उपाय, गोपेश्वर गोपी शिव महापुराण के उपाय
पांचवें दिन की कथा
7 नवंबर 2023
उपाय 01
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं हर हर महादेवयदि कोई जमीन जायदाद के झगड़े, अदालत में भाई-भाई या पति पत्नी का केस या किसी गलत तरीके से कोई आक्षेप लगा कर केस लगा दिया है या कोई प्रशासनिक कार्यवाही चल रही है। तो यह उपाय अवश्य करें।
श्री गोपेश्वर शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन की गुरुजी ने बताया एक अचूक उपाय, आप पूर्ण विश्वास के साथी से करेंगे तो मुझे भरोसा है कि आप अपने कार्य में अवश्य सफल होंगे।
इस उपाय में करना क्या है?
अपने घर के एक लोटे में अपने घर का जल लीजिए, जल के साथ में एक बैल पत्र, एक शमीपत्र, एक दूर्वा अर्थात एक दूब घास, एक कनेर का पुष्प और एक अक्षत अर्थात एक आखा चावल आदि पांच वस्तुएं एकत्रित करें। किसी बिली पत्र के वृक्ष के नीचे जाएं। पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करें। उसका पूजन करें तथा उसी शिवलिंग पर रंगेश्वर महादेव, चंपेश्वर महादेव कुंदकेश्वर महादेव के नाम लेकर और अपनी मनोकामना याद करते हुए, एक-एक कर ये पांचो वस्तुएं शिवलिंग पर अर्पित करें।
इसके उपरांत पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन करें और इन पांचो वस्तुओं को उठाकर अपने घर ले आए और स्वच्छ स्थान पर रख दें, तो 20 दिन के अंदर अंदर 21वें या 22वें दिन में यदि भगवान शिव ने चाहे तो आपका कार्य अवश्य पूर्ण होगा।
★ रंगेश्वर महादेव विजेता के प्रतीक हैं क्योंकि इन्हीं के आशीर्वाद के उपरांत भगवान श्री कृष्ण ने कंस का वध किया था।
(यह उपाय गुरु जी पंडित प्रदीप मिश्रा जी की पांचवें दिन की श्री गोपेश्वर शिव महापुराण कथा से लिया गया है।)
१२:१३
उपाय 02
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं । हर हर महादेव ।
यदि परीक्षा या इंटरव्यू देने जा रहे हो तो
अच्छे से पढ़ाई करो, अच्छी मेहनत करो, दिल से तैयारी करो, तैयारी में रात दिन एक कर दो । जब तुम्हें अपनी मेहनत पर भरोसा हो जाए कि मैंने मेहनत की है । बाबा मुझे उसका फल अवश्य देगा। तब एग्जाम देने जाने से पहले
एक अंतिम काम और करें।
मंदिर में पांच बेलपत्र, लाल तथा पीला चंदन लेकर जाएं।
मंदिर पहुंचकर शिवलिंग की जलहरी पर लाल चंदन की केवल सात बिंदी लगाएं, अब पीला चंदन लें और अशोक सुंदरी के स्थान पर पीले चंदन की केवल पांच बिंदी लगाओ।
अब पांच बेलपत्र लें और भगवान पशुपतिनाथ का नाम लेकर एक करके शिवलिंग पर अर्पित करें। परंतु ध्यान रहे कि इन पांचों बैल पत्रों की डंडिया पंचमुखी दीप की बत्तियां की तरह अलग-अलग पांच दिशाओं में होनी चाहिए।
जब यह काम कर ले तो बेलपत्र के ऊपर अपना हाथ रखकर अर्थात बाबा को बेल पत्रों के साथ स्पर्श करके अपने मन की कामना बोले,
बाबा मैं तेरी शरण में हूं और मुझे विश्वास है कि तू मुझे इस परीक्षा में पास अवश्य कराएगा और मुझे नौकरी अवश्य दिलाएगा।
ऐसा करने के उपरांत आप अपने गंतव्य स्थान की ओर जाएं। बाबा आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेगा।
★ 5 दिशाओं में बेलपत्र की डंडी रखने का उद्देश्य सभी राहों में आने वाली अडचनों को दूर कराना है।
२:३०.१२
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बैल पत्र, शमीपत्र, दूब घास, कनेर और आखा चावल,
रंगेश्वर, चंपेश्वर, कुंदकेश्वर के नाम लेकर बेलपत्री के वृक्ष के नीचे पार्थिव शिवलिंग बनाकर अर्पित करें।
सारे काम बनेंगे।
१२:१३.२
पहले चंदन भगवान भोलेनाथ को अर्पित करें फिर अपने मस्तिष्क पर धारण करने पर अच्छा फलदाई रहेगा।
कुबजा, चंदन और रंगेश्वर महादेव की कहानी थोड़ा जबाब रामकृष्ण कुमार ने में ऐसे फोटो हे एक राशि में
नमृता को खुद के व्यवहार से और बेटी और गाय को अपनी घर के द्वार से भूखा न जाने देना।
सात बार चंदन जलहरी पर, पांच बार पीला चंदन अशोक सुंदरी पर तथा पांच बेलपत्र भगवान भोलेनाथ पर जिनकी डंडिया पांच दिशाओं में करते हुए अर्पित करते हुए उनके ऊपर हाथ रख कर मन की कामना करें व परीक्षा के लिए जय अवश्य सफलता मिलेगी।
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उपाय 03
गांठ गलाने के लिए उपाय
बेलपत्र की डंडी के बिल्कुल पीछे का या अंतिम भाग जो एक मोटी सी गांठ के रूप में होता है । उसे गांठ या डूंठ या ठूंठ कहते हैं। क्या आप जानते हैं कि शंकर भगवान को चढ़े बैल पत्र की गांठ या डूंठ या ठूंठ की मूलता बहुत है।
शंकर भगवान को चढ़े बैल पत्र को उठाकर। उसकी गांठ या डूंठ या ठूंठ तोड़कर हाटकेश्वर महादेव को याद करके उस गांठ या डूंठ या ठूंठ को अशोक सुंदरी के स्थान पर चढ़ाने या छुआने के उपरांत, उसे उठा कर। वही खड़े होकर चबा-चबाकर खाने से शरीर में कैसे भी गाठ हो वह गल जाएगी।
२:३४.१५
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डंडे को हाथ में लेकर भागा को चढ़ाकर
प्रार्थना कर के और
हलवाई के दोस्त सारा सामान देखा होता है लेकिन भोजन में डाल के तुमसे का पत्र के नए लेखा होता जो हम याद रखना होता है और चीता किस भोजन में डाल सके।
संसार के लिस्ट में परमात्मा का नाम नहीं लिखा 3होता मैं याद करना आता है।
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8 नवंबर 2023
बैकुंठ, स्वर्ग पुनः धरती पर भेजा जाता है। कैलाश वासी को नही
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उपाय 04
रोग मुक्त व कार्य सफल के लिए
१:३५.५
गुरुदेव प्रदीप मिश्रा जी ने बताया कि बेलपत्र को हम रोग मुक्ति के लिए या व्यापार वृद्धि के लिए या किसी और कार्य की सिद्धि के लिए किस प्रकार, क्यों और कैसे चढ़ाते हैं।
जब हम रोग मुक्ति के लिए या व्यापार वृद्धि के लिए या किसी और कार्य की सिद्धि के लिए भगवान भोलेनाथ पर बेलपत्र चढ़ाने जाते हैं तो सबसे पहले अशोक सुन्दरी पर बेलपत्र चढ़ाते हैं। अशोक सुंदरी पर जो बैल पत्र चढ़ाते हैं उसकी डंडी उत्तर की ओर होती है अर्थात जिधर की तरफ पानी बहकर जा रहा होता है उधर की तरफ होती है। भगवान भोलेनाथ की पुत्री अशोक सुंदरी बहुत ही दयालु हैं। वे अपने पिताजी के भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
अब दूसरी बेलपत्र भगवान शिव के शिवलिंग पर चढ़ाई जाती है तो उसकी डंडी भी उत्तर की ओर ही रखा जाती है क्यों ?
इस क्यों का जवाब हम बाद में देंगे। अभी आगे का कार्य करते हैं।
अब आती है हमारी जल चढ़ाने की बारी, अब हमें यह जान लेना चाहिए कि भोलेनाथ पर जल किस प्रकार चढ़ाएं और कहां और किस दिशा में खड़े होकर चढ़ाएं।
इसके लिए गुरुजी बताते हैं कि जिस ओर जलहरी जा रही है अर्थात जिधर की तरफ पानी बहकर जा रहा होता है । हमें उस बहते हुए जल की ओर देखना है तो आप समझ गए होंगे कि हमको किधर बैठना या खड़ा होना होगा? हमें दक्षिण की ओर अर्थात दक्षिण में बैठना या खड़ा होना होगा।
दोनों बेलपत्र चढ़ा चुके हैं अब आई जल चढ़ाने की बारी तो हमें दक्षिण दिशा में खड़े होकर अपने मन की कामना करके भगवान भोलेनाथ पर धीरे-धीरे जल चढ़ाते हैं और जब कामना युक्त यह जल अशोक सुंदरी वाले स्थान से होकर बहता है। तो अशोक सुंदरी हम पर दया करके अपने पिता से हमारी कामना को पूरा करने की प्रार्थना करती है ।
जब एक पुत्री अपने पिता से कामना करती है तो उसका पिता कैसे नहीं सुनेगा। तब भगवान भोलेनाथ अपने तीसरे नेत्र को खोलकर अपनी पुत्री अशोक सुंदरी को देखते हैं , अपनी पुत्री अशोक सुंदरी की बात को रखते हुए, उसके आग्रह को जानकर, भगवान भोलेनाथ उस जल में जल चढ़ाने वाले की इच्छा का फल प्रदान कर देते या छोड़ देते हैं।
तो इस प्रकार भगवान शिव के तीसरे नेत्र की शक्ति दक्षिण से उत्तर की ओर बह रहे जल में आ जाती है। इस प्रकार जल भगवान भोलेनाथ के तीसरे नेत्र की शक्ति पाकर और भी शक्तिशाली हो जाता है। इधर हम जल चढ़ा रहे हैं और उधर दूसरी ओर जलहरी से नीचे गिरने वाला जल किसी छोटे पात्र में एकत्रित कर लेते हैं।
अब यदि भगवान भोलेनाथ के तीसरे नेत्र की शक्ति युक्त इस जल का आचमन किया जाए या फिर किसी बर्तन में झेल कर घर ले जाया जाए तो इस जल की शक्ति को हम किसी बीमार व्यक्ति को उसके असाध्य रोग से मुक्ति के लिए या व्यापारी स्थान या घर में छिड़क कर व्यापार वृद्धि भैया घर की पॉजिटिविटी के लिए या किसी अन्य कार्य की सिद्धि के लिए उपयोग में ला सकते हैं।
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पार्वती और शिव संवाद
इसका भी प्रमाण मिलता है कि एक बार पार्वती जी ने भगवान भोलेनाथ से पूछा, " हे भोलेनाथ ! भक्तजन आपकी पूजा या आराधना करने के लिए आते हैं और आप हैं कि अपने नेत्रों को बंद करके बैठे रहते हैं । एक स्वार्थी की तरह अपनी तप साधना में डूबे रहते हैं। आप अपने नेत्र खोल कर अपने भक्तों को देखते क्यों नहीं हो?"
तब भगवान भोलेनाथ पार्वती से कहते हैं, " हे पार्वती ! तुमने ठीक कहा, मैं अपने भक्तों को परेशानी में नहीं देख सकता इसीलिए अपने नेत्र बंद करके समाधि में लीन रहता हूं। जब मेरा कोई भक्त सच्चे मन से मेरे पास आकर अपनी इच्छा रखता है; तो अपने भक्त की इच्छा पूरी करने के लिए मैं अपने एक नहीं, दो नहीं, पार्वती ! मैं अपने भक्त के कष्ट मिटाने के लिए अपने तीनों नेत्र खोल देता हूं।"
पार्वती ने पूछा, " यह कैसे संभव है कि आपकी कृपा सभी को प्राप्त हो जाए।"
तब भगवान भोलेनाथ बोले, " सुनो पार्वती ! मेरा कोई भक्त एक बेलपत्र मेरी पुत्री अशोक सुंदरी को समर्पित करें और एक मुझे समर्पित करें तथा दोनों की डंडी उत्तर की ओर रखते हुए और स्वयं शिवलिंग के दक्षिण में खड़े होकर जल चढ़ाएं तो उसके जल में मेरे तीसरे नेत्र की शक्ति समाहित हो जायगी और वह उसके द्वारा अपनी सभी मनो कामनाओं को पूर्ण करने में सक्षम होगा।"
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क्या ऐसा संभव है कि भगवान शिव का तीसरा नेत्र खुले और उसे कुछ भी न हो ?
१:४९:२०
कहते हैं कि भगवान शिव का तीसरा नेत्र खुलता है तो सामने वाला भस्म में हो जाता है । इसका एक उदाहरण है कामदेव का भस्म में होना । परंतु एक भक्त ऐसा भी है जिसके सामने भगवान शिव का तीसरा नेत्र खुला और उसे कुछ भी नहीं हुआ। जानते हैं वह कौन है ? वह है राधा रानी की प्रिय सखी ललिता।
एक बार की बात है की पार्वती जी प्रदोष काल के उपरांत कहीं चली जाती है तो यह बात जानने के लिए भगवान भोलेनाथ भगवान विष्णु के पास बैकुंठ पहुंचे तो उन्होंने भी कहा कि हमारी लक्ष्मी जी लक्ष्मी जी की पता नहीं कहां चली जाती है तुम्हें दोनों मिलकर ब्रह्मा जी के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा कि हमारी ब्राह्मणी भी प्रदोष काल के उपरांत में जाने कहां चली जाती है टीना मिलकर हिंदू के पास पहुंचे तो उन्होंने इंद्र से पूछा की ब्राह्मणी इंद्राणी से पूछो कि हमारी तीनों की पत्नियों कहां जाती है वह पता लगे तो इंद्र बोले महाराज चौथे दिन हो गए हमारी इंद्राणी तो वापस ही नहीं आई।
तब भगवान भोलेनाथ बोले यह काम अब मुझे ही करना होगा तभी पार्वती जी को ढूंढने की निकली और ढूंढते ढूंढते सफलता में आ गए तो पता चला कि यहां रात हो रहा है उसे रात में एकमात्र पुरुष है और बाकी सब बढ़िया है भगवान भोलेनाथ समझ गए यह सब मेरे प्रभु की लीला है बिहार रास्ता जा रहे हैं और उसी रात में शामिल होने के लिए पार्वती ही नहीं संपूर्ण ब्रह्मांड की महिलाएं एकत्रित हो रही है।
भगवान भोलेनाथ ने सोचा कि चलो जाने हम भी इसमें शामिल हो जाए जैसे हो इसमें जाने लगे बुधवार पर कड़ी से ललित ने उनका हाथ पकड़ लिया और उन्हें वापस रोक दिया। ललित ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं थी इस बार भगवान भोलेनाथ को क्रोध आ गया और उन्होंने अपनी तस्वीर नेत्र को खोलकर ललित को देखा परंतु ललित पर कोई ऐसा नहीं हुआ यह देखकर भगवान भोलेनाथ बड़े आश्चर्य की आशा कैसे हुआ।
तब उन्होंने ध्यान लगा कर देखा की है ललित है कौन दोनों ने पाया कि यह विशोक ग्वाल की पुत्री है। जिसको उसकी पत्नी शारदा ने अपने कोख से जन्म दिया। वहीं विशोक जिसके बहुत समय तक कोई संतान नहीं हुई तो तो लोग हैं नेता ने देने लगे शारदा को ब्लॉक बाज पुकारने लगे। जापानी सुन सुन कर दोनों पक गए और परेशान हो गए तब यह मेरे मंदिर में आकर रुक गए।
तब इन पति-पत्नी ने मेरी बहुत दिनों तक मेरी सेवा कि और मेरे मंदिर में मुझपर जल चढ़ाया और मुझे भजाते रहे। शारदा भगवान भोलेनाथ से संतान के लिए रोजाना प्रार्थना कर दी। तब तुम दया करके मैंने एक साधु का रूप बनाया ठीक उसे वक्त जब भी सुख मेरी आराधना कर रहा था तो मैं जल चढ़ाने लगा इस जल की एक बूंद विश्व के मुंह में चली गई और उसे बूंद के प्रभाव से कुछ समय बाद शारदा गर्भवती और उसने जिसे संतान को जन्म दिया वह यही ललिता है।
यह मेरी पुत्री है जैसे मेरा दूसरा नेता किस प्रकार नुकसान पहुंचा सकता है। इस प्रकार ललिता को भगवान शिव का तीसरा नेत्र विवाह भाषण नहीं कर पाया। भगवान शिव का स्पर्श केवल वही कर सकता है जो पूर्व से भगवान का परिचित हो और भगवान उसे परिचित हो।
9 नवंबर 2023
सभी मंदिरों में जब नारियल चढ़ाया जाता है तो उसे फोड़ा जाता है लेकिन भगवान भोलेनाथ का मंदिर ऐसा है जिसमें नारियल पूरा का पूरा चढ़ाया जाता है उसे थड़ा नहीं जाता।
शिव की कथा कहते हैं की मुझे अधिक चावल चढ़ाने की आवश्यकता नहीं है मुझे एक ही जवाब मुझे एक ही चावल चढ़ाव परंतु अखंडित नहीं होना चाहिए वह आखा चावल होना चाहिए।
ऐसे इस बात का पिक्चर प्रतीक है कि भगवान भोलेनाथ को हमारा संपूर्ण समर्पण चाहिए आधा अधूरा नहीं। यदि हम अपने आप को संपूर्ण समर्पित कर देंगे तो वह हमें स्वीकार कर लेगा।
४६:०४
उपाय 05
एकांतेश्वर महादेव की महिमा
एकांत स्थल में विराजमान शिवलिंग को एकांतेश्वर महादेव कहा जाता है। अर्थात नितांत एकांत में बैठे हुए शिव ही एकांतेश्वर महादेव है। कहते हैं संत जन इसी प्रकार की शिवलिंग का पूजन किया करते थे । इस प्रकार की शिवलिंग में आकर शक्ति विराजमान होती है। इसका मुख्य उदाहरण माता पार्वती जी द्वारा अकेले में पूजन करना है। इस प्रकार रावण का भी अकेले में पूजन करना है। ये उदाहरण शिवलिंग के एकांतेश्वर होने का प्रमाण है।
अधिकतर एकांतेश्वर शिवलिंग वनों में या फिर सड़कों के किनारे मिल जाते हैं। अगर ऐसा हो कि आपके आसपास एकांतेश्वर शिवलिंग है तो आप फूल नहीं चला सके तो वहां के आसपास के वृक्ष से कुछ पत्थर तोड़कर उन्हें जरूर अर्पित कर दे।
एकांतेश्वर महादेव पर चढ़ाया गया एक पत्ता या चढ़ाई गई जल की एक बूंद या एक बार का दर्शन हमारी 71 पीढ़ियों तक चलता है और उसका पुण्य भी 71 पीढ़ियों पर जाता है। यदि आपके चल दिए किसी काम से जाते हुए आपकी निगाह में आ जाए तो उनकी सेवा अवश्य कर दो।
एकांतेश्वर महादेव के उपाय
एकांतेश्वर उपाय 01
१:५५.१०
यदि बच्चा मंदबुद्धि हो या शरीर से कमजोर हो तो
यह जो उपाय हम आपको बताने जा रहे हैं यह सोम अष्टमी को या प्रदोष के दिन या 12 महीनों में किसी भी दिन आने वाली शिवरात्रि को किया जाए तो ज्यादा असरदार होता है।
यदि बच्चा मंदबुद्धि हो या शरीर से कमजोर हो तो गाय का दूध लेकर उसका दही बना लो । यदि आपके स्मरण में एकांत का शिवलिंग अर्थात एकांतेश्वर हों तो वहां पांच बेलपत्र और वही दही लेकर जाए। पहले पांच बेलपत्र अर्पित करें फिर दही से अभिषेक करें उसके उपरांत दही और बेलपत्र को किसी पत्र में एकत्रित कर ले। इसके ऊपर शिवलिंग का को अच्छे से स्नान कराकर पुनः चंदन आदि से पूजन करकर वापिस आ जाएं।
अब जो बेल पत्र लेकर आए हैं उसका चूर्ण बनाकर गोली बना ले ताकि बच्चा उसे आसानी से सटक या गटक ले और जो दही हम उतारकर लेकर आए हैं। उसे दिन में तीन बार बच्चों को चटाएं।
तीन तीन या चार प्रदोष तैयार फिर 3 या 4 शिवरात्रि या फिर तीन या चार सम अष्टमी को कर लिया जाए तो आप देखेंगे कि उसके शरीर में विकास होना शुरू हो गया है। आपको पहले और वर्तमान अवस्था में अंतर दिखाई देना शुरू हो जाएगा।
एकांतेश्वर महादेव के उपाय
एकांतेश्वर उपाय 02
२:१५.१०
यदि कोई पैसा लेकर चला गया उसके लिए और यदि आपके ऊपर बहुत अधिक कर रहा है तो उसके लिए भी उपाय करें।
मान लो अपने किसी को कुछ पैसा दिया या व्यापार में पैसा लगाया और अब वह वापस नहीं आ रहा है। मान लो कोई आपका पैसा ले गया और आपने एड़ी चोटी का जोर लगा लिया लेकिन वह पैसा नहीं दे रहा है।
क्या करें ?
पांच बेलपत्र, 5 श्वेत पुष्प अर्थात सफेद फूल और पांच ह्यादरी अक्षत अर्थात हल्दी से रंगे हुए चावल लेकर यदि एकांतेश्वर शिवलिंग आपके पास है तब आप उन्हें एकांतेश्वर शिवलिंग के पास जाएं। यदि वह पास में न हो तो अर्थात एकांतेश्वर शिवलिंग आपको न मिले तो किसी एकांत स्थल पर जाकर
12 महीनों में से किसी भी दिन आने वाली शिवरात्रि को मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण करें और उसका अभिषेक पूजन करने के बाद बेलपत्र सफेद पुष्प और हल्दी चावल भोले बाबा के शिवलिंग पर एक एक कर अर्पित करें। शिवलिंग पर उनके अर्पित करने का भी एक तरीका है सबसे पहले अक्षत अर्थात ह्यादरी अक्षत अर्थात हल्दी से रंगे हुए चावल उसके बाद श्वेत पुष्प और अंत में बेलपत्र अर्पित करें। पोंचो के साथ नहीं चलेंगे यदि हल्दी का चावल भी चलेगा तो एक कर ही पड़ेगा एक साथ नहीं। हर बार आपको अपनी कामना बोलनी जो पैसे नहीं दे रहा है उसका नाम लेकर बताना है और आप पर कर दिया जाता हो गया तो उसके बारे में भी बताना।
यदि आप एकांतेश्वर भगवान का पूजन कर रहे हैं तो पूजन करने के उपरांत एक चावल एक सफेद पुष्प और एक बेल पत्र अपनी झोली में बांध कर ले आए। यदि आप पार्टी हो एक कांति कर का निर्माण कर रहे हैं निर्माण कर पूजन कर रहे हैं तो एक चावल एक सफेद पुष्प और एक बेल पत्र अपनी झोली में बांध कर लेने के थोड़ी देर बाद शिवलिंग का विसर्जन कर दें। पहले से स्पथापित एकांतेश्वर के विसर्जन की जरूरत नहीं होती।
यदि घुटने में गैप आ रीड की हड्डी में गैप आ जाए आप चलने फिरने में परेशान हो जाए और डॉक्टर ऑपरेशन की बोले तो उससे पहले आप एकांतेश्वर महादेव का पूजन अवश्य करें।
#विशेष
देवदीपावली
माता लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्ति के लिए रसोई मे सात घी के दीप लगाए, सात पुष्प रसोई मे पानी के घड़े के पास रखे, दीप जब ठंडे हो जाए तो सातो पुष्पों को शिवालय ले जा कर शिवलिंग पर अर्पित कर पूजन करे, उन पुष्पों मे से एक पुष्प वापस मांग कर ले आये व अपने धन स्थान पर रखे।
सांय के समय पांच स्थानों पर दीप लगाये, घर के मुख्य द्वार पर, तुलसी जी पर, नदी तलब कुआँ के तट पर, वृक्ष के नीचे (बेलपत्र, आँवला, पीपल, वट) व घर के सामने चौक पर।
पान के पत्ते पर शहद की एक बूंद लगा कर माँ लक्ष्मी जी को भोग लगाए व साथ ही किसी एक पुष्प पर शहद की एक बूंद लगा शिवलिंग पर अर्पित करे।
जय महादेव
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