श्री शिवशक्ति शिवमहापुराण कथा || 6 से 12 मई 2024
II श्री शिवशक्ति शिवमहापुराण कथा || परतवाड़ा, महाराष्ट्र
|| 6 मई 2024 ||
|| Day - 01 II
★ संपूर्ण विश्व का उद्धार एवं कल्याण करने वाले मेरे शिव, करुणा सागर, त्रिकाल दर्शी, अविनाशी, शंकर का नाम वैशाख मास में मुख से निकल जाए । भूलकर भी मुख से ओमकार, नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय, श्री शिवाय नमस्तुभ्यं, शिव , हर हर महादेव, यदि भूलकर भी मुख से निकल जाए भगवान भोलेनाथ का कोई भी नाम निकल जाए तो वह जीव सारी परेशानियों से निकाल कर भगवान भोलेनाथ को पाने के लिए अग्रसर हो जाता है।
★ वैशाख के महीने में मिट्टी के पत्र में रखा हुआ जल भगवान भोलेनाथ को अवश्य चढ़ाना चाहिए।
★ संतान प्राप्ति के उपाय उन नारियों के लिए जिनके कोई संतान नहीं हुई है और उम्र 30 साल से ऊपर हो गई है –>
30 साल से ऊपर होने के अपरांत भी जिनकी संतान प्राप्ति नहीं हो रही है। और बच्चे की प्राप्ति केलिए बहुत परेशान है तो पीपल के वृक्ष एक पत्ते को मांग कर तोड़ लें फिर पीपल के पत्ते को बेलपत्र के वृक्ष के नीचे रखकर पिपलेश्वर महादेव कानाम लेकर सात बार जल समर्पित किया जाए और फिर उसे उठाकर अपने घर ले आया जाए और दोनों दम्पति दूध में इस समय उबालकर पीकर सो जाएं।
यदि दोनों दंपत्ति वैशाख मासमें तीन या चार बार यह उपाय या क्रम कर ले तो उन्हें अवश्य ही संतान की प्राप्ति होगी। ऐसी निश्चितता है।
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Day - 01 II श्री शिवशक्ति शिवमहापुराण कथा || परतवाड़ा, महाराष्ट्र से 2:20.33 पर।
★ सोरायसिस का उपाय
यदि चमडी का कोई रोग हो गया हो, ऐसी बीमारी है जिसमें त्वचा से पापड़ी उतरती रहती है और खुजली होती रहती है वह ठीक नहीं होती। दूसरी बीमारी होती है जिसमें चमडी का रंग सफेद पड़ जाता है। या शरीर में चिट्ठी पड़ जाते हैं।
21 सोमवार 5 बेल पत्रों का एक कमल बनाईए। इसके लिए पांच बेलपत्र लें और उनकी ड़ंडी को मिलाकर और घूमते हुए और उनकी दिशा बदलते हुए रखते चले जाए इस प्रकार बेल पत्रों का कमल दल तैयार हो जाएगा।
11 सोमवार या 21 सोमवार को पांच बेलपत्र और एक लोटा जल, एक खाली बर्तन साथ लेकर शिवालय जाएं। इन 5 बेलपत्र का एक कमल दल बनाएं और उसे अशोक सुंदरी पर स्पर्श कर कर भगवान भोलेनाथ को समर्पित करें इसके उपरांत जो एक लोटा जल आप लेकर आए हैं उसे भगवान भोलेनाथ को धीरे धीरे समर्पित करें और खाली बर्तन भी इस जल को झेल लें।
पांचों बेलपत्र और जल लेकर घर आ जाए। इन पांचों बेलपत्रों को पूरे दिन में पांच बार में खाना है और पूरे जल को भी पांच बार में बेलपत्र खाने के उपरांत पीना है। जैसे-जैसे आपके सोमवार बढ़ेंगे वैसे-वैसे आपका यह चर्म रोग घटना प्रारम्भ हो जाएगा क्योंकि बेलपत्र और जल अपना काम करना प्रारंभ कर देता है। बस यह ध्यान रखना चाहिए की बेलपत्र का कमल दल बनना चाहिए। 11 नहीं तो 21 सोमवार में आपको काफी लाभ देखने को मिलेगा या प्राप्त होगा।
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★ संतान प्राप्ति के लिए तुम्बरूका जी का उपाय
संतान प्राप्ति के लिए तुम्बरूका जी का उपाय करने के लिए रजस्वला धर्म के 7वें दिन सफेद आंकड़े की जड़ लेकर शिवालय जाईए। वहां उस जड़ को तुम्बरूका जी का नाम लेकर शिवजी के ऊपर से 21 बार घुमाईए और नंदी के पास खड़े होकर। लाल धागे में बांधकर उसे अपनी कमर में बांध लीजिए। और शंकर भगवान को रोज जल चढ़ाई मेरा भोला तुम्बरूकेश्वर महादेव है। वह संतान अवश्य देता है।
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★ शंका समाधान
गंगोत्री यमुनोत्री हरिद्वार इलाहाबाद आदि अनेक जगहों से गंगाजल भरकर ले आते हैं परंतु काशी से गंगा जल क्यों नहीं लाया जाता है?
काशी को महासमशान कहा जाता है। काशी मुक्ति का क्षेत्र है। इसे विमुक्त क्षेत्र भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां मरने वाले को मुक्ति की प्राप्ति होती है। कहते हैं कि भगवान भोलेनाथ यहु मरने वाले के कान में तारक मंत्र बोल कर जातेहैं। इससे वह व्यक्ति जन्म मरण से के बंधन से मुक्त हो जाता है।
अब आते हैं अपनी बात पर की गंगाजल क्यों नहीं लाया जाता तो हम आपको बता दे कि गंगाजल एक पवित्र द्रव्य है। जो पूजा पाठ आदि धार्मिक कार्यों में प्रयोग में लाया जाता है। काशी में भी गंगा जी बेहती हैं। इस गंगाजल में अनेक सूक्ष्म जीव भी मुक्ति की आस में वास करते है। न जाने इन जीवों ने कितना पुण्य किया होगा जो इन्हें काशी में जन्म मिला होगा। वे जन्म भी इस आस में लेते होंगे कि काशी में जन्म लेने लेने के और मृत्यु उपरांत उनके पुनः जन्म नहीं होगा। उन्हें मुक्ति की प्राप्त हो जाएगी।
यहां से जल भरकर ले जाएंगे तो हमारे जल में सूक्ष्म जीव भी विमुक्त क्षेत्र काशी से हमारे साथ चले जाएंगे। उनका मुक्ति की आशा टूट जाएगी और उन्हें कभी मुक्ति नहीं मिल पाएगी।
इसलिए ये जीव हमें बद्दुआ देंगे कि हम तो मुक्ति के लिए काशी में रह रहे थे और तुमने हमें मुक्ति से दूर कर दिया।
इस लिए उनकी बद्दुआ से बचने के लिए काशी से गंगाजल नहीं लाने के लिए कहा जाता है।
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★ यदि आपकी तीर्थ स्थान पर जाते हैं तो वहां के पत्थर
तो दूर की बात वहांकी रज अर्थात धूल भी उठाकर न लाएं। उसे रज में न जाने कितने जीव होंगे। उन्हें न जाने कितना तप करने के उपरांत यहां जन्म मिलाहोगा। ऐसे भगवान से प्रार्थना कर रहे होंगे न जाने कौन से संत की चरणरज से उन्हें मुक्ति मिल जाए।
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|| Day - 02 II
★ जिसके अंदर जो भरा होता है। उसे अपने आसपास वही दिखाई देता है। तभी तो कहा गया है
जाकी रही भावना जैसी ।
प्रभु मूर्ति देखी तिन तैसी।
अनायास क्रोध न करें यदि क्रोध आए तो उसे पर कंट्रोल अवश्य रखें।
अनायास क्रोध आपको किसी परेशानी में डाल सकता है
माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु पर अनायास क्रोध किया क्योंकि एक बार भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के देखकर हंस दिए तो माता लक्ष्मी को क्रोध आ गया और उन्होंने श्राप दिया कि तुम मुझे देखकर एक घोड़े की तरह हंसे हो तुम्हारा यह मुख कटेगा और तुम्हारे उस सिर पर घोड़े का मुख लगेगा। इस प्रकार हयग्रीव अवतार हुआ।
★ एक बार माता सरस्वती को भी अनायास क्रोध आया था
एक बार पुश कर रहा है ब्रह्मा जी तपस्या कर रहे हैं एक यज्ञ करने जा रहे थे यज्ञ का मुहूर्त निकाला जा रहा था तो संतो के कहने पर उन्होंने गाय के मुख से गायत्री को उत्पन्न किया और यज्ञप्रारंभ कर दिया तभी वहां ब्राह्मणी आ गई और उन्होंने ब्रह्मा जी को अन्य से श्राप दिया। तुम अपने आप को बहुत अधिक विद्वान समझते हो तुम्हारा बीच मेंकहीं भी पूजन नहीं होगा यदि पूजन होगा तो केवल नहीं पुष्पराज में होगा।
ब्रह्मा जी बोलिए ब्राह्मणी तो मुझे क्या बोल रही ह
तब ब्राह्मणी बोले सारे यज्ञ से बड़ा, सारे दानों से बड़ा, सारे पुण्य से बड़ा एक काम होता है वह कन्यादान होता है जब आप इस तरह पर कन्यादान कर लेंगे तब तुम्हारा इस स्थान पर पूजन प्रारंभ होगा।
सतयुग बीत गया त्रेता बीत गया और द्वापर युग आ गया। वह भी बीतने वाला था। तब ब्रह्मा जी बड़े परेशान हुए तो नारद जी उनसे मिलने आए। तब नाराज ने कहा कि पिताश्री भगवान विष्णु का और राधा रानी का प्रागटय ब्रज मंडल में हो चुका है। आप उनका विवाह कराएं । तब नारद जी की उपस्थिति में ब्रह्मा जी ने छोटे से कृष्ण और राधा का विवाह कराया। और तब से पुष्कर में ब्रह्मा जी की पूजा होने लगी इस विवाह को केवल यह चार लोग ही जानते हैं। इस गोपनीय विवाह को ब्रजमंडल के भंडार वन में कराया गया था।
★ बेटी का विवाह करते हुए तीन चीजों अवश्य देखें नंबर 1 संपत्ति नहीं देखना । देखना कि लड़कें का कुल अच्छे आचरण वाला होना चाहिए। नंबर दो चेहरा नहीं देखा लड़के का चरित्र देखना। नंबर 3 लड़की की संगति देखनी चाहिए संपत्ति नहीं।
एक घर में कितनी सीलिंग रख सकते हैं?
वैसे तो शिवलिंगों की संख्या कितनी भी हो सकती है अनंत भी हो सकती है लेकिन घर में यदि एक दो है तो अभी काफी है ऐसा नहीं है कि अगर शिवलिंगों की संख्या गिनती की रखनी है या ज्यादा हो जाने पर हमारे लिए नुकसानदायक है जो ऐसा कहते हैं वह ब्रह्म पैदा कर रहे हैं?
यदि घर में शिवलिंग है और क्या उनकी रोज पूजा आवश्यक है?
जी हां वैसे तो रोज पूजा अवश्य करें लेकिन आपको किसी जरूरी काम से बाहर जाना है तो आप शिवलिंग को पर एक बेलपत्र रखकर अगर 10 दिन के लिए भी बाहर चले जाएंगे तो भी भगवान आपसे प्रसन्न रहेंगे और तृप्त रहेंगे।
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Day - 02 II श्री शिवशक्ति शिवमहापुराण कथा || परतवाड़ा, महाराष्ट्र से 1:52.33 पर।
शंकर भगवान का सबसे बड़ा गुण है कि वह अपने से जुड़ने वाले को भी पूज्य बना देते हैं ।
उन्होंने अपनी पत्नि को सबके लिए पूजनीय बना दिया उन्होंने अपने पुत्रों (गणेश और कार्तिकेय) को, पुत्रियों को (अशोक सुंदरी, जया, विषहरा, शामली वारी, दोतली और देव), अपने पुत्रवधूओं (रिद्धि और सिद्धि) को , अपनी पोत्रों (शुभ और लाभ) को, अपने प्रपौत्रों (आमोद और प्रमोद) को, अपने नंदी बैल को, अपनी गली में पड़े सर्प को, अपने शीश पर धारण किए हुए चंद्रमा को, अपनी जटाओं में समाई हुई गंगा को, अपनी मस्तक पर चढ़ी हुई बेलपत्र को, अपने शरीर पर चढ़ी भी भभूत अर्थात भस्म को भी जिसे पूजनीय बना दिया है अगर आप उसे जुड़ेंगे तो हो सकता है एक दिन वह आपको भी पूछने बना दे।
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Day - 02 II श्री शिवशक्ति शिवमहापुराण कथा || परतवाड़ा, महाराष्ट्र से 2:02.33 पर।
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