कोई तुमसे पूछे यह 16 सोमवार व्रत कहां से आए ?
16 सोमवार का नियम कहां से चालू हुआ ?
यह 16 व्रत का विधान कहां से आया ?
16 व्रत का नियम कहां से आया?
पांच व्रत नहीं, सात व्रत नहीं, छह व्रत नहीं, चार व्रत नहीं, तीन व्रत नहीं, यह 16 व्रत का नियम कहां से आया ?
16 वृत्त ही क्यों हम आपसे पूछना चाहेंगे, आपने 16 सोमवार का व्रत करा, 16 सोमवार का उद्यापन करा, 16 सोमवार का नियम लिया, 16 सोमवार की पोथी पढ़ी, 16 सोमवार की कथा पढ़ी, 16 सोमवार पे चूरमा बनाया, किसी ने तीन-तीन व्रत करा, किसी ने बेलपत्रिका करा, किसी ने चूरमा का करा किसी ने मिश्री का करा बोलो सही है करा तो। हम उनसे पूछना चाहते हैं कि कहां से आ गए यह 16 व्रत का नियम।
प्रदोष काल होता है। प्रदोष का जो समय होता है। शाम का जो समय होता है। वो शाम के समय पर हम 16 सोमवार का पूजन करते हैं। उसका निर्माण करना और पूजन करके जो भी चीज से हमने सोमवार करें हैं जो 16 सोमवार के प्रथम सोमवार में चूर्मा से करो, चाहे तुम बेलपत्री से करो।चाहे तुम हैं मिश्री से करो। जिससे तुम पहले व्रत करोगे 16 की 16 व्रत इस चीज से होंगे। इस प्रकाशित से होंगे की ये 16 व्रत का विधान कहां से आया 16 व्रत का नियम तब आपको बताना है अवंतिका पुरी में एक सुगंधा नाम के बड़े-बड़े [संगीत] [संगीत]
में जाति थी किसी तीर्थ में जाति थी किसी मंदिर में जाति थी किसी शिवाली में जाति थी किसी तीर्थ स्थान पर जाति थी पुष्प साथ में ले जाए ना ले जाए प्रसाद साथ में ले जाए ना ले जासोना चांदी दान करने के लिए जाए ना ले जाए पैसा ढीला कहानी चढ़ाने ले जाए ना ले जाए वो एक इत्र किस चीज में और हुई को भींगो कर एक डाबी में भरकर लेकर जाति थी और उसका नियम था वो रेणुका का की वो हुई वो कपास और जो इत्र लगा हुआ जो पदार्थ जो इत्र लगी हुई जो हुई है उसे हुई को उसका पास को भगवान के दरवाजे पर चौखट पर उसको लगाकर आई थी यार ये रेणुका का नियम उसका फल क्या मिला
[संगीत] अब वो संतान तो हो गई और वो संतान ने जो जन्म लिया उसके शरीर से इत्र की सुगंध ए रही है [संगीत] बड़ी सुंदर कन्या जिसको देखकर मां आनंदित हो गई मेरी बेटी इतनी सुंदर इतनी सुंदर [संगीत] उसका नाम रख दिया कन्या का सुगंध था उसका नाम था उसकी सुंदरता का कोई बखान नहीं कर सकता उसके चेहरे पर रौनक की सुंदरता थी अब वो सुंदरता तो थी साथ में उसके शरीर की जो गंदगी उसके शरीर की जो सुगंध थी वो बड़ी प्रबल थी बड़ी प्रबल सुगंधा के शरीर की गंद
और उसकी सुंदरता बढ़नी चली गई [संगीत] सुगंधा का स्वरूप सुंदर था सुगंधा का चेहरा सुंदर था सुगंधा के शरीर में सुगंध बहुत थी तो उसका लाभ सुगंधा ने गलत जगह पर किया सुंदरता का प्रतीक होकर सुगंधा अपने शरीर की गंद फलता और कई युवाओं को चाहे वो ब्राह्मण हो चाहे वो क्षत्रिय हो चाहे [संगीत] सबको अपनी और आकर्षित कर चुके थे सुगंधा मैं अपने शरीर के बाल पर ना जान कितनो को अपने काबू में कर लिया काबू में तो कर लिया एक दिन क्या हुआ अवंती का पुरी में ऋषियों का आगमन हो गया ऋषि कुमार आए अवंतिका पुरी में बैठे और शिप्रा मां के तट पर बैठकर अवंती का पुरी में ऋषिगण सब
की सब तप साधना में ली होने लगे इनकी सुंदरता खुद को भी मैं अपनी चल में चलाऊं सुगंधा ने अपने शरीर की सुगंध के मध्य से ऋषियों के सामने अपनी सुंदरता का दाल फैलाना प्रारंभ किया [संगीत] जब अपनी सुंदरता का दाल सुगंधा ने फैलाना प्रारंभ किया ऋषियों को अपना बनाने के लिए जब दाल फेंका अपनी सुंदरता का अपनी सुगंध का जब जलाया उसे सुगंधा ने ऋषि कुमार ने एक ऋषि कुमार ने अपने ऋषियों से कहा की यह कन्या जो सामने नजर ए रही है यह कन्या श्रेष्ठ नहीं है ये अपने काबू में ना जानो को तनो को कर चुकी है तुझे अपने को भी कब्जे में करना चाहती है यह अपने को कब्जे
में लेना चाहती है क्या कर जाए ऋषियों ने कहा कोई बात नहीं इसके माता-पिता के कोई पूर्व के पुण्य होंगे जिसके करण ये कन्या के शरीर में सुगंध आई है और इसका अवंती का पुरी में जन्म हुआ है ये पूर्व के कर्मों में सुगंध है सुगंधा को लगा की ये ऋषियों को मैं अपने काबू में कर लूंगा ऋषियों ने भी अपने तत्काल को बढ़ाया है ऐसा टेपेबल बढ़ाया उनके शरीर की जो तेज निकली सुगंधा के शरीर की गंद समाप्त होगी सुगंधा के शरीर की गंद सुगंध समाप्त हो गई सुगंधा को लगा मेरे शरीर में से गंध नहीं ए रही मेरे शरीर में से सुगंध नहीं ए रही पता कर तो मालूम पड़ा ये ऋषियों के तेज से
ये मेरे शरीर की सुगंध का जो अहंकार था [संगीत] चरणों में पद गई अभी तक पुरुषों को रिजा रही थी लोगों को मुट्ठी में कर रही थी अपनी सुंदरता का वैभव दिखा रही है [संगीत] चरणों में पड़ी सुगंधा ने ऋषियों से पूछा मैं करूं तो करूं क्या तो ए सुगंधा तुम 16 कल में निपुण भगवान चंद्र के 16 सोमवार का व्रत प्रारंभ करो तुम्हें देवाधि देव महादेव तुम्हारे होंगे और तुम्हारा जीवन फिर कल्याण प्रभु हो जाएगा फिर तू अपने 16 श्रृंगार को करके जब दुनिया के लोगों को अपनी और आकर्षित करती थी तो अपने 16 श्रृंगार कर कर दुनिया
के लोगों को अपनी और काबू में करती थी जब तू 16 श्रृंगार कर कर दुनिया के लोगों को अपना बना शक्ति है तो 16 सोमवार का व्रत भोलेनाथ को भी अपना बना [प्रशंसा] प्रारंभ हुई [संगीत]
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