उपाय पुस्तक

विषय सूची
उपाय नंबर 1 –> एकादशी के दिन एक काम अवश्य करें
उपाय नंबर 2 –> घर का दीपक, साधारण नहीं है।
उपाय नंबर 3 –> जब कभी बहुत थकान महसूस हो रही हो, परेशानी हो, सर दर्द है, शरीर में दुखन हो।
उपाय नंबर 4 –> जब समस्या बड़ी विकट हो, उसका हल नहीं मिल रहा हो। सुलझने के स्थान पर और उलझती ही जा रही है तो, सुलझने का नाम ही नहीं ले रही। जब सभी स्थानों से परेशान हो गए तो
उपाय नंबर 5 –> अक्षय पात्र आप भी बना सकते हैं। 
उपाय नंबर 6 –> जब आप बहुत टेंशन में या परेशानी में महसूस करो
उपाय 7 –> यदि कोई जमीन जायदाद के झगड़े, अदालत में भाई-भाई या पति पत्नी का केस या किसी गलत तरीके से कोई आक्षेप लगा कर केस लगा दिया है या कोई प्रशासनिक कार्यवाही चल रही है। तो
उपाय 8 –> यदि परीक्षा या इंटरव्यू देने जा रहे हो तो
उपाय 09 –> गांठ गलाने के लिए उपाय
उपाय 10 –> रोग मुक्त व कार्य सफल के लिए 
उपाय 11 –> सुख देने वाली देव दीपावली के सात पुष्प और सात दीपों का उपाय
उपाय 12 –> घर में कलह क्लेश खत्म करने के लिए गेहूं की बाली का उपाय 
उपाय 13 –> गंभीर रोगों से मुक्ति के लिए उपाय
उपाय 14 –> नर्मदेश्वर बचाते हैं अकाल मृत्यु से 
उपाय 16 –> कर्ज से मुक्ति के उपाय
उपाय 17 –> धन प्राप्ति के लिए सरल उपाय 
उपाय 18 –> मनोकामना पूर्ति के लिए सफ़ेद पुष्प से करें ये उपाय 


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उपाय नंबर 1
एकादशी के दिन एक काम अवश्य करें
वैसे तो आप सभी रोजाना मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाने जाते हैं लेकिन याद रखे कि एकादशी के दिन जल चढ़ाते हुए तीन बार स्वधा, स्वधा, स्वधा अवश्य बोलें ।

या स्वधा स्त्रोत का पाठ करें।

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स्वधा स्त्रोत

ब्रह्मोवाच –
स्वधोच्चारणमात्रेण तीर्थस्नायी भवेन्नर:।
मुच्यते सर्वपापेभ्यो वाजपेयफलं लभेत्।।1।।
अर्थ – ब्रह्मा जी बोले – ‘स्वधा’ शब्द के उच्चारण से मानव तीर्थ स्नायी हो जाता है। वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर वाजपेय यज्ञ के फल का अधिकारी हो जाता है

स्वधा स्वधा स्वधेत्येवं यदि वारत्रयं स्मरेत्।
श्राद्धस्य फलमाप्नोति कालस्य तर्पणस्य च।।2।।
अर्थ – स्वधा, स्वधा, स्वधा – इस प्रकार यदि तीन बार स्मरण किया जाए तो श्राद्ध, काल और तर्पण के फल पुरुष को प्राप्त हो जाते हैं।

श्राद्धकाले स्वधास्तोत्रं य: श्रृणोति समाहित:।लभेच्छ्राद्धशतानां च पुण्यमेव न संशय:।।3।।
अर्थ – श्राद्ध के अवसर पर जो पुरुष सावधान होकर स्वधा देवी के स्तोत्र का श्रवण करता है, वह सौ श्राद्धों का पुण्य पा लेता है, इसमें संशय नहीं है।

स्वधा स्वधा स्वधेत्येवं त्रिसन्ध्यं य: पठेन्नर:।
प्रियां विनीतां स लभेत्साध्वीं पुत्रं गुणान्वितम्।।4।।
अर्थ – जो मानव स्वधा, स्वधा, स्वधा – इस पवित्र नाम का त्रिकाल सन्ध्या समय पाठ करता है, उसे विनीत, पतिव्रता एवं प्रिय पत्नी प्राप्त होती है तथा सद्गुण संपन्न पुत्र का लाभ होता है। 

पितृणां प्राणतुल्या त्वं द्विजजीवनरूपिणी।श्राद्धाधिष्ठातृदेवी च श्राद्धादीनां फलप्रदा।।5।।
अर्थ – हे देवि ! स्वधा ! तुम पितरों के लिए प्राणतुल्य और ब्राह्मणों के लिए जीवनस्वरूपिणी हो। तुम्हें श्राद्ध की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। तुम्हारी ही कृपा से श्राद्ध और तर्पण आदि के फल प्राप्त होते हैं।

बहिर्गच्छ मन्मनस: पितृणां तुष्टिहेतवे।
सम्प्रीतये द्विजातीनां गृहिणां वृद्धिहेतवे।।6।।
अर्थ – तुम पितरों की तुष्टि, द्विजातियों की प्रीति तथा गृहस्थों की अभिवृद्धि के लिए मुझ ब्रह्मा के मन से निकलकर बाहर जाओ।

नित्या त्वं नित्यस्वरूपासि गुणरूपासि सुव्रते।आविर्भावस्तिरोभाव: सृष्टौ च प्रलये तव।।7।।
अर्थ – सुव्रते ! तुम नित्य हो, तुम्हारा विग्रह नित्य और गुणमय हैं। तुम सृष्टि के समय प्रकट होती हो और प्रलयकाल में तुम्हारा तिरोभाव हो जाता है।

ऊँ स्वस्तिश्च नम: स्वाहा स्वधा त्वं दक्षिणा तथा।निरूपिताश्चतुर्वेदे षट् प्रशस्ताश्च कर्मिणाम्।।8।।
अर्थ – तुम ऊँ, नम:, स्वस्ति, स्वाहा, स्वधा एवं दक्षिणा हो। चारों वेदों द्वारा तुम्हारे इन छ: स्वरूपों का निरूपण किया गया है, कर्मकाण्डी लोगों में इन छहों की मान्यता है। 

पुरासीस्त्वं स्वधागोपी गोलोके राधिकासखी।
धृतोरसि स्वधात्मानं कृतं तेन स्वधा स्मृता।।9।।
अर्थ – हे देवि! तुम पहले गोलोक में ‘स्वधा’ नाम की गोपी थी और राधिका की सखी थी, भगवान कृष्ण ने अपने वक्ष: स्थल पर तुम्हें धारण किया था। इसी कारण तुम ‘स्वधा’ नाम से जानी गई।

इत्येवमुक्त्वा स ब्रह्मा ब्रह्मलोके च संसदि।
तस्थौ च सहसा सद्य: स्वधा साविर्बभूव ह।।10।।
अर्थ – इस प्रकार देवी स्वधा की महिमा गाकर ब्रह्मा जी अपनी सभा में विराजमान हो गए। इतने में सहसा भगवती स्वधा उनके सामने प्रकट हो गई।

तदा पितृभ्य: प्रददौ तामेव कमलाननाम्।
तां सम्प्राप्य ययुस्ते च पितरश्च प्रहर्षिता:।।11।।
अर्थ – तब पितामह ने उन कमलनयनी देवी को पितरों के प्रति समर्पण कर दिया। उन देवी की प्राप्ति से पितर अत्यन्त प्रसन्न होकर अपने लोक को चले गए।

स्वधास्तोत्रमिदं पुण्यं य: श्रृणोति समाहित:।
स स्नात: सर्वतीर्थेषु वेदपाठफलं लभेत्।।12।।
अर्थ – यह भगवती स्वधा का पुनीत स्तोत्र है। जो पुरुष समाहित चित्त से इस स्तोत्र का श्रवण करता है, उसने मानो सम्पूर्ण तीर्थों में स्नान कर लिया और वह वेद पाठ का फल प्राप्त कर लेता है।

।।इति श्रीब्रह्मवैवर्तमहापुराणे प्रकृतिखण्डे ब्रह्माकृतं स्वधास्तोत्रं सम्पूर्णम्।।

विशेष – पितृ पक्ष श्राद्ध के दिनों में इस स्वधा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। यदि पूरा स्तोत्र समयाभाव के कारण नहीं पढ़ पाते हैं तब केवल तीन बार स्वधा, स्वधा, स्वधा बोलने से ही सौ श्राद्धों के समान पुण्य फल मिलता है।

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उपाय नंबर 2

घर का दीपक, साधारण नहीं है।

घर में जो दीपक होता है वह साधारण नहीं होता । जिसमें आप रोजाना दीप जलते हैं; या बत्ती जलाते हैं । यदि परिवार में किसी को बहुत तेज बुखार आ रहा हो, शरीर तप रहा हो तो उसकी बत्ती निकाल कर साइड करें और इस दीपक को उस पानी में डाल दें । जिसके द्वारा पीड़ित को स्नान कराया जाएगा या पट्टी रखी जाएगी। 15 से 20 मिनट में या मुश्किल से मुश्किल आधा घंटा में उसका ताप उतर जाएगा।

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उपाय नंबर 3

जब कभी बहुत थकान महसूस हो रही हो, परेशानी हो, सर दर्द है, शरीर में दुखन हो।

पीपल के वृक्ष से पांच पत्ते मांग कर ले आओ और उन्हें अपनी थाली में रखकर उन्हें शंकर जी के कुंदकेश्वर महादेव स्वरूप का नाम लेकर भोजन अर्पित करके स्वयं भी उसे थाली में भोजन करो। 5 से 10 मिनट में ही आपको आराम मिल जाएगा।

कुंदकेश्वर महादेव का नाम सुख की अनुभूति कराता है।

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उपाय नंबर 4

जब समस्या बड़ी विकट हो, उसका हल नहीं मिल रहा हो। सुलझने के स्थान पर और उलझती ही जा रही है तो, सुलझने का नाम ही नहीं ले रही। जब सभी स्थानों से परेशान हो गए तो

बेल पत्र के वृक्ष के नीचे सोमवार को, प्रदोष को या सोमवार की अष्टमी को प्रदोषकाल में एक छोटा सा पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करो। अब शिवलिंग के निर्माण में अपने वर्ण और मिट्टी का विचार नहीं करें बैल पत्री के वृक्ष के नीचे जो भी मिट्टी हो उसी से शिवलिंग का निर्माण कर ले। हां यदि आप घर में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर रहे हैं तो आप वर्ण और मिट्टी का विचार अवश्य करें।

सोमवार को, प्रदोष को या सोमवार की अष्टमी को प्रदोषकाल में पांच सफेद फूल, थोड़ी सी काली तिल, यज्ञोपवीत, घी का दीपक और पंचामृत लेकर जाए और शिवलिंग का पूजन करें। घी का दीपक आदि लगाने के उपरांत भगवान से अपनी समस्या का निवेदन करें। इसके उपरांत बेलपत्र की केवल आदि परिक्रमा करें पूरी नहीं।

जब जब दीपक बंद हो जाए तो शिवलिंग का विशेषण करते हैं उसे दिन करते वक्त अपने उसे समस्या को बोल जो जिससे परेशान है।

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उपाय नंबर 5

अक्षय पात्र आप भी बना सकते हैं। 

जब आप सबका आजमा कर देख सकते हैं प्रैक्टिकल करने में क्या जाता है जब आपके घर में कोई फंक्शन हो पार्टी हो दावत हो जब जब लगे की जितने लोग हम ने बनाए हैं उससे ज्यादा आने की संभावना हो सकती है व्यवस्था कैसे पूरी होगी तो उसके लिए अक्षय पात्र आप भी बना सकते हैं।
शंकर भगवान पर कुबेर भंडारी के नाम से चावल का एक गाना चढ़ाकर और चढ़े हुए चावल के उस एक दाने को इस प्रकार मांग कर लाना। 
मेरे कुबेर भंडारी बाबा, मेरे घर में हो रहे भोज की व्यवस्था आपको करनी है। मैं इसकी व्यवस्था करने में असमर्थ हूं । आप मेरे यहां भंडार में पधारे और उस भंडार को संभालें।

ऐसा कहकर वह चावल का दाना अपनी भोजन के स्थान पर भंडार में रख देना। आप देखेंगे की सारा काम पूरा हो जाएगा लेकिन आपके भंडार में कोई कमी नहीं आएगी।

★ याद रखें 
एक बार फिर बता दे कि एक चावल का दाना कुबेर भंडारी का नाम लेकर भगवान भोलेनाथ को चढ़ा दो और फिर उसे मान कर ला कर उसे अपने भंडार में रख दो आपका उसका पूरा घर है भगवान भोलेनाथ अपने हाथों से परा कर देगा।

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उपाय नंबर 6

जब आप बहुत टेंशन में या परेशानी में महसूस करो
जब आप बहुत टेंशन में या परेशानी में महसूस करो तो गले में पड़े रुद्राक्ष को अपने हाथ में दबाकर श्री शिवाय नमस्तुभयम का जाप करना शुरू कर दो। आपको तुरंत उसका प्रभाव  दिखाई देगा।

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उपाय 7

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं हर हर महादेव

यदि कोई जमीन जायदाद के झगड़े, अदालत में भाई-भाई या पति पत्नी का केस या किसी गलत तरीके से कोई आक्षेप लगा कर केस लगा दिया है या कोई प्रशासनिक कार्यवाही चल रही है। तो यह उपाय अवश्य करें।
श्री गोपेश्वर शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन की गुरुजी ने बताया एक अचूक उपाय, आप पूर्ण विश्वास के साथी से करेंगे तो मुझे भरोसा है कि आप अपने कार्य में अवश्य सफल होंगे।

इस उपाय में करना क्या है?
अपने घर के एक लोटे में अपने घर का जल लीजिए, जल के साथ में एक बैल पत्र, एक शमीपत्र, एक दूर्वा अर्थात एक दूब घास, एक कनेर का पुष्प और एक अक्षत अर्थात एक आखा चावल आदि पांच वस्तुएं एकत्रित करें। किसी बिली पत्र के वृक्ष के नीचे जाएं। पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करें। उसका पूजन करें तथा उसी शिवलिंग पर रंगेश्वर महादेव, चंपेश्वर महादेव कुंदकेश्वर महादेव के नाम लेकर और अपनी मनोकामना याद करते हुए, एक-एक कर ये पांचो वस्तुएं शिवलिंग पर अर्पित करें। 
इसके उपरांत पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन करें और इन पांचो वस्तुओं को उठाकर अपने घर ले आए और स्वच्छ स्थान पर रख दें, तो 20 दिन के अंदर अंदर 21वें या 22वें दिन में यदि भगवान शिव ने चाहे तो आपका कार्य अवश्य पूर्ण होगा।

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उपाय 8

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं । हर हर महादेव ।

यदि परीक्षा या इंटरव्यू देने जा रहे हो तो

अच्छे से पढ़ाई करो, अच्छी मेहनत करो, दिल से तैयारी करो, तैयारी में रात दिन एक कर दो । जब तुम्हें अपनी मेहनत पर भरोसा हो जाए कि मैंने मेहनत की है । बाबा मुझे उसका फल अवश्य देगा। तब एग्जाम देने जाने से पहले

एक अंतिम काम और करें। 

मंदिर में पांच बेलपत्र, लाल तथा पीला चंदन लेकर जाएं।

मंदिर पहुंचकर शिवलिंग की जलहरी पर लाल चंदन की केवल सात बिंदी लगाएं, अब पीला चंदन लें और अशोक सुंदरी के स्थान पर पीले चंदन की केवल पांच बिंदी लगाओ। 

अब पांच बेलपत्र लें और भगवान पशुपतिनाथ का नाम लेकर एक करके शिवलिंग पर अर्पित करें। परंतु ध्यान रहे कि इन पांचों बैल पत्रों की डंडिया पंचमुखी दीप की बत्तियां की तरह अलग-अलग पांच दिशाओं में होनी चाहिए।

जब यह काम कर ले तो बेलपत्र के ऊपर अपना हाथ रखकर अर्थात बाबा को बेल पत्रों के साथ स्पर्श करके अपने मन की कामना बोले, 
बाबा मैं तेरी शरण में हूं और मुझे विश्वास है कि तू मुझे इस परीक्षा में पास अवश्य कराएगा और मुझे नौकरी अवश्य दिलाएगा। 
ऐसा करने के उपरांत आप अपने गंतव्य स्थान की ओर जाएं। बाबा आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेगा।

★ 5 दिशाओं में बेलपत्र की डंडी रखने का उद्देश्य सभी राहों में आने वाली अडचनों को दूर कराना है।

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उपाय 09

गांठ गलाने के लिए उपाय
बेलपत्र की डंडी के बिल्कुल पीछे का या अंतिम भाग जो एक मोटी सी गांठ के रूप में होता है । उसे गांठ या डूंठ या ठूंठ कहते हैं। क्या आप जानते हैं कि शंकर भगवान को चढ़े बैल पत्र की गांठ या डूंठ या ठूंठ की मूलता बहुत है।

शंकर भगवान को चढ़े बैल पत्र को उठाकर। उसकी गांठ या डूंठ या ठूंठ तोड़कर हाटकेश्वर महादेव को याद करके उस गांठ या डूंठ या ठूंठ को अशोक सुंदरी के स्थान पर चढ़ाने या छुआने के उपरांत, उसे उठा कर। वही खड़े होकर चबा-चबाकर खाने से शरीर में कैसे भी गाठ हो वह गल जाएगी।

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उपाय 10

रोग मुक्त व कार्य सफल के लिए 

गुरुदेव प्रदीप मिश्रा जी ने बताया कि बेलपत्र को हम रोग मुक्ति के लिए या व्यापार वृद्धि के लिए या किसी और कार्य की सिद्धि के लिए किस प्रकार, क्यों और कैसे चढ़ाते हैं।

जब हम रोग मुक्ति के लिए या व्यापार वृद्धि के लिए या किसी और कार्य की सिद्धि के लिए भगवान भोलेनाथ पर बेलपत्र चढ़ाने जाते हैं तो सबसे पहले अशोक सुन्दरी पर बेलपत्र चढ़ाते हैं। अशोक सुंदरी पर जो बैल पत्र चढ़ाते हैं उसकी डंडी उत्तर की ओर होती है अर्थात जिधर की तरफ पानी बहकर जा रहा होता है उधर की तरफ होती है। भगवान भोलेनाथ की पुत्री अशोक सुंदरी बहुत ही दयालु हैं। वे अपने पिताजी के भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

अब दूसरी बेलपत्र भगवान शिव के शिवलिंग पर चढ़ाई जाती है तो उसकी डंडी भी उत्तर की ओर ही रखा जाती है क्यों ? 

इस क्यों का जवाब हम बाद में देंगे। अभी आगे का कार्य करते हैं।

अब आती है हमारी जल चढ़ाने की बारी, अब हमें यह जान लेना चाहिए कि भोलेनाथ पर जल किस प्रकार चढ़ाएं और कहां और किस दिशा में खड़े होकर चढ़ाएं। 

इसके लिए गुरुजी बताते हैं कि जिस ओर जलहरी जा रही है अर्थात जिधर की तरफ पानी बहकर जा रहा होता है । हमें उस बहते हुए जल की ओर देखना है तो आप समझ गए होंगे कि हमको किधर बैठना या खड़ा होना होगा? हमें दक्षिण की ओर अर्थात दक्षिण में बैठना या  खड़ा होना होगा। 

दोनों बेलपत्र चढ़ा चुके हैं अब आई जल चढ़ाने की बारी तो हमें दक्षिण दिशा में खड़े होकर अपने मन की कामना करके भगवान भोलेनाथ पर धीरे-धीरे जल चढ़ाते हैं और जब कामना युक्त यह जल अशोक सुंदरी वाले स्थान से होकर बहता है। तो अशोक सुंदरी हम पर दया करके अपने पिता से हमारी कामना को पूरा करने की प्रार्थना करती है । 
जब एक पुत्री अपने पिता से कामना करती है तो उसका पिता कैसे नहीं सुनेगा। तब भगवान भोलेनाथ अपने तीसरे नेत्र को खोलकर अपनी पुत्री अशोक सुंदरी को देखते हैं , अपनी पुत्री अशोक सुंदरी की बात को रखते हुए, उसके आग्रह को जानकर, भगवान भोलेनाथ उस जल में जल चढ़ाने वाले की इच्छा का फल प्रदान कर देते या छोड़ देते हैं।

तो इस प्रकार भगवान शिव के तीसरे नेत्र की शक्ति दक्षिण से उत्तर की ओर बह रहे जल में आ जाती है। इस प्रकार जल भगवान भोलेनाथ के तीसरे नेत्र की शक्ति पाकर और भी शक्तिशाली हो जाता है। इधर हम जल चढ़ा रहे हैं और उधर दूसरी ओर जलहरी से नीचे गिरने वाला जल किसी छोटे पात्र में एकत्रित कर लेते हैं।

अब यदि भगवान भोलेनाथ के तीसरे नेत्र की शक्ति युक्त इस जल का आचमन किया जाए या फिर किसी बर्तन में झेल कर घर ले जाया जाए तो इस जल की शक्ति को हम किसी बीमार व्यक्ति को उसके असाध्य रोग से मुक्ति के लिए या व्यापारी स्थान या घर में छिड़क कर व्यापार वृद्धि भैया घर की पॉजिटिविटी के लिए या किसी अन्य कार्य  की सिद्धि के लिए उपयोग में ला सकते हैं।

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उपाय 11

सुख देने वाली देव दीपावली के सात पुष्प और सात दीपों का उपाय

देव दिवाली वाले दिन कोई भी सात पुष्प जो आपको मिल जाए, लेकर उन्हें रसोई घर में परिंदे वाले पीने के घड़े के स्थान पर रख दें। और उसे स्थान पर घी के साथ दीप प्रज्वलित कर दें। इसके बाद सातों दीपों का पूजन करें। जब सुबह के समय सातों दुखों के अच्छे से आनंद के साथ पूजन हो जाए और वह ठंडा हो जाए।

उन सब उसे दिन पूरे दिन में कभी भी सातों पुष्पों को उठाकर महादेव के दरवाजे पर इसका मतलब है शिव के ऊपर या यदि यह ना मिले तो बेलपत्र के वृक्ष के नीचे या आबले के वृक्ष के नीचे या पीपल के वृक्ष के नीचे या पवित्र नदी के किनारे पर किनारे पर उंन सातों पुष्पों को अपनी कामना कर कर लक्ष्मी प्राप्ति के लिए कुछ समय के लिए रख दें। फिर उसमें से एक पोस्ट कुबेर भंडारी द्वारा भंडार भरने के लिए उठा कर ले आए। और अपने पास रखें अगली साल देव दीपावली पर आपको अपने आप ही याद आएगी कि कुबेर भंडारी ने आपका भंडार भरा।

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उपाय 12

घर में कलह क्लेश खत्म करने के उपाय

गेहूं की बाली का उपाय :

यदि आपके घर में बहुत अधिक विवाद होते हैं, तो यह स्थिति आपको वास्तव में तनावपूर्ण कर सकती है। अगर परिवार के सदस्यों के बीच तनाव चल रहा है तो इसे दूर करने केलिए पंडित प्रदीप जी मिश्रा के बताते हैं 

कि सबसे पहले आप गेहूं की 7 बाली ले आएं। अब उन सातों बालियों को अपने पूरे घर में घुमाकर उन बालियों को किसी भी शिव मंदिर ले जाएँ साथ ही और अपने घर और गोत्र का नाम बोलते हुए इन बालियों को शिवलिंग पर समर्पित कर दें। आपके घर का क्लेश ख़त्म होते देर नहीं लगेगी।

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उपाय 13

गंभीर रोगों से मुक्ति के लिए उपाय

प्रदीप मिश्रा का कहना है कि अगर परिवार का कोई सदस्य गंभीर रोग से युक्त हैं या कोई सदस्य वेंटिलेटर पर है; तो आप शमी के पेड़ से एक फूल लेकर नीलकंठेश्वर महादेव का जाप करते हुए शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। इसके बाद नीलकंठेश्वर महादेव से थोड़ा जल लेकर उस रोगी के शरीर पर लगाना चाहिए। ऐसा करने से वह पूरी तरह से रोक मुक्त हो जाएगा।

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उपाय 14

नर्मदेश्वर बचाते हैं अकाल मृत्यु से 

शिव पुराण के इस उपाय में प्रदीप मिश्रा जी का कहना है कि अगर आप अपने परिवार को किसी भी प्रकार की अकाल मृत्यु और उसके भय से बचाना चाहते है तो आप नर्मदा नदी से निकले शिवलिंग को अपने घर के मंदिर में रखें । नर्मदा से निकले शिवलिंग को नर्मदेश्वर कहा जाता है। 

कहां से मिलेंगे नर्मदेश्वर

नर्मदा नदी जहां से भी होकर निकलती है उसके पत्थर को नर्मदेश्वर के नाम से पुकारा जाता है । उसके किसी भी पत्थर को आप उठा लें । वही नर्मदेश्वर होगा । नर्मदेश्वर को स्थापित करने की आवश्यकता नहीं होती । वे  स्वयं स्थापित हो जाते हैं।

यदि आप कभी मध्य प्रदेश में ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए जाते हैं; तो आप वहां बह रही नर्मदा जी के जल से निकले हुए शिवलिंग को भी अपने घर पर लाकर स्थापित भी कर सकते हैं। बाबा नर्मदेश्वर आपके घर में कभी अकाल मृत्यु नहीं आने देंगे।

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उपाय 15

विवाह की अड़चनें दूर करने के लिए उपाय 

मिश्रा जी का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति का समय पर विवाह नहीं हो पा रहा या फिर विवाह की बात चलने पर बार-बार अड़चनें आ रही हैं तो आप यह उपाय कर सकते हैं।

इसके लिए आपको एक सूखा नारियल का गोला लेना है। जिसे उपर की और से थोडा सा काट दें। ऐसे काटिए जैसे नारियल का ढक्कन बन जाये। फिर इस नारियल में सत्यनारायण भगवान् का प्रसाद या पंजीरी भर दें। फिर इस नारियल को ऊपर से बंद कर किसी पीपल के पेड़ के नीचे दबा दें। शिव जी की कृपा से उस व्यक्ति का विवाह बहुत जल्द ही हो जायेगा।

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उपाय 16

कर्ज से मुक्ति के उपाय

पंडित प्रदीप मिश्रा जी बताते हैं की अगर आपके ऊपर बहुत सारा क़र्ज़ है  और आप उससे मुक्त होना चाहते हैं तो आप यह उपाय करें।

आप थोड़े दिन तक वट वृक्ष के नीचे वट्केश्वर महादेव का नाम लेकर एक लोटा जल अर्पित करें। कर्ज से जुड़ी सारी परेशानियां आपकी दूर हो जाएगी। 

इसके साथ ही ऋण से मुक्ति पाने के लिए जब भी मंगलवार आए तो मंगलवार के दिन शिव मंदिर में जाकर 'ॐ ऋण मुक्तेश्वराय महादेवाय नमः।' मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर मसूर की दाल जरूर चढ़ाएं। इससे आप हमेशा कर्ज मुक्त रहेंगे ।

ध्यान रहे कि

कभी भी मंगलवार के दिन कर्ज नही लेना चाहिए और बुधवार के दिन कभी किसी को क़र्ज़ नहीं देना चाहिए। इससे आपका पैसा डूब सकता है। मंगलवार और बुधवार को लिया गया कर्ज कभी नहीं चुकता।

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उपाय 17

धन प्राप्ति के लिए सरल उपाय 

यदि आप अपने जीवन में बहुत मेहनत करने के बाद भी आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो प्रदीप मिश्रा जी के इस टोटके से आपको धन प्राप्ति जरूर होगी। 

वे बताते हैं कि मात्र बेलपत्र पर लाल चंदन लगाकर उसको शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं और इस उपाय से माता लक्ष्मी जी भी बहुत खुश होती है । इस प्रकार इन दोनों के आशीर्वाद से आपको धन की प्राप्ति होने लगेगी और आपको कभी भी आर्थिक तंगी जूझना नहीं पड़ेगा।

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उपाय 18

मनोकामना पूर्ति के लिए सफ़ेद पुष्प से करें ये उपाय :

पंडित प्रदीप मिश्रा बताते हैं कि यदि आपकी कोई इच्छा हैं और जो पूरी नहीं हो रही है, तो शिव महापुराण का मनोकामना पूर्ण करने का यह सरल उपाय अवश्य करें। 

हर महीने दो मासिक शिवरात्रियां आती हैं, इन दोनों को शिवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। अत: आप इनमे से किसी भी एक शिवरात्रि को व्रत रख सकते हैं।

इस दिन शाम में प्रदोष काल के समय किसी शिव मंदिर में जायें । शिवलिंग के समक्ष खड़े होकर कुन्दकेश्वर महादेव का स्मरण करते हुए अपनी मनोकामना बोले। तथा सफ़ेद पुष्प से शिवलिंग और शिवलिंग की जलधारी का श्रृंगार करें। 

महादेव की कृपा से अगले महीने आने वाली शिवरात्रि तक आपकी वह मनोकामना अवश्य पूर्ण हो जाएगी।

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उपाय 19

गांठ गलाने के उपाय :

पंडित प्रदीप मिश्रा बताते हैं कि यदि आपकी कोई इच्छा हैं जब शरीर में कोई गांठ हो जाए और डॉक्टर उसकी जांच करने के लिए बोले और डर हो तो, 

भगवान भोलेनाथ पर चढ़ा हुआ बेलपत्र उठाकर उसका डंठल या डूंठ तोड़कर अशोक सुंदरी पर चढ़ाएं और उसे उठा कर अशोक सुंदरी के समक्ष खड़े होकर कुन्दकेश्वर महादेव का स्मरण करते हुए। अपनी परेशानी बोलते हुए चबा-चबा कर खाएं।

महादेव की कृपा से अगले महीने आने वाली शिवरात्रि तक अर्थात 30 से 45 दिन में आपकी वह परेशानी अवश्य ठीक हो जाएगी अर्थात गांठ गला जाएगी।

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एकांतेश्वर महादेव

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एकांतेश्वर महादेव की महिमा

एकांत स्थल में विराजमान शिवलिंग को एकांतेश्वर महादेव कहा जाता है। अर्थात नितांत एकांत में बैठे हुए शिव ही एकांतेश्वर महादेव है। कहते हैं संत जन इसी प्रकार की शिवलिंग का पूजन किया करते थे । इस प्रकार की शिवलिंग में आकर शक्ति विराजमान होती है। इसका मुख्य उदाहरण माता पार्वती जी द्वारा अकेले में पूजन करना है। इस प्रकार रावण का भी अकेले में पूजन करना है। ये उदाहरण शिवलिंग के एकांतेश्वर होने का प्रमाण है।

अधिकतर एकांतेश्वर शिवलिंग वनों में या फिर सड़कों के किनारे मिल जाते हैं। अगर ऐसा हो कि आपके आसपास एकांतेश्वर शिवलिंग है तो आप फूल नहीं चला सके तो वहां के आसपास के वृक्ष से कुछ पत्थर तोड़कर उन्हें जरूर अर्पित कर दे।

एकांतेश्वर महादेव पर चढ़ाया गया एक पत्ता या चढ़ाई गई जल की एक बूंद या एक बार का दर्शन हमारी 71 पीढ़ियों तक चलता है और उसका पुण्य भी 71 पीढ़ियों पर जाता है। यदि आपके चल दिए किसी काम से जाते हुए आपकी निगाह में आ जाए तो उनकी सेवा अवश्य कर दो।

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एकांतेश्वर उपाय 01

यदि बच्चा मंदबुद्धि हो या शरीर से कमजोर हो तो

यह जो उपाय हम आपको बताने जा रहे हैं यह सोम अष्टमी को या प्रदोष के दिन या 12 महीनों में किसी भी दिन आने वाली शिवरात्रि को किया जाए तो ज्यादा असरदार होता है।

यदि बच्चा मंदबुद्धि हो या शरीर से कमजोर हो तो गाय का दूध लेकर उसका दही बना लो । यदि आपके स्मरण में एकांत का शिवलिंग अर्थात एकांतेश्वर हों तो वहां पांच बेलपत्र और वही दही लेकर जाए। पहले पांच बेलपत्र अर्पित करें फिर दही से अभिषेक करें उसके उपरांत दही और बेलपत्र को किसी पत्र में एकत्रित कर ले। इसके ऊपर शिवलिंग का को अच्छे से स्नान कराकर पुनः चंदन आदि से पूजन करकर वापिस आ जाएं।

अब जो बेल पत्र लेकर आए हैं उसका चूर्ण बनाकर गोली बना ले ताकि बच्चा उसे आसानी से सटक या गटक ले और जो दही हम उतारकर लेकर आए हैं। उसे दिन में तीन बार बच्चों को चटाएं।

तीन तीन या चार प्रदोष तैयार फिर 3 या 4 शिवरात्रि या फिर तीन या चार सम अष्टमी को कर लिया जाए तो आप देखेंगे कि उसके शरीर में विकास होना शुरू हो गया है। आपको पहले और वर्तमान अवस्था में अंतर दिखाई देना शुरू हो जाएगा।

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एकांतेश्वर महादेव के उपाय 02

यदि कोई पैसा लेकर चला गया उसके लिए और यदि आपके ऊपर बहुत अधिक कर रहा है तो उसके लिए भी उपाय करें।

मान लो अपने किसी को कुछ पैसा दिया या व्यापार में पैसा लगाया और अब वह वापस नहीं आ रहा है। मान लो कोई आपका पैसा ले गया और आपने एड़ी चोटी का जोर लगा लिया लेकिन वह पैसा नहीं दे रहा है।

क्या करें ?
पांच बेलपत्र, 5 श्वेत पुष्प अर्थात सफेद फूल और पांच ह्यादरी अक्षत अर्थात हल्दी से रंगे हुए चावल लेकर यदि एकांतेश्वर शिवलिंग आपके पास है तब आप उन्हें एकांतेश्वर शिवलिंग के पास जाएं। यदि वह पास में न हो तो अर्थात एकांतेश्वर शिवलिंग आपको न मिले तो किसी एकांत स्थल पर जाकर

12 महीनों में से किसी भी दिन आने वाली शिवरात्रि को मिट्टी से  शिवलिंग का निर्माण करें और उसका अभिषेक पूजन करने के बाद बेलपत्र सफेद पुष्प और हल्दी चावल भोले बाबा के शिवलिंग पर एक एक कर अर्पित करें। शिवलिंग पर उनके अर्पित करने का भी एक तरीका है सबसे पहले अक्षत अर्थात ह्यादरी अक्षत अर्थात हल्दी से रंगे हुए चावल उसके बाद श्वेत पुष्प और अंत में बेलपत्र अर्पित करें। पोंचो के साथ नहीं चलेंगे यदि हल्दी का चावल भी चलेगा तो एक कर ही पड़ेगा एक साथ नहीं। हर बार आपको अपनी कामना बोलनी जो पैसे नहीं दे रहा है उसका नाम लेकर बताना है और आप पर कर दिया जाता हो गया तो उसके बारे में भी बताना।

यदि आप एकांतेश्वर भगवान का पूजन कर रहे हैं तो पूजन करने के उपरांत एक चावल एक सफेद पुष्प और एक बेल पत्र अपनी झोली में बांध कर ले आए। यदि आप पार्टी हो एक कांति कर का निर्माण कर रहे हैं निर्माण कर पूजन कर रहे हैं तो एक चावल एक सफेद पुष्प और एक बेल पत्र अपनी झोली में बांध कर लेने के थोड़ी देर बाद शिवलिंग का विसर्जन कर दें। पहले से स्पथापित एकांतेश्वर  के विसर्जन की जरूरत नहीं होती।

यदि घुटने में गैप आ रीड की हड्डी में गैप आ जाए आप चलने फिरने में परेशान हो जाए और डॉक्टर ऑपरेशन की बोले  तो उससे पहले आप एकांतेश्वर महादेव का पूजन अवश्य करें।

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प्रदीप मिश्रा के आंखों से सबंधित परेशानी को दूर करने के उपाय

अगर किसी व्यक्ति को आंखों से संबंधी कोई भी परेशानी है तो पंडित मिश्रा जी बताते है कि महाशिवरात्रि के दिन रात को 12 बजे शहद के साथ बिल्वपत्र चढ़ाने और उस शहद को एक बर्तन में इकट्ठा करने के बाद अवधूतेश्वर महादेव का नाम लेकर उस शहद को 3 महीने तक आंखों में काजल की तरह लगाने पर आंखों की रोशनी फिर से आ जाती है।




मिश्रा जी के संतान प्राप्ति के उपाय

 shiv puran ke संतान प्राप्ति के लिए upay बताते हुए पंडित मिश्रा जी कहते हैं कि अगर किसी स्त्री को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है तो उस स्त्री के रजस्वला यानी मासिक धर्म के सातवें दिन सफेद आंकड़े की जड़ को लेकर शिवलिंग पर 7 बार घुमाकर तुमरुका जी का आह्वान करते हुए संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना कीजिए।फिर उस आंकड़े की जड़ को किसी लाल कपड़े में बांधकर स्त्री की कमर में बांध दें। भोलेबाबा की कृपा से उस स्त्री की जल्द ही गोद भर जाएगी ।






प्रदीप मिश्रा के संतान प्राप्ति के लिए टोटका

अगर किसी स्त्री को शादी के बहुत साल बाद भी संतान की प्राप्ति नहीं होती हैं। तो वह लोग प्रदीप जी मिश्रा का संतान प्राप्ति के लिए टोटका कर सकते हैं,इससे आपको जरूर संतान प्राप्त होगी ।


प्रदीप मिश्रा का नजरदोष निवारण के लिए टोटका

प्रदीप मिश्रा का जी के नजरदोष निवारण के लिए आपको शिवरात्रि के दिन 12 कांटे वाला धतुरा लेकर आना हैं। अब इसको शिवलिंग पर सात बार फैरते हुए “ओम नम: शिवाय” मंत्र का जाप करना हैं. इसके पश्चात धतूरे को दुसरे दिन जिस जगह नजर लगी हैं. उस जगह पर लाल कपडे में बांधकर लटका दे. इस उपाय को करने मात्र से आपका नजरदोष हट जायेगा।




मिश्रा जी का स्वस्थ शरीर के लिए टोटका

अगर आप किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं और उस बीमारी से हमेशा के लिए मुक्त होना चाहते हैं तो आप को इस टोटके को अपनाना पड़ेगा। इसके लिए आप शिवरात्रि के दिन या सावन मास के सोमवार पर गोबरी को जलाकर राख कर देना है अब गोबरी की राख और गंगाजल को मिश्रित करके एक लेप जैसा तैयार कर लेना है अब इसलिए को रोग युक्त व्यक्ति के शरीर पर लगाना है इसे लगाने मात्र से वह हमेशा रोग मुक्त होकर स्वस्थ रहेगा।


बेलपत्र के उपाय

उपाय 01

यदि आपके सामने कोई बहुत बड़ी समस्या कर खड़ी हो जाए और आपको उसका कोई हल ना मिल रहा हो तो प्रदीप मिश्रा के उपाय से आप इस समस्या का हल कर सकते है ।इसके लिए आप शिव मंदिर के पास बेलपत्र का पेड़ ढूंढिए उस बेलपत्र के पेड़ के नीचे एक मूंग का दाना या एक चावल और साथ ही वहां पर जो भी एक कंकड़ रखा हो उसे भगवान शिव का स्वरूप मानकर लोटा भर जल चढ़ा दीजिए । जल चढ़ाने के बाद आप अपनी समस्या शिव के समक्ष रख दें। इस तरह भगवान शिव आपकी समस्या का निवारण जल्द ही करेंगे ।

उपाय 02

धन प्राप्ति संबंधी समस्याओं को सुलझाने के लिए 

अगर कोई व्यक्ति धन प्राप्त करना चाहता है तो वह प्रदीप मिश्रा जी के इस शिव पुराण के टोटके को करके इस समस्या का निवारण कर सकता है । मिश्रा जी दावा करते हैं कि इस उपाय को करने से उस व्यक्ति को बहुत बड़ा फायदा होगा इसके लिए आपको सुबह जल्दी नहा कर बड़ी बेलपत्र पर लाल चंदन लगाकर शिवलिंग पर चढ़ाना है । ऐसा करने से आपके घर में लक्ष्मी का वास होता है। धन की कमी के कारण आप जिस समस्याओं से जूंझ रहे होते हैं उसका निराकरण जल्द ही होता है।

6. प्रदीप मिश्रा के बेलपत्र के उपाय 

 सीहोर के पंडित प्रदीप मिश्रा ने बेल पत्र के माध्यम से परीक्षा में पास होने के उपाय बताए हैं मिश्रा जी कहते हैं की परीक्षा में पास होने के लिए एक बेलपत्र पर शहद लगा दीजिए और उस बेलपत्र को बच्चे की हाथ से शिवलिंग पर चिपका दीजिए ऐसा करने से बच्चा परीक्षा में पास होने के साथ अच्छे नंबर भी लाएगा। 


7. बीमारियों के लिए बेलपत्र उपाय

अगर आप किसी गंभीर रोग से पीड़ित हैं तो प्रदीप मिश्रा जी का यह टोटका आपके लिए बेहद लाभकारी हैं। इसके लिए आपको बेलपत्र के पेड़ के नीचे का एक पत्ता उठाकर उस के सामने शिव और शक्ति का नाम लेकर यानी भगवान शंकर पार्वती का नाम लेकर दो बाती का दीपक जलाएं और शिव शक्ति से प्रार्थना करें कि शरीर से जुड़ी इस बीमारी को स्वस्थ करें और इस बेलपत्र को उठाकर उसी स्थान पर चबा लें और बिल पत्र खाने से पूर्व शिव शक्ति से यह आग्रह करें कि इस बेलपत्र को औषधि बनाएं , ऐसा करने से आप जिस भी गंभीर रोग से ग्रसित हैं उसका निराकरण हो जाएगा और आप बिल्कुल स्वस्थ हो जाएंगे।


8. प्रदीप मिश्रा के धन संबंधी समस्या के लिए बेलपत्र टोटके 

अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो आपको प्रदीप मिश्रा का यह टोटका इस समस्या का निराकरण करेगा। इसके लिए आपको मंगलवार के दिन शिवलिंग पके चावल से ढकना है और उसके बाद उस पर साथ बिल पत्र चढ़ा देना है ऐसा करने से आपकी धन संबंधी सारी समस्याएं दूर होगी और इसके साथ ही आपने जो भी कर्ज लिया है उससे भी मुक्ति मिल जाएगी।






उपाय 19 

अगर आपका बच्चा पढ़ने में कमजोर हैं

अगर आपका बच्चा पढ़ने में कमजोर हैं और हर परीक्षा में कम नंबर लाता है तो इसके लिए प्रदीप मिश्रा के इस उपाय की आपको बहुत जरूरत पड़ेगी। इसके लिए आप बसंत पंचमी के दिन उस बच्चे के हाथ से 31 सरसों के फूल भगवान शिव को चढ़ा दें ऐसा करने से न केवल आपका बच्चा होशियार होगा बल्कि उसकी रूचि पढ़ाई की तरफ ज्यादा बढ़ने लगेगी।


महामृत्युंजय मंत्र 

मिश्रा जी कहते हैं भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो हर सोमवार महामृत्युंजय मंत्र के 108 जाप करें और कच्चे दूध से भगवान शिव का अभिषेक करे। इससे ना केवल भगवान शिव प्रसन्न होंगे बल्कि आप हर क्षेत्र में प्रगति को प्राप्त करेंगे।

उपाय 20

जब पति और पत्नी के बीच का झगड़ा कोर्ट तक पहुंच जाए

यदि घर में कोई तनाव चल रहा है या कहे कि पति और पत्नी के बीच का झगड़ा कोर्ट तक पहुंच गया है तो इस उपाय से आपकी सारी चिंताओं का निवारण होगा। 

इसके लिए आप दोनों पति पत्नी एक श्रीफल लेकर , पति पत्नी और तुम्बरुका जी का नाम लेकर लच्छा अर्थात मोली अर्थात कलावा लपेट दीजिए। इसके उपरांत इस श्रीफल को पूरे घर में क्लाकवाइज घुमा दीजिए और इसके बाद इस श्रीफल को अपने मन में परेशानी दूर करने की कामना करते हुए भगवान शिव पर चढ़ा दीजिए। 

जल्दी आप महसूस करेंगे कि इससे पति पत्नी में प्यार तो बढ़ेगा ही साथ ही कोर्ट तक गए तलाक और झगड़े के मामले में भी आपको राहत मिल जाएगी।

उपाय 21

बच्चे की रात को डरने और रोने जैसी समस्या के लिए 

मिश्रा जी अपनी कथा में कहते हैं कि अगर आपका बच्चा बहुत डरता है तो आप इस प्रयोग को करके इस समस्या का निराकरण कर सकते हैं इसके लिए आपको सोमवार के दिन बेलपत्र का कांटा मावे में डालकर थोड़ी सी शक्कर डालकर उसका एक लड्डू बनाना है और उसके बाद उस बच्चे पर 12 बार उतारकर किसी कुए के अंदर डाल देना हैं इससे उस बच्चे की रात को डरने और रोने जैसी समस्याएं हल हो जाएगी ।


उपाय 22

कमर दर्द और सिर दर्द के लिए उपाय 

आजकल हर व्यक्ति शरीर के किसी ने किसी दर्द को लेकर परेशान है परंतु कमर दर्द और सिर दर्द तो आम समस्या हो गई है। अगर आप भी ऐसी ही कोई समस्या से जूझ रहे हैं तो यह उपाय आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है ।

इसके लिए आपको कार्तिक महीने के सोमवार को वट वृक्ष अर्थात बड के पेड़ के 1 पत्ते पर लाल चंदन से 5 बार ओम लिखकर अपने मन में परेशानी दूर करने की कामना करते हुए  किसी भी बहती नदी के अंदर प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से न केवल आपका कमर दर्द और सिर दर्द से छुटकारा मिलेगा बल्कि आप खुद को पूर्ण रूप से स्वस्थ भी महसूस करेंगे।


 उपाय 23

कुछ लोग आपसे जलते हैं । उनकी जलन से बचने का उपाय 

जो लोग आपसे जलते हैं । उनकी जलन से शिव पुराण के इस उपाय से  बच सकते हैं। अगर आपसे कोई जलन रखता है तो उसकी जलन को दूर कर सकते है । 

इसके लिए आपको दशमी के दिन धतूरे का एक फूल और बेलपत्र को शिवलिंग पर इस तरह से चढ़ाना होगा कि वह गिरे नहीं । बस ऐसा करने से जो लोग आपसे जलते हैं । वे जलना बंद हो जाएंगे । 


उपाय 24

यदि कोई छोटा बच्चा अगर बार बार बीमार पड़ता है तो 

अगर आपके घर में कोई भी छोटा बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है तो यह उपाय आपको जरूर जान लेना चाहिए। 

इसके लिए आपको आटे का एक दीपक तैयार कर लें। उसके अंदर तिल का तेल और चार बत्ती डालकर उसे जला लें। उसके बाद उस बच्चे के सिर पर से अवधूतेश्वर महादेव का आह्वान करते हुए क्लाकवाइज 21 बार उतार कर इसको किसी चौराहे पर आपको तब रखना है; जब आसपास कोई नहीं देख रहा हो। इससे आपका बच्चा पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाएगा और वह बार-बार बीमार नहीं होगा।






बसंत पंचमी पर चढ़ाएं सरसों के 31 फूल


अगर कोई बच्चा पढ़ने में कमजोर है तो बसंत पंचमी के दिन उसके हाथ से 31 सरसों के फूल भगवान को अर्पित करवा दें। माना जाता है कि ऐसा करने से उसकी रुचि खुद ही पढ़ाई की ओर बढने लगेगी।


बच्चे की चिड़चिड़ाहट ऐसे करें दूर


छोटा बच्चा यदि बहुत रोता है और हमेशा चिड़चिड़ा रहता है तो 5 सोमवार उसके हाथ से भगवान शिव को शहद चढ़वाएं। माना जाता है ऐसा करने से बच्चे का स्वभाव शांत होगा।


गंभीर बीमारी से मुक्ति के लिए


गंभीर बीमारी से मुक्ति पाने के लिए शमी के फूल को नीलकंठेश्वर महादेव का नाम लेकर शिवलिंग को अर्पित करना चाहिए। इसी तहर बार-बार बीमार रहने वाले लोगों को भगवान शिव को गाय का घी अर्पित करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से बीमार व्यक्ति शीघ्र स्वस्थ होता है।

सोमवार के दिन महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करने और गाय के कच्चे दूध से भगवान शिव का अभिषेक करें। इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में प्रगति होती है।



रोग से मुक्त होने का उपाय

7 बेर वाला उपाय :

Pandit Pradeep Mishra Ke Upay, Easyhindiblogs

अगर आप किसी भी तरह की बीमारी से परेशान हैं तो आपको सात बेर वाला उपाय करना चाहिए। यह उपाय महाशिवरात्रि के दिन दोपहर 12 बजे करना है। आपको सात बेर लेने है और अपने ऊपर से 7 बार घुमा कर शिवलिंग पर चढ़ाना है। ऐसा करते समय आप श्री शिवाय नमोस्तोभ्यं मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। ज्यादा से ज्यादा ३ महीने में आप उस रोग से मुक्त हो जायेंगें।


पंडित प्रदीप मिश्रा के द्वारा बताये गए शिवरात्रि के इस उपाय से हज़ारों लोगों ने अपने अपने रोगों से मुक्ति पायी है, आप भी इस उपाय को एक बार जरूर करके देखें।




व्यापार (Business) वृद्धि के उपाय

धतूरा और हल्दी का उपाय :


अगर आपका व्यापार मंदा चल रहा हैं और काफी अड़चने आ रहीं हों तो आप पंडित प्रदीप जी मिश्रा द्वारा बताये गए शिव महापुराण के ये उपाय आजमा सकते हैं। आपको अवश्य ही लाभ मिलेगा।


ये उपाय भी आप शिवरात्रि के दिन हीं कर सकते हैं। उपाय करने के लिए आपको धतूरे के फल की आवश्यकता होगी। अब आपको करना ये है की थोड़े से हल्दी पावडर में जल मिलाकर उसका पेस्ट बनाये। फिर उस धतूरे को उस पेस्ट में डुबो कर निकल दें। इस तरह आपके इस धतूरे के फल में पूरी तरह से हल्दी लग जाएगी।


आप इस हल्दी वाले धतूरे को रात 12 बजे किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर चढ़ा दे । 10 मिनट के बाद आप इसे उठाकर घर ले आये । श्री शिवाय नमस्तुभयं का जाप करते हुए धतूरे को एक लाल कपडे में बांध दे।। धतूरे को आप इस लाल कपड़े में बांधकर अपने व्यवसाय स्थल पर रख सकते हैं।


शिव महापुराण के इस उपाय के अनुसार आपके बिजनेस को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।



धर में बीमारी ज्यादा फैल रही हो बहुत परेशानी हो कोई काम नहीं बन रहा है तो समी पत्र का उपाय

जय गणेश जी का स्थान है वहां पर पांच शमी पत्र, और शंकर जी पर तीन शमी पत्र अर्पित करें। एक शमी पत्र चौखट पर जाते समय लेफ्ट (उल्टे हाथ) भाग में रखें तथा घी का दीपक जलाएं।

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