Day - 03 ॥ श्री तप शिवमहापुराण कथा ॥ पूज्य पंडित प्रदीप जी मिश्रा ॥ मैनपुरी, UP || 24 जुलाई 2023
Day - 03 ॥ श्री तप शिवमहापुराण कथा ॥ पूज्य पंडित प्रदीप जी मिश्रा ॥ मैनपुरी, UP || 24 जुलाई 2023
राजा नल और दमयंती चरित्र
विदर्भ के राजा भीम की पुत्री थी दमयंती और निषादराज वीरसेन के पुत्र थे राजा नल। दमयंती ने कभी राजा नल को नहीं देखा था और न हीं राजा नल ने कभी दमयंती को देखा था। कभी नहीं देखा।
जब भी कोई सुंदरता की बात करता तो वह दमयंती की सुंदरता की बात करता क्योंकि वह भी इतनी सुंदर इसी प्रकार दमयंती के सामने जो भी सुंदरता की बात करता तो वह है राजा नल की सुंदरता की बात करता क्योंकि वह भी जमीन थी की तरह ही अपार सुंदर थे।
दोनों के हृदय में एक दूसरे के प्रति प्रेम जाग्रत हो गया। राजा बजनी दमयंती तो उसकी सूचना देवताओं की देवताओं को दमयंती को वरुण देव आदि देव इंद्र देव यमराज चाहते थे जब भी दमयंती राज आनंद पेपर चाहती थी। तब चारों ने विचार किया कि दमोह की किस जाती है चारों में जांगिया की नल को दमयंती चाहते इसलिए चारों राजा नल का रूप धारण करके चल दिए।
राजा नल भी आ गए और वह भी सभा में बैठ गए। अब अब दमयंती किस को माला पहनाए, पांचों लोग एक से दिखाई दे रहे हैं से नल इनमें से कौन से हैं।
पिताजी के बार-बार आग्रह किसी को माला नहीं पहना पाई तो वे अपने पिताजी से बोली।
पिताजी राजा नल के समान यहां ५ बैठे हुए हैं । मेरे साथ धर्म संकट पैदा हो गया है। आप ही बताओ मैं क्या करूं।
तो बेटी तुझे इस धर्म संकट से केवल वही बचा सकता है तू जिसकी आराधना करती है, जिसकी तू सेवा करती है। उससे याद कर वह ही समझा सकते हैं।
पिता के समझाने पर दमयंती ने भगवान भोलेनाथ को याद किया।
हे शंभू हे भोलेनाथ हे त्रिकालदर्शी मुझे यह बताइए यह जो 5 नाल बैठे हैं उनमें से असली नल कौन है?
इस पर भगवान भोलेनाथ ने दमयंती को ऐसी बुद्धि दे दी कि उसने राजा नल को पहचान लिया उसके गले में वरमाला डाल दी।
दोनों का विवाह हो गया और दमयंती अपनी ससुराल पहुंच गई। नल का छोटा भाई था पुष्कर, जब उसने देखा कि बड़े भाई को सबसे सुंदर स्त्री मिल गई जो बहुत ही ज्ञानवान और सभी प्रकार से समृद्ध है।
इससे पुष्कर नल से ईर्ष्या करने लगा। गया अपने बड़े भाई से बोला की मुझे तुम्हारे साथ द्यूत खेलना है। वह जबरदस्ती हाथ पकड़ कर ले गया और जुआ खेलने लगा के लिए ललकार ने लगा।
नल बोला मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूं और तुम्हारे साथ द्यूत खेलना मुझे शोभा नहीं देगा जाओ और अपने साथियों के साथ खेलो। वह बार-बार नल को ललकारने लगा।
और नल से चौसर में उसने उसका राज्य व सबकुछ जीत लिया।
दुख, कष्ट और परीक्षा की घड़ी में हमें सबसे पहले परमात्मा को याद करना चाहिए जब परेशानी सामने आई तो उसे याद करने से क्या फायदा।
पत्र १
पंकज राठौर इटावा उत्तर प्रदेश से
पत्र २
पत्र ३
सोनू गर्ग का एक प्रश्न
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