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प्रदीप मिश्रा जी के उपाय और टोटके

प्रदीप मिश्रा जी के टोटके

प्रदीप मिश्रा जी के टोटके

प्रदीप मिश्रा जी के टोटके

प्रदीप मिश्रा जी अंतरराष्ट्रीय भक्ति कथाकार होने के साथ-साथ आस्था चैनल में भजन और आरती के प्रस्तुतकर्ता भी हैं। उनके वीडियो यूट्यूब और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध हैं जहां से हम उंन्हे फ्री में देख सकते हैं। उनका एक यूट्यूब चैनल भी है जिसका नाम पंडित प्रदीप जी मिश्रा सीहोर वाले है।

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प्रदीप मिश्रा जी के टोटके – जानकारी

पूरा नामपंडित प्रदीप मिश्रा
उपनामरघु राम
जन्म1980
जन्म स्थानसीहोर, मध्य प्रदेश, भारत
आयु/उम्र42 वर्ष
पेशाअंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक
के लिएप्रसिद्धभजन
राष्ट्रीयताभारतीय
पिता कानामश्री रामेश्वर दयाल मिश्रा
भाई-बहन2 भाई {दीपक जी मिश्रा
एवं विनय जी मिश्रा}

प्रदीप मिश्रा जी के टोटके और उपाय

प्रदीप मिश्रा जी के शिव पुराण के टोटके बच्चे को डरने से रोकने के लिए

मिश्रा जी अपनी कथा में कहते हैं कि अगर आपका बच्चा बहुत डरता है तो आप इस प्रयोग को करके इस समस्या का निराकरण कर सकते हैं इसके लिए आपको सोमवार के दिन बेलपत्र का कांटा मावे  में डालकर थोड़ी सी शक्कर डालकर उसका एक लड्डू बनाना है और उसके बाद उस बच्चे पर 12 बार उतारकर किसी कुए के अंदर डाल देना हैं इससे उस बच्चे की रात को डरने और रोने जैसी समस्याएं हल हो जाएगी ।

बेलपत्र का टोटका धन प्राप्त करने के लिए 

अगर कोई व्यक्ति धन प्राप्त करना चाहता है तो वह प्रदीप मिश्रा जी के इस शिव पुराण के टोटके को करके इस समस्या का निवारण कर सकता है । मिश्रा जी दावा करते हैं कि इस उपाय को करने से उस व्यक्ति को बहुत बड़ा फायदा होगा इसके लिए आपको सुबह जल्दी नहा कर बड़ी बेलपत्र पर लाल चंदन लगाकर शिवलिंग पर चढ़ाना है।

ऐसा करने से आपके घर में लक्ष्मी का वास होता है। धन की कमी के कारण आप जिस समस्याओं से जूंझ रहे होते हैं उसका निराकरण जल्द ही होता है।

प्रदीप मिश्रा के बेलपत्र के उपाय 

सीहोर के पंडित प्रदीप मिश्रा ने बेल पत्र के माध्यम से परीक्षा में पास होने के उपाय बताए हैं मिश्रा जी कहते हैं की परीक्षा में पास होने के लिए एक बेलपत्र पर शहद लगा दीजिए और उस बेलपत्र को बच्चे की हाथ से शिवलिंग पर चिपका दीजिए ऐसा करने से बच्चा परीक्षा में पास होने के साथ अच्छे नंबर भी लाएगा।

प्रदीप मिश्रा जी के कमर दर्द और सिर दर्द के टोटके

आजकल हर व्यक्ति शरीर की किसी ने किसी दर्द को लेकर परेशान है ,वही कमर दर्द और सिर दर्द तो आम बात ही हो गई है। अगर आप भी ऐसी ही कोई समस्या से जुंझ रहे हैं तो प्रदीप मिश्रा जी का यह टोटका आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए आपको कार्तिक महीने के सोमवार को वट के 1 पत्ते पर लाल चंदन से 5 बार ओम लिखकर नदी के अंदर प्रवाहित करना है।

यह करने से न केवल आपका कमर दर्द और सिर दर्द से छुटकारा मिलेगा बल्कि आप खुद को पूर्ण रूप से स्वस्थ भी महसूस करेंगे।

जो आपसे जलते हैं उनकी जलन को दूर करने के लिए टोटके 

प्रदीप मिश्रा जी के शिव पुराण के इस टोटके से अगर आपसे कोई जलन रखते है। उस जलन को दूर कर सकते है । इसके लिए आपको महिने की एक दशमी के दिन धतूरे का एक फूल और बेलपत्र को इस तरह से शिवलिंग चढ़ाना होगा कि वह गिरे नहीं । बस ऐसा करने से आपसे जो जलते हैं वे जलना बंद हो जाएंगे ।

प्रदीप मिश्रा के धन संबंधी समस्या के लिए बेलपत्र टोटके 

अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो आपको प्रदीप मिश्रा का यह टोटका इस समस्या का निराकरण करेगा। इसके लिए आपको मंगलवार के दिन शिवलिंग पके चावल से ढकना है और उसके बाद उस पर साथ बिल पत्र चढ़ा देना है ऐसा करने से आपकी धन संबंधी सारी समस्याएं दूर होगी और इसके साथ ही आपने जो भी कर्ज लिया है उससे भी मुक्ति मिल जाएगी।

बच्चा अगर बार बार बीमार पड़ता है तो पंडित प्रदीप मिश्रा के टोटके

अगर आपके घर में कोई भी छोटा बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है तो इसके लिए भी प्रदीप मिश्रा जी ने शिवपुराण का एक टोटका बताया है जिसके बारे में आपको जरूर जान लेना चाहिए। इसके लिए आपको एक आटे का दीपक तैयार करना है उसके अंदर तिल का तेल और चार बत्ती डालकर उसे जला लेना है उसके बाद बच्चे के सिर पर 21 बार उतार कर अवधूतेश्वर महादेव का आह्वान करना है।

अब इसको किसी चौराहे पर आपको तब जलाना है जब आसपास कोई नहीं देख रहा हो। वैसे आपका बच्चा पूर्ण रूप से स्वस्थ होगा और वह बार-बार बीमार नहीं होगा।

बीमारियों के लिए बेलपत्र उपाय

अगर आप किसी गंभीर रोग से पीड़ित हैं तो प्रदीप मिश्रा जी का यह टोटका आपके लिए बेहद लाभकारी हैं। इसके लिए आपको बेलपत्र के पेड़ के नीचे का एक पत्ता उठाकर उस के सामने शिव और शक्ति का नाम लेकर यानी भगवान शंकर पार्वती का नाम लेकर दो बाती का दीपक जलाएं और शिव शक्ति से प्रार्थना करें कि शरीर से जुड़ी इस बीमारी को स्वस्थ करें और इस बेलपत्र को उठाकर उसी स्थान पर चबा लें और बिल पत्र खाने से पूर्व शिव शक्ति से यह आग्रह करें कि इस बेलपत्र को औषधि बनाएं, ऐसा करने से आप जिस भी गंभीर रोग से ग्रसित हैं उसका निराकरण हो जाएगा और आप बिल्कुल स्वस्थ हो जाएंगे।

सोमवार की अष्टमी को किए जाने वाले उपाय में लगने वाली सामग्री –


31 मूंग के दाने

31 चावल के दाने

31 बेलपत्र

निम्न सामग्री लेकर आपको सोमवार की अष्टमी को शिवालय जाना है,


31 चावल के दाने अपनी कामना करके शिवालय की चौखट पर कहीं पर भी रख दे,

31 मूंग के दाने मंदिर में नंदी जी का जो पाव ऊंचा रहता है वहां पर चढ़ाना है

31 बेलपत्र यह अशोक सुंदरी वाली जगह पर, पीला चंदन लाल चंदन लगाकर, अपनी कामना करते हुए समर्पित करते जाओ (बेलपत्र की डंडी जहां पानी बहता है उस और होना चाहिए)

पंडित प्रदीप जी मिश्रा कहते हैं कि एक सोमवार करके देखो जब तक अगले सोमवार की अष्टमी आएगी आपकी समस्या का समाधान हो चुका होगा कोई भी उपाय तभी काम करता है जब उसको सच्चे मन और श्रद्धा के साथ करते हैं

अगर आपकी भोलेनाथ के प्रति आस्था है तो आपके लिए यह उपाय अवश्य काम करेगा, पंडित प्रदीप जी मिश्रा कहते हैं शिव तत्व में जो सुख है वह सुख कहीं भी नहीं है,

"जितने भी सामग्री जब आप अर्पित करेंगे तो और भी चलते समय आपको सच्चे मन से और अपनी कामना करते हुए इच्छा करते हुए आराम से धीरे-धीरे अर्पित करते जाना है"


दुख समाप्ति उपाय पंडित प्रदीप जी मिश्रा

यह उपाय बहुत कारगर है और यह पंडित प्रदीप जी मिश्रा ने अपनी एक शिव पुराण कथा में कहा है


पंडित प्रदीप जी मिश्रा कहते हैं की नंदीश्वर शिव महापुराण की कथा में यह उपाय लिखा गया है, की प्रदोष काल में अर्थात प्रदोष के दिन आपको दो जगह दीप लगाना शुरू कर देना है अब वह दो जगह कौन-कौन सी है आपको नीचे रिश्ते में बता दिया गया है,


पहला बेलपत्र के वृक्ष के नीचे,

दूसरा दिया अपने घर के चौखट के बाहर की ओर लगाना है,

दीप लगाकर प्रभु से ऐसी विनती करना है कि है शिव शंकर आप प्रदोष काल के दिन नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे श्री नंदीश्वर के साथ में ऐसी कृपा करना कि आपकी तरफ से मेरी चौखट पर भी पड़ जाए मैंने आपके लिए द्वार सजाया है, ऐसी कृपा करना,


ध्यान रखने योग्य बातें

जब भी आप अपनी चौखट में दीप लगाएं तो वह हमेशा चौखट के सीधे हाथ की और लगाएं, 


नौकरी जल्दी लगने का उपाय

पंडित प्रदीप जी मिश्रा की कथा में बताया गए इस उपाय में जो भी सामग्री लगने वाली है वह आपको नीचे बता दी गई है कृपया यह सामग्री लेकर आप अपने उपाय को पूरा कर सकते हैं,


उपाय में लगने वाली सामग्री-

कच्चा दूध थोड़ा सा

एक लोटा

थोड़ी सी काली मिर्च पिसी हुई

यह सामग्री लेकर आप बेलपत्र के पेड़ के नीचे चले जाइए और अपना नाम और गोत्र बोलकर अर्पित कर दीजिए तथा उसमें से कुछ दूध शंकर जी पर भी अर्पित कर दीजिए,


शिवलिंग पर दूध चढ़ाते समय आपको अपनी मनोकामना कहना है अब जो भी मांगना चाहते हैं वह आपको कहना है,


पंडित प्रदीप जी मिश्रा कहते हैं कि इस उपाय को बहुत लोगों ने अपनाया है और यह शिव पुराण में लिखा गया है अगर आप इस उपाय का निरंतर उपयोग करेंगे तो आपको उसके बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं,


साथी मिश्रा जी यह भी कहते हैं अगर आपकी भगवान शिव के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति नहीं तो आपको इसके परिणाम बहुत ही जल्दी देखने को मिल सकते हैं,


कोई भी उपाय तभी काम करता है जब आप जिस भी ईश्वर को मानते हैं उसके प्रति अगर आपकी आस्था सच्ची है आप दिल से चाहते हैं तो आपकी मनोकामना बहुत जल्दी पूरी हो जाती है,


सोमवार के उपाय प्रदीप मिश्रा | Somvaar Upay Pradeep Misra

March 30, 2023 by BholenathBhakti

नमस्कार दोस्तों आप सभी लोग जानते हैं कि भगवान शिव जी को सोमवार का दिन बहुत ही प्रिय होता है और सोमवार के दिन किया गया कोई भी उपाय का फल आपको बहुत बड़ा और जल्दी मिलता है तो आज हम आपको पंडित प्रदीप मिश्रा जी द्वारा बताए गए सोमवार के कुछ नए और विशेष उपाय बताने वाले हैं इन उपायों को खराब करते हैं तो निश्चित ही आपको बहुत कुछ फल की प्राप्ति हो सकती हैं।


Table of Contents

पहला उपाय

दूसरा उपाय

तीसरा उपाय

पहला उपाय

यह उपाय आपको यश दिलाएगा। कहने का मतलब है कि आपके जीवन में यह उपाय आपको उन्नति की ओर बढ़ा देगी।


इस उपाय में आपको एक लोटा जल सोमवार के दिन भगवान शिव जी पर चढ़ाने के लिए लेकर जाना है।शिवजी पर वह एक लोटा जल चढ़ाना है उस जल को शिवजी के ऊपर चढ़ाने के बाद जो जल जलाधारी से नीचे गिर रहा हो उसको थोड़ा सा अपने उसी लोटे के अंदर आपको झेल लेना है।


उस जल को झेलने के बाद उस जल के अंदर आपको अपने सीधे हाथ की हथेली की तीन उंगलियां डालनी है मतलब उज्जैन से स्पर्श करानी है स्पर्श कराने के बाद उस शिव मंदिर में जहां पर भी त्रिशूल लगा हुआ हो उस त्रिशूल से इन्हीं तीनों उंगलियों को जल में स्पर्श करके उस त्रिशूल से आपको लगाना है त्रिशूल से इन तीनों उंगलियों को लगाने के बाद वापस से इन तीनों उंगलियों को आपको उसी अपने जल पात्र के अंदर उसी जल में स्पर्श करा लेना है।


यहां पर यह उपाय पूरा हो जाता है इस उपाय को करने के लिए आप इस मंदिर में यह उपाय कर रहे हैं उस मंदिर में त्रिशूल होना जरूरी है।


दूसरा उपाय

इस उपाय को करने से आपके घर में माता लक्ष्मी की कृपा होगी मतलब आपके घर में जो धन की समस्या चलती है वह दूर हो जाएगी।


इस उपाय को करने के लिए आपको एक गोल बाती का घी का दीपक तैयार करना होगा। इस उपाय में जो घी आप उपयोग करेंगे वह शुद्ध देसी गाय का घी होना चाहिए। इस घी के दीपक को आपको आटे का बनाना है उसमें गोल बाती रखकर शुद्ध देसी गाय का घी डालकर इसे आपको किसी भी बड़े वाले बेलपत्र के वृक्ष के नीचे सोमवार के दिन शाम के समय प्रदोष काल में जाकर जला कर आना है। इस उपाय को करने से आपके घर में माता लक्ष्मी की कृपा हो जाएगी।


तीसरा उपाय

यह उपाय भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने का उपाय है इस उपाय को करने से भगवान भोलेनाथ आपको बिना मांगे सब कुछ प्रदान कर देंगे।


यह उपाय चावल और बेलपत्री का है सबसे पहले आपको चावल वाला उपाय बताते हैं।


इस उपाय में आपको 108 चावल के दाने लेना है और इन 108 चावल के दानों को 1-1 करके भगवान शिव जी पर चढ़ाकर श्री शिवाय नमस्तुभयम बोलकर भगवान शिव जी पर चढा दीजिए। इस उपाय को करने से भगवान प्रसन्न होंगे और आपकी सारी मनोकामना पूर्ण करेंगे।


बेलपत्री वाले उपाय में आपको कम से कम 11 बेल पत्री लेनी होंगी इसके अलावा आप इस उपाय को करने के लिए 21,51,108 या इससे भी ज्यादा बेलपत्री को ले सकते हैं। इस उपाय में आपको करना यह है कि जितनी भी आप बेल पत्री ले रहे हैं उनमें से जो आखरी वाली बेलपत्र होगी उस पर आपको पीला चंदन या एक चावल का दाना रखकर अपनी मनोकामना को बोलते हुए भगवान शिव जी पर समर्पित करना है।


उदाहरण के लिए 11 बेलपत्र अगर आप लोग ले रहे हैं तो 10 बेलपत्र आप एक-एक करके भगवान शिव जी पर समर्पित कर दीजिए पर जो 11वीं बेलपत्र होगी उस पर आपको चंदन या एक चावल का दाना रखकर समर्पित करना है और आप भगवान से अपनी मन की बात बोल सकते हैं या कुछ नहीं भी बोलेंगे तो भी आपको बिना मांगे सब कुछ मिल जाएगा।


यह हमने आपको सोमवार के 3 ऐसे उपाय बताए हैं जो कि आपके जीवन में आपकी जिंदगी को बदल देंगे। कोई भी आपको समस्या आती है आप हमसे कमेंट करके पूछ सकते हैं।


धन्यवाद

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सरकारी नौकरी का उपाय प्रदीप मिश्रा।। Pradeep Misra Government Job Upay

May 24, 2023 by BholenathBhakti

नमस्कार दोस्तों, आप सभी लोग जानते हैं कि आजकल सभी लोग अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं एक अच्छी नौकरी पाना चाहते हैं। कोई सरकारी नौकरी पाना चाहता हैं तो कोई अपने मनपसंद की प्राइवेट नौकरी किसी बड़ी कंपनी में पाना चाहता है पर सबको अपने मनपसंद की नौकरी नहीं मिलती हैं। इसीलिए आज हम आपको आपके मनपसंद की नौकरी पाने वाला एक ऐसा कुछ उपाय बताने जा रहे हैं जो कि पंडित प्रदीप मिश्रा जी शिव महापुराण कथा में बताया है जिसके बाद आपकी नौकरी 3 महीने के अंदर लग जाएगी।


यह उपाय सिर्फ आपको जब करना है जब आपकी नौकरी नहीं लग रही हो और आप बहुत ज्यादा परेशान हो चुके हैं।


Table of Contents

नौकरी लगने वाले उपाय की सामग्री

इस उपाय को कब करना हैं

नौकरी लगने वाले उपाय की विधि

इस उपाय को परीक्षा के लिए कर सकते हैं

नौकरी लगने वाले उपाय के नियम

शीर्षक

नौकरी लगने वाले उपाय की सामग्री

यह उपाय बहुत ही साधारण है और इसमें आपको मात्र दो चीजों की आवश्यकता होगी।


एक दूर्वा

एक लोटा जल

सबसे पहली जो चीज की आवश्यकता होगी वह हैं दूर्वा जो भगवान गणेश जी को समर्पित होती हैं। मात्र एक दूर्वा आपको लेकर आना हैं,‌ एक से ज्यादा भी आप ला सकते हैं कोई दिक्कत नहीं हैं। इसके साथ में एक लोटा जल भी आपको लेकर जाना हैं।


इस उपाय को कब करना हैं

इस उपाय को आप किसी भी दिन सुबह के समय कर सकते हैं।


नौकरी लगने वाले उपाय की विधि

जिस दिन आप यह उपाय कर रहे हो उस दिन एक दूर्वा और एक लोटा जल लेकर आपको शिवजी के मंदिर जाना हैं और शिव जी की शिवलिंग के पास जाकर बैठ जाना हैं।


अब सबसे पहले आपको शिव जी की शिवलिंग के ऊपर वह दूर्वा समर्पित करनी है जो आप अपने साथ लेकर आए हैं। इस दूर्वा को आपको कुछ इस प्रकार से शिवलिंग के ऊपर समर्पित करना है जिससे कि वह दूर्वे कि जो डंडी का मुख होगा वह जलाधारी की तरफ हो जहां से जल नीचे गिरता है और जो दुर्व का खिला हुआ भाग होगा वह अपने आप शिव जी की शिवलिंग के पीछे हो जाएगा।


इस दूर्वा को कुछ इस प्रकार से भगवान शिव जी पर चढ़ाने के बाद आपको इसी दूर्वा के ऊपर शिव जी की शिवलिंग के ऊपर एक लोटा जल समर्पित कर देना हैं जो आप अपने साथ इस उपाय को करने के लिए लाए हैं।


जल को समर्पित करने के बाद भगवान से हाथ जोड़कर आपको प्रार्थना करना हैं आपको जिस भी प्रकार की नौकरी चाहिए। आपको उसकी कामना भगवान शिव से करना हैं। उसके बाद भगवान को दुख देकर आपको अपने घर वापस आ जाना है और जहां पर यह उपाय पूरा हो जाता हैं।


इस उपाय को परीक्षा के लिए कर सकते हैं

इस उपाय को अब तब भी कर सकते हैं जब आप अपनी किसी परीक्षा को दे रहे हो, जिस परीक्षा को देने से आपकी नौकरी लगने वाली हो तब भी आप इस उपाय को कर सकते हैं या आप किसी इंटरव्यू को देने जा रहे हैं तो उस स्थान पर भी आप ही उपाय कर सकते हैं।


नौकरी लगने वाले उपाय के नियम

इस उपाय में आपको कुछ नियमों का पालन करना जरूरी हैं।


यह उपाय नौकरी पाने के लिए, परीक्षा में पास होने के लिए, इंटरव्यू में पास होने के लिए आप कर सकते हैं।

इस उपाय में आप एक से ज्यादा दूर्वा का भी उपयोग कर सकते हैं।

उपाय कोई भी व्यक्ति कर सकता है जिसको नौकरी की आवश्यकता हैं।

उपाय को सुबह के समय पर ही करना हैं।

उपाय को करने के बाद भगवान से प्रार्थना भी करना हैं।

शीर्षक

यह उपाय पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने अपनी शिव महापुराण कथा में बताया था। जब किसी व्यक्ति की नौकरी नहीं लगती है तो उस स्थान पर उसे यह उपाय करना चाहिए। अगर आपको इस उपाय को करने में कोई भी समस्या आती है तो आप उनसे कमेंट करके पूछ सकते हैं।


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108 चावल के दाने का उपाय पंडित प्रदीप मिश्रा जी 108 Chawal Ke Daane Ke Upay

April 30, 2023 by BholenathBhakti

नमस्कार दोस्तों आज हम आप लोगों को 108 चावल के दाने का विशेष उपाय बताने वाले हैं जो कि पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने अपनी शिव महापुराण कथा में कई बार बताया है और इस उपाय का फल बहुत बड़ा आपको होकर मिलता है इसलिए यह उपाय बहुत ही विशेष है।


108 चावल के दाने शिवजी पर कैसे चढ़ाने चाहिए यह बात भी हम आपको बताएंगे।


यह उपाय बहुत ही साधारण है और इस उपाय को आप किसी भी दिन कर सकते हैं और अगर किसी विशेष दिन पर इस उपाय को करेंगे तो इससे आपको और ज्यादा विशेष फल की प्राप्ति होगी।


जैसा कि हमने आपको बताया इस उपाय को आप किसी भी दिन कर सकते हैं और प्रातः काल सुबह सुबह भी कर सकते हैं और शाम के समय प्रदोष काल में भी कर सकते हैं।


इस उपाय में आपको चावल के दानों की आवश्यकता होगी जो कि आपको आपके घर में आसानी से मिल जाएंगे आपको मात्र अपने घर की रसोई घर में से 108 चावल के दाने गिन कर एक साथ रख लेना है और जब भी आप जिस भी दिन आप इस उपाय को करने के लिए भगवान शिव जी के मंदिर जा रहे हो उस समय आपको इन 108 चावल के दानों को भगवान शिव जी के मंदिर लेकर जाना है।


प्रातः काल सुबह-सुबह जा रहे हैं तो एक लोटा जल अपने साथ लेकर जरूर जाए और जो भी पूजन सामग्री है वह आप लेकर जा सकते हैं। शाम के समय जा रहे हैं तो एक दीपक बाती भी लेकर जाएं उसके बाद ही आप इस उपाय को करें।


इस उपाय को करने के लिए आप शिवजी के मंदिर में पहुंच जाएं और शिव जी के मंदिर में पहुंचने के बाद आप अपनी पूजन अर्चना कर ले उसके बाद आप शिव जी के पास में एकांत में बैठ जाएं बैठने के बाद आपको 108 चावल के दाने अपने सीधे हाथ की हथेली में निकाल लेना है।


उसके बाद इन 108 चावल के दानों को चढ़ाने के दो तरीके हैं सबसे पहला तरीका है कि आप इन 108 चावल के दानों को एक साथ शिवजी पर चढ़ा दें और दूसरा तरीका यह है कि आप इन 108 चावल के दानों को एक-एक करके मंत्र बोलकर शिवजी पर चढ़ा है।


तो आपको क्या करना है कि 108 चावल के दाने एक-एक करके भगवान शिव जी की शिवलिंग के ऊपर चढ़ाते जाना है और जैसे ही आप लोग एक चावल का दाना चढ़ाते हैं तो उस समय आपको श्री शिवाय नमस्तुभ्यं अपने मन में या अपने मुख से जरूर बोलना है इसी प्रकार से 108 चावल के दाने एक-एक करके चढ़ाएं और हर एक दाने चढ़ाने के बाद आप श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का जाप जरूर करें।


अगर आप चाहें 108 चावल के दाने एक साथ भी भगवान शिव जी पर चढ़ा सकते हैं कोई दिक्कत नहीं है पर 108 चावल के दाने एक-एक करके चढ़ाएंगे तो भगवान शिव आप से ज्यादा प्रसन्न होंगे जल्दी प्रसन्न होंगे।


शिवजी पर पूरे 108 चावल के दाने चढ़ाने के बाद आप भगवान शिव जी के सामने बैठकर हाथ जोड़कर अगर आपकी कोई मनोकामना है तो उसे बोल सकते हैं कोई दुख और समस्या चल रही है तो उसे भी बोल सकते हैं या तो भगवान शिव जी का आशीर्वाद लेकर आप अपने घर वापस आ सकते हैं।


इस उपाय को करने के बाद आपके जीवन में कुछ ना कुछ अंतर जरूर आएगा आपने जिस कामना को जिस दुख और समस्याओं को सोचकर इस उपाय को किया होगा आपकी वह समस्या जरूर बहुत ही जल्दी दूर हो जाएगी।


अब कई सारे लोग सोच रहे होंगे कि क्या इस उपाय को हम अपने घर के शिवलिंग पर कर सकते हैं तो देखिए अगर आप लोगों को उपाय का पूरा फल चाहिए तो आप इस उपाय को मंदिर में जाकर ही करिए।

कोई अधोगति में मर गया हो तो उसके लिए यह उपाय जरूर करें? 

नमस्कार दोस्तों अगर आप लोगों के घर में भी कभी कोई ऐसा व्यक्ति खत्म हो गया हो जिसकी आयु पूरी ना हुई हो या किसी और कारण से वह अपनी मृत्यु से पहले ही चला गया हो मतलब पानी में डूबकर या एक्सीडेंट में चला गया हो तो उस स्थान पर वह अधोगति में चला गया है तो कहीं ना कहीं वह व्यक्ति बैकुंठ नहीं जा पाता और उसकी वजह से आपके घर परिवार में कहीं ना कहीं दुख और समस्याएं चलती रहती हैं तो उस स्थान पर मात्र आपको यह उपाय करना चाहिए जिससे कि वह अधोगति में गया हुआ मनुष्य को वैकुंठ मिल जाता है साथ ही में आपके जीवन में घर परिवार में आने वाली समस्याओं से भी आपको छुटकारा मिलता है।

यह उपाय पंडित जी ने अपनी चौथे दिन की भिलाई छत्तीसगढ़ की एकांत ईश्वर महादेव शिव महापुराण कथा में बताया हैं।

इस उपाय को आपको तब भी करना चाहिए जब आपको अपने सपने में कुछ गलत दिखाई देता हो या सपने गलत तरीके के आ रहे हो।

यह उपाय बहुत ही साधारण है और इस उपाय को कोई भी कर सकता है।

यह उपाय महीने में सिर्फ एक बार करना है जब अमावस्या का दिन हो इस बात का विशेष रूप से आपको ध्यान रखना है।

इस उपाय में आपको मात्र पीले चंदन की आवश्यकता होगी और इस पीले चंदन को आपको भगवान शिव जी के मंदिर में जाकर 7 स्थानों पर जाकर लगाना है।

अमावस्या के दिन प्रातः काल सुबह सुबह आप पीला चंदन लेकर भगवान शिव जी के मंदिर पहुंच जाएं और अब इस पीले चंदन को आपको इस क्रम से 7 स्थानों पर इस पीले चंदन का भाग लगाते जाना है।

भाग कहने का मतलब है कि उस स्थान पर या तो आप पीले चंदन का टीका लगाया पीले चंदन से लेपन करें या पीले चंदन का हल्का सा भाग उस स्थान पर लगाएं जो 7 स्थान हम आपको बताने जा रहे हैं।

सबसे पहले आपको शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग के ऊपर इस चंदन से लेपन करना है।

दूसरे नंबर पर आपको यह पीला चंदन शिवजी के ऊपर जो गणेश जी का स्थान होता है जो कि जलाधारी के सीधे भाग में होता है उस जगह पर लगाना है।

तीसरे नंबर पर आपको यह पीला चंदन कार्तिकेय जी के स्थान पर लगाना है जो कि जलाधारी के उल्टे भाग की तरफ रहता है।

चौथे नंबर पर आपको यह पीला चंदन जलाधारी के बीचो-बीच जो माता अशोक सुंदरी का स्थान होता है वहां पर लगाना है।

पांचवे नंबर पर आपको यह पीला चंदन शिव जी की शिवलिंग के ऊपर जो एक पात्र लगा हुआ होता है जिससे बूंद बूंद करके शिवजी पर जल गिरता है जिसमें शिवजी की 5 बेटियों का स्थान होता है। उस पात्र के ऊपर आपको पीला चंदन लगाना है।

छठवें नंबर पर आपको यह पीला चंदन शिवलिंग के पीछे हल्का सा जलाधारी का भाग होता है वहां पर लगाना है। आपने देखा होगा शिवजी के आगे एक जलाधारी होती है और शिवजी के पीछे हल्की सी जगह होती है जलाधारी की तो आपको शिवजी के पीछे वाली जलाधारी जो होगी वहां पर पीला चंदन लगाना है।

सातवें और आखिरी नंबर पर आपको यह पीला चंदन नंदी बाबा के पास में आकर नंदी बाबा के दोनों सिंहो में लगाना है।

इन 7 जगहों पर यह पीला चंदन लगाने के बाद आपको भगवान शिव जी से प्रार्थना करना है आशीर्वाद प्राप्त करना है और यहां पर यह उपाय पूरा हो जाता हैं।

यह उपाय सिर्फ अमावस्या के दिन आपको करना है और आप चंदन का टीका भी इन 7 जगहों पर लगा सकते हैं या आप इस चंदन का कोई भी भाग सात जगहों पर लगा सकते हैं।

10 जुलाई सोमवार की अष्टमी के यह उपाय जिंदगी बदल देंगे

नमस्कार दोस्तों आप सभी लोग जानते होंगे कि 2023 में जुलाई के महीने में सोमवार की अष्टमी आ गई हैं जो कि 10 जुलाई 2023 सोमवार के दिन हैं।

सोमवार की अष्टमी इसीलिए इतनी ज्यादा खास होती है क्योंकि यह साल में बहुत ही कम आती है और इस बार फरवरी के महीने में ही दूसरी बार सोमवार की अष्टमी आ आ रही है जिसका फायदा सभी शिवभक्त जरूर उठाएंगे।

सोमवार के दिन आने वाली अष्टमी को हम सोमवार की अष्टमी कहते हैं जिस दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का मिलन हुआ था और यह दिन भगवान भोलेनाथ को इतना प्रिय है कि इस दिन अगर छोटी सी भक्ति अगर आप लोग भगवान की कर लेते हैं तो भगवान आपसे बहुत प्रसन्न हो जाते हैं।

आज इस जानकारी में हम आपको सोमवार की अष्टमी की कुछ ऐसे विशेष उपाय बताने वाले हैं जिन उपायों को आप अपनी इच्छा अनुसार करके उन उपायों से फल की प्राप्ति कर सकते हैं पर जब भी आप कोई भी उपाय करें तो उस उपाय करते समय मन में विश्वास और पूरी भक्ति जरूर होनी चाहिए तभी उपाय काम करेगा।

पहला उपाय

इस उपाय को करने से आपकी जो भी मनोकामना होगी वह पूर्ण हो जाएगी इस उपाय में आपको जो सामग्री लेनी है वह हम आपको बताते हैं साथ ही में इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना है कि जो भी हम आपको पाए बताएंगे यह सारे सोमवार की अष्टमी को ही आपको करना है।

इस उपाय को करने के लिए आपको तीन चीजों की आवश्यकता होगी। सबसे पहली चीज है 31 चावल के दाने, दूसरी चीज है 31 हरी मूंग के दाने, तीसरी चीज है 31 बेलपत्र इस उपाय को करने के लिए यह तीनों चीजें आपके पास होना आवश्यक है।

सोमवार की अष्टमी के दिन प्रातः का सुबह-सुबह स्वच्छ होकर स्नान करके शिवजी के मंदिर पहुंच जाइए और यह उपाय शिवजी की चौखट से ही शुरू हो जाएगा सबसे पहले जैसे ही शिवजी के मंदिर की चौखट तक आप पहुंच जाते हैं तो अपने 31 चावल के दाने अपनी सीधे हाथ की हथेली में रखिए और अपनी मनोकामना को मन ही मन बोलते हुए भगवान शिव जी की चौखट पर सीधे हाथ की तरफ अब वह चावल के दाने मनोकामना को करते हुए समर्पित कर दे।

उसके बाद आप मंदिर की अंदर प्रवेश कीजिए और शिवजी के सामने जो नंदी बाबा बैठे हुए होते हैं उनके पास आकर बैठ जाइए अब आप अपने 31 हरे मूंग के दने निकालिए यह जो दाने आप लोग लेंगे यह पूरे पूरे होना चाहिए। इन 31 हरे मूंग के दानों को भगवान नंदी बाबा का एक उठा हुए चरण होता है उसके पास आपको अपनी मनोकामना को करते हुए समर्पित कर देना है।

अब आपको शिव जी की शिवलिंग के पास में आना है अब जो आप 31 बेलपत्र लेकर आए हैं इनको निकाल लीजिए और 31 बेलपत्र की बीच वाली बड़ी पत्ती पर पीले चंदन का एक-एक टीका लगा लीजिए। अब एक-एक बेलपत्र को भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग के ऊपर जो अशोक सुंदरी का स्थान होता है जो कि जलाधारी के बिल्कुल बीचो-बीच होता है उस स्थान पर आपको यह 31 बेलपत्र एक-एक करके भगवान के नाम जाप करते हुए चढ़ा देनी है और जब आपकी सबसे आखिरी वाली बेल पता चला रहे हो तो उस समय आप भगवान से अपनी मनोकामना भी जरूर बोल दीजिए।

जहां पर यह उपाय पूरा हो जाता है इस उपयोग करने से आपकी कोई भी मनोकामना पूर्ण बहुत जल्द हो जाती है।

दूसरा उपाय

इस उपाय को करने से भगवान भोलेनाथ आप से प्रसन्न होंगे और आपको धन, वैभव, ऐश्वर्य का आशीर्वाद भी देंगे।

यह उपाय बहुत ही आसान है और इस उपाय में आपको सोमवार की अष्टमी के दिन शाम के समय एक गोल बाती का घी का दीपक तैयार करना है। उसके बाद में आपको इस दीपक को किसी भी बेलपत्र के वृक्ष के नीचे जाकर जरूर लगाना है।

तीसरा उपाय

इस उपाय को करने से भगवान भोलेनाथ आपसे प्रसन्न होंगे।

इस उपाय में आपको सोमवार की अष्टमी के दिन पांच बेलपत्र अपने साथ रखना है और शिव जी के मंदिर पहुंच जाना है 5 बेलपत्री को एक-एक करके भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग पर आपको समर्पित करना है और भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करना है।

चौथा उपाय

इस उपाय को करने से अगर आपके घर में कोई ज़िद्दी बच्चा है तो वह बच्चा इस उपाय को करने के बाद कभी भी ज़िद नहीं करेगा।

इस उपाय में आपको सोमवार की अष्टमी के दिन एक छोटी सी कटोरी में शक्कर भर लेना है और अपने बच्चे को साथ लेकर शिवजी के मंदिर जाना है शिवजी के मंदिर जाकर अपने बच्चे के हाथ में यह शक्कर की कटोरी देखकर उसे शिव जी की शिवलिंग के ऊपर समर्पित करवा देना है अपने बच्चे के हाथों से और अवधूतेश्वर महादेव के नाम का जाप भी उस समय जरूर करना है।

यह उपाय सर सोमवार की अष्टमी का है आपको फल जरुर मिलेगा।

पांचवा उपाय

इस उपाय को करने से अगर आपके घर में कोई ऐसा बच्चा है जिसकी उम्र 8 साल से कम है और वह बच्चा लगातार बीमार पड़ता रहता है दवाइयां उसको लगती रहती है तो उस स्थान पर आपको सोमवार की अष्टमी का यह उपाय करना चाहिए जिससे कि वह बच्चा सिर्फ कभी भी बीमार नहीं पड़ेगा।

इस उपाय में आपको सबसे पहले एक आटे का दीपक बनाना है उस आटे के दीपक के अंदर आपको चार बाती रखना है उसके बाद में आपको उस दीपक के अंदर तिल का तेल डालना है और इस दीपक को बिना जलाए हुए ही अपने बच्चे के ऊपर से 21 बार घुमा लेना है और इस दीपक को सोमवार की अष्टमी के दिन किसी भी चौराहे पर जाकर जलाकर आ जाना है।

इस उपाय को करने के बाद आपका बच्चा फिर कभी भी बीमार नहीं पड़ेगा पर यह उपाय सिर्फ 8 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए और सोमवार की अष्टमी के दिन करने का ही है।

छठवां उपाय

इस उपाय को करने से आप जिस भी काम को करेंगे आप‌ उसमें सफल जरूर होंगे।

इस उपाय में आपको सात बेलपत्री लेनी है, केसर को घिसकर चंदन बनाना है और एक लोटा जल भरकर सोमवार कि अष्टमी के दिन शिवजी के मंदिर पहुंच जाना है।

सबसे पहले अपनी सातो बेलपत्र की बीच वाली बड़ी पत्ती पर उस घिसे हुए केसर के चंदन से ओम लिखना है और साइड वाली पहली बार पत्ती पर आपको मां जगदंबा के नाम से एक बिंदी लगाना है और दूसरी पत्ती पर आपको गणेश जी रिद्धि सिद्धि के नाम की बिंदी लगाना है।

अब सबसे पहले आपको शिवजी पर जल चढ़ा देना है जल चढ़ाने के बाद आपको यह साथ बेलपत्र एक-एक करके शिव जी की शिवलिंग पर जो अशोक सुंदरी का स्थान होता है जोकि जलाधारी के बिल्कुल बीचो-बीच होता है उस स्थान पर एक-एक बेल पत्री को भगवान भोलेनाथ के नाम का स्मरण करते हुए चढ़ाते जाना है।

जैसे ही आप सातों बेलपत्र चढ़ाते उसके कुछ समय बाद ही आप उसमें से एक बेलपत्र भगवान भोलेनाथ से आशीर्वाद के रूप में अपने घर लेकर आए हैं और उस बेलपत्र को अपने साथ रखें आप जिस काम को करने के लिए शुरुआत कर रहे हो उस काम में आप पर बेलपत्र अपने साथ रखे आप हर काम में सफल होते जाएंगे।

सातवां उपाय

इस उपाय को करने से आपकी कोई भी मनोकामना होगी तो वह पूरी हो जाएगी।

इस उपाय में आपको एक बेलपत्री लेनी है और थोड़ा सा शहद लेकर भगवान भोलेनाथ के मंदिर सोमवार की अष्टमी के दिन चले जाना है।

शिवजी के मंदिर पहुंचकर आप अपनी पूजन अर्चना करने के बाद भगवान भोलेनाथ के पास आकर बैठे और उस बेलपत्र की बीच वाली बड़ी पत्ती पर आप थोड़ा सा शहर लगा कर पूरे में लगा दे और उसके बाद इस बेल पत्री को भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग पर अपनी मनोकामना को करते हुए चिपका देंगे समर्पित कर दें।

इस उपाय को करने से आपकी मनोकामना बहुत जल्द पूर्ण हो जाएगी।

आठवां उपाय

इस उपाय को करने से भगवान भोलेनाथ आपको बिना मांगी सब कुछ दे देंगे जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं करी होगी।

इस उपाय में आपको सोमवार की अष्टमी के दिन भगवान भोलेनाथ के मंदिर जाना है और भगवान भोलेनाथ के मंदिर की आपको साफ सफाई करना है।

सबसे पहले आपको भोलेनाथ की शिवलिंग के ऊपर का जो भी निर्णय होगा वह पूरा उठाकर साफ करना है भगवान भोलेनाथ के मंदिर के प्रांगण की साफ सफाई करना है पोछा लगाना है और साफ सुथरा कर देना है।

इस काम को करने से भगवान भोलेनाथ आप से इतना प्रसन्न होंगे कि वह आपको बिना मांगे इतना कुछ देंगे जिसने कि आपने कल्पना भी नहीं करी होगी।

हमने आपको जितने भी उपाय बताए हैं यह सारे आपको सिर्फ सोमवार की अष्टमी के दिन ही करना है और तभी यह सारे उपाय काम करेंगे इन सभी उपाय को करने में आपको कोई भी समस्या आती है तो उसे आप हमसे कमेंट करके पूछ सकते हैं आपको जवाब मिल जाएगा।

रजस्वला धर्म से जुड़ी हुई कोई समस्या हो करें यह उपाय।

दोस्तों श्री पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने अपनी सीहोर की नारद शिवमहापुराण कथा जो कि कुबरेश्वर धाम सीहोर में चल रही है। उस कथा में श्री पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने एक बहुत ही बड़ा उपाय बताया है जिस उपाय का बहुत ही बेसब्री से कई सारी माताएं बहने इंतजार कर रही होंगी।

यह उपाय रजस्वला धर्म से जुड़ा हुआ है जिस माता बहन को रजस्वला धर्म मतलब महीने की दिक्कत में किसी भी प्रकार की कोई समस्या आती है तो उसके लिए आप इस उपाय को कर सकते हैं।

रजस्वला धर्म से जुड़ी हुई आपकी किसी भी प्रकार की समस्या हो जैसे कि उधर से जुड़ी हुई या कोई गठान बन गई है या डॉक्टर ने बोल दिया है कि ऑपरेशन करना पड़ेगा तो उससे पहले आप यह उपाय जरूर करके देखें आपको रजस्वला धर्म से जुड़ी समस्या में निश्चित ही सुधार देखने को मिलेगा।

इस उपाय को आपको उस समय करना है जब आपको रजस्वला धर्म आ रहा हो और इस उपाय को आप को खुद नहीं करना है अपने घर के किसी और व्यक्ति से करवाना है जो कि शुद्ध हो।

आपको अपने घर के किसी भी व्यक्ति को किसी भी दिन जिस समय आपको समस्या हो रही हो उस दिन प्रातः काल सुबह सुबह एक बेल पत्री लेकर और एक लोटा जल लेकर किसी भी बड़े बेलपत्री के पेड़ के नीचे जाकर बैठ जाना है।

बेलपत्र का वृक्ष बड़ा होना चाहिए जिसकी छाया में आप लोग बैठ सके तो आपको करना क्या है उसी बड़े बेलपत्र के वृक्ष के नीचे जाकर बैठना है पर किस जगह पर बैठना है वह आप सुनिए।

जहां पर उस बड़े बेलपत्री वृक्ष की जड़ होगी उस जड़ के पास जाकर आपको बैठ जाना है।

वहां पर बैठने के बाद जो आप अपने साथ एक बेलपत्री लेकर गए हैं उस बेलपत्री को आपको उसी बड़े बेलपत्री के वृक्ष की जड़ के पास रखना है मतलब जड़ से लगाकर रखना है पर ध्यान दीजिए कि जो बेलपत्र की जो बीच वाली बड़ी पत्ती होगी। बीच वाली बड़ी पत्ती का जो मुख है वह आपको बेलपत्री के जड़ की तरफ करके रखना है।

उसके बाद अब आपको इसी बेल पत्री के ऊपर 7 बार कुंद केश्वर महादेव के नाम से जल चढ़ाना है।

अब आप कहेंगे कि हम तो एक लोटा जल लेकर आए हैं हम 7 बार जल कैसे चढ़ाएंगे तो दोस्तों आपको उस बेलपत्री के ऊपर थोड़ा थोड़ा करके 7 बार जल चढ़ाना है कुंद केश्वर महादेव के नाम का स्मरण करते हुए।

जैसे कि आपने थोड़ा सा जल चढ़ा दिया उसी बेलपत्री के ऊपर फिर थोड़ा रुक गए, फिर दूसरी बार चढ़ा दिया, फिर थोड़ा रुक गए फिर तीसरी बार चढ़ा दिया ऐसे करते-करते आपको पूरे 7 बार उसी बेलपत्र के ऊपर कुंदकेश्वर महादेव के नाम का स्मरण करते हुए जल को चढ़ाना है।

सात बार जल चढ़ाने के बाद कुंदकेश्वर महादेव के नाम का स्मरण करते हुए उस बेलपत्री को वहां से उठाइए और अपने घर वापस ले जाइए।

अपने घर वापस आने के बाद अब इस बेलपत्री को उस महिला यह स्त्री को दीजिए जिसको रजस्वला धर्म से जुड़ी हुई कोई समस्या हो रही हो।

उनसे कहिए कि आप इस बेलपत्री को खा लीजिए जिस समय आपको समस्या हो रही हो आपको इस बेलपत्री को उस समय खा लेना है।

इस बेलपत्री को खाने के बाद निश्चित ही आपकी जिस भी प्रकार के रजस्वला धर्म से जुड़ी हुई समस्या चल रही होगी वह पूरी तरीके से दूर हो जाएगी।

इस उपाय को आपको उस समय करना है जिस समय आपको समस्या हो रही हो और इस उपाय को आपको अपने घर की किसी और सदस्य से करवाना है आपको खुद नहीं करना है।

सोमवती अमावस्या को काली तिल का यह उपाय जरूर करें। पैसा खुद चलकर आएगा।

यह बात आप सभी लोग जानते हैं कि सोमवती अमावस्या का जो दिन होता है वह बहुत ही ज्यादा शुभ होता है बहुत ही ज्यादा अच्छा होता है और यह दिन बार-बार भी नहीं आता है।

अभी कि जो सोमवती अमावस्या पड़ रही है वह 31 मई 2022 को पड़ रही है यह सोमवती अमावस्या को सोमवती अमावस की इसलिए कहते हैं क्योंकि यह सोमवार को पड़ती है।

सोमवती अमावस्या का व्रत जो महिलाएं करती हैं उनके पतियों के ऊपर कभी भी कोई दुख समस्या नहीं आती है।

इस सोमवती अमावस्या को आप एक ऐसा उपाय कर सकते हैं जिस उपाय को करने से अगर आपने किसी को पैसा उधार दिया होगा और आपका वह पैसा आपको लौटा नहीं रहा है 3% बहाने बनाता जा रहा है पर वह आपका पैसा नहीं लौटा रहा है या आपका कहीं पर बड़ा पैसा फंसा हुआ है आपका वह पैसा आपको मिल नहीं पा रहा है तो उसके लिए सोमवती अमावस्या का आपकी है उपाय कर सकते हैं निश्चित ही आपको जो पैसा फसा हुआ होगा जिसकी जगह पर वह पैसा आपके पास खुद चल कर आएगा।

सोमवती अमावस्या का यह उपाय आपको सोमवती अमावस्या की 1 दिन पहले से रात के समय शुरु करना होगा। सोमवती अमावस्या की 1 दिन पहले वाली रात्रि को आपको थोड़ी सी काली तिल लेना है उसका लिटिल को आपको किसी भी एक पात्र में पानी डालकर गलाकर रख देना है।

उस काली तिल को आपको पूरी रात गला कर रख देना है सुबह सोमवती अमावस्या के दिन आपको उस काली दिल को उस जल के पात्र में से निकालना है और उसका लिटिल को आपको किसी भी चीज से पीस लेना है बस याद रखिए कि जो मिक्सर होता है उससे आपको इस कार्यक्रम को नहीं भेजता है अपने हाथों से परिश्रम करके किसी भी चीज से उसे पीसना है।

इस काली तिल को पीसने के बाद अब आपको इस काली तिल को किसी भी एक कटोरी में रख लेना है कटोरी में रखने के बाद आपको पीला चंदन निकालना है। अपने हिसाब से अनुमान लगाकर पीला चंदन उस काली तिल के अंदर आपको डालना है और मिला देना है।

अब आपको सोमवती अमावस्या के दिन सुबह ही इस कटोरी मेंपिसी हुई काली तिल और पीला चंदन मिलाकर तैयार कर लें उसके बाद साथ बेलपत्र अपने साथ रखने साथ नहीं तो 5 बेलपत्र भी आप अपने साथ रख सकते हैं उसके बाद एक लोटा लीजिए उस लोटे के अंदर आपको पानी और जल का मिश्रण डालना है मतलब पानी भी उसी जल पात्र के अंदर होना चाहिए और दूध भी उसी पात्र में होना चाहिए तो पानी और दूध को मिलाकर आपको उस लोटे के अंदर भर लेना है।

पिसी हुई काली तिल और पीले चंदन की कटोरी पांच या सात बेलपत्र और एक लोटा दूध और जल का मिश्रण को लेकर आपको सोमवती अमावस्या के दिन सुबह सुबह शिव जी के मंदिर जाना है।

शिवजी के मंदिर जाने के बाद शिवलिंग के सामने जाइए वहां पर बैठी है और जो आप अपने साथ एक कटोरी ले कर गए हैं जिसमें आपने पिसी हुई काली तिल और पीले चंदन का मिश्रण बना कर लाए हैं उस मिश्रण से आपको शिवलिंग के ऊपर पूरे में लेपन करना है।

शिवलिंग के ऊपर पूरे में लेपन करने का तात्पर्य यह है कि आपको शिवलिंग के ऊपर पूरे पिसी हुई काली तिल और जो पीला चंदन है उसका पूरा मिश्रण का जो लेपन है वह आपको शिवलिंग के ऊपर भी करना है और जलाधारी के ऊपर भी करना है जलाधारी के ऊपर जो अशोक सुंदरी का स्थान होता है उस जगह पर तो विशेष रूप से करना ही है।

इसलिए अपने को पूरे शिवलिंग के ऊपर लेपन करने के बाद आपको अपनी तीन उंगली लेनी है जिससे कि आपको त्रिपुंड बनाना है और त्रिपुंड आपको अपनी तीनों उंगलियों में कुछ भी लेकर नहीं बनाना है बस अपनी तीनों उंगली सीधे हाथ की हथेली की लेनी है और उसे शिवलिंग के ऊपर फेंर देना है जिससे कि वह त्रिपुंड बन जाएगा। उसी लेपन के ऊपर जो आपने किया है उसी लेपन के ऊपर आपको तीन लाइन खीच देनी है जिससे कि वह त्रिपुंड बन जाएगा।

त्रिपुंड बनाने के बाद आप जो अपने साथ पांच या सात बेलपत्र लेकर गए हैं उन बेलपत्र को शिवलिंग के ऊपर समर्पित करना है बेलपत्र को समर्पित करने के बाद आपको आखरी में जो आप अपने साथ एक लोटा जल और दूध का मिश्रण लेकर गए हैं इस एक लोटा जल और दूध के मिश्रण को आपको शिवलिंग के ऊपर उन्हीं बेलपत्र के ऊपर जो आपने चढ़ाई है समर्पित कर देना है।।

बेलपत्र चढ़ाने के बाद उन्हीं बेलपत्र के ऊपर आपको इस एक लोटा जल और दूध के मिश्रण को समर्पित करना है। समर्पित करने के बाद आपको भगवान से हाथ जोड़कर विनती करना है और भगवान को बताना है कि भगवान हमारा इतना पैसा है जो कि इस जगह फंसा हुआ है आप अपनी कृपा कीजिए जिससे कि हमारा यह पैसा हमें वापस मिल जाए। भगवान से ऐसी विनती करके आप अपने घर आ सकते हैं।

यह उपाय सिर्फ सोमवती अमावस्या के दिन का ही है और इस उपाय को आप विशेष कर सुबह के समय करें अगर किसी कारणवश सुबह के समय यह उपाय नहीं कर पाते हैं तो आप प्रदोष काल में भी इस उपाय को कर सकते हैं।

शिवजी को 4 तरीके से धतूरा जरुर चढ़ाएं? 

यह बात तो आप लोग जानते ही होंगे कि शिवजी को धतूरा भी चढ़ाया जाता है और शिव जी को धतूरा चढ़ाने से भगवान शिव हमसे प्रसन्न होते हैं और हमारी मनोकामना को भी पूरा करते हैंपर क्या आप जानते हैं कि धतूरे को अगर इन 4 तरीकों से चढ़ाया जाए तो भगवान हमारी अलग अलग मनोकामना को पूरा करते हैं और हमारे दुखों को दूर करते हैं।

आइए जानते हैं कि कौन सी चार ऐसे तरीके हैं जिसको देखते हुए अगर आप धतूरे को शिवलिंग के ऊपर समर्पित करते हैं तो आपको क्या-क्या मिल सकता है।

सबसे पहले धतूरे की बात कर रहे हैं तो यहां पर इन उपायों में हम कांटे वाला जो धतूरा होता है उसका उपयोग करने वाले हैं।

अगर आप लोग एक धतूरे को हल्दी में डुबोकर शिव जी को समर्पित करते हैं तो इससे आपके घर में धन वृद्धि होती है मतलब आपके घर में लक्ष्मी हमेशा प्रसन्न होती है आपके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।

यह धतूरा का उपाय धन की वृद्धि के लिए है।

अगर एक धतूरे को आप चंदन में डुबोकर शिव जी को समर्पित करते हैं तो इससे आपकी आयु बढ़ती है। जो भी व्यक्ति इस धतूरे को चंदन में डुबोकर शिवलिंग के ऊपर समर्पित करता है उसकी आयु भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से बढ़ती जाती है।

यह धतूरे का उपाय आयु की वृद्धि के लिए है।

अगर एक धतूरे को आप अभीर में डुबोकर शिवजी को चाहते हैं तो इससे आपको कभी भी कोई लोग नहीं हो सकता आप हमेशा रोग मुक्त रहेंगे। यह धतूरा अभीर में डुबोकर रोग मुक्ति के लिए चढ़ाया जाता है।

अब अगर आपके घर में कोई बड़ा रोग है कोई हमेशा बीमार रहता है जिस की तबीयत हमेशा खराब रहती है तो उसके लिए एक विशेष उपाय है जो कि आपको धतूरे से ही करना है।

इस उपाय को करने के लिए सबसे पहले आपको किसी भी बड़े बेलपत्र के वृक्ष के नीचे जाना होगा वहां पर जाकर एक मिट्टी के शिवलिंग का निर्माण करना होगा। निर्माण करने के बाद आपको एक सादा धतूरा लेना है उस धतूरे को आपको शिव जी की शिवलिंग के ऊपर समर्पित करना है जो आपने अपने हाथों से बनाई है। बेलपत्र के वृक्ष के नीचे बैठकर उस बेलपत्र के वृक्ष के नीचे बैठकर ही आपको इस अधूरे को उस शिवलिंग के ऊपर समर्पित करना है।

यह जो धतूरा आप इस उपाय के लिए चढ़ाएंगे इस ससुरे में आपको कुछ भी नहीं लगाना है पेड़ से तोड़कर जैसा धतूरा आएगा वैसा का वैसा ही आपको शिव जी को समर्पित करना है।

यह वह 4 तरीके थे जिन तरीकों से अगर आप शिवजी को धतूरा समर्पित करते हैं तो भगवान भोलेनाथ आपकी रक्षा करते हैं और आपके ऊपर अपना आशीर्वाद रखते हैं।

शिव जी को धतूरा चढ़ाया जाता है वह किसी विशेष दिन पर ही चढ़ाया जाता है अगर आप इन उपायों को किसी विशेष दिन पर करेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा आपको फल बहुत जल्दी मिलेगा।

विशेष दिन कहने से मतलब है कि किसी भी सोमवार को प्रदोष को या शिवरात्रि को आप इस पूरे को चढ़ा सकते हैं या आपके लिए कोई विशेष दिन हो तो आप उस दिन भी धतूरे को शिवलिंग के ऊपर समर्पित कर सकते हैं।

प्रदोष व्रत कैसे करना चाहिए। 

पशुपति व्रत का उद्यापन कैसे करें।

आप सभी लोगों में से बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं जो कि प्रदोष व्रत करते हैं अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अगर आप लोग भी चाहते हैं कि आपकी कोई बड़ी मनोकामना जो सालों से पूरी ना हो रही हो तो वह पूरी हो जाए तो आपको हमारी यह बातों को सुनना चाहिए और पढ़ना चाहिए क्योंकि प्रदोष व्रत एक ऐसा व्रत होता है जिस व्रत को करने से हमारी मनचाही मनोकामना पूरी हो सकती है अगर हम सच्चे मन और पूरी शक्ति से इस व्रत को धारण करें और इसकी पूरी विधि को अच्छे से अपनाएं।

प्रदोष व्रत का सबसे पहला नियम होता है कि जिस दिन भी आप प्रदोष व्रत रख रहे हो और जब भी प्रदोष पढ़ रही हो तो उस दिन आपको ब्रह्म मुहूर्त में उठना है और सबसे पहले स्नान करना है। उसके बाद फिर आसन पर बैठकर भगवान की भक्ति को धारण करना है।

प्रदोष व्रत रखने वाले भाइयों और बहनों को दिन भर जितना हो सके भोले बाबा के नाम का जाप करते रहना चाहिए। भोलेबाबा के जितने भी मंत्र होते हैं उन सभी का उच्चारण करना चाहिए।

दिनभर आपको भोलेनाथ की भक्ति में गुजारना चाहिए तभी आपको पशुपति व्रत का पूरा फल मिलता है।

सरकारी नौकरी पाने वाला सर्वश्रेष्ठ उपाय ।। 

प्रदोष व्रत करने वाले को क्या करना चाहिए

प्रदोष व्रत करने वाले को क्या नहीं करना चाहिए

प्रदोष व्रत का उद्यापन कैसे करें

प्रदोष व्रत करने वाले को क्या करना चाहिए

प्रदोष व्रत करने वाले व्यक्ति को शाम के समय आधा घंटा या 10 मिनट बैठ कर शिव जी का भजन करना चाहिए।

अगर साथ में कोई भजन करने वाला ना हो तो आप को अकेले ही बैठकर भोले बाबा की भक्ति में डूब जाना चाहिए।

प्रदोष व्रत करने वाले को क्या नहीं करना चाहिए

प्रदोष व्रत करने वाले को भोजन नहीं करना चाहिए।

अगर प्रदोष व्रत करने वाला फल हार भी करता है तो उसमें भी नमक का उपयोग नहीं करना चाहिए।

प्रदोष व्रत में किसी भी प्रकार की नमक का सेवन वर्जित होता है।

प्रदोष व्रत का उद्यापन कैसे करें

जब आपकी 11 प्रदोष हो जाएं या 26 प्रदोष हो जाए तो उस समय आप को प्रदोष व्रत का उद्यापन कर देना चाहिए।

प्रदोष व्रत का उद्यापन करने के लिए दो ब्राह्मणों को जोड़े से बुलाओ।

ब्राह्मणों को जोड़े से बुलाकर उनके चरणों की पूजा करके आराधना करके भोले बाबा का सुंदर मंडप तैयार कर कर रंगोली बनाकर सजाकर भगवान शंकर की प्रदोष काल में पूजा करो।

प्रदोष के एक दिन पहले गणेश जी की आराधना करो उनके भजन करो।

जिन ब्राह्मणों को आप ने बुलाया है उन ब्राह्मणों से मंत्रों का उच्चारण करवाइए 108 खीर की आहुतियां दिलवाईए।

उसके बाद ब्राह्मणों को जोड़ें से भोजन करवाकर उनके चरणों को नमन करके दक्षिणा प्रदान करें।

दक्षिणा देने के बाद आपको ब्राह्मणों से प्रार्थना करना है जिस प्रदोष का व्रत हमने पूरा किया है उस प्रदोष व्रत का फल हमें मिल जाए।

ब्राह्मणों के चरणों को नमन कर कर उनके हाथों से अपने सर पर अक्षत के दाने छुड़वाए।

उसके बाद रात्रि में भगवान भोलेनाथ का भजन करें और भोलेनाथ से प्रार्थना करें कि भोलेनाथ हमारे जीवन के सभी दुख समस्याओं को दूर करें।

हम आशा करते हैं कि आपको हमारी लिखी हुई बातें जो कि श्री पंडित प्रदीप मिश्रा जी द्वारा बताई गई हैं आपको समझ आ गई होंगी ।

अशोक सुंदरी का स्थान कहां पर हैं? शिवलिंग पर यह पांच स्थान जरूर देखें

नमस्कार दोस्तों, आप सभी लोग जानते होंगे कि शिवजी की जो शिवलिंग होती है उस शिवलिंग के ऊपर शिव जी का पूरा परिवार विराजमान रहता है पर क्या आपको पता है कि कौन से सदस्य का स्थान कौन से स्थान पर है। अगर नहीं पता तो आज की जानकारी में हम आपको शिव जी की शिवलिंग के ऊपर शिव जी के परिवार के कौन-कौन से सदस्य का स्थान है यह सारी जानकारी देंगे।

हम आपको शिवलिंग में शिव जी के परिवार के जो मुख्य सदस्य हैं सिर्फ उनका स्थान शिव जी के ऊपर बताएंगे।

सबसे पहले ऊपर आप एक शिवलिंग का दर्शन कर सकते हैं।

सबसे पहले शिवलिंग होती है जो कि शिवजी का स्वरूप होता हैं।

उसके बाद में शिव जी की शिवलिंग जिस चीज के ऊपर रखी हुई होती है उसे हम कहते हैं माता पार्वती जी का हस्त कमल इसी के ऊपर शिवलिंग रखा होता हैं।

अब जो स्थान आता है वह शिवजी की सबसे छोटी बेटी का स्थान आता है। माता अशोक सुंदरी जोकि शिवजी की सबसे छोटी बेटी हैं उनका स्थान जलाधारी के बिल्कुल बीचो-बीच होता हैं।

अब हम आपको शिवलिंग के ऊपर जो गणेश जी का स्थान होता है उसके बारे में बताएंगे। शिवलिंग की जलाधारी के सीधे भाग में गणेश जी का स्थान होता है।

अब हम आपको शिवलिंग के ऊपर जो कार्तिकेय जी का स्थान होता है उसके बारे में बताएंगे। शिवलिंग की जलाधारी के उलटे भाग में कार्तिकेय जी का स्थान होता है।

अब हम आपको बताएंगे शिवजी की 5 बेटियों का स्थान। आपने देखा होगा शिवलिंग के ऊपर एक जल पात्र या जलाधारी टंगी हुई होती है जिसमें से बूंद-बूंद करके जल शिवलिंग के ऊपर टपकता हैं। उस जल पात्र के अंदर ही शिवजी की इन पांच बेटियों का स्थान होता हैं।

तो दोस्तों जो स्थान हमने आपको बताए हैं वह शिव जी का स्थान, माता पार्वती जी का स्थान, माता अशोक सुंदरी जी का स्थान, गणेश जी का स्थान, कार्तिकेय जी का स्थान और शिव जी की 5 बेटियों का स्थान।

यही मुख्य शिव जी के परिवार के सदस्यों के स्थान हैं और यह आप लोगों को पता होना चाहिए कि शिव जी की शिवलिंग पर किस भाग में किस सदस्य का स्थान है।

अगर आपको शिव जी के परिवार के किसी सदस्य की पूजन करनी है तो आपको अलग कहीं पर जाने की जरूरत नहीं हैं। आप शिव जी की शिवलिंग में ही शिव जी के पूरे परिवार को देख सकते हैं और वहीं पर पूजन भी कर सकते हैं।


रुद्राक्ष का पानी पीने के फायदे | 

नमस्कार दोस्तों आज हम आप लोगों को रुद्राक्ष के जल का महत्व बताने वाले हैं और रुद्राक्ष के पानी को पीने से क्या फायदे होते हैं वह भी हम आपको आज किस जानकारी में बताने वाले हैं।

सबसे पहले आपको यह समझना जरूरी है कि रुद्राक्ष क्या है?

सीधी भाषा में कहा जाए तो रुद्राक्ष भगवान भोलेनाथ का एक प्रतीक होता है जो कि भगवान शिव जी के आंसुओं से उत्पन्न हुआ था और रुद्राक्ष का वृक्ष होता है जिस वृक्ष में यह रुद्राक्ष उगते हैं।

आजकल रुद्राक्ष नकली भी आते रहते हैं तो इसीलिए आपको सबसे पहले असली रुद्राक्ष को चिन्हित करना पड़ेगा।

आप सभी लोग जानते हैं कि पंडित प्रदीप मिश्रा जी सीहोर वाले कमलेश्वर धाम में आपको रुद्राक्ष वितरित किए जाते हैं जिसका आपसे कोई शुल्क नहीं लिया जाता है वहां से जो व्यक्ति रुद्राक्ष लाता है वह और रुद्राक्ष पर आंख बंद करके भरोसा कर सकता है क्योंकि वह रुद्राक्ष पूरी तरीके से सिद्ध होते हैं।

मात्र रुद्राक्ष लाने से काम नहीं होता है आप कुछ रुद्राक्ष को सिद्ध करना होता है और कुबरी स्वर धाम का रुद्राक्ष सिद्ध किया हुआ ही आता है।

अगर आप कहीं से भी रुद्राक्ष ले रहे हैं तो सबसे पहले आप उस रुद्राक्ष को सिद्ध कर लीजिए। किसी भी रुद्राक्ष को सिद्ध करने के लिए आपको किसी ब्राह्मण जन से पूछ लेना चाहिए।

आपको किसी भी रात में एक कटोरी लेना है उस कटोरी में आपको जल भरना है उस जल के अंदर आपको यह रुद्राक्ष डाल देना है। इस रुद्राक्ष को आपको उसी कटोरी के जेल के अंदर पूरी रात रखना हैं। अगर आपको लगता है कि खुली हुई कटोरी सुरक्षित नहीं होगी तो आप चाहें तो उस कटोरी को ढक भी सकते हैं पर हल्का सा उस कटोरी को खुला भी रखिए।

पूरी रात उस रुद्राक्ष को पानी में रखने के बाद प्रातः काल सुबह सुबह उठना है। अगर आप चाहे तो उठते से ही सबसे पहले किसी और जल को ना पीते हुए इसी रुद्राक्ष के जल को पी सकते हैं। उस रुद्राक्ष की जल की कटोरी में से वह रुद्राक्ष निकाल कर रख दीजिए और उस पूरे जल को आप खुद भी सकते हैं और अपने पूरे घर में थोड़ा थोड़ा सभी सदस्यों को भी दे सकते हैं।

इसी स्थान पर अगर आप चाहे तो इस जल का और महत्व बढ़ा सकते हैं आपको यह रुद्राक्ष का जल भगवान भोलेनाथ की मंदिर प्रातः का सुबह-सुबह स्वच्छ होकर स्नान करके लेकर जाना है उसके बाद इस जल को आपको भगवान शिव जी पर चढ़ाना है उसी जल को चढ़ाने के बाद जो जलजला धारी से नीचे गिरेगा उसी जल को आपको वापस से चलकर अपनी कटोरिया पात्र में लेकर आना है इस जल को आप अपने घर लाइए और इस जल को आप खुद पीजिए और सबको पिलाएं।

रुद्राक्ष का पानी पीने के फायदे
आप लोगों ने रुद्राक्ष का पानी बनाना तो सीख लिया पर इस पानी को पीने के बाद आपको क्या फायदा होगा वह भी आप सुन लीजिए।

रुद्राक्ष का पानी पीने से हमारे शरीर में कभी कोई रोग बीमारी प्रवेश नहीं करती है।
अगर किसी को पहले से शरीर में कोई दिक्कत परेशानी है तो वह धीरे-धीरे करके ठीक हो जाती है।
रुद्राक्ष के पानी को आप अपने त्वचा या शरीर पर भी लगा सकते हैं जिससे कि आपकी त्वचा या शरीर पर अगर कोई रोग हो रहा हो तो वह ठीक हो जाता है।
इस रुद्राक्ष के पानी को पीने से आईसीयू में पड़ा हुआ व्यक्ति भी ठीक होकर बाहर आ जाता है।
रुद्राक्ष का पानी कोई भी पी सकता है।
दोस्तों हमने जो आपको रुद्राक्ष का जल बनाने का तरीका बताया है और जो रुद्राक्ष के फायदे बताएं हैं यह सारे पंडित प्रदीप मिश्रा जी द्वारा बताए गए हैं।

अगर आपको भी अपने शरीर में कोई रोग बीमारी परेशान कर रही है या आप लोग चाहते हैं कि आगे कभी आपके घर परिवार में कोई रोग बीमारी प्रवेश ना करें तो आप आज से ही रुद्राक्ष का जल अपने घर के सभी सदस्यों को देना शुरू कर दीजिए।

मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत के दिन करें जाने वाली सारे विशेष उपाय

नमस्कार दोस्तों आप सभी लोग जानते हैं मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत एक ही साथ, एक ही दिन पड़ रही हैं इसलिए इस दिन का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

हम आखिरी इसीलिए कह रहे हैं क्योंकि यह अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से साल की आखिरी शिवरात्रि और प्रदोष व्रत है अन्यथा हिंदू कैलेंडर के हिसाब से यह आखरी नहीं हैं।

हम जो आपको उपाय बताने वाले हैं वह masik shivratri और pradosh vrat दोनों के रहेंगे, तो आप अपने अनुसार अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी उपाय को कर सकते हैं।


सबसे पहला जो उपाय है वह आपके घर में धन संपदा को बढ़ाने के लिए है
दूसरा उपाय भगवान शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए है।
तीसरा उपाय मनोकामना पूर्ति का है।
चौथा उपाय अगर आपके घर में पैसा रुकता नहीं है टिकता नहीं है तो यह उपाय करें।
पांचवा उपाय आपके जीवन से दुख समस्याओं को दूर करने का है।
छठवां उपाय भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए है।
सातवां उपाय आपकी मनोकामना पूर्ति का है।
आठवां उपाय भगवान शिव जी से बिना बोले बहुत कुछ प्राप्त करने का है।
नवा उपाय आपकी मनोकामना पूर्ति का है।
दसवां उपाय सात धतूरे वाला रोग मुक्ति के लिए है।

सबसे पहला जो उपाय है वह आपके घर में धन संपदा को बढ़ाने के लिए है
इस उपाय में सबसे पहले आपको पांच बेलपत्री लेनी है पांच बेलपत्री में से चार बेलपत्री पर आपको पूरे में पीला चंदन लगाना है। एक बेलपत्री जो बचेगी उस पर आपको शुद्ध देसी गाय का घी लगाना है। अब इन पांचों बेलपत्री को कुछ इस प्रकार से जमाना है कि जो घी वाली बेलपत्री है वह बीचो-बीच आ जाए। मतलब पहले दो बेलपत्री आपको चंदन वाली रखनी है और उसके ऊपर घी वाली रखनी है फिर उसके ऊपर दो जो चंदन वाली है वो रखनी है इस प्रकार से पांच बेलपत्री जमा लेनी है।

अब यह जो काम है आपको 21 दिसंबर को प्रातः काल सुबह सुबह करना है और इन 5 बेलपत्र को आपको किसी एक कटोरी में या किसी बाटकी में रखकर अपने घर के रसोई घर में या अपने घर के पूजन घर में या जहां से व्यापार चलता हो उस स्थान पर जाकर रख देना है।

अब इस काम को आपको सुबह करना है और शाम के समय मतलब प्रदोष काल में आपको इस कटोरी की इन पांच बेलपत्र को उठाना जिस पात्र में भी आपने इन 5 बेलपत्र को रखा हुआ है वो पात्र को लेकर आपको शिवजी के मंदिर पहुंच जाना है। शिवजी के मंदिर पहुंचने के बाद इन पांचों बेलपत्र को आपको शिव जी की शिवलिंग के ऊपर समर्पित कर देना है। आप लोगो को यह पांच बेलपत्र एक साथ ही जैसी जमी हुई रखी हुई है ना वैसे ही आपको समर्पित करना है और कुंदकेश्वर महादेव के नाम के समय करते हुए पांचों बेलपत्र को शिवलिंग के ऊपर समर्पित कर दो और भगवान से प्रार्थना कर लो अपने घर में धन संपदा के लिए और भगवान से आशीर्वाद लेकर अपने घर वापस आ जाओ।

पहला उपाय पूरा हो जाता है इस उपाय को करने से आपके घर में धन संपदा लक्ष्मी जी की कभी कमी नहीं आएगी।

दूसरा उपाय भगवान शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए है।
यह उपाय बहुत ही आसान है और इस उपाय को करने से भगवान शिव जी का आपको आशीर्वाद प्राप्त होगा इस उपाय में आपको 21 दिसंबर के दिन प्रातः काल सुबह सुबह एक लोटा जल भर रहा है उसे एक लोटा जल के अंदर आपको थोड़ा सा पीला चंदन मतलब एक चुटकी पीला चंदन डाल देना है। इस एक लोटा जल को लेकर आपको जाना है शिव मंदिर में और इसे शिवजी के ऊपर चढ़ा देना है और भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त करना है।

इसके बाद आपको अपने घर से ही 108 चावल के दाने लेकर जाना है। 108 चावल के दाने टूटे हुए नहीं होना चाहिए पूरे आखा होना चाहिए मतलब पूरे पूरे होना चाहिए और शिव मंदिर पहुंचकर 108 चावल के दाने अपने सीधे हाथ की हथेली में रखकर भगवान शिव जी के शिवलिंग के ऊपर समर्पित कर दो अपनी मनोकामना को करते हुए।

इससे भगवान शिव आपकी मनोकामना पूर्ण करेंगे।

तीसरा उपाय मनोकामना पूर्ति का है।
इस उपाय को आपको 21 दिसंबर को शाम के समय मतलब प्रदोष काल में करना है। आपको एक लोटा लेना है उसमें थोड़ा सा जल भरना है उस जल के अंदर आपको एक बेलपत्री डालनी है अगर आपके पास पांच बेलपत्री है तो पांच डाल सकती है। उसके बाद एक शमी पत्र डालना है और कुछ हरे मूंग के दाने लेकर आपको उसी जल के अंदर डाल देना है। आखरी में आपको एक छोटा सा गुण का टुकड़ा लेना है उसे भी उस जल के अंदर डाल देना है और इस लौटे को लेकर आपको जाना है शिव मंदिर में प्रदोष काल में शिव मंदिर पहुंचकर इस लोटे को शिव जी की शिवलिंग के ऊपर उड़ेल देना है मतलब चढ़ा देना है और भगवान शिव जी से अपनी मनोकामना बोल देना है।

चौथा उपाय अगर आपके घर में पैसा रुकता नहीं है टिकता नहीं है तो यह उपाय करें।
यह उपाय आपको प्रातः काल सुबह-सुबह करना है इस उपाय में आपको एक लोटे के अंदर गंगाजल भरना है उस गंगाजल के अंदर आपको सात बेलपत्र डालना है। गंगाजल के अंदर सात बेलपत्री डालकर इसे शिवजी के मंदिर लेकर जाना है। शिवजी के मंदिर में जैसे ही प्रवेश करेंगे तो सबसे पहले शिव जी की शिवलिंग के सामने जो नंदी बाबा बैठे हुए होंगे और नंदी बाबा के चरणों में आपको इस गंगा के जल को समर्पित कर देना है बेलपत्री को नहीं चढ़ाना है। गंगा के जल को नंदी के चरणों में समर्पित करके शिवजी के पास आना है और अपने कलश से सातों बेलपत्र निकालकर शिवजी के ऊपर समर्पित कर देना है और भगवान से प्रार्थना करना है कि आपके घर में पैसा रुकने लगे।

अशोक सुंदरी का स्थान कहां पर हैं? शिवलिंग पर यह पांच स्थान जरूर देखें

पांचवा उपाय आपके जीवन से दुख समस्याओं को दूर करने का है।
यह उपाय आप अपने घर में भी कर सकते हैं और चाहे तो मंदिर जाकर भी कर सकते हैं इस उपाय में आपको एक घी के दीपक की जरूरत पड़ेगी। घी का दीपक लेकर उसमें आपको दो बाती रखनी है मतलब दो तरफ से आपको उस दीपक को जलाना है आप चाहे तो लंबी बातें भी रख सकते हैं चाहे गोल बातें भी रख सकते हैं पर दो जगह से आपको इस दीप को जलाना है बाती रखने के बाद आपको इसमें शुद्ध देसी गाय का घी डालना है और दीपक को तैयार करके आपको अपने घर के मंदिर में बैठ जाना है आप चाहे तो शिव मंदिर भी जा सकते हैं।

अब आपको इस दीपक कि दोनों बाती को जलाकर दारिद्र्य दुख दहन स्त्रोत का पाठ करना है अब यह पाठ की एक किताब आती है या आप इसे अपने मोबाइल में देख कर भी पढ़ सकते हैं।

छठवां उपाय भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए है।
इस उपाय में आपको एक सिद्ध रुद्राक्ष लेना है। उस रुद्राक्ष के ऊपर आपको पीला चंदन लपेटना है इतना लपेटना है कि वह रुद्राक्ष दिखना बंद हो जाए। रुद्राक्ष के ऊपर पीला चंदन लपेटने के बाद अपने साथ एक लोटा जल भरकर शिवजी के मंदिर पहुंच जाना है। आप सबसे पहले शिवलिंग के ऊपर आपको इस चंदन लगाए हुए रुद्राक्ष को रखना है शिवलिंग के ऊपर इस रुद्राक्ष को रखने के बाद इसी रुद्राक्ष के ऊपर शिवलिंग के ऊपर आपको एक धारा से थोड़ा-थोड़ा करके तन समर्पित करना है जिससे कि जो आपने रुद्राक्ष के ऊपर चंदन लगाया है वह चंदन घुलकर के शिवलिंग के ऊपर आता जाए। आपको जल जब तक चढ़ाना है जब तक वह पूरा चंदन रुद्राक्ष के ऊपर से ना निकल जाए। इससे आपके जीवन में आपको ही आनंद की प्राप्ति होगी।

सातवां उपाय आपकी मनोकामना पूर्ति का है।
इस उपाय में आपको एक शमीपत्र की जरूरत पड़ेगी एक शमीपत्र को लेकर उस पर आपको हल्दी लगाना है और इसे शाम के समय मतलब प्रदोष काल में या तो रात्रि के 9:00 बजे के बाद आपको इसे शिव मंदिर जाकर शिवलिंग के ऊपर समर्पित करना है अपनी मनोकामना को करते हुए।

आठवां उपाय भगवान शिव जी से बिना बोले बहुत कुछ प्राप्त करने का है।
इस उपाय में आपको सफेद फूलों की आवश्यकता होगी मतलब आपको इस दिन सफेद फूल तोड़कर या खरीद कर लाना है और सफेद फूलों की पंखुड़ियों को तोड़कर इकट्ठा कर लेना है पंखुड़ियों को तोड़कर आपको 21 दिसंबर को शाम के समय शिवजी के मंदिर जाना है और इन सफेद फूलों की पंखुड़ियों से आपको शिव जी की शिवलिंग का पूरा शृंगार करना है जैसे की शिव जी की शिवलिंग, जलाधारी और शिव जी के आस पास की पूरी जगह का आपको श्रंगार करना है, सजा देना है इसमें आपको भगवान शिव जी की चौखट पर 2 मिनट बैठना है भगवान शिव जी के मंत्र का जाप करना है और भगवान शिव जी से आशीर्वाद लेकर अपने घर वापस आ जाना है। इस उपाय को करने से आपको भगवान शिव बिना मांगे बहुत कुछ दे देंगे।

नवा उपाय आपकी मनोकामना पूर्ति का है।
इस उपाय में आपको 21 दिसंबर के दिन प्रातः काल सुबह सुबह जब अपनी शिव जी की पूजन करने के लिए जाएंगे तो उस समय आपको अपने घर से एक काली मिर्ची और साथ काली तिल के दाने को लेकर जाना है और शिव मंदिर पहुंचकर अपने सीधे हाथ की हथेली में एक काली मिर्ची और 7 खाली दिल के दानों को रखकर अपनी मनोकामना को मन ही मन बोलकर भगवान शिव जी की शिवलिंग के ऊपर इन दोनों चीजों को समर्पित कर देना है और भगवान से आशीर्वाद प्राप्त कर लेना है।

दसवां उपाय सात धतूरे वाला रोग मुक्ति के लिए है।
इस उपाय में आपको साथ धतूरे की जरूरत पड़ेगी साथ धतूरे को अपने घर लाकर इन सातों धतूरा पर आपको यह सामग्री लगानी है।

सबसे पहले वाले धतूरे पर आपको मौली लपेट लेना है मतलब जो लाल धागा आता है उसे लपेटना है। जब आप इस तरह की को लपेट रहे हो तो चंद्रमोली महादेव का नाम का स्मरण करना है।

अब दूसरे से लेकर सातवें वाले नंबर के धतूरे के ऊपर आपको हल्दी लपेट नहीं है।

अब इन सातों धतूरे को लेकर आपको शिव मंदिर पहुंचना है और शिव जी की शिवलिंग के ऊपर साथ धतूर को अलग-अलग स्थानों पर समर्पित करना है।

सबसे पहला जो धतूरा रहेगा जिस पर आपने मूली लपेटी है उसको आपको शिवलिंग के ऊपर समर्पित करना है।

दूसरा हल्दी लगा हुआ धतूरा आपको जलाधारी के ऊपर गणेश जी वाले स्थान पर समर्पित करना है।

तीसरा हल्दी लगा हुआ धतूरा आपको जलाधारी के ऊपर कार्तिके जी के स्थान पर समर्पित करना है।

चौथा हल्दी लगा हुआ धतूरा आपको जलाधारी के बीचों-बीच अशोक सुंदरी वाले स्थान पर समर्पित करना है।

पांचवा हल्दी लगा हुआ धतूरा आपको मां जगदंबा के हस्त कमल मतलब जलाधारी के ऊपर ही शिवजी के कटी भाग के पास में समर्पित करना है।

छठवां धतूरा आपको शिवजी के पांच बेटियों का नाम लेकर जया, विषहरा, शामली वारी, दओतली और देव का नाम लेकर इसे जलाधारी पर ही समर्पित करना है।

सातवा धतूरा जलाधारी की बिल्कुल आखरी कोने पर समर्पित करना है जहां से जल नीचे गिरता है इस धतूरे को आपको नीचे नहीं रखना है जहां से जल गिरता है उस स्थान के आखिरी कोने पर रखना है।

अब आपको एक से 2 मिनट भगवान शिव जी की शिवलिंग के आस-पास बैठकर भगवान शिव जी का ध्यान करना है।

उसके बाद आपको सभी धतूरे को चढ़े रहने देना है। आखरी वाला जो सातवें नंबर का धातूरा है जो आपने जलाधारी के बिल्कुल आखरी कोने पर समर्पित किया था इस धतूरे को आपको अवधूतेश्वर महादेव के नाम का स्मरण करते हुए उठा लेना है उठाकर अपने घर आ जाना है।

अब इस सातवें वाले धतूरे को आपको उस व्यक्ति से स्पर्श कराना है जिसके ऊपर बहुत बड़ी रोग बीमारी हो अगर खुद के लिए कर रहे हैं तो खुद से इस दूरी को स्पर्श करा लीजिए या तो उस व्यक्ति के ऊपर से इसे एक बार घुमा लीजिए और इस धतूरे को रोगी व्यक्ति या बीमार व्यक्ति से स्पर्श कराने के बाद किसी भी बड़े वाले बेलपत्र के वृक्ष के नीचे जाइए और उस वृक्ष के नीचे इस धतूरे को छोड़ कर आ जाइए और बेलपत्र के वृक्ष के नीचे ही आपको भगवान से रोग मुक्ति के लिए प्रार्थना कर लेना है।

यहां पर यह उपाय पूरा हो जाता है।

यह सारे उपाय 21 दिसंबर जिस दिन शिवरात्रि और प्रदोष व्रत एक साथ पड़ रहा है उस दिन के हैं। इन उपायों में से आप अपनी इच्छा अनुसार कोई भी उपाय कर सकते हैं।

यह उपाय शिव महापुराण कथा में लिखे हुए हैं इसीलिए यह पूरी जानकारी वहीं से ली गई है।

प्रदीप मिश्रा जी का सात लौटे जल वाला उपाय कैसे करें

आप लोगों ने पंडित प्रदीप मिश्रा जी का साथ लौटे जल वाला उपाय जरूर सुना होगा पर कुछ लोगों को यह उपाय समझ नहीं आया होगा कुछ लोगों को आ भी गया होगा आज किस जानकारी में हम आपको साथ लौटे जल वाला उपाय बहुत ही आसान शब्दों में अच्छे से समझाने वाले हैं और इस उपाय को करने से क्या फायदे होते हैं क्या नहीं होते हैं सारी जानकारी आपको हमारी जानकारी के अंदर मिलने वाली है।

यह उपाय तब किया जाता है जब आपने पशुपतिनाथ का व्रत कर लिया हो आपने सभी तरह के उपाय करके देख लिए हो, सभी तरीके के व्रत करके देख लिए हो तब भी वह आपकी कामना या कोई दुख समस्या समाप्त नहीं हो रही हो, सब जगह से हारने के बाद ही आपको यह उपाय करना है तभी ये उपाय काम करेगा।

यह उपाय आप किसी भी दिन कर सकते हैं और प्रातः काल सुबह-सुबह शिव मंदिर जाकर ही आपको इस उपाय को करना है।

इस उपाय में आपको एक बेलपत्री और एक बाल्टी जल की आवश्यकता होगी क्योंकि आपको एक बाल्टी जल में से सात लोटे जल की भी आवश्यकता होगी।

यह दोनों चीजें लेकर आपको शिवजी के मंदिर पहुंचना है शिवजी के मंदिर जाकर 1 से 2 मिनट बैठकर शिवजी को निहारना है उसके बाद ही इस उपाय को भरना है।

सबसे पहले आप अपने साथ जो एक बेलपत्री लेकर आए हैं उस बेल पत्री को आपको शिवलिंग के ऊपर अशोक सुंदरी का जो स्थान होता है उस स्थान पर समर्पित करना है बेलपत्री की डंडी का मुख जलाधारी की ओर करके जहां से जल नीचे गिरता है।

अशोक सुंदरी का स्थान शिवलिंग की जलाधारी के ऊपर बिल्कुल बीचो-बीच होता है जो कि आप दिखाई गई तस्वीर में देख सकते हैं।

इस बेल पत्री को जवाब अशोक सुंदरी वाले स्थान पर समर्पित करेंगे तो उस समय पर आपको उस बेलपत्र की डंडी का मुख होगा वह जलाधारी की ओर करके रखना है जहां सेजल नीचे गिरता है इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखिएगा।

इस बेलपत्र को अशोक सुंदरी वाले स्थान पर 2 मिनट तक रखे रहने देना है उसके बाद आपको इस बेलपत्र को अशोक सुंदरी वाली स्थान से उठाकर शिवलिंग के ऊपर समर्पित कर देना है।

अब यहां पर भी आपको बेलपत्र कुछ इस प्रकार से समर्पित करना है कि जो बेलपत्र की डंडी का मुख होगा वह आप के विपरीत हो आप जिस तरफ से बेलपत्री समर्पित कर रहे होंगे। आपकी उस तरफ डंडी ना होकर आपके सामने की ओर डंडी होना चाहिए मतलब शिवलिंग के पीछे वह डंडी जाना चाहिए और जो बेलपत्र की बीच वाली बड़ी पत्ती का मुख होगा वह आपकी तरफ होना चाहिए। इस प्रकार से आपको शिवलिंग के ऊपर इस बेलपत्र को समर्पित करना है।

इस बेलपत्र को शिवलिंग के ऊपर समर्पित करने के बाद आपको अपनी एक बाल्टी जो आप अपने साथ लेकर आए हैं उस बाल्टी में से एक-एक लोटा जल भरकर सात बार आपको शिवलिंग के ऊपर भगवान शिव के नाम का स्मरण करते हुए या श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का जाप करते हुए या शिवजी का कोई भी एक मंत्र का जाप करते हुए आपको 7 बार एक ही लौटे से 7 लोटा जल इसी बेलपत्र के ऊपर शिवलिंग के ऊपर समर्पित कर देना है।

अब आपको कुछ समय तक इस बेलपत्र को शिवलिंग के ऊपर चढ़े रहने देना है। उसके बाद आपको इस बेलपत्र को उठाकर अपने घर वापस लाना है अपने घर लाने के बाद इस बेलपत्र को किसी भी शुद्ध स्थान पर अपने घर के मंदिर में या कहीं पर भी अच्छे स्थान पर इसे रख दीजिए। इस बेलपत्र को आपको अपने घर पर 11 दिन रखना है या तो 21 दिन रखना है इन दोनों में से आप कोई भी एक क्रम को चुनकर वह रख सकते हैं।

11 या 21 दिन इस बेलपत्र को अपने घर में रखने के बाद आपको इस बेलपत्र को ले जाकर किसी भी बहती हुई नदी, बावड़ी या तालाब में जाकर इसे विसर्जित कर देना है और विसर्जित करते समय आपको भगवान से अपनी मन की कामना बोल देना है जिसके लिए आप यह उपाय कर रहे हैं।

यदि आप किसी नदी बावरिया तालाब में जाकर इस बेलपत्र को विसर्जित नहीं कर पा रहे हैं तो आप किसी भी वृक्ष के नीचे जाकर इस बेलपत्र को वहां पर छोड़कर समर्पित कर कर आ सकते हैं और जिस समय आप इस बेलपत्री को समर्पित कर रहे हो उस समय आपको भगवान शिव से अपनी मन की कामना बोलना है जिसके लिए आपने यह उपाय किया है वह काम आप को भगवान शिव से बोल रहा है।

इस उपाय को कोई भी व्यक्ति कर सकता है जो बहुत परेशान हो चुका है सब काम करके देख लिए पर जब भी आपकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है तो एक बार साथ लौटे जल वाला उपाय जरूर करके देखें यह उपाय पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने अपनी शिव महापुराण कथा में बताया है।

इस उपाय को करने में आपको कोई भी असुविधा होती है या आपके मन में कोई प्रश्न आता है या कोई बात समझ नहीं आती है तो उसे आप हमसे कमेंट करके पूछ सकते हैं आपको उसका जवाब मिल जाएगा।

सोमवती अमावस्या को काली तिल का यह उपाय जरूर करें। पैसा खुद चलकर आएगा।

यह बात आप सभी लोग जानते हैं कि सोमवती अमावस्या का जो दिन होता है वह बहुत ही ज्यादा शुभ होता है बहुत ही ज्यादा अच्छा होता है और यह दिन बार-बार भी नहीं आता है।

अभी कि जो सोमवती अमावस्या पड़ रही है वह 31 मई 2022 को पड़ रही है यह सोमवती अमावस्या को सोमवती अमावस की इसलिए कहते हैं क्योंकि यह सोमवार को पड़ती है।

सोमवती अमावस्या का व्रत जो महिलाएं करती हैं उनके पतियों के ऊपर कभी भी कोई दुख समस्या नहीं आती है।

इस सोमवती अमावस्या को आप एक ऐसा उपाय कर सकते हैं जिस उपाय को करने से अगर आपने किसी को पैसा उधार दिया होगा और आपका वह पैसा आपको लौटा नहीं रहा है 3% बहाने बनाता जा रहा है पर वह आपका पैसा नहीं लौटा रहा है या आपका कहीं पर बड़ा पैसा फंसा हुआ है आपका वह पैसा आपको मिल नहीं पा रहा है तो उसके लिए सोमवती अमावस्या का आपकी है उपाय कर सकते हैं निश्चित ही आपको जो पैसा फसा हुआ होगा जिसकी जगह पर वह पैसा आपके पास खुद चल कर आएगा।

सोमवती अमावस्या का यह उपाय आपको सोमवती अमावस्या की 1 दिन पहले से रात के समय शुरु करना होगा। सोमवती अमावस्या की 1 दिन पहले वाली रात्रि को आपको थोड़ी सी काली तिल लेना है उसका लिटिल को आपको किसी भी एक पात्र में पानी डालकर गलाकर रख देना है।

उस काली तिल को आपको पूरी रात गला कर रख देना है सुबह सोमवती अमावस्या के दिन आपको उस काली दिल को उस जल के पात्र में से निकालना है और उसका लिटिल को आपको किसी भी चीज से पीस लेना है बस याद रखिए कि जो मिक्सर होता है उससे आपको इस कार्यक्रम को नहीं भेजता है अपने हाथों से परिश्रम करके किसी भी चीज से उसे पीसना है।

इस काली तिल को पीसने के बाद अब आपको इस काली तिल को किसी भी एक कटोरी में रख लेना है कटोरी में रखने के बाद आपको पीला चंदन निकालना है। अपने हिसाब से अनुमान लगाकर पीला चंदन उस काली तिल के अंदर आपको डालना है और मिला देना है।

अब आपको सोमवती अमावस्या के दिन सुबह ही इस कटोरी मेंपिसी हुई काली तिल और पीला चंदन मिलाकर तैयार कर लें उसके बाद साथ बेलपत्र अपने साथ रखने साथ नहीं तो 5 बेलपत्र भी आप अपने साथ रख सकते हैं उसके बाद एक लोटा लीजिए उस लोटे के अंदर आपको पानी और जल का मिश्रण डालना है मतलब पानी भी उसी जल पात्र के अंदर होना चाहिए और दूध भी उसी पात्र में होना चाहिए तो पानी और दूध को मिलाकर आपको उस लोटे के अंदर भर लेना है।

पिसी हुई काली तिल और पीले चंदन की कटोरी पांच या सात बेलपत्र और एक लोटा दूध और जल का मिश्रण को लेकर आपको सोमवती अमावस्या के दिन सुबह सुबह शिव जी के मंदिर जाना है।

शिवजी के मंदिर जाने के बाद शिवलिंग के सामने जाइए वहां पर बैठी है और जो आप अपने साथ एक कटोरी ले कर गए हैं जिसमें आपने पिसी हुई काली तिल और पीले चंदन का मिश्रण बना कर लाए हैं उस मिश्रण से आपको शिवलिंग के ऊपर पूरे में लेपन करना है।

शिवलिंग के ऊपर पूरे में लेपन करने का तात्पर्य यह है कि आपको शिवलिंग के ऊपर पूरे पिसी हुई काली तिल और जो पीला चंदन है उसका पूरा मिश्रण का जो लेपन है वह आपको शिवलिंग के ऊपर भी करना है और जलाधारी के ऊपर भी करना है जलाधारी के ऊपर जो अशोक सुंदरी का स्थान होता है उस जगह पर तो विशेष रूप से करना ही है।

इसलिए अपने को पूरे शिवलिंग के ऊपर लेपन करने के बाद आपको अपनी तीन उंगली लेनी है जिससे कि आपको त्रिपुंड बनाना है और त्रिपुंड आपको अपनी तीनों उंगलियों में कुछ भी लेकर नहीं बनाना है बस अपनी तीनों उंगली सीधे हाथ की हथेली की लेनी है और उसे शिवलिंग के ऊपर फेंर देना है जिससे कि वह त्रिपुंड बन जाएगा। उसी लेपन के ऊपर जो आपने किया है उसी लेपन के ऊपर आपको तीन लाइन खीच देनी है जिससे कि वह त्रिपुंड बन जाएगा।

त्रिपुंड बनाने के बाद आप जो अपने साथ पांच या सात बेलपत्र लेकर गए हैं उन बेलपत्र को शिवलिंग के ऊपर समर्पित करना है बेलपत्र को समर्पित करने के बाद आपको आखरी में जो आप अपने साथ एक लोटा जल और दूध का मिश्रण लेकर गए हैं इस एक लोटा जल और दूध के मिश्रण को आपको शिवलिंग के ऊपर उन्हीं बेलपत्र के ऊपर जो आपने चढ़ाई है समर्पित कर देना है।।

बेलपत्र चढ़ाने के बाद उन्हीं बेलपत्र के ऊपर आपको इस एक लोटा जल और दूध के मिश्रण को समर्पित करना है। समर्पित करने के बाद आपको भगवान से हाथ जोड़कर विनती करना है और भगवान को बताना है कि भगवान हमारा इतना पैसा है जो कि इस जगह फंसा हुआ है आप अपनी कृपा कीजिए जिससे कि हमारा यह पैसा हमें वापस मिल जाए। भगवान से ऐसी विनती करके आप अपने घर आ सकते हैं।

यह उपाय सिर्फ सोमवती अमावस्या के दिन का ही है और इस उपाय को आप विशेष कर सुबह के समय करें अगर किसी कारणवश सुबह के समय यह उपाय नहीं कर पाते हैं तो आप प्रदोष काल में भी इस उपाय को कर सकते हैं।


शिवजी को 4 तरीके से धतूरा जरुर चढ़ाएं? 

यह बात तो आप लोग जानते ही होंगे कि शिवजी को धतूरा भी चढ़ाया जाता है और शिव जी को धतूरा चढ़ाने से भगवान शिव हमसे प्रसन्न होते हैं और हमारी मनोकामना को भी पूरा करते हैंपर क्या आप जानते हैं कि धतूरे को अगर इन 4 तरीकों से चढ़ाया जाए तो भगवान हमारी अलग अलग मनोकामना को पूरा करते हैं और हमारे दुखों को दूर करते हैं।

आइए जानते हैं कि कौन सी चार ऐसे तरीके हैं जिसको देखते हुए अगर आप धतूरे को शिवलिंग के ऊपर समर्पित करते हैं तो आपको क्या-क्या मिल सकता है।

सबसे पहले धतूरे की बात कर रहे हैं तो यहां पर इन उपायों में हम कांटे वाला जो धतूरा होता है उसका उपयोग करने वाले हैं।

अगर आप लोग एक धतूरे को हल्दी में डुबोकर शिव जी को समर्पित करते हैं तो इससे आपके घर में धन वृद्धि होती है मतलब आपके घर में लक्ष्मी हमेशा प्रसन्न होती है आपके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।

यह धतूरा का उपाय धन की वृद्धि के लिए है।

अगर एक धतूरे को आप चंदन में डुबोकर शिव जी को समर्पित करते हैं तो इससे आपकी आयु बढ़ती है। जो भी व्यक्ति इस धतूरे को चंदन में डुबोकर शिवलिंग के ऊपर समर्पित करता है उसकी आयु भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से बढ़ती जाती है।

यह धतूरे का उपाय आयु की वृद्धि के लिए है।

अगर एक धतूरे को आप अभीर में डुबोकर शिवजी को चाहते हैं तो इससे आपको कभी भी कोई लोग नहीं हो सकता आप हमेशा रोग मुक्त रहेंगे। यह धतूरा अभीर में डुबोकर रोग मुक्ति के लिए चढ़ाया जाता है।

अब अगर आपके घर में कोई बड़ा रोग है कोई हमेशा बीमार रहता है जिस की तबीयत हमेशा खराब रहती है तो उसके लिए एक विशेष उपाय है जो कि आपको धतूरे से ही करना है।

इस उपाय को करने के लिए सबसे पहले आपको किसी भी बड़े बेलपत्र के वृक्ष के नीचे जाना होगा वहां पर जाकर एक मिट्टी के शिवलिंग का निर्माण करना होगा। निर्माण करने के बाद आपको एक सादा धतूरा लेना है उस धतूरे को आपको शिव जी की शिवलिंग के ऊपर समर्पित करना है जो आपने अपने हाथों से बनाई है। बेलपत्र के वृक्ष के नीचे बैठकर उस बेलपत्र के वृक्ष के नीचे बैठकर ही आपको इस अधूरे को उस शिवलिंग के ऊपर समर्पित करना है।

यह जो धतूरा आप इस उपाय के लिए चढ़ाएंगे इस ससुरे में आपको कुछ भी नहीं लगाना है पेड़ से तोड़कर जैसा धतूरा आएगा वैसा का वैसा ही आपको शिव जी को समर्पित करना है।

यह वह 4 तरीके थे जिन तरीकों से अगर आप शिवजी को धतूरा समर्पित करते हैं तो भगवान भोलेनाथ आपकी रक्षा करते हैं और आपके ऊपर अपना आशीर्वाद रखते हैं।

शिव जी को धतूरा चढ़ाया जाता है वह किसी विशेष दिन पर ही चढ़ाया जाता है अगर आप इन उपायों को किसी विशेष दिन पर करेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा आपको फल बहुत जल्दी मिलेगा।

विशेष दिन कहने से मतलब है कि किसी भी सोमवार को प्रदोष को या शिवरात्रि को आप इस पूरे को चढ़ा सकते हैं या आपके लिए कोई विशेष दिन हो तो आप उस दिन भी धतूरे को शिवलिंग के ऊपर समर्पित कर सकते हैं।


पशुपति व्रत करने की पूरी विधि और नियम पशुपति व्रत का फल कब मिलता है

आज हम आप लोगों को पशुपति व्रत की पूरी जानकारी देने वाले हैं कि पशुपति व्रत कब करना चाहिए पशुपति व्रत कैसे किया जाता है पशुपति व्रत करने के फायदे क्या क्या होते हैं और इससे हमें क्या क्या मिलता है तो अगर आप लोग भी पशुपति व्रत करने का सोच रहे हैं पर आपको नियम और विधि नहीं पता है तो आज की हमारी यह जानकारी आप अंत तक जरूर पढ़ें इससे आपको बहुत कुछ सीखने और जानने को मिलेगा और आप आसानी से पशुपति व्रत को धारण कर पाएंगे।

पशुपतिनाथ व्रत क्या है?
पशुपतिनाथ व्रत कौन-कौन कर सकता है?
पशुपति व्रत करने की पूरी विधि और नियम?
पशुपतिनाथ व्रत का समापन कैसे होता है?
पशुपतिनाथ व्रत क्या है?
पशुपतिनाथ का व्रत भोलेनाथ का ही व्रत है जो कि 5 सोमवार का व्रत होता है इस व्रत को आप किसी भी सोमवार से शुरू कर सकते हैं। अगर आपने निरंतर 5 सोमवार तक पूरे विधि और विधान से इस व्रत को धारण करके भगवान शिव की पूजा और आराधना की और जिस मनोकामना से आप इस व्रत को कर रहे होंगे वह मनोकामना निश्चित ही भगवान भोलेनाथ आपकी पूरी अवश्य करेंगे।

पशुपतिनाथ व्रत कौन-कौन कर सकता है?
पशुपतिनाथ का व्रत स्त्री या पुरुष कोई भी कर सकता है।

पशुपति व्रत करने की पूरी विधि और नियम?
जो भी व्यक्ति स्त्री या पुरुष पशुपति व्रत को धारण कर रहे हैं उन्हें कुछ विधि और नियमों का पालन करना चाहिए।

सबसे पहले पशुपति व्रत आप किसी भी सोमवार से शुरू कर सकते हैं और यह व्रत सर सोमवार को ही रखा जाता है।

अब आपको किसी भी सोमवार के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में या उसके बाद उठना है स्नान अधिक करना है शुद्ध वस्त्र पहनना है उसके बाद आपको अपने घर में भगवान की पूजा करना है।

उसके बाद आपको भगवान शिव जी की शिवलिंग के लिए एक थाली को तैयार करना है जिसमें रोली, कुमकुम, चंदन, बेलपत्र शमी पत्र जो भी शिवलिंग पर चढ़ाने हेतु सामग्री आप पूजा के समय रखती हैं वह सभी एक थाली में तैयार कर रख लीजिए।

अब एक लोटा जल भरकर और उस थाली को तैयार कर आप शिवजी के मंदिर में जाइए और शिवलिंग के ऊपर जल समर्पित कीजिए और जो आप अपनी थाली में शिवजी के श्रृंगार के लिए जो भी सामग्री लेकर गई हैं उससे शिव जी का श्रृगार कर दीजिए।

सुबह के समय आपको सिर्फ शिव जी की शिवलिंग का जल से अभिषेक करना है और अपनी थाली में शिवलिंग के ऊपरसमर्पित करने के लिए कुछ सामग्री ले जाना है इसके बाद आपको अपनी थाली को और जल के लोटे को वापस अपने घर ले आना है।

अब सुबह की पूजन करने के कुछ समय बाद आप फलाहार ग्रहण कर सकते हैं क्योंकि इस व्रत में दो बार नमक खा सकते हैं।

फलाहार करने के बाद आप दिनभर भगवान शिव का भजन कीर्तन कर सकते हैं।

अब इस व्रत का मुख्य भाग आता है जोकि प्रदोष काल होता है।प्रदोष काल वह काल होता है जब शाम का समय होता है जब रात होने वाली होती है और शाम हो चुकी होती है उसके बीच का जो समय होता है वह प्रदोष काल कहलाता है।

अब आपको शाम की पूजा करना है शाम की पूजा में आपको वही थाली का प्रयोग करना है जिस थाली का प्रयोग अपने स्वभाव पूजन के समय किया था। उसी थालीमैं आपको भगवान शिव के लिए शाम की पूजा के लिए सामग्रियां रखनी है थाली को नहीं बदलना है इस व्रत में उस थाली का भी बड़ा महत्व है।

अब आपको उस थाली में शिवजी के लिए जो भी आप पूजन की सामग्री रखती हैं वह रख लीजिए साथ ही मैं आपको शाम के समय कुछ मीठे में भोग के लिए बनाना है वह मीठा हलवा खीर कुछ भी हो सकता है बस इतना ध्यान रखिए कि जो भी आप मीठे में बना रहे हैं उसके आपको तीन हिस्से करना है तो उसी हिसाब से आप बनाइए।

उस मीठे के बुक का आपको तीन हिस्सा कर लेना है तीन कागज ले लीजिए अलग-अलग कागज में थोड़ा-थोड़ा मीठे का बुक रखी है और उन्हें बांध लीजिए तीन हिस्से करने के बाद आपको उन तीनों हिस्सों को अपनी उसी थाली में रख लेना है।

अब आपको आटे के 6 दिए बनाना है। जो कि आपको गोल्फ आती के बनाना है और उन्हें भी से चलाना है। मतलब वह दी है कि के होने चाहिए पर आप को जलाकर नहीं ले जाना है।

अब यह सभी पूजन सामग्री मीठा हो छह आटे के दिए आपको उसी थाली में रख लेना है जिस थाली को आप सुबह पूजन करने के लिए ले गए थे उसी थाली में अब आपको यह सभी सामग्री रख लेना है बिना धोए हुए।

अब आपको शिवजी के मंदिर में जाना है शिवजी के मंदिर में जाने के बाद अगर आप लोगों को शिव जी की शिवलिंग का जल से अभिषेक कर रहे हैं तो वह भी कर सकते हैं अन्यथा कोई दिक्कत नहीं है आप शिव जी की पूजन श्रृंगार कर सकते हैं।

अब आपकी थाली में जो आटे के 6 दिए रखे हुए हैं उनमें से आपको पांच दियो को जलाना है। पांच दिए जलाते हुए आपको उस समय जब आप यह 5 दिए शिवजी के सामने रख रहे होउस समय आपको अपनी मनोकामना को अपने मन में सोचना है भगवान भोलेनाथ से वह मनोकामना बोलना है जिस मनोकामना से आप इस व्रत को शुरू कर रहे हैं यह काम आपको पहले सोमवार के व्रत के दिन ही करना है।

5 दिए जलाने के बाद एक दिया आपको अपनी थाली में बचा कर रखना है उसे जलाना नहीं है अब आपको भगवान शिव को मीठे का भोग लगाना है जो आप भोग का तीन हिस्से बना कर लाए हैं उसमें से दो हिस्से उठाएं और भगवान शिव जी की शिवलिंग के सामने या आसपास उन्हें खोल कर रख देऔर एक हिस्सा प्रसाद का आपको अपनी थाली में रखे रहने देना है उसे आप को घर लेकर जाना है।

अब आपको शिव जी से प्रार्थना करना है उनके पास थोड़ा बैठना है उनकी भक्ति आराधना करना है।

जैसे ही आप की पूजन पूरी हो जाए आपको अपने घर वापस आना है और बचे हुए एक दिए को लेकर और प्रसाद का एक भाग को लेकर वापस आना है।

जब आप अपने घर के मुख्य द्वार के सामने आ जाए तो उस समय अब आपको अपने घर के अंदर नहीं घुसता है उससे पहले आपको अपने घर के सीधे हाथ पर एक दिया लगाना है वह दिया आपकी थाली में ही जो आप बचा कर लाए हैं एक आटे का घी का दिया उसी को अपने घर के मुख्य द्वार के सीधे हाथ पर लगा दे। मुख्य द्वार का सीधा हाथ आपको बाहर की ओर से देखना है।

जब आप यह दिया आपने मुख्य द्वार पर लगा रहे हो तो उस समय आपको वापस से अपनी वही मनोकामना बोली हैं जिस मनोकामना के लिए आप यह पशुपति व्रत कर रहे हैं भगवान से विनती करते हुए आपको उस दिए को प्रलित करना है।

अब जैसे ही आप अपना वह दिया लगा दें अपने घर के मुख्य द्वार के सीधे हाथ की तरफ उसके बाद आपको अपने घर के अंदर प्रवेश करना है उसके पहले ध्यान रखिए कि आपने जो दिया जलाया है वह मुझे ना किसी भी तरह से तो इसलिए आपको समय उसी जगह पर या अपने घर के अंदर बैठ जाए उसे देखते रहे जब तक वह पूरा ना जल जाए जैसे ही वह चल जाए आप अपने घर में अपने कामों को कर सकते हैं।

अब जैसे ही आप अपने घर में प्रवेश कर जाते हैं तो आप शाम की समय अब भोजन बना सकते हैं और सब ग्रहण भी कर सकते हैं पर भोजन ग्रहण करने से पहले आप अपनी पूजन की थाली में एक प्रसाद का भाग बचा कर लाए हैं आपको उस भाग को सबसे पहले खाना है मंदिर से आने के बाद कहने का तात्पर्य है कि आप जब रात का भोजन कर रहे हो तो उससे पहले आपको इस बचे हुए 1 भाग को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना है और ध्यान रखिए यह प्रसाद कोई और ना खाएं यह प्रसाद सिर्फ आपका ही रहेगा।

इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद आप अपने रात का भोजन खा सकते हैं।

शाम की पूजा आप प्रदोष काल में भी कर सकते हैं प्रदोष काल के बाद भी कर सकते हैं इसमें कोई भी परेशानी नहीं है।

पशुपति व्रत से होता क्या है?

पशुपति व्रत करने वाले लोगों की मनचाही मनोकामना पूरी होती है।

अगर इस व्रत को पूरी श्रद्धा भाव और मन से किया जाए तो आपकी वह मनोकामना जिस मनोकामना के लिए आप पशुपतिनाथ व्रत कर रहे हैं वह मनोकामना आपकी पहले या दूसरे सोमवार में ही पूरी होना शुरू हो जाती है।

पशुपतिनाथ व्रत का समापन कैसे होता है?
पशुपतिनाथ व्रत पूरे 5 सोमवार रखा जाता है और जब आपके पूरे 5 सोमवार हो जाते हैं तो उसके बाद आपका जो भी पांचवा सोमवार होता है उसमें आपको इस व्रत को शाम के समय समापन करना पड़ता है अपनी पूजन को करने के बाद आप इस व्रत का समापन कर सकते हैं।

पशुपतिनाथ व्रत का समापन करने के लिए आपको 108 ऐसी सामग्रियों की जरूरत पड़ती है जो की शिव जी की शिवलिंग के ऊपर समर्पित होती हैं कोई भी एक सामग्री जैसे कि चावल बेलपत्र फूल आदि कोई भी सामग्री जोगी शिव जी की शिवलिंग को समर्पित होती है उनमें से कोई भी एक सामग्री जो आपको मिल जाए वह आप 108 रख लीजिए जिस दिन भी आप का पांचवा सोमवार हो और आपको समापन करना हो।

108 कोई भी सामग्री जैसे चावल लेने के बाद आपको एक श्रीफल लेना है और ₹11 अपने साथ रख कर मंदिर जाना है।

उसके बाद आपको शिव जी की शिवलिंग के ऊपर 108 चावल के दाने यह जो भी आप सामग्री लेकर गए हैं वह एक-एक करके या एक साथ समर्पित करना है और एक श्रीफल समर्पित करना है और ₹11 जो है शिवजी के आपको जो है ऊपर नहीं रखना है आस पास रख दीजिए या पास में रख दीजिए शिव जी की शिवलिंग के ऊपर ₹11 मत रखिएगा आपको यह क्या रुपए शिवजी के सामने आस पास रखना है।

जैसे ही आप 108 सामग्री वाला पूरा समापन का काम कर ले उसके बाद आप भगवान से प्रार्थना करके कि हे भगवान हमने पशुपतिनाथ व्रत के पूरे सोमवार के व्रत कर लिए हैं अब आपकी कृपा हम पर ऐसे ही बनाए रखिएगा ऐसी आपको प्रार्थना भगवान शिव भोलेनाथ से करनी है।

यहां पर यह पशुपतिनाथ का व्रत समापन के साथ पूरा हो जाता है।

सोमवार का अचूक उपाय, मनचाही मनोकामना होगी 2 से 3 सोमवार में पूरी हो जाएगी।

अगर आप लोगों की जिंदगी में कोई ऐसी समस्या है जिससे आप लोग बहुत ज्यादा परेशान हैं आपको लगता है कि यह बहुत बड़ी परेशानी है और नहीं समझ पा रही है आपको उसका कोई रास्ता नहीं मिल रहा है आप उस परेशानी से बहुत ज्यादा दिक्कत में आ रहे हैं तो उस समय आपको भगवान शिव भोलेनाथ का एक अचूक उपाय करना चाहिए क्योंकि सिर्फ सोमवार को ही करना है और इस उपाय को सिर्फ दो से तीन सोमवार तक करना है उसी के बीच आपको आपकी उपाय का फल मिल जाएगा आपकी जो भी मनोकामना होगी जिस काम के लिए आप इस उपाय को कर रहे होंगे वह आपकी पूर्ण रूप से पूरी हो जाएगी।

आपको एक बेलपत्र लेना है और एक जल का कलश लेना है कलश तांबे या स्टील का कैसा भी हो सकता है। यह काम आपको सिर्फ सोमवार के दिन सुबह के समय करना है।

अब आप जब घर से बेलपत्र और जल लेकर निकल रहे हो उस समय आपको एक काम और करना है आपको सिर्फ एक बेलपत्र लेना है उस बेलपत्र को अपने सीधे हाथ में रखना है उल्टा करके उल्टा करके रखने के बाद आपको उसी बेलपत्र के ऊपर अपने सीधे हाथ में उस जल के लोटे को भी रखना है।

इस तरीके से आप को बेलपत्र और जल के लोटे को लेकर शिव मंदिर में जाना है। शिव मंदिर में जाने के बाद शिवलिंग के ऊपर आपको अब क्या करना है ध्यान से सुनिए।

आप जो बेलपत्र और जल का लोटा अपने सीधे हाथ में रखे हुए हैं अब आपको जो जल का लोटा है उसे अपने उल्टे हाथ में पकड़ लेना है और जो बेल पत्र आप के सीधे हाथ में रखी हुई है उसको शिव जी की शिवलिंग के ऊपर अशोक सुंदरी वाली जो जगह होती है उस जगह पर चढ़ा देना है।

अशोक सुंदरी वाली जगह वह जगह होती है जहां पर जलाधारी होती है जलाधारी से होते हुए जिस तरफ से जल बहता है उसका जो बीच वाला हिस्सा होता है उस जगह पर शिव जी की सबसे छोटी बेटी अशोक सुंदरी रहती है।

अशोक सुंदरी वाली जगह पर बेलपत्र समर्पित करके आपको अपना जो जल का लोटा है उसे सीधे हाथ में ले लेना है अब इस जल के लोटे को आपको अशोक सुंदरी वाली जगह पर थोड़ा सा समर्पित करना है थोड़ा सा जल अशोक सुंदरी वाली जगह पर समर्पित करके आपको शिव जी की शिवलिंग के चारों और थोड़ा-थोड़ा जल जो है वह समर्पित कर देना है शिव जी की शिवलिंग के ऊपर नहीं करना है। अशोक सुंदरी वाली जगह पर चढ़ाने के बाद आपको शिव जी की शिवलिंग के चारों और थोड़ाथोड़ा थोड़ा सा जल समर्पित कर देना है अब आखरी में जो जल बचेगा उसको आपको शिव जी की शिवलिंग के ऊपर समर्पित करना है जब आप यह उपाय कर रहे हो तो भोले बाबा का मंत्र श्री शिवाय नमस्तुभयम अवश्य जाप करते रहिए।

जब आप इस उपाय को पूरा कर ले उसके बाद आपको शिवजी के सामने अपनी मनोकामना को बोलते हुए शिव जी को प्रणाम करके आशीर्वाद लेकर वापस उठ जाना है।

यहां पर यह उपाय पूरा हो जाता है और यह उपाय खुद पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने अपनी शिव महापुराण कथा में बताया है तो इसका पूरा श्रेय श्री पंडित प्रदीप मिश्रा जी को ही जाता है।

सोमवार अष्टमी को चहरे की सुंदरता का महा अचूक उपाय?

आप सभी लोग जानते हैं कि 2022 नए साल की पहली सोमवार अष्टमी 10 जनवरी 2022 को पड़ रही है और सोमवार अष्टमी साल में तीन से चार ही पढ़ती हैं और यह दिन बहुत ही ज्यादा अनोखा और महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस दिन किया गया कोई भी उपाय का फल बहुत ही जल्द आप लोगों को मिलता है और वह फल देखने लायक होता है।

आज हम आप लोगों को सोमवार अष्टमी का एक ऐसा महा अचूक उपाय बताने वाले हैं जिस अचूक उपाय को करके आप अपने शरीर की जो सुंदरता है। अगर आपके शरीर पर कोई दाग धब्बे हैं, आंखों के नीचे काले धब्बे पड़ गए हैं या आपके शरीर में कोई भी दिक्कत है, दाग धब्बों से जुड़ी हुई या त्वचा से जुड़ी हुई और आप सुंदर दिखना चाहते हैं पर सुंदर नहीं बन पा रहे हैं तो आपको इस उपाय को सोमवार अष्टमी के दिन करना चाहिए किसी भी सोमवार अष्टमी के दिन आप इस उपाय को कर सकते हैं।

सरकारी नौकरी पाने वाला सर्वश्रेष्ठ उपाय ।। 

सोमवार की अष्टमी के दिन आपको शिव मंदिर में जाना है शिवलिंग के सामने जाना है और शिव मंदिर में जाने से पहले आप अपने घर से एक लोटा में जल और एक लोटा में दूध भरकर अवश्य ले जाएं।

अब आपको शिवजी के मंदिर में शिवलिंग के सामने यह दूध और जल जो आप लेकर गए हैं इसे चढ़ाना है पर ध्यान दीजिए कि इस दूध और जल को आप उस शिवलिंग के ऊपर नहीं चढ़ाना है।

आप सभी लोग जानते हैं कि शिवलिंग के ऊपर शिव जी का पूरा परिवार रहता है तो शिवलिंग के ऊपर एक अशोक सुंदरी वाली जगह होती है उस अशोक सुंदरी वाली जगह पर आपको यह दूध और जल अर्पित करना है।

बहुत सारे लोगों को अशोक सुंदरी वाली जगह नहीं पता होगी तो हम आपको बता देते हैं अशोक सुंदरी वाली जगह शिवलिंग के ऊपर उस जगह पर होती है जहां पर जलाधारी बनी हुई होती है शिवलिंग से बहता हुआ जो पानी आता है जिस जगह से आता है उसे हम जलाधारी कहते हैं और जिस तरफ से बहता हुआ नीचे की ओर गिरता है उस जलाधारी के बीच का जो हिस्सा होता है उसे हम कहते हैं अशोक सुंदरी वाली जगह तो उस जगह पर आपको दूध और जल अर्पित करना है।

उससे पहले आपको यह बात का ध्यान रखना है कि जो दूध और जल और आप लोग अर्पित कर रहे हैं उसे आपको अपने ही पास इकट्ठा करके रखना है। कैसे करेंगे जो जलाधारी होती है जलाधारी से जो भी दूध और जल गिरेगा वह नीचे नहीं जाना चाहिए वह आपको एक कटोरे में इकट्ठा करके रख लेना है क्योंकि यह उपाय का एक भाग है।

तो आपको पहले ही एक कटोरा जलाधारी के नीचे रख देना है ताकि जो भी दूध और जल गिरे वह आपके कटोरे में गिर जाए।

अब आपको शिवलिंग के ऊपर अशोक सुंदरी वाली जगह पर दूध और जल अर्पित करना है। दूध और जल अर्पित करने के बाद जलाधारी से होते हुए वह आपके कटोरे में आ जाएगा बस यहां पर यह काम पूरा हो जाता है।

अब आपको भगवान के दर्शन करके हाथ जोड़कर पैर पढ़कर वापस अपने घर आ जाना है। उसका दूध और जल को लेते हुए जिस कटोरे में आपने इस दूध और जल को इकट्ठा किया है जो कि अशोक सुंदरी वाली जगह से जलाधारी से स्पर्श होते हुए आपके कटोरे में गिरा है।

अब यह जो काम है यह आपको सुबह के समय करना है। शिव जी के मंदिर में शिवलिंग के अशोक सुंदरी वाली जगह पर दूध और जल अर्पित करके उस दूध और जल का मिश्रण अपने घर ले आए।

उस कटोरे में दूध और जल का जो मिश्रण आप घर की ओर लाए हैं। अब आपको उस व्यक्ति के नहाने वाले पानी में सोमवार की अष्टमी के दिन शाम के समय, संध्या के समय मिला देना है। जिस व्यक्ति के चेहरे पर दाग धब्बे हो शरीर पर कुछ चिट्टे हो या वह लोग सुंदरता के लिए यह उपाय कर रहे हो तो उस व्यक्ति के नहाने वाली बाल्टी में आपको यह कटोरे में जो दूध और जल का मिश्रण डाला हुआ है। इसे आपको डाल देना है अब उस व्यक्ति को सोमवार अष्टमी की शाम के समय संध्या के समय स्नान करना है।

यहां पर यह उपाय पूरा हो जाता है इस उपाय को करने के बाद आप देखेंगे कि आपके शरीर पर त्वचा पर जो भी दिक्कतें होंगी वह धीरे-धीरे पूरी सही होती जाएंगी और आपको इसका बहुत ही अचूक फल भी देखने को मिलेगा।

इस उपाय को पूरे विश्वास और पूरी श्रद्धा के साथ कीजिए। भगवान भोलेनाथ आपके शरीर से सभी दाग धब्बे यार रोग दूर कर देंगे।

अगर आपको बताई गई जानकारी में क्या इस उपाय में कोई बात समझ ना आई हो तो उसे आप हम से कमेंट करके पूछ सकते हैं।

प्रदोष व्रत कैसे करना चाहिए। पशुपति व्रत का उद्यापन कैसे करें।

आप सभी लोगों में से बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं जो कि प्रदोष व्रत करते हैं अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अगर आप लोग भी चाहते हैं कि आपकी कोई बड़ी मनोकामना जो सालों से पूरी ना हो रही हो तो वह पूरी हो जाए तो आपको हमारी यह बातों को सुनना चाहिए और पढ़ना चाहिए क्योंकि प्रदोष व्रत एक ऐसा व्रत होता है जिस व्रत को करने से हमारी मनचाही मनोकामना पूरी हो सकती है अगर हम सच्चे मन और पूरी शक्ति से इस व्रत को धारण करें और इसकी पूरी विधि को अच्छे से अपनाएं।

प्रदोष व्रत का सबसे पहला नियम होता है कि जिस दिन भी आप प्रदोष व्रत रख रहे हो और जब भी प्रदोष पढ़ रही हो तो उस दिन आपको ब्रह्म मुहूर्त में उठना है और सबसे पहले स्नान करना है। उसके बाद फिर आसन पर बैठकर भगवान की भक्ति को धारण करना है।

प्रदोष व्रत रखने वाले भाइयों और बहनों को दिन भर जितना हो सके भोले बाबा के नाम का जाप करते रहना चाहिए। भोलेबाबा के जितने भी मंत्र होते हैं उन सभी का उच्चारण करना चाहिए।

दिनभर आपको भोलेनाथ की भक्ति में गुजारना चाहिए तभी आपको पशुपति व्रत का पूरा फल मिलता है।

सरकारी नौकरी पाने वाला सर्वश्रेष्ठ उपाय ।। पंडित प्रदीप मिश्रा उपाय

प्रदोष व्रत करने वाले को क्या करना चाहिए
प्रदोष व्रत करने वाले को क्या नहीं करना चाहिए
प्रदोष व्रत का उद्यापन कैसे करें
प्रदोष व्रत करने वाले को क्या करना चाहिए
प्रदोष व्रत करने वाले व्यक्ति को शाम के समय आधा घंटा या 10 मिनट बैठ कर शिव जी का भजन करना चाहिए।

अगर साथ में कोई भजन करने वाला ना हो तो आप को अकेले ही बैठकर भोले बाबा की भक्ति में डूब जाना चाहिए।

प्रदोष व्रत करने वाले को क्या नहीं करना चाहिए
प्रदोष व्रत करने वाले को भोजन नहीं करना चाहिए।

अगर प्रदोष व्रत करने वाला फल हार भी करता है तो उसमें भी नमक का उपयोग नहीं करना चाहिए।

प्रदोष व्रत में किसी भी प्रकार की नमक का सेवन वर्जित होता है।

प्रदोष व्रत का उद्यापन कैसे करें
जब आपकी 11 प्रदोष हो जाएं या 26 प्रदोष हो जाए तो उस समय आप को प्रदोष व्रत का उद्यापन कर देना चाहिए।

प्रदोष व्रत का उद्यापन करने के लिए दो ब्राह्मणों को जोड़े से बुलाओ।

ब्राह्मणों को जोड़े से बुलाकर उनके चरणों की पूजा करके आराधना करके भोले बाबा का सुंदर मंडप तैयार कर कर रंगोली बनाकर सजाकर भगवान शंकर की प्रदोष काल में पूजा करो।

प्रदोष के एक दिन पहले गणेश जी की आराधना करो उनके भजन करो।

जिन ब्राह्मणों को आप ने बुलाया है उन ब्राह्मणों से मंत्रों का उच्चारण करवाइए 108 खीर की आहुतियां दिलवाईए।

उसके बाद ब्राह्मणों को जोड़ें से भोजन करवाकर उनके चरणों को नमन करके दक्षिणा प्रदान करें।

दक्षिणा देने के बाद आपको ब्राह्मणों से प्रार्थना करना है जिस प्रदोष का व्रत हमने पूरा किया है उस प्रदोष व्रत का फल हमें मिल जाए।

ब्राह्मणों के चरणों को नमन कर कर उनके हाथों से अपने सर पर अक्षत के दाने छुड़वाए।

उसके बाद रात्रि में भगवान भोलेनाथ का भजन करें और भोलेनाथ से प्रार्थना करें कि भोलेनाथ हमारे जीवन के सभी दुख समस्याओं को दूर करें।

हम आशा करते हैं कि आपको हमारी लिखी हुई बातें जो कि श्री पंडित प्रदीप मिश्रा जी द्वारा बताई गई हैं 

देव दीपावली का 7 फुल 7 दीपक वाला उपाय कैसे करें | 

नमस्कार दोस्तों, आप सभी लोग जानते हैं कि 26 नवंबर 2023 को देव दीपावली का दिन है और इसी देव दीपावली का पंडित जी ने अपनी देव दीपावली शिव महापुराण कथा में 7 फूल और 7 दीपक वाला नया उपाय बताया है, जिसे आज हम आपको आज किस लेख में समझने वाले हैं।

जैसे कि आप उपाय के नाम में ही समझ सकते हैं कि 7 फूल और 7 दीपक वाला यह उपाय है तो सीधी सी बात यह है कि इसमें हमें 7 फूल और 7 दीपक का प्रयोग करना पड़ेगा।

इस उपाय के लिए आपको 7 ऐसे फूल लेने हैं जो भगवान शिव जी पर समर्पित होते है। उदाहरण के लिए अगर आप लोग गेंदें का फूल ले रहे हैं तो आपको 7 फूल गेंदें के ही लेना है। मतलब आप जो फूल ले रहे हैं वह एक ही फूल हो अलग-अलग फूल नहीं लेना है।

इसके बाद में आपको 7 दीपक लेना है जो दीपक आप मिट्टी के भी ले सकते हैं और आटे के भी बना सकते हैं पर इस उपाय में मिट्टी के दीपक लेंगे तो ज्यादा अच्छा होगा। इन मिट्टी के दीपक के अंदर आप एक-एक लंबी बाती रखेंगे और शुद्ध देसी गाय का डाल देंगे।

अब आपको अपने 7 फूल और 7 दीपक एक थाली में रख लेने हैं और प्रातः काल सुबह-सुबह आपको शुद्ध होकर स्नान करके अपने पूरे घर की साफ सफाई करके विशेष रूप से अपने रसोई घर की साफ सफाई करके इस थाली को लेकर अपने रसोई घर में आ जाना है।

अपनी रसोई घर में जहां पर आपके पीने का पानी रखा जाता हो या परिंडा रखा जाता हो या आपके रसोईघर में जहां पितरों का स्थान हो वहां पर आप लोगों को सबसे पहले अपने 7 फूल को समर्पित कर देना है या वहीं पर रख देना है।

इसके बाद में आपने जो 7 लंबी बातें के शुद्ध देसी गाय के घी के दीपक तैयार किए हैं उन दीपक को भी आपको इन फूलों के सामने रख देना है।

यह काम आपको देव दीपावली को सुबह के समय करना है लगभग 10:11 बजे से पहले यह उपाय कर लेना है और यह उपाय घर के माता बहनों को ही करना है।

अब जैसे ही सुबह आपने जो साथ दीपक लगाए हुए थे वह दीपक जैसे ही पूरे जल जाए। उसके बाद आप लोगों को पूरे दिन में से कभी भी उन 7 फूलों को उठाकर भगवान शिव जी के मंदिर लेकर जाना है और भगवान शिव जी पर इन सातों फूलों को चढ़ा देना है और 2 से 5 मिनट तक भगवान से हाथ जोड़कर प्रार्थना और विनती करना है।

उसके बाद में आपको इन सा फूल में से कोई भी एक फूल कुबेर भंडारी का नाम लेते हुए भगवान शिव जी का आशीर्वाद लेते हुए उठा लेना है और इस फूल को लेकर सीधा अपने घर आ जाना है।

आप इस एक फूल को घर पर लाकर किसी भी अच्छे और शुद्ध स्थान पर रख दीजिए जैसे कि आपके घर में जहां पर भगवान जी विराजित हो, आप वहां पर इस फूल को रख दीजिए और इस फूल को आपको सुरक्षित रखना है ताकि यह फूल हमेशा आपके घर में रहे क्योंकि यही वह फूल है जिससे आपके घर में बरकत रहेगी और कभी भी पैसों की धान की कमी नहीं रहेगी।

अगर आप चाहे तो इन सातों फूलों को आप भगवान शिव जी के मंदिर के अलावा किसी भी बड़े बेलपत्र के वृक्ष के नीचे, आवले के वृक्ष नीचे या पीपल के वृक्ष के नीचे भी जाकर समर्पित कर सकते हैं और वहां से भी एक फूल उठाकर अपने घर में बरकत के लिए रख सकते हैं।

यह उपाय पंडित जी ने अपनी देव दीपावली शिव महापुराण कथा में बताया था और इसी कथा में पंडित जी ने यह भी बताया था कि देवी दीपावली 26 नवंबर 2023 को है।

गुप्त नवरात्रि में 9 दिनों के यह उपाय जरूर करें 

नमस्कार दोस्तों, आप सभी लोग जानते हैं कि साल भर में चार नवरात्रि आते हैं जिसमें से दो नवरात्रि गुप्त तरीके के नवरात्रि होते हैं। जिसमें से अभी असाढ़ माह के गुप्त नवरात्रि 19 जून से लेकर 27 जून तक चलने वाले हैं।

इन गुप्त नवरात्रों में किए जाने वाले कुछ विशेष उपायों को हम आपको इस लेख में बताने वाले हैं जिन उपायों को करके आप अपने मनोकामना को पूर्ण करवा सकते हैं।

पहला उपाय
इस उपाय की ध्यान में रखने वाली बातें
दूसरा उपाय
इस उपाय की ध्यान में रखने वाली बातें
पहला उपाय
यह उपाय आपको गुप्त नवरात्रि के पूरे 9 दिनों तक करना होगा।

इस उपाय को करने के लिए सबसे पहले आपको एक ऐसे फूल की आवश्यकता होगी जो कि आपको इन गुप्त नवरात्रि के पूरे 9 दिनों तक ज्यादा मात्रा में मिल सके। शिवजी पर चढ़ने वाला कोई भी एक ऐसा फूल देख लीजिए जो आपको प्रतिदिन ज्यादा मात्रा में मिल जाए।

उदाहरण के लिए हम मान लेते हैं कि हमारे पास सफेद फूल हैं।

गुप्त नवरात्रि के पहले दिन आपको अपने साथ में 9 सफेद फूल रखना हैं साथ ही में एक गोल बाती का शुद्ध देसी गाय की घी का दीपक भी तैयार करना है जो दीपक आटे का बना सकते हैं।

अब आपको भगवान शिव जी के मंदिर प्रातः कल सुबह-सुबह ‌पहुंचना हैं और मंदिर पहुंचने के बाद आपको शिवजी की शिवलिंग के ऊपर 9 फुल पहले समर्पित करना है उसके बाद में आपको वह घी का दीपक भगवान शिव जी के पास जला देना हैं उसके बाद आपको भगवान से अपनी मनोकामना बोलना हैं जिसके लिए आप यह उपाय कर रहे हैं।

उसके बाद जब गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन आएगा तो आपको अगले दिन 9 फूल और बढ़ा लेना हैं। मतलब पहले दिन 9 फूल चढ़ाए तो दूसरे दिन 18 फूल आपको लेकर जाने हैं और एक घी का दीपक लेकर जाना हैं भगवान शिव जी के सामने जाकर जलना है।

इसी तरीके से आपको गुप्त नवरात्रि के पूरे 9 दिनों तक हर दिन 9-9 फुल बढ़ते जाना हैं और साथ में घी का दीपक जलाकर भगवान शिव जी से प्रार्थना करना हैं।

पहले दिन 9 फूल
दूसरे दिन 18 फूल
तीसरे दिन 27 फुल
चौथे दिन 36 फूल
पांचवें दिन 45 फूल
छठवें दिन 54 फूल
सातवें दिन 63 फूल
आठवें दिन 72 फूल
नवें दिन 81 फूल

पूरे 9 दिनों में आपको एक घी का दीपक भी जरूर लगाना हैं।

इसी तरीके से 9 दिनों तक आपको यही काम करना है और यह उपाय यहां पर पूरा हो जाता हैं।

इस उपाय की ध्यान में रखने वाली बातें
इस उपाय को कोशिश करें कि आप प्रातः कल सुबह-सुबह ही करें।
अगर आपने सुबह ही इस उपाय को करना शुरू किया है तो पूरे 9 दिनों तक सुबह ही उपाय करना हैं।
इस उपाय में जो फूल अपने पहले दिन उपयोग में लिया हो वही फूल आपको पूरे 9 दिनों तक लेना हैं फूलों को बदलना नहीं हैं।
इस उपाय में 9 दिनों तक आपको एक ही मंदिर में यह उपाय करना हैं।
इस उपाय को कोई भी व्यक्ति कर सकता हैं जिसको अपनी मनोकामना पूर्ण करवाना हैं।
दूसरा उपाय
यह उपाय भी गुप्त नवरात्रि का ही हैं पर यह उपाय को आपको गुप्त नवरात्रि की पंचमी तिथि को ही करना हैं।

यह उपाय विवाह के लिए हैं जिस लड़का या लड़की का विवाह नहीं हो पा रहा हो या उसके विवाह में कोई अड़चनें आ रही हो तो उस स्थान पर गुप्त नवरात्रि की पंचमी तिथि को यह उपाय कीजिए। 3 महीना के अंदर विवाह अच्छी जगह पक्का हो जाएगा।

इस उपाय को उसी लड़के या लड़की के हाथों से करवाना जिसका विवाह नहीं हो रहा हो।

इस उपाय में आपको आम के पत्ते की आवश्यकता होगी। उसके साथ में आपको हल्दी और रौली कुम-कुम की आवश्यकता भी होगी।

गुप्त नवरात्रि की पंचमी तिथि को आपको अपने बच्चे के हाथों से आम के पत्ते के ऊपर 2 स्वास्तिक बनवाना हैं जिसमें से पहला स्वास्तिक हल्दी का होना चाहिए और दूसरा स्वास्तिक रौली कुमकुम का होना चाहिए।

उसके बाद में जो हल्दी का स्वास्तिक हैं उसके ऊपर आपको रौली कुम-कुम के चावल रखने हैं और जो रौली कुम-कुम का स्वास्तिक है उसके ऊपर आपको हल्दी के चावल रखने हैं।

यह चावल आप थोड़ी सी हल्दी डालकर और थोड़े से रौली कुम-कुम डालकर इस तरीके के चावल बना सकते हैं।

उसके बाद अपने बच्चों के हाथों से आम के पत्ते को किसी भी नीम के वृक्ष के नीचे जाकर नाम और गोत्र बोलकर वृक्ष के नीचे रखवा देना हैं ।

यहां पर यह उपाय पूरा हो जाता हैं।

इस उपाय की ध्यान में रखने वाली बातें
इस उपाय को उसी लड़का या लड़की की हाथों से करवाना हैं जिसका विवाह नहीं हो रहा हैं।
इस उपाय में आम का पत्ता ही लेना हैं।
हल्दी और रौली कुमकुम के चावल अलग से तैयार करना हैं।
इस आम के पत्ते को रखते समय नाम और गोत्र भी बोलना हैं।
इस उपाय से 3 महीने में विवाह पक्का हो जाएगा।
तो दोस्तों यह दोनों उपाय गुप्त नवरात्रि के है। 

पंडित श्री प्रदीप मिश्रा जी (सीहोरे वाले) द्वारा श्री शिव महापुराण की कथा में बताये कुछ अचूक उपाय लिखित रूप में

शिव महापुराण में दिए मां अशोक सुंदरी के अदभुत उपाय
किसी को उधार पैसा या समान देना हो तो माता अशोक सुंदरी के नाम की एक लौंग पहले खा ले और फिर जा के उस व्यक्ति को उधार दे। आपका पैसा आपको वापस मिल के ही रहेगा। किसी हलत में वो पैसा नहीं फसेगा।
जिसको काया का रोग हो जाता है, चमड़ी सफेद या काली पड़ने लगती है, आंखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं या चमड़ी का कोई भी अन्य रोग हो जाता है तो सोमवार की अष्टमी पड़ने वाले दिन सुबह शिव मंदिर जाना है और जहां अशोक सुंदरी वाली जगह है वहां दूध और जल चढाया जाता है और साथ ही नीचे जहां से जल गिरता है हां एक पात्र लगा के दूध और पानी दोनो को उस पात्र में झेल लिया जाता है। शाम (बिलकुल सांझा के समय) को उसी जल और दूध को पानी में मिला के नहाने से कैसा भी त्वचा रोग हो बिलकुल ठीक होने लगता है।

IIपेट या बच्चेदानी में गांठ की समस्या से छुटकारा पाने का उपायII

  • जिस नारी के गर्भ में, बच्चेदानी में, या पेट के अंतरगत कहीं पर भी गांठ पड़ जाए और डॉक्टर ने ऑपरेशन की बोल दी हो तो प्रयास करें कि शंकर भगवान को बेल पत्र समर्पित करें।
  • बेल की पत्ती में जो दोनों तरफ की पत्तियां और बीच वाली पत्ती के बीच में डंडी होती है उसको स्पर्श करके अपने हृदय की बात कहकर, बेल की पत्ती महादेव को समर्पित करें।
  • डंडी का मुँह माता अशोक सुंदरी की तरफ होना चाहिए।
  • फिर एक लोटा जल शिवलिंग पर चढ़ाएं।
  • जल चढ़ाते वक्त महादेव की 5 कन्याओं के नाम स्मरण करें, और हर कन्या के नाम का जल समर्पित करके थोड़ा रुके फिर दूसरी कन्या के नाम का जल चढ़ाएं।
  • जैसे, पहले माता जया के नाम का जल समर्पित करें, फिर 1 सेकंड रुक कर माता विषहरा के नाम का जल समर्पित करें। ऐसे ही माता शामलीबारी, दोतली और माता देव के नाम का भी जल चढ़ाए और जब आखिरी माता का नाम लेकर जल चढ़ा रहे हो तो पूरा जल समर्पित कर दे।
  • जल को एक कटोरे में इकट्ठा कर लें, और इस जल को घर ला कर पीये।
  • 15 से 20 दिन रुकें और दोबारा जांच करवाएं।
  • बाबा चाहेंगे तो गांठ गलाना प्रारंभ हो जाएगी और रिपोर्ट सामान्य आएगी।

IIधन और वैभव के लिए कार्तिक मास का उपायII

  • कार्तिक के महीने में आने वाली अष्टमी तिथि पर यह उपाय करें, धन और वैभव की वर्षा होने लगेगी भोलेनाथ की कृपा से।
  • कार्तिक के महीने में आने वाली किसी भी अष्टमी तिथि हो – उजाला, अंधेरा, कृष्ण पक्ष, शुक्ल पक्ष।
  • एक बेल पत्ती और 3 शमी की पत्ती को शिवलिंग पर माता अशोक सुंदरी वाली जगह पर स्पर्श कराके भोलेनाथ को समर्पित कर दें।
  • इस उपाय को करते समय चंपेश्वर महादेव का नाम स्मरण करना चाहिए।
  • अगले साल के कार्तिक महीने की प्रतीक्षा करें और आप पाएंगे कि आप जीवन के हर चरण में धन, वैभव और सफलता से भरपूर हैं।

15 जुलाई 2023 को श्रावणी शिवरात्रि अभिषेक की ज़रुरी सामग्री
  • श्रावण मास की शिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन होती है
  • हिंदू पंचांग के अनुसार साल 2023 में श्रावण की मासिक शिवरात्रि 15 जुलाई 2023 को  मनाई जाएगी
  • श्रावण मास की शिवरात्रि 15 जुलाई 2023 शाम को 8:32 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 16 जुलाई 2023 को रात्रि 10:08 मिनट पर होगा
  • हर साल की तरह इस साल भी पंडित श्री प्रदीप जी मिश्रा (सीहोर वाले), श्रावणी शिवरात्रि के अवसर पर पार्थिव शिवलिंग की ऑनलाइन पूजा अभिषेक करेंगे।
  • 15 जुलाई 2023 को पंडित प्रदीप मिश्रा जी द्वारा श्रावणी शिवरात्रि के अवसर पर पार्थिव शिवलिंग की पूजा अभिषेक करना निश्चित हुआ है। ऐसे में पंडित जी ने अपनी कथा में कुछ समग्री की सूची बताई है जो पूजा में उपयोग होगी।

शिवलिंग का निर्माण करते वक्त किस बात का ध्यान रखना है?

  • ब्राह्मण सफेद मिट्टी का शिवलिंग बनाएंगे
  • क्षत्रिय लाल मिट्टी का
  • वैश्य पीली मिट्टी का और
  • शूद्र काली मिट्टी का

नीचे सभी ज़रुरी वस्तु का नाम दिया गया है।

  • गेहूं के दाने – 21
  • कमल गट्टा – 5
  • चावल (अक्षत) – 108
  • काली मिर्ची – 21
  • काली तिल – एक चुटकी
  • धतूरा – 1
  • बेल पत्र – 7
  • शमी पत्र – 7
  • लाल गुलाब – 7 (7 गुलाब नहीं मिले तो एक ही गुलाब की पंखुड़ियां को तोड़ कर भी काम चला सकते हैं)।लाल गुलाब ना मिले तो कोई भी सफेद फूल ले सकते हैं।
  • एक लोटा जल
  • पंचामृत स्नान के लिए – दूध, दही, शक्कर, शहद, घी।
  • रोली, मोली, कपूर, पीला चंदन, चावल, इत्र, लौंग, इलायची, गंगाजल, अबीर, गुलाल।
  • 2 घी के दीये (एक आरती के लिए और एक अखंड जलाने के लिए)
  • गोल सुपारी – 3 (एक संकल्प छोडने के लिए और दो गौरी गणेश बनाने के लिए)
  • जनेऊ – 2
  • 5 प्रकार के फल
  • इसके अतिरिक्‍त आप अपनी सुविधा के अनुसार मिठाई, या कुछ भी भोग शामिल कर सकते हैं।
नौकरी हो या व्यवसाय, एक दुर्बा और एक लोटा जल दिलाएगा सफलता
सरकारी या प्राइवेट नौकरी के लिए अगर कोई बच्चा अप्लाई कर रहा है और वो चाहता है कि उसे निश्चित ही सफलता मिल जाए, तो ऐसे में भगवान शिव को दुर्बा समर्पित करना चाहिए।
नौकरी के इंटरव्यू से 2 या 3 महीने पहले से लगतार बाबा को एक दुर्बा समर्पित करें और फिर एक लोटा जल चढ़ा दे।
दुर्बा की डंडी का मुंह माता अशोक सुंदरी वाले स्थान पर होना चाहिए।
इस उपाय के साथ-साथ आपको मेहनत में कोई कमी नहीं छोड़नी है। पढ़ाई भी पूरी लगन से करनी है।
बाकी सब बाबा पे छोड़ दे।
यदि कोई अपना नया व्यवसाय शुरू करना चाहता है तो भी इस उपाय का उपयोग किया जा सकता है।
उस स्थिति में भी अपना नया व्यवसाय शुरू करने से एक या दो महीने पहले भगवान शिव को दूर्वा और जल समर्पित करना शुरू करें।
बाबा सभी बाधाओं को पार कर लेंगे और आपका नया कार्य निश्चित रूप से आपके जीवन में प्रगति लाएगा।

महाशिवरात्रि के दिन करने योग्य कुछ अद्भुत उपाय

उपाय 1 – कार्य सिद्धि के लिए 

उपाय 2 – दुख तकलीफो का अंत

उपाय 3 – बेल पत्र खाने के लाभ

उपाय 4 – नेत्रों की ज्योति बढ़ाने के लिए 

शिव महापुराण के कार्य सिद्धि के लिए शिवरात्रि के कुछ उपाय

हर माह शिवरात्रि आती है। किसी भी शिवरात्रि पर काली मिर्च का एक दाना और काले तिल के सात दाने अपने हथेली पर रख के अपने मन की कामना बोल के शिवलिंग पर समर्पित कर दे । अगले शिवरात्रि तक बाबा कामना पूरी कर ही देंगे।

जिसके घर में बहुत कलेश होता हो, सास बहू में या मां बेटे में या भाई भाई में तो किसी भी महीने की शिवरात्रि पर गेहु की 7 बाली को तोड़ लिजिये और अपने घर में हर जग घुमा लिजिये। फिर शिव मंदिर जा कर, अपने घर का नाम और गोत्र बोल कर, उन गेहु की 7 बाली को शिवलिंग पर चढा दिजिये। शिव महापुराण की कथा कहती है कि जिस घर का गोत्र बोला गया है उस घर में जिंदगी में कभी झगड़ा या कलेश की नौबत नहीं आएगी।

अगर आपकी कोई दुकान नहीं चलती हो, खेत में फसल नहीं आ रही हो, घर में लक्ष्मी नहीं टिक रही हो या संपदा की कमी हो तो हर महीने शिवरात्रि आती है। किसी भी शिवरात्रि के दिन रात को 12 बजे शंकर जी पे एक धतूरा चढा दिजिये। आधे घंटे तक धतूरा चढा रहने दिजिये और तब तक आप मंदिर के बाहर बैठ के श्री शिवाय नमस्तुभ्यम का जाप करिए। 12:30 बजे उस धतूरे को उठा के ले आइये और लाल कपड़े में बांध के अपने दुकान में, घर के तिजोरी में या जो खेत में फसल नहीं हो रही उस खेत में गाड़ दिजिये। पर ये काम आपको सुबह 4 बजे के पहले कर लेना है। आपको जीवन में कभी तकलीफ नहीं भोगना पड़ेगा। लक्ष्मी बढ़ती चली जाएगी।

जो व्यक्ति ज़्यादा बीमार रहता हो, तो किसी भी शिवरात्रि के दिन शंकर जी को बेर का फल चढाये। 7 बेर ले के अपने ऊपर से घुमा कर, शिवरात्रि के दिन दोपहर को 12 बजे ले जा कर शंकर जी के शिवलिंग पर अपने मन की कामना करते हुए चढा दिजिये। आपके सब रोग और बीमारी 3 महीने के अंदर ख़त्म हो जाएगी।

रुद्र चंदन से करे अपने सब दुख तकलीफो का अंत

  • किसी भी महीने की शिवरात्रि को भगवान शंकर को रुद्र चंदन समर्पित करने से कैसा भी रोग बिमारी हो सब हमेशा  के लिए समाप्त हो जाता है।
  • इस चंदन के अभिषेक से जो काम आपका नहीं होता, उसे आप प्राप्त कर सकते हैं। अपनी सब मनोकामना को पूरा कर सकते हैं।

रुद्र चंदन क्या होता है आइए देखते हैं।

  • पीला चंदन घीस कर उसे 3 मुखी रुद्राक्ष पर अच्छी तरह से लपेट ले। अच्छा मोटा परत लपेटना है ताकि रुद्राक्ष का कोई भी भाग दिखलाई ना दे।
  • लपेटने के बाद उसे अच्छे से गोला आकार देकर चिकना बना ले लड्डू जैसे। इसे कहते हैं रुद्र चंदन।
  • अब इस रुद्र चंदन को शंकर जी के शिवलिंग पे रख दीजिये और धीरे धीरे जल समर्पित करना शुरू करिये। उस रुद्राक्ष के ऊपर से आपको जल इस तरह से डालना है धीरे धीरे की जो चंदन रुद्राक्ष पे लपेटा हुआ है वो निकलता जाए और शंकर जी को समर्पित होता जाए।
  • जब तक रुद्राशा में से सारा चंदन नहीं निकल जाता तब तक आप जल समर्पित करते रहे। साथ ही शंकर जी के मूल मंत्र श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का जाप भी करते रहिये।

श्री शिव महापुराण में लिखित बेल पत्र खाने के लाभ 

सप्ताह में एक बार शंकर जी के शिवलिंग पर चढ़ी बेल पत्र को अवधूतेश्वर महादेव के नाम से खाना प्रारंभ कर देना चाहिए। इससे जिसको भी शुगर, बीपी, थायरॉइड जैसी समस्या है वो ख़त्म होना शुरू हो जाएगी। और जिसको भी घुटने से संबंधित समस्या होती है, या डॉक्टर ने घुटना बदलने को कहा है जीनको, उन्हे मुख्य शिवरात्रि वाले दिन रात को 12 बजे शंकर जी के शिवलिंग पे चढ़ी एक बेल पत्र शिव जी के मंदिर के बाहर खड़े हो कर शिखर को देखते देखते चबा चबा के खा लेना चाहिए तो घुटना बदलने की भी ज़रुरत नहीं पड़ती।

नेत्रों की ज्योति बढ़ाने का उपाए

  1. हर महीने शिवरात्रि आती है। शिवरात्रि वाले दिन एक बेल पत्री की बीच वाली पत्ती पर शहद लगा लीजिये। शहद लगा के पत्ते को शंकर जी के शिवलिंग पे चिपका दीजिये। श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का स्मरण करिये या लिंगायत अष्टक का एक पाठ कर लीजिये। इसके बाद बेल पत्र को निकाल लीजिये और उसमे लगे शहद को एक शीशी में भर के रख लीजिये। बारहो महीने की शिवरात्रि पे ये उपाय करिये और शहद को वही शीश में भरते जाइए। जब पहले दिन इस उपाय को करे तो उस दिन से ही शहद को अपनी आंखों में काजल जैसा लगाना भी शुरू कर दे। धीरे-धीरे आपके आंखों की रोशनी भी बढ़ जाएगी और चश्मा भी उतर जाएगा। 
  2. शंकर जी के मंदिर जाए और तुम्बरुका जी का नाम ले कर एक घी का दिया लगाये। दिए पर एक प्लेट रख दीजिये और फिर इसका काजल निकाल के गाय के घी में मिला के आंखों में लगाना शुरू कर दीजिये। साथ ही तुम्बरुका जी का नाम स्मरण करते हुए, चांद को देखिए, नाम स्मरण करिए। इस उपाय से आंखों की रोशनी बढ़ेगी, चश्मा भी उतर जाएगा। 
  3. प्रदोष के दिन पीपल के पत्ते पर शहद लगाये, और उस शहद को शंकर जी के शिवलिंग पर कुंदकेश्वर महादेव का नाम ले कर समर्पित कर दीजिये। पत्ता चिपकाना नहीं है, पत्ते पे शहद रख के शिवलिंग पे तपकाना है। अब इस चढी हुई शहद को अपनी उंगली से उठा के पीपल के पत्ते पे वापस रख के घर ले आईये। इस शहद को नैनो में काजल जैसा लगाना शुरू करें भगवान कुंदकेश्वर महादेव का स्मरण करते हुए। शहद असली होना चाहिए। 3 से 5 दिन लगा के देखें। आपके आंखों की रोशनी बढ़ने लगेगी।

शिवरात्रि, प्रदोष, सोमवार की अष्टमी पर मनोकामना पूर्ति का अद्भुत उपाय

  • अगर आपकी कोई बहुत महत्वपूर्ण मनोकामना है या कोई कार्य है जिसमें रुकावत आ रही हो, तो 3 ऐसी तिथि है जब आप महादेव को अपने मन की बात कहकर बेल की पत्ती समर्पित कर दे तो आपकी मनोकामना जल्द से जल्द पूरी हो जाती है।
  • हर महीने शिवरात्रि आती है, या तो किसी भी प्रदोष के दिन, या फिर सोमवार की अष्टमी वाले दिन अपने हाथ की दो अंगुलियों में थोड़ा चंदन लगाये, ऐसे…

और उसी अंगुलियों से बेल की पत्ती पकड़ें। ऐसे…

  • बेल पत्ती को कैसे पकड़ना है? जिस उंगली में चंदन लगा है उसीसे बेल की पत्ती की बीच वाली डंडी वाला भाग पकड़ना है।
  • अब शिवरात्रि, प्रदोष या सोमवार की अष्टमी में किसी भी दिन शिवालय जाए और जहां माता अशोक सुंदरी की जगह होती है वही उस बेल की पत्ती को समर्पित कर दे।
  • पत्ती की डंडी का भाग बाहर की तरफ होना चाहिए। यानी जहां से पानी नीचे गिरता है।
  • पत्ती समर्पित करने के बाद कुछ देर उस पत्ती पर अपने हाथ रख के महादेव से अपने हृदय की बात कहे और फिर वापस आ जाए।
  • आप देखेंगे की अगली शिवरात्रि, या सोमवार की अष्टमी या प्रदोष, जिस भी दिन आपने ये उपाय किया है, उसकी जब अगली तिथि आएगी तब तक महादेव आपकी मनोकामना अवश्य पूरी कर देंगे।

हर हर महादेव

देसी गाय के बछड़े के मुंह के फेन से पाए सफेद चर्म रोग से मुक्ति I

  • अगर किसी व्यक्ति या बच्चे को सफेद चमड़ी-संबंधी रोग हो गई हो, चमड़ी सफेद पड़ने लगी हो तो यह उपाय उस स्थिति में बहुत प्रभावी है।
  • कोशिश करें कि किसी भी पूर्णिमा के दिन, जब देसी गाय अपने बछड़े को दूध पिला रही हो तो उस बछड़े के मुंह पर दूध पीने से जो फेन आए उसे एक चम्मच में निकाल ले।
  • अब जहां की त्वचा सफेद हो रही है उस जगह पर यह फेन लगाएं।
  • अगर फेन बहुत थोड़ा सा हो तो उसमें जरा सा देसी गाय का दूध मिला ले।
  • फेन लगा लेने के बाद चंद्रमा की रोशनी में त्वचा को रखना है।
  • फिर आधे या एक घंटे के बाद स्नान करना है।
  • 4 से 5 पूर्णिमा इस उपाय को करने से ही फर्क नजर आने लगेगा।
  • जहां की चमड़ी सफेद हो रही थी, वो अपने असली रंग में आने लगेगी और धीरे-धीरे यह रोग हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।
  • ध्यान रखने वाली बात ये है कि गाय देसी होनी चाहिए, बछड़ा के मुँह का फ़ेन होना चाहिए और अगर दूध मिक्स करते हैं तो वो भी देसी गाय का होना चाहिए।

हर हर महादेव

I देसी गाय के दूध का उपाय गर्भ को गिरने से बचाने के लिए I

  • शिवमहापुराण की कथा के अनुसार, अगर किसी नारी का गर्भ 2 से 3 महीने ठहरकर फिर गिर जाता हो, और बार बार ऐसे ही स्थिति बनी रहती हो तो उस स्थिति में, देसी गाय का दूध बहुत उपयोगी होता है।
  • इस उपाय में, जिस नारी का गर्भ कुछ महीने रह कर लगातर गिर जाता हो उसे देसी गाय के दूध से महादेव के शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।
  • अभिषेक किए हुए दूध को एक कटोरी में इकट्ठा करके घर ले आए और वो दूध को नियमित रूप से पीना शुरु कर दे।
  • ज्यादा से ज्यादा 15 या 20 दिन भी अगर लगातार इस उपाय को कर लिया जाए तो नारी का गर्भ किसी भी हाल में नहीं गिरेगा। जो संतान होगी वो पूर्ण प्राप्त होती है।

शिवलिंग और बेल पत्री के वृक्ष पर एक लोटा जल समर्पित करने से बनते हैं अटके काम

  • यदि आपका कोई विशेष कार्य बहुत समय से अटक रहा हो, और आप बहुत परेशान हो गए हो तो एक बार इस अद्भुत उपाय को करके जरूर देखें।
  • शंकर भगवान के शिवलिंग पर एक लोटा जल समर्पित करें।
  • बस जल समर्पित करने का तरीका कुछ अलग है।
  • जब आप शिवलिंग पर जल चढ़ाये तो सबसे पहले जहां गणेश जी का स्थान है वहां जल चढ़ाए, इसके बाद कार्तिकेय भगवान, फिर माता अशोक सुंदरी, और फिर माता पार्वती के हस्तकमल पे जल चढ़ाने के बाद शिवलिंग के ऊपर जल चढ़ा दे और थोड़ा सा जल कलश में बचा ले।
  • अब इस बचे हुए जल को बेल पत्री के पेड़ के नीचे समर्पित कर दे अपनी कामना के साथ।
  • एक हफ्ते इस उपाय को दिल से कर के देखें।
  • बाबा आपकी कामना पूर्ण करने का रास्ता अवश्य खोल देंगे।

हर हर महादेव


टेंडर पास करवाना हो या चाहिए रोग से मुक्ति, करें 108 सरसो के फूल शिवलिंग पर समर्पित 

  • श्री शिवमहापुराण की कथा के अनुसार, भगवान शंकर के शिवलिंग पर 108 सरसो के फूल को समर्पित करने से ना कि सिर्फ रोग से मुक्ति मिल सकती है, बल्कि हमारे व्यापार में उन्नति भी होने लगती है।
  • इस उपाय को करने के लिए अवधूतेश्वर महादेव का नाम स्मरण करना है।
  • अगर आपका टेंडर का काम है, और आप चाहते हैं कि टेंडर आपको ही मिले तो परिणाम निकलने से पहले आप 108 सरसो के फूल शंकर जी को अवश्य समर्पित करके जाए। भोलेनाथ की कृपा से टेंडर आपको ही मिलेगा।
  • आप इस उपाय को कोई भी बहुत जरूरी काम करने जाने से पहले कर सकते हैं।
  • अगर रोग की बात जाए तो जो व्यक्ति बहुत रोगिला रहता हो, या डॉक्टर ने कोई भारी बीमारी बता दी हो जिसकी जांच करवाना हो तो कोई भी जांच करवाने से पहले भी 108 सरसो के पुष्प अगर शिवलिंग पर समर्पित किए जाएं तो बाबा भोलेनाथ की कृपा से जांच में कोई भी बड़ी बीमारी नहीं निकल सकती है।
  • वैसे तो 108 सरसो के फूल जब कभी मिल जाए तब अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए आप शिवलिंग पर चढ़ा सकते हैं।
  • लेकिन बसंत पंचमी के दिन अगर इस उपाय को किया जाए तो इसका फल और बढ़ जाता है।

हर हर महादेव

पढ़ने वाले बच्चों के लिए बसंत पंचमी के दिन का उपाय

जो बच्चा पढ़ाई में कामजोर होता है, या जिसका मन पढाई में नहीं लगता, उसके हाथ से बसंत पंचमी वाले दिन शंकर भगवान के शिवलिंग पर 31 सरसो के फूल समर्पित करवा दिया जाए तो वो बच्चा पढ़ाई में अव्वल निकल जाता है।

फिर दोबारा उस बच्चे को कभी पढ़ाई के लिए बैठने को कहने की जरूरत भी नहीं पड़ती है।

उसका मन अपने आप पढ़ाई में लगना शुरू हो जाता है।

लेकिन ये उपाय केवल बसंत पंचमी वाले दिन ही करनाहै।


महादेव का यतिनाथ अवतार है विवाह से जुड़ी समस्या का समाधान

यदी आप अपने बच्चों के लिए कोई रिश्ता देख रहे हो और आप चाहते हैं कि वो रिश्ता बिना किसी रुकावट के बन जाए तो आपको बस एक सरल सा काम करना होगा।

जब आप रिश्ते की बात को आगे बढ़ाने के सिलसिले में बात करने जाएं तो यतिनाथ महादेव का स्मरण और निवेदन करके जाएं।

अगर यतिनाथ महादेव की कृपा होगी और बाबा ने ही वो संबंध आपके लिए चुना होगा तो विवाह में कोई रुकावट नहीं आएगी।

II बुद्धिमान सन्तान के लिए शमी का उपाय II

बच्चे के जन्म के एक महीने पहले से अगर नारी शिवलिंग पर एक शमी पत्र समर्पित करके एक लोटा जल चढ़ा देती है तो उसके गर्भ से जो बच्चा जन्म लेता है वो कभी विकलांग नहीं हो सकता, मंदबुद्धि नहीं हो सकता, बच्चा विवेकवान होता है…

अगर शिव मंदिर नहीं हो आस पास तो शमी के पेड़ के नीचे भी जल को समर्पित कर सकते हैं। उससे भी इसी फल की प्राप्ति होगी।


रोग से मुक्ती के लिए कुन्द्केश्वर महादेव को धतूरा समर्पित करने का उपाय II

  • यदि परिवार में किसी व्यक्ति को कोई बड़ी बीमारी होने की संभावना हो और उस बिमारी की जांच होने वाली हो, तो जांच के पहले एक बार एक धतूरा कुंदकेश्वर महादेव के नाम से शिवलिंग पर रख दे और एक कलश जल धीरे – धीरे उस धतूरे के ऊपर से शिव जी को समर्पित करना शुरू कर दे अपने हृदय की कामना करते हुए और श्री शिवाय: नमस्तुभ्यं मंत्र का स्मरण करते हुए।
  • पर जिस दिन आप उस बिमारी के लिए जल चढ़ाए, उस दिन वो जल घर लेकर नहीं आना है। जल समर्पित करने के बाद अशोक सुंदरी वाली जगह अपने हाथ को लगाकर जल को केवल स्पर्श मात्र से बीमार व्यक्ति के नैनो और मस्तक पर लगा दे। आचमन नहीं करना है उस जल का। इसके बाद जांच के लिए जाए।
  • बाबा की कृपा होगी तो जांच में कोई बड़ी बिमारी नहीं निकलेगी और बाबा रोग भी समाप्त कर देंगे।

स्वप्न में सांप या मुर्दा दिखे तो क्या करें II

अगर किसी व्यक्ति को सोते समय सांप के या मुर्दे के स्वप्न बहुत ज्यादा आते हैं तो ऐसे में एक पीपल का पत्ता या पान का पत्ता ले।

उसके ऊपर लाल चंदन से सर्प बनाए और अपने पास के किसी शिव मंदिर में ले जाकर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का स्मरण करके शिवलिंग को वो पत्ती स्पर्श करा कर किसी बहते पानी में विसर्जित कर दे। स्वप्न आना बंद हो जाएंगे।

II नशे/व्यसन की लत से मुक्ती का उपाय II

  • जिनके बच्चे व्यसन में पड़े हुए हैं, जैसे माँस, मदिरा, जुआ या दूसरा कोई गलत कर्म, तो ऐसे बच्चों को सही मार्ग पर लाने के लिए प्रतिदिन शिव मंदिर जाकर शंकर जी के शिवलिंग पर तीन जगह जल समर्पित करें और एक कटोरी को जल गिरने वाले जगह रख दे।
  • पहली जगह शिवलिंग के ऊपर, फिर माता अशोक सुंदरी वाली जगह और तीसरी जगह शंकर भगवान की 5 लड़कियों के नाम का जल शिवलिंग के ऊपर लटकती कलश में। (जया, विषहरा, शामलीबारी, दोतली और देव)।
  • जल चढ़ाने के बाद जो जल कटोरी में इकट्ठा हुआ है उसे घर लेआकर अपने बच्चे को पिलाये। अगर बच्चा किसी वजह से जल नहीं पीये तो उस जल को अपने रसोई के मटके में डाल दे। कभी ना कभी बच्चा उस जल को पीयेगा ही।
  • इस उपाय से धीरे धीरे आपके बच्चे के नशे की लत छूट जाएगी और वो अच्छे मार्ग पर चलने लगेगा।

II 02 नवंबर 2022: आंवला नवमी (अक्षय नवमी) उपाय II

1. कार्तिक माह में आंवला नवमी के दिन दोपहर के 12 बजे से पहले आमले के पेड़ के नीचे घी का दिया लगाकर पूजा करे, उसके बाद अपना पल्लू पसार कर आमले के पेड़ की डाली में लगी हुई थोड़ी सी छाल को अपने अंगूठे और चींटी उंगली की मदद से अपने पल्लू में गिरा ले। अब इसे ले जाकर लाल कपड़े में हल्दी के साथ अपने तिजोरी या अलमारी में रख ले। ऐसा करने से घर में कभी बरकत और संपदा की कमी नहीं होती है।

2. आंवला नवमी के दिन शाम के समय, (मतलब सूरज ढलने के समय से लेकर शाम के 7:30 या 7:45 के बीच) आमले के पेड़ के नीचे एक घी का दीपक लगाकर, कनकधारा स्तोत्र का पाठ कर ले। पूरा स्तोत्र नहीं पढ़ सकते हैं तो शुरू का एक श्लोक और आखिरी का श्लोक पढ़ें। झोली पसार कर प्रणाम करे। इस उपाय से जिंदगी में कभी लक्ष्मी की कमी नहीं आएगी। ये उपाय सिर्फ अक्षय नवमी के दिन ही किया जाता है।


धनतेरस – दिवाली पूजा विधि

धनतेरस – दिवाली पूजा विधि

II धनतेरस – दिवाली पूजा विधि II

*** टिप्पणी/नोट: इस पोस्ट में दिखाए गए वीडियो 2021 के हैं, जब पंडित श्री प्रदीप मिश्रा जी ने हमें दीवाली पूजा की विधि के बारे में बताया था।

लक्ष्मी पूजा 5 दिनों की होती है। आइए जाने श्री शिवमहापुराण में दिए पूजा की विधि।

Day 1: धनतेरस

धनतेरस का त्योहर कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। जो व्यक्ति धनतेरस के दिन धन्वंतरि भगवान की पूजा करता है उसके घर से लक्ष्मी कभी बाहर नहीं जाती है। धन्वंतरि, भगवान श्री हरि विष्णु के ही एक अंश है।

लक्ष्मी पूजन की विधि

धनतेरस की पूजा का समय प्रदोष काल से शुरू हो जाता है।

पूजा की थाली में कुमकुम, रोली, हल्दी, अबीर, गुलाल, चंदन, मोली, 7 अमर बेल के टुकड़े, 7 कमल गट्टे, 7 हल्दी की गांठ, जल का पत्र रख ले।

ज़मीन पर देसी गाय के गोबर से लीपन करे। अगर गोबर का लीपन नहीं कर सकते हैं तो किसी पवित्र जल से भूमि का लीपन करें।

लीपन करके वहा गेहूं के आटा और हल्दी से सुंदर चौक पुर दे। (आटा समृद्धि को बढ़ाने का प्रतीक है और हल्दी लक्ष्मी वैभव को बढ़ाने का प्रतीक होता है।)

कुछ अक्षत या गेहूं के दाने उसके ऊपर रखकर एक चौकी या पाटा उसके ऊपर रख दे। चौकी पर एक लाल कपड़ा बिछा दे।

एक थाली ले, कुमकुम/रोली को गीला करके थाली पर स्वास्तिक बनाएं।

घर में चांदी का सिक्का हो तो उसे थाली में स्वास्तिक के ऊपर रख दे। कोई भी एक देसी सिक्का भी रख ले (1,2,5,10, कोई सा भी)। चांदी का सिक्का नहीं हो तो जो भी सिक्का आपके पास हो, 1,2,5,10, बस वही रख ले। थाली को चौकी पर रख ले।

आटे के 7 दीये बनाकर एक प्लेट में रख ले। दिए में लंबी बाती रखकर घी डाल दे। सभी दियो को प्रज्वलित कर ले। इसके अतिरिक्त एक दिया तेल का लगा ले।

जो तेल का दिया है वो सिक्के के बाईं तरफ रखना है और जो 7 घी के दिए हैं वो सिक्के के दाईं ओर रखना है। (इसको ऐसे भी समझ सकते हैं कि आपके सामने पूजा की चौकी है तो आपको अपने दाईं ओर तेल का दिया रखना है और अपने बाईं तरफ सातो घी का दिया को एक प्लेट में करके रखना है चौकी के ऊपर।)

सिक्के का पूजन करे। जल के छींटे डाले, रोली कुमकुम लगाये। चांदी का सिक्का और देसी सिक्का दोनो पर मोली लपेटे। पहले चांदी के सिक्के पर मोली लपेटे और फिर देसी सिक्के पर लपेटे। सिक्के वापस थाली में रख दे और एक बार फिर से जल का छींटा डाले और सिक्के की पूजा कुमकुम, रोली, हल्दी चंदन आदि से करे।

कुछ चावल को हल्दी में भीगो कर पीला कर ले। अपने बाएं हाथ में चावल को रखे और दाएं हाथ से चावल थोड़ा थोड़ा करके दोनो सिक्के (जो माता लक्ष्मी का प्रतीक है) पर समर्पित करते जाएं और उनका पूजन करें।चावला छोड़ते समय भगवान गणेश का भी स्मरण करे- हे! रिद्धि सिद्धि के देवता भगवान गणेश आप हमारे यहां सदा माता लक्ष्मी, नारायण और कुबेर को लेकर विराजमान रहे। चावल छोड़ते जाए और माता लक्ष्मी, गणेश भगवान, शिव जी, भगवान विष्णु सबका स्मरण करते जाए।

सब चावल समर्पित कर लेने के बाद, 7 अमर बेल के टुकड़े, 7 कमल गट्टे, और 7 हल्दी की गांठ भी माता लक्ष्मी को समर्पित कर दे। यानी जो सिक्के रखे हैं उसके ऊपर चढ़ा दे।

अपने दोनो हाथ में पिसी हुई हल्दी ले और सिक्के के ऊपर धीरे धीरे दोनो हाथो से चढ़ाये। 7 बार पिसी हुई हल्दी को सिक्के पर चढ़ाये, अपनी मनोकामना करके और माता लक्ष्मी को अपने घर में विराजमान करने के लिए।

इसी प्रसार रोली/कुमकुम को दोनो हाथ में लेकर सिक्के पर चढ़ाये।

इसके बाद जो मीठा भोग आपके पास हो वो माता लक्ष्मी को समर्पित करें।इतनी पूजा कर लेने के बाद अपने घर के मंदिर में भी रोज की तरह पूजा कर ले।

पूजा कर लेने के बाद माता लक्ष्मी से निवेदन करिये की हे माता आप हमारे घर में सदा विराजमान रहे।

अब जो 7 घी के दिए रखे है, उससे माता लक्ष्मी की आरती उतारे।

झोली पसार कर माता को प्रणाम करे और भूमि पर नमन करिये।

फिर ये सात दियो को घर में 7 अलग अलग स्थानपर रख दे, जैसे एक किचन में, एक हॉल में, एक तिजोरी के पास, एक तुलसी से क्यारे के पास आदि। एक दिया वही माता लक्ष्मी के पूजा वाले स्थान पर ही रहने दे।

धनतेरस के दिन जो भी नया वस्तु आप खरीद कर लाए है उसकी भी पूजन धनतेरस के दिन कर लेनी चाहिए।********************************************

Day 2: नर्क चतुर्दशी/ रूप चतुर्दशी/ छोटी दीवाली

छोटी दीवाली कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है।

लक्ष्मी पूजा विधि

छोटी दिवाली की पूजा उसी चौकी पर करनी है जिसपे धनतेरस की पूजा हुई थी। सिक्के की थाली भी वही रहेगी। बस जो धनतेरस के दिन पूजा की समग्री समर्पित की गई थी उसे हटा के सिक्के और थाली पोंछ कर साफ कर ले।

एक आटा का दिया बनाएं 4 बत्ती का और उसमे कोई भी तेल डाल दें । (सरसों या तिल)। थोड़े पीले सरसो भी दीपक में डाल दें ।

एक दीपक घी का बनाएं एक बाती का। तेल का दिया सिक्के की थाली के बायें तरफ और घी का दिया दाहिनी ओर विराजमान कर दें।

माता लक्ष्मी और गणेश जी का स्मरण करके जल का छींटा दे सिक्के पर।

रोली, हल्दी, चावल, अबीर, गुलाल, मेहंदी, या जो भी पूजा की सामग्री आपके पास उपलब्ध हो वो सब माता लक्ष्मी पे समर्पित करें जैसे धनतेरस वाले दिन किए।अगर संभव हो तो लाल रंग के फूल सिक्के पर समर्पित करें।

5 अमर बेल के टुकड़े, 5 कमल गट्टे, 5 हल्दी की गाँठ भी समर्पित करें।

मीठे का भोग लगाये।

एक बाती वाले घी के दिए से मां की आरती उतारे।

झोली फैलाकर माता को प्रणाम करें। हे मां! आप रूप देने वाली हो, नरक के भोग से छुड़ाने वाली हो, भगवान नारायण के साथ हमारे यहां सदा के लिए विराजमान हो जाए।

अपने कुल देवी-देवता का स्मरण करें।

घर के सब दरवाजे कुछ देर के लिए खोल दे ताकी मां का आगमन हो जाए।

फिर जो घी का दीपक लगाए है उसे उठाये और पूरे घर में घुमाने के बाद घर के मुख्य प्रवेश द्वार के बीच में रख दे। द्वार पे नमन करें। कुछ देर द्वार खुला रहने दे।

इस तरह सुंदर भाव से पूजा करे।

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Day 3: दीपावली

दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।

लक्ष्मी पूजा विधि

दिवाली की पूजा आप वैसी ही करिये जैसी आप हर साल करते आए हैं।

इसके अलावा, आपने जो सिक्के (माता लक्ष्मी का स्वरूप) धनतेरस वाले दिन विराजमान किए हैं उसकी पूजा भी दीवाली वाले दिन करनी है।

धनतेरस वाले दिन की चौकी, चांदी के सिक्के, थाली, साफ करके विराजमान कर दे।

एक घी का दीपक और एक तेल का दीपक लगाये। ध्यान रखे की ये दोनो दीपक रात भर अखंड जलना है।

रोली, हल्दी, पीली चावल, चंदन, अबीर, गुलाल मेहंदी, फूल, माला, इत्र, 5/7 कमल गट्टे, 5/7 अमर बेल के टुकड़े, 5/7 हल्दी की गांठ आदि माता लक्ष्मी (जो सिक्के थाली में है) को समर्पित करें।

थोड़े हरी मूंग, साबुत धनिया, गुड़ भी समर्पित करें।माँ को मिठाई का भोग लगाये।

माता लक्ष्मी-गणेश की जो तस्वीर आप लेकर आए हो उसे भी पूजन वाली जगह रखकर उसकी पूजा करें।

माता को प्रणाम करें, अपने कुल देवी-देवता का स्मरण करें, पूर्वजो का स्मरण करें। अपने घर के मंदिर के सभी देवी देवता का स्मरण करें।

इसके बाद दिवाली पर जितने दीये आप जलाते हैं वो सब भी लगा ले। आनंद से दिवाली के त्यौहार को मनाये।

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Day 4: गोवर्धन पूजा

गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन की जाती है। इस त्यौहार को लोग अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। 

लक्ष्मी पूजा विधि

जिस थाली में चांदी के सिक्के स्थापित हैं उनको साफ करके जल का छींटा देकर उसकी पूजा करें।

पूजन के लिए रोली, चावल, मोली, हल्दी, 7 लाल फूल, 2 हल्दी की गांठ, 2 कमल गट्टे, 2 अमर बेल के टुकड़े समर्पित करे।

भोग में 2 तरह का मीठा चढ़ाये।

माता लक्ष्मी को घी के 5 दिए लगाए।

पूजा अर्चना करके माता लक्ष्मी से निवेदन करे की हे मां! आप हमारे यहां धन-वैभव-लक्ष्मी का भंडार भरे।

पांचों घी के दीपक से माता की आरती करें।

जब पूजा हो जाए तो पांचो दीपक को 5 अलग अलग जग स्थापित कर दे।

एक दीपक वही रहने दे जहां माता लक्ष्मी की पूजा हुई हैं। एक दीपक जहां गोवर्धन जी की पूजा किया है आपने वहां रख दे, एक दीपक रसोई में पानी के मटके के पास, एक दीपक घर के हॉल में, मुख्य दरवाजे के पास, और एक दीपक तुलसी के क्यारे के पास।

कुछ देर अपने द्वार के पास खड़े होकर माता का आह्वान करें तथा माता और साथ ही गिरिराज बाबा से विनती करें की वो आपके घर में लक्ष्मी संपदा की वृद्धि करें।

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Day 5: भाई दूज

भाई दूज कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।

लक्ष्मी पूजा विधि

माता लक्ष्मी की पूजा की थाली जिसमें दो सिक्के रखा था आपने, आज भी उस थाली की रोज की तरह पूजन करें।

1 कमल गट्टा, 1 हल्दी की गाँठ, और 1 अमर बेल का टुकड़ा, समर्पित करें।

घी के 5 दीये लगाये।

माता लक्ष्मी की सुंदर पूजा रोली, हल्दी, चंदन, अबीर, गुलाल, चावल, पुष्प, मेहंदी आदि से करें।

माता को भोग लगाये।

घी के दीपक से आरती करें।

झोली पसार कर माता से निवेदन करें की हे माँ! आप हमारे घर के अंदर सदा विराजमान रहिये।

इसके बाद अपनी झोली में दोनो सिक्के डाल लें, साथ ही जो एक कमल गट्टा, 1 हल्दी की गाँठ, और 1 अमर बेल का टुकड़ा है वो भी झोली में डाल लें।

जो चौकी/पाटा है उसे हिला के उसके स्थान से थोड़ा हटा दें, थाली हटा दें। हाथ में थोड़ा सा जल लेकर जहां चौकी स्थापना थी वहां पोछा फेर दें।

झोली के समान को सिक्के के साथ एक कपड़े या डब्बे में अपने तिजोरी या अमलमरी में शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी जी का नाम लेकर रख दें।

जो 5 दीपक आपने जलाएं थे उसको 5 अलग अलग स्थान पर रख दे।एक दिया तिजोरी में जहां सिक्के रखे हैं आपने उसके पास कहीं साइड में रख दिजिए, एक दिया अपने घर के मंदिर में, एक दिया रसोई में पानी के स्थान पर, एक दिया तुलसी के पास और एक दिया घर के मुख्य द्वार के पास हॉल में।

इसके बाद द्वार पर थोड़ा सा पीला चावल डालकर अंदर की तरफ प्रवेश करिये।

इस प्रकार ये 5 दिवस पूजन माता लक्ष्मी की विराम लेती है।

आप सब को दीवाली की बहुत बहुत शुभकामनाएं।

II 09 अक्टूबर 2022 : शरद पूर्णिमा के 9 विशेष उपाय II

शरद पूर्णिमा के उपाय

  1. दमे की बिमारी, श्वास की बिमारी या अनिद्रा की बिमारी ठीक करने के लिए – शरद पूर्णिमा की रात्री को 12 बजे पीपल के 5 पत्ते पर खीर रखकर खाने से दमे या श्वास की बीमार रुक जाती है।

  2. नेत्र ज्योति बढ़ाने के लिए – जिस व्यक्ति की नेत्र ज्योति कमज़ोर होती है उसे शरद पूर्णिमा की रात्री को 12 बजे चंद्र का दर्शन करना चाहिए। 5 से 7 मिनट तक चन्द्रमा के तरफ देखें। इसके बाद चंद्रमा की रोशनी में रखी हुई खीर को थोड़ा सा लेकर पीपल के पत्ते पर रख ले और उसका थोड़ा सा भाग चाटकर फिर चंद्र का दर्शन करें। पुनः पीपल के पत्ते पर रखी खीर खाए फिर दर्शन करे। इसी प्रकार पत्ते पर रखी सब खीर का सेवन धीरे धीरे कर ले और दर्शन करते जाए। इस उपाय से नयन की ज्योति भी बढ़ती है और अगर रात को नींद नहीं आती तो वो समस्या भी दूर हो जाती है।

  3. गांठ, दाग, दाद खुजली – शरद पूर्णिमा की रात 12 बजे चंद्रदेव के लिए 21 दिए जलाए और दिए की गालोच/काजल एक थाली में इकट्ठी कर ले। गाय के घी में काजल को मिला कर जहां गठान, दाग, खुलजी या चमड़ी का रंग काला या सफेद हो, वहाँ लगा ले। कम से कम एक सप्ताह रोज लगाये। लगाने के आधे घंटे बाद स्नान कर ले। आराम लगना शुरू हो जाता है।

  4. शरद पूर्णिमा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक रोज़ाना भगवान कृष्ण/ भगवान विष्णु/ भगवान शिव का पूजन अभिषेक करने से सारे दुख दरिद्र दूर हो जाते हैं।

  5. लक्ष्मी नहीं आ रही, व्यापार नहीं चल रहा, कर्जा है, तकलीफ है – तो एक तांबे के कलश में जल भर ले। उसके ऊपर एक कटोरी रखे। कटोरी के ऊपर लक्ष्मी माता की मूर्ति रख ले। मूर्ति ना हो तो एक चांदी का सिक्का रख ले। अब कलश के सामने मिट्टी के 31 दिए में घी का दीपक लगाए लम्बी बाती का। हर एक दिए के अंदर एक कमल गट्टा डाल ले। इसके बाद अक्षत, रोली, हल्दी, कुमकुम, फूल आदि से लक्ष्मी जी की पूजा करे। 5 पान के पत्ते पर खीर रखकर भोग लगाए। माता लक्ष्मी से विंति करे। सुबह 4 बजे तक खीर वही रहने देना है। उसके बाद खीर उठा लेना। लक्ष्मी जी को वापस जहां रखते हैं वहां रख दिजिये। खीर को बाद में कभी भी प्रसाद के रूप में सबके साथ खालेना है। दिए ठंडे होने के बाद विसर्जन भी कर सकते हैं या बाद के इस्तेमाल के लिए रख सकते हैं। इस उपाय से सुख, समृद्धि, कार्य की सिद्धि भी होती है।

  6. मनोकामना पूर्ति के लिए – शरद पूर्णिमा के दिन शाम को प्रदोष काल के समय एक लोटा जल में 5 बेल पत्र, एक कमल गट्टा डालकर, चंद्रेश्वर महादेव के नाम से भगवान शंकर को चढ़ा दिजिये। जो भी मनोकामना से आप ये जल चढ़ाएगे उसका फल बाबा आपको कार्तिक पूर्णिमा आने तक जरूर दे देंगे।

  7. शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा की रात को अगर गर्भवती महिलाएं अपनी नाभि पर चंद्र की रोशनी पड़वा लेती है तो बच्चा विकलांग नहीं होता है। बच्चा स्वस्थ होगा, विद्वान होगा, पढ़ने में चतुर होगा।

  8. किसी परीक्षा में बार बार फेल हो रहे हैं या कोई जरूरी कार्य है जो हो नहीं रहा तो शरद पूर्णिमा के रात को 7 अक्षत के दाने लेकर केसर के इत्र में भीगा ले। केसर का इत्र ना हो तो कोई भी इत्र का प्रयोग कर ले। सातो दाने चावल के और एक सफेद फूल लेकर शिव मंदिर जाए और अपनी कामना करके शिवलिंग पर चढ़ादे। मंदिर नहीं खुला हो तो बेल पत्री के पेड़ के नीचे खड़े होकर चंद्रमा को देखते हुए पेड़ में समर्पित कर दे अपनी कामना करके। अगली पूर्णिमा आने तक बाबा आपका कार्य सफल जरूर कर देंगे।

  9. धन संपदा की समस्या दूर करने के लिए – शरद पूर्णिमा के दिन शंकर भगवान के शिवलिंग पर एक सफेद फूल चढ़ाकर एक लोटा जल चढ़ाने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

कर्जा ना हो इसके लिए करे ये उपाय

  • अगर आप किसी काम को करना चाहते हैं पर पैसे नहीं हो पास में तो कर्ज लेकर उस काम को करने के जगह एक बार बाबा भोलेनाथ की शरण में जाए।
  • 7 दिन तक लगातार बाबा के शिवालय जाकर घी का दीपक लगाये, बेल पत्र समर्पित करे और एक लोटा जल चढ़ाना प्रारंभ करे।
  • बाबा से अपनी कामना बताए और विंति करे कि पैसे का इंतजाम हो जाए ताकी कर्जा लेकर काम न करना पड़े।
  • एक बेल पत्र उठाकर घर ले आए और अपने तिजोरी वाले स्थान पर या मंदिर में अच्छे से रख दे।
  • रोज़ाना 7 दिन तक ऐसा करे और बाकी सब बाबा पर छोड़ दे। बाबा आपकी मदद कैसे करेंगे वो तो बाबा ही बताएंगे।बस आप अपना विश्वास पूरा रखकर इस उपाय को करिए।
विवाह, संतान, दुख, बिमारी के लिए शिवलिंग पर करे लाल चंदन का प्रयोग
1. अगर कोई रोग, बिमारी, दुख, तकलीफ हो जीवन में जो कट ही नहीं रही हो तो लाल चंदन को घिस कर भगवान शंकर के शिवलिंग पर उसका लेपन करके फिर जल चढ़ा कर अभिषेक करें।

2. किसी नारी को संतान नहीं हो रही हो, गर्भ नहीं रुक रहा हो तो, लाल चंदन घिस कर भोले बाबा के शिवलिंग का अच्छी तरह से श्रृंगार करें। पूरे शिवलिंग पर लाल चंदन का लेपन करे, पीठिका पर भी अच्छे से लेपन करे। इसके बाद एक लोटा जल चढ़ाए।बाबा से प्रार्थना करें। रोज़ ऐसा करें।

3. और अगर 20 साल, 25 साल हो गए और संतान नहीं तो ऐसे में सबसे पहले बाबा के शिवलिंग पर जल समर्पित करे, और उस जल का थोड़ा सा भाग झेल कर आचमन कर ले। इसके बाद हाथ धोकर वापस से बाबा को जल समर्पित करें। फिर लाल चंदन से शिवलिंग का श्रृंगार करे, और पुनः एक लोटा जल चढ़ाए ।एक बेल पत्ती लेकर नीचे की दो पत्ती पर लाल चंदन लगाये और बीच की पत्ती पर पीला चंदन लगाये और बाबा के शिवलिंग को समर्पित करे।जिस नारी को 20 साल 25 साल से संतान नहीं हो रही हो, इस उपाय से बाबा उस नारी की भी गोद भर देते हैं।

4. जिन बच्चों का विवाह नहीं हो रहा हो, उम्र भी निकल रही हो उन्हें भी बाबा को लाल चंदन लगाना चाहिए। इसके लिए माता अशोक सुंदरी वाले स्थान पर लाल चंदन की 7 बिंदी लगाए और हर बिंदी पर बेल पत्र समर्पित करे। अपनी कामना करे बाबा से। बाबा 3 से 4 महीने में विवाह पक्का कर देंगे।

लक्ष्मी प्राप्ति और विवाह के लिए बेल पत्र के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं 
बेल पत्र के पेड़ के नीचे रोज़ाना शाम को प्रदोषकाल में दीपक लगाने से लक्ष्मी की वृद्धि होती है।यदि व्यापार नहीं चलता या कर्जा बढ़ गया हो तो इस उपाय से लक्ष्मी आती है।
बेल पत्र के पेड़ के नीचे की मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करने से हजारो लाखो गुना पुण्य प्राप्त किया जा सकता है।
जिस बच्चे का विवाह संबंध पक्का नहीं हो रहा हो वो बेल पत्र के पेड़ के नीचे शिवलिंग का निर्माण करे, पूजा आराधना करके घी का दीपक लगाये और शिवलिंग का विसर्जन पास के नदी, तालाब में कर दे। विसर्जन के बाद वापस आकर बेल पत्र के पेड़ के नीचे एक घी का दीपक लगाए। 7 परिक्रमा बेल के पेड़ की करे। झोली पसार कर प्रणाम करके बेल पत्री के पेड़ के नीचे की मिट्टी को मस्तक पर लगा ले। 3 से 4 महीने में बच्चे का विवाह पक्का हो जाता है।

स्वधा नाम से पितृदोष से मुक्ति का उपाय

  1. अगर किसी के घर में पितृदोष हो तो, एक चावल का दाना हथेली पर रखकर, रसोई घर में जहां पानी का मटका या हंडा रखता है उसके पास खड़े होकर अपने पितृ का स्मरण करके, 5 बार स्वधा नाम का उच्चारण करें। उसके बाद चावल के दाने को शिवलिंग पर अर्पित कर देना है। शिवलिंग अगर घर के मंदिर में हो तो वहां भी समर्पित किया जा सकता है या आपके घर के पास जो भी शिवालय हो, वहां भी जाकर समर्पित किया जा सकता है। इस उपाय से घर में कैसा भी पितृदोष हो वो समाप्तहो जाता है।
  2. अगर आपके घर में पितृदोष हो तो प्रत्येक एकादशी के दिन भगवान शंकर के मंदिर जाकर शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाये और उसके बाद 3 बार ‘स्वधा’ नाम का स्मरण कर ले। (स्वधा-स्वधा-स्वधा)। या फिर जल चढ़ाने के बाद स्वधा स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। इस उपाय से घर में भले ही जितना भी पितृदोष हो, वो सब धीरे धीरे समाप्त होना शुरू हो जाएगा।

शादी में विलंब हो रहा तो करे ये उपाय

  • मान लीजिए किसी बच्चे के विवाह में देरी हो रही हो, या संबंध नहीं जम रहा हो तो अपने पितृ का स्मरण करके प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर जल चढ़ाना प्रारंभ कर दे।
  • पर जल चढ़ाने का तरीका थोड़ा सा अलग रहेगा।
  • एक लोटा जल लेकर शंकर जी के मंदिर जाए। शिवलिंग पर जहां माता पार्वती का हस्तकमल होता है वहां जल के कलश को 7 बार घुमाये और फिर जल को शिवलिंग पर समर्पित कर दे।
  • बाबा से अपने विवाह की कामना करे।
  • इस उपाय को करने से 3 से 4 महीने के अंदर बच्चे का विवाह जम जाता है बाबा की कृपा से।

कुंदकेश्वर महादेव और 5 काली मिर्ची का उपाय

  • महीने में एक बार, जल के लोटे में थोड़ा सा दूध डालकर उसमें 5 काली मिर्च डालकर, शंकर भगवान के शिवलिंग पर कुंदकेश्वर महादेव के नाम से समर्पित करने से जिंदगी में कभी भी कोई बड़ी बिमारी नहीं होती है।
  • जिस व्यक्ति को किसी तरह का अटैक आता हो, नसे चोक हो गई हो, ब्लड के थक्के जम गए हो, बायपास या कोई अन्य बड़े ऑपरेशन के लिए डॉक्टर ने बोला हो तो वो व्यक्ति अगर इस उपाय को 5- 6 बार कर ले तो ऑपरेशन की भी ज़रुरत नहीं पड़ती। जो बिमारी है वो भी जड़ से समाप्त हो जाती है।

विकट समस्या के समाधान के लिए प्रदोष का उपाय

  • अगर कोई बहुत विकट समस्या है, जिसका हल नहीं मिल रहा है और आप बहुत ज्यादा तकलीफ में हो तो प्रदोष के दिन प्रदोषकाल में 51 बेल पत्र लेकर शंकर जी के मंदिर जाए।
  • एक-एक बेलपत्र अपनी मन की कामना करते हुए बाबा को समर्पित करें।दिल से चढ़ाये और बाबा को अपनी समस्या बताए जाए।
  • झोली पसार के बाबा से निवेदन करें।
  • अगला प्रदोष आने तक बाबा कृपा कर ही देंगे।

चर्म रोग से मुक्ति के लिए तुमरुका जी का उपाय 

  • अगर किसी को सफेद दाग की समस्या है, या त्वचा काली पड़ने लगी हो, शरीर पर दाने या चट्टे जैसे पढ़ने लगे हो तो प्रदोष वाले दिन का ये उपाय करके देखे।
  • एक लोटा जल तुमरुका जी के नाम से और वटकेश्वर महादेव के नाम से शिवलिंग पर समर्पित करना है। इस जल को एक पात्र में झेल कर ले आए और प्रदोषकाल में स्नान कर ले।
  • मातृ 3 प्रदोष ये उपाय कर लेने से शरीर में कैसा भी चर्म रोग हो वो अच्छा हो जाता है।

नारी को यह 2 लोगों के नाम कभी नहीं लेना चाहिए

  • स्कंद पुराण में लिखा है की अगर कोई नारी अपने पति का नाम लेती है तो उसके पति की आयु तिल भर की क्षीण होती चली जाती है।
  • नारी अगर अपने ज्येष्ठ पुत्र का नाम लेती है, तो वो पुत्र जिंदगी भर तन, मन, धन से दुखी ही रहता है। समृद्धि वैभव यश घटने लगते हैं।
  • अगर घर में ज्येष्ठ बच्चा पुत्री हो तो उसके बाद जन्मे पुत्र का नाम नारी ले सकती है, लेकिन अगर पहली संतान लड़का हो तो माता को अपने बेटे को उसके आधिकारिक नाम से नहीं बुलाना चाहिए।माता ज्येष्ठ पुत्र को किसी भी अन्य प्यार भरे नाम से पुकार सकती है।
  • इसके साथ ही किसी भी शिष्य को, जिसने किसी गुरु से गुरुमंत्र लिया हो, उसे भी अपने गुरु का नाम नहीं लेना चाहिए।

उन्नति के लिए श्राद्ध पक्ष में करे गंगाजल का उपाय

  • अगर आपको ऐसा लगे की आपका विकास नहीं हो रहा है, या आप उन्नति की ओर नहीं बढ़ पा रहे हैं तो श्राद्ध पक्ष में एक उपाय करके देखे।
  • एक छोटी सी कटोरी (या गिलास, या कलश) में जल डाल कर, उसमे थोड़ा सा गंगाजल मिला ले।
  • अब इस जल को लेजाकर थोड़ा सा भाग बेल पत्र के वृक्ष में समर्पित करे और थोड़ा सा जल बचा कर शंकर भगवान के शिवलिंग पर समर्पित कर दे।
  • बाबा से विंति करें की हे बाबा! मेरी उन्नति नहीं हो रही, मैं बहुत दुखी हूं, आगे नहीं बढ़ पा रहा हूं। आप संभाल लेना बाबा…
  • ये जरूरी नहीं की उपाय श्राद्ध के 16 दिन किया जाए तभी असर करेगा..
  • जितने भी दिन रह गए हैं उसी समय से इस उपाय को करना शुरू कर दे।
  • बाबा ज़रुर सुनेंगे और श्राद्ध के बाद जब नवरात्रि आएगी तो आपको खुद पता लग जाएगा कि आपकी उन्नति हुई की नहीं….

कुंदकेश्वर महादेव का अदभुत उपाय

उपाय 1

  • अगर किसी व्यक्ति को दवा खाने का असर नहीं हो रहा है और वो व्यक्ति अपनी दवा खाने से पहले एक बार कुंदकेश्वर महादेव का स्मरण करके बाबा से विनती करे की हे बाबा! ये दवा मेरे शरीर को लगने लगे। इसके बाद दवा खाए। ऐसा करने से दवा अपना असर करना शुरू कर देता है।

उपाय 2

  • किसी भी रोग बिमारी की जाँच कराने जाना हो या ऑपरेशन के लिए जाना हो, या मान लें कि मन में किसी बड़ी बीमारी होने का डर लग रहा हो तो कुंदकेश्वर महादेव के नाम का स्मरण करना चाहिए।
  • इससे होता ये है की जाँच की रिपोर्ट्स नॉर्मल आती है, ऑपरेशन की भी जरूरत नहीं होती और जिंदगी में कभी कोई भारी रोग भी नहीं होता।
  • कुंदकेश्वर महादेव बिमारी और रोग मुक्ति के देवता है। काल को भी हर लेने वाले है।
  • मन अशांत हो तो भी कुंदकेश्वर महादेव का नाम स्मरण करते रहना चाहिए।

उपाय 3

  • अगर कोई व्यक्ति रोग से ग्रसित हो और वो रोग पीछा ही नहीं छोड़ रहा हो तो एक लोटा जल और एक बेल पत्र शंकर भगवान के मंदिर लेकर जाए।
  • कुंदकेश्वर महादेव के नाम से बेल पत्र शिवलिंग पर समर्पित करें और पत्ती की डंडी का मुख अशोक सुंदरी वाली जगह होना चाहिए।
  • इसके बाद एक लोटा जल धीरे-धीरे उस बेल पत्ती पर समर्पित करें, अपने मन की कामना करते हुए। जहां से जल नीचे गिरता है वहां से थोड़ा सा जल एक पात्र में उठाकर ले आए और उस जल का आचमन करे।
  • इस उपाय से रोग धीरे-धीरे करके हमेशा के लिए समाप्त होना लगता है।

उपाय 4

  • अगर किसी व्यक्ति के पेट में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो कुंदकेश्वर महादेव के इस सरल से उपाय से दर्द में तुरंत आराम मिल जाता है।
  • आपके रसोई घर में जहां भी पानी का स्थान हो जहां पानी का मटका, बाल्टी, आरो रखा हो या जल स्रोत हो, वहां खड़े हो कर एक कटोरी या ग्लास में थोड़ा सा जल लेकर कुंदकेश्वर महादेव का स्मरण करना है कम से कम 7 बार। फिर भोले बाबा का स्मरण करके जल को उस व्यक्ति को पिला देना है जिसको पेट में दर्द हो रहा है।
  • 10 से 15 मिनट में दर्द में आराम लगाना शुरू हो जाता है।

उपाय 5

  • कोई व्यक्ति जो किडनी, लीवर, कैंसर, सोरायसिस, त्वचा रोग या कोई अन्य बड़ी बीमारी से पीड़ित है, अगर वो रोज़ाना शंकर भगवान के शिवलिंग पर एक लोटा जल कुंदकेश्वर महादेव के नाम से समर्पित कर के जलाधारी से गिरते हुए जल का आचमन भी कुंदकेश्वर महादेव के नाम से करने लगे तो धीरे-धीरे उसके शरीर के सब रोग समाप्त होने लगते हैं। किडनी डायलिसिस भी इस उपाय से बंद हो जाती है।

रोग मुक्ति के लिए हनुमान जी का उपाय

  • दर्पण, जिसमे हम अपना चेहरा देखते हैं, वैसा एक छोटा सा दर्पण ले आए।
  • हनुमान जी के मंदिर जाकर हनुमान जी के बाएं पैर का थोड़ा सा सिंदूर ले आए।
  • अब शंकर भगवान का स्मरण करके और गतिमान हनुमान के नाम से इस सिंदूर से दर्पण पर त्रिशूल बनाएं, और दर्पण को अपने घर के बाहर, दरवाजे के ऊपर, या गेट के ऊपर,या किसी दीवार के ऊपर लगा दे ।
  • ध्यान रखना है की दर्पण का चेहरा बहार के तरफ होना चाहिए। घर के अंदर की तरफ दर्पण का चेहरा नहीं रखना है।
  • इस उपाय से कोई भी बड़ी रोग बिमारी घर में प्रवेश नहीं कर सकती है।

चोक नाड़ी को खोलने का उपाय

  • अगर किसी व्यक्ति की नाड़ियां चोक हो गई हो, या डॉक्टर ने बाईपास के लिए बोल दिया हो, तो एक बार शंकर भगवान के इस उपाय को करके जरूर देखें।
  • एकादशी और द्वादशी के दिन पीपल के पत्ते को ताम्बे के पात्र में कुछ देर डाल कर गला ले।
  • इसके बाद उस पानी का 3 बार आचमन एकादशी और द्वादशी के दिन कर ले।
  • पीपल के पत्ते के इस उपाय से चोक नाड़ियां भी खुल जाती है और बाईपास सर्जरी की भी जरूरत नहीं आती।

कार्य सिद्धि का नया उपाय

  • अगर आप अपने किसी कार्य को लेकर बहुत परेशान है जो बहुत दिन से अटक रहा है, या आपकी कोई बहुत बड़ी समस्या है जो हल ही नहीं हो रही है तो भोलेनाथ पर विश्वास रखकर बाबा का एक सरल सा उपाय करना शुरू कर दें।
  • इस उपाय में आपको एक लोटे जल में थोड़ा सा चंदन और एक सफेद फूल डालकर बाबा के शिवलिंग पर समर्पित करना है।
  • हो सके तो लाल चंदन का इस्तेमाल करें।
  • अपने हृदय की कामना करते हुए धीरे धीरे जल समर्पित करे।
  • कम से कम 21 दिन तक इस उपाय को करके देखे।
  • आप अपना कर्म करते जाएं और फल बाबा के हाथ में छोड़ दें।
  • बाबा आपकी समस्या का निवारण ज़रुर करेंगे।

पेट की बीमारी दूर करने के लिए सफेद दूर्वा (दूब) का उपाय

  • पेट से संबंधित कैसी भी समस्या से छुटकारा पाने के लिए सफेद दूर्वा घास जो कुंआ के पास उपलब्ध होती है वो गणेश भगवान को समर्पित करना चाहिए।
  • आप चाहे तो घर में विराजमान गणेश जी को भी समर्पित कर सकते हैं या फिर मंदिर के गणेश जी को भी।
  • इसके लिए 41 सफेद दूर्वा को गांठ लगाकर बुधवार को गणेश भगवान को समर्पित करना है। बाबा से निवेदन करने के बाद उस दूर्वा को वापस उठा लेना है।
  • फिर खाली पेट चबा चाबा कर दूर्वा को खा लेना है। आधे घंटे बाद पानी पी लेना है ।
  • 5 बुधवार यह उपाय को कर लेने से पेट की कैसी भी बिमारी हो वो हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।

श्राद्ध पक्ष में गंगाजल से करे पितरों की शांति

16 श्राद्ध में, (श्राद्ध पक्ष में), घर में अगर गंगाजल हो तो तुलसी के क्यारे के पास में एक छोटी सी कटोरी रखकर, घर का कोई भी व्यक्ति, (चाहे महिला हो, पुरुष हो, बच्चा हो), हथेली में गंगाजल लेकर, काशीविश्वनाथ के नाम से अपने पूर्वजो का नाम स्मरण करके उस कटोरी में 5 बार या 7 बार छोड़ दे तो उसके पूर्वजो को पिंड दान की जरूरत नहीं पड़ती है, अपने आप मोक्ष प्राप्त हो जाता है।

हरतालिका तीज की पूजन-विधि

  • हरतालिका तीज भादो महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन मनाया जाता है।
  • तीज का व्रत करने वाली नारी या कुवारी कन्या को पूर्ण श्रृंगार करना चाहिए।
  • यह व्रत प्रदोषकाल से शुरू होता है।
  • हरतालिका तीज की पूजा 5 पहर की होती है जो प्रदोष काल से शुरू हो कर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में अंत होती है।
  • जब आखिरी पहर की पूजा होती है तो उसमें व्रत करने वाली माता पार्वती जी को सिंदूर दान देती है और सिंदूर को अपने मांग में भी भरती है।
  • अलग अलग पूजन में भगवान की अलग अलग आरती होती है।
  • पूजा की थाली वही की वही रहती है। उसीसे पूरी रात पूजन होती रहती है।

पूजन-विधि

  • हरतालिका तीज की पूजा में एक पाटा रखकर उसके ऊपर केले के पत्ते लगाकर पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया जाता है। पार्वती और गणेश जी का निर्माण किया जाता है।
  • शिवलिंग के ऊपर फूल पत्तियों से फुलेरा बनाकर लटकाया जाता है, जो की बहुत जरूरी होता है।
  • जल, पंचामृत स्नान, चंदन, धूप, दीप, फल, मिठाई का भोग, आदि से पूजा अर्चना करने के बाद कथा सुनाया जाता है। 
  • रात भर शिवजी की आराधना, भजन, कीर्तन, मंत्र स्मरण किया जाता है।
  • आखिरी पहर की पूजन, आरती, सिंदूरदान हो जाने के बाद, शिवलिंग का विसर्जन किया जाता है।
  • विसर्जन किसी नदी, तालाब या जहां बहता पानी हो वहां किया जाता है।
  • विसर्जन के लिए पार्थिव शिवलिंग को ले जाने से पहले जो फुलेरा ऊपर लटका है उसे खोल लेना चाहिए और उसमें जो फूल पत्ती माला लगी है उनको निकाल कर नीचे रख लेना चाहिए। फुलेरे की फूल पत्तियों को प्रणाम करते हुए माता पार्वती से विंति करनी चाहिए की जैसे आपका अखंड सौभाग्य है वैसा ही पूजा के फल स्वरूप हम पर कृपा करिये की हमारा भी अखंड सौभाग्य रहे।
  • प्रणाम करने के बाद फुलेरा और बालू-रेत के शिवलिंग को विसर्जन के लिए ले जाए। पहले शिवलिंग का विसर्जन करे और उसके ऊपर फूल पत्तियों का। फुलेरा को बनाने में जो बास, डंडी या दलिया का उपयोग किया गया था उसका विसर्जन नहीं करना है पानी में, जिससे की पानी प्रदूषित ना हो।
  • जो नारी व्रत करती है उसे विसर्जन तक जरूर जाना चाहिए।

फुलेरा लटकाने से क्या लाभ या फल की प्राप्ति होती है?

  • शिवमहापुराण के अनुसार जिस बच्चे के विवाह में देर हो रही हो, शादी नहीं तय हो रही हो वो अगर तीज वाले दिन कोई भी 7 फुलेरे का दर्शन कर ले तो 3 महीने में विवाह पक्का हो जाता है।
  • इसी तरह, जो नारी का पति बहुत ज्यादा रोग से ग्रसितरहता है वो भी अगर 7 फुलरे का दर्शन कर ले तो अखंड सौभाग्यवती हो जाती है।
  • 7 फुलेरा कहीं का भी हो सकता है, यानी मंदिर हो या घर हो। बस ध्यान ये रखना है की ये सात फुलेरे का दर्शन अलग अलग जगह होना चाहिए।

बच्चों के तेज बुद्धि के लिए उपाय

  • किसी परीक्षा में बैठना हो, या फिर कोई विषय हो जो समझ न आती हो, कोई प्रश्न हो जो हल नहीं हो रहा, तो बच्चों के लिए शिव महापुराण में एक बहुत अदभुत उपाय बताई गई है।
  • चंदन को घिस करके शंकर भगवान के शिवलिंग के ऊपर उसका लेपन करना है। 5 मिनट लगा रहने देने के बाद उस चंदन को शिवलिंग में से थोड़ा सा भाग निकाल कर अपने माथे के बीच में लगा लेना है।
  • बाबा से प्रार्थना करें और फिर जो भी परीक्षा हो उसे देने जाए।
  • या जो विषय नहीं समझ आ रहा उसे याद करने बैठे, जो प्रश्न नहीं हल हो रहा है वो प्रश्न हल करने बैठे।
  • दुबारा कभी उस सवाल का जवाब भूल नहीं सकता है बच्चा।

अशांत मन और घबराहट को रोकने का उपाय

  • कभी अगर चिड़चिड़ाहट या घबराहट महसूस हो, या मन आशांत सा लग रहा हो, आंखें फड़क रही हो, डर लग रहा हो की कुछ गलत होने वाला है, कोई कष्ट, तकलीफ, बिमारी या रोग आने वाली है तो शंकर जी का यह उपाय करके लाभ उठाये।
  • 7 दुर्बा लेनी है। शिवलिंग पर जहां माता अशोक सुंदरी वाली जगह है वहा चंदन का लेपन करके सभी सात दुर्बा को समर्पित कर देना है।
  • दुर्बा को ऐसे रखना है की उसकी डंडी का मुह जहां से पानी नीचे गिरता है उस तरफ हो और पत्ती का मुह शंकर भगवान के तरफ हो।
  • अब हाथ को दुर्बा से स्पर्श करके बाबा से अपने मन की बात शेयर करना है। और बाबा से विंति और निवेदन करके सातो दुर्बा घर ले आओ।इसके बाद जल का एक पात्र लेना है और उसमे इस दुर्बा को डाल कर दुर्बा से संपूर्ण घर में उस जल का छिड़काव कर देना है, श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र बोल बोलकर । शिव महापुराण के अनुसार 15 मिनट लगेगा और खुद महसूस होने लग जाएगा कि घर की नकारात्मकता सकारात्मकता में बदल रही है। मन भी शांत होने लगा।

पति-पत्नी के रिश्ते को टूटने से बचाने का उपाय

  • कभी ऐसी स्थिति आ जाए की पति-पत्नी के रिश्ते टूटने के कगार पर हो, तलाक की नौबत आ रही हो, बेटी को ससुराल में सम्मान नहीं मिल रहा हो और आप चाहते हैं कि संबंध टूटने से बच जाए तो भोलेबाबा के यह एक उपाय को ज़रुर करे।
  • थोड़ी सी हरी मूंग को पानी में गला ले। शिव मंदिर जाकर अवधूतेश्वर महादेव का नाम लेकर उस मूंग को नंदी के पैर के पास समर्पित कर दे। फिर मूंग के ऊपर 7 बेल पत्र को समर्पित कर दें ।
  • नंदी बाबा से अपनी समस्या बोल कर बेल पत्र उठाकर शिव जी के शिवलिंग पर समर्पित कर दें।
  • मूंग को उठाकर सड़क पर या गौशाला में कोई नंदी हो तो उसे खिला दे।
  • 3 या 4 प्रदोष करके देखेंगे तो तलाक तक बात नहीं पहुंचेगी, पति पत्नी के बीच आप में प्रेम बढ़ जाएगा, बेटी को ससुराल में सम्मान मिलने लगेगा, तनाव समाप्त हो जाएगा, परिवार नहीं टूटेगा।

शिव महापुराण में बताए तुम्बुरुका जी के अदभुत उपाय

संतान प्राप्ति के लिए 

  1. अगर किसी के यहां संतान नहीं हो रही है, और बहुत साल निकल गए तो इस सफेद आक के उपाय तो जरूर करके देखे। सफेद आक के जड़ को पति पत्नी लेकर आए। नारी के पीरियड्स के सातवें दिन शिव मंदिर जा कर शिवलिंग के ऊपर से उस जड़ को तुमरूका जी का नाम लेकर 21 बार घुमा लिजिये। फिर शिव मंदिर में ही जहां नंदी महाराज का स्थान होता है वहा नंदी के पीछे खड़े हो कर शिवलिंग के दर्शन करते करते आक के जड़ को लाल धागे से नारी को अपने कमर में बांध लेना है तमरूका जी का नाम लेकर। इसके साथ ही, एक पीपल का पत्ता शिवजी को कुंदकेश्वर महादेव के नाम से समर्पित करके घर ले आए और उसे गाय के दूध में उबाल कर  दोनो पति पत्नी को रात में सोने से पहले पी लेना है। रोज़ मंदिर जा कर एक पत्ता समर्पित करना है और घर लेआकर उसका पान करना है। पीपल की पत्ती जब ठंडी हो जाए तो आप कहीं विसर्जित कर सकते हैं। रोज़ मंदिर जाना संभव ना हो तो एक दिन में 5 पत्ती समर्पित करके 5 दिन उस पत्ती का उपयोग कर सकते हैं एक-एक कर के। 5 दिन बाद जब पत्ती खतम हो जाए तो फिर 5 पत्ती समर्पित करके ले आए और नियम से इसका पान करते रहे जब तक आपकी मनोकामना पूरी ना हो जाए। बाबा से दिल से विनती करना। आपकी मनोकामना भी महादेव जरूर पूरी करेंगे।
  2. अगर किसी नारी का गर्भ 2 – 4 महीने चढ़ने के बाद बार बार गिर जाता हो या बच्चा स्वस्थ पैदा नहीं होता हो या डॉक्टर ने कहा हो की ऑपरेशन से डिलीवरी होगी तो उस नारी को अपनी लंबाई के बराबर का एक मोली ले के एक नारियल पे लपेट के तुम्बरुका जी का नाम स्मरण कर के शंकर जी के शिवलिंग के पास में नारियल को रख देना है। ऐसा करने से बच्चा स्वस्थ पैदा होगा और गर्भ भी नहीं गिरेगा।
  3. अगर डॉक्टर ने बच्चा ऑपरेशन से होने का बोल दिया हो तो एक काम करिए की गुड़ के 7 टुकड़े लीजिये और उसे अपने दाहिने हाथ के हथेली पर रख के तुम्बरुका जी का नाम ले कर शंकर जी के शिवलिंग से घुमा कर उस गुड को गर्भवती नारी को थोड़ा थोड़ा कर के खिला दिजिये। बच्चा नॉर्मल ही होगा, ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  4. श्रावण माह का पहला दिन और आखिरी दिन तुमरुका जी का नाम लेकर अशोक सुंदरी वाली जगह पर एक बेल पत्र जो समर्पित कर देता है तो उसके घर में वंश की कभी कमी नहीं आती। संतान अवश्य प्राप्त होता है, वंश बढ़ता है।

रोग मुक्ति के लिए

  1. घर में अगर किसी को बहुत ज्यादा बड़ी बिमारी हो गई हो या कोई वेंटिलेटर पे पड़ा हो और बचने की उम्मीद भी ना हो तो एक बार ये उपाय कर के देखे। दो कलश ले, एक में दूध भर ले और दूसरे में जल। दोनो कलश में 5-5 बेल पत्र डाल ले। शंकर जी के मंदिर जाए और जो व्यक्ति बिमार है उसका नाम और गोत्र बोल कर श्री तुम्बरुका जी का स्मरण कर के श्री शिवाय नमस्तुभ्यम का जाप करते करते जल को शंकर जी के शिवलिंग पे चढ़ा दिजिये। दिन भर में 3 बार (यानी सुबह, दोपहर, और शाम को प्रदोष काल में) चढाओ। 3 दिन के अंदर ही बीमार व्यक्ति की तबियत में सुधार आना शुरू हो जाएगा।
  2. अगर किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आ गया हो और उसे हॉस्पिटल ले जाने की नौबत आ गई तो इस उपाय से वह व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ हो कर घर वापस आ जाता है।एक लोटा जल श्री तुमब्रुका जी के नाम से माता अशोक सुंदरी वाले स्थान पर समर्पित किया जाता है और उसमें से थोड़ा जल बचाकर शंकर भगवान के शिवलिंग पर चढ़ा दिया जाता है। तुमब्रुका जी के नाम में इतनी प्रबलता है कि जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक आया है वो स्वस्थ होकर सही सलामत घर वापस आता ही है।

नेत्रों की ज्योति बढ़ाने के लिए

  1. शंकर जी के मंदिर जाए और तुम्बरुका जी का नाम ले कर एक घी का दिया लगाये। दिए पर एक प्लेट रख दीजिये और फिर इसका काजल निकाल के गाय के घी में मिला के आंखों में लगाना शुरू कर दिजिये। साथ ही तुम्बरुका जी का नाम स्मरण करते हुए, चांद को देखिए, नाम स्मरण करिए। इस उपाय से आंखों की रोशनी बढ़ेगी, चश्मा भी उतर जाएगा।

पति पत्नी के बीच के विवाद को समाप्त करने के लिए 

  1. अगर घर में लड़ाई चल रही है, क्रोध हो रहा है, विवाद हो रहा है, या पति पत्नी में झगड़ा हो रहा है, बात तलाक और अदालत तक भी पहुंच गई हो तो एक श्रीफल (नारियल) पूरे घर में घूमाकर, एक मोली उनके नाम की जिनके बीच विवाद चल रही हो और तुम्बुरुका जी का नाम स्मरण करके श्रीफल पे लपेट दीजिये। फिर इस श्रीफल को भगवान शंकर को समर्पित कर दिजिए तुम्बुरुका जी के नाम से। पति पत्नी के बीच तलाक की नौबत भी आ गई हो तो भी दोनो में प्रेम हो जाता है। और घर के किसी दूसरे सदस्य के बीच भी विवाद चल रहा हो तो आपस में फिर से प्यार बढ़ जाता है।

बच्चे की बुद्धि विवेक को तेज़ करने के लिए

  1. जो बच्चा पढ़ने में कमजोर होता है, उसकी बुद्धि विवेक को तेज़ करने के लिए किसी भी महीने की शिवरात्रि वाले दिन एक पीपल के पत्ते पर शहद रख के तुम्बरुका जी का नाम ले कर शिवलिंग पे चिपका दिया जाता है और वापस उस पत्ते को निकाल के बुद्धि से कमजोर बच्चे को चटाया जाता है मंदिर की सीढ़ियों पे बैठा कर। ऐसा करने से उस बच्चे की बुद्धि विवेक तेज हो जाति है और बच्चा पढने में बहुत विद्वान हो जाता है।
  2. अगर किसी के बच्चे गलत संगत में पड़ने लगे हो, या फिर किसी गलत धर्म की तरफ जा रहे हैं या कोई अन्य धर्म में विवाह कर रहे हैं, या अपनी मर्जी से गलत जगह विवाह करना चाहते हैं तो ऐसे में तुम्बरुका जी का नाम लेकर कमलगट्टे का जल भगवान शंकर को समर्पित करना चाहिए। इस उपाय से बच्चा ना गलत धर्म में जाते हैं ना गलत जगह संबंध होता है।

व्यापार में उन्नती के लिए

  1. अगर व्यापार व्यवसाय या फैक्ट्री एकदम बंद सी हो गई हो तो एक तांबे के कलश में जल भर लीजिये। एक बेल पत्र अपने दाहिने हाथ की हथेली पर रख के उसके ऊपर तांबे का कलश रख लिजिये और अपने उलटे हाथ से कलश को ढक लिजिये। अपने नाम और गोत्र का स्मरण करिये। अब ऐसे ही पात्र को लेकर शिव मंदिर जाए। जो भी आपकी कामना है व्यापार फैक्ट्री इंटरव्यू की उसका ध्यान करते हुए और अपने उसी दाहिने हाथ के अंगूठे और उनगलियो की मदद से पात्र को पकड़ के जल चढा दिजिये शिवलिंग पे श्री तुम्बरुपेश्वर महादेव के नाम से। जल चढाते वक्त बेल पत्री हाथ में ही रहने देना है। जल चढाने के बाद पात्र को नीच रख दे और अब बेल पत्र भी चढा दिजिये। बेल पत्री की डंडी का मुह अशोक सुंदरी वाली जगह होना चाहिए। झोली पसार कर बाबा से निवेदन करे और विनती कर के वापस घर आ जाए। 3 से 4 दिन लगेगा, जो दुकान फैक्ट्री व्यापार रुक सा गया था उसमे वापस से उन्नती होना शुरू हो जाएगी।

घर से क्लेश दूर करने का उपाय

  • यदि घर में क्लेश ज़्यदा होता हो, अशांति का माहोल बना रहता हो, या फिर जो नई बहू होती है उन्हे अपने ससुराल में हर समय ताने सुनना पड़ता हो और सामंजस्य बनाने में दिक्कत आ रही हो तो ऐसी तकलीफ से मुक्ति पाने के लिए शंकर जी के इस उपाय को एक बार जरूर करके देखें।
  • शंकर जी के शिवलिंग पर एक बेल पत्र समर्पित करें जिसके डंडी का मुंह माता अशोक सुंदरी के तरफ हो। इसके बाद उत्तर की तरफ मुंह करके एक लोटा जल शिव जी को चढ़ा दे। इस उपाय से घर का क्लेश आधे घंटे में समाप्त होने लगता है।
  • और साथ ही जो बेटी नई शादी कर के ससुराल जाती है और ताना सुनना पड़ता है तो इस उपाय के प्रयोग से वो भी अपने नए परिवार में आराम से सेट होने लगती हैं और घर में शांति भी बनी रहती है।

नमः शिवाय:

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

1 से 14 मुखी रुद्राक्ष धारण करने के मंत्र

  • किसी भी रुद्राक्ष को पहनने से पहले कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए आज हम इस विषय पर बात करेंगे।
  • रुद्राक्ष कितने मुखी का है उसके अनुसार मंत्र जपना चाहिए।
  • नीचे 1 से 14 मुखी रुद्राक्ष के मंत्र दिए गए हैं।

हर हर महादेव


3 से अधिक पत्ती वाले बेल पत्री से बरकत का उपाय

  • यदि कभी 3 पत्ती वाले बेल के वृक्ष में 3 से अधिक पत्ती वाली कोई बेल की पत्ती मिल जाए तो बहुत भाग्य की बात होती है।आज हम जानेगे की 4 से लेकर 8 पत्ती वाले बेल की पत्ती को यदि 3 पत्ती वाले बेल वृक्ष से प्राप्त किया जाए तो उसे कैसे उपयोग करना चाहिए की घर में लक्ष्मी की बरकत हो।
  • लेकिन इस उपाय को करने से पहले इस बात का विशेष ध्यान रखना है जो बेल की पत्ती है वो 3 पत्ती वाले बेल वृक्ष से ही प्राप्त हुए हो।

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  1. अगर 4 पत्ती वाली बेल पत्र प्राप्त होती है तो ऐसी पत्ती को ले जाकर भगवान शंकर के शिवलिंग पर समर्पित करना चाहिए और उस पर 4 लोटा जल चढाना चाहिए। इसके बाद बेल पत्ती को उठाकर माता अशोक सुंदरी को समर्पित करना चाहिए, और एक आचमन जल चढाना चाहिए। अब वहां से भी पत्ती को उठाकर नंदी के पैर के पास रखकर एक मूंग का दाना समर्पित करना चाहिए। बाबा से आशीर्वाद लेकर बेल की पत्ती को उठाकर घर ले आए और बरकत के रूप में पत्ती को संभाल कर रख देना चाहिए तो लक्ष्मी कभी कम नहीं हो सकती, बढ़ती ही चली जाएगी।
  2. अगर 5 पत्ती वाली बेल की पत्ती प्राप्त हो तो पहले जलाधारी का स्पर्श किया जाता है फिर शिवलिंग पर चढाया जाता है और एक लोटा जल समर्पित कर दिया जाता है। फिर जब पत्ती को उठाकर घर ले आए तो दरवाजे पर खड़े हो कर भगवान शंकर के गण भृंगी और श्रृंगी का स्मरण करिये और फिर पत्ती को बरकत के रूप में रख लिजिये।
  3. अगर 6 पत्ती वाली बेल की पत्ती प्राप्त हो तो पहले नंदी पर समर्पित किया जाता है उसके बाद शिवलिंग पर चढाकर एक लोटा जल और एक चावल का दाना समर्पित किया जाता है। और घर लाकर बरकत के रूप में रखा जाता है।
  4. 7 पत्ती के बेल पत्र को पहले बेल पत्र के पेड़ के नीचे पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करके उसके ऊपर समर्पित किया जाता है। फिर वहां से उठा कर शंकर भगवान के शिवलिंग पर ले जाकर चढाया जाता है और बरकत के रूप में रखा जाता है।
  5. 8 पत्ती का बेल पत्र प्राप्त हो तो पहले ऊपर जो जलाधारी होती है उसपे स्पर्श कराया जाता है, इसके बाद कटिभाग, यानी माता पार्वती का जो हस्तकमल होता है शिवलिंग पर उसका स्पर्श किया जाता है और उसके बाद शिवलिंग पर चढाकर एक लोटा जल चढाया जाता है और चंदन लगाया जाता है। फिर घर लेआकर बरकत के रूप में रखा जाता है।

अदालत या कोई अन्य प्रशासनिक संबंधित व्याधियों को हटाने के लिए काली तिल का उपाय

  • मान लीजिए आप किसी प्रशासनिक व्याधियों से घिरे हुए हैं, कोर्ट कचहरी से संबंधित कोई व्याधि हो जो सुलझ ही नहीं रही हो। बहुत पैसा भी लग रहा है और फैसला भी आपके पक्ष में नहीं आ रहा है तो ऐसी व्याधियों से निकलने के कुछ निवारण श्री शिवमहापुराण में बताए गए हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में:
  1. किसी भी तरह की प्रशासनिक व्याधियों को दूर करने के लिए शंकर भगवान की शिवलिंग पर काली तिल चढ़ाया जाता है और फिर एक लोटा जल समर्पित कर दिया जाता है। इसका फल व्याधियों को मिटा देती है।
  2. अगर ऐसा हो की किसी व्यक्ति का अदालत से पीछा ही नहीं छुट रहा, सभी समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं, निर्णय आपके पक्ष में हो ऐसा भी चाहते हैं तो नियम से 2 से 3 शिवरात्रि के दिन बेल पत्र के पेड़ के नीचे पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करिये और उसके ऊपर कुछ दाने काली तिल के समर्पित करके पूजन करिये। इसके बाद शिवलिंग का विसर्जन कर दें। शिवरात्रि हर महीने आती है। 2 से 3 शिवरात्रि करके देखें। लेकिन प्रदोष काल के बाद यह उपाय को नहीं करना है।
  3. काशी में तिलकेश्वर महादेव का एक मंदिर है जो स्वयंभू भी है और नित्य प्रति जिसकी आकृति बढ़ती भी रहती है। इस मंदिर की मूल मान्यता है की मंदिर के दर्शन मात्र से ही प्रशासनिक समस्या या अदालत के चक्कर काटने की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।
  4. अगर किसी को ऐसा लगे कि आपके बच्चों की संगती खराब हो रही है, बच्चा गलत मार्ग पर जा रहा है जैसा जुआ, नशा, मांसाहार आदि तो ऐसे में थोड़ी सी काली तिल को पीसकर शिवलिंग पर लेपन करना चाहिये  उसके बाद जल समर्पित करना चाहिए। जो बच्चा गलत मार्ग पर भटक गया है उसके नाम से इस उपाय को किया जाए तो बच्चों की गलत संगति छूट जाती है। विशेष बात ये है की इस उपाय को घर के शिवलिंग पर भी किया जा सकता है।

गणेश चतुर्थी के दिन का उपाय दिलाएगा हर समस्या से मुक्ति

  • वर्ष 2022 में गणेश चतुर्थी 31 अगस्त, बुधवार के दिन पड़ रही है, जिसके कारण गणेश चतुर्थी का महत्व कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है।
  • गणेश चतुर्थी के अवसर पर इस उपाय से सभी तरह के दुख तकलीफ से मुक्ति मिलती है।

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  • अगर आपका कोई काम नहीं बन रहा हो, या पैसे से संबंधित दिक्कत हो, और या फिर बीमारी से परेशान हो गए हो तो सच्चे दिल से इस उपाय को करके, भगवान से निवेदन करके देखे।
  •  इस उपाय के लिए आपको शमी पत्र लेना है।
  • शिवलिंग पर जो गणेश जी का स्थान होता है वहा 5 शमी पत्र समर्पित करे।
  • 3 शमी पत्र शंकर जी के ऊपर समर्पित करे।
  • 1 शमी पत्र शंकर जी के मंदिर की चौखट पे लेफ्ट (बाएं) भाग मे समर्पित करे। (मंदिर से बाहर निकलते वक्त आपका जो लेफ्ट साइड है उस तरफ रखना है)।
  • चौखट पे ही बाहर के तरफ एक घी का दिया लगा दे और उसे शमी पत्र के ठीक साइड में रख दे। मंदिर में दिया नहीं लगाना है।
  • मयूर ध्वज गणेश जी का नाम ले कर जो भी ये शमी पत्र और दीपक समर्पित कर देता है उसके घर से कभी रिद्धि सिद्धि और वैभव प्रतिष्ठा खतम नहीं होती। सब काम बनते चले जाते हैं।
  • इस उपाय को मन से करके देखेंगे तो 10 दिन के अंदर कुछ ना कुछ फल जरूर मिलेगा।

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