वृक्ष

"अश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम्
न्यग्रोधमेकम् दश चिञ्चिणीकान्।
कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।।"

भारतीय संस्कृति आद्यकाल से ही पर्यावरण की उपासक और संरक्षक रही हैं। वर्षभर के अनेक पर्व परम्पराओं एवं उत्सवों में हमारे यहाँ वृक्षरोपण तथा उन्हें पूजने की परम्परा रही है।

हरीतिमा धरा की सौन्दर्याभिव्यक्ति है।
वृक्ष-नदियाँ, झील-सरोवर एवं अन्यान्य प्राकृतिक घटकों द्वारा धरा के सौन्दर्य को सहेज कर रखें। वसुन्धरा को स्वच्छ सन्तुलित और प्रदूषण मुक्त रखना अब हमारी प्राथमिकता बने। 




Comments