पुस्तक २ (रिवाडी से खरीदी) शेष उपाय

भजन

तेरे डमरु की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ 

तेरे डमरु की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ 
मेरे भोले ओ बम भोले मैं काशी नगरी आई हूँ 
तेरे डमरु की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ

सुना है हमने ओ भोले तेरी काशी में मुक्ति है 
उसी गंगा में नहाने को में काशी नगरी आई हूँ 
तेरे डमरु की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ

सुना है हमने ओ भोले तेरी काशी में गंगा है 
उसी गंगा को पाने को मैं काशी नगरी आई हूँ 
तेरे डमरु की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ

सुना है हमने ओ भोले तेरी काशी में मन्दिर है 
उसी मन्दिर में पूजा को काशी नगरी आई हूँ 
तेरे डमरु की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ

तूने ऐसा डमरु बजाया, तूने ऐसा डमरूँ बजाया, 

मेरा मन हर लिया ओ भोलेनाथ दिल तुझको दिया ओ भोलेनाथ दिल तुझको दिया ओ भोलेनाथ

तेरे चरणों में ध्यान लगाया तेरे चरणों में ध्यान लगाया 
मुझे अपना लिया ओ भोलेनाथ मुझे अपना लिया ओ भोलेनाथ दिल तुझको दिया ओ भोलेनाथ अरे ओ भोलनाथ मेरे भोलेनाथ दिल तुझको दिया ओ भोलेनाथ ये क्या कर दिया ओ भोलेनाथ

मैं तो बैठी थी गंगा किनारे मैं तो बैठी थी गंगा किनारे आके दर्शन दिया ओ भोलेनाथ दिल तुझको दिया ओ भोलेनाथ दिल तुझको दिया ओ भोलेनाथ अरे ओ भोलनाथ मेरे भोलेनाथ

तूने ऐसा डमरु बजाया, तूने ऐसा डमरूँ बजाया, मेरा मन हर लिया ओ भोलेनाथ दिल तुझको दिया ओ भोलेनाथ दिल तुझको दिया ओ भोलेनाथ

अब दया करो मेरे भोलेनाथ, मस्त रहूँ तेरी मस्ती में, 
मेरे सिर पर रख दो अपना हाथ, मस्त रहूँ तेरी मस्ती में, 
तेरे शीश पे गंगा बहती है, मैं गोता लगाऊँ सुबह शाम, 
तेरे माथे पर चंदा सजता है, मै दर्शन पाऊँ सुबह शाम, 
मस्त रहूँ तेरी मस्ती में, अब दया करो मेरे भोलेनाथ, 卐

मेरी गली में नागों की माला, मैं दूध पिलाऊँ सुबह शाम, 
मस्त रहूँ तेरी मस्ती में, अब दया करो मेरे भोलेनाथ, 
तेरे हाथों में डमरु बजता है, मैं धुन पर नाचूँ सुबह शाम, 
मस्त रहूँ तेरी मस्ती में, अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

तेरे संग में गौरा सजती है, वरदान में पाऊँ सुबह शाम, 
मस्त रहूँ तेरी मस्ती में, अब दया करो मेरे भोलेनाथ, 
तेरी गोद में गणपत लाला है पूजा में कर लूँ सुबह शाम, 
मस्त रहूँ तेरी मस्ती में, अब दया करो मेरे भोलेनाथ, 
तेरे संग में नंदी सोह रहे, पर्वत पर घूमो तेरे साथ, 
मस्त रहूँ तेरी मस्ती में, अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

भजन - मत बुरे कर्म कर बंदे वरना पछताएगा 

मत कर बुरे कर्म बंदे वरना पछताएगा
भगवान की आँखो से तू बच नहीं पाएगा
अरे ओ अज्ञानी मत कर नादानी
बैठा है बड़ी आशा ये भोले दरबार में
क्यों रोए भोले बैठा तेरे संसार में
अरे ओ अज्ञानी मत कर नादानी

मत कर बुरे कर्म बंदे वरना पछताएगा
भगवान की आँखो से तू बच नहीं पाएगा

भोले बाबा तेरी नौकरी सबसे बढ़िया है 

भोले बाबा तेरी नौकरी सबसे बढ़िया है सबसे खरी
तेरे दरवाजे की चाकरी सबसे बढ़िया है सबसे खरी 
हो हो भोले बाबा तेरी नौबरी सबसे बढ़िया है सबसे खरी

जब से तेरा गुलाम हो गया तब से मेरा भी नाम हो गया 
वरना औकात क्या थी मेरी सबसे बढ़िया है सबसे खरी

भोले बाबा तेरी नौकरी सबसे बढ़िया है सबसे खरी

तेरे डमरु की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ 

तेरे डमरु की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ 
मेरे भोले ओ बम भोले मैं काशी नगरी आई हूँ 
तेरे डमरु की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ

सुना है हमने ओ भोले तेरी काशी में मुक्ति है 
उसी गंगा में नहाने को में काशी नगरी आई हूँ 
तेरे डमरु की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ

सुना है हमने ओ भोले तेरी काशी में गंगा है 
उसी गंगा को पाने को मैं काशी नगरी आई हूँ 
तेरे डमरु की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ

सुना है हमने ओ भोले तेरी काशी में मन्दिर है 
उसी मन्दिर में पूजा को काशी नगरी आई हूँ 
तेरे डमरु की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ

भोला सब दुख काटो मारा 

शिव शंकर जपूँ मैं तेरी माला
भोला सब दुख काटो मारा 
वेश है मंगल मंगलकारी
अवधूत रूप तुम्हारा भोला सब दुख काटो माया

ओ भोला सब दुख कोटो मारा शिव शंकर जपूँ में तेरी माला
भोले बाबा जपूँ में तेरी माला शीश पर गंगा मस्तक पर चंदा

शमशान वासी हमारा भोला सब दुश काटो मारा ओ भोला सब दुख काटो मारा

शंभू शरणे पड़ी मांगू घड़ी रे घड़ी दुख काटो, 
दया करीने ने दर्शन आपो !!! (2)

1) तेरी सेवा में जल ले आई, एसे मछली भी झूठा कराई (2) 
जल कैसे चढ़ाऊँ... भोले कैसे करु रिझाउ... महादेवा !! भोले कैसे करु तेरी सेवा। शंभू शरणे पड़ी...... 2)

तेरी सेवा में दूध ले आई, उसे बछड़ा भी झूठा कराई (2) 
दूध कैसे चढ़ाऊँ... भोले कैसे करु रिझाउ... महादेवा !! भोले कैसे करु तेरी सेवा।

शंभू शरणे पड़ी. तेरी सेवा में फूल ले आई, उसे भवरा भी झूठा कराई (2) 
जल कैसे चढ़ाऊँ... भोले कैसे करु रिझाउ... महादेवा !! भोले कैसे करु तेरी सेवा।

भजन- काशी में खुली है दुकान गौरा रानी क्या लोगी

काशी में खुली है दुकान गौरा रानी क्या लोगी गौरा रानी क्या लोगी हो गौरा रानी क्या लोगी पायल तो मैं पहन के आई मुझे बिछुवा दिला दो भोलेनाथ मैं तो बस यही लूंगी

काशी में खुली है दुकान गौरा रानी क्या लोगी
गौरा रानी क्या लोगी हो गौरा रानी क्या लोगी
लहंगा तो मैं पहन के आई मुझे चुनर दिला दो भोलेनाथ
मैं तो बस यही लूँगी

काशी में खुली है दुकान गौरा रानी क्या लोगी गौरा रानी क्या लोगी हो गौरा रानी क्या लोगी
हरवा तो मैं पहन के आई मुझे नथनी दिला दो भोलेनाथ

* मैं तो बस यही लूँगी

काशी में खुली है दुकान गौरा रानी क्या लोगी गौरा रानी क्या लोगी हो गौरा रानी क्या लोगी

चूड़ा तो मैं पहन के आई मुझे महंदी दिला दो भोलेनाथ मैं तो बस यही लूँगी।

भजन- बड़ी दूर से चलकर आया हूँ

एक बेलपत्र लाया हूँ चरणों में तेरे अर्पण करने

बड़ी दूर से चलकर आया हूँ मेरे भोले तेरे दर्शन के लिए 
ना हीरे मोती सोना है ना धन दौलत की झोली है 
दो आंसू बचा कर लाया हूँ पूजा करने के लिए 

बड़ी दूर से चलकर आया हूँ मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए 
एक बेलपत्र लाया हूँ चरणों में तेरे अर्पण करने 
मेरे बाबा मेरी इच्छा नहीं अब यहां से वापस जाने की चरणों में जगह दे दो थोड़ी मुझे जीवन भर रहने के लिए 

बड़ी दूर से चलकर आया हूँ मेरे भोले तेरे दर्शन के लिए मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए एक बेलपत्र लाया हूँ चरणों में तेरे अर्पण करने मेरे भोले तेरे दर्शन के लिए


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