीसरा ग्रस्त आश्रम में रहकर परिवार में रहकर शिव की आराधना जरूर शंकर के राम जिस आश्रम में हो आप वान प्रस्थ से वन में रहने से ज्यादा प्रबल है गृहस्थ आश्रम घर में रहकर भगवान की भक्ति करना घर में रहकर शिव भक्ति को धारण शिव भक्ति को धारण आगे वर्णन आया बिंदु नाम के ब्राह्मण के प्राण जल में डूबने से हो गए चंचला देवी ने शिव कथा का
(1:38:53) स्म मण करा भगवान देवद देव महादेव ईशर जी और गोरा जी बनकर शिव महापुराण की कथा को श्रवण करने के लिए पधार रहे हैं जोरदार ताली बजाए ईशर जी और गोरा जी पधार ईर जी और गोरा जी हमारे बीच में पधारे हैं एक बार जोरदार ताली बजाए ईर जी और गोरा जी के लिए भगवान शंकर पार्वती जी र जी गोरा जी बनकर पहुं से कथा को श्रवण करने के लिए भगवान देवद महादेव का पावन कथा नांदगांव के इस पवित्र प्राग में हो रही है नासिक जिले के [संगीत] अंतर्गत राय गोल कंपनी मनमाड़ रोड हीवल नंदगांव नांदगांव जिला नासिक माननीय श्री आमदार सुहास जी आना कांदे एवं उनकी धर्म पत्नी अंजुम ताई सुहा
(1:39:57) जीी कांदे इस कथा के मुख्य यजमान बने हैं एक बार भाव और आनंद के साथ इस कथा का रस तत्व आप और हम श्रवण कर रहे हैं पत्र बहुत सारे हैं पर हम इतना पढ़ नहीं पाए आज थोड़ा कल की कथा में कुछ पत्रों का स्मरण जरूर करेंगे जिन भक्तों के नाम लिए जा रहे हैं आरती में आने के लिए वो आरती में सम्मिलित होंगे मैं आमंत्रित कर रहा हूं माननीय श्री आमदार सुहाज अना जी को सो अंजुम ताई जी को आरती में सम्मिलित [संगीत] हो एसपी सर महाजन जी आरती में सम्मिलित हो किशोर लहाने जी संदीप जेजूरकर जी संजीव धमाने जी संजय मोरे जी संजीव निकम जी संजीव सचिन बैरागी जी अनिल अना जी प्रमित
(1:40:52) आहिर जी गुजराती जी संदीप देशपांडे जी आरती में सम्मिलित होंगे और आरती का क्रम प्रारंभ होगा आरती के क्रम में सम्मिलित हो आप सभी अपनी जगह पर खड़े होकर आरती का लाभ लेंगे और अपने जीवन को सार्थक करेंगे एक निवेदन रहेगा आप सभी से अपने घर से जब भी भी आए सोने की चांदी की हीरे की पन्ने की कोई रकम लेकर ना आपका मोबाइल कितना भी महंगा हो उसे घर छोड़कर आए कीमती सामान अगर आप लेकर आते हैं और आपका कोई सामान खोता है तो उसमें यजमान परिवार या पुलिस प्रशासन की कोई जवाबदारी नहीं होगी आप अपना कीमती सामान अपने घर पर छोड़कर आए इसमें यजमान परिवार
(1:41:43) की या पुलिस प्रशासन की कोई जवाबदारी नहीं होगी अपना सामान आप अपने घर पर छोड़कर आए जो भी सामग्री कीमती है उसको अपने घर छोड़कर आए और यहां से जाते समय अपनी गाड़ियों को स्लो स्लो चलाएं धीरे-धीरे आगे बढ़ाएं कोई बुजुर्ग निकल कर जा रहा है कोई बच्चे निकल कर जा रहे हैं कीचड़ हो रहा हो तो उनका हाथ पकड़कर धीरे से बाहर निकालेंगे और सावधानी पूर्वक यात्रा करेंगे सावधानी पूर्वक अपने गंतव्य की ओर जाएंगे आरती प्रारंभ जय शिव ओमकारा भोले भज शिव ओमकारा ब्रह्मा वि सदा शिव भोले भोलेनाथ महा शिव हर धाना ओ हर हरे हरे महादेव नंद चतुरानन पंचानंद
(1:42:48) राधे बोले पंचानन राधे हं सासन गरुड़ासन हं सासन गरुड़ासन सस बाहने सारे ओ हरे हरे हरे महादेव बुरी संगत में रहने से
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