पुस्तक १ (रिवाडी से खरीदी)

॥ श्री शिवाय नमस्तुभ्यं ॥

शिव-सूत्र

ॐ हौं जूं सः ॐ भुर्भवः स्वः ॐ र्य्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ भुवः भूः स्वः ॐ सः जूं हीं ॐ ।

इस पुस्तक को लिखने का मुख्य उद्देश्य भगवान शंकर में जनमानस की आस्था जगाना है।
इस पुस्तक में भगवान शंकरजी की पूजा, व्रत की विधियाँ, उन पर पुष्प, जल, बिल्वपत्र आदि अर्पण के नियम, पशुपतिनाथ व्रत और अन्य व्रत करने के नियम, विभिन्न प्रकार के रुद्राक्षों को धारण करने की विधि एवं मंत्र जन जन तक सरलता रुप में पहुँचाना। 
जनकल्याण हेतु पुराणो में दिए गए उपाय विभिन्न प्रकार के उपायों और उनके लाभो के बारे में जन जन को समझाना है ताकि सभी व्यक्ति विधिवत पूजन एवं व्रत कर भगवान शंकर की कृपा प्राप्त कर सकें। इस पुस्तक में वर्णित जानकारी को अलग-अलग माध्यम से अर्जित व संकलित किया गया है।

संकलनकर्ता 
ॐ जितेन्द्र सिंह तोमर 

॥ श्री शिवाय नमस्तुभ्यं ॥

1

विषय-सूची

1. पशुपति व्रत, नियम एवं उद्यापन विधि
2. शिवलिंग पर जल चढ़ाने की विधि
3. शिवलिंग पर बेलपत्र एवं पंचामृत चढ़ाने की विधि
4. रात को नींद नहीं आने पर शिव जी की पाँच बेटियों वाला उपाय
5. गरीबी से मुक्ति के लिए हनुमान जी का मंत्र
6. व्यापार, फैक्ट्री में लाभ एवं नई गाड़ी ली है तो हनुमान जी के तीसरे भाई गतिमान जी के नाम का उपाय
7. शिव जी को त्रिपुण्ड लगाने के नियम
8. 16 सोमवार व्रत, नियम एवं उद्यापन विधि
9. महादेव जी के 3 मंत्र और जप करने के नियम
10. भगवान महादेव जी के विविध रूप और उनकी पूजा के उपाय
11. शनि देव जी के दुष्प्रभाव को कम करने के उपाय
12. प्रेग्नन्सी में किए जाने वाले उपाय
13. संतान प्राप्ति में आ रही बाधा को दूर करने के लिए उपाय
14. प्रदोष तिथि में किए जाने वाले उपाय
15. पित्र दोष, कालसर्प दोष एवं वास्तु दोष समाप्त करने के उपाय
16. रोगों के लिए उपाय
1) एक लोटा जल सारी समस्या का हल
2) ब्लॉक नसों को खोलने का उपाय
3) कान का बहरापन दूर करने के उपाय
4) घुटने और कमर दर्द दूर करने का उपाय
5) पथरी को जड़ से खत्म के उपाय
6) माईग्रेन की बीमारी में उपाय
7) लकवा/पैरालीसिस के उपाय
8) डायबिटीज (शुगर) को कंट्रोल करने के उपाय
9) किड्नी-लिवर से संबंधित उपाय
10) दमे की बीमारी का उपाय

17. रात 9.15 बजे करने वाले उपाय
18. पुरानी से पुरानी नशे की लत छुड़ाने का अचूक उपाय
19. प्रतियोगी परीक्षा और जॉब में सफल होने के उपाय
20. सरसों के फूल के उपाय
21. जीवन में बार बार मिल रही है असफलता के उपाय
22. पारिवारिक कलह से छुटकारा पाने के लिए उपाय
23. कोर्ट कचहरी में सफलता पाने के लिए उपाय
24. फंसा हुआ पैसा वापस पाने के लिए उपाय
25. सूर्य भगवान को जल चढ़ाने के तरीके एवं लाभ
26. विवाह में आ रही अड़चन तो करें ये उपाय
27. कष्ट हरने के लिए मंगलवार को करें ये उपाय
28. मनोकामना पूर्ति के लिए उपाय
29. पूर्वजों के उद्धार के लिए उपाय
30. बेलपत्र का दान के लाभ और आटे के दीपक के लाभ
31. रुद्राक्षों की सम्पूर्ण जानकारी
32. महादेव जी के 11 रुद्र अवतारों के नाम

1. पशुपति व्रत विधि

★ आप पशुपति व्रत जिस सोमवार से करना प्रारंभ कर रहे हैं। उस सोमवार को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर पांच सोमवार व्रत करने का संकल्प लें।
★ फिर आप अपने आस-पास के शिवालय (मंदिर) जाएं।
★ अपनी पूजा की थाली में (धूप, दीप, चंदन, लाल चंदन, विल्व पत्र, पुष्प, फल, जल) ले जाएं और शिव जी का अभिषेक करें।
★ इस थाली को घर आकर ऐसे ही रख दें।
★ जब आप शाम के समय (प्रदोष काल) में स्वच्छ हो कर मंदिर जाएं तो इसी थाली में मीठा प्रसाद एवं छः दिए (दीपक) लेकर जाएं।
★ मीठे भोग प्रसाद को बराबर तीन भाग में बांट लें। दो भाग भगवान शिव जी को समर्पित करें बचा हुआ एक भाग अपनी थाली में रख लें।
★ फिर आप जो छः दीपक लाएं हैं उनमें से पांच दिए भगवान शिव के सम्मुख प्रज्वलित करें।
★ बिना जला एवं बचा हुआ दीपक अपनी थाली में रख घर वापस ले आएं, इसे घर में प्रवेश होने से पहले अपने घर के मुख्यद्वार के दाहिने ओर चोखट पर रख कर प्रज्वलित कर दें।
★ घर में प्रवेश करने के बाद एक भाग भोग प्रसाद को आप ग्रहण करें। इस प्रसाद को किसी अन्य व्यक्ति को न दें।
★ इस व्रत में आप प्रसाद के साथ भोजन भी ग्रहण कर सकते हैं ।

पशुपति व्रत के नियम

शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक व्रत के अपने कुछ नियम होते हैं। वैसे ही इस व्रत के भी कुछ नियम हैं। जो इस प्रकार हैं-
इस व्रत को सोमवार के दिन ही किया जाता है।
★ इस व्रत में सुबह और शाम (प्रदोष काल) में मंदिर जाना अनिवार्य है।
★ किसी कारण आप व्रत करने में असमर्थ हैं। तो उस सोमवार को व्रत नहीं करना चाहिए।
★ आप जिस मंदिर (शिवालय) में प्रथम सोमवार को गए हैं उसी मंदिर में पांचों सोमवार जाएं।
★ शाम के समय (प्रदोष काल) में पूजा का बहुत महत्व है।
★ व्रत करने वाले को दिन में सोना नहीं चाहिए। भगवान शंकर का ध्यान करते रहना चाहिए।
★ इस व्रत में आप दिन में फलाहार भी कर सकते हैं।
★ यदि आप दुबारा व्रत करना चाहते हैं तो एक सोमवार छोड़ कर व्रत प्रारंभ कर सकते हैं।
★ व्रत के दौरान श्रद्धानुसार दान भी करें।

पशुपति व्रत उद्यापन विधि

पशुपति व्रत को चार सोमवार तक दी गई विधि से पूजा अर्चना करें। पांचवां सोमवार को जब आप सायं: काल (प्रदोष काल) के समय मंदिर जाएं तब अपनी पूजा की थाली में भोग प्रसाद, दीपक, के साथ एक नारियल जिस पर 5-7 बार मौली लपेटी हुई हो उसे भी ले जाएं। इनको भगवान शिव को दक्षिणा में चढ़ा दें। हो सके तो 108 बिलपत्र, 108 अक्षत के दाने, 108 पुष्प या 108 मूंग के दाने से भोलेनाथ का श्रृंगार करें।

2. शिवलिंग पर जल चढ़ाने की विधि

हमेशा उत्तर दिशा की ओर मुंह करके जल चढ़ाएं। सबसे पहले गणेश जी वाले स्थान पर दूसरा कार्तिक जी के स्थान पर तीसरा अशोक सुंदरी जी वाले स्थान पर चौथा पार्वती जी के हस्तकमल पर फिर शंकर जी पर चढ़ाएँ । शंकर जी के ऊपर जल का पत्र हो तो वहाँ फिर नंदीश्वर जी पर और आते आते चौखट पर दो बूंद जल चढ़ाएं और फिर मंदिर से आयें। गंगाजल नहीं हो तो कोई बात नहीं। एक लौटा जल अगर शंकर जी पर चढ़ गया तो वो जल वैसे ही गंगाजल हो जाएगा।

सभी स्थानों की जानकारी किताब के कवर पेज पर है।

नोट –
1. शिवलिंग पर हमेशा जल उतनी ऊँचाई से चढ़ाएँ जितनी ऊँचाई से खुद पर छींटे ना आयें।
2. जिस घर में डलिया में, फ्रिज में, रसोई में नींबू और मिर्ची ये दोनों एक ही जगह रहते है तो उनके घर में कभी शांति नहीं रहती है।
3. बैल का फल का गुदा अगर व्यक्ति ने खा लिया है और वह 27 दिन के अंदर मर गया है तो वह प्रेतयोनि, नर्क में नहीं जाएगा वह कैलाश धाम ही जाएगा।

3. बेलपत्र चढ़ाने की विधि

बेलपत्र 3 पत्तियों वाला हो और वो साबुत हो यानि कटा-फटा न हो। उस पर कोई दाग-धब्बा भी न हो और न ही वो मुरझाया हो। 1, 5, 11, 21 आदि संख्या में बेलपत्र शिवजी को चढ़ाते हैं। यदि बेलपत्र आपके पास नहीं हैं तो शिवलिंग पर चढ़ाए गए बेलपत्र को धोकर भी चढ़ा सकते हैं।
जब भी आप शिवजी की पूजा करने जाएं तो उससे पहले बेलपत्र को अच्छे से साफ पानी से धो लें। फिर बेलपत्र की चिकनी सतह को शिवलिंग से स्पर्श कराकर अर्पित करें। इस दौरान ओम नमः शिवाय या श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का उच्चारण करें।
मनोकामना पूर्ति के लिए बेलपत्र की बीच वाली डंडी को पकड़कर शिवलिंग के ऊपर अर्पित करना है और बेलपत्र की डंडी आपके विपरीत हो।

पंचामृत एवं उसको चढ़ाने के लाभ

दूध, दही, घी, शक्कर और शहद निश्चित मात्र में मिलाकर शिवलिंग पर चढाएँ।
दूध चढ़ाने से घर में शांति होती है, दहीं चढाने से परिवार में प्रेम बढ़ता है, घी चढ़ाने से संपदा की वृद्धि होती है, शहद चढ़ाने से घर के व्यक्तियों के रोग दूर होते हैं। शक्कर चढ़ाने से हमारे घर के बच्चे जिद्दी नहीं होते हैं।
शंकर जी की जलधारी उत्तर में क्यूँ होती है ? शिवमहापुरण गर्गसंहिता एवं स्कंदपुरण कहती है शंकर जी की आराधना केवल दक्षिण दिशा की ओर बैठकर, मुख उत्तर में ही करना चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा ने उत्तर दिशा को महादेव जी के तेज पुंज के जलने से बचाया था।

4. उपाय

रात को नींद नहीं आए तब करें यह उपाय - रात को नींद न आए तो हाथ में जल लेकर शंकर जी की 5 पुत्रियों का नाम एक एक करके लीजिए, जैसे पहली पुत्री जया का नाम के साथ जल का आचमन करें फिर दूसरी पुत्री का नाम लीजिए और जल का आचमन करें। उनकी पाँच पुत्रियों के नाम है जया, विषहरा, शामिलबारी, देव और दोतलि।

5. गरीबी से मुक्ति के लिए

घोर संकट के साथ गरीबी से मुक्ति दिलाएंगे संकट मोचन हनुमान जान लें ये अचूक उपाय पंच मुखी हनुमान का स्कंद पुराण मंत्र एवं शिव महापुराण का मंत्र - ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।

इस मंत्र को काली तिल, एक जौं का दाना और गूगल लेकर थोड़ा गाय का घी डालकर कण्डे या अग्नि जलाकर उस मंत्र का 11 या 21 बार जाप करकर अपनी कामना करके छोड़ दीजिए। 21 दिन में आनंद आना शुरू हो जाता है। मनुष्य को इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी है। और पर स्त्री से भी हमेशा दूर रहना है।

धन प्राप्ति का उपाय

गन्ने का रस तुलसी जी के क्यारे में हाथ से 7 बार अपना और अपने गोत्र का नाम बोलकर छोड़ दीजिए। कुछ ही दिनों में धन आना प्रारंभ हो जाएगा।
सोमवार को कमल का पुष्प शंकर जी को चढ़ाएँ अगर पुष्प नहीं मिल रहा है तो 1 कमल गट्टा पानी में डाल उस पानी को शंकर जी को चढ़ाओ लक्ष्मी जी जल्दी घर में आएंगी।

6. घर में अगर को नई कार आए या कोई फैक्ट्री या व्यापार चल नहीं रहा है तो करे ये उपाय

हनुमान जी की प्रतिमा के उलटे पैर का सिंदूर लेकर आईए और हनुमान जी के तीसरे नंबर के भाई गतिमान का नाम लेकर दुकान पर, व्यापार पर, फैक्ट्री पर या गाड़ी पर स्वस्तिक बना लीजिए। व्यापार अच्छा चलेगा और गाड़ी का एक्सीडेंट नहीं होगा।

7. शिव जी को त्रिपुण्ड लगाने के नियम
पहले दो उंगली से चंदन लगाना चाहिये और फिर उसके नीचे एक उंगली से अलग चंदन लगाना चाहिए तब त्रिपुण्ड का आनंद शिव स्वीकार करते हैं। नोट-

1. भविष्य पुराण के अनुसार जब भी आप पैर के अंगूठे का नाखून काटो तो उसे किसी को देखने ना दो और उसे ऐसी जगह डालें जहां किसी परिवार के व्यक्ति को पता नहीं चले, क्योंकि अगर कटे नाखून के ऊपर से जीतने लोग या जीव निकल कर जाते हैं उतने रोग शरीर में आते ही हैं। मानव के शरीर के पाप कर्म 3 जगहों से निकलता है मल के द्वारा, नाखून के द्वारा और बालों के द्वारा।

2. शाम के समय (प्रदोष काल के समय) शंकर जी के भ्रमण का समय होता है तो इस समय झाडू नहीं लगाना चाहिए, महिलाओं को बाल नहीं बनाना चाहिए, घर की दहलीज पर नहीं बैठना चाहिए, चूडी बिछिया नहीं बदलनी चाहिए। इस समय अपने घर के द्वार पर दीया लगा दीजिए और ॐ नमः शिवाय का मंत्र बोलना चाहिए।

8. सोलह (16) सोमवार व्रत की विधि, नियम एवं जानें पूजा का सही समय 

कब से शुरू करें-
सोलह सोमवार का व्रत सावन माह के पहले सोमवार पर शुरू करना उत्तम माना गया है, संतान प्राप्ति के लिए भी यह व्रत सावन के पहले सोमवार से करना चाहिए अगर जीवन में रोग हो गया है बहुत कष्ट है और दुख आ गया हो तो वैशाख मास के पहले सोमवार से व्रत शुरू करें और उत्तम घर, उत्तम वर, व्यापार, व्यवसाय, नौकरी, पद, प्रतिष्ठा के लिए मार्गशीर्ष मास के पहले सोमवार से करना चाहिए।

व्रत को सोमवार के दिन सूर्योदय से शुरू करें और शाम की पूजा उपरांत प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही व्रत को पूर्ण करें।

किस समय होती सोलह सोमवार व्रत की पूजा ? 
शिव पुराण के अनुसार सोलह सोमवार व्रत की पूजा दिन के तीसरे पहर में यानी कि 4 बजे के आस-पास शुरू करनी चाहिए. सूर्यास्त से पहले पूजन संपूर्ण हो जाना चाहिए। ग्रंथों के अनुसार शिव पूजा प्रदोष काल में पुण्यफलदायी होती है।

सोलह सोमवार व्रत की सामग्री - 
सोलह सोमवार व्रत में शिवलिंग, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), जनेऊ, दीप, धतूरा, इत्र, रोली, अष्टगंध, सफेद वस्त्र, बेलपत्र, धूप, पुष्प, सफेद चंदन, भांग, भस्म, गन्ने का रस, फल, मिठाई, मां पार्वती की 16 श्रृंगार सामग्री (चूड़ी, बिंदी, चुनरी, पायल, बिछिया, मेहंदी, कुमकुम, सिंदूर, काजल) आदि।

व्रत का संकल्प कैसे लें- 
सोमवार व्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में पानी में गंगाजल और काला तिल डालकर स्नान करें। साफ, धुले कपड़े पहनकर महादेव के सामने 16 सोमवार व्रत करने का संकल्प लें। एक पान का पत्ता उसके साथ एक गोल सुपारी भी ले। उसके बाद अपने हाथ में थोड़ा सा जल और थोड़ा सा अक्षत यानी कि चावल और कुछ सिक्के लेकर शिवजी की प्रतिमा के सामने बैठकर अपने व्रत करने का संकल्प लें फिर हाथ जोड़कर प्रणाम करें। हाथ में रखी सामग्री को शिव जी को समर्पित कर दे और पूजा शाम को करें।

सोलह सोमवार व्रत की पूजा विधि-
शाम को स्त्रियां सोलह श्रृंगार कर प्रदोष काल में शिव जी का अभिषेक करें। शिवलिंग को एक तांबे के पात्र में रखकर उनकी पूजा कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले गंगाजल में गाय का दूध मिलाकर शिवजी का अभिषेक करें और शिवजी की आराधना करें।

इसके बाद आपको शिवलिंग पर कई प्रकार की चीजें अर्पित करनी है, जैसे दही, पंचामृत, दूध, शहद, शक्कर, धूप, दीप, अष्टगंध, सफेद चंदन, सफेद वस्त्र, गन्ने का रस आदि जो भी सामग्री आपके एस उपलब्ध हो वह शिवलिंग पर अर्पित करें, और इसी के साथ मन में ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें।

देवी पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं और धूप-दीप, भोग लगाकर सोमवार व्रत की कथा का श्रवण करें। सोलह सोमवार व्रत में आटे, गुड़ और घी से चूरमा बनाकर भोग लगाया जाता है। इस भोग के तीन हिस्से कर शिव जी को चढ़ाएं। अंत में शिव जी के मंत्रों का जाप, शिव चालीसा पाठ आदि कर आरती कर दें। अब प्रसाद का पहला हिस्सा गाय को दें, दूसरा खुद खाएं और तीसरा अन्य लोगों या शिव भक्तों में बांट दें।

सोलह सोमवार व्रत में इन बातों का रखें ध्यान

सोलह सोमवार व्रत कठिन माना जाता है, इसलिए व्रत करने वाले 16 सोमवार व्रत का संकल्प लेकर उसे पूरा करें। इसे बीच में नहीं छोड़ना चाहिए नहीं तो व्रत व्यर्थ चले जाते हैं अगर रजस्वा धर्म में है तो उस दिन व्रत तो करना चाहिये, लेकिन उसे गिनती में नहीं लेना चाहिए।

व्रत की पूजा के बाद उसी स्थान पर बैठकर प्रसाद ग्रहण करें पूजा के बीच उठना शुभ नहीं होता।

इस व्रत का पालन करने वालों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। सोमवार के दिन भूल से भी घर में तामसिक भोजन न बनाएं और हो सके तो बिना नमक का ही फलाहार करें।

उद्यापन विधि-
17वें सोमवार के दिन अपने सोलह सोमवार व्रत को विधिपूर्वक उद्यापन कर सकते हैं और ज्ञानी पंडित से ही अपने सोलह सोमवार व्रत विधि के अनुसार उद्यापन का कार्यक्रम करवाएं, क्योंकि उन्हें मंत्रों के बारे में अच्छे से जानकारी होती है।

1. व्रत उद्यापन करने वाले दिन सुबह सूर्योदय से पहले जल्दी उठ जाए और स्नान आदि कार्य करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें।
2. इसके बाद अपने पूजा स्थल में जाएं और पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और उस स्थान पर केलो के पत्तों की मदद से चार खंभों का मंडप तैयार करें।
3. इस मंडप के चारों ओर आप फूल और आम के पत्ते रखे।
4. इसके बाद आपको पूजा की सारी सामग्रियां लेनी हैं, और उसे लेकर पूर्व दिशा में मुंह करके आसन बिछाकर बैठ जाना है।
5. उसके बाद आपने जो मंडप बनाया है, उसके बीचों-बीच एक चौकी को रखें और चौकी के ऊपर एक सफेद रंग का वस्त्र बिछा दें, और वस्त्र के ऊपर भगवान शिव और पार्वती जी की प्रतिमा को स्थापित करें।
6. इसके बाद बारी आती है अपने आप को पवित्र करने की, तो इसके लिए सबसे पहले आप अपने हाथ में थोड़ा सा स्वच्छ जल ले, और उसके बाद
ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा ।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः ॥
इस मंत्र का उच्चारण करते हुए जल स्वयं पर एवं पूजा की सभी सामग्रियों के ऊपर छिड़क दें और सभी चीजों को पवित्र कर ले।
7. इतना करने के बाद आपको शिवजी और पार्वती जी की पूजा करनी होती है, जिसके लिए आप शिवजी का अभिषेक करें और उन्हें कई प्रकार की चीजें जैसे की धतूरा, बेलपत्र, सुपारी, भांग, आदि अर्पित करें, इसके बाद पूजा हो जाने के बाद आप अपना व्रत उद्यापन कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि जिस दिन आप अपना व्रत उद्यापन करें उस दिन आपको दिन भर में एक बार ही भोजन करना है और ऐसा भोजन करना है जिसमें नमक ना हो।
8. इस दिन विवाहित दंपतियों को भी भोजन कराया जाता है।

नोट-
प्रसाद को रात में ही खत्म कर देना है। प्रसाद को रात भर नहीं रखा जाता। प्रसाद घर पर ही बनाना चाहिए और पूजा की थाली में दीपक की बत्ती भी खुद अपने हाथों से बनानी चाहिए।

नरसिंहपुराण में प्रसाद का महत्व-
अगर किसी के घर में सोलह सोमवार के व्रत के उद्यापन हुआ हो तो वहाँ का प्रसाद दोनों हथेलियाँ फैलाकर मांगकर उन्ही के दरवाजे पर खाकर आना चाहिए।
अगर कोई पशुपतिनाथ का व्रत करके प्रसाद मंदिर में छोड़ कर आता है और वो प्रसाद कोई महिला या पुरुष उसको ग्रहण करता हो और कॉलोनी में बाट देता हो तो उसे हजारों अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त हो जाता है।
महादेव जी के सामने रखे हुए ठंडे दिये उठाकर कहीं श्रेष्ठ जगह रख देने से विपदा में महादेव जी आपकी सहायता करते हैं।

9. महादेव जी के 3 महत्वपूर्ण मंत्र और नियम

1. ॐ नमः शिवाय- मंत्र का जाप आप श्रद्धा भाव से कभी भी कर सकते हैं। इसे आप मंदिर में या अन्य स्थान पर खड़े हुए या बिना आसन के भी कर सकते है। मंत्र की कोई विशेष विधि नहीं है।

2. महामृत्युंजय मंत्र- मंत्र का जप कभी भी जमीन पर बैठकर न करें। मंत्र का जप हमेशा कोई आसन पर करें। कुश के आसन पर जप करना सबसे अच्छा माना जाता है सदैव पूर्व दिशा की ओर मुख करके इस मंत्र का जप करें इसका उच्चारण ठीक से हो जप करने के लिए सदैव रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें।

3. श्री शिवाय नमस्तुभ्यं-मंत्र के जप की कोई विशेष विधि नहीं है। आप खड़े हुए कभी भी कर सकते है, पर आसान पर और रुद्राक्ष की माला के साथ जप करें तो लाभ जल्दी मिलेगा।

10. भगवान महादेव जी के रूप

1. श्रम्भेश्वर महादेव - क्रोधी, व्यसन ग्रसित और व्यभिचार ग्रसित व्यक्ति श्रम्भेश्वर महादेव का नाम लेकर शिवलिंग पर जल चढ़ाकर जल आचमन करता है तो व्यसन ग्रसित व्यक्ति व्यसन से मुक्त हो जाता है। श्रम्भेश्वर महादेव जी ने नरसिंह भगवान का क्रोध शांत किया था इसलिए इनका स्मरण क्रोध को शांत करने के लिए किया जाता है।
2. कुंदकेश्वर महादेव- रोग मुक्ति के लिए कुंदकेश्वर महादेव जी का नाम लेकर शिवलिंग पर जल और बिलपत्र चढ़ाकर एवं चढे हुए जल का आचमन और बिलपत्र का सेवन करने से कई रोग समाप्त हो जाते है। 
3. अवधूतेश्वर महादेव - जो बच्चा बहुत जिद्दी हो उसके हाथ से सोमवार की अष्टमी के दिन एक कटोरी शक्कर भगवान शिव जी के शिवलिंग पर अवधूतेश्वर महादेव जी का नाम लेकर समर्पित करवा दे। बच्चा कभी जिद्द नहीं करेगा।
4. नीलकंठेश्वर महादेव - नशा कर रहे व्यक्ति को नशा छुड़वाने के लिए उपाय- बेल की पेड़ की छाल को निकाल लेना है और एक छोटी कटोरी पानी में 20 से 25 मिनट तक छाल को डाल देना और उसको पीस लेना है जिससे आपके पास भूरे रंग का पेस्ट बनकर आएगा अब उस पेस्ट से छोटी छोटी 7 गोलियां बना लेना और उत्तर दिशा में मुख करके खड़ा होना है और गोलियों को शिवलिंग के ऊपर नीलकंठेश्वर महादेव जी का नाम लेते हुए रखना है और जो भी व्यक्ति बहुत ज्यादा नशा करता है उसे रोज 1 गोली व्यक्ति को नीलकंठेश्वर का नाम लेते हुए खिलानी है।

11. शनि देव के दुष्प्रभाव कम करने के लिए उपाय

जो भी व्यक्ति शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों/तिल के तेल से दीपक लगाते हैं उन्हे शनि जी कभी परेशान नहीं करते।
कभी कभी शनि जी के कारण अच्छे काम उल्टे हो रहे है रोग हो गया हो उन्हें पीपल के वृक्ष की छाल को घीसकर चंदन बनाकर भगवान शंकर को स्नान कराकर अभिषेक पूजन कर पिपलेश्वर महादेव का नाम लेकर घिसी हुई छाल का तिलक शंकर जी को लगा दो और उस का थोड़ा भाग अपने कंठ पर एवं मस्तक पर लगाना प्रारंभ कर दो शनि देव जी की विपरीत दशा ठीक हो जाती है।

12. प्रेग्नन्सी में करेंगे ये उपाय तो पक्का आपकी होगी

नॉर्मल डिलिवेरी

1. गुड़ के छोटे छोटे सात टुकड़े (डली) ले लें। हाथ में लेकर शंकर जी पर सात बार घुमाये तुमरुका जी का नाम लेकर अस्पताल में जाने से पहले 1-1 डली करके सातों डली को गर्भवती महिला को खिलाये।

2. जब डॉक्टर बोल दे की महिला का ऑपरेशन 8वें महीने में करना होगा 9 महीने नहीं रुक सकते तब करें उपाय- बेल पत्र पर एक चावल का दाना रखकर महिला का हाथ लगवा दें और स्वधा माता का नाम लेकर अशोक सुंदरी वाली जगह पर रखवा दें। इस उपाय से बच्चा पूर्ण स्वास्थ एवं 9वें महीने ही होगा।

3. जब डॉक्टर बोल दे की बच्चा मानसिक रूप से कमजोर या शरीर का कोई अंग ठीक नहीं होगा तो वह बेल पत्र की बीच वाली पत्ती पर चंदन से महादेव जी की पाँच बेटी जया, विषहरा, शामलिवारी, दौतली, देव का नाम लिख कर या पाँच बिंदिया पुत्रियों का नाम लेते हुए बिलपत्र पर लगाकर और बिलपत्र को माता अशोक सुंदरी जी के स्थान पर श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का जप करते हुए अर्पित कर देना है।

13. संतान प्राप्ति में आ रही बाधा को ऐसे करे दूर

1. अगर किसी स्त्री को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है तो उस स्त्री के रजस्वला यानी मासिक धर्म के सातवें दिन सफेद आंकड़े की जड़ को लेकर शिवलिंग पर 21 बार घुमाकर तुमरुका जी का आह्वान करते हुए और अपना नाम गोत्र और पति का नाम लेकर संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना कीजिए फिर उस आंकड़े की जड़ को मंदिर में ही लाल धागे में बांधकर स्त्री कमर में बांध लें। भोलेबाबा की कृपा से उस स्त्री की जल्द ही गोद भर जाएगी। 
2. अगर किसी नारी का गर्भ 2-4 महीने चढ़ने के बाद बार बार गिर जाता हो या बच्चा स्वस्थ पैदा नहीं होता हो या डॉक्टर ने कहा हो की ऑपरेशन से डिलीवरी होगी तो उस नारी को अपनी लंबाई के बराबर एक मोली लेकर एक नारियल पर लपेट कर तुमरुका जी का नाम स्मरण करके शंकर जी के शिवलिंग के पास में नारियल को रख देना है। ऐसा करने से बच्चा स्वस्थ पैदा होगा और गर्भ भी नहीं गिरेगा।

3. रजो धर्म जैसी समस्या के हल के लिए- माता प्रसूति का स्मरण कर गूलर का फूल माँ जगदंबा के मंदिर में जाकर उस फूल को देवी के चरणों को छुआकर अगर उस पुष्प को माता खा लेती है तो स्त्रियों की बीमारी ठीक हो जाती है।

4. गर्भवती महिला के लिए उपाय- बच्चा विकलांग नहीं हो इसके लिए घर पर आने वाली गाय को कभी भगाना नहीं चाहिए चाहे एक रोटी दें। जिस पलंग पर गर्भवती नारी सोती हो उसके नीचे झाडू कभी नहीं रखनी चाहिए।

5. ॐ जल वाला उपाय- इसमें आप संतान प्राप्ति के लिए शिवलिंग पर जल पहले गणेश जी पर फिर अशोक सुंदरी जी पर फिर कार्तिक जी वाले स्थान पर और फिर अशोक सुंदरी जी के यहाँ से शिवलिंग पर घुमाते हुए पार्वती जी और शंकर जी पर अर्पित करना है। ॐ आकृति बनाते हुए।

14. प्रदोष तिथि पर किए जाने वाले उपाय एवं उनके लाभ प्रत्येक महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है।

1. जब कोई काम नहीं बन रहा हो तो प्रदोष के दिन एक बेलपत्र एक शमी पत्र एक कनेर का फूल भगवान महादेव जी के ऊपर जल चढाकर समर्पित करें। भगवान महादेव जी आपको खुशियों से भर देंगे।

2. सोमवार को प्रदोष के दिन महादेव जी कैलाश पर निवास करते हैं और प्रदोष इच्छा पूर्ति के लिए होती है, मंगलवार की प्रदोष के दिन महादेव जी काशी में निवास करते हैं यह प्रदोष मुक्ति के लिए होती है। बुधवार की प्रदोष के दिन महादेव जी रजत भवन में निवास करते हैं यह प्रदोष कामना पूर्ति के लिए होती है। गुरुवार की प्रदोष के दिन भगवान शिव गंगा के तट पर निवास करते हैं यह प्रदोष से शत्रुओं के नाश के लिए होती है। शुक्रवार की प्रदोष के दिन शिव जी नीलकंठ पर निवास करते हैं यह प्रदोष सुख और शांति प्रदान करती है। शनिवार की प्रदोष के दिन भगवान शिव शमी के वृक्ष की नीचे निवास करते हैं यह प्रदोष संतान प्राप्ति के लिए होता है और रविवार के दिन प्रदोष आता है तो 
शिव जी बेलपत्र के पेड़ के नीचे निवास करते हैं यह प्रदोष सारी इच्छा पूर्ण करने के लिए होता है।

3. प्रदोष व्रत में भोजन ना करें और फलहार भी करें तो बिना नमक का करना चाहिये।

4. प्रदोष वृत में प्रदोष काल में थोड़ी देर भजन और भगवान का ध्यान जरूर करना चाहिये और 11 या 26 व्रत के बाद उद्यापन जरूर करें दो ब्रहमाणों को भोजन कराएं। 

5. अगर संतान प्राप्ति नहीं हो रही है तो प्रदोष में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करें और शिवलिंग निर्माण करते समय मिट्टी में देसी गाय का दूध घी मिलाने से जरूर संतान प्राप्त होगी। 

6. प्रदोष तिथि की शाम से पहले घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाएं और इसके बाद एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर उसमें 5 बिल्व पत्र, एक शमी पत्र, 7 चावल के दानें डालकर शिवजी के मंदिर में जाएं और शिवलिंग पर अर्पित कर दें। इसके बाद कुछ देर वहां बैठकर ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। ये उपाय हर प्रदोष में करने से आपकी हर परेशानी दूर होगी।

7. जिसके घर में क्लेश ज्यादा रहता हो या अशांति बनी रहती हो तो किसी भी प्रदोष के दिन प्रदोष काल में 7 बेल पत्र और सफेद कच्चे सूत को लेकर शिवमंदिर जाए। मंदिर में नंदी जी का जो पेर ऊंचा रहता है उस पेर के पास शंकर जी और माता पार्वती का ध्यान करते हुए बैठ जाए। फिर अपना नाम और गोत्र स्मरण कर के उस कच्चे सूत से सातो बेलपत्ती के डंडी वाले भाग को एक साथ लपेटना शुरू कर दे। इसके बाद सातो बेल पत्ती का जो सबसे ऊपर वाला हिसा है (सामने का हिस्सा) उसपर लाल चंदन लगाएँ और वे सातो बेल पत्र शंकर जी के शिवलिंग पर चढा देना है। जिस घर का गोत्र बोला गया है उस घर में फिर कभी कलेश नहीं हो सकता।

15. यह उपाय पितृ दोष, कालसर्प दोष एवं वास्तु दोष समाप्त करता है

बेल के फल के अंदर का गुदा निकाल लीजिए। सुबह 10 बजे से पहले आटा सेककर उसमें शक्कर मिला लीजिए फिर इस आटे को बेल में (गुदा निकला हुआ) भरना है और उसको पूरे घर में घुमाना है फिर सभी सदस्यों का हाथ लगवाकर पीपल के वृक्ष के नीचे छोटा सा गड्डा खोदकर उस फल को उसमें डालना है। इस उपाय से तीनों दोष शांत हो जाते हैं। 

नोट-
1. अगर आपको रात्री को सोने के बाद 1-2 घंटे बाद नींद खुल रही और आपको भूख और प्यास लग रही है तो आपके पितृ भूखे या प्यासे हैं।
2. स्वाहा की उत्पत्ति भगवान ने देवताओं को आहार प्रदान करने के लिए की थी। देवताओं की भूख शांत करने के लिए ब्रह्मा ने स्वाहा की सृष्टि की और पितरों की भूख शांति के लिए ब्रह्माजी ने स्वधा की सृष्टि की थी।
3. स्वधा पितृगण की पत्नी और प्रजापति दक्ष की कन्या हैं। इनकी बहन स्वाहा हैं जो अग्निदेव की पत्नी और दक्ष की ही कन्या हैं।
4. स्वधा शब्द के उच्चारणमात्र से मानव तीर्थ स्नान किया हुआ समझा जाता है। स्वधा, स्वधा, स्वधा इस प्रकार यदि तीन बार स्मरण किया जाए तो श्राद्ध, बलि और तर्पण के फल पुरुष को प्राप्त हो जाते हैं और उसे विनीत, पतिव्रता और प्रिय पत्नी प्राप्त होती है तथा सदगुण सम्पन्न पुत्र प्राप्त होता है।
5. आपको लगता है हमारे पूर्वजों का उद्धार नहीं हुआ अधोगति में चलें गए हैं या अगर आपको भय लग रहा है सपनों में मुर्दे या कोई अग्नि में जल रहा है या मर रहा है- अमावस्या के दिन शिवलिंग पर सात जगह चंदन की उंगली लगाएं, पहला शिवलिंग पर चंदन की उंगली दूसरा गणेश जी के स्थान पर चंदन की उंगली तीसरा कार्तिक जी के स्थान पर चंदन की उंगली चौथा अशोक सुंदरी जी के स्थान पर चंदन की उंगली पाँचवाँ जलाधारी के स्थान पर चंदन की उंगली छठा शिवलिंग का जल बह रहा हो ठीक उसके विपरीत की ओर चंदन की उंगली और सातवाँ नंदी जी के जहां सिंग होते है वहाँ चंदन की उंगली को लगा दीजिए। इससे आपको लाभ होगा।

6. श्राद्ध पक्ष की दशमी, ग्यारस या द्वादशी को एक रोटी या पूड़ी में मीठा (गुड) रखकर सोमप पित्र (पार्वती जी के नानाजी) का नाम बोलकर आप गाय को खिला देते हैं तो आपके जो पितृ प्रेत योनि में हो या जिनको पिंड नहीं मिला हो या अधोगति में चले गए हो तो आपके पितृ कभी भटकते नहीं है उनकी मुक्ति हो जाती है और आपको भी स्वप्न में मुर्दे या सर्प दिखना बंद हो जाते हैं।

16. रोगों के लिए उपाय

1. सारी बीमारी का हल एक लौटा जल- एक बैल पत्र एक तांबे के लोटे में जल लेकर मंदिर जाना है वहाँ शिवलिंग के सामने उत्तर दिशा मैं मुख करके खड़े होना है बैलपत्र अशोक सुंदरी जी के स्थान पर चढाना है (पत्ती का मुख महादेव जी की ओर और डंडी बाहर की ओर होनी चाहिए) फिर जल महादेव जी के ऊपर चढाना है उस जल को एक कटोरी या लौटे में जलाधारी के अंत से ले लेना है और महादेव जी के चौखट पर बैठकर मणिभद्रिका जी का नाम लेकर जल का आचमन करना है बीमारी का स्मरण कर अपना नाम और गोत्र बोलकर फिर मणिभद्रिका का नाम लेकर बिलपत्र को वहीं पर खाना है। 
2. शरीर की ब्लॉक नसों को खोलने के लिए आजमाए यह अचूक उपाय - एक रोटी लेनी है अपनी बीच की उंगली को मीठे तेल में डुबोना है और जिस व्यक्ति का बाइपास हो रहा हो उसके हाथ से अपना हाथ पकड़कर रोटी पर एक लाइन तेल से खिंचवानी है और कामना करवाना है कि मेरी ब्लॉक नसें खुल जायें और रोटी को भैरव मंदिर के औटले पर किसी स्वान या कुत्ते को खिलाना है। 5-7 दिन करवाना उसके बाद जांच करवाना है जो नाड़िया चोक होंगी वो खुलने लग जाएंगी। बटुक भैरव के नाम का स्मरण जरूर करना है।
शंकर जी के मंदिर में बैठकर घी का दिया लगाकर एक बेल पत्र रोजाना 11 दिन तक मंदिर में ही बैठकर खाएं और फिर चैक कराओ नाड़िया खुल जाएगी और बायपास की जरूरत नहीं पड़ेगी।

3. कान का बहरापन दूर करने के लिए अपनाए ये अचूक उपाय- गणेश शंख के अंदर चांदी का सिक्का डाल दो रात में उसमें पानी भर कर डाल दो उस पानी को सुबह जिसको सुनाई नहीं देता हो उसको पानी पिलाओ सुनने की क्षमता बढ़ती है।

4. घुटनों और कमर के दर्द से छुटकारा दिलाएंगे ये उपाय-शंकर जी के मंदिर की बैल पत्र उठाकर उसी मंदिर के शिखर को देखकर चबा चबा के खाइए घुटना दर्द या कमर दर्द नहीं होगा। शिखर उसी मंदिर का होना चाहिये।

5. पथरी को जड़ से खत्म कैसे करें- सादी दूर्वा को वटवृक्ष के नीचे शंकर (वटकेश्वर) महादेव का स्मरण करके चबा चबा कर खा लेने से पथरी समाप्त हो जाती है।

6. माईग्रैन की बीमारी सरदर्द में उपाय - शिव मंदिर में भगवान शंकर को सोमवार की अष्टमी के दिन 7 लौंग अशोक सुंदरी वाले स्थान पर समर्पित कर दें और उस लौंग को उठा लाएं। एक-एक करके लौंग को सुबह के समय बिना मुख धोए बिना स्नान करें घर की दहलीज पर एक लौंग प्रतिदिन चबा चबाकर खाना है।

7. लकवा/पैरालिसिस का उपाय- लगभग आधी बोतल सरसों के तेल में 5 कमल गट्टे, 5 काली मिर्ची, 5 लौंग डालकर शंकर जी के ऊपर तुमरुका जी का नाम लेकर समर्पित कर दें। वह चढ़ा हुआ तेल कटोरे में वापस ले लेना है। शिव जी का स्नान करवा कर अंग वस्त्र धारण करवाकर फूल आदि चढ़ाकर पूजन करके आ जाइए। वह तेल जो लेकर आए है व्यक्ति की नाभि में दो बूंद डालना प्रारंभ कर दीजिए और शरीर की मालिश इसी तेल से करें जल्द ही लकवा/पैरालिसिस में लाभ होगा। 
8. डायबिटीज (शुगर) को कंट्रोल करने के उपाय-
1. तुलसी तीन प्रकार की होती है राम, श्याम और विमला। विमला तुलसी की अगर । पत्ती रोजाना खा लें तो जल्द ही शुगर लेवल नॉर्मल हो जाता है। 
2. डायबिटीज रोगी को जमीन पर ही बैठकर आसान लगाकर भोजन करना चाहिए और भोजन करने के पहले और बाद में बेलपत्र खाना है।

9. दूर होगी किड्नी लिवर से संबंधित कई तरह की बीमारी - 108 कमल गट्टे की माला शंकर को समर्पित करें और उसी कमल गट्टे की माला से श्रम्भेश्वर महादेव के नाम का जप करें और 108 बेलपत्र शंकर जी को जप करते हुए चढाएँ। जब सारी बेल पत्र समाप्त हो जाए तो जल चढ़ाएँ और चढ़ा हुआ पानी को श्रम्भेश्वर महादेव जी का नाम लेकर आचमन करें। 
10. दमे की बीमारी के लिए – पीपल के पत्ते को अशोक सुंदरी वाले स्थान पर चढ़ाने से दमे में फायदा मिलता है।

17. रात को 9.15 बजे का उपाय
कोई भारी बीमारी से ग्रसित है। रोग छूट नहीं पा रहा हो। शंकर जी का अभिषेक आवले के पानी से उस व्यक्ति का नाम लेकर रात 9.15 बजे करेंगे तो वह अस्पताल से बहुत जल्द सही होकर वापस घर आ जाएगा।

18. पुरानी से पुरानी शराब की लत छुड़ाने का अचूक उपाय

21 नीम की डंडी 21 लोंग दोनों को 21 दिनों तक हनुमान जी के मंदिर में लाल कपड़े में रखवा दो फिर उसको घर पर आधा लीटर पानी में उबाल लीजिए फिर जब 250 ग्राम पानी हो जाए तब वह पानी थोड़ा थोड़ा करके उसको रोज सब्जी या किसी में भी मिलकर दे दीजिए 21 दिनों में वह शराब पीना छोड़ देगा।

19. प्रतियोगी परीक्षा और जॉब में सफल होने के लिए पढाई के साथ करें ये उपाय

1. बेलपत्र के बीच वाले पत्ते पर शहद लगाकर हथेली में रख कर उसी हथेली के अंगूठे से थोड़ा सा दबाकर शिवजी के कुंडकेश्वर महादेव का नाम लेकर अपनी मनोकामना करके शिवजी के मंदिर में शिवलिंग बेलपत्र चिपका दीजिए और परीक्षा देने चले जाईये।

2. विशेष परीक्षा में पास होना जरूरी है तो जो परीक्षा के पहले का सोमवार पड़े उस दिन त्रिपुरा सुंदरी माता का नाम बोलकर उत्तर की और मुख करके गन्ने का रस दो कलश में लेकर अपना नाम और गोत्र बोलकर मन में कामना करकर शंकर जी का अभिषेक त्रिपुरा सुंदरी जी के भाव से कर दें परीक्षा निकल ही जाएगी।

3. अशोक सुंदरी वाली जगह लाल चंदन चढ़ाकर और उसी चंदन का तिलक लगाकर परीक्षा देने चले जाते है तो वह बच्चा पास हो जाता है। 

20. सरसों के फूल के उपाय

अगर बच्चे के हाथ से सरसों के 31 फूल मुख्यतः बसंत पंचमी के दिन शंकर जी को चढ़ा दिया जाए तो वह बच्चा अव्वल निकल जाता है। अगर डॉक्टर बीमारी की जांच का बोले तो तुरंत 108 सरसों के फूल शंकर जी को श्रद्धा और विश्वास के साथ चढ़ाए और जांच करायें। अगर कोई टेन्डर का ठेका चाहिए तो 108 सरसों के फूल शंकर जी पर अवधूतेशवर महादेव का नाम लेकर एक एक करके चढ़ा दीजिए।

21. अगर जीवन में बार बार मिल रही है असफलता तो करें ये उपाय

बड़ के पेड़ के नीचे जाकर एक पान के पत्ते पर बालू रेत का शिवलिंग बनाइये। उस पर तीन चम्मच दही चढ़ा दीजिए अपनी मनोकामना करके उसी दही को उठाकर घर लाकर घर के दरवाजे पर स्वस्तिक बना लीजिए एक महीने में आपका काम सफल हो जाएगा।

पीपल के 5 पत्तों पर घर पर बनाए गए घी के 5 लड्डू रख लें। लड्डू के बीचों बीच एक आंटे का दिया उसमें तिल्ली का तेल डालकर
ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।
का मंत्र जप करके दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर जलाकर रख आयें आप जल्द ही सफल हो जाएंगे।

22. पारिवारिक कलह से छुटकारा पाने के लिए करें ये उपाय
गेंहू की 7 बालियाँ तोड़कर शंकर भगवान के मंदिर में जाकर शिव जी को समर्पित कर दीजिए या बेलपत्ती की डंडी को जहां जलाधारी से जल गिरता है वहाँ जलाधारी में लगा दीजिए और एक लौटा पानी और दूध अपना नाम और गोत्र बोलकर पूरे घर में घुमाकर उसे डाल दीजिए। उस घर में कलह या झगड़ा नहीं होगा। काली तिल, 7 लोंग, काली मिर्ची हाथ की हथेली में लेकर अपना नाम और गोत्र बोलकर घर के पास शिव मंदिर में शंकर जी की चौखट पर रख दीजिए या पुजारी यदि शिवलिंग पर चढ़ाने दे तो चढ़ा दीजिए। 7 बेल पत्र की डंडी लेकर साथ में कच्चा सूत शंकर जी और माता पार्वती का नाम लेकर और अपना गोत्र बोलकर नंदी जी के सीधे तरफ जहां नंदी जी का पैर ऊंचा रहता है वहाँ बैठना है और सूत लपेटकर सारे बेल पत्र के अग्र भाग पर लाल चंदन लगाकर शंकर जी को चढ़ा दें। 
23. कोर्ट कचहरी के चक्करों में है तो सफलता पाने के लिए करें ये उपाय

बड़ के पत्ते के ऊपर बालू के शिवलिंग बनायें वटवृक्ष के नीचे उनका पूजन करें। दूध-दहीं चढ़ाए और वह दहीं घर ले आयें। उस दही को रुमाल या वस्त्र में लगा लीजिए। अदलात में वह वस्त्र पहनकर या वही रूमाल लेकर चले जाईये। फाइल अटकी होगी वह भी सही हो जाएगी। वटकेश्वर महादेव का नाम जरूर लें और पूजन करें। पाँच शमी के पत्तों से यह पूजन करें पहले शमी पत्ते को अशोक सुंदरी जी वाले स्थान पर दूसरा शिवलिंग के ऊपर तीसरा जहां शिवलिंग रखा है उस कंटी भाग पर चौथा नंदी जी के चरण जो उठा हुआ हो वहाँ पर पाँचवाँ शंकर जी के मंदिर के द्वार पर शमी पत्र चढ़ाया जाए तो जल्द ही कोर्ट से अच्छी खबर आएगी। 

24. कुछ ही दिन में मिल जाएगा फंसा हुआ पैसा
पीपल के पत्ते पर शंकर के शिवलिंग का निर्माण करें उनका पूजन करें। जिसने भी पैसा खाया है उसी का नाम लेकर पीपल के पत्ते पर बने शिवलिंग को बहते पानी में छोड़ दीजिए। वह 4 महीने भी शांति से नहीं बैठ पाएगा पैसे वापस देकर जाएगा।

25 . भगवान सूर्य भगवान को जल में क्या डालकर अर्घ देना चाहिए सूर्य को यह अर्घ देते है।
1. लाल चंदन का अर्ध- सुख शांति और दरिद्रता से छुटकारा पाने के लिए।
2. बेलपत्र के जल का अर्ध- अच्छे स्वस्थ के लिए। 
3. अक्षत का अर्ध- सुख शांति के लिए। 
4. पुष्प का अर्थ- सभी कार्य संपन्न करने के लिए।
5. रोली का अर्ध- रोली का लाल रंग हमें सूर्य की किरणों से जोड़ता है और इससे शरीर में रक्त संचार बढ़ता है।
6. हल्दी का अर्ध- जल में हल्दी डालकर सूर्य को अर्घ देने से विवाह के योग बनते हैं।

7. मिश्री का अर्ध- अर्घ देते समय जल में मिश्री डालकर जल चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से सूर्य देवता की कृपा बनी रहती है। 
8. अर्घ तांबे के लौटे से सर से 8 इंच ऊपर से पानी की धार लगाकर सूर्य देव को देखते हुए देना है।  
9. जल चढ़ाते समय गायत्री मंत्र का जाप करें।

गायत्री मंत्र- 
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।

हर काम में मिलेगी सफलता काम पर जाने से पहले करें ये उपाय-एक जाँ के आटे की रोटी पर थोड़ी काली तिल और गुड रखकर गाय को दरवाजे पर दे दीजिए और काम पर निकल जाईए। 

नोट-
भूलकर भी तोहफे में ये गिफ्ट नहीं दें नहीं तो होगा बाद में नुकसान- 
1. आवले का वृक्ष, 
2. कंधे पर पोटली वाली कुबेर की मूर्ति 
3 गणेश जी की मूर्ति।

3. घर के मंदिर में शिवलिंग अपने हाथ के अंगूठे से बड़े नहीं होनी चाहिए। तो इन नियम का जरूर ध्यान

4. नवरात्रि में अखंड दीपक जलाते हैं रखें-अगर दीये के बाती का मुख दक्षिण होता है तो उसके घर में कुछ गलत होता है। पूर्व की और ज्योत संपदा देती है पश्चिम की ज्योत वैभव देती है। उत्तर की ज्योत वैभव देती है और आयु वृद्धि करती है।

26. विवाह में अड़चन आ रही है तो यह उपाय करें 
1. जो व्यक्ति हाथ में हरी मूंग लेकर उसमें 7 दूर्वा लेकर छत पर जाकर चंद्रमा के ऊपर से 7 बार उतारकर वह गणेश जी के मंदिर में विवाह की कामना करके चढा देता है उसका विवाह निश्चित जल्द हो जाता है।

2. पीपल के पत्ते का दोना बनाना है उसमें गंगाजल, बेलपत्र, 7 दाने अक्षत, 3 दाने जौं अपने मन में कामना करकर भगवान शिव की आराधना करें या शिव के रुद्र अवतार का स्मरण करकर अगर कोई लड़का लड़की उन सभी सामग्री को शिवलिंग पर चढ़ा दे और उसी जल का तिलक लगा कर घर आ जाए तो संबंध जल्दी हो जाता है।

3. मंगल दोष के कारण विवाह में आती अड़चनें तो मांगलिक दोष से निजात पाने के उपाय- बाजार से मूंगा या मूंगे की अंगूठी लें। मूँगे को या अंगूठी को पानी में डाल दो और उसका पानी शंकर भगवान को मात्र 31 दिनों तक लगातार चढ़ा दो विवाह आनंद के साथ पूर्ण होगा और कोर्ट केस है तो वह भी बंद हो जाएगा और पति पत्नी भी एक हो जाएंगे। 

4. राहू-केतु के बुरे प्रभाव से है परेशान - श्वेत पुष्प लेकर 21 बार उतारकर (जिस पर राहू केतु का प्रभाव हो) राहू का स्मरण करके शंकर के चरणों में जहां जलाधारी से जल गिरता है वहाँ रख दीजिए। राहू कभी कष्ट नहीं देगा।

27. मंगलवार का उपाय- हनुमान जी का दुकान से एक पान बनवायें चढ़ाने वाला (अर्पण करने वाला) इसको बजरंगबली बली के मंदिर में लेकर जाना है और अपने कष्ट को कहते हुए वहाँ समर्पित करना है (एक व्यक्ति को एक पान का पत्ता)। चढाने के बाद । बार हनुमान चालीसा जरूर करें। उपाय आप किसी भी समय कर सकते हैं (चाहे सुबह या शाम)। 

28. मनोकामनाएं पूरी करने के लिए उपाय

1. बिल पत्र में शंकर जी वाले स्थान पर शहद लगाकर शिवलिंग पर चढा दीजिए आपकी सारी मनोकामनाएँ पूरी हो जाएंगी। 

2. सारे उपाय कर लिए हो और कुछ नहीं हो रहा हो तो - शंकर जी की मंदिर में साफ सफाई करें। मंदिर में मन से सेवा करें। महादेव जी बात जरूर सुनेंगे। कष्ट हरने का उपाय- सावन में एक तांबे के लोटे में जल लेकर शिवलिंग के पास जाना है और उत्तर दिशा में खड़े होकर जल शिवलिंग पर श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का नाम लेकर समर्पित करना है जल जहां से गिरता है वहाँ अपना दाहिना हाथ (उलटा हाथ) से जल को गिरने से रोक देना है और महादेव को देखकर महादेव को अपने कष्ट को कह देता है, फिर जल को गिरने दें उस जल का आचमन नहीं करना है बस अपनी आँखों से लगा लेना है।

नोट-
1. भगवान विष्णु या उनके अवतारों के भोग में तुलसी जी जरूर डालें। भगवान तुलसी जी के बिना भोग ग्रहण नहीं करते है।
2. घर में 5 पौधे जरूर लगाना चाहिए - 
1. मीठा नीम 2. तुलसी, 3. आंकड़ा या मदार (पुष्प भगवान भोलेनाथ और गणेश जी को बहुत प्रिय है) 4. आवला (लक्ष्मी जी को बहुत प्रिय है)। 5. हरसिंगार या पारिजात (विष्णु जी का प्रिय)।
3. तुलसी जी के नियम-कभी भी तुलसी जी को दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए। किसी भी रविवार, बुधवार एवं ग्यारस के दिन तुलसी पत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
4. पुराने दिये का महत्व - जितना पुराना दीपक घर में रहेगा उतना फलदाई होगा। घर में कोई बीमार हो गया हो तो पुराने दीपक को धोकर उसमें पानी पिलाना प्रारंभ कर दीजिए उस व्यक्ति को अराम लग जाता है।
5. इस ही तरह पुरानी जप की माला और आसान जिस पर पूजन पाठ करते हैं उसका महत्व भी बहुत बढ़ जाता है। हमेशा जब कथा सुनने जाए तो अपना आसान साथ लेकर जाएँ।
6. शिव जी और ठाकुर जी पूजा में कुशा का आसन, लक्ष्मी जी, हनुमान जी और मां दुर्गा की पूजा के लिए लाल रंग के कंबल का आसन इस्तमाल करना चाहिए। वहीं अगर आप मंत्र सिद्धी आदि के लिए पूजा कर रहे हैं तो कुशा से बने हुए आसन प्रयोग करने चाहिए। वहीं श्राद्ध कर्म के दौरान कुशा से बने आसन का प्रयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए। वहीं बांस से बने आसन से घर में दरिद्रता आती है और लकड़ी को आसन बनाकर बैठने पर दुर्भाग्य आता है।
7. कुशा के आसन पर बैठकर 10 से 15 मिनिट तक भगवान नारायण शंकर का या गुरु का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है।

29. पूर्वजों के उद्धार के लिए

अगर आपको भय लग रहा है सपनों में मुर्दे या भूत प्रेत दिख रहे है और लग रहा है आप पर किसी ने कुछ कर तो नहीं दिया या आपको लगता है हमारे पूर्वजों का उद्धार नहीं हुआ अधोगति में चलें गए है-

शिवलिंग पर सातों स्थान - पहला शिवलिंग पर चंदन की उंगली, दूसरा गणेश जी के स्थान पर चंदन की उंगली, तीसरा कार्तिक जी के स्थान पर चंदन की उंगली, चौथा अशोक सुंदरी जी के स्थान पर चंदन की उंगली, पाँचवाँ जलाधारी पर चंदन की उंगली, छठा शिवलिंग का जल बह रहा हो ठीक उसके विपरीत की ओर चंदन की उंगली और सातवाँ नन्दी जी के सींग होते है वहाँ चंदन की उंगली अमावस्या को लगा दीजिए ऐसा करने से उक्त बढ़ाएँ समाप्त हो जाती है।

30. बेल पत्र का दान

स्कंद पुराण के अनुसार दुखी व्यक्ति को एक बेल पत्र का दान करने से आधे किलोग्राम सोने के सिहांसन पर शालिग्राम जी पर सोने के श्रृंगार के साथ दान करने का जो फल मिलता है वो मात्र एक बेल पत्र दान करने पर मिल जाता है।

आटे के दीपक के फायदे- आटे के दीपक लगाने से माँ अन्नपूर्ण का आशीष स्वतः ही प्राप्त होता है। किसी भी साधनाओं को सिद्ध करना हो तो यह दीपक लगाएँ।

बीमारी दूर करने के लिए- चौमुखी आटे का दीपक बनाकर दो लम्बी बत्ती बनाना है जो विपरीत दिशा के कोने पर भी लग जाए, जिससे चार मुख बन जाएंगे और इसमें तिल का तेल डालना है फिर बीमार व्यक्ति के ऊपर ऊपर से नीचे घड़ी की दिशा में 21 बार घुमाना है फिर उस दीपक को घर के गेट के बहार नरसिंह भगवान का नाम लकर जलाना है तो उस व्यक्ति की बीमारी धीरे धीरे खत्म हो जाती है।

31. एकमुखी से 14 मुखी रुद्राक्ष धारण करने के लाभ और उनके मंत्र

ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका उद्भव शिव के अश्रु से हुआ है। जिस कारण रुद्राक्ष का अर्थ रूद्राक्ष है। दरअसल, रुद्राक्ष कुल मिला कर 21 प्रकार के होते है। जिनमें से मुख्यतः 14 प्रकार के रुद्राक्ष को उपयोग में लाया जाता है।

1. एक मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र- इसमें भगवान शिव की परम शक्ति समाहित है।
धारण करने से लक्ष्मी प्राप्ति एवं मोक्ष मिलता है एवं ब्रह्महत्या जैसे दोष तक समाप्त हो जाते है। इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि यह आधे काजू के आकार में दिखाई देता है और इसमें एक ही धारी होती है। 
मंत्र- ॐ ह्रीं नमः ।

2. दो मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र - 2 मुखी रुद्राक्ष का सम्बन्ध चन्द्रमा से हैं और "चंद्रमा मनसो जातः" यानी चंद्रमा मन का कारक हैं। दो मुखी रुद्राक्ष को देवदेवेश्वर भी कहा गया है।
इस रुद्राक्ष को धारण करने से मन की स्थिति मजबूत होती है सोचने समझने की शक्ति बढ़ती है। इसे कामनाओं की पूर्ति के लिए धारण करना चाहिए। 
मंत्र-ॐ नमः। और धारण करने का शुभ दिन सोमवार।

3. तीन मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र- तीन मुख वाले रुद्राक्ष का संबंध अग्नि से है। यह त्रि-शक्तियों ब्रह्मा-विष्णु-महेश से संबंधित है।
इसे केवल धारण करने से व्यक्ति कई प्रकार की विधाओं और कलाओं में निपुण हो जाता है।
इसके अलावा नकारात्मक विचार, अपराध बोध, हीन भावना कम होती है। जहां पढ़ाई कर रहे है उस बच्चे के कमरे में रखना है।
धारण करने का मंत्र-ॐ क्लीं नमः ।

4. चार मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र- चार मुखी रुद्राक्ष का संबंध ब्रह्मा जी से माना जाता है। इसे धारण करने वाला व्यक्ति ब्रह्मा जी की भांति निर्माण कार्यों में लीन हो जाता है और उसी दिशा में कार्य करना आरम्भ कर देता है।
स्वास्थ्य के लाभों के सन्दर्भ में इसे देखें तो इससे पीत ज्वर, श्वांस रोग, गर्भस्थ शिशु दोष, बांझपन और नपुसंकता जैसी बीमारियां दूर हो जाती हैं। इसे धारण करने से प्रेत बाधा, नक्षत्र बाधा, तनाव और मानसिक समस्याएं दूर होती है। चार मुखी रुद्राक्ष से व्यक्ति को मेधावी आँखें प्राप्त होती हैं और वह तेजस्वी बनता है धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष प्राप्ति के लिए भी इसे धारण किया जाता है।
धारण करे का मंत्र - ॐ ह्रीं नमः का स्मरण करें।

5. पाँच मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र- पाँच मुखी रुद्राक्ष का संबंध भगवान शिव के सबसे कल्याणकारी स्वरूप महादेव से है जो वृष पर विराजमान है और जिनके पांच मुख है पांच मुखों में से चार मुख सौम्य प्रवृति के हैं जबकि दक्षिण की ओर किया हुआ मुख भयंकर रूप धारण किये हुए है।
महादेव के पांच कार्य हैं- सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव, अनुग्रह। यह सभी कार्य करने के लिए भगवान शिव के पांच मुख है और इन्हीं पांच मुखों से "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का उद्भव हुआ है।
पंचमुखी रुद्राक्ष कालाग्नि नामक रूद्र है, यह भौतिक और दैहिक रोग को समाप्त करने में सहायक है और यह सभी बुरे कर्मों को नष्ट कर देता है।
व्यापार दुकान में लाभ पाने के लिए धारण करें यह तनाव को खत्म करके मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। वृहस्पति (गुरु) के प्रतिकूल प्रभाव को कम करता है।
धारण करने का मंत्र-ॐ ह्रीं क्लीं नमः ।

6. छः मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र- छः मुख वाले रुद्राक्ष का संबंध कार्तिकेय से है, इस प्रकार के रुद्राक्ष को धारण करने से भ्रूण हत्या जैसे पापों से व्यक्ति को मुक्ति मिल जाती है।
जिस भी व्यक्ति का जन्म नक्षत्र शुक्र हो उन्हें यह धारण करना चाहिए।
नेत्र से संबंधित रोग जैसे मोतियाबिंद, दृष्टि दोष, रतौंधी आदि से निजात मिल सकती है। काम अटका हुआ है विवाह नहीं हो पा रहा है तो यह रुद्राक्ष धारण करें और इसको धारण करने से भ्रूण हत्या जैसे पाप से मुक्ति मिल जाती है। 
मंत्र - ॐ ह्रीं हुं नमः।

7. सात मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र- सप्त मुखी रुद्राक्ष का प्रतिनिधित्व शनिदेव करते हैं यदि शनि के प्रतिकूल प्रभाव से कोई व्यक्ति पीड़ित है तो इसके प्रयोग से समस्या से निजात पाया जा सकता है। सेवा, नौकरी और व्यापार करने वालों के यह लाभदायक है।
यह शारीरिक दुर्बलता, अंगहीनता, विकलांगता, लकवा, मिर्गी आदि रोगों से छुटकारा दिलाने में सहायक है।
गरीबी है और व्यापार शुरू कर रहे हैं ऐश्वर्यशाली होना चाहते है तो मंत्र-ॐ हुं नमः का ध्यान कर रुद्राक्ष को धारण करें। इससे गुप्त धन की प्राप्ति होती है।

8. आठ मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र- अष्टमुखी रुद्राक्ष का सीधा सम्बन्ध सिद्धिविनायक भगवान गणेश से है जो संसार के सभी जघन्य पापों को माफ कर देने वाले है।
इसके प्रयोग से राहु दोष से पीड़ित लोगों को राहत मिलती है। रोग मुक्ति और लंबी आयु के लिए इस रुद्राक्ष को पानी में डालकर पानी पीना चाहिए। इस रुद्राक्ष को पहनने वाला व्यक्ति तेजस्वी, बलशाली, बुद्धिमान व्यक्तित्व वाला बनता है।
जिनको शुगर है महिलायें इसको बायें हाथ में और पुरुष अपने गले में लाल धागे में बांध कर मंत्र-ॐ हुं नमः बोलकर धारण कर ले।

9. नौ मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र- नौ मुख वाले इस रुद्राक्ष का सम्बन्ध भैरव से है, इसकी अधिष्ठात्री देवी अम्बे है। नौ देवियों के रूप वाला यह रुद्राक्ष नवदुर्गा के सभी नौ रूपों की शक्तियों को समाहित किये हुए है।
माँ शक्ति दुर्गा का पसंदीदा रुद्र मनका है। यह रुद्राक्ष कवच के रूप में पहना जाता है। यह राहू और केतु के क्रूर प्रभाव को दूर करता है। मिर्गी की बीमारी को दूर करता है। आँखों की दृष्टि तेज करता है। इसको धारण करने से मनुष्य पर तांत्रिक क्रियाएँ सफल नहीं हो पाती।
मंत्र-ॐ ह्रीं हुं नमः ।

10. दस मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र- यह भगवान विष्णु का दसमहाविध्या का निवास माना गया है जो पूरे ब्रह्माण्ड के संचालक हैं। 
इसको धारण करने वाले पर विष्णु जी एक सरंक्षक के तौर पर उनकी रक्षा करते हैं।
इसको धारण करने वाले पर यमराज की भी कृपा दृष्टि बनी रहती है, इसके प्रयोग से व्यक्ति अकाल मृत्यु के भय से मुक्त हो सकता है।
इस रुद्राक्ष को शरीर के सातों चक्रों को संतुलित करने के लिए जाना जाता है। यह भूत पिसाच जैसी शक्तियों को दूर करने में मदद करता है। शांति और सुरक्षा प्रदान करता है। यह घुटनों के दर्द में भी काफी आराम देता है।
मंत्र-ॐ ह्रीं नमः ।

11. ग्यारह मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र - यह भगवान शिव के 11वें अवतार हनुमान जी का प्रतीक माना जाता है। ध्यान केंद्रित करने, शरीर की इंद्रियों को नियंत्रण करने में, शनि ग्रह और साढ़े साती के प्रभाव को कम करने में, गुस्से को नियंत्रण करने में सहायक है।
मंत्र - ॐ ह्रीं हूं नमः । धारण करने का शुभ दिन-मंगलवार

12. बारह मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र- बारह मुख वाले रुद्राक्ष का सीधा संबंध भगवान सूर्य से है। ऋग्वेद में सूर्य देवता के बारे में कहा गया है कि वे सभी नक्षत्रों, ग्रहों और राशिमंडल के राजा हैं।
इस रुद्राक्ष को धारण करने से रतौंधी, मूत्र और श्वसन रोग खत्म होते हैं और सूर्य से संबंध होने से राहू एवं अन्य ग्रहों के दुष्प्रभाव कम होते है।
मंत्र-ॐ क्रों श्रों रों नमः ।

13. तेरह मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र- इस रुद्राक्ष को भगवान लक्ष्मी और इन्द्र देव का आशीर्वाद प्राप्त है।
आयुर्वेद शास्त्रकारों ने त्रयोदशमुखी रुद्राक्ष को संजीवनी की संज्ञा दी है जिससे इसके औषधीय महत्व को समझा जा सकता है। यह कैंसर, रक्तचाप, लिंगदोष, योनिदोष आदि से बचाव करता है।
मंत्र-ॐ ह्रीं नमः।

14. चौदाह मुखी रुद्राक्ष के लाभ और मंत्र- इस रुद्राक्ष का निर्माण भगवान शिव की तीसरी आँख के अश्रु से हुआ था, इसलिए इससे नकारात्मक शक्ति का नाश हो जाता है। इस रुद्राक्ष का प्रतिनिधित्व भगवान हनुमान करते है। इसे धारण करने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह मंगल दोष और साढ़े साती के प्रभावों को कम करता है। यह हकलाने की समस्या को हल करता है। काम्पिटिशन एग्जाम को पास करने में मदद करता है
मंत्र-ॐ नमः ।

नोट-
पाँच जगह रुद्राक्ष नहीं ले जाना चाहिए -
1. किसी की मृत्यु हुई हो वहाँ।
2. किसी का जन्म हुआ हो वहाँ।
3. जहां पर वैश्यवृति या मदिरा पान होता हो वहाँ।
4. जो स्थान अज्ञात है या आपको लगता हो यहाँ जीवों की हत्या हुई हो या जीव को नष्ट किया हो।
5. जहां रुद्राक्ष का अपमान हो रहा हो।

32. महादेव जी के 11 रुद्र अवतारों के नाम

अगर सुबह उठकर महादेव जी के कोई 11 रुद्र अवतारों के नाम के नाम कोई ले लेता है तो उनको कोई कष्ट नहीं आते। शिवमहापुराण के अनुसार शिव जी के 11 रुद्र अवतार इस प्रकार है।
कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, अहिर्बुध्य, शंभु, चंड और भव।

रूद्र मंत्र एवं रूद्र मंत्र का अर्थ -
ॐ नमो भगवते रुद्राये।
अर्थ-मैं भगवान रुद्र अर्थात भगवान शिव को नमन करता हूं। उन्हें प्रणाम करता हूं।

रूद्र गायत्री मंत्र -

ॐ सर्वेश्वराय विद्महे, शूलहस्ताय धीमहि। तन्नो रूद्र प्रचोदयात् ॥
अर्थ- हे सर्वेश्वर भगवान आपके हाथ में त्रिशूल है और मेरा जीवन विभिन्न प्रकार के कष्टों और परेशानियों में घिरा हुआ है। ऐसे में आप मुझे अपनी कृपा में ले कर मेरे कष्टों को दूर कीजिए और मुझ पर कृपा कीजिए, क्योंकि मैं आपकी शरण में हूं।

शिव गायत्री मंत्र-

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ।
अर्थ- मैं महान भगवान आदर्श पुरुष भगवान महादेव के चरणों में प्रणाम करता हूं। हे प्रभु! आप मुझे बुद्धि दीजिए और ज्ञान के द्वारा मेरा मार्गदर्शन कीजिए।

रूद्र मंत्र जाप करने की विधि
प्रत्येक मंत्र को जपने के दो तरीके हो सकते हैं। पहला सकाम तथा दूसरा निष्काम। यदि आप निष्काम अर्थात बिना किसी विशेष प्रयोजन के केवल प्रभु को प्रसन्न करने के उद्देश्य मंत्र जाप करना चाहते हैं, तो किसी खास नियम को मानने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि यदि आप सकाम रूप से किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए मंत्र जाप करना चाहते हैं, तो रूद्र मंत्र का जाप करने से पहले आपको कुछ बातें पूर्ण फल के लिए जान लेना आवश्यक है। 

मंत्र जाप करने की पूरी विधि इस प्रकार -
★ इस मंत्र का जाप विशेष रूप से शुक्ल पक्ष के सोमवार को करना चाहिए और यदि उस दिन प्रदोष व्रत हो तो अति उत्तम माना गया है। आप चाहें, तो उस दिन उपवास भी रख सकते हैं।
★ यह मंत्र जाप सावन में सोमवार या किसी विशेष दिन भी कर सकते हैं।
★ इस दिन स्वच्छ वस्त्र पहन कर स्नानादि से निवृत्त होकर पूर्वाभिमुख होकर बैठें और मन में भगवान शिव का ध्यान करें।
★ सर्वप्रथम शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करें।
★. उसके बाद बेल पत्र, धतूरा, चंदन, धूप, फल, पुष्प, आदि श्रद्धा भाव से अर्पित करने चाहिए और भगवान शिव के मंत्र का जाप करने का संकल्प लेना चाहिए।
★ संकल्प यह लेना है कि आप रुद्र मंत्र का कितना जाप करेंगे और उसके पीछे आपका उद्देश्य क्या है और सफलता की प्रार्थना करनी चाहिए।
★ प्रतिदिन एक निश्चित संख्या में जप करें। मंत्र जाप के लिए रुद्राक्ष की माला सर्वोत्तम मानी गई है।
★ जाप या तो चुपचाप, या केवल होंठ हिलाकर बिना आवाज निकले या उच्च स्वर में।
★ सबसे अच्छा मंत्र जप मौन रूप से किया जाता है।
★ मंत्र जपते समय जल्दबाजी ना करें। गर्दन जोर-जोर से न हिलायें या गा गाकर मंत्र जाप ना करें। > मंत्र जाप करते समय मंत्र का उच्चारण स्पष्ट होना चाहिए।
★ मंत्र जाप करने के बाद अपने आसन को प्रणाम करके ही उठें।
★ आपका जाप पूरा होने के उपरांत दशांश हवन करें, तर्पण करें, मार्जन करें और उसके पश्चात ब्राह्मण भोजन कराएं।
★ यदि आप बिना किसी प्रयोजन के रूद्र मंत्र का जाप करना चाहते हैं, तो प्रतिदिन कम से कम 108 की संख्या में जाप अवश्य करें। 
★ रूद्र मंत्र जाप करने से पहले भगवान गणेश की पूजा अवश्य करें।
★ नारियल पानी, केतकी के पुष्प, कुमकुम, हल्दी, आदि शिवलिंग पर बिल्कुल ना चढ़ाएं।
★ प्रतिदिन जाप के उपरांत भगवान शिव की आरती अवश्य करें।

रूद्र मंत्र जाप करने के लाभ
★ रूद्र मंत्र का जाप मुख्य रूप से सभी प्रकार के कष्टों से, कठिन से कठिन बीमारी से एवं भय से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है।
★ जीवन में शक्ति प्राप्त करने के लिए, मानसिक और शारीरिक मजबूती के लिए और ऊर्जावान बनने के लिए रुद्र मंत्र का जाप किया जाता है।
★ विभिन्न ग्रहों के दोषों के निवारण के लिए और सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार और नकारात्मकता समाप्ति के लिए मंत्र का जाप किया जाता है।
★ रुद्र मंत्र के जाप आत्मा की शुद्धि होती है। ज्योतिषीय उपाय के लिए रूद्र मंत्र का जाप लाभकारी माना गया है।
★ यदि आप पवित्र भाव के साथ शिव गायत्री मंत्र या रूद्र गायत्री मंत्र को निश्चित संख्या में जपते हैं तो आपको कालसर्प दोष, राहु, केतु, शनि ग्रहों द्वारा जनित दुःपरिणामों से भी मुक्ति मिलती है और भगवान शिव के साथ-साथ माता गायत्री का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
★ जीवन में सुख, समृद्धि, मानसिक शांति, धन, वैभव, यश, समृद्धि और पारिवारिक सुखों की प्राप्ति के लिए भी आपको और रूद्र मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए।








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